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मशहूर हॅालीवुड एक्टर वैल किल्मर का हुआ निधन, टॅाप गन’जैसी चर्चित फिल्मों के लिए रहे है मशहूर

मशहूर हॉलीवुड अभिनेता वैल किल्मर का निधन हो गया है 65 वर्ष की आयु में अभिनेता ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. किल्मर का निधननिमोनिया के चलते हुआ है. वैल के निधन की पुष्टि उनकी बेटी मर्सिडीज किल्मर ने की. मर्सिडीज ने एसोसिएटेड प्रेस को भेजे ईमेल में बताया किकिल्मर का मंगलवार 01 अप्रैल की रात लॉस एंजिल्स में निधन हो गया.वैल किल्मर का निधन निमोनिया के कारण हुआ है साल 2014 में अभिनेताको गले के कैंसर का पता चला था हालांकि उपचार के बाद वे ठीक हो गए थे. अभिनेता वैल किल्मर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1984 मेंफिल्म ‘टॉप सीक्रेट’ से की थी. उन्होंने ‘टॉप गन’, ‘रियल जीनियस’, ‘विलो’, ‘हीट’ और ‘द सेंट’ जैसी लोकप्रिय फिल्मों में काम कर दर्शकों के बीचपहचान बनाई.वैल किल्मर बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार थे उन्होंने ‘टॉप गन’ में आइसमैन की भूमिका निभाई. ‘बैटमैन फॉरएवर’ में बैटमैन के रूप मेंनजर आए. ‘द डोर्स’ में जिम मॉरिसन की भूमिका निभाई. साल 2021 में अपने करियर पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘वैल’ के आखिर में वैल किल्मर ने कहा, ‘मैंनेखराब व्यवहार किया है. मैंने बहादुरी से व्यवहार किया है मैंने कुछ लोगों के साथ अजीब व्यवहार किया है. आइसमैन की निभाई थी भुमिकामैं इनमें से किसी से भी इनकार नहीं करता और मुझे इसका कोई पछतावा नहीं है क्योंकि मैंने खुद के कुछ हिस्सों को खोया और पाया है जिनके बारे मेंमुझे कभी पता ही नहीं था.साल 2022 में आई ‘टॉप गन: मेवरिक’ वैल किल्मर के करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई इसमें उन्होंने आइसमैन कीभूमिका निभाई वैल के बारे में मशूहर रहा कि वे किसी भी किरदार को बड़ी शिद्दत से निभाते.इसके लिए वे कुछ भी कर गुजरते ‘द डोर्स’ में मॉरिसन काकिरदार निभाने के लिए उन्होंने पूरे वक्त चमड़े की पैंट पहनी. उन्होंने बाकी कलाकारों और क्रू से कहा कि वे उन्हें केवल जिम मॉरिसन के नाम सेबुलाएं.क्टर वैल किल्मर को साल 2014 में गले का कैंसर होने के बारे में पता चला था. उनकी बेटी का कहना था कि बाद में वह ठीक हो गए थे. बादमें वह लगातार अपनी बीमारी से संघर्ष कर रहे थे. साल 2021 में कान्स प्रीमियर के दौरान किल्मर को उनकी जिंदगी पर बेस्ड एक डॉक्यूमेंट्री वैल मेंदिखाया गया था. इस दौरान उन्हें सांस लेने के लिए नली की जरूरत पड़ी थी.उनके सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक डायरेक्टर ओलिवर स्टोन की‘द डोर्स’ (1991) में आई, जिसमें उन्होंने प्रभावशाली रॉक बैंड द डोर्स के करिश्माई और अंततः दुखदायक प्रमुख गायक जिम मॉरिसन का किरदारनिभाया. स्टोन को मनाने के लिए, किल्मर ने खुद का आठ मिनट का वीडियो बनाया, जिसमें वह मॉरिसन की तरह गाते और दिखते थे. फिल्म मेंकिल्मर की अपनी गायन आवाज का उपयोग किया गया है.

