पीओके वापस लेने का मौका था, लेकिन मोदी सरकार ने पीछे हटकर देश को धोखा दिया – सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर(पीओके) को वापस लेने का सुनहरा अवसर होते हुए भी सरकार पीछे हट गई और देश के साथ धोखा किया। “जान देने की बात करने वाली भाजपा ने युद्ध विराम कर दिया”सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा नेताओं, जिनमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह शामिल हैं, ने वर्षों तक पीओके को भारत मेंमिलाने की कसमें खाईं। वे कहते रहे कि इसके लिए जान भी दे देंगे। लेकिन जब वाकई मौका आया, तो सरकार ने संघर्षविराम की घोषणा कर दी। “प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना की जीत का मौका गवां दिया”भारद्वाज ने कहा कि हमारी सेना पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक बढ़त पर थी। भारतीय वायुसेना और थलसेना ने पाकिस्तान को पूरी तरह मात दीथी। ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम किया गया। सेना पीओके तक पहुँचने को तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने सीजफायर कर युद्ध रोक दिया। “78 साल से भाजपा कर रही थी जनता को गुमराह”उन्होंने कहा कि पिछले सात दशकों से भाजपा पीओके मुद्दे पर लोगों को झूठे वादे करके गुमराह करती रही है। अब जब उन्हें कार्रवाई का मौका मिला, तो उन्होंने अपने ही संकल्प से पीछे हटकर साबित कर दिया कि पीओके को लेकर उनकी इच्छाशक्ति सिर्फ राजनीतिक नारा थी।“तिरंगा यात्रा से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश”सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि अब सरकार हताश कार्यकर्ताओं को तिरंगा यात्रा निकालने के लिए कह रही है ताकि युद्धविराम से उपजे जनाक्रोशको दबाया जा सके। उन्होंने कहा कि दशकों से शाखाओं में सुबह-सुबह पीओके का पाठ पढ़ने वाले स्वयंसेवक आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। “क्या भाजपा ने पीओके को भूलने का फैसला कर लिया है?”भारद्वाज ने सीधा सवाल किया, “क्या भाजपा अब पीओके को लेकर अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति खो चुकी है? जब भारत की सेना जीत रही थी, तब युद्ध क्यों रोका गया? क्या भाजपा का पीओके लौटाने का वादा एक छलावा था?” “इतिहास ने मोदी को मौका दिया, लेकिन उन्होंने उसे खो दिया”सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इतिहास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पीओके हासिल करने का सबसे बड़ा अवसर दिया था। पाकिस्तान हार रहा था औरभारत जीत रहा था, लेकिन सीजफायर कर यह अवसर गंवा दिया गया। “योगी आदित्यनाथ का वादा भी झूठा साबित हुआ”उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने चुनावी मंचों से कहा था कि मोदी तीसरी बार पीएम बनेंगेतो छह महीने में पीओके भारत का हिस्सा होगा। अब छह महीने से भी ज़्यादा हो चुके हैं, और सरकार युद्ध विराम कर सेना को वापस बुला चुकी है।
आतिशी ने पीएम मोदी से पूछा, पहलगाम हमले का बदला लिए बिना क्यों हुआ संघर्ष विराम?

