गैस योजना की जानकारी न देने पर नाराज हुई मंत्री सविता, कार्यक्रम में DM पर फेंका गुलदस्ता, वीडियो वायरल

आंध्र प्रदेश की पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री सविता एस का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी परगुलदस्ता फेंकती नजर आ रही हैं। यह घटना तीन दिन पुरानी है, लेकिन इसका वीडियो रविवार को सामने आया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैलगया। क्या था मामला?यह घटना एक पेंशन वितरण समारोह के दौरान हुई, जहां मंत्री सविता एस ने उपस्थित जिलाधिकारी प्रभावती से फ्री गैस सिलेंडर वितरण कीजानकारी मांगी। जब जिलाधिकारी यह स्पष्ट नहीं बता सकीं कि पहले चरण में कितने सिलेंडर बांटे गए, तो मंत्री ने उसी गुलदस्ते को गुस्से में वापसउनकी ओर फेंक दिया जो स्वागत के समय उन्हें दिया गया था। मंत्री का गुस्सामंत्री का गुस्सा देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। मंत्री ने अन्य लोगों द्वारा दिए जा रहे गुलदस्ते भी स्वीकार करने से मना कर दिया। इस पूरेघटनाक्रम को लेकर अब तक न तो मंत्री सविता और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियावीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों ने मंत्री के इस आचरण कोअनुचित और असभ्य बताया, तो कई अन्य ने जिलाधिकारी की तैयारी पर सवाल उठाए। नैतिक सवालइस घटना ने एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को अपने गुस्से और व्यवहार को नियंत्रित रखने कीज्यादा जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद की कमी और संवेदनशीलता की कमी प्रशासन और नेताओं के बीच टकराव काकारण बन सकती है।
जली नकदी कांड: न्यायमूर्ति वर्मा पर महाभियोग की तलवार, संसद में कार्रवाई की तैयारी

मार्च माह में दिल्ली में स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी निवास पर आग लगने की एक गंभीर घटना सामने आई थी। इसहादसे के दौरान उनके निवास परिसर के आउटहाउस से नकदी से भरी कई बोरियां जली हुई हालत में बरामद की गईं, जिससे इस मामले ने सनसनीखेजमोड़ ले लिया। सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने ठहराया दोषीइस मामले की तह तक जाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने तीन न्यायाधीशों की एक विशेष समिति गठित की थी। जांच के दौरान कई गवाहों केबयान दर्ज किए गए और तमाम सबूतों के आधार पर समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा को इस पूरे प्रकरण में दोषी करार दिया। इसके पश्चात उन्हें दिल्ली उच्चन्यायालय से स्थानांतरित कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेजा गया, जहां फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। इस्तीफा ही बचा एकमात्र रास्तासंवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि अब न्यायमूर्ति वर्मा के पास संसद में महाभियोग की कार्रवाई से बचने का एकमात्र रास्ता पद से इस्तीफा देनाहै। संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश राष्ट्रपति को पत्र लिखकर त्यागपत्र दे सकता है, जिसके लिएकिसी औपचारिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती। त्यागपत्र देने पर मिलेंगे सेवा लाभयदि न्यायमूर्ति वर्मा स्वयं पद छोड़ते हैं, तो उन्हें सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश के रूप में पेंशन सहित अन्य भत्तों का लाभ प्राप्त होगा। लेकिनयदि उन्हें संसद द्वारा उनके पद से हटाया जाता है, तो वे इन सुविधाओं से वंचित रहेंगे। संसद में कैसे होता है न्यायाधीश को हटाने का प्रस्तावभारतीय संसद के किसी भी सदन में न्यायाधीश को पद से हटाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। राज्यसभा में इसके लिए कम से कम 50 सांसदों कासमर्थन आवश्यक होता है, जबकि लोकसभा में 100 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। प्रस्ताव पास होने के बाद, एक तीन सदस्यीय समिति गठितकी जाती है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक ख्यातिप्राप्त विधिवेत्ता होते हैं। यह समितिन्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करती