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने पेश किया वक्फ संशोधन विधेयक,कहा किसी की बात कोई बदगुमा न समझेगा, जमीन का दर्द कभी आसमान नहीं समझेगा

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया. इस दौरान रिजिजू ने कहा किसी की बात कोईबदगुमा न समझेगा. जमीन का दर्द कभी आसमान नहीं समझेगा मुझे न सिर्फ उम्मीद है. बल्कि मुझे पूरा भरोसा है कि इस विधेयक का विरोध करनेवालों के दिलों में भी बदलाव आएगा. हर कोई सकारात्मक सोच के साथ इस विधेयक का समर्थन करेगा.इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजूने कहा मैं यह कहना चाहता हूं कि दोनों सदनों की संयुक्त समिति में वक्फ संशोधन विधेयक पर जो चर्चा हुई है.वह भारत के संसदीय इतिहास मेंआज तक कभी नहीं हुई. मैं संयुक्त समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद और बधाई देता हूं अब तक विभिन्न समुदायों के राज्य धारकों के कुल 284 प्रतिनिधिमंडलों ने समिति के समक्ष अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए हैं. 25 राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों ने भी अपनीप्रस्तुतियां प्रस्तुत की हैं.इस दौरान रिजिजू ने कानून की जरूरत पर बल देते हुए कई वाकये भी बताए. संसद भवन समेत कई संपत्तियों से जुड़ा हुआ है मामलाउन्होंने कहा दिल्ली में 1970 से चल रहा एक मामला सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन समेत कई संपत्तियों से जुड़ा हुआ था. दिल्ली वक्फ बोर्ड नेइन पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया था. मामला अदालत में था लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने 123 संपत्तियों को डीनोटिफाइड करके वक्फबोर्ड को सौंप दिया था. अगर हम आज यह संशोधन पेश न करते तो हम जिस संसद भवन में बैठे हैं. उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जासकता था. अगर पीएम मोदी सरकार सत्ता में नहीं आती तो कई संपत्तियां डी-नोटिफाई हो जातीं.विधेयक पेश होने से पहले विपक्ष के कई नेताओं नेइस पर सवाल उठाए. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा इस तरह का बिल (वक्फ संशोधन विधेयक) जिसे आप सदन में ला रहे हैं. कम से कमसदस्यों को संशोधन करने का अधिकार तो होना चाहिए। आप कानून को जबरन थोप रहे हैं. आपको संशोधन के लिए समय देना चाहिए संशोधन केलिए कई प्रावधान हैं.गृह मंत्री अमित शाह ने कहा इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति को दिया गया. हमारे पास कांग्रेस जैसी समिति नहीं है हमारेपास लोकतांत्रिक समिति है जो विचार-मंथन करती है। कांग्रेस के जमाने में समिति होती थी जो थप्पा लगाती थी.हमारी समिति चर्चा करती है चर्चा केआधार पर विचार-विमर्श करती है और बदलाव करती है. अगर बदलाव स्वीकार नहीं करना है तो समिति का क्या मतलब है.

कौन से छह क्षेत्र हो सकते है सबसे अधिक प्रभावित, भारतीय बाजार पर अमेरिका के जवाबी टैरिफ पर क्या पड़ सकता है असर?

