भारत ने पाकिस्तान के यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कसी नकेल, जानिए क्या है पूरा मामला

हाल ही में भारत सरकार ने पाकिस्तान से चलाए जा रहे कुछ यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। सरकारका आरोप है कि ये चैनल भारत के खिलाफ झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर देश की सुरक्षा और एकता को नुकसान पहुंचा रहे थे। क्यों हुई कार्रवाई?भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आईटी नियम, 2021 के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 16 यूट्यूब चैनलों कोब्लॉक करने का आदेश दिया। इनमें से 6 चैनल पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे, जबकि 10 चैनल भारत में थे लेकिन इनकी सामग्री भ्रामक औरउकसाने वाली थी। सरकार का कहना है कि इन चैनलों पर पोस्ट किए जा रहे वीडियो में सांप्रदायिक तनाव फैलाने, दहशत पैदा करने और भारत के संवेदनशील मुद्दों कोतोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा था। इन चैनलों की पहुंच करोड़ों लोगों तक थी और इन्हें लाखों सब्सक्राइबर्स फॉलो कर रहे थे। पाकिस्तान का दुष्प्रचार तंत्रये पहली बार नहीं है जब भारत ने पाकिस्तान के दुष्प्रचार नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की हो। इससे पहले भी जनवरी 2022 में भारत ने पाकिस्तान सेसंचालित 35 यूट्यूब चैनलों और 2 वेबसाइट्स को ब्लॉक किया था। इनमें से कई चैनल ‘अपनी दुनिया नेटवर्क’ और ‘ताल्हा फिल्म्स नेटवर्क’ जैसेसमूहों से जुड़े थे, जिनका मकसद भारत में झूठी खबरें फैलाना और आम लोगों की सोच को भटकाना था। इन यूट्यूब चैनलों की सामग्री पेशेवर तरीके से तैयार की गई थी, ताकि ऐसा लगे कि ये भारत के अंदर से ही चलाई जा रही हैं। लेकिन जांच में पताचला कि इनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। सोशल मीडिया पर भी सख्तीयूट्यूब के अलावा सरकार ने कुछ इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स को भी ब्लॉक किया है, जो पाकिस्तान से भारत विरोधी कंटेंट फैला रहे थे।हालांकि सोशल मीडिया पर एक अफवाह यह भी फैल रही है कि पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर्स—बाबर आजम, शाहीन अफरीदी, मोहम्मद रिजवानऔर हारिस रऊफ के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को भारत ने बंद करवा दिया है। लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह महज अफवाहसाबित हुई है। भारत का सख्त संदेशभारत सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जा रहे झूठ और नफरत को बर्दाश्त नहीं करेगी। ऐसे चैनल औरअकाउंट्स जो देश की अखंडता, सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के खिलाफ काम करेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी खबर या वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें। झूठी खबरें सिर्फ भ्रमनहीं फैलातीं, वे समाज के ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
Delhi High Court Issues Contempt Notice to Baba Ramdev for ‘Sharbat Jihad’ Remark on Rooh Afza

The Delhi High Court has issued a stern remark against Baba Ramdev for calling Rooh Afza a “Sharbat Jihad.” The court also served him with a contempt notice for his comments, stating that he is in contempt of court. The High Court, while hearing a petition challenging Ramdev’s controversial statement about Rooh Afza, observed that Baba Ramdev seems to be living in his own world, uncontrollable by anyone. The court remarked that Ramdev was prima facie in contempt of its previous order. Justice Amit Bansal, presiding over the case, made these remarks during the hearing, which was based on a petition filed by Hamdard, the manufacturer of Rooh Afza. The petition sought to challenge Baba Ramdev’s statement calling Rooh Afza a part of “Sharbat Jihad.” The court expressed displeasure, stating that it appeared as though Baba Ramdev was uncontrollable, as his new video with the same provocative content was uploaded despite the court’s earlier order. Earlier, Baba Ramdev’s lawyer, Rajeev Nair, had informed the court that the objectionable video would be removed. The court had instructed them to file an affidavit ensuring that such comments would not be made in the future. After the controversy, Baba Ramdev had claimed, “I did not take anyone’s name, but Rooh Afza took it upon themselves to call it ‘Sharbat Jihad.’ This clearly indicates they are engaged in ‘Jihad.’” The court had previously expressed its strong disapproval of Ramdev’s statement on April 22. Justice Amit Bansal’s bench described the remark as “unforgivable” and “shocking to the conscience of the court.” The court also stated that his comment was damaging to social harmony and spread hatred. Ramdev’s lawyer had assured the court that the controversial video would be removed from social media platforms.
