वक्फ बिल के खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, नमाज में काली पट्टी बांधने की अपील

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रमजान के आखिरी जुमे की नमाज में काली पट्टी बांधकर विरोध जताने की अपील की है। बोर्डने देशभर के मुसलमानों से अनुरोध किया है कि वे वक्फ बिल के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपना असंतोष व्यक्त करें। इस संबंध में AIMPLB नेएक वीडियो और ट्वीट जारी कर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का आग्रह किया है। इससे पहले, दिल्ली में भी वक्फ बिल के खिलाफ एक बड़े प्रदर्शन काआयोजन किया गया था। काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने की अपीलAIMPLB से जुड़े कई मौलवियों ने मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया है कि वे अलविदा जुमे की नमाज के दौरान दाईं बांह पर काली पट्टी बांधें। इसकेसाथ ही, उन्होंने नमाज के दौरान काली पट्टी पहने हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने की भी अपील की है। इससे पहले, बिल के विरोध मेंआम मुसलमानों की राय दर्ज कराने का अभियान भी चलाया गया था। वक्फ बिल को लेकर AIMPLB का बयानAIMPLB के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने इस मुद्दे पर एक पत्र जारी किया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और पटना में हुए विरोधप्रदर्शनों के कारण भाजपा की सहयोगी पार्टियों में हलचल मच गई है। इसी कड़ी में, 29 मार्च को विजयवाड़ा में भी एक बड़े प्रदर्शन की योजना बनाईजा रही है। मौलाना रहमानी के अनुसार, प्रस्तावित वक्फ संशोधन बिल एक गहरी साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को उनकी धार्मिक औरसामाजिक संपत्तियों से बेदखल करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह बिल पारित हुआ तो सैकड़ों मस्जिदें, ईदगाहें, मदरसे, दरगाहें, कब्रिस्तानऔर चैरिटी संस्थाएं प्रभावित होंगी। उन्होंने देशभर के मुसलमानों से इस बिल का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया। सरकार का पक्ष और मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रियासरकार का दावा है कि प्रस्तावित वक्फ बिल से मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा होगी और वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे खत्म किए जाएंगे।हालांकि, मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग इसे धार्मिक मामलों में सरकारी दखल मान रहा है और इस संशोधन का विरोध कर रहा है। बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में विरोध प्रदर्शनबिहार के बेगूसराय में अलविदा जुम्मा की नमाज के दौरान मुस्लिम समुदाय ने अनोखे तरीके से विरोध प्रकट किया। नमाजियों ने काली पट्टी बांधकरनमाज अदा की और तख्तियों के जरिए वक्फ बिल को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे इस बिल को किसी भी कीमत परस्वीकार नहीं करेंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो जेल भरने को भी तैयार हैं। इसी तरह, मुजफ्फरपुर में भी AIMPLB की अपील पर अमल किया गया। वहां के मुस्लिम समुदाय ने हाथों में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा कीऔर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय मुस्लिम नेताओं ने इसे संविधान विरोधी कदम बताया और केंद्र सरकार से बिल को तत्काल वापस लेनेकी मांग की।
ममता बनर्जी के लंदन दौरे में विरोध प्रदर्शन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हंगामा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने लंदन दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। उनके ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के केलॉगकॉलेज में दिए गए भाषण के दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के छात्र नेताओं ने विरोध किया और ‘गो बैक’ के नारे लगाए।