अगर अमेरिका भारत पर जवाबी टैरिफ लगाने का एलान करता है तो भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों और शेयर बाजार में उथल-पुथल दिख सकता है. यदि ट्रम्प ने अनुमान से कम टैरिफ की घोषणा की तो फार्मा और आईटी सहित निर्यात से जुड़े क्षेत्रों के शेयर मजबूत हो सकते हैं. दूसरी ओर अधिकगंभीर टैरिफ लगाने से बाजार में नरमी भी आ सकती है. अमेरिकी टैरिफ का भारत के किन पांच क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा. आज दो अप्रैल है और इसी के साथ अमेरिका की ओर से घोषित पारस्पारिक टैरिफ का खतरा भारतीय बाजार पर लटक रहा है. अगर अमेरिका भारतपर जवाबी टैरिफ लगाने का एलान करता है तो भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों और शेयर बाजार में उथल-पुथल दिख सकता है. यदि ट्रम्प ने अनुमान सेकम टैरिफ की घोषणा की,तो फार्मा और आईटी सहित निर्यात से जुड़े क्षेत्रों से जुड़े शेयर मजबूत हो सकते हैं. इससे सेंसेक्स और निफ्टी में आने वालेसमय में हम उछाल देख सकते हैं. दूसरी ओर अधिक गंभीर टैरिफ लगाने से बाजार में नरमी भी आ सकती है. भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर लगाया टैरिफभारत ने ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी वस्तुओं पर भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए अमेरिका के टैरिफ से अधिक शुल्क लगाए हैं. इसका साफ मतलब हैकि अमेरिकी टैरिफ के निशाने पर प्रमुख रूप से भारत भी है. अमेरिका के जवाबी टैरिफ से देश का फार्मा, ऑटोमोबाइल, कृषि और वस्त्र उद्योग परमहत्वपूर्ण असर पड़ सकता है. इससे अरबों का व्यापार बाधित हो सकता है.नई दिल्ली टैरिफ के मसले पर अमेरिका के साथ बातचीत के जरिएसमाधान निकालने की कोशिश में है. लेकिन विश्लेषकों को आशंका है कि अमेरिका और अन्य देश यदि जवाबी कार्रवाई का मन बनाने लगे तोवर्तमान हालात व्यापार युद्ध में बदल सकता है. केयरएज रेटिंग्स के कार्यकारी निदेशक और मुख्य रेटिंग अधिकारी सचिन गुप्ता ने कहा अमेरिकी टैरिफलगाने से निर्यात-संचालित क्षेत्रों की गति बाधित हो सकती है. इसके साथ ही इससे प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं के बीच कीमतों के मोर्चे पर एक नईप्रतिस्पर्धा भी शुरू हो सकती है. इसका एक दुष्परिणाम यह भी होगा कि स्पष्ट संकेत न मिलने तक निजी क्षेत्र अपने पूंजीगत व्यय से परहेज कर सकताहै. टेरिफ का असर सबसे अधिक पड़ेगा मांस जैसी चीजों परथिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के विश्लेषण के अनुसार कृषि क्षेत्र में अमेरिका के जवाबी टैरिफ का सबसे अधिक प्रभावमछली, मांस और प्रसंस्कृत समुद्री भोजन के निर्यात पर पड़ेगा. 2024 में इनका निर्यात 2.58 अरब डॉलर था. अब हालिया घटनाक्रम के बीच इसक्षेत्र पर 27.83 प्रतिशत से अधिक टैरिफ का भार बढ़ सकता है. ऐसे में अमेरिका को झींगे का निर्यात टैरिफ लागू होने के बाद प्रभावित हो सकता हैकोलकाता स्थित समुद्री खाद्य निर्यातक और मेगा मोडा के प्रबंध निदेशक योगेश गुप्ता ने कहा अमेरिका में हमारे निर्यात पर पहले से ही डंपिंग रोधीऔर प्रतिपूरक शुल्क लागू हैं. शुल्कों में अतिरिक्त वृद्धि से हम अप्रतिस्पर्धी हो जाएंगे. भारत के कुल झींगा निर्यात में से हम 40 प्रतिशत अमेरिका कोनिर्यात करते हैं. उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका अपने प्रतिस्पर्धी देशों इक्वाडोर और इंडोनेशिया पर भी इसी प्रकार का टैरिफ लगाए तो भारतीयनिर्यातकों को कुछ राहत मिल सकती है.