है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामलेऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पूर्व जस्टिस वी. रामास्वामी और जस्टिस सौमित्र सेन पर भी महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि, दोनोंने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही इस्तीफा देकर पद छोड़ दिया था। मानसून सत्र में हो सकती है कार्रवाईसूत्रों के मुताबिक, संसद का अगला मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा, और इसी सत्र में जस्टिस वर्मा के खिलाफमहाभियोग की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। यह कार्यवाही नए संसद भवन में पहली बार होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विषय मेंयह संकेत दिया है कि अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लिया जाएगा।
दिल्ली में 9 साल की बच्ची से रेप और मर्डर, सूटकेस में मिला शव

दिल्ली के नेहरू विहार में 9 साल की बच्ची से रेप और मर्डर का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि बच्ची का शव सूटकेस में मिला था औरउसके शरीर पर चोट के कई निशान थे। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस के अनुसार, बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी और वह घर से बाहर खेलने गई थी। जब वह देर रात तक घर नहीं लौटी, तो परिवार केलोगों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन सुबह एक सूटकेस में बच्ची का शव मिला। पुलिस ने बताया कि बच्ची के शरीर पर चोट के कई निशान थे और उसके साथ रेप किया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियोंकी तलाश में जुटी हुई है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है और लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय निवासियों ने पुलिस से मांग की है किआरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों को पकड़ने के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों का विश्लेषण किया जा रहाहै। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी के पास इस मामले में कोई जानकारी है, तो वह पुलिस को सूचित करें। इस घटना ने एक बार फिर से दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे को उठाया है। लोगों ने मांग की है कि सरकार को इस मुद्दे पर कड़ेकदम उठाने चाहिए और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ते जा रहे हैं और सरकार को इस मुद्दे पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है। लोगों नेमांग की है कि सरकार को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिक पुलिस बल तैनात करना चाहिए और अपराधियों के खिलाफ कड़ीकार्रवाई करनी चाहिए। इस घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है और लोगों ने मांग की है कि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दीजाए। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लोगों ने मांग की है कि सरकार को इस मुद्दे पर कड़े कदम उठाने चाहिए और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। सरकार को चाहिए किवह सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिक पुलिस बल तैनात करे और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। इस घटना से यह साफ हो गया है कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार और पुलिस को इस मुद्दे पर कड़े कदम उठानेचाहिए और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।
मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, बिष्णुपुर में कर्फ्यू, पांच जिलों में इंटरनेट बंद