प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए, जिससे कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न हुई। छात्रों के विरोध पर ममता बनर्जी का जवाबजब छात्रों ने उनसे आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज के मुद्दे पर जवाब मांगा, तो ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह मामला अदालत में लंबित है औरकेंद्र सरकार के अधीन है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मंच को राजनीति का अड्डा न बनाने की अपील की और कहा, “आप बंगाल जाइए और अपनी पार्टीको मजबूत कीजिए।” इसके साथ ही, उन्होंने एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि उन्हें मारने की कोशिश की गई थी और यह कोई नई बात नहीं है। दर्शकों के तीखे सवाल और ममता की प्रतिक्रियाममता बनर्जी ने अपने भाषण में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। इस पर एक दर्शक ने विशेष निवेशपरियोजनाओं के नाम बताने को कहा। जवाब में ममता ने कहा, “बहुत सारे हैं…” लेकिन इससे पहले कि वह विस्तार से बता पातीं, अन्य दर्शकों ने उसव्यक्ति को चुप रहने को कह दिया, यह तर्क देते हुए कि यह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है। ‘मुझे बोलने दें, संस्थान का अपमान न करें’ममता बनर्जी ने विरोध कर रहे लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप मुझे बोलनेदें। आप मेरा नहीं, बल्कि अपने संस्थान का अपमान कर रहे हैं। ये लोग जहां भी मैं जाती हूं, वहां ऐसा ही करते हैं। मैं हर धर्म का सम्मान करती हूं – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी का। केवल एक जाति का नाम मत लीजिए, सभी का नाम लीजिए।” ‘सिर्फ जनता के सामने सिर झुकाऊंगी’जब कुछ लोगों ने ‘गो अवे’ के नारे लगाए, तो ममता बनर्जी ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, “दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ता। दीदी साल में दोबार आएगी और रॉयल बंगाल टाइगर की तरह लड़ेगी।” उन्होंने आगे कहा, “अगर आप कहें तो मैं आपके कपड़े धो दूंगी, आपके लिए खाना बना दूंगी।लेकिन अगर कोई मुझे झुकाने की कोशिश करेगा या मजबूर करेगा, तो मैं नहीं झुकूंगी। मैं केवल जनता के सामने सिर झुकाऊंगी।” SFI-UK ने विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी लीइस विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया – यूके (SFI-UK) ने ली है। संगठन ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट कर लिखा, “हमपश्चिम बंगाल के छात्रों और श्रमिक वर्ग के समर्थन में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक शासन के खिलाफआवाज उठा रहे हैं।” राजनीतिक बहस फिर तेजइस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। ममता बनर्जी की विदेश यात्राओं के दौरान लगातार हो रहे विरोधप्रदर्शनों ने एक नई बहस छेड़ दी है कि उनके शासन और नीतियों को लेकर पश्चिम बंगाल में कितना असंतोष है। अब यह देखना दिलचस्प होगा किइस मुद्दे पर उनकी सरकार और विपक्षी दलों की क्या प्रतिक्रिया आती है।
मद्रास हाई कोर्ट पहुंचे कॉमेडियन कामरा, जानिए क्या कहा?

मद्रास हाई कोर्ट पहुंचे कुणाल कामरामहाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर एक शो के दौरान की गई टिप्पणी के बाद विवादों में घिरे स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने गिरफ्तारीसे बचने के लिए मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट में आशंका जताई कि मुंबई पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकतीहै। अपनी याचिका में उन्होंने खुद को तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले का निवासी बताया है और कहा कि वह फिलहाल पुदुचेरी में रह रहे हैं।विवाद की शुरुआत: कॉमेडी शो में की गई पैरोडीयह विवाद मुंबई के खार स्थित हैबिटेट कॉमेडी क्लब में हुए कुणाल कामरा के एक हालिया शो से शुरू हुआ। शो के दौरान कामरा ने बॉलीवुड फिल्मदिल तो पागल है के एक लोकप्रिय गाने की पैरोडी करते हुए एकनाथ शिंदे पर व्यंग्य किया था। इस पैरोडी में उन्होंने ‘गद्दार’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे 2022 में शिवसेना से शिंदे की बगावत और महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) सरकार को गिराने से जोड़कर देखा गया। इस वीडियो के वायरलहोते ही शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई और उन्होंने खार के हबीटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ कर दी, जहां यह शो रिकॉर्ड कियागया था। कानूनी कार्रवाई: मुंबई पुलिस की पूछताछ और समनशिवसेना विधायक मुरजी पटेल की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने कुणाल कामरा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इस मामले में पुलिस ने उन्हें दोबार पूछताछ के लिए समन भेजा और 31 मार्च तक पेश होने के लिए कहा गया। हालांकि, कामरा ने अब तक पुलिस के सामने पेश होने से परहेजकिया है। विशेषाधिकार हनन का नोटिसइस विवाद के चलते महाराष्ट्र विधान परिषद में भी मामला