लोकसभा में आज पेश होगा वक्फ संशोधन बिल, भाजपा ने किया समर्थन, ओवैसी पर साधा निशाना

भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बिल के विरोधियों पर साधा निशानादिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए इसके विरोधियों पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “जो लोगइस बिल का विरोध कर रहे हैं, उनकी मानसिकता पर मुझे दया आती है। यह विधेयक उन लोगों के हित में है जिनके अधिकार छीन लिए गए हैं।” सुझावों के आधार पर तैयार किया गया बिलसचदेवा ने बताया कि यह विधेयक पिछले साल अगस्त में सदन में पेश किया गया था और इसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पासभेजा गया। समिति ने देशभर से सुझाव लेकर इसे अंतिम रूप दिया है। उन्होंने कहा, “यदि यह विधेयक हमारे गरीब मुस्लिम भाइयों और बहनों के लिएफायदेमंद साबित होता है और उनके विकास में मदद करता है, तो इसका विरोध समझ से परे है।” भाजपा कार्यकर्ताओं का संसद के पास प्रदर्शनभाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में संसद के नजदीक रेल भवन के बाहर प्लेकार्ड अभियान चलाकर वक्फ संशोधन विधेयक केसमर्थन में प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह विधेयक संस्थाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुशासन लाने के लिए आवश्यक है। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी बिलवीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह विधेयक विशेष रूप से उन महिलाओं के हितों की रक्षा करेगा जिनके अधिकारों का हनन किया गया है। उन्होंने कहा, “एक बार यह विधेयक पारित हो जाए, तो वक्फ के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे समाप्त हो जाएंगे। यह गरीब मुस्लिम समुदाय के लोगोंके अधिकारों को सुरक्षित करेगा।” ओवैसी पर लगाया वक्फ भूमि पर कब्जे का आरोपभाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा, “ओवैसी केवल वक्फ बोर्ड में अपनी अवैध कब्जाईजमीन की चिंता कर रहे हैं। उन्हें गरीब मुस्लिम भाइयों और बहनों की कोई परवाह नहीं है।” ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति को मिलेगी मजबूतीवीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की नीति को आगे बढ़ा रही है।उन्होंने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समाज के वंचित वर्गों को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद करेगा।

जनगणना में ऐतिहासिक देरी पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को घेरा, जातिगत जनगणना की मांग तेज

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत की दशक में एक बार होने वाली जनगणना में अभूतपूर्व देरी को लेकरगंभीर चिंता व्यक्त की है। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान बोलते हुए, खड़गे ने बताया कि 1881 में शुरू हुई जनगणना हर दस साल में बिना रुकेहोती रही है, चाहे युद्ध, आपातकाल या कोई अन्य संकट क्यों न हो। लेकिन पहली बार, इसे अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया है। जातिगत जनगणना की मांगखड़गे ने जातिगत जनगणना की आवश्यकता पर भी जोर दिया और याद दिलाया कि 1931 में इसी तरह की गणना की गई थी। उन्होंने महात्मा गांधीके उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने जनगणना को राष्ट्र के लिए एक नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसा बताया था। खड़गे ने सवाल किया किजब सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का डेटा एकत्र करती ही है, तो अन्य जातियों को इसमें क्यों शामिल नहीं कियाजा सकता? अल्प बजट आवंटन पर सवालकांग्रेस नेता ने सरकार द्वारा वर्तमान बजट में जनगणना के लिए केवल ₹575 करोड़ आवंटित करने की आलोचना की और इसे प्रक्रिया शुरू न करने कीमंशा का संकेत बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि COVID-19 के बावजूद दुनिया के 81% देशों ने अपनी जनगणना सफलतापूर्वक पूरी करली है, जबकि भारत अभी भी पीछे है। देरी के गंभीर परिणामखड़गे ने चेतावनी दी कि अद्यतन जनगणना डेटा की अनुपस्थिति से नीतियां अप्रभावी हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता सर्वेक्षण, राष्ट्रीयपरिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, आवधिक श्रम शक्ति सर्वेक्षण, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जैसी महत्वपूर्णयोजनाएं जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर करती हैं। कल्याणकारी योजनाओं पर असरइस देरी के कारण लाखों नागरिक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हो गए हैं। खड़गे ने जोर देकर कहा कि सटीक जनसंख्या डेटा के बिनानीति निर्माताओं को बिना ठोस आधार के निर्णय लेने पड़ रहे हैं, जिससे गलत नीतियां बन रही हैं। सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपीलअंत में, खड़गे ने सरकार से तुरंत दशक में एक बार होने वाली जनगणना शुरू करने और जातिगत जनगणना को भी शामिल करने की अपील की।उन्होंने इस लंबी देरी को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे विलंब का देश के विकास और कल्याणकारी योजनाओं परदीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में वन अधिकार अधिनियम पर अहम सुनवाई, 17 लाख आदिवासी परिवारों के भविष्य पर संकट

