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AAP ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाए, बजट और शराब नीति पर उठाए सवाल

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में आमआदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता करते हुए बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार केहालिया बजट और उत्तर प्रदेश में चल रही शराब नीति के खिलाफ आम आदमी पार्टी कई सवाल उठा रही है। सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी की नीतियोंपर निशाना साधते हुए यह दावा किया कि बीजेपी के बजट का कोई स्पष्ट सिद्धांत नहीं है और सरकार गंभीर नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने यूपीसरकार की शराब नीति को लेकर भी कई सवाल उठाए, जो वर्तमान में बीजेपी शासित राज्य में विवाद का कारण बन चुकी है। दिल्ली के बजट पर सवालसौरभ भारद्वाज ने दिल्ली के बजट को लेकर बीजेपी सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “AAP सरकार ने जब National Small Saving Funds (NSSF) से 10,000 करोड़ रुपये निकालने का प्रस्ताव रखा था, तो वित्त सचिव ने इसे मंजूरी नहीं दी। लेकिन अब वही वित्तसचिव 15,000 करोड़ रुपये NSSF से निकालने की बात कर रहे हैं।” इस पर AAP ने आरोप लगाया कि यह बीजेपी सरकार के बजट में कोईस्पष्टता या सिद्धांत नहीं है और यह दिखाता है कि सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। भारद्वाज ने कहा कि इस पूरी स्थिति से यह जाहिर होता हैकि भाजपा सरकार के पास कोई ठोस वित्तीय नीति नहीं है और वह केवल तात्कालिक राजनीतिक लाभ के लिए काम कर रही है। सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “दिल्ली की बीजेपी सरकार ने हाल ही में जो बजट पेशकिया, उससे यह साबित हो गया है कि रेखा गुप्ता झूठ बोल रही हैं। उन्होंने महिलाओं को ₹2500 देने के सवाल पर कहा था कि सरकार का खजानाखाली है। लेकिन कल जब बजट का ऐलान हुआ, तो बीजेपी ने यह खुलासा किया कि AAP सरकार ने ₹2,965 करोड़ का फंड नई सरकार के लिएछोड़कर गया था।” इससे यह सवाल उठता है कि अगर सरकार के पास खजाना खाली था तो यह पैसा कहां से आया? यूपी की शराब नीति पर AAP का हमलाAAP ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और बीजेपी पर भी सवाल उठाए हैं। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि यूपी में शराब की दुकानोंपर अनियमितताएं हो रही हैं और योगी सरकार इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने पूछा, “योगी सरकार इन शराब की दुकानों पर कब एक्शनलेगी? क्या योगी जी की सरकार की 1+1 शराब बोतल की योजना बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी से चलवायी जा रही है?” 1+1 शराब बोतल योजना, जिसके तहत एक बोतल शराब के साथ एक बोतल मुफ्त दी जा रही है, को लेकर भी AAP ने गंभीर सवाल उठाए हैं।भारद्वाज ने कहा, “अगर यह योजना केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी नहीं ली गई है, तो इसे तुरंत क्यों नहीं रोका जा रहा?” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या बीजेपीका केंद्रीय नेतृत्व यूपी में चल रही इस योजना को बंद कराएगा? शराब नीति पर AAP की चिंताAAP ने यूपी सरकार के शराब वितरण की नीति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि शराब की एक बोतल के साथ एक बोतल मुफ्तबांटना समाज में नशे की आदतों को बढ़ावा देने वाला कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना विशेष रूप से हिंदू समाज को शराबी बनाने कीदिशा में एक खतरनाक कदम हो सकती है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि इस तरह की नीतियां समाज में शराब की लत को बढ़ावा देती हैं, जिससे युवाओं और अन्य लोगों के बीच नशे की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जो अंततः समाज में अपराध और सामाजिक असमर्थता की वजह बन सकती है। शराब नीति पर उठते सवालAAP का कहना है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार को इस 1+1 शराब योजना पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए और इसे रोकना चाहिए। इस योजनाको लेकर आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह योजना जनता को नशे की लत में डालने के लिए बनाई गई है और इसका मुख्य उद्देश्य शराब कीबिक्री को बढ़ावा देना है। इस तरह की नीतियों से समाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और यह सामाजिक असमानता और हिंसा को बढ़ावा देसकता है। AAP ने यह भी सवाल किया कि क्या यूपी की शराब नीति पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मंजूरी दी है या नहीं। अगर नहीं, तो फिर यूपी सरकार इसयोजना को लागू करने के बावजूद क्यों चुप है और इसे क्यों नहीं बंद कर रही है? इससे यह भी संकेत मिलता है कि यूपी सरकार अपनी नीतियों में कोईबदलाव करने के लिए तैयार नहीं है और यह जनता के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