उठा। बीजेपी के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने कामरा के खिलाफ विशेषाधिकारहनन का नोटिस पेश किया, जिसे विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने स्वीकार कर लिया है। यह मामला अब विधान परिषद की विशेषाधिकारसमिति को भेजा गया है, जो आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस नोटिस में उद्धव ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे का भी नाम शामिल किया गया है। धमकियां और सुरक्षा चिंताएंकुणाल कामरा ने दावा किया है कि इस विवाद के बाद उन्हें 500 से अधिक धमकी भरे कॉल आ चुके हैं, जिनमें कुछ लोगों ने उन्हें जान से मारने और”टुकड़े-टुकड़े” करने की धमकी दी है। इन सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की है। जीरो एफआईआर और ट्रांजिट अग्रिम जमानत क्या होती है?जीरो एफआईआरयह ऐसी प्राथमिकी होती है जिसे किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही अपराध उस क्षेत्र में हुआ हो या नहीं। इसे बिना किसीक्रम संख्या के दर्ज किया जाता है और बाद में संबंधित थाने को ट्रांसफर कर दिया जाता है। ट्रांजिट अग्रिम जमानत: यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य में है और उसे गिरफ्तारी का डर है, तो वह उस राज्य की हाई कोर्ट या सेशन कोर्ट में ट्रांजिटअग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर सकता है। इससे उसे अपने गृहराज्य जाकर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने का समय मिल जाता है। न्यायिक प्रक्रिया और आगे की राहअब यह देखना होगा कि मद्रास हाई कोर्ट कामरा की याचिका पर क्या फैसला सुनाता है। अगर उन्हें ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिलती है, तो वे मुंबईजाकर वहां की अदालत में अपनी जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी के नेताओं की नाराजगी को देखते हुएइस मामले के राजनीतिक रंग लेने की भी संभावना है।
जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर,केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश को स्वीकार करते हुए जस्टिस यशवंत वर्मा के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। अब वे दिल्लीहाईकोर्ट से स्थानांतरित होकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यभार संभालेंगे, जो उनका मूल कार्यक्षेत्र भी है। यह निर्णय एक विवाद के बीच आया, जिसमेंउनके आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की खबर सामने आई थी। इस घटना के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश(CJI) संजीव खन्ना ने 22 मार्च को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक समिति का गठन किया। आरोप था कि 14 मार्च कोजस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने स्टोर रूम में भारी मात्रा में करेंसी नोट बरामद किए थे, जिनमें से कईनोट आग की चपेट में आकर जल चुके थे। इस प्रकरण ने न्यायपालिका और प्रशासन के बीच गंभीर चर्चा को जन्म दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, हिमाचल प्रदेशहाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. एस. संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अनु शिवरामन शामिल हैं। यह जांच संविधान केतहत महाभियोग की प्रक्रिया से अलग है और इसका उद्देश्य इस मामले की गहन पड़ताल करना है। जस्टिस वर्मा के अलावा, दिल्ली हाईकोर्ट के एकअन्य न्यायाधीश, जस्टिस चंद्रधारी सिंह का भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरण कर दिया गया है। 56 वर्षीय जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) और मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबीकी डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 1992 में अधिवक्ता के रूप में अपनी कानूनी यात्रा शुरू की और विभिन्न संवैधानिक, श्रम, औद्योगिक, कॉर्पोरेट औरकराधान कानूनों में विशेषज्ञता हासिल की। अपने करियर के दौरान, उन्होंने 2006 से हाईकोर्ट के विशेष वकील के रूप में कार्य किया और 2012-13 में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख स्थायी अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं। 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया, और 13 अक्टूबर 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया। इसके बाद 1 फरवरी 2016 को उन्हें स्थायी जज के रूप मेंशपथ दिलाई गई। उनका ट्रांसफर ऐसे समय में हुआ है जब न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई चर्चाएं हो रही हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा किआंतरिक जांच समिति इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या कोई कानूनी कार्रवाई की जाती है। इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका कीनिष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गहन चर्चा हो रही है।
