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तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर ब्रिटिश स्टील्थ फाइटर जेट F-35B खड़ा, 14 दिनों से उड़ान भरने में असमर्थ, हाई-टेक फाइटर जेट की तकनीकी खराबी बनी चुनौती

ब्रिटिश नेवी का अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट F-35B लाइटनिंग II 14 जून से तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़ा है। करीब साढ़े 9 अरब रुपये की लागत वाले इस विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम की समस्या के चलते उड़ान संभव नहीं हो पाई है। ब्रिटेन से पहुंचे तकनीकी विशेषज्ञ अबतक खराबी को ठीक नहीं कर सके हैं। खराब मौसम में आपात लैंडिंग, विमानवाहक पोत पर वापसी संभव नहींजानकारी के मुताबिक, यह लड़ाकू विमान प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है और कम ईंधन की वजह से इसे आपातकालीन स्थिति मेंतिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर उतरना पड़ा था। खराब मौसम के कारण यह विमान अपने मूल एयरक्राफ्ट कैरियर, जो केरल के तट से करीब 100 समुद्रीमील की दूरी पर था, पर वापस नहीं लौट सका। वायुसेना ने दी थी तत्काल सहायताभारतीय वायुसेना ने विमान की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की, साथ ही ईंधन और लॉजिस्टिक सहायता भी प्रदान की। लेकिन तकनीकी खराबी केचलते विमान को ग्राउंडेड ही रखा गया। इस बीच एयरपोर्ट पर CISF की सुरक्षा टीम 24 घंटे निगरानी में लगी हुई है, ताकि विमान की सुरक्षासुनिश्चित हो सके। ब्रिटेन से मरम्मत टीम और टो वाहन भेजे गएविमान को उड़ाने के लिए किए गए प्रयास विफल रहने के बाद, ब्रिटेन ने विशेष टो वाहन और इंजीनियरों की 40 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भारत भेजीहै। यह टीम एयर इंडिया के MRO (Maintenance, Repair, Overhaul) हैंगर में विमान की मरम्मत करेगी। बताया गया है कि टीम पहले हीतिरुवनंतपुरम के लिए रवाना हो चुकी है। हैंगर में मरम्मत को लेकर थी झिझकविमान को हैंगर में ले जाने पर शुरुआत में पायलटों ने अनिच्छा जाहिर की थी। सूत