हम पर नहीं, यूपी पर ध्यान दें’, राहुल गांधी को सीएम योगी ने कहा नमूना तो भड़क गई कांग्रेस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को ‘नमूना’ कहकर विवाद खड़ा कर दिया। इसबयान के बाद कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कांग्रेस के सांसद के. सुरेश ने योगी आदित्यनाथ को सलाह दी कि वह राहुल गांधी परटिप्पणी करने के बजाय उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अन्य गंभीर मुद्दों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में मारे गए लोगों के परिवारों कोमुआवजा देने का वादा तो किया गया था, लेकिन अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रितकरना चाहिए, न कि कांग्रेस और राहुल गांधी पर आरोप लगाते रहना चाहिए। के. सुरेश ने इस पर और भी प्रतिक्रिया व्यक्त की, “यह पहली बार नहीं है जब योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमले किए हैं। इस परकोई जवाब देने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ में हुई भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को 25 लाख रुपयेमुआवजा देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यूपी की कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमरा चुकी है, लेकिनइसके बावजूद मुख्यमंत्री योगी कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन पर आरोप लगा रहे हैं।” इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे एक और प्रयास माना है मुख्यमंत्री योगी द्वारा राजनीति करने का, जबकि वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने कीकोशिश की जा रही है। वे जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस पर अनावश्यक आरोप लगा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के इस विवादास्पद बयान में उन्होंने कहा था, “भारत जोड़ो यात्रा वास्तव में भारत तोड़ो अभियान का हिस्सा है। राहुल गांधी भारत केबाहर भारत की आलोचना करते हैं, और देश अब उनकी नीयत और स्वभाव को समझ चुका है। भारतीय राजनीति में और भारतीय जनता पार्टी के लिएराहुल गांधी जैसे कुछ नमूने जरूरी होते हैं, ताकि रास्ता हमेशा के लिए साफ रहे।” योगी आदित्यनाथ के इस बयान से कांग्रेस के नेताओं को आक्रोशितकर दिया है, और उन्होंने इसे राजनीति का एक निम्न स्तर माना है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा, “कांग्रेस हमेशा से अयोध्या विवाद को विवाद बनाए रखना चाहती थी। वे काशी कीसंकरी गली में राजनीति करते रहे हैं, लेकिन महात्मा गांधी ने 1916 में ही काशी की संकरी गली पर टिप्पणी की थी। कांग्रेस ने अपने शासन में इसकासमाधान क्यों नहीं किया? महात्मा गांधी का सपना क्यों पूरा नहीं किया? वह सपना अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा किया।” उनका यह बयान स्पष्टरूप से कांग्रेस के इतिहास और उसकी नीतियों पर सवाल उठाता है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को उन्होंने अयोध्या विवाद के समाधान औरअन्य मुद्दों पर सफलता का श्रेय दिया है। इसके अतिरिक्त, सीएम योगी ने कांग्रेस के शासनकाल में हुए कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस के शासन में तीनतलाक क्यों नहीं खत्म किया गया, कुंभ को विश्वस्तरीय सम्मान क्यों नहीं दिया गया, और कांग्रेस इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में क्यों असफल रही। योगीआदित्यनाथ ने इन मुद्दों को उठाकर कांग्रेस की नीतियों को असफल ठहराने की कोशिश की है। उनका कहना था कि कांग्रेस के पास देश के विकासके लिए कोई ठोस योजना नहीं थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह सब संभव हुआ है। कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच यह विवाद निश्चित रूप से यूपी की राजनीति में और पूरे देश में गहरे प्रभाव डाल सकता है। जहांएक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने बयान में कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी इस आलोचना कोएक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है ताकि जनता के सामने भाजपा की असल नीतियों और कार्यों को उजागर किया जा सके। कांग्रेस का आरोप है कि योगी आदित्यनाथ राज्य की कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, और सामाजिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों सेध्यान हटा कर केवल अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं योगी आदित्यनाथ और भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा देश औरराज्य के विकास में बाधाएं डालने का काम किया है, और अब समय आ गया है जब कांग्रेस के पुराने कारनामों का खुलासा किया जाए। यह विवाद अब राजनीतिक मैदान में एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। आगामी चुनावों में यहमुद्दा और भी गरमाने की संभावना है, क्योंकि हर पार्टी अपने-अपने दृष्टिकोण से जनता को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। योगी आदित्यनाथका बयान कांग्रेस के लिए एक चुनौती बन सकता है, जबकि कांग्रेस इसे अपने पक्ष में कर सकती है यदि वे इसे सही तरीके से राजनीतिक मुद्दे के रूप मेंपेश करें।