पहलगाम हमले का बदला लिए बिना संघर्षविराम क्यों? — आतिशी ने पीएम मोदी से पूछे तीखे सवाल“क्या संघर्षविराम का समय था? क्या हमने अपनी बेटियों के सिंदूर का बदला ले लिया? क्या पहलगाम हमले के दोषियों को भारत को सौंपा गया?” – आतिशी भारत की जनता को चाहिए जवाबअगर पाकिस्तान ने संघर्षविराम की गुहार लगाई, तो इसका ऐलान भारत की बजाय अमेरिका ने क्यों किया?अगर पाकिस्तान ने हार मानी, तो उसने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा क्यों नहीं की?क्या पहलगाम हमले के गुनहगार भारत को सौंपे गए?क्या अमेरिकी व्यापार का दबाव भारत की बेटियों के सम्मान से बड़ा हो गया है? दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम स्वीकार किएजाने पर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय सेना आतंकवादियों और उनके सरपरस्तों पर करारा वार कर रही थी, तभी अमेरिका केहस्तक्षेप पर भारत ने अचानक चुपचाप संघर्षविराम मान लिया। आतिशी ने पूछा, “क्या हमारी बेटियों के सिंदूर की कीमत अमेरिकी व्यापार से कम है? क्या यह न्याय है कि हमला भारत पर हो और समझौताअमेरिका के दबाव में हो?” पहलगाम हमला – देश की आंखों में आंसूआतिशी ने बताया कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया गया।“उस दिन पूरे देश ने हमारी बेटियों की आंखों में आंसू देखे और न्याय की मांग की,” उन्होंने कहा। ऑपरेशन सिंदूर – सेना का जवाबआम आदमी पार्टी की नेता ने बताया कि जब 7 मई को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, तो पूरा देश एकजुट था। सभी दलों ने सरकारका समर्थन किया क्योंकि यह सवाल था भारत की अस्मिता का और हमारी बेटियों की शहादत का। अमेरिका ने किया संघर्षविराम का ऐलान, भारत ने चुपचाप मान लियाआतिशी ने सवाल उठाया कि 10 मई को संघर्षविराम की घोषणा भारत या भारतीय सेना ने नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की—वो भीसोशल मीडिया के ज़रिये। आधे घंटे बाद भारत ने बिना कुछ कहे इसे स्वीकार कर लिया। तीखे सवाल, जिनका जवाब देश मांग रहा है. अगर पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया, तो इसकी घोषणा भारत ने क्यों नहीं की?. क्या पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से हार मानी? कोई समझौताया बयान क्यों नहीं आया?क्या पहलगाम हमले के दोषियों को भारत को सौंपा गया? क्या अमेरिका के दबाव में लिया गया फैसला?आतिशी ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद कहा कि उन्होंने भारत को व्यापार रोकने की धमकी दी थी। उन्होंने पीएम मोदी से सीधासवाल पूछा—“प्रधानमंत्री जी, क्या अमेरिका से व्यापार भारत की बेटियों के सिंदूर से ज़्यादा कीमती हो गया है?” आखिरी सवाल: न्याय कब मिलेगा?“जब तक पहलगाम हमले के गुनहगार भारत के हाथ में नहीं आते, तब तक यह संघर्षविराम अधूरा और अपमानजनक है,” आतिशी ने कहा।”प्रधानमंत्री को अब चुप्पी तोड़नी होगी और देश को सच बताना होगा।”
अपनी शर्तों पर देंगे हर आतंकी हमले का जवाब..आदमपुर से पीएम मोदी की हुंकार, कहा- घर में घुसकर मारेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के आदमपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को दोहराया औरस्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले का जवाब अपनी शर्तों पर देगा। उन्होंने कहा, “हम वो भारत नहीं हैं जो चुपचाप सह ले, हमघर में घुसकर मारते हैं और आतंक का अंत करते हैं।” पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष चेतावनीप्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत अबउस दौर से निकल चुका है जब आतंकी हमलों का जवाब सिर्फ कड़ी निंदा से दिया जाता था। अब अगर कोई भारत की तरफ आंख उठाएगा तो उसेउसी की भाषा में जवाब मिलेगा। सर्जिकल और एयर स्ट्राइक का उल्लेखपीएम मोदी ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक का ज़िक्र करते हुए कहा, “हमारे वीर जवानों ने दिखा दिया किभारत अब केवल शब्दों से नहीं, कर्म से जवाब देता है।” उन्होंने कहा कि ये नए भारत की पहचान है, जो जवाब देने में देर नहीं करता और सीमा पार भीदुश्मन को सबक सिखाता है। आतंरिक सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा पर फोकसमोदी ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने बीते वर्षों में न केवल सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा तंत्र को भी बेहतरबनाया है। उन्होंने कहा, “हमने सुरक्षाबलों को खुली छूट दी है। उन्हें आदेश नहीं, आज़ादी दी गई है कि वे जब चाहें, जैसे चाहें देश के दुश्मनों कासफाया करें।” कांग्रेस के दौर में आतंकवाद पर नरमी’ का आरोपरैली के दौरान पीएम मोदी ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के समय आतंकवादी घटनाएं बढ़ती थींऔर देश केवल सहता था। “कांग्रेस के समय में मुंबई हमले होते थे, संसद पर हमले होते थे, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया जाता था। आज भारत चुपनहीं बैठता, जवाब देता है,” उन्होंने कहा। सेना और सुरक्षा बलों की सराहनाप्रधानमंत्री ने भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि हमारे जवानों ने हमेशा देश के लिए जान की बाज़ी लगाई है।