भाजपा की दिल्ली सरकार की नाकामी पर आम आदमी पार्टी का हमला: “पानी और सीवर की व्यवस्था पूरी तरह से खराब”

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में भाजपा सरकार की सीवर और पानी की व्यवस्था पर तीखा हमला किया है। पार्टी ने आरोप लगायाहै कि भाजपा दिल्ली सरकार ने शहर में पानी और सीवर की समस्या को संभालने में पूरी तरह से नाकामी दिखाई है। “सीवर और गंदा पानी दिल्लीवासियों के लिए नर्क बन गया” – आतिशीआप नेता और दिल्ली की नेता प्रतिपक्ष, आतिशी ने कहा कि पिछले दो महीनों से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सीवर ओवरफ्लो और गंदे पानी कीसमस्या विकराल हो गई है। उन्होंने कहा, “बाल मुकुंद खंड सहित पूरी दिल्ली में लोग नर्क जैसी स्थिति में जी रहे हैं क्योंकि भाजपा सरकार के पासकाम करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।” आतिशी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि बाल मुकुंद खंड, गिरी नगर में लोग सीवर ओवरफ्लो और गंदेपानी से परेशान हैं, लेकिन दिल्ली सरकार अब तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली जल बोर्ड को 9000 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था, लेकिन सीवर की एक छोटी सी लाइन भी ठीक नहीं हो पा रही है।“जल बोर्ड को 9000 करोड़ का बजट मिला, फिर भी काम नहीं हो रहा” – आतिशीआतिशी ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड को 9000 करोड़ रुपये का बजट तो मिला, लेकिन इसके बावजूद काम ठप पड़ा है। उन्होंने कहा, “जल बोर्डने मार्च में सीवर लाइन बदलने के लिए टेंडर तो जारी कर दिया, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया क्योंकि उनके पास फंड की कमी है।” “सीवर का गंदा पानी घरों में घुस रहा” – निवासियों की शिकायतगिरी नगर के बाल मुकुंद खंड के निवासी इस समस्या से बहुत परेशान हैं। उनका कहना है कि पिछले एक महीने से सीवर ओवरफ्लो होने के कारणघरों में गंदा पानी घुस रहा है। इसके कारण उन्हें न केवल पानी का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है, बल्कि पानी से बीमारियां भी फैलने लगी हैं।एक महिला ने कहा, “हम जानवरों से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर हैं। घर के किचन में सीवर का गंदा पानी भर जाता है, जिससे हम बीमार होजाते हैं।” “जल बोर्ड का 9000 करोड़ का बजट क्या सिर्फ एक जुमला था?” – निवासियों का सवालनिवासियों का कहना है कि सीवर लाइन बदलने के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, वह भी बिना फंड के कारण निष्क्रिय पड़ा है। उनका सवाल है, “क्या जल बोर्ड को स्वीकृत किया गया 9000 करोड़ रुपये का बजट सिर्फ एक जुमला था?” आम आदमी पार्टी का सवाल: भाजपा की नाकामी पर कब होगा समाधान?आतिशी ने दिल्ली सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार इसी तरह की नाकामी दिखाती रही तो आम आदमी पार्टी सड़कों पर उतरेगी औरदिल्लीवासियों को उनका हक दिलवाने के लिए संघर्ष करेगी।
पहलगाम हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक जांच से किया इनकार, याचिकाकर्ताओं को लगाई फटकार

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में 26 निर्दोष नागरिकों कीमौत हो गई, जिनमें एक नेपाली पर्यटक भी शामिल था। इस हमले के बाद देशभर में गुस्सा था और कई संगठनों व नागरिकों ने इसकी निष्पक्ष औरस्वतंत्र जांच की मांग की। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। न्यायिक जांच की मांग लेकर पहुँचे याचिकाकर्ताकश्मीर निवासी मोहम्मद जुनैद और दो अन्य याचिकाकर्ता—फतेश कुमार साहू और विक्की कुमार—ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि हमले कीजांच एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष न्यायिक आयोग द्वारा कराई जाए। उनका दावा था कि वर्तमान जांच एजेंसियोंकी निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं, इसलिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है। इसके साथ ही याचिका में एक और मुद्दा उठाया गया—कश्मीर के बाहर पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा। याचिकाकर्ताओं ने आग्रह किया कि इनछात्रों को धमकी और हिंसा से सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए जाएं। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी1 मई 2025 को, इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ—जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह—नेयाचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई और याचिका खारिज कर दी।कोर्ट ने कहा, “गैर-जिम्मेदाराना” बताते हुए यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस समय पूरे देश को एकजुट रहने की आवश्यकता है, न किसंस्थानों पर अविश्वास जताने की। “हम जांच एजेंसी नहीं हैं”: सुप्रीम कोर्टसुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय का कार्य न्याय करना है, न कि जांच करना। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों सेकिसी मामले की जांच कराने की परंपरा तर्कसंगत नहीं है, खासकर जब देश की जांच एजेंसियां पहले से ही कार्रवाई में जुटी हैं। छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उच्च न्यायालय के अधीनजब याचिकाकर्ताओं ने कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, तो अदालत ने उन्हें उचित न्यायिक मंच का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कियह मामला संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आता है और वहां इस पर प्रभावी कार्यवाही हो सकती है। अदालत ने दी चेतावनी और याचिका वापस लेने की अनुमतिसुनवाई के अंत में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह भी चेतावनी दी कि आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं पर “अविवेकपूर्ण” याचिकाएं दायर करना नकेवल सुरक्षा बलों के मनोबल को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि देश की एकता और अखंडता पर भी असर डाल सकता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुमति लेकर याचिका वापस ले ली, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
पहलगाम में आतंक का तांडव: 26 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या, शाह बोले– बख्शा नहीं जाएगा

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पर्यटन स्थल पहलगाम एक बार फिर आतंकवाद की आग में झुलस गया। 22 अप्रैल 2025 को यहां केबैरसन इलाके में आतंकवादियों ने एक बर्बर हमला किया, जिसमें 26 बेगुनाह पर्यटकों की जान चली गई। हमले में एक नेपाली नागरिक भी मारागया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले पर्यटकों की धार्मिक पहचान पूछी, फिर निर्दोषों को गोलियों से छलनी कर दिया। आतंकियों की हाईटेक साजिश का पर्दाफाशराष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की शुरुआती जांच से स्पष्ट हुआ कि यह हमला सामान्य नहीं था, बल्कि कई दिनों की तैयारी और आधुनिक तकनीक केसहारे अंजाम दिया गया। जानकारी के अनुसार, तीन पाकिस्तानी आतंकवादी 15 अप्रैल को कश्मीर पहुंचे थे। उन्होंने घाटी के प्रमुख पर्यटन स्थलों कीरेकी की और उसके बाद हमला किया। उन्होंने एक विशेष संचार प्रणाली ‘अल्ट्रा स्टेट कम्युनिकेशन’ का उपयोग किया जो कि लोकेशन छुपाने में सक्षम है और अत्याधुनिक एनक्रिप्शन केजरिए सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह कर देती है। पहले भी थे निशाने पर गैर-कश्मीरीNIA को यह भी जानकारी मिली है कि इन आतंकियों का संबंध पिछले वर्ष गंदेरबल जिले में हुए हमले से भी है, जिसमें गैर-कश्मीरी मजदूरों और एकडॉक्टर की हत्या की गई थी। इससे यह जाहिर होता है कि इन हमलों के पीछे एक लंबे समय से चल रही रणनीति है, जिसका मकसद घाटी में डरफैलाना और बाहरी लोगों को निशाना बनाना है। गृह मंत्री का सख्त संदेशहमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यह मोदी सरकार है, हम एक-एक आतंकी को खोजकर खत्म करेंगे। किसीको बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की जमीन पर आतंक