जहां भी तीर्थस्थल होंगे, सब ढूंढ़ेंगे’, सीएम योगी आदित्यनाथ का धमाकेदार इंटरव्यू

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज अखिलेश यादव पर खुलकर निशाना साधा। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू मेंसीएम योगी ने अलग-अलग मुद्दों पर बात की। इस दौरान सीएम योगी ने कहा, ‘हमारी पार्टी तीसरी बार भी यूपी में जीत के लिए कोशिश करेगी।पीएम मोदी का विरासत के प्रति जो विजन है, उसका परिणाम अयोध्या में भी देखने को मिल रहा है। अयोध्या में करोड़ों लोग आ रहे हैं, व्यवसायफल-फूल रहा है।’ सीएम योगी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जिनके आदर्श औरंगजेब हों, उनका व्यवहार भी वैसा होगा। वोऔरंगजेब को महिमामंडित कर रहे हैं। उनके नेताओं ने मुंबई से लेकर लखनऊ तक औरंगजेब का महिमा मंडन किया है।’अखिलेश यादव पर सीएम योगी का कटाक्षअखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने आगे कहा कि जो बाबर और औरंगजेब को अपना आदर्श मानता होगा, उसके अंदर वैसा हीगुण देखने को मिलेगा। इसी उत्तर प्रदेश में लौह परुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम के साथ जुड़ रहे थे। पूरे प्रदेशवासियों वसभी राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित किया था। सरदार पटेल जो भारत के एकता के आदर्श हैं, हम उनके प्रति श्रद्धा का भाव व्यक्त कर रहे थे। तो येलोग जिन्ना का गुणगान कर रहे थे। ये वही कैटेगरी के लोग हैं जो बाबर, औरंगजेब और जिन्ना का महिमामंडन करते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जासकता है कि ये लोग अवसरवादी हैं। इन्हें पलटी मारने में देर नहीं लगेगी। सीएम योगी ने कहा कि राणा सांगा के इतिहास को अगर इन्होंने पढ़ा होताकि वो महान योद्धा, जिनके शरीर के घाव बताते थे कि उन्होंने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कितना कुछ सहा है। यूपी में मुसलमान सबसे ज्यादा सुरक्षित: सीएम योगीसीएम योगी ने आगे कहा कि दुनिया की सबसे प्राचीनतम धर्म है सनातन धर्म। उसके नाम से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं। दुनिया की कोई जाति, मजहब, धर्म नहीं है, जिसको उसके बुरे वक्त में सनातन धर्मावलंबियों ने संरक्षण न दिया हो। लेकिन बदले में उसे मिला क्या? कहीं भी हिंदू राजाओं नेदुनिया के अंदर कहीं भी अपने बल पर, अपने वैभव के दंभ से किसी पर आधिपत्य स्थापित किया हो। सीएम योगी बोले, ‘100 मुस्लिम परिवारों केबीच क्या एक हिंदू परिवार सुरक्षित रह सकता है क्या? बांग्लादेश और अफगानिस्तान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। हम तो सबको समान भाव सेदेख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में अगर हिंदू सुरक्षित है तो मुसलमान भी सुरक्षित हैं। मुस्लिम तो यूपी में सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं।’ सभी तीर्थस्थलों और मंदिरों को खोजकर निकालेंगे: सीएम योगीसीएम योगी ने कहा, ‘जो न्याय मानते होंगे उनके लिए न्याय होता है। जो स्वयं न्याय को हाथ में लेते हैं, उन्हें कानून के दायरे में रहकर न्याय समझायाजाता है। कोई हिंसक बनकर सामने आएगा तो क्या हम गिड़गिड़ाएंगे। हमें उसे उसकी ही भाषा में समझाना होगा। जितने भी तीर्थस्थल, मंदिर होंगेसभी को ढूंढेंगे और सब निकालेंगे और दुनिया को बोलेंगे कि सब आकर देखो कि क्या हुआ था संभल में। संभल एक सच्चाई है। आपको उपासनाविधि की पूरी छूट है, लेकिन आप तो इस्लाम के मुद्दों से भटककर काम किए हैं। इस्लाम कहता है कि किसी भी हिंदू मंदिर या किसी भी हिंदू घर कोतोड़कर बनाया गया इबादत घर इस्लाम में स्वीकार नहीं है। यानी की फिर तो यह इस्लाम के विरूद्ध हुआ ना।’ ‘मथुरा में बहुत कुछ हो जाता‘: सीएम योगी आदित्यनाथमथुरा पर सीएम योगी ने कहा कि हम कानून के दायरे में रहकर सब काम करते हैं। मथुरा श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है। कोर्ट के ही आदेश का पालन कररहे हैं, वरना वहां बहुत कुछ हो गया होता। सनातन हिंदू धर्म के जो महत्वपूर्ण स्थल हैं, वो सारे हमारे विरासत की ही तो देन हैं। संभल में 68 सभीतीर्थों को हम निकाल रहे हैं। 54 से अधिक निकाल चुके हैं। जिसने भी कब्जे किए होंगे, सब हम निकालेंगे। जितने भी अतिक्रमण हुए हैं, वो सारेअतिक्रमण हम हटाएंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मोहर्रम में जुलूस निकलते हैं तो क्या उनके झंडे की छाया किसी हिंदू मंदिर या घर परनहीं पड़ता है क्या? क्या उससे हिंदू का घर या मंदिर अपवित्र हो जाता है। रंग पड़ जाए तो हायतौबा क्यों?सीएम योगी बोले कि ये सख्त निर्देश है कि जिसे रंग से परहेज है उसपर मत डालना। बावजूद इसके रंग पड़ गया है तो प्रशासन उसे रंगाई पुताई करकेफिर ठीक करके दे रहा है। क्या रंग बिरंगे कपड़े नहीं पहनते। हिंदू से ज्यादा तो मुसलमान रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं। तो फिर रंग से परहेज क्यों। क्यारंग बिरंगी कपड़े पहने, लेकिन अगर रंग पड़ जाए तो हायतौबा मचाते हैं। बहुत सारे मुसलमानों ने होली खेली है। शाहजहांपुर में तो नवाब साहब कीपूरी झांकी यात्रा निकलती है। कुंभ तो सभी भारतीयों का है। जो भारतीय बनकर आएगा तो कुंभ में उसका स्वागत है। लेकिन कोई नकारात्मकमानसिकता के साथ आता है तो वह स्वीकार्य नहीं है। किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं था महाकुंभ: सीएम योगीसीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाकुंभ में हमने केवल जनसुविधाओं का ध्यान रखा। यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं था। पीएम मोदी नेयूनेस्को से 2019 में कुंभ को मानवता के मूर्त धरोहर के रूप में मान्यता दिलाई। दुनिया के देशों के प्रवासी भारतीयों को कुंभ के आयोजन के साथजोड़ने का कार्यक्रम किया। 