“चाहे कारगिल हो, पुलवामा हो या हाल की शोपियां मुठभेड़ – हमारे सैनिक हर चुनौती से निपटने में सक्षम हैं,” उन्होंने कहा। शहीदों को श्रद्धांजलिपीएम मोदी ने देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को भी याद किया और कहा कि उनके बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंनेकहा कि देशवासी न केवल अपने सुरक्षाबलों पर गर्व करते हैं, बल्कि उनके पीछे चट्टान की तरह खड़े भी रहते हैं। युवा पीढ़ी को किया प्रेरितअपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने युवाओं से देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हमेशा सजग और जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की।उन्होंने कहा, “युवाओं को यह समझना होगा कि आजादी केवल अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है – और आतंकवाद के खिलाफ हमारी यह लड़ाई उन्हींके सुरक्षित भविष्य के लिए है।” रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का ज़िक्रपीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर ज़ोर दिया है। “आज हम न केवल अपनी सेना के लिए हथियार बना रहेहैं, बल्कि दुनिया को निर्यात भी कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।
शोपियां मुठभेड़: सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को किया ढेर

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में मंगलवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। यह मुठभेड़ शुकरू केलर क्षेत्र के जंगलों में हुई, जहां आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस अभियान के दौरान आतंकियों ने गोलीबारीशुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने कार्रवाई करते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे आतंकीमारे गए आतंकियों की पहचान में दो नाम सामने आए हैं। इनमें से एक का नाम शाहिद कुट्टे पुत्र मोहम्मद यूसुफ कुट्टे है, जो शोपियां के ही चोटिपोराहीरपोरा का निवासी था। शाहिद मार्च 2023 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। वह अप्रैल 2024 में डेनिश रिसॉर्ट पर हुए हमले और मई 2024 में भाजपा सरपंच की हत्या में शामिल रहा है। इसके अलावा, फरवरी 2025 में कुलगाम में हुए टीए कर्मी की हत्या में भी उसकी संलिप्तता कीआशंका जताई जा रही है। भारतीय सेना का बयानभारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 13 मई 2025 को राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट को विशेष खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर शोकल केलर क्षेत्र में अभियान चलाया गया। इस दौरान आतंकियों ने जबरदस्त गोलीबारी की, जिसका जवाब देते हुए सेना ने तीनकट्टर आतंकवादियों को ढेर कर दिया। क्षेत्र में अभी भी तनावपूर्ण माहौलमुठभेड़ के बाद क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी है और सुरक्षा बल किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सतर्क हैं।
भारत और पाकिस्तान तनावपूर्ण रिश्तों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देश को किया संबोधित, देश की पराक्रमी सेनाओं और भारतवासी को किया सलाम

भारत और पाकिस्तान तनावपूर्ण रिश्तों के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात ने आज देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि बीते दिनों में हमने देशका सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा है. मैं सबसे पहले भारत की पराक्रमी सेनाओं, सशस्त्र बलों, हमारी खुफिया एजेंसियों, हमारे वैज्ञानिकों को हरभारतवासी की तरह से सलाम करता हूं. हमारे वीर सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया. मैं हमारे देशकी हर माता को देश की हर बहन को और देश की हर बेटी को यह वीरता, साहस, पराक्रम को आज समर्पित करता हूं. 