नई दिल्ली: ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने एआईसीसी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए 2 अप्रैल कोसुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मामला 17 लाख आदिवासी परिवारों के भविष्य, उनके सांस्कृतिकअधिकारों और भूमि अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि 2006 में कांग्रेस सरकार ने वन अधिकारअधिनियम (एफआरए) लागू किया था, जिसका उद्देश्य आदिवासियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को सुधारना था। इस कानून के तहत जंगलों मेंबसे आदिवासियों को उनके परंपरागत भूमि अधिकार दिए गए थे। हालांकि, 2008 में कुछ संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस कानूनको असंवैधानिक बताया और दावा किया कि आदिवासियों को वन भूमि पर कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उन आदिवासी परिवारों को बेदखल करने का आदेश दिया, जिनके दावे एफआरए के तहत खारिज हो गए थे। इस फैसले केखिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद 28 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इस बेदखली आदेश पर रोक लगा दी। 2020 में एकएनजीओ, वाइल्डलाइफ फर्स्ट, ने फिर से याचिका दायर कर एफआरए की वैधता और आदिवासियों के सामुदायिक अधिकारों को चुनौती दी। भूरियाने इस मुद्दे पर सरकार की निष्क्रियता की आलोचना की और आरोप लगाया कि सरकार कॉर्पोरेट हितों के आगे झुक गई है। उन्होंने कहा कि एफआरएके तहत यदि ग्राम सभा किसी समुदाय की उपस्थिति को प्रमाणित कर देती है, तो उन्हें उस भूमि का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन आज तक कईपात्र समुदायों को यह अधिकार नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से अतिक्रमण की पहचान करने का सुझाव अनुचित है। उन्होंने इस पर जोरदिया कि जमीनी सत्यापन केवल ग्राम सभाओं के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एफआरए को कमजोर किया गया, तो लाखों आदिवासी विस्थापित हो जाएंगे और जंगलों पर कॉर्पोरेट नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह बेदखलीपर रोक बनाए रखे और एफआरए के तहत खारिज किए गए सभी दावों की पुनः समीक्षा सुनिश्चित करे। साथ ही, उन्होंने ग्राम सभाओं को नए सिरे सेसर्वेक्षण करने की शक्ति देने और केंद्र सरकार से वन अधिकार अधिनियम की रक्षा करने की मांग की। भूरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी तरह से आदिवासियों के अधिकारों पर हमला किया गया, तो इसका तीव्र विरोध किया जाएगा। उन्होंनेकहा कि यह केवल एक कानूनी बहस नहीं, बल्कि 17 लाख आदिवासी परिवारों के अस्तित्व की लड़ाई है और यदि आवश्यकता पड़ी, तो व्यापक स्तरपर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं और आदिवासियों की आवाज को दबने न दें।

मोहाली कोर्ट का बड़ा फैसला, स्वघोषित पादरी बजिंदर सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास

मोहाली की पॉक्सो कोर्ट ने स्वघोषित पादरी बजिंदर सिंह को 2018 के यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले केबाद पीड़िता और उसके परिवार ने राहत की सांस ली और न्याय मिलने पर संतोष जताया। पीड़िता ने न्यायपालिका, वकीलों, मीडिया और अपनेसमर्थन में खड़े लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उनके लिए इंसाफ की जीत है। वहीं, पीड़िता के पति ने बजिंदर सिंह को आदतन अपराधी(हिस्ट्रीशीटर) बताते हुए कहा कि सजा सुनाते समय अदालत ने उसके आपराधिक इतिहास को भी ध्यान में रखा। उन्होंने न्याय प्रणाली पर भरोसाजताते हुए कहा कि आज वह भरोसा सही साबित हुआ। इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया, जिन्होंने पहले ही सात साल कीसजा भुगती थी। पीड़िता के वकील अनिल कुमार सागर ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा कि बजिंदर सिंह को उम्रकैद की सजा मिली है, जिसका मतलब है कि वह अपनी आखिरी सांस तक जेल में रहेगा। अदालत ने साबित कर दिया कि कानून के आगे कोई भी ताकतवर व्यक्ति बच नहींसकता। यह मामला 2018 में तब सामने आया था, जब एक महिला ने बजिंदर सिंह पर दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था। पीड़िता नेदावा किया कि पादरी ने मोहाली स्थित अपने घर पर उसके साथ बलात्कार किया और घटना का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने की धमकी दी।मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि आरोपी ने अपराध किया है। मोहाली कोर्ट ने बजिंदर सिंह को पॉक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना। इनमें धारा 376 (बलात्कार) के तहत उसे आजीवन कारावास की सजा, धारा 323 (चोट पहुंचाने) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत भी दोषी करार दिया गया। कोर्टके फैसले के बाद बजिंदर सिंह को कड़ी सुरक्षा में जेल ले जाया गया, जिससे उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हरियाणा के यमुनानगर निवासी और जालंधर स्थित ‘चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम’ का संस्थापक बजिंदर सिंह खुद को ईसा मसीह का दूत बताता थाऔर चमत्कारिक शक्तियों से लोगों की बीमारियां ठीक करने का दावा करता था। उसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमेंवह मरीजों को ठीक करने के झूठे दावे करता नजर आता है। हालांकि, उसके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों और इस फैसले ने उसकी छवि को पूरी तरहधूमिल कर दिया है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, बच नहीं सकता। अदालत ने यहभी संदेश दिया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को सख्त सजा मिलेगी। इस मामले के बाद अन्य पीड़ितों को भी न्याय की उम्मीद जगीहै, और यह फैसला अपराधियों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