प्रियंका गांधी ने एमएएमओ कॉलेज के नव निर्मित ग्राउंड का किया उद्घाटन, छात्रों के समग्र विकास पर दिया जोर

तिरुवंबाड़ी, केरल: कांग्रेस महासचिव एवं वायनाड सांसद श्रीमती प्रियंका गांधी ने तिरुवंबाड़ी विधानसभा क्षेत्र के मनासेरी, मुक्कम स्थित एमएएमओकॉलेज के नव निर्मित ग्राउंड का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय नेता, छात्र और कॉलेज प्रशासन के सदस्यउपस्थित रहे। छात्रों के लिए खेल सुविधाओं का विस्तारएमएएमओ कॉलेज में नव निर्मित यह ग्राउंड छात्रों के खेल और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया है। उद्घाटन समारोह केदौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि खेल और शिक्षा का संतुलित विकास छात्रों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कॉलेज प्रशासन को इसआधुनिक खेल मैदान के निर्माण के लिए बधाई दी और आशा जताई कि यह सुविधा छात्रों को उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायकहोगी। प्रियंका गांधी का संबोधनइस मौके पर प्रियंका गांधी ने स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से शिक्षा और युवाओं के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध रही है।उन्होंने कहा कि छात्रों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंनेकेंद्र और राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे शिक्षा और खेल सुविधाओं में निवेश बढ़ाएं ताकि युवाओं को उनके सपनों को साकार करने के लिएउचित मंच मिल सके। स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रियाकार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और स्थानीय विधायक भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रियंका गांधी का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह की पहलसे युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे। छात्रों में उत्साहकॉलेज के छात्रों ने प्रियंका गांधी के आगमन पर खुशी जाहिर की और कहा कि नई खेल सुविधाओं से उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अभ्यास का अवसरमिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस ग्राउंड का उपयोग विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा।यह उद्घाटन समारोह कॉलेज और स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे शिक्षा और खेल को लेकर नईसंभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
उत्तर भारत में ‘हर घर नंदिनी’ अभियान की शुरुआत, अब यूपी समेत कई राज्यों में मिलेगा शुद्ध दूध

नई दिल्ली, 27 मार्च 2025 – कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने अपने लोकप्रिय डेयरी ब्रांड ‘नंदिनी’ को उत्तर भारत में विस्तार देने की दिशा में बड़ाकदम उठाया है। ‘हर घर नंदिनी’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हरियाणा में नंदिनी ब्रांड के शुद्ध गाय के दूध और अन्य दुग्धउत्पादों की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। इस पहल की शुरुआत ताजमहल नगरी आगरा से हुई, जहां ‘दूध महल’ नाम से नंदिनी का पहलाएक्सक्लूसिव मिल्क पार्लर खोला गया है। किफायती दाम पर दक्षिण भारतीय दूध की आपूर्तिनंदिनी ब्रांड के उत्तर भारत में विस्तार को लेकर दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में डिस्ट्रिब्यूटर मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मौकेपर नंदिनी नॉर्थ इंडिया के स्ट्रैटेजिक हेड अमित सिंह ने बताया कि कर्नाटक के मंड्या जिले से शुद्ध गाय का दूध उत्तर भारत लाकर उपभोक्ताओं कोसुलभ दामों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह दूध उच्च गुणवत्ता वाला है और इसकी शुद्धता को बनाए रखने के लिए कठोरमानकों का पालन किया जाता है। हाथरस और रोहतक में स्थापित हुए प्लांटउत्तर भारत में नंदिनी दूध की पैकेजिंग और वितरण के लिए उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी और हरियाणा के रोहतक में प्लांट स्थापित किए गएहैं। हाथरस प्लांट की प्रतिदिन की क्षमता 1.50 लाख लीटर है, जबकि रोहतक प्लांट में प्रतिदिन 1.0 लाख लीटर दूध की पैकेजिंग की जा रही है।