22 अप्रैल को पहलगाम मेंआतंकियों ने जो बर्बरता दिखाई थी. उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था छुट्टियां मना रहे निर्दोष मासूम नागरिकों को धर्म पूछकर उनकेपरिवार के सामने, उनके बच्चों के सामने बेरहमी से मार डाला गया था। यह आतंक का बहुत वीभत्स चेहरा था क्रूरता थी यह देश के सद्भाव को तोड़नेकी घिनौनी कोशिश भी थी मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से यह पीड़ा बहुत बड़ी थी. सेनाओं को दे दी गई आतंकियों को ढेर करने की पूरी छूटइस आतंकी हमले के बाद सारा राष्ट्र, हर नागरिक, हर वर्ग, हर समाज, हर राजनीतिक दल एक स्वर में आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उठखड़ा हुआ. हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनाओं को पूरी छूट दे दी और आज हर आतंकी, आतंक का हर संगठन जानचुका है कि हमारी बहन और बेटियों के माथों से सिंदूर हटाने का अंजाम क्या होता है. पीएम मोदी ने कहा ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ नाम नहीं है. यह देशके कोटि-कोटि लोग भावनाओं का प्रतिबिंब है. ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है 6 मई की दूर रात, 7 मई की सुबह पूरी दुनिया ने इसप्रतिज्ञा को परिणाम में बदलते देखा है.भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर, उनके ट्रेनिंग सेंटर्स पर सटीक प्रहार किया. आतंकियोंने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इतना बड़ा फैसला ले सकता है. लेकिन जब देश एकजुट होता है नेशन फर्स्ट की भावना से भरा होता है राष्ट्रसर्वोपरि होता है तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं. परिणाम लाकर दिखाए जाते हैं. जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमलाकिया भारत के ड्रोन्स ने हमला बोला तो आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं बल्कि उनका हौसला भी थर्रा गया. बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकीठिकाने एक प्रकार से ग्लोबल टेररिज्म की यूनिवर्सिटी रहे हैं. दुनिया में कहीं पर भी जो बड़े आतंकी हमले हुए हैं. चाहे 9/11 हो, चाहे लंदन ट्यूबबॉम्बिंग हो या भारत में दशकों से बड़े-बड़े आतंकी हमले हुए हैं. उन सभी के तार कहीं न कहीं आतंक के इन्हीं ठिकानों से जुड़ते रहे हैं.
पाकिस्तान ने लगाई थी अमेरिका से संघर्ष विराम की गुहार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की थी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत

सैनिक अड्डों और वायु रक्षा प्रणाली पर भारत के हमलों से घबराए पाकिस्तान ने अमेरिका से संघर्ष विराम के लिए गुहार लगाई थी. जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस संबंध में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की तो उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि पाकिस्तान के हर दुस्साहस काजवाब देंगे. दरअसल पाकिस्तान की ओर से परमाणु हमले का खतरा मानकर अमेरिका पाकिस्तान की इस पेशकश को स्वीकार कर खुद ही शांतिबहाली के लिए दोनों देशों के बीच कूद गया. जब वेंस ने दो दिन पहले कहा था कि हम संघर्ष के बीच में नहीं पड़ेंगे। यह दोनों देशों के बीच कामामला है तो अमेरिका को खतरा बढ़ने के आसार दिखने लगे. इसी बीच पाकिस्तान ने संघर्षविराम की बात की और अमेरिका तत्काल आगे आया वेंसऔर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों के अफसरों से बात शुरू कर दी थी. पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र में हमले के लिए 400 से 500 ड्रोन भेजे लेकिन चिंता की सबसे बड़ी वजह शुक्रवार देर रात पैदा हुई. जब पाकिस्तान के रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर धमाके हुए यहइस्लामाबाद से सटा हुआ शहर है यह एयर बेस पाकिस्तान के लिए काफी अहम है क्योंकि यह उसकी सेना के लिए केंद्रीय परिवहन केंद्रों में से एक हैऔर हवा में ईंधन भरने की क्षमता का घर है. पाकिस्तान को परमाणु कमार प्रधिकरण से है डरदरअसल इसके साथ ही यह पाकिस्तान के रणनीतिक योजना प्रभाग के मुख्यालय से भी कुछ ही दूरी पर है जो देश के परमाणु शस्त्रागार की देखरेखऔर सुरक्षा करता है. पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से लंबे समय से परिचित एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को सबसे ज्यादाडर अपने परमाणु कमान प्राधिकरण के खत्म हो जाने का है. नूर खान पर मिसाइल हमले को एक चेतावनी के रूप में देखा गया कि भारत ऐसा कर भीसकता है. यह साफ नहीं है कि क्या अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने संघर्ष के तेजी से बढ़ने तथा संभवत परमाणु हमले की ओर इशारा किया था. हालांकि सार्वजनिक तौर पर परमाणु हमले का एकमात्र स्पष्ट संकेत पाकिस्तान की ओर से आया. अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन मेंपाकिस्तान की परमाणु धमकी पर चर्चा हुई साथ ही व्हाइट हाउस यह भी समझ चुका था कि कुछ सार्वजनिक बयान और इस्लामाबाद और दिल्ली केअधिकारियों को कुछ फोनकॉल करना ही पर्याप्त नहीं है क्योंकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के