मणिपुर में एक बार फिर तनाव और हिंसा का माहौल देखने को मिला। शनिवार को अरामबाई तेंगगोल संगठन के कुछ सदस्यों की गिरफ्तारी के बादकई जिलों में हिंसा भड़क उठी। इसके बाद प्रशासन ने बिष्णुपुर जिले में पूर्ण कर्फ्यू लगा दिया, जबकि अन्य जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दीगई। सड़कों पर आगजनी और तोड़फोड़गिरफ्तारी के विरोध में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने इंफाल के कई हिस्सों में सड़कें जाम कर दीं, टायर जलाए और सरकारी संपत्तियों को नुकसानपहुंचाया। खुराई लामलॉन्ग इलाके में बसों को आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान सुरक्षा बलों के साथ झड़पें भी हुईं। प्रदर्शनकारियों की आत्मदाह की धमकीउग्र होते हालात के बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह की चेतावनी दी। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमेंप्रदर्शनकारी खुद पर पेट्रोल डालते नजर आ रहे हैं। एयरपोर्ट के बाहर डटे प्रदर्शनकारीप्रदर्शनकारियों को आशंका थी कि हिरासत में लिए गए नेताओं को राज्य से बाहर ले जाया जा रहा है। इसी को लेकर बड़ी संख्या में लोग तुलिहालएयरपोर्ट के गेट के बाहर जमा हो गए। उन्होंने सड़क जाम कर दी और रातभर वहीं डटे रहे। बल प्रयोग और एक मौत की सूचनाराजधानी इंफाल में बिगड़ते हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान एक व्यक्ति कीमौत की खबर सामने आई है, जो कथित तौर पर पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुआ था। प्रशासन की कड़ी कार्रवाईबिष्णुपुर जिले में पूरी तरह से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। साथ ही इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल और काकचिंग जिलों में पांच से अधिक लोगोंके एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन सभी जिलों में एहतियातन इंटरनेट सेवाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। आतंकी गतिविधियों पर कार्रवाईहिंसा के बीच, पुलिस ने दो प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। इसके अतिरिक्त, तेंगनौपाल जिले से एक आईईडी भीबरामद किया गया है।
जिग्नेश मेवाणी ने पत्रकारों को किया संबोधित,बोले आरएसएस ने 10 सालों से लोगों पर मचाया उत्पाद जानें क्या है पूरा मामला

जिग्नेश मेवाणी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 सालों से कमजोर लोगों के ऊपर आरएसएस के लोगों ने जिस प्रकार से उत्पातमचाया है जिस प्रकार की मोदी, अमित शाह, भाजपा की राजनीति हम लोगों ने देखी है. जितने भी इस मुल्क में संविधान को मानने वाले लोग हैं, प्रगतिशील विचारधारा से सरोकार रखने वाले लोग हैं. विशेष तौर पर दलित, आदिवासी, ओबीसी समुदाय से आने वाले लोग हैं. उनको इस बात कोलेकर कोई कंफ्यूजन नहीं कि मोदी, अमित शाह, आरएसएस और भाजपा बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान में नहीं, केवल मनुस्मृति के संस्कारों में, मनुस्मृति के मूल्यों में यकीन रखते हैं. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को समंदर में दो फेकपास्ट में वह यह कह भी चुके हैं कि डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को समंदर में फेंक दो। यह लिख भी चुके हैं कि हमें भारत का संविधाननहीं, मनुस्मृति चाहिए. यह संघ परिवार के लोगों ने बकायदा लिखा हुआ है और इसी सोच के कारण पिछले कुछ सालों के दौरान हम लोगों ने देखाकि दिल्ली की सड़कों पर संविधान की कॉपी को जलाया गया. हमने देखा कि किस प्रकार से रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया. जिसको हम संस्थानिक हत्या कहते हैं हमने देखा कि किस प्रकार से बलात्कार का शिकार बनी हाथरस की बेटी का शव अंतिम दर्शन के लिए उसकेपरिवारजनों को नसीब नहीं हुआ। हम लोगों ने देखा कि किस प्रकार से गुजरात के ऊना में गाड़ी के साथ बांधकर चार दलित युवकों को तब तक पीटागया जब तक उनकी चमड़ी ना उतर जाए. नेक्सलाइट बोलकर भीमा कोरेगांव के केस में प्रतिबद्ध, कमिटेड, कर्मठ अंबेडकराइट्स को तीन-तीन सालतक जेलों में डाला। मोदी जी के खिलाफ एक ट्वीट करने पर गुजरात से असम. ढाई हजार किलोमीटर दूर की जेल में डालकर, महिला पुलिस को मेरेबगल में बिठाकर मोलेस्टेशन का फर्जी केस करवाया.