इन संयंत्रों के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। दूध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यानअमित सिंह ने बताया कि नंदिनी दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘मेथिलीन ब्लू रिडक्शन टेस्ट’ (MBRT) का उपयोग किया जाता है। यहपरीक्षण दूध की ताजगी और उसमें मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा का मूल्यांकन करता है। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य तापमान पर यह दूध पांच सेछह घंटे तक बिना फटे रह सकता है, जिससे इसकी उच्च गुणवत्ता का प्रमाण मिलता है। वैश्विक स्तर पर नंदिनी का विस्तारनंदिनी ब्रांड केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि 25 से अधिक देशों में अपने डेयरी उत्पादों का निर्यात कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनीउपस्थिति को मजबूत करने के लिए, नंदिनी ने हाल ही में स्कॉटलैंड और आयरलैंड की क्रिकेट टीमों को प्रायोजित किया था। इसके अलावा, इंडियनसुपर लीग (ISL) फुटबॉल टूर्नामेंट में भी यह प्रमुख ब्रांड भागीदार के रूप में शामिल है। उत्तर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बड़ी सौगात उत्तर भारत में नंदिनी दूध की उपलब्धता से उपभोक्ताओं को शुद्ध और किफायती दुग्ध उत्पाद मिल सकेंगे। ‘हर घर नंदिनी’ अभियान के तहत, KMF का लक्ष्य है कि दक्षिण भारत के पारंपरिक और शुद्ध दूध उत्पादों को उत्तर भारत के उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।
दिल्ली भाजपा का केजरीवाल सरकार पर आरोप – दलितों और गरीबों को योजनाओं के नाम पर किया गुमराह

नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर दलितों और गरीबों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करनेका आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई आकर्षक योजनाओं की घोषणा तो की, लेकिन इनके लिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहींकिया गया।योजनाओं में बजट आवंटन और खर्च में बड़ा अंतरवीरेन्द्र सचदेवा ने दावा किया कि 2022-23 में ‘दलित प्रतिभा योजना’ के तहत 70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन इसयोजना पर एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। इसी तरह, 2020-21 से 2023-24 के बीच अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और गरीबों के लिए 250 करोड़ रुपयेका बजट निर्धारित किया गया, लेकिन व्यय मात्र 4.2 करोड़ रुपये ही हुआ।मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना में भी बड़ी गड़बड़ीभाजपा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के दावों के बावजूद, ‘मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना’ के तहत 2020-21 से 2023-24 के बीच461 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, लेकिन इसमें से सिर्फ 32.2 करोड़ रुपये यानी महज 7% राशि ही खर्च की गई।दलित बस्तियों के विकास का दावा भी झूठा?सचदेवा ने बताया कि केजरीवाल सरकार ने 2020-21 से 2023-24 तक दलित बस्तियों के सुधार के लिए 260 करोड़ रुपये की योजनाओं कीघोषणा की थी, लेकिन इस दौरान खर्च सिर्फ 120.60 करोड़ रुपये हुआ। उन्होंने इसे दलित समाज के साथ एक बड़ा छलावा बताया। विधानसभा में रखी जाएगी योजनाओं की हकीकतदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा जल्द ही विधानसभा में इन योजनाओं से जुड़े तथ्यों को पेश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंदकेजरीवाल सरकार ने प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की भलाई के लिए बनाई गई योजनाओं पर अमलनहीं किया। भाजपा के इस खुलासे के बाद अब देखना होगा कि दिल्ली सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
दिल्ली विधानसभा में अपराध पर चर्चा नहीं होगी? नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने स्पीकर को लिखा पत्र