हस्तक्षेप का पाकिस्तान पर कोई खासअसर नहीं हुआ था. डीजीएमओ स्तर की बातचीत की चर्चा के बीच विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पाकिस्तान से एनएसए स्तर की कोई भीबातचीत नहीं की जाएगी. सोशल मीडिया पर चल रही है फेक खबरेंदरअसल सोशल मीडिया पर लगातार इस पर फेक खबरें भी चल रही हैं कि भारत और पाकिस्तान के एनएसए आपस में बातचीत करेंगे इस पर विदेशमंत्रालय सूत्रों ने बताया है कि एनएसए स्तर पर कोई बात नहीं होगी. ट्रंप प्रशासन इस बात से भी चिंतित था कि तनाव कम करने के संदेश दोनों पक्षोंके शीर्ष अधिकारियों तक नहीं पहुंच रहे थे. इसलिए अमेरिकी अधिकारियों ने फैसला किया कि वेंस को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करनीचाहिए. उनका संदेश यह था कि अमेरिका ने यह आकलन किया है कि हिंसा में नाटकीय वृद्धि होने की बहुत अधिक संभावना है और संघर्ष पूर्ण रूप सेयुद्ध में तब्दील हो सकता है. अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने मोदी पर लगातार हमलों पर विचार करने को कहा मोदी ने उनकी बात सुनी और स्पष्टकर दिया कि यदि पाकिस्तान ने दुस्साहस किया तो भारत हर सूरत में जवाब देगा. पाकिस्तान के विपरीत भारत ने संघर्ष विराम में किसी भी तरह कीअमेरिकी संलिप्तता को स्वीकार नहीं किया है. पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी जारी रहने से यह भी स्पष्ट नहीं था कि संघर्ष विराम कायम रहेगा यानहीं वरिष्ठ पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों को युद्ध के कगार से वापस लाने के लिए अमेरिकी हस्तक्षेप की आवश्यकता थी.
खरोरा सड़क हादसे पर शोक की लहर: मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने जताया दुख, मुआवजे की घोषणा

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के खरोरा क्षेत्र में देर रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को शोक में डुबो दिया है। इस हादसे में 13 लोगों की जानचली गई, जबकि 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस हृदयविदारक दुर्घटना पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों केपरिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजाररुपये की सहायता राशि प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने दिए त्वरित राहत और उपचार के निर्देशमुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने और घायलों के समुचित उपचार की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंनेकहा, “खरोरा क्षेत्र में हुई भीषण दुर्घटना की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। मैं दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामनाकरता हूँ। राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।” कैसे हुआ हादसा: छठी कार्यक्रम से लौट रहे थे लोगयह दर्दनाक हादसा रविवार देर रात लगभग डेढ़ बजे रायपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर खरोरा के पास बंगोली गांव में हुआ। मिनी ट्रक में सवार लोगएक पारिवारिक छठी कार्यक्रम से लौट रहे थे, तभी सामने से तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रेलर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही13 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 9 महिलाएं, 2 बच्चियां, एक बच्चा और 6 माह की एक शिशु शामिल हैं। घायलों को खरोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं रायपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस और स्थानीयप्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, की मुआवजे की घोषणाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस भीषण हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “रायपुर में सड़क दुर्घटना मेंलोगों की मौत से अत्यंत दुखी हूं। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।” प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देनेकी घोषणा की है। स्थानीय प्रशासन राहत कार्य में जुटाघटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। दुर्घटनास्थल से शवों को निकालने औरघायलों को अस्पताल पहुंचाने में प्रशासन ने तत्परता दिखाई।
Ceasefire Between India and Pakistan, but Diplomatic Battle Continues

