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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, ‘वक्फ बिल भाजपा की असफलताओं का पर्दाफाश, ये बीजेपी के लिए वाटरलू साबित होगा’

नई दिल्ली: लोकसभा में वक्फ विधेयक के पारित होने और राज्यसभा में पेश किए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादवने एक चिट्ठी के माध्यम से भाजपा पर कड़ा प्रहार किया। इस चिट्ठी में अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा नए बिल लाकर अपनीअसफलताओं को छुपा रही है और देश की मौजूदा आर्थिक व सामाजिक समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। भाजपा की असफलताओं पर निशानाअखिलेश यादव ने चिट्ठी में कहा, “जब भी भाजपा कोई नया बिल लाती है, तो असल में वह अपनी नाकामी छुपा रही है। नोटबंदी, जीएसटी, मंदी, महंगाई, बेरोज़गारी, भुखमरी, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाई है, इसीलिए ध्यान भटकाने केलिए वक्फ बिल लायी है।” चीन की भूमि: असली मुद्दाअखिलेश ने आगे लिखा कि वक्फ की जमीन से बड़ा मुद्दा वह जमीन है जिस पर चीन ने अपने गाँव बसा दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे परसवाल उठाए जाने से बचने के लिए भाजपा यह बिल लेकर सामने आई है। अखिलेश ने मांग की कि सरकार गारंटी दे कि वक्फ की जमीन कभी भीकिसी बाहरी हस्तक्षेप या किसी अन्य उद्देश्य के लिए हस्तांतरित न की जाएगी। मौजूदा वक्फ व्यवस्था पर कड़वी आलोचनाचिट्ठी में यह भी कहा गया कि वक्फ की वर्तमान व्यवस्था में 5 साल के धार्मिक पालन की पाबंदी, कलेक्टर द्वारा सर्वेक्षण में अनावश्यक हस्तक्षेप, तथा वक्फ परिषद या बोर्ड में बाहरी व्यक्तियों को शामिल करने की व्यवस्था का उद्देश्य एक विशेष वर्ग के सांविधानिक अधिकारों को कम करना है।अखिलेश ने आगे लिखा कि ट्रिब्यूनल के निर्णय को अंतिम न मानकर उच्च न्यायालय में मामला ले जाने की अनुमति देने से वक्फ भूमि पर कब्ज़ों कोकायम रखने का रास्ता खुल जाएगा। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अन्य धर्मों की धार्मिक और चैरिटेबल संपत्तियों में भी ऐसी ही व्यवस्थाअपनाई जाएगी। नीति और नीयत पर सवालअखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि वक्फ बिल की पीछे की नीति न तो उचित है और न ही इसकी नीयत साफ। उनका कहना था कि यह बिलकरोड़ों लोगों से उनके घर-दुकान छीनने की साजिश है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने भी लिखा कि भाजपा एक अलोकतांत्रिक पार्टी है जो असहमति कोअपनी शक्ति समझती है, और जब अधिकांश राजनीतिक दल वक्फ बिल के खिलाफ हैं तो इसे लाने की आवश्यकता और जिद क्या है। भाजपा की साम्प्रदायिक राजनीतिअखिलेश ने कहा कि वक्फ बिल भाजपा का ‘सियासी हठ’ है और इसकी मदद से भाजपा अपने समर्थकों का तुष्टीकरण करना चाहती है जो उसकीआर्थिक नीति, महंगाई, बेरोज़गारी तथा चौपट अर्थव्यवस्था से परेशान हैं। उनका आरोप है कि भाजपा वक्फ की जमीनों का नियंत्रण अपने हाथ मेंलेकर, इन्हें अपने समर्थकों के हवाले कर देना चाहती है। साथ ही, उन्होंने कहा कि वक्फ बिल के आने से मुस्लिम समुदाय को यह संदेश जाएगा किउनके अधिकारों को मार दिया जा रहा है, जिससे समाज में विभाजन की राजनीति को बढ़ावा मिलेगा। नकारात्मक राजनीति का नया अध्यायअखिलेश यादव ने अंत में कहा कि वक्फ बिल भाजपा की नफ़रत और विभाजन की राजनीति का एक और नया अध्याय है, जो अंततः भाजपा के लिएवाटरलू साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बिल उन मुसलमान भाइयों-बहनों के हितों के खिलाफ है, जो लंबे समय से वंचित हैं, और इसे लेकरगहरी चिंताएं उठाई जानी चाहिए।