दिल्ली में बढ़ते अपराधों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों द्वारा विधानसभा में उठाए गए सवालों को हटाने के फैसले पर नेताप्रतिपक्ष आतिशी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखकर सवाल किया कि अगर दिल्ली में हत्या, लूट, बलात्कार और गोलीबारी जैसी घटनाएं होंगी, तो क्या इस पर विधानसभा में चर्चा नहीं होगी? आतिशी ने इसे हैरान करने वाला फैसला बताया औरकहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार अपराध रोकने में पूरी तरह विफल हो चुकी है, इसलिए वह इस पर चर्चा नहीं कराना चाहती। कानून-व्यवस्था पर चर्चा नहीं होविधानसभा अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी के विधायकों द्वारा उठाए गए अपराध से जुड़े मुद्दों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “कानून-व्यवस्थादिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।” इस फैसले से नाराज आतिशी ने अपने पत्र में लिखा कि जब से दिल्ली विधानसभा बनी है, तबसे विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं विधानसभा में उठाते आए हैं। यह पहली बार हो रहा है कि अपराध से जुड़े मुद्दों को चर्चा से बाहर रखा जा रहाहै। दिल्ली में अपराध बढ़ रहे, लेकिन चर्चा नहीं होगी?आतिशी ने सवाल किया कि अगर दिल्ली में कोई बलात्कार होता है, महिलाओं के खिलाफ हिंसा होती है, या सड़कों पर गोलियां चलती हैं, तो क्याविधानसभा में इस पर बात नहीं होगी? उन्होंने कहा कि दिल्ली के 70 विधायक लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर वे अपने इलाके में बढ़तेअपराध पर सवाल नहीं उठा सकते, तो फिर कौन उठाएगा? भाजपा पर हमलाआतिशी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि चुनाव से पहले डबल इंजन सरकार का वादा किया गया था, जिससे दिल्ली की समस्याएं हल करनेकी बात कही गई थी। लेकिन अब चुनाव जीतने के बाद भाजपा चर्चा ही नहीं होने देना चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र सरकारअपराध रोकने में नाकाम रही है और इसी वजह से वह दिल्ली विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस से बच रही है। लोकतंत्र के खिलाफ फैसलानेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि दिल्ली विधानसभा में हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभामें जनता के मुद्दों पर चर्चा रोकना लोकतंत्र का अपमान होगा। आतिशी ने इस फैसले को तुरंत बदलने की मांग की, ताकि विधायकों को अपने क्षेत्रोंकी समस्याएं उठाने का अवसर मिल सके।
नया इमिग्रेशन बिल 2025, अवैध अप्रवास पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

केंद्र सरकार ने अवैध अप्रवास और घुसपैठ को रोकने के उद्देश्य से इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 लोकसभा में पेश किया। यह विधेयक भारत मेंप्रवेश और विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट, वीजा, पंजीकरण और विदेशी नागरिकों के नियमन से संबंधित है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल परविस्तार से चर्चा करते हुए इसकी आवश्यकता और प्रभाव को स्पष्ट किया। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गृह मंत्री का बयानलोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पारसी समुदाय औरइजरायल से आए यहूदी भारत में सुरक्षित हैं और यहां सम्मान के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने उन लोगों को भी सुरक्षा प्रदान की हैजो पड़ोसी देशों में प्रताड़ित होकर भारत आए हैं। भारत का वैश्विक अप्रवासी समुदायगृह मंत्री ने बताया कि भारत का प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) विश्व में सबसे बड़ा है। उन्होंने महात्मा गांधी, सुंदर पिचाई, सत्य नडेला, ऋषि सुनक, कमला हैरिस और सुनीता विलियम्स का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोग वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। उन्होंने यहभी बताया कि भारत के 1.72 करोड़ एनआरआई (प्रवासी भारतीय) दुनियाभर में फैले हुए हैं, और यह विधेयक उनकी चिंताओं के समाधान की दिशामें भी एक कदम है। अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त प्रावधानगृह मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जो लोग भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में योगदान देना चाहते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन अवैध रूप सेघुसपैठ कर भारत की शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ यह कानून सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने रोहिंग्या और बांग्लादेशीघुसपैठियों का उदाहरण देते हुए कहा कि यह विधेयक देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लाया गया है। विपक्ष की चिंता: कांग्रेस ने जताई आपत्तिइस विधेयक को लेकर विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस ने चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में कहा कि इस विधेयक मेंसंतुलन