को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और सुरक्षाएजेंसियां पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं। न्यायिक जांच की मांग खारिजहमले के बाद एक जनहित याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक जांच की मांग की गई, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे सिरे से खारिज करदिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए और न्यायपालिका को अनावश्यक रूप सेहस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की याचिकाएं कभी-कभी सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने वाली साबित होती हैं। INS सूरत की ताकत का प्रदर्शनइस हमले के कुछ दिनों बाद ही भारतीय नौसेना ने अरब सागर में एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया। इस दौरान नौसेना के अत्याधुनिक विध्वंसक युद्धपोतINS सूरत ने मिसाइल परीक्षण किया। यह युद्धपोत न केवल सतह से सतह पर मार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है, बल्कि इसमें एंटी-सबमरीनरॉकेट लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम भी हैं। नौसेना का यह अभ्यास पाकिस्तान और अन्य विरोधियों को स्पष्ट संकेत था कि भारत अपनी जलसीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार कीढिलाई नहीं बरतेगा। संदेश स्पष्ट है: आतंक को नहीं मिलेगी पनाहयह हमला न सिर्फ एक अमानवीय कृत्य था, बल्कि यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द पर भी एक सीधा हमला था। हालांकि, सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों का रुख स्पष्ट है—आतंक के सामने झुकना नहीं है। देश एकजुट है और यह संदेश देना चाहता है कि चाहे दुश्मन कितना भी शातिर क्यों न हो, भारत उसकी हर कोशिश को नाकाम करेगा।
Tragedy at Simhachalam Temple, 7 Devotees Killed as Wall Collapses Amid Heavy Rain in Andhra Pradesh

A tragic incident occurred near the renowned Sri Varaha Lakshmi Narasimha Swamy Temple in Simhachalam, Andhra Pradesh, where a cement wall suddenly collapsed, killing seven devotees and injuring several others. The accident took place while devotees were waiting in a queue with ₹300 tickets to enter the temple for darshan. According to reports, the collapse was triggered by heavy rainfall, which caused a landslide and weakened the foundation of the wall. The wall was located near a shopping complex close to the temple, along the route from Simhagiri bus stand. The moment the wall collapsed, chaos ensued, and rescue operations were launched immediately. Andhra Pradesh Home Minister V. Anitha, along with the District Collector of Visakhapatnam and the city Police Commissioner, rushed to the spot to oversee the rescue efforts. The initial findings suggest that the continuous downpour had loosened the soil, leading to the wall’s sudden fall. Authorities assured that the government is closely monitoring the situation and providing all necessary assistance to the victims. Teams from the State Disaster Response Force (SDRF), fire brigade, and local police have been deployed for rescue and relief efforts. There are fears that more people may still be trapped under the debris, and efforts to rescue them are ongoing. The injured have been admitted to nearby hospitals, where they are receiving treatment. Authorities are in the process of identifying the deceased and notifying their families. The Chief Minister’s office has requested a detailed report on the incident, and an official compensation announcement is expected soon. The tragedy occurred at a time when the temple was witnessing a large influx of devotees, making the incident even more heartbreaking.