‘अंबेडकरनामा’ चलाने वाले प्रोफेसर रतन लाल जैसे साथियों के ऊपर भी फर्जी मुकदमे हुए. पार्लियामेंट में बोले अमित शाहइसी सोच के कारण पार्लियामेंट के मंच से अमित शाह ने भी कहा – कि अंबेडकर-अंबेडकर-अंबेडकर करना आजकल फैशन बन गया है. मानो एकबहुत ही डीप रूटेड कोई घृणा हो, नफरत हो… उस प्रकार के भाव और टोन के साथ अमित शाह ने बाबा साहब अंबेडकर के लिए इस प्रकार के शब्दोंका प्रयोग किया था। मतलब कि यह दिखाता है कि उनकी रगों में सिंदूर हो ना हो, इन संघी भाजपाइयों की रगों में मनुस्मृति की धारा जरूर बहती हैऔर यही कारण है कि हम देखते हैं कि बिहार में 11 साल की दलित समाज की बेटी पर बलात्कार होता है. चाकू से उसका गला काटने की, उसकेअंगों को काटने की कोशिश होती है, वह जीवन-मरण के बीच में तड़प रही है और फिर भी उसको एक बेड नसीब नहीं होता.5 घंटे तक उसको एंबुलेंसमें बैठे रहना पड़ता है। उसी प्रकार गुजरात के अमरेली जिले में 10 दिन पहले की घटना है – 19 साल के दलित समाज के नीलेश राठौड़ को दौड़ा-दौड़ा कर सड़क पर… भरे बाजार, भरे चौराहे जातिवादी लोग हाथ में कुल्हाड़ी, डंडे, पाइप, स्टिक्स लेकर दिन दहाड़े उसकी हत्या कर देते हैं। इसीगुजरात के पाटन जिले में उसी हफ्ते में 60-65 साल के दलित समाज के इस बुजुर्ग को इस प्रकार से जिंदा जला दिया जाता है. यह उसकी तस्वीर हैऔर इन तमाम घटनाओं को लेकर आज आपके बीच में दिल्ली इसलिए आया हूं कि 7-8 साल पहले जब ऊना की घटना हुई, तब मोदी जी ने कहाथा – कि मारना है तो मुझे मारो. बड़े नाटकीय अंदाज में कहा था कि मारना है तो मुझे मारो, मेरे दलित भाइयों को मत मारो।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा 20% आरक्षण, आयु सीमा में भी तीन साल की छूट

गृह विभाग ने जारी किया आदेशउत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का शासनादेश जारीकर दिया। यह आरक्षण आरक्षी नागरिक पुलिस, पीएसी, घुड़सवार पुलिस और फायरमैन के पदों पर लागू होगा। आदेश प्रमुख सचिव (गृह) संजयप्रसाद द्वारा जारी किया गया है, जिसमें पूर्व अग्निवीरों को अधिकतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने का भी प्रावधान है। योगी सरकार का देश में पहला कदमइस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इससे पहले मंगलवार को योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने प्रस्तावको मंजूरी दी थी, और अब इसे लागू करते हुए गृह विभाग ने औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। आरक्षण सभी श्रेणियों में लागू होगाआरक्षण सभी सामाजिक वर्गों (सामान्य, एससी, एसटी और ओबीसी) के भीतर क्षैतिज रूप से लागू होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई पूर्व अग्निवीरओबीसी श्रेणी से आता है, तो उसे ओबीसी के भीतर ही यह आरक्षण दिया जाएगा। कौन होगा पात्र?इस लाभ का लाभ केवल उन्हीं पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा जिन्होंने चार साल की सेवा पूरी कर ली हो और जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हों। साथ ही, उन्हें आरक्षी पुलिस, पीएसी, घुड़सवार पुलिस और फायरमैन जैसी पदों के लिए आयु सीमा में तीन वर्षों की अतिरिक्त छूट भी मिलेगी। 2026 में आएगा पहला बैचइस व्यवस्था के अंतर्गत भर्ती प्रक्रिया का पहला बैच 2026 में सामने आएगा, जब अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वालेअग्निवीर पहली बार पात्र होंगे। अन्य राज्यों से तुलनाजबकि हरियाणा और ओडिशा जैसे कुछ राज्यों ने पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल की है, उत्तर प्रदेश ने यह प्रतिशत बढ़ाकर 20 कर दिया है, जिससे यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण बन गया है।
इंदौर के नवविवाहित दंपति का शिलांग में रहस्यमयी मामला, सीएम ने की CBI जांच की सिफारिश

राजा रघुवंशी की मौत और सोनम के लापता होने से फैली सनसनीमध्यप्रदेश के इंदौर शहर से ताल्लुक रखने वाले नवविवाहित जोड़े राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी का मेघालय दौरा अब एक रहस्यमयी औरचिंताजनक प्रकरण बन गया है। राजा की संदिग्ध हालात में मौत और सोनम के अब तक लापता रहने के चलते यह मामला तूल पकड़ चुका है। दोनों11 मई को विवाह के बाद हनीमून के लिए मेघालय रवाना हुए थे। 23 मई से उनका संपर्क टूट गया और 2 जून को राजा का शव एक गहरी खाई मेंमिला। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त प्रतिक्रियामुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को एक बयान में कहा कि यह एक अत्यंत संवेदनशील और चिंताजनक मामला है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेशसरकार पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और वह व्यक्तिगत रूप से मेघालय के मुख्यमंत्री से बातचीत कर चुके हैं। इसके अलावा राज्यके वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार मेघालय प्रशासन से संपर्क में हैं। CBI जांच की सिफारिश, गृह मंत्री से की बातचीतमुख्यमंत्री ने इस प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की सिफारिश की है। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सेऔपचारिक अनुरोध किया है। उनका कहना है कि केवल एक निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के माध्यम से ही सच्चाई सामने लाई जा सकती है औरसोनम रघुवंशी की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सकती है। सोनम के लापता होने से परिजन बेचैनराजा रघुवंशी की मौत की पुष्टि होने के बाद भी सोनम का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिवार और प्रशासन दोनों ही चिंतित हैं। इस मामलेको लेकर अब प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है कि जल्द से जल्द सोनम की तलाश की जाए। उम्मीदें CBI जांच से जुड़ींमुख्यमंत्री की सिफारिश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि CBI जांच शुरू होने से इस रहस्यमयी मामले की परतें जल्द खुलेंगी और सोनम रघुवंशीकी स्थिति को लेकर स्पष्टता आएगी।
मुर्शिदाबाद हिंसा पर चार्जशीट दाखिल, 13 नामजद आरोपी, BNS और आर्म्स एक्ट की धाराएं लागू

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के शमशेरगंज क्षेत्र में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले मेंपुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। हिंसा के 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, जिसमें 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट मेंभारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धाराएं 25/27 भी लगाई गई हैं। अब तक 300 से अधिक गिरफ्तारियांपुलिस के अनुसार, हिंसा से जुड़े मामलों में अब तक 60 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई हैं और 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुकाहै। पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई राज्य की कानून-व्यवस्था को बहाल करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। पिता-पुत्र की निर्मम हत्याइस हिंसा के दौरान 74 वर्षीय हरगोबिंद दास और उनके 40 वर्षीय बेटे चंदन दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरोंने बुजुर्ग दास को घर से खींचकर बाहर निकाला और कुल्हाड़ी से हमला किया। बेटे ने विरोध किया तो उसे भी उसी क्रूरता से मारा गया। हत्या के बादहमलावरों ने यह सुनिश्चित किया कि दोनों की मौत हो चुकी है, तभी वे वहां से हटे। इतना ही नहीं, कुछ इलाकों में पानी की आपूर्ति भी काट दी गई थीताकि जल रही आग को बुझाना संभव न हो। हाईकोर्ट समिति ने उठाए गंभीर सवालकोलकाता हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट ने इस घटना की भयावहता को उजागर किया है। रिपोर्ट में इस हिंसा का मास्टरमाइंड स्थानीयतृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और धुलियन नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन महबूब आलम को बताया गया है। समिति ने पुलिस की निष्क्रियता औरलोगों की कॉल पर कोई प्रतिक्रिया न देने की तीखी आलोचना की। 113 घर प्रभावित, जलाए गए मकानरिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि बेतबोना गांव के 113 घर हिंसा की चपेट में आए, जिनमें से कई घर पूरी तरह जला दिए गए थे। यह घटना नकेवल स्थानीय प्रशासन की विफलता को उजागर करती है, बल्कि राज्य में कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी लगाती है।न्याय प्रक्रिया में तेजी की उम्मीदइस भयावह घटना के बाद अब न्याय प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है ताकि सभी दोषियों को सख्त सजा मिल सके और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलसके।