दिल्ली भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने वक्फ संशोधन बिल के पारित होने पर किया स्वागत, मोदी सरकार को जताया आभार

नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में अल्पसंख्यक मोर्चा ने वक्फ संशोधन बिल के लोकसभा में पेश होने और पारित होने कास्वागत किया। रेल भवन चौराहे सहित छह प्रमुख स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने प्ले कार्ड लेकर बिल की घोषणा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारप्रकट किया तथा शाम को पारिति के उपलक्ष्य में मिठाइयाँ वितरित कीं। वक्फ बिल के नए आयामवीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि नए वक्फ बोर्ड बिल के सहारे न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे देश के मुसलमानों के विकास के लिए एक नया रास्ता खुलेगा।उन्होंने विरोधियों को चुनौती देते हुए बताया, “वक्फ अमेंडमेंट बिल की जगह वक्फ इंप्रूवमेंट बिल कहना अधिक उपयुक्त है।” सचदेवा ने यह भीरेखांकित किया कि एक विशेष मुस्लिम वर्ग ने हमेशा वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का लाभ अपने स्वार्थ के लिए किया, जिससे आम मुसलमानों कोहाशिए पर रखा गया। सामाजिक न्याय की दिशा में कदमवीरेंद्र सचदेवा ने आगे कहा, “जो लोग आज इस बिल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि आखिर क्यों वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कोईअस्पताल या स्कूल नहीं बनता, जबकि जमीनें अटपटे दामों में बिक जाती हैं।” उन्होंने इस बिल के पक्ष में यह भी जोर दिया कि यह उन महिलाओं औरबच्चों के अधिकारों को बहाल करने का महत्वपूर्ण कदम है, जिनके हक 75 सालों से छीने जा रहे थे। बीजेपी की नीतिगत उपलब्धिअनीस अब्बासी ने कहा कि आजादी के लगभग 8 दशक बाद श्री नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने कुछ लोगों द्वारा वक्फ बोर्ड पर कब्ज़ा जमाएरखने की परंपरा को तोड़कर वक्फ को आम मुसलमान तक सौंपने का निर्णय लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जेपीसी को मिले 97 लाख सुझावोंके बाद यह बिल तैयार किया गया है, अतः इस पर राजनीति करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। आम मुसलमानों के लिए विकास की राहअल्पसंख्यक मोर्चा के प्रमुख कार्यकर्ताओं, जिनमें नईम सैफी, फैसल मंसूरी, शबाना रहमान, इरफान सलमानी, जुल्फिकार अली, इमातियाज अहमद, मुर्शिदा खातून एवं खालिद चौधरी शामिल थे, ने देश के निचले और दबे तबके के मुसलमान भाइयों-बहनों को इस जनकल्याणकारी बिल के पारितहोने पर बधाई दी और प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया।

सोनिया गांधी का केंद्र पर हमला,संसद में बहस पर रोक, लोकतंत्र और संविधान पर खतरे की चेतावनी

कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी,लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी,सीपीपी पदाधिकारीगण और सभी सांसदगण, मुझे इस ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में वापस आकर खुशी हो रही है। यह स्थान हम सभी के लिए कई यादों से भरा हुआ है। पहले हम यहां खुलकरसंवाद कर सकते थे, विभिन्न दलों के सदस्यों से मिल सकते थे और मीडिया से बातचीत कर सकते थे, लेकिन अब नए संसद भवन में ऐसा कर पानासंभव नहीं रहा है। संसद सत्र की प्रमुख घटनाएंयह सत्र काफी लंबा और घटनाओं से भरा रहा। बजट प्रस्तुत किया गया और इस पर विस्तृत चर्चा हुई। वित्त और विनियोग विधेयकों पर भी विचार-विमर्श हुआ। हमारे कई साथी इन चर्चाओं में शामिल हुए और अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर किया। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी औरबढ़ती असमानता पर सरकार की दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई को स्पष्ट किया। विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर संसदीय स्थायी समितियों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं। हमारे चार साथी इन समितियों की अध्यक्षता कर रहे हैंऔर उन्होंने प्रभावी नेतृत्व दिखाया है। विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इन रिपोर्टों का उपयोग सरकार कोजवाबदेह बनाने के लिए किया गया है। महत्वपूर्ण बहसों पर सरकार का असहयोगहमने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन सत्तारूढ़ दल ने इसे खारिज कर दिया। उदाहरण के लिए, हमने लोकसभा में रक्षाऔर विदेश मंत्रालय के कामकाज पर विस्तृत चर्चा की मांग की थी, जो वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए बेहद जरूरी थी। लेकिन इसपर भी सरकार ने कोई अनुमति नहीं दी। चीन द्वारा हमारी सीमाओं पर उत्पन्न खतरों और प्रधानमंत्री द्वारा 19 जून 2020 को चीन को दी गई ‘क्लीन चिट’ पर भी हम चर्चा चाहते थे।प्रधानमंत्री के इस बयान ने हमारी कूटनीतिक स्थिति को कमजोर किया, लेकिन इस पर चर्चा से भी इनकार कर दिया गया। इसके विपरीत, चीन सेआयात लगातार बढ़ रहा है, जिससे हमारे लघु और मध्यम उद्योग (MSME) बर्बाद हो रहे हैं। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चिंताहम लगातार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की मांग कर रहे हैं। हमने संसद में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और इसकी अपारदर्शी नीतियों पर चर्चा कीमांग की थी, जो वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के तहत है। लेकिन सरकार ने इस पर भी बहस की अनुमति नहीं दी। लोकतंत्र पर बढ़ते खतरेलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता और राज्यसभा में भी मल्लिकार्जुन खड़गे जी को बार-बार रोका जाता है। सदन की कार्यवाहीहमारे कारण नहीं, बल्कि खुद सत्तापक्ष के विरोध के कारण बाधित होती है। यह असाधारण और चौंकाने वाला है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारहमें मुद्दे उठाने से रोकने का प्रयास कर रही है। विवादास्पद विधेयक और संविधान पर हमलेकल लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया गया और आज इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। यह विधेयक पूरी तरह सेसंविधान पर हमला है और भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिससे समाज में विभाजन और ध्रुवीकरण बना रहे। इसी तरह, “वन नेशन, वन इलेक्शन” बिल संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करने का प्रयास है। हम इसका भी पूरी ताकत से विरोध कर रहे हैं। साथही, महिलाओं के लिए आरक्षण बिल, जिसे दो साल पहले दोनों सदनों ने पारित किया था, अब भी लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण की हमारी मांग को भी सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है। जनहितकारी योजनाओं को कमजोर करने की साजिशहमने संसद के शून्यकाल के दौरान सूचना का अधिकार (RTI), मनरेगा, वन अधिकार कानून और भूमि अधिग्रहण कानून पर उठाए गए मुद्दों को संसदके बाहर भी मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। ये सभी कानून मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में लागू किए गए थे और मोदी सरकार इन्हेंकमजोर करने में लगी हुई है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन 14 करोड़ लोग इस अधिकार से वंचित रह गएहैं क्योंकि मोदी सरकार 2021 की जनगणना को अब तक कराने में विफल रही है। इस गंभीर मुद्दे को कांग्रेस अध्यक्ष और मैंने कई बार उठाया है औरहम उम्मीद करते हैं कि आप इसे अपने-अपने क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाएंगे। भारत को निगरानी राज्य बनाने की साजिशचाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, नागरिक अधिकार हों, संघीय ढांचा हो या चुनावी प्रक्रिया, मोदी सरकार देश को एक ऐसी स्थिति में ले जा रही है, जहांसंविधान केवल एक दस्तावेज बनकर रह जाएगा। उनका असली इरादा इसे पूरी तरह खत्म करने का है। हमें उनके इस षड्यंत्र को बेनकाब करना होगाऔर जनता तक उनकी असफलताओं को पहुंचाना होगा। प्रधानमंत्री मोदी 2004-2014 के दौरान यूपीए सरकार की योजनाओं को नया नाम देकर अपने व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। हमेंइस झूठ को उजागर करना होगा और अपने जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से जनता को सच्चाई बतानी होगी।भाजपा शासित राज्यों की असफलताओं को उजागर करेंमैंने देखा है कि भाजपा सांसद शून्यकाल में हमारी राज्य सरकारों को गलत आरोपों के साथ निशाना बनाते हैं। हमें भी उतनी ही आक्रामकता के साथभाजपा शासित राज्यों की विफलताओं और कुशासन को उजागर करना होगा। इसके लिए हमें गहराई से शोध और तथ्य जुटाने होंगे ताकि हम प्रभावीढंग से इन मुद्दों को उठा सकें। आगामी चुनाव और संगठनात्मक रणनीतिकांग्रेस अध्यक्ष राज्यों के नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं, विशेष रूप से उन राज्यों में जहां अगले 12 महीनों में चुनाव होने हैं। हाल ही में जिलाकांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठक हुई थी और अगले दो दिनों में और भी बैठकें होंगी। अगले सप्ताह अहमदाबाद में एआईसीसी सत्र आयोजित कियाजाएगा, जहां मैं आप सभी से पुनः मिलने की आशा करती हूं।