Tragic Fire Breaks Out at Hotel in Kolkata’s Falapatti Machhua Area, 14 Dead, Rescue Operations Underway

A tragic fire broke out at a hotel in Kolkata’s Falapatti Machhua area, leading to the deaths of at least 14 people. According to reports, a senior police officer informed that the incident occurred on Tuesday evening in the central part of Kolkata. The fire broke out in the Rituraj Hotel around 8:15 PM. “Fourteen bodies have been recovered, and several people have been rescued by the teams,” said Manoj Kumar Verma, the Kolkata Police Commissioner, while speaking to the media. The hotel had around 60 people inside at the time of the fire. The victims included 11 men, one woman, and two children. Eight of the bodies have been identified. In addition to the fatalities, 13 people were injured, with 12 having been discharged from the hospital and one still admitted.Fire in Busy Area of KolkataAccording to reports from PTI, ten fire engines were dispatched to control the blaze. However, emergency services faced difficulties in the densely crowded Badabazar area, one of the largest wholesale markets in Eastern India. During the fire, many people attempted to escape through the building’s windows and narrow walls. The rescue operation is still ongoing, and a special team has been formed to investigate the cause of the incident.Calls for Improved Fire Safety MeasuresUnion Minister and West Bengal BJP President Sukanta Majumdar urged the state government to immediately rescue the affected people and ensure their safety. He also called for stricter monitoring of fire safety measures to prevent such tragic incidents in the future. In his social media post, Majumdar stated, “I urge the state administration to ensure that affected people are rescued immediately, their safety is assured, and they receive the necessary medical and humanitarian assistance. Additionally, I appeal for a review of fire security measures and strict surveillance to prevent such unfortunate incidents in the future.”Mayor and Police Commissioner Visit the SceneKolkata’s Mayor Firhad Hakim and Police Commissioner Verma visited the scene to oversee the firefighting efforts and ensure the ongoing rescue operations were efficient.Criticism of Kolkata Municipal CorporationReacting to the incident, West Bengal Congress President Shubhankar Sarkar criticized the Kolkata Municipal Corporation, pointing out the lack of safety measures in the building. Sarkar told ANI, “This is a tragic incident. A fire broke out, and many people got trapped inside. There was no safety. I don’t know what the corporation is doing.” The tragic incident has raised serious concerns about fire safety in densely populated areas of Kolkata and the need for better infrastructure to protect citizens during emergencies.
राहुल गांधी का कानपुर दौरा, पहलगाम हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के परिजनों से की मुलाकात

कानपुर (उत्तर प्रदेश): कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने बुधवार कोअचानक कानपुर का रुख किया और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के घर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकातकी। संसद में विशेष सत्र की उठाई मांगराहुल गांधी ने इस दर्दनाक घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि संसद में इस हमले पर विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए, जिसमें शोक जताने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति पर चर्चा हो। उन्होंने शुभम की शहादत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की बात भी कही। शुभम को मिले ‘शहीद’ का दर्जा – ऐशन्या की मांगशुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या ने राहुल गांधी के सामने मांग रखी कि उनके पति को शहीद का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक हमले मेंउनके पति ने अपनी जान गंवाई, और उन्हें वह सम्मान मिलना चाहिए जो एक वीर को दिया जाता है। राहुल गांधी ने इस पर भरोसा दिलाया कि वहयह मुद्दा संसद और प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे। प्रियंका गांधी से भी कराई बातचीतराहुल गांधी ने परिवार की भावना को समझते हुए ऐशन्या और उनके परिजनों की प्रियंका गांधी से फोन पर बात कराई। यह कदम परिजनों के लिएभावनात्मक समर्थन का प्रतीक बनादुख से भर उठे शुभम के माता-पिता और पत्नीमुलाकात के दौरान भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी के अनुसार, जैसे ही राहुल गांधी पहुंचे, शुभम की पत्नी ऐशन्या फूट-फूट कर रोने लगीं। राहुल ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया। शुभम के पिता की आंखें भी नम हो गईं। ऐशन्या ने राहुल गांधी को बताया कि जिसवक्त हमला हुआ, वहां कोई सुरक्षा बल मौजूद नहीं था। पहलगाम आतंकी हमला: एक दुखद घटना22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में हुए आतंकी हमले में कानपुर निवासी शुभम द्विवेदी समेत 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। शुभमअपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने गए थे और पत्नी के सामने ही आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी। यह यात्रा शुभम की शादी के महज दो महीनेबाद की थी – उनका विवाह 12 फरवरी को हुआ था। मुख्यमंत्री योगी और अन्य नेताओं ने भी जताया दुखइस हमले के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 23 अप्रैल को शुभम के परिवार से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने परिजनों को हरसंभव सहायतादेने का आश्वासन दिया और कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। आप सांसद संजय सिंह भी शुभम के घर जाकर संवेदना व्यक्तकर चुके हैं।कांग्रेस नेताओं की उपस्थितिराहुल गांधी के साथ यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी मौजूद थे। अजय राय पहले भी शुभम के अंतिम संस्कार में शामिल होकर परिजनों का दुखबांट चुके हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले में सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलते ही शुरू हुई चारधाम यात्रा 2025

उत्तरकाशी/उत्तराखंड – अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर बुधवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण व विधिवत पूजा-अर्चना केसाथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा 2025 का भी औपचारिक शुभारंभ हो गया। मुख्यमंत्री धामी ने की प्रधानमंत्री के नाम से पहली पूजामुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री और यमुनोत्री दोनों धामों में कपाटोद्घाटन समारोह में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजाका संकल्प लिया। सीएम धामी यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन में शरीक होने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने देश और प्रदेश की समृद्धि, शांति और सफल चारधाम यात्रा की कामना करते हुए विशेष प्रार्थना की। गंगोत्री में पूजा के बाद खुले कपाटगंगोत्री धाम में बुधवार प्रातः मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी से रवाना होकर मंदिर प्रांगण पहुंची। पूर्वाह्न 10:30 बजे विशेष पूजा और वैदिकमंत्रोच्चारण के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आराधना कर पुण्य प्राप्त किया। यमुनोत्री धाम में भी श्रद्धा का सैलाबमां यमुना की डोली शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली से शनिदेव महाराज की अगुवाई में यमुनोत्री धाम पहुंची। 11:55 बजे यमुनोत्री मंदिर के कपाटखोले गए। यहां भी देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और अखंड ज्योति के दर्शन कर गंगा व यमुना में आस्था की डुबकी लगाई। हेलीकॉप्टर से हुई पुष्प वर्षागंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलने के समारोह के दौरान दोनों मंदिरों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिसने माहौल को भक्तिमय औरदिव्य बना दिया। सीएम ने लोक देवताओं की डोलियों से लिया आशीर्वादमुख्यमंत्री ने दोनों धामों में पहुंचे लोक देवताओं की डोलियों से भी आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर में शीश नवाते हुए विशेष पूजा-अर्चना की औरसभी श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा की शुभकामनाएं दीं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए गए व्यापक इंतजाममुख्यमंत्री धामी ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्गों पर सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।स्वास्थ्य, परिवहन, आवास और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। ‘ग्रीन एंड क्लीन यात्रा’ के लिए की गई अपीलमुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से ग्रीन और क्लीन चारधाम यात्रा के लिए सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि देवभूमिउत्तराखंड की पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है, और अतिथि देवो भवः की परंपरा के अनुरूप सभी यात्रियों को सुखद अनुभव दिलानाहमारा उद्देश्य है। उपस्थित रहे कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधिगंगोत्री धाम के कार्यक्रम में विधायक सुरेश चौहान, गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल, पूर्व विधायक विजय पाल सजवाण, जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, और एसपी सरिता डोबाल मौजूद रहे। वहीं यमुनोत्री धाम में मुख्य विकास अधिकारी एसएल सेमवाल, एसडीएम बृजेश तिवारी, मंदिर समिति उपाध्यक्ष संजीव उनियाल और सचिव सुनील उनियाल भी उपस्थित थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा में बड़ा बदलाव: पूर्व RAW प्रमुख आलोक जोशी बने NSAB के नए अध्यक्ष