2019 में प्रवासी भारतीयों को जोड़ने का कार्यक्रम वाराणसी में आयोजित किया गया। जनता जनार्दन की सुविधा कासम्मान करना हम सीखे। मोदी जी ने जो विजन दिया वो धरातल पर दिखाई दे रहा है। मृत्युंजय महाकुंभ था: सीएम योगीमहाकुंभ के हादसे पर सीएम योगी ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ज्यूडिशियल कमीशन अपनी जांच कर रहा है। सभी पक्षों सेबातचीत हो रही है, बयान लिए जा रहे हैं और साक्ष्य इकट्ठे किए जा रहे हैं। इसके बाद जो भी परिणाम होगा, उसपर कार्रवाई की जाएगी। ममताबनर्जी के बयान पर उन्होंने कहा कि 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तक 50 हजार से 1 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन बंगाल से प्रयागराज आता था। इसभीड़ को देखकर पश्चिम बंगाल की सरकार खुद घबरा गई कि हर कोई प्रयागराज आने को उतावला था। लेकिन चाहे वह पश्चिम बंगाल की सरकार ने, चाहे वह कांग्रेस ने, राजद ने, समाजवादी पार्टी ने महाकुंभ के बारे में जो भी बात कही है, वो उनकी तुष्टीकरण की पराकाष्ठा का उदाहरण है। महाकुंभ नेसाबित किया है कि वह मृत्युंजय महाकुंभ था। सलार गाजी मसूद पर क्या बोले सीएम योगीसीएम योगी ने गाजी सलार मसूद के मेले को लेकर कहा कि आक्रांताओं का महिमंडन नहीं होना चाहिए। ये भी हमें मालूम होना चाहिए कि येआक्रांता विदेशी थे। इन्होंने भारत की आस्था पर प्रहार किया। भारत की बहन बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया। इसका महिमा मंडन भारत कीआस्था का, मातृ शक्ति का अपमान है और इनका महिमा मंडन करके हम देश का अपमान करते हैं। ये भारतीय स्वीकार नहीं करेगा। ये वही आक्रांताथे, जिन्होंने भारत में जबरन धर्मांतरण को बढ़ाया था। सीएम योगी ने कहा कि बहुत सारे लोगों ने डॉक्यूमेंट रखे हैं, जिनके पूर्वज कभी न कभी हिंदू थे।उस समय किन्हीं कारणों से उन आक्रांताओं की क्रूरता के कारण कई लोगों को इस्लाम स्वीकार करना पड़ा है। मुझे लगता है कि हमें यह स्वीकार हीनहीं करना चाहिए कि आक्रांताओं का कहीं महिमामंडन होना चाहिए। 1947 से पहले बांग्लादेश और पाकिस्तान थे भारत का हिस्सा: सीएम योगीसीएम योगी ने कहा कि सलार मसूद गाजी वही है जिसने मोहम्मद गजनवी के साथ भगवान सोमनाथ के मंदिर को तोड़ने और लूटने का काम कियाथा। वह विदेशी लुटेरा था। उसने जितना अत्याचार किया था, वही व्यवहार उसके साथ हिंदू राजाओं ने किया था। महाराज सुहलदेव के नेतृत्व में उसेजिंदा जलाया गया था। महाराजा सुहलदेव की जय-जयकार होनी चाहिए, ना कि सलार मसूज गाजी की। सीएम योगी ने आगे कहा कि मुसलमानखतरे में नहीं है। लोगों का वोट बैंक खतरे में है। भारत के मुसलमानों को याद रखना होगा कि जबतक हिंदू सुरक्षित है, तभी तक मुसलमान सुरक्षित हैं।कश्मीर, बांग्लादेश, पाकिस्तान के अंदर हिंदुओं के साथ क्या हुआ है। 1947 से पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों भारत का हिस्सा थे। हम उससच्चाई को कैसे भूल सकते हैं। क्या पाकिस्तान में हमारी हिंगलाज माता का मंदिर नहीं है क्या। माता ढाकेश्वरी का मंदिर बांग्लादेश में नहीं है क्या। कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी आदित्यनाथसीएम योगी ने कहा कि कर्नाटक सरकार द्वारा धर्म के नाम पर आरक्षण, यह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान का अपमान है।जब संविधान सभा में आरक्षण की बात हुई तो उसमें धर्म के आधार पर आरक्षण का मुद्दा भी उठा था, जिसका बाबा साहब ने विरोध किया था। बाबासाहब ने कहा था कि आरक्षण सामाजिक रूप से उन लोगों को दिया जाना चाहिए, जिनके साथ सैकड़ों वर्षों से छुआछूत किया गया है। इसमें एससी, एसटी वर्ग के लोगों को जोड़ा गया। उसी समय देश 1947 में देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, तो उसका विरोध और उसका साया भारतपर न पड़ने पाए। इसलिए सभी ने धर्म के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण का विरोध किया था।सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम आभारी हैं मोदी जी के जिन्होंने कश्मीर के दारा 370 को समाप्त कर इस कलंक को मिटाया है। आज जम्मूकश्मीर विकास की प्रक्रिया के साथ जुड़ा है। जनता को अपने आप को उस प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिला। लेकिन कांग्रेस ने इससे जनताको वंचित रखा था। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये तीन तलाक का समर्थन करते थे, जिसे मोदी जी ने समाप्त किया। तीन तलाकके नाम पर जब मर्जी आए, कोई किसी महिला के साथ खिलवाड़ करे ये नहीं हो सकता है। डीके शिवकुमार वही बोल रहे हैं जो कांग्रेस की विरासत मेंउन्हें मिला है, जो कांग्रेस का एजेंडा है। कॉमेडियन कुणाल कामरा पर क्या बोले सीएम योगी आदित्यनाथकॉमेडियन कुणाल कामरा के विवाद पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी कानून के दायरे में हैं। संवैधानिक मूल्यों केदायरे में होनी चाहिए और उसी दायरे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी दूसरे पर व्यक्तिगत प्रहार करने के लिए नहीं होसकता है। दुख की बात है कि कुछ लोगों ने देश का चीरहरण करना, विभाजन की खाई को और चौड़ा करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कोअपना अधिकार मान लिया है। ऐसे लोगों के साथ कानूनन उसी प्रकार व्यवहार करना चाहिए। बटेंगे तो कटेंगे के नारे पर सीएम योगी ने कहा कि यहविभाजनकारी नहीं था। दंगाइयों का उपचार है हमारे पास: सीएम योगीसीएम योगी ने कहा कि जातियों को अगर जोड़ने के बारे में बात की जा रही है तो इसमें क्या गलत है। यूपी से ये मैंने ही कहा था कि ‘बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे’। लाखों हिंदू कश्मीर में काटे गए, हम उसे भूल क्यों जाते हैं। इतिहास वर्तमान का दर्पण होता है। वर्तमान पीढ़ी भूल गई होगीतो उसे यह बताना पड़ेगा हमें। यह हमारा दायित्व है। दंगाईयों का हमारे पास उपचार भी है। दंगाईंयों को घुटनों के बल चलने के लिए मजबूर करते हैंऔर उन्हें ठीक भी कर देते हैं। ये हमारी शराफत का स्टाइल है।