राज्यसभा में राघव चड्ढा का तीखा हमला, अमेरिकी टैरिफ और Starlink को लेकर सरकार से जवाब तलब

नई दिल्ली: राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ और एलन मस्क की कंपनीStarlink को लेकर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से मांग की कि जब तक अमेरिका टैरिफ के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब नहीं देता, तब तक Starlink को भारत में मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी टैरिफ पर तीखा हमलाराघव चड्ढा ने अमेरिका द्वारा भारत पर 27% टैरिफ लगाने को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यारका, यार ने ही लूट लिया घर यार का…” उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका के लिए रेड कार्पेट बिछाया, लेकिन बदले में टैरिफ झेलना पड़ रहा है। Starlink को लेकर सरकार से सवालराघव चड्ढा ने सरकार से Starlink की मंजूरी पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि Starlink को भारत में ऑपरेशन की अनुमति देने सेपहले इसे एक ‘बार्गेनिंग चिप’ के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि Starlink को स्पेक्ट्रम देने से पहले अमेरिका सेटैरिफ पर स्पष्टीकरण मांगा जाए। ड्रग तस्करी और डेटा सुरक्षा का मुद्दाउन्होंने अंडमान में हुई ड्रग तस्करी की घटना का जिक्र किया, जहां कथित तौर पर तस्करों ने Starlink डिवाइस का उपयोग किया था। उन्होंने आरोपलगाया कि जांच एजेंसियों द्वारा डेटा की मांग करने पर Starlink ने सहयोग से इनकार कर दिया। इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुएउन्होंने पूछा, “Starlink की डेटा शेयरिंग को लेकर भारत सरकार की क्या योजना है?” सरकार से ठोस कदम उठाने की मांगराघव चड्ढा ने सरकार से आग्रह किया कि वह Starlink को लेकर सख्त रुख अपनाए और इसे अमेरिकी टैरिफ नीति के खिलाफ एक दबाव उपकरणके रूप में उपयोग करे। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को अमेरिका से इस मुद्दे पर जवाब तलब करना चाहिए और भारतीय हितों की सुरक्षा कोप्राथमिकता देनी चाहिए।

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष यात्रा पर, Ax-4 मिशन के तहत ISS जाएंगे

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण आने वाला है, जब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला Axiom Mission 4 (Ax-4) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करेंगे। यह मिशन मई में लॉन्च किया जाएगा, जिसमें भारत, पोलैंड, हंगरी और अमेरिका केचार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे। शुभांशु शुक्ला इस मिशन में मिशन पायलट की भूमिका निभाएंगे और अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बनेंगे।यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी, क्योंकि 40 साल बाद किसी भारतीय को यह अवसर मिलेगा। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा नेसोवियत संघ के अंतरिक्ष यान से यात्रा की थी। Ax-4 मिशन के तहत शुभांशु शुक्ला के साथ पोलैंड के स्लावोज उज्नांस्की और हंगरी के तिबोर कापु मिशन स्पेशलिस्ट के रूप में शामिल होंगे, जबकि अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पेगी विटसन इस मिशन की कमांडर होंगी। सभी अंतरिक्ष यात्री स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से उड़ान भरेंगे, जिसेफाल्कन-9 रॉकेट के जरिए अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा से प्रक्षेपित किया जाएगा। लॉन्च की सटीक तारीख नासा और Axiom Space द्वारा अंतिम अनुमोदन के बाद घोषित की जाएगी। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी परीक्षण करना है। माइक्रोग्रैविटी में जैविक और भौतिक विज्ञान से जुड़े शोधकिए जाएंगे, जिससे वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इसके साथ ही, नई अंतरिक्ष तकनीकों और उपकरणों का परीक्षण किया जाएगा, जो भविष्य के अभियानों के लिए उपयोगी साबित होंगे। इस मिशन के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी योजनाहै। Axiom Space एक अमेरिकी निजी अंतरिक्ष कंपनी है, जो भविष्य में वाणिज्यिक स्पेस स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। अबतक इस कंपनी ने तीन सफल अंतरिक्ष मिशन पूरे किए हैं—Ax-1 (अप्रैल 2022), Ax-2 (मई 2023) और Ax-3 (जनवरी 2024)। अब Ax-4 इस श्रृंखला का चौथा मिशन होगा, जिसमें पहली बार एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री शामिल होगा। शुभांशु शुक्ला की यह अंतरिक्ष यात्रा भारत के लिए एक वैज्ञानिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। यह मिशन न केवल भारत कीवैश्विक वैज्ञानिक प्रतिष्ठा को बढ़ाएगा, बल्कि गगनयान मिशन और अन्य अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई संभावनाएं भी खोलेगा। इस मिशन से भारतको वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान और वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा, जिससे भविष्य में देश की अंतरिक्षप्रौद्योगिकी को और मजबूती मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,पश्चिम बंगाल में 25,753 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द, सरकार को नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आदेश

पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्यकर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया है। अदालत ने चयन प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि इसमें बड़े पैमाने पर हेरफेर और धोखाधड़ीकी गई थी। कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखाकलकत्ता हाईकोर्ट के 22 अप्रैल 2024 के फैसले के खिलाफ दायर 127 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि चयनप्रक्रिया में इतनी गड़बड़ियां पाई गई हैं कि इसे ठीक नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को कुछ संशोधनों के साथ बरकराररखा। दिव्यांग कर्मचारियों को राहतन्यायालय ने दिव्यांग कर्मचारियों को मानवीय आधार पर छूट दी है, जिससे वे अपनी नौकरी पर बने रहेंगे। हालांकि, बाकी सभी अवैध नियुक्तियों कोरद्द कर दिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हटाए गए कर्मचारियों को अब तक मिले वेतन और भत्तों को वापस करने की जरूरत नहींहोगी। राज्य सरकार को तीन महीने में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आदेशसुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और इसे तीन महीने के भीतर पूरा करे। इसके साथ ही, सीबीआई को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। भर्ती घोटाले की पृष्ठभूमियह मामला 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (SSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें 24,640 पदों के लिए 23 लाखउम्मीदवारों ने भाग लिया था, लेकिन कुल 25,753 नियुक्तियां की गई थीं। हाईकोर्ट ने इसे “व्यवस्थित धोखाधड़ी” करार दिया था। राजनीतिक हलकों में हलचलइस घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की संलिप्तता की जांच जारी है। कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकारकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। आगे की कार्रवाईसुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अप्रैल की तारीख तय की है, जिसमें सीबीआई जांच पर चर्चा होगी। इस फैसले के बाद पश्चिमबंगाल सरकार पर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने का दबाव बढ़ गया है।

अमेरिका के 27% टैरिफ पर लोकसभा में हंगामा, राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 27% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा है।गुरुवार को लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया और सरकार से इसकी रणनीति स्पष्ट करने की मांग की। राहुल गांधी का सरकार से सवाल – “टैरिफ हमें बर्बाद कर देगा”राहुल गांधी ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स और कृषि क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इस चुनौती सेनिपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। विदेश नीति पर राहुल गांधी की टिप्पणीराहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी किसी देश के आगे झुकने की नीति नहीं अपनाई। उन्होंनेआरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस का झुकाव हमेशा विदेशी ताकतों की ओर रहा है और वे राष्ट्रीय हितों को कमजोर कर रहे हैं। भारत-चीन संबंधों पर सरकार को घेराराहुल गांधी ने भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीन भारतीय क्षेत्र के 4,000 वर्गकिलोमीटर पर कब्जा कर चुका है, फिर भी भारत के विदेश सचिव चीनी राजदूत के साथ केक काट रहे हैं। गलवान संघर्ष और चीन पर सरकार की चुप्पीउन्होंने गलवान संघर्ष में शहीद हुए 20 भारतीय जवानों को याद करते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री औरराष्ट्रपति ने चीन को पत्र लिखा, लेकिन इसकी जानकारी भारतीय नागरिकों को नहीं दी गई। सरकार से जवाब की मांगराहुल गांधी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि वह भारत की भूमि और अमेरिकी टैरिफ जैसे गंभीर मुद्दों पर क्या कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यहभी कहा कि देश को इन नीतियों के प्रभाव के बारे में पारदर्शिता से जानकारी दी जानी चाहिए।

लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित, विपक्ष ने जताया विरोध

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। इस विधेयक को 288 के मुकाबले 232 मतों से मंजूरी मिली। इसकेसाथ ही मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को समाप्त करने वाला मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 भी ध्वनि मत से पारित कर दियागया। विधेयक को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को सदन में पेश किया था। विधेयक पर मत विभाजन और विवादविधेयक पर चर्चा के बाद जब मत विभाजन हुआ, तो पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। इस दौरान विपक्ष ने मतदान प्रक्रिया को लेकरआपत्ति जताई, खासकर लॉबी से सदस्यों को सदन में प्रवेश देने को लेकर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि नए संसद भवन मेंशौचालय की व्यवस्था लॉबी में है, इसलिए केवल लॉबी से ही सदस्यों को प्रवेश दिया गया। विपक्ष के संशोधनों को अस्वीकृतिरिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन द्वारा वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का संशोधन पेश किया गया, जिसे 231 के मुकाबले 288 मतों से अस्वीकृत कर दिया गया। विपक्ष द्वारा प्रस्तावित अन्य संशोधनों को भी ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया, जबकि सरकार द्वारा प्रस्तुत तीन संशोधनों को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी और नेता प्रतिपक्ष अनुपस्थितमतदान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में मौजूद नहीं थे। सरकार का पक्ष: मुसलमानों के हित में विधेयककेंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखती है। उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को गलत बताया किअल्पसंख्यक समुदाय असुरक्षित महसूस कर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया कि इस विधेयक से किसी को कोई नुकसान नहींहोगा, बल्कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। विपक्ष का विरोध और ओवैसी का प्रदर्शनविपक्षी दलों ने इस विधेयक को वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करार दिया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसका कड़ा विरोधकरते हुए सदन में विधेयक की प्रति फाड़ दी। अमित शाह का बयान: विपक्ष भ्रम फैला रहा हैगृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष इस विधेयक पर गलत सूचना फैला रहा है और मुसलमानों को डराकर राजनीति कर रहा है। उन्होंने यह भीदावा किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने के बाद किसी भी मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई और अनुच्छेद 370 हटाने सेजम्मू-कश्मीर में स्थिति में सुधार हुआ है। वक्फ संपत्तियों के उपयोग पर जोरकेंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत में वक्फ के पास तीसरा सबसे बड़ा लैंड बैंक है, लेकिन इसके बावजूद मुसलमानों की स्थिति में अपेक्षितसुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित करना चाहती है ताकि गरीब मुसलमानों को इसका लाभ मिले। कांग्रेस का आरोप: संविधान की मूल भावना पर हमलाकांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ संपत्तियों कोअपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है और यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन है। संयुक्त संसदीय समिति की समीक्षाविपक्ष के विरोध के चलते वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था। पांच महीने की समीक्षा और 38 बैठकोंके बाद समिति ने अपनी सिफारिशें दीं, जिनके आधार पर संशोधित विधेयक 2025 में संसद में पेश किया गया और पारित हुआ।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ चीन के राजदूत ने शुई फीहॅान्ग ने मनाई केक काटकर 75 वीं वर्षगांठ,खास मुद्दों को लेकर होकर बातचीत

विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के राजदूत शुई फ़ीहॉन्ग ने संयुक्त रूप से केक काटकर भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वींवर्षगांठ मनाई.जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने-अपने चीनी समकक्ष, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग केसाथ शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया. लेकिन असली बात यह है कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है मोदी सरकार ने “डिसएंगेजमेंट” के नाम परलद्दाख में 2,000 वर्ग किमी से अधिक भूमि का समर्पण करके दशकों में भारतीय क्षेत्र के सबसे बड़े नुकसान को स्वीकार करने का फैसला किया है. दरअसल चीन के प्रति प्रधानमंत्री के कायराना रवैये में एक निरंतरता बनी हुई है इसकी शुरुआत उनके द्वारा चीन को दी गई कुख्यात सार्वजनिक क्लीनचिट से हुई. प्रधानमंत्री ने 15 जून 2020 को गलवान में हमारे 20 बहादुर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के केवल चार दिन बाद लाइव टेलीविजन परघोषणा की.”ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है न ही कोई घुसा हुआ है. यह सिलसिला आज भी जारी है. जब मोदी सरकार चीन के साथ सामान्यसंबंध बनाने के प्रयास में हमारी संप्रभुता की रक्षा करने में विफल हो रही है. 21 अक्टूबर 2024 को हुए ‘डिसएंगेजमेंट’ समझौते पर हस्ताक्षर के चारमहीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, भारतीय सरकार अब तक व्यापक चिंताओं को दूर करने में असफल रही है और चिंता यही है किसमझौता भारत की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हित के लिए एक बड़ा झटका है.मोदी सरकार ने गश्त के मूल विचार को ही कमजोर कर दिया है जोक्षेत्रीय अधिकार जताने का एक महत्वपूर्ण संकेत होता है. डेमचोक में है चीन की सहमति की जरुरतआज रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डेपसांग मैदानी क्षेत्र में भारतीय गश्ती दलों को पांच स्थानों चीन की अनुमति की आवश्यकता होती है. इसकेअलावा कथित तौर पर भारतीय गश्त दलों को डेपसांग के अलावा डेमचोक और चुमार में भी चीन की सहमति की जरूरत होती है. गलवान में जिस”बफर ज़ोन” में भारतीय सैनिकों को प्रवेश करने से रोका जाता है वह भारतीय दावा रेखा से 1 किलोमीटर अंदर स्थापित किया गया है इसका मतलबयह है कि चीनी सैनिक हमारी दावा रेखा के करीब तैनात हैं जबकि भारतीय सैनिक 2.4 किलोमीटर से अधिक दूर हैं.हॉट स्प्रिंग में बफर ज़ोन प्रभावीरूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा को भारतीय दावा रेखा के भीतर 1-3 किलोमीटर अंदर खिसका चुका है.पैंगोंग त्सो में “बफ़र ज़ोन” हमारे सैनिकों कोफिंगर 3 से आगे जाने से रोकता है जबकि पहले वे 10 किलोमीटर आगे फिंगर 8 तक जा सकते थे.यह अप्रैल 2020 से पहले मौजूद यथास्थिति केकहीं करीब नहीं है जिसकी मांग हमारी सशस्त्र सेनाओं और रक्षा प्रतिष्ठान द्वारा लगातार मांग की जाती रही है. भारत के महत्वपूर्ण स्थान को है दर्शाताइसके बजाय यह अप्रैल 2020 से पहले की हमारी स्थिति की तुलना में भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र के नुकसान को दर्शाता है.हमारी संप्रभुता पर चीनी घुसपैठ के बावजूद चीन पर हमारी आर्थिक निर्भरता लगातार बढ़ रही है. चीनी आयात $100 अरब को पार कर चुका है और अभी भी तेजी से बढ़ रहा है. जबकि चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है जिन चीनी कंपनियों ने प्रधानमंत्री के करीबी दोस्तों केसाथ साझेदारी करने पर सहमति जताई है उन्हें भारतीय बाजार में प्रवेश देने के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है. जबकि भारत में रोजगार सृजित करनेवाले सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम चीनी आयात के हमले से तबाह हो रहे है.हम अपनी मांग दोहराते हैं कि प्रधानमंत्री इस अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्देपर देश की जनता को विश्वास में लें और स्पष्ट करें कि जब हमारी क्षेत्री अखंडता गंभीर रूप से खतरे में है तब हम चीन के साथ संबंधों को सामान्य क्योंबना रहे हैं और चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता को और बढ़ा क्यों रहे हैं.

आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने बीजेपी पर सीधा निशाना,कहा भाजपा सरकार का बजट नहीं रहा ऐतिहासिक