रूस-यूक्रेन संघर्ष में नई उग्रता, खारकीव पर रूस का जबरदस्त हमला, तीन की मौत, यूक्रेन के ड्रोन हमलों का जवाब

रूसी हमले में खारकीव हुआ तबाहयूक्रेन के खारकीव शहर पर रूस ने शनिवार को भीषण ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें तीन नागरिकों की मौत हो गई और कम से कम 21 लोग घायल हो गए। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि यह हमला रूस की हालिया जवाबी सैन्य कार्रवाइयों का हिस्सा था। 18 बहुमंजिला इमारतें और 13 घर क्षतिग्रस्तखारकीव के मेयर इगोर टेरेखोव के अनुसार, हमले में कुल 18 बहुमंजिला इमारतें और 13 निजी मकान प्रभावित हुए हैं। यह हमला रूस की ओर से कीजा रही लगातार और तेज़ होती हमलों की श्रृंखला का नया चरण है। रूसी हमले में इस्तेमाल हुआ खतरनाक हथियारों का जखीरारिपोर्ट के अनुसार, रूस ने इस हमले में 48 ‘शहीद ड्रोन’, दो मिसाइलें और चार एरियल ग्लाइड बम तैनात किए। इनमें एरियल ग्लाइड बम कोखासतौर पर खतरनाक माना जाता है क्योंकि ये अत्यंत सटीकता के साथ लक्ष्यों को निशाना बनाकर व्यापक तबाही मचा सकते हैं। यूक्रेन ने भी किए थे भारी ड्रोन हमलेइस हमले से पहले, यूक्रेन ने रूस के भीतर विभिन्न सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए थे। रॉयटर्स की रिपोर्ट केमुताबिक, यूक्रेन ने लगभग 117 मानव रहित हवाई वाहन (ड्रोन) से रूस के चार प्रमुख एयरबेस पर हमला किया। रूसी एयरबेस पर भारी नुकसानओपन सोर्स विश्लेषकों और सैटेलाइट इमेज के अनुसार, इन ड्रोन हमलों में रूस के कई बमवर्षक विमान या तो पूरी तरह नष्ट हो गए या गंभीर रूप सेक्षतिग्रस्त हुए। हमलों की पुष्टि रॉयटर्स द्वारा सत्यापित ऑपरेशन फुटेज से की गई है। दोनों देशों के बीच बढ़ता तनावइन घटनाओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध को और उग्र बना दिया है। जहां यूक्रेन अब रूसी सीमाओं के अंदर तक हमले कर रहा है, वहीं रूस भी जवाबी कार्रवाईमें आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की फ्लाइट में हाईवोल्टेज ड्रामा, पायलट ने उड़ान भरने से किया इनकार, 45 मिनट की मशक्कत के बाद माने

पायलट ने उड़ान से किया इनकार, कारण बताए स्वास्थ्य और ड्यूटी घंटेमहाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को उस वक्त अनपेक्षित स्थिति का सामना करना पड़ा जब जलगांव एयरपोर्ट पर उनके चार्टर्ड विमान केपायलट ने उड़ान भरने से मना कर दिया। शुक्रवार को मुक्ताईनगर दौरे के बाद जब शिंदे मुंबई लौटने वाले थे, पायलट ने बताया कि वह पिछले 12 घंटे से लगातार उड़ान भर रहा है और अब उड़ान के लिए फिट नहीं है। DGCA के नियमों के अनुसार, पायलट की अधिकतम ड्यूटी अवधि 8-9 घंटेहोती है, जिसे कुछ परिस्थितियों में 13 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। मंत्री और अधिकारियों ने की समझाइश, फिर खुद पहुंचे शिंदेस्थिति गंभीर होते देख मंत्री गिरीश महाजन और गुलाबराव पाटिल ने पायलट को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकारएकनाथ शिंदे खुद पायलट के पास पहुंचे और बातचीत के बाद करीब 45 मिनट में पायलट उड़ान भरने को तैयार हो गया। इस पूरी घटना के दौरानयात्री वेटिंग रूम में इंतजार करते रहे। चार्टर्ड फ्लाइट में बीमार महिला को दी जगहइस बीच एक मानवता से जुड़ी घटना भी सामने आई। एयरपोर्ट पर एक महिला, शीतल बोर्डे, जो किडनी की बीमारी से जूझ रही थीं और अपनीफ्लाइट मिस कर चुकी थीं, परेशान नजर आईं। जानकारी मिलने पर मंत्री गिरीश महाजन ने यह बात शिंदे तक पहुंचाई। डिप्टी सीएम ने तत्कालनिर्णय लेते हुए महिला और उसके पति को अपने चार्टर्ड विमान में जगह दे दी। रास्ते में उन्होंने महिला की तबीयत और सर्जरी की जानकारी ली। मुंबईपहुंचने पर उनके लिए एंबुलेंस और सर्जरी की व्यवस्था कराई गई। DGCA नियमों का पालन, फिर भी समाधान निकालाहालांकि पायलट का रिफ्यूज़ल पूरी तरह DGCA नियमों के अनुरूप था, फिर भी एयरलाइन और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाधान निकल सका।यह घटना न सिर्फ सुरक्षा प्रोटोकॉल की अहमियत दर्शाती है, बल्कि नेतृत्व के लचीलेपन और मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल भी पेश करती है।