नई दिल्ली – भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में बड़ा और अहम बदलाव करते हुए मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के नएअध्यक्ष के रूप में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी की नियुक्ति की है। यह कदम भारत की सुरक्षा व्यवस्था को औरअधिक सुदृढ़ एवं दूरदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस नियुक्ति के साथ यह संकेत दिया हैकि देश की सुरक्षा नीति अब और अधिक रणनीतिक, व्यावहारिक और अनुभवी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रही है। कौन हैं आलोक जोशी?आलोक जोशी 1978 बैच के हरियाणा कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं। उन्होंने देश की बाहरी खुफिया एजेंसी RAW के प्रमुख केरूप में 2012 से 2014 तक कार्यभार संभाला था। अपने कार्यकाल में उन्होंने आतंकवाद रोधी नीति, सीमा पार निगरानी, और अंतरराष्ट्रीय खुफियासहयोग जैसे जटिल मसलों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जोशी को खुफिया तंत्र में उनकी गहरी समझ, शांत नेतृत्व शैली और राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। RAW प्रमुख के रूप मेंकार्यकाल के बाद से वे रणनीतिक विषयों पर केंद्र और थिंक टैंक के साथ जुड़कर सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे। NSAB क्या है और इसका महत्व क्यों है?राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB), भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) के तहत कार्य करने वाली एक सलाहकार संस्था है। इसका मुख्यकार्य देश की दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाओं पर विचार करना, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विश्लेषण देना और प्रधानमंत्री को सुझाव देनाहोता है। यह बोर्ड रणनीतिक थिंक टैंक, पूर्व सैन्य अधिकारियों, वैज्ञानिकों, राजनयिकों और खुफिया विशेषज्ञों से मिलकर बनता है। इसका अध्यक्ष अक्सर ऐसाव्यक्ति होता है, जिसे व्यापक सुरक्षा अनुभव और दीर्घकालिक दृष्टिकोण हो। सरकार का उद्देश्य: रणनीतिक दृष्टिकोण को मजबूत करनामोदी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को आक्रामक और सक्रिय रूप देने की दिशा में कई अहम बदलाव किए हैं – फिर चाहेवह सीमापार सर्जिकल स्ट्राइक हो, साइबर सुरक्षा को लेकर नीति हो, या फिर समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चौकसी। आलोक जोशी की नियुक्ति इसी क्रम में एक तार्किक अगला कदम मानी जा रही है। वे खुफिया संचालन और रणनीतिक विश्लेषण दोनों के माहिरमाने जाते हैं। सरकार को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में NSAB देश की सुरक्षा को लेकर ज्यादा व्यावहारिक, समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोणविकसित कर सकेगा। भविष्य की चुनौतियाँ और NSAB की भूमिकाभारत को वर्तमान समय में कई जटिल सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है — चीन के साथ सीमा विवाद, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद, साइबर हमलों का खतरा, समुद्री सुरक्षा, आंतरिक कट्टरपंथ, और तकनीकी जासूसी जैसे मुद्दे। ऐसे में NSAB की भूमिका अब केवल सुझाव देने तकसीमित नहीं रह सकती। उसे नीतिगत प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी निभानी होगी। आलोक जोशी के नेतृत्व में बोर्ड से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह नई पीढ़ी की तकनीकों, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा, क्वांटमसाइबर सुरक्षा आदि के संदर्भ में भारत की सुरक्षा नीति को आधुनिक बनाए। पूर्व अध्यक्षों की भूमिका और तुलनाNSAB के पहले भी कई प्रतिष्ठित लोग अध्यक्ष पद पर रहे हैं, जिनमें के. सुब्रमण्यम जैसे रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल हैं। हाल के वर्षों में यह बोर्डअपेक्षाकृत शांत पड़ा था, लेकिन अब सरकार इसे फिर से सक्रिय करना चाहती है। आलोक जोशी की नियुक्ति यह संकेत देती है कि सरकार NSAB को फिर से नीतिगत रूप से केंद्रीय भूमिका में लाने की तैयारी में है, विशेषकर तबजब भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपने सामरिक हितों का विस्तार कर रहा है। राजनीतिक और रणनीतिक संदेशयह नियुक्ति सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है। इससे यह संकेत गया है कि सरकार अब “रिएक्टिव” नहीं, बल्कि”प्रोएक्टिव” सुरक्षा नीति पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आलोक जोशी जैसे अनुभवी अधिकारी को इस पद पर नियुक्त करना बताता है कि भारत अबखुफिया और रणनीतिक नीतियों में स्थायित्व और अनुभव को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।