Delhi News: भाजपा की ‘विपदा’ सरकार के एक लाख करोड़ रुपए के हवा-हवाई बजट को सरकार के अफसरों ने ही एक्सपोज कर दिया है किसरकार ने एक लाख करोड़ रुपए के बजट का दिल्लीवालों को जुमला दिया था. ‘‘आप’’ की वरिष्ठ नेता व नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने वित्त विभाग द्वारासभी विभागों के लिए जारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि 31 मार्च को जारी आदेश के अनुसार किसी भी विभाग को अप्रैल में कुल बजट का 5 फीसद से ज्यादा खर्च करने पर रोक लगा दी गई है.अर्थात भाजपा सरकार एक महीने में मात्र 5 हजार करोड़ रुपए ही खर्च कर सकती है ऐसे में पूरेसाल में सरकार 60 हजार करोड़ रुपए ही खर्च कर पाएगी. इसका मतलब साफ है कि जब पैसा ही नहीं है तो खर्च कैसे होगा भाजपा के झूठ कोउसकी सरकार के ही आदेश ने उजागर कर दिया है. नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने प्रेसवार्ता कर कहा कि पिछले दिनों भाजपा की दिल्ली सरकार ने दिल्लीविधानसभा में बजट पेश किया. दिल्ली की मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रेखा गुप्ता ने बार-बार कहा कि एक लाख करोड़ का बजट दिल्ली विधानसभा मेंपेश हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह एतिहासिक बजट है क्योंकि पहली बार इतना बड़ा बजट दिल्ली विधानसभा में पेश किया जा रहा है. भाजपा सरकार का बजट नहीं है ऐतिहासिकआतिशी ने कहा कि भाजपा सरकार यह बजट ऐतिहासिक इसलिए नहीं है कि यह दिल्ली विधानसभा का सबसे बड़ा बजट है. बल्कि भाजपा सरकारका यह बजट एतिहासिक इसलिए है क्योंकि यह दिल्ली विधानसभा के इतिहास में अब तक का सबसे झूठा बजट है.आतिशी ने कहा कि मैंने बजटसत्र में अपने संबोधन में इसे सिलसिलेवार और तार्किक तरीके से समझाया कि दिल्ली सरकार के पास एक लाख करोड़ रुपए की न आय है और न तोहो सकती है. अगर टैक्स के आंकड़े देखें तो जितने आंकड़े इस बजट में दिए गए हैं. उससे कम से कम 5,000 करोड़ रुपए कम टैक्स आएगा. 10 हजार करोड़ रुपए कम लोन मिलेगा और केंद्र सरकार ने अभी तक अपने बजट में दिल्ली सरकार के लिए एक पैसा भी नहीं रखा है. मैंने अनुमान लगायाथा कि दिल्ली सरकार का बजट वास्तविक करीब 78 हजार करोड़ रुपए का है.आतिशी ने दिल्ली सरकार के कागजात का हवाला देते हुए कहा किदिल्ली सरकार के वित्त विभाग को भी पता है कि सरकार के पास एक लाख करोड़ तो छोड़िए 78 हजार करोड़ रुपए का भी बजट नहीं है. दिल्लीसरकार के पास महज 60 हजार करोड़ रुपए का बजट है उन्होंने कहा कि 31 मार्च को भाजपा कीदिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने जारी किया आदेशदिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने आदेश जारी कर सभी विभागों को आवंटित बजट में 5 फीसद राशि ज्यादा खर्च करने पर रोक लगा दिया है. जिनविभागों को यह हवा-हवाई और जुमलों वाला बजट कागजों पर मिल गया है. उन विभागों को उसे खर्च करने पर रोक लगा दी गई है.आतिशी ने आगे कहा कि अगर इन आंकड़ों का हिसाब लगाते हैं तो एक लाख करोड़ का पांच फीसद 5,000 करोड़ रुपए होता है। यानी अगर सरकारएक महीने में 5,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी. तो 12 महीने में कुल 60 हजार करोड़ बनता है. यानी सरकार को खुद पता है कि उनके पास 60 हजारकरोड़ रुपए से ज्यादा राजस्व या बजट नहीं है. यह आम आदमी पार्टी नहीं कह रही है बल्कि दिल्ली सरकार का वित्त विभाग खुद कह रहा है कि कोईभी विभाग पैसा खर्च नहीं कर सकता. क्योंकि दिल्ली सरकार के पास वास्तविक तौर पर पैसा ही नहीं है. आज भाजपा के झूठ को उसी के सरकारीआदेश ने दिल्ली व देशवासियों के सामने बेनकाब कर दिया. झूठे और जुमलेबाज भाषण देना बहुत आसान है. मैंने सदन में बजट के संबोधन में जोबात कही थी. उसकी पुष्टि दिल्ली सरकार के आदेश कर रहे हैं दिल्ली सरकार के अफसरों ही भाजपा की सरकार को एक्सपोज कर दिया है.