Despite the ceasefire between India and Pakistan along the border, the diplomatic conflict between the two nations remains ongoing. U.S. President Donald Trump welcomed the ceasefire agreement between the two countries and also offered mediation on the “thousands of years old” Kashmir issue. While Pakistan’s Prime Minister Shehbaz Sharif welcomed this offer, India rejected any third-party mediation. India Rejects Third-Party Mediation on KashmirAccording to sources from the Ministry of External Affairs, India has made it clear that its stance on the Kashmir issue is unambiguous, and it does not accept the interference of any third party. India emphasized that if Pakistan is willing to hand over terrorists, the door for dialogue is open. However, India made it clear that only the issue of Pakistan-occupied Kashmir (PoK) could be discussed. There is no room for discussions on other matters, and India does not want any external mediation. Trump’s Mediation Offer on KashmirEarlier, U.S. President Trump expressed his eagerness to work with both India and Pakistan to find a solution to the Kashmir dispute, describing it as a “thousands of years old issue.” His comments came a day after he claimed that the U.S. had brokered a ceasefire agreement between India and Pakistan. Pakistan Welcomes Trump’s OfferIn response to Trump’s offer, the Pakistani government issued a statement saying, “We appreciate President Trump’s willingness to support efforts for the resolution of the Jammu and Kashmir dispute, as it is a long-standing issue with deep implications for peace and security in South Asia and beyond.” Islamabad further emphasized that any just and lasting resolution to the Jammu and Kashmir issue should be in accordance with the United Nations Security Council resolutions and should ensure the protection of the fundamental rights of the Kashmiri people. In his first reaction after the agreement to reduce tensions between India and Pakistan, Prime Minister Shehbaz Sharif stated that he believes that the broader issues between the two countries, including Kashmir, water distribution, and other contentious matters, should also be addressed. India’s Firm Stance on KashmirIndia has consistently rejected any form of mediation on the Kashmir issue, asserting that it is a bilateral matter between India and Pakistan. However, India has now taken a firmer stance, stating that the Kashmir issue is no longer up for negotiation. The focus will now be on Pakistan-occupied Kashmir (PoK), and any talks can only proceed if Pakistan agrees to hand over terrorists or address the issue of PoK.
Aam Aadmi Party Attacks Central Government, Ceasefire Declaration by Trump an Attack on India’s Sovereignty: Sanjay Singh

New Delhi: Aam Aadmi Party (AAP) has raised serious questions regarding the ceasefire declaration between India and Pakistan made by U.S. President Donald Trump. Senior leader and Rajya Sabha MP Sanjay Singh, in a press conference held on Sunday, termed this declaration as a direct assault on India’s sovereignty. He emphasized that while the Indian Army was destroying terrorist bases in Pakistan, the announcement of a ceasefire by the U.S. was unjustifiable. A Missed Opportunity Due to Ceasefire Declaration: Sanjay SinghSanjay Singh highlighted that the Indian Army had a rare opportunity to take decisive action on Pakistan-occupied Kashmir (POK) and potentially separate Balochistan from Pakistan. However, he claimed this historic opportunity was lost when Prime Minister Narendra Modi accepted U.S. mediation. “Third-Party Mediation Against India’s Policy”Sanjay Singh pointed out that for the last 70 years, India has never accepted third-party mediation in matters related to Pakistan. He argued that India’s sovereignty and decision-making autonomy should not be compromised, and the country is fully capable of taking its own decisions. Pahalgam Attack: When Will Action Be Taken Against Those Who Destroyed Our Sisters’ Vermillion?Sanjay Singh referred to the recent terrorist attack in Pahalgam, where 25 Indians and one Nepali citizen were brutally killed. He questioned why no action had been taken against the terrorists who carried out the attack and desecrated the vermillion of innocent women. He demanded an answer from the Prime Minister on the progress