की कमी है और इसके दुरुपयोग की आशंका है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जाए ताकि एक संतुलितऔर न्यायसंगत कानून बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशियों के प्रवेश को नियंत्रित करना जरूरी है, लेकिन नागरिकों के मौलिक अधिकारोंकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। चार पुराने कानून होंगे समाप्तइस विधेयक के लागू होने के बाद सरकार चार पुराने कानूनों को समाप्त कर देगी, जो अप्रवासन और विदेशी नागरिकों के नियमन से संबंधित हैं। येकानून हैं,फॉरेनर्स एक्ट 194, पासपोर्ट एक्ट 1920,रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट 1939, इमिग्रेशन एक्ट 2000 नए विधेयक का प्रभावइमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 के तहत, सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह विदेशी नागरिकों के प्रवेश, रहने और बाहर जाने की निगरानीकर सके। साथ ही, अवैध रूप से रहने वाले विदेशियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। इस कानून से भारत की सुरक्षा नीति को और अधिकप्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि, विपक्ष इस विधेयक को सरकार के अधिकारों में अत्यधिक वृद्धि करने वाला मान रहा है और इसे संतुलन सेरहित बता रहा है। अब यह देखना होगा कि यह विधेयक संसद में कितना समर्थन पाता है और इसके किस रूप में कानून बनने की प्रक्रिया पूरी होतीहै।
बिहार विधानसभा सत्र के आखिरी दिन सीएम नीतीश कुमार की हरकत बनी चर्चा का विषय, फोटो सेशन का वीडियो वायरल

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले आखिरी बजट सत्र के दौरान जमकर सियासी गहमागहमी देखने को मिली। इस सत्र के आखिरी दिन बिहारविधान परिषद में एक फोटो सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत सभी प्रमुख नेता शामिल हुए। लेकिन इस दौरानएक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें नीतीश कुमार हाथ जोड़े बैठे नजर आ रहे हैं।काफी देर तक हाथ जोड़े रहने के कारण पास बैठे ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव ने उनके हाथों को नीचे कर दिया। पहले भी वायरल हो चुके हैं सीएम के वीडियोयह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी अजीब हरकत के कारण चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी उनके कई वीडियो सोशल मीडियापर वायरल हो चुके हैं। कभी वह बीजेपी नेताओं के पैर छूने की कोशिश करते दिखे, तो कभी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अजीबोगरीबहावभाव प्रदर्शित करते नजर आए। हाल ही में पटना के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान के दौरान उन्होंने मीडिया कर्मियों को नमस्कार करना शुरू कर दियाथा। इसके बाद उन्होंने अपने पास खड़े मुख्य सचिव से इशारों में बातचीत भी की। इतना ही नहीं, राष्ट्रगान खत्म होने से पहले ही वे मंत्री विजय चौधरीके साथ स्टेडियम का राउंड लगाने निकल पड़े, जिससे राष्ट्रगान को बीच में ही रोकना पड़ा। विपक्ष ने उठाए सवालनीतीश कुमार की हालिया हरकतों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राष्ट्रगान प्रकरण को लेकर आरजेडी ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनेकी मांग की थी। हालांकि, इसके बाद विधानसभा में उन्होंने राबड़ी देवी पर पलटवार किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी देखने कोमिली। समझाने में जुटे मंत्री और डिप्टी सीएमफोटो सेशन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ जोड़ने की हरकत से पहले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव और फिर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हेंसमझाने की कोशिश की। सम्राट चौधरी ने इशारा करते हुए उन्हें सीधे देखने की सलाह दी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनके हावभाव को लेकर उनकेही साथी मंत्री असहज महसूस कर रहे थे। पहले भी सुर्खियों में रहे हैं अजीबोगरीब हावभाव को लेकरयह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में अजीब व्यवहार करते दिखे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूने कीकोशिश से लेकर सार्वजनिक मंच पर उनका हाथ पकड़ने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। सदन में महिलाओं से जुड़े बयान और हाल ही में रविशंकर प्रसादके पैर छूने की घटना भी काफी चर्चा में रही थी। अब इस नए वीडियो को लेकर विपक्ष किस तरह का रुख अपनाता है, यह देखने वाली बात होगी।