योगी आदित्यनाथ का अखिलेश यादव पर पलटवार, सपा पर लगाए गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक हालिया बयान को लेकर उनपर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का कसाइयों से गहरा संबंध रहा है और उनके शासन में बड़े पैमाने पर गौवंश कावध हुआ था। अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया27 मार्च को कन्नौज में अखिलेश यादव ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि भगवा दल को दुर्गंध पसंद है, इसलिए वे गौशालाएं बना रहे हैं, जबकि सपा परफ्यूम पार्क विकसित कर रही है। इस बयान पर पलटवार करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, “समाजवादी पार्टी ने हमें बेसहारा गायेंदीं और अब उन्हें गाय के गोबर से बदबू आती है।” गौवंश को लेकर सपा पर निशानायोगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासन में गौवंश की तस्करी होती थी और गायों को कसाइयों को सौंप दिया जाता था।उन्होंने कहा, “जब हमने कसाइयों के अवैध धंधों पर रोक लगाई, तो वे परेशान होने लगे। उनकी समस्या यह है कि उनके सभी कसाई दोस्त अब संकटमें हैं।” कानून व्यवस्था पर सरकार का दावायोगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, “अब दंगाई चूहों की तरह बिल में छिपे हैं, क्योंकि उन्हेंपता है कि यदि वे बाहर आएंगे तो कड़ी कार्रवाई होगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने अपराध और दंगे पर लगाम लगाने में सफलतापाई है। अखिलेश यादव का भाजपा पर आरोप27 मार्च को कन्नौज में दिए गए भाषण में अखिलेश यादव ने भाजपा पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा, “कन्नौज ने हमेशाभाईचारे की खुशबू फैलाई है, लेकिन भाजपा नफरत की बदबू फैला रही है।” उन्होंने कन्नौज की जनता से अपील की कि भाजपा को पूरी तरह खत्मकर दें, ताकि रुका हुआ विकास फिर से आगे बढ़ सके।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में बुलडोजर कार्रवाई को बताया असंवैधानिक, पीड़ितों को 10-10 लाख का मुआवजा देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश समेत देशभर में सरकारी एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजर एक्शन पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रयागराज में 2021 मेंएक वकील, एक प्रोफेसर और तीन महिलाओं के घरों को ढहाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। अदालत ने कहा कि यहनागरिक अधिकारों का उल्लंघन है और इस तरह की कार्रवाई असंवेदनशील है। प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का आदेशसुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को आदेश दिया कि पांचों पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। कोर्ट ने कहा कियह कार्रवाई न्याय और विधि-सम्मत प्रक्रियाओं के विपरीत थी, जिससे प्रभावित परिवारों के मूलभूत अधिकारों का हनन हुआ। बिना समुचित नोटिस के की गई कार्रवाईयाचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें उचित नोटिस नहीं दिया गया था। प्रशासन ने 1 मार्च 2021 को नोटिस जारी किया था, लेकिन उन्हें यह 6 मार्चको मिला और मात्र 24 घंटे के भीतर 7 मार्च को उनके घरों पर बुलडोजर चला दिया गया। अदालत ने इस प्रक्रिया को कानून के खिलाफ बताया औरकहा कि नोटिस और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक था। न्यायाधीश ने व्यक्त की चिंतासुनवाई के दौरान जस्टिस उज्जल भुइयां ने अंबेडकर नगर में हाल ही में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जहां अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरानएक बच्ची अपनी किताबें लेकर भागती नजर आई। उन्होंने इस तस्वीर को चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि अतिक्रमण हटाने कीप्रक्रिया कितनी अमानवीय हो सकती है। राज्य सरकार ने किया बचावराज्य सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट में तर्क दिया कि अवैध कब्जों को हटाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और इसमें उचितप्रक्रिया का पालन किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की इस कार्रवाई को असंवैधानिक मानते हुए इसे नागरिक अधिकारों का उल्लंघनबताया और पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया।

वक्फ संशोधन विधेयक, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की सरकार की पहल

मोदी सरकार 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस विषय पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खुलकरअपनी बात रखी और विपक्ष के विरोध पर जवाब दिया। उन्होंने इस विधेयक को पारदर्शिता और जवाबदेही लाने वाला बताया। विधेयक को व्यापक समर्थनकेंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि इस बिल को सभी समुदायों का समर्थन मिल रहा है, जिनमें हिंदू, मुस्लिम, जैन और बौद्ध समुदाय के लोग शामिल हैं।उन्होंने यह भी बताया कि कैथोलिक बिशप्स ने इस विधेयक का अध्ययन करने के बाद इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आम मुसलमान भीइस संशोधन को लेकर सकारात्मक हैं। वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने की पहलरिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपनी संपत्ति घोषित नहीं कर सकता है, इसके लिए उचित प्रक्रिया और पारदर्शिता जरूरी है। इसविधेयक के माध्यम से सरकार इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को डिजिटलरूप से दर्ज किया जाएगा ताकि हर जानकारी सुलभ हो सके। विपक्ष पर तीखा प्रहारमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग मुसलमानों को गुमराह कर उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगरविधेयक असंवैधानिक होता, तो इसे सुप्रीम कोर्ट रोक देता। उन्होंने अपील की कि विपक्ष को तर्कों के आधार पर चर्चा करनी चाहिए, और सरकार हरसवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधनरिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को छीनने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर तरीके से प्रबंधित करने के लिए लाया जा रहा है।सरकार संपत्तियों का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करेगी। उन्होंने कहा कि इससे मुसलमानों की कई समस्याएं समाप्तहो जाएंगी। देशहित में समर्थन की अपीलमंत्री ने विपक्ष से राजनीति से ऊपर उठकर इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों से कुछ लोग मुसलमानों कोगुमराह कर रहे हैं, और अब इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार सभी भारतीयों के हित में निर्णय ले रही है और यहविधेयक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।