of the investigation and the steps being taken to hold the terrorists accountable. Saluting Indian Army’s Bravery, but Questions RemainSanjay Singh praised the bravery of the Indian Army, which destroyed nine terrorist bases in Pakistan and killed over 100 terrorists. He mentioned that the operation “Sindoor” had a clear objective of destroying 21 terrorist bases. However, the ceasefire halted the mission prematurely, leaving unresolved questions about the fate of the terrorists who targeted innocent civilians.Why Did India Succumb to U.S. Pressure?AAP leaders raised concerns over the Indian government’s acceptance of the U.S.-declared ceasefire without clarity. Sanjay Singh pointed out that the terms of the ceasefire were not made clear to the Indian public, asking if this was an infringement on India’s sovereignty and self-respect. “Will India Now Follow America’s Orders?”Sanjay Singh took issue with President Trump’s comments calling Pakistan a “great country.” He questioned if Prime Minister Modi also considered Pakistan, a nation that shelters terrorists, as “great.” He further questioned if India would now establish trade relations with Pakistan, a country that had failed to honor even a temporary ceasefire. AAP Demands Special Session of Parliament for ClarityConcluding the press conference, Sanjay Singh called for a special session of Parliament to be convened where the Prime Minister should explain the reasons behind agreeing to the ceasefire and provide transparency about the terms. He also urged the Prime Minister to address the public’s concerns about the national security situation.
युवा दलित नेता मनीष पासवान ने कांग्रेस की सदस्यता ली, सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस में हुए शामिल

पटना: राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के प्रदेश अध्यक्ष और युवा नेता मनीष पासवान ने रविवार को पटना स्थित सदाकत आश्रम में एक भव्य मिलनसमारोह के दौरान कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वे बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और गुजरात प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्षजिग्नेश मेवाणी की मौजूदगी में अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए। राजेश राम बोले – मनीष के आने से वंचित समाज में पार्टी होगी मजबूतप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इस मौके पर कहा कि मनीष पासवान एक सक्रिय और संघर्षशील युवा नेता हैं, जो लंबे समय से दलित अधिकारोंके लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी वंचितों की आवाज रही है और मनीष के आने से पार्टी को सामाजिक न्याय की दिशा में नईऊर्जा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि मनीष राहुल गांधी की विचारधारा से प्रेरित होकर कांग्रेस से जुड़े हैं। जिग्नेश मेवाणी ने जताई उम्मीद – मिलकर लड़ेंगे सामाजिक न्याय की लड़ाईगुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि राहुल गांधी की नेतृत्व में कांग्रेस लगातार दलित समाज के अधिकारों के लिए संघर्षकर रही है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज के हाशिए पर मौजूद लोगों की आवाज दबाई जा रही है, ऐसे में युवाओं का कांग्रेस से जुड़नासामाजिक न्याय की लड़ाई को बल देगा। मनीष पासवान बोले – कांग्रेस के साथ मिलकर करूंगा दलित समाज के लिए कामकांग्रेस में शामिल होने के बाद मनीष पासवान ने कहा कि उन्होंने अब तक दलित अधिकार मंच के माध्यम से समाज की आवाज बुलंद की, लेकिनअब वह कांग्रेस के साथ मिलकर इस संघर्ष को और आगे ले जाना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के समर्पण और सामाजिक समरसता के प्रतिप्रतिबद्धता को देखते हुए पार्टी से जुड़ने का निर्णय लिया है। मनीष ने यह भी कहा कि उनके साथ आए युवा साथी और समर्थक कांग्रेस को बिहार मेंमजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। अन्य प्रमुख नेता भी रहे मौजूदइस अवसर पर कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जिनमें कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान, प्रो. रतनलाल, जितेन्द्र गुप्ता, ब्रजेश प्रसाद मुनन, मोती लाल शर्मा, प्रवीण सिंह कुशवाहा, अजय चौधरी, शकीलुर रहमान, सौरभ सिन्हा, ज्ञान रंजन, कुमारआशीष, राजीव मेहता, निधि पाण्डेय, राहुल पासवान, किशोर कुमार और डॉ. गौतम सहित कई नेता शामिल थे।