दिल्ली के पटपड़गंज क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक रवींद्र नेगी ने नवरात्रि के अवसर पर एक नया विवाद खड़ा किया है।

दिल्ली के पटपड़गंज क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक रवींद्र नेगी ने नवरात्रि के अवसर पर एक नया विवाद खड़ा किया है। उन्होंनेनवरात्रि के दौरान मंदिरों के पास स्थित मीट की दुकानों को बंद करने की मांग की। उनका कहना है कि नवरात्रि हिंदू आस्था का पर्व है और मंदिरों केआसपास मांस की दुकानों के खुलने से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। इस कारण उन्होंने इन दुकानों को बंद करने का निर्णयलिया और पटपड़गंज में मंदिरों के पास स्थित मांस की दुकानों को बंद भी करवा दिया। नेगी ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए दिल्ली सरकार से यह मांग की है कि नवरात्रि के दौरान पूरे दिल्ली में मटन शॉप्स को बंद किया जाए।उनका तर्क है कि धार्मिक पर्वों के दौरान, विशेषकर नवरात्रि में, मांस की दुकानों का खुलना श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाता है, और इसे रोकनेके लिए कदम उठाए जाने चाहिए। इस पर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक जुबैर अहमद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने BJP विधायक रवींद्र नेगी से एक कदम आगे बढ़तेहुए न केवल मीट की दुकानों को, बल्कि शराब की दुकानों को भी नवरात्रि के दौरान बंद करने की मांग की। उनका कहना था कि व्रत रखने वाले लोगोंकी धार्मिक भावनाएं शराब से भी आहत हो सकती हैं, इसलिए शराब की दुकानों को भी बंद किया जाना चाहिए। नेगी के द्वारा पटपड़गंज क्षेत्र में मंदिरों के आसपास मीट की दुकानों को बंद करवाए जाने के बाद, मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस फैसले को लेकर खुशनजर आए। उनका मानना था कि इससे मंदिरों के पास शांति और श्रद्धा का वातावरण बना रहेगा। हालांकि, इस कदम से मुस्लिम समुदाय के लोगनाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार मीट की दुकानों को बंद करने का आदेश दे, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके परिणामस्वरूपदुकानदारों को जो आर्थिक नुकसान होगा, उसकी भरपाई सरकार को करनी चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब रवींद्र नेगी का नाम इस प्रकार के विवाद में सामने आया है। इससे पहले भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआथा, जिसमें वह पटपड़गंज क्षेत्र में मीट बेच रहे दुकानदारों से कह रहे थे कि उन्हें मंगलवार को अपनी दुकानों को बंद रखना चाहिए, क्योंकि ये दुकानेंमंदिरों के पास स्थित हैं और यहां आने वाले भक्तों को परेशानी हो सकती है। तब भी दुकानदारों ने इस फरमान पर सवाल उठाए थे और विरोध जतायाथा। नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानों को बंद करने की मांग देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर उठती रही है। हालांकि, इस मुद्दे पर कोई विशेषकानूनी प्रावधान नहीं है। स्थानीय प्रशासन या धार्मिक संगठन कई बार इस प्रकार की मांग करते हैं, जो धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारितहोती है। कई स्थानों पर नवरात्रि के दौरान दुकानदार अपनी मीट की दुकानों को बंद कर देते हैं, लेकिन कहीं-कहीं यह मांग पूरी नवरात्रि के दौरान सभीमीट की दुकानों को बंद करने की भी होती है।

साउथ सुपरस्टार आखिरी फिल्म से करेंगे धमाका, बॉक्स ऑफिस पर बजेगा ‘विजय’ का डंका!

साउथ सुपरस्टार थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ पोंगल के मौके पर सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। बॉबी देओल, पूजा हेगड़े, ममिता बैजू, प्रियमणि, गौतम वासुदेव मेनन, नारायण और प्रकाश राज जैसे बेहतरीन सितारों से सजी यह फिल्म अब 2026 में बॉक्स ऑफिस परतहलका मचाने को तैयार है। एक्टर की इस मूवी का लोगों को बेसब्री से इंतजार है जब से उन्होंने राजनीति के लिए फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ने का ऐलानकिया है। तमिल स्टार थलापति विजय ने अपनी पहली रैली में ही राजनीति के लिए फिल्मी दुनिया को छोड़ने की वजह बताई थी और खुलासा कियाथा कि वह अब सिर्फ जनता की सेवा करना चाहते हैं। थलापति विजय की ये मूवी होगी गेम चेंजर1984 की फिल्म ‘वेत्री’ से बतौर बाल कलाकार अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले थलापति विजय का 42 साल बाद यह यादगार सफर’जन नायकन’ के साथ 2026 में खत्म हो जाएगा। लेकिन, एक्टर के फैंस के लिए एक खुशखबरी है कि वह अपनी आखिरी फिल्म से दुनिया भर मेंधमाका करने वाले हैं। ‘जन नायकन’ 9 जनवरी, 2026 को पोंगल के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म को लेकर लोगों के बीच काफीमहीनों से जबरदस्त बज बना हुआ है। बॉक्स ऑफिस पर होगी एक्टर की विजयविजय अब बड़े पर्दे से गायब होकर राजनीति की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। एच. विनोथ द्वारा निर्देशित और केवीएन प्रोडक्शंस द्वारा समर्थित ‘जननायकन’ के साथ साउथ स्टार को उनके फैंस उन्हें आखिरी बार बड़े पर्दे पर देख पाएंगे। इसके पहले भी विजय की कई फिल्में पोंगल पर रिलीज हुईऔर बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। तमिल सिनेमा का इतिहास इसका सबूत है। अब एक्टर अपनी आखिरी फिल्म से फिर एक नया रिकॉर्डबनाने के लिए तैयार हैं। वह एक फिर से बॉक्स ऑफिस पर धुआंधार कमाई करने के लिए तैयार हैं। थलपति विजय की नई फिल्मतमिल फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री करने के बाद से विजय ने कई सुपरहिट फिल्में दी है, जिसकी लिस्ट काफी लंबी है। थलपति विजय को आखिरी बारवेंकट प्रभु की ‘द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम’ में देखा गया था। वहीं अब वह जल्द ही ‘जन नायकन’ में नजर आने वाले हैं।

बिहार कांग्रेस की राहुल गांधी के साथ बैठक आज, राजद से रिश्ते पर भी होगा मंथन

बिहार विधान सभा चुनाव 2025 को लेकर मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे औरलोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में होनेवाली इस बैठक में विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति बनेगी. साथ ही बिहार मेंमहागठबंधन में शामिल दलों से तालमेल के मुद्दे पर भी बैठक में चर्चा होगी. यह बैठक पहले 12 मार्च को होनी थी. इस बैठक में प्रदेश प्रभारी कृष्णाअल्लावारू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार सहित राज्य के सभी विधायक, विधान पार्षद, सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे. विचारधारा को युवा पीढ़ी तक है पहुंचानाहाल ही में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश कुमार को बनाया गया है. वहीं पार्टी प्रभारी कृष्णा अल्लावरू भी लगातार बिहार का दौरा कर रहे हैं. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस साल दो बार बिहार के दौरे पर आ चुके हैं. वहीं कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भी ‘नौकरी दो, पलायन रोको’ यात्रा पर निकले हुए हैं. बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारू ने कहा कि हमें डटकर कांग्रेस के विचारधारा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना है औरआम जनता के मुद्दों को विस्तृत मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है. उन्होंने जनता से जुड़ाव के लिए उनकी भाषा में उनके दर्द को रखने की भीसलाह दी. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि समाज के शोषित और पिछड़े वर्ग के लिए हमें मीडिया के माध्यम से आवाज बुलंद करनी होगीविचारधारा को मजबूती से मीडिया में रखने की आवश्यकतारविवार को ही प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में पार्टी के प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्ट और संभावित प्रवक्ताओं के प्रशिक्षण के लिए बिहारसंवाद प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया और पब्लिक सिटी विभाग के चेयरमैनपवन खेड़ा पहुंचे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा को मजबूती से मीडिया में रखने की आवश्यकता है. हमारी वैचारिक लड़ाई के लिए हमें नैतिकरूप से सुदृढ़ और व्यवस्थित ढंग से भाजपा के झूठ का पर्दाफाश करना है. प्रशिक्षण प्रभारी सचिन राव ने भाजपा की ओर से फैलाए गए झूठ औरगलत अवधारणाओं को लेकर भी विस्तार से चर्चा की.

“छत्रपति संभाजी का स्मारक हो स्थापित”, रामदास आठवले बोले- यहां के मुसलमान हिंदू थे

महाराष्ट्र में इन दिनों मुग़ल सम्राट औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग जोरों पर है। इस विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने रविवार को एकबयान में कहा कि औरंगजेब की कब्र हटाने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने यह सुझाव दिया कि संभाजी नगर (पूर्व में औरंगाबाद) में छत्रपतिसंभाजी महाराज का एक भव्य स्मारक स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि उनकी महान विचारधारा को सम्मान मिल सके। आठवले का कहना था कियह कदम सिर्फ ऐतिहासिक महत्व नहीं रखेगा, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा। रामदास आठवले, जो कि केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री हैं, ने देहरादून में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, “औरंगजेबकी कब्र हटाने से कोई परिणाम नहीं मिलेगा। हमें संभाजी नगर में छत्रपति संभाजी महाराज का स्मारक बनाना चाहिए, ताकि उनकी बहादुरी और उनकीविचारधारा को सम्मानित किया जा सके।” उन्होंने आगे बताया कि औरंगजेब की कब्र पुरातत्व विभाग के तहत आती है, और उसकी सुरक्षा भी उसीविभाग की जिम्मेदारी है। केंद्रीय मंत्री ने इस मुद्दे पर शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि किसी भी तरह की हिंसा से बचने की आवश्यकताहै। इसके साथ ही, रामदास आठवले ने मुसलमानों से विशेष अपील की कि वे औरंगजेब से अपना नाता न जोड़ें। उन्होंने कहा, “मुसलमानों से मेरा निवेदनहै कि वे औरंगजेब से कोई संबंध न जोड़ें। यहां के मुसलमान हिंदू थे और वे औरंगजेब की औलाद नहीं हैं। उनका और औरंगजेब के साथ कोई संबंधनहीं है।” यह बयान आठवले ने समाज में शांति बनाए रखने और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए दिया। औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग: क्या है कारण?मुग़ल सम्राट औरंगजेब का शासनकाल, जो 1658 से 1707 तक रहा, भारतीय इतिहास में एक विवादास्पद अध्याय है। औरंगजेब की नीतियां औरउनके शासन के तरीके पर लगातार बहस होती रही है। उनकी विस्तारवादी नीतियां, धार्मिक असहिष्णुता और हिंदू मंदिरों को नष्ट करने की कथितघटनाओं को लेकर आलोचना की जाती रही है। इस विवाद ने और ज्यादा तूल तब पकड़ा, जब हाल ही में फिल्म ‘छावा’ रिलीज हुई, जिसमें औरंगजेबकी नीतियों और उनके शासनकाल की आलोचना की गई। इसके बाद महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। औरंगाबाद (अब संभाजी नगर) के पास स्थित खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र है, और यहां उसकी कब्र हटाने की मांग तेजी से उठने लगी है। इस मांगको लेकर महाराष्ट्र में हाल के महीनों में हिंसा भी भड़की है। नागपुर में तो पुलिस पर पथराव हुआ और दर्जनों गाड़ियां फूंक दी गईं। इस हिंसा में कईलोग घायल हुए, और 100 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए। इस घटना ने औरंगजेब की कब्र को लेकर जारी विवाद को और भी जटिल बना दियाहै। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोणरामदास आठवले के बयान ने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दिया है। उन्होंने औरंगजेब की कब्र को हटाने के बजाय छत्रपति संभाजी महाराज कास्मारक स्थापित करने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि यह कदम न केवल छत्रपति संभाजी महाराज के योगदान को सम्मानित करेगा, बल्किसमाज में शांति और सामंजस्य भी स्थापित करेगा। साथ ही, यह ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि छत्रपति संभाजी महाराज नेऔरंगजेब के खिलाफ संघर्ष किया था और उनके नेतृत्व में मराठा साम्राज्य ने काफी सफलता प्राप्त की थी। आठवले का यह बयान धार्मिक और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। उनका यह कहना कि मुसलमानों को औरंगजेब सेअपना नाता न जोड़ने की जरूरत है, यह संदेश दे रहा है कि किसी भी समुदाय को अपने इतिहास से उपजी नफरत और द्वेष को पीछे छोड़कर एकताऔर भाईचारे की ओर बढ़ना चाहिए। यह अपील विशेष रूप से उन मुस्लिम समुदायों के लिए है जो औरंगजेब को अपने इतिहास से जोड़ते हैं, जबकिरामदास आठवले के अनुसार, भारतीय मुसलमानों का औरंगजेब से कोई सीधा संबंध नहीं है।

बीजेपी नेता रूबी फोगाट यादव का नशा मुक्ति जागरूकता अभियान: स्वस्थ समाज की ओर एक कदम

आज दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में एक अहम पहल का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों से लोगों को जागरूक करना औरएक स्वस्थ जीवन शैली की ओर प्रेरित करना था। इस पहल का आयोजन ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा किया गया था, और इसमें प्रमुख बीजेपी नेतारूबी फोगाट यादव ने हिस्सा लिया। उन्होंने नशा मुक्ति जागरूकता मार्च को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया और लोगों को इस मुद्दे के प्रति जागरूककिया। रूबी फोगाट यादव ने मार्च के दौरान उपस्थित लोगों से बात करते हुए कहा, “नशा छोड़ो, जीवन संवारो!” उनका यह संदेश साफ था कि नशे से नकेवल स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उनका मानना था कि नशे से बचकर ही हम एकस्वस्थ और समृद्ध समाज की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों में नशे के खतरों के बारे में जानकारी देना और उन्हें नशे से बचने के उपायों के प्रति जागरूक करनाथा। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का यह कदम बहुत सराहनीय है, क्योंकि आजकल के समाज में नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है, और इसके दुष्प्रभाव नकेवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक भी होते हैं। रूबी यादव ने आगे कहा कि नशे से न केवल युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है, बल्कि यह समस्या हर आयु वर्ग में बढ़ती जा रही है। उन्होंने समाज के सभीवर्गों से अपील की कि वे इस अभियान में भाग लेकर एक नशा मुक्त समाज की स्थापना में सहयोग दें। उनके अनुसार, नशे से मुक्ति पाने के लिएशिक्षा और जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण हैं, और यह जागरूकता समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। यह कार्यक्रम न केवल दक्षिण दिल्ली के नागरिकों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह जागरूकता अभियान एक सकारात्मकबदलाव की दिशा में एक कदम है, जो सभी को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा। आखिरकार, नशा मुक्ति की दिशा में यह पहल न केवल व्यक्तिगत जीवन को संवारने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में एक सकारात्मकपरिवर्तन लाने में भी सहायक होगी।

मायावती ने उठाया बड़ा कदम, बसपा OBC को साथ जोड़ने के लिए भाईचारा कमेटी का ऐलान

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में अब लगभग दो साल का समय रह गया है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुखमायावती ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को अपनी पार्टी से जोड़ने के लिए नई रणनीति बनाई है। मंगलवार को बसपाने ओबीसी के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की और इस दौरान मायावती ने भाईचारा कमेटी के गठन की घोषणा की। इस कदम से मायावती नेदलितों और ओबीसी को एक साथ लाकर यूपी में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने का इरादा व्यक्त किया है।2007 की भाईचारा कमेटी का पुनः गठनमायावती ने पहले भी 2007 में भाईचारा कमेटी का गठन किया था, जो बसपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम साबित हुआ था। हालांकि, 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा की हार और मायावती की सरकार के गिरने के बाद इस कमेटी का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसके बाद सेभाईचारा कमेटी का पुनर्निर्माण नहीं हुआ था, लेकिन अब मायावती ने इसे फिर से जीवित करने का फैसला किया है। अब, एक बार फिर दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को एक साथ लाने के उद्देश्य से भाईचारा कमेटी का गठन किया जा रहा है। पार्टी के भीतरमुस्लिम और सवर्ण जातियों के बीच भी भाईचारे को बढ़ाने के लिए नई कमेटी बनाई जाएगी। इस तरह से बसपा अपनी रणनीति में विभिन्न जातियोंके बीच सशक्त संबंधों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। बसपा का राजनीतिक संकल्प: सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करनाबसपा द्वारा जारी किए गए एक प्रेस विज्ञप्ति में यह साफ कहा गया है कि “बहुजन समाज के सभी अंगों को आपसी भाईचारे के आधार पर संगठितराजनीतिक शक्ति बनाकर वोटों की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है।” इस अभियान के तहत पार्टी गांव-गांव मेंलोगों को जागरूक करने का कार्य करेगी। खासकर उन लोगों को जो कांग्रेस, भाजपा और सपा जैसी पार्टियों के दलित और अन्य पिछड़े वर्ग विरोधीचेहरे को पहचानते हैं। बसपा ने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता में आना नहीं है, बल्कि वह बहुजन समाज के हित में काम करने का संकल्प ले चुकी है।इसके लिए पार्टी ने हर जिले और गांव में प्रचार प्रसार अभियान चलाने का निर्णय लिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस संदेश से जुड़ सकें। कांग्रेस, भाजपा और सपा पर हमलाबसपा ने कांग्रेस, भाजपा और सपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन पार्टियों ने हमेशा बहुजन समाज के हितों की अनदेखी की है। पार्टी नेकहा, “गांधीवादी कांग्रेस, आरएसएसवादी भाजपा और सपा ने बहुजन समाज खासकर अन्य पिछड़ा वर्ग के करोड़ों लोगों का कभी भी सहीप्रतिनिधित्व नहीं किया।” इसके साथ ही, पार्टी ने दावा किया कि इन पार्टियों के द्वारा किए गए विकास कार्यों ने कभी भी बहुजन समाज के वास्तविकहितों की रक्षा नहीं की। बसपा के मुताबिक, इन पार्टियों का नेतृत्व अपने परिवारों और वर्गों तक सीमित रहा है, और बहुजन समाज के लिए उनके पास कोई ठोस योजना नहींथी। मायावती के नेतृत्व में बसपा का उद्देश्य इन सभी दलों से अलग होकर बहुजन समाज के लोगों के लिए एक सशक्त आवाज उठाना है। 14 अप्रैल को डॉ. अंबेडकर जयंती पर विशेष कार्यक्रममायावती ने आगामी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती को परंपरागत रूप से पूरी मिशनरी भावना से मनाने का निर्देश भी दिया है। इसदिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बसपा के नेता और कार्यकर्ता डॉ. अंबेडकर की विचारधारा और उनके योगदान को सम्मानितकरेंगे। पार्टी इस दिन को एक अहम अवसर के रूप में देख रही है, ताकि बहुजन समाज के लोगों को एकजुट किया जा सके और उन्हें आगामी चुनावोंके लिए तैयार किया जा सके। बसपा की नई दिशा और आगामी चुनावों की तैयारीमायावती का यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बसपा की नई राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करता है। पार्टी अब सिर्फ दलितों तक हीसीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ओबीसी, मुस्लिम और सवर्ण जातियों को भी साथ लाकर एक मजबूत वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही है। इसतरह की रणनीति से बसपा का उद्देश्य आगामी चुनावों में सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करना है।

राज्यसभा में राघव चड्ढा का AI पर बयान: भारत को AI में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर धनखड़ का उत्तर

नई दिल्ली, 25 मार्च: राज्यसभा में मंगलवार को आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढाने भारत के AI क्षेत्र में पिछड़ने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत को अपने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के साथ-साथ ‘मेक AI इन इंडिया’ पर भीध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि आने वाले समय में भारत इस क्षेत्र में सबसे आगे बढ़ सके। इस पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मुस्कुरातेहुए कहा, “विश्व गुरु तो भारत ही होगा,” जिससे इस मुद्दे पर हल्के-फुल्के तरीके से अपना विश्वास व्यक्त किया। भारत और AI: चड्ढा का चिंताजनक बयानराघव चड्ढा ने AI के विकास के संदर्भ में भारत के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि आज का दौर AI की क्रांति का है और दुनियाके प्रमुख देश इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका के पास ChatGPT, जेमिनी, एन्थ्रॉपिक ग्रॉक जैसे शक्तिशाली AI मॉडल हैं, वहीं चीन ने DeepSeek नामक AI मॉडल तैयार किया है जो सबसे ज्यादा क्षमता वाला और सबसे कम लागत वाला है। चड्ढा ने सवालउठाया, “भारत का अपना जनरेटिव AI मॉडल कहां है?” उनका कहना था कि दुनिया में जितने पेटेंट रजिस्टर्ड हुए हैं, उनका 60 प्रतिशत हिस्साअमेरिका और 20 प्रतिशत हिस्सा चीन ने हासिल किया, जबकि भारत ने मात्र 0.5 प्रतिशत ही हासिल किया है। भारत की AI दक्षता: तीसरी रैंक, लेकिन चुनौतीपूर्ण स्थितिचड्ढा ने यह भी बताया कि भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, लेकिन AI के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी चुनौतीहै। उन्होंने कहा, “भारत के पास ब्रेन पॉवर है, डिजिटल अर्थव्यवस्था है, और 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपभोक्ता हैं, फिर भी हम AI उत्पादक बननेके बजाय उपभोक्ता बनकर रह गए हैं।” इसके बावजूद, भारत का AI दक्षता में तीसरी रैंक पर होना सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी बताया किलगभग 15 फीसदी साढ़े चार लाख भारतीय AI के क्षेत्र में विदेशों में कार्य कर रहे हैं, जो इस बात को साबित करता है कि भारत के पास AI में बड़ीक्षमता है। ‘मेक AI इन इंडिया‘ की आवश्यकताAAP सांसद राघव चड्ढा ने भारत को AI के क्षेत्र में अपने दम पर आगे बढ़ने के लिए ‘मेक AI इन इंडिया’ के मंत्र को अपनाने की जरूरत पर जोरदिया। उनका मानना है कि AI के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम उठाने होंगे, ताकि आने वाले समय में भारत विश्व के सबसेप्रभावशाली AI उत्पादक देशों में शामिल हो सके। धनखड़ का जवाब: भारत को ‘विश्व गुरु’ बनने की ओरराघव चड्ढा के इस बयान पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मुस्कुराते हुए कहा, “विश्व गुरु तो भारत ही होगा,” और इस तरह से उन्होंने चड्ढाके बयान का हल्के-फुल्के अंदाज में उत्तर दिया। सभापति का यह जवाब इस बात का प्रतीक था कि भारत को AI के क्षेत्र में चाहे जितनी चुनौतियांहों, फिर भी भारत का भविष्य उज्जवल है और वह किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। भारत का AI वर्कफोर्स: विशाल, लेकिन अव्यक्तचड्ढा ने अपनी बात जारी रखते हुए बताया कि दुनिया के कुल AI वर्कफोर्स का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा भारतीयों का है। फिर भी, भारत के पास AI के क्षेत्र में पर्याप्त शोध और विकास (R&D) का निवेश नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से यह क्षेत्र भारत के लिए एक उपभोक्ता बाजार बनकर रहगया है। उन्होंने कहा कि यदि भारत इस क्षेत्र में खुद को अग्रणी बनाना चाहता है, तो उसे AI के शोध और विकास में निवेश को बढ़ाने के साथ हीस्थानीय AI मॉडल तैयार करने पर ध्यान देना होगा। आगे की राह: भारत को आत्मनिर्भर AI बनाना होगाचड्ढा के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत के लिए AI क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ भारत की डिजिटलअर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का सवाल नहीं है, बल्कि यह देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी एक अहम भूमिका निभाएगा। AI के क्षेत्र में भारत कीसंभावनाएं बहुत बड़ी हैं, लेकिन इसके लिए उचित नीतियों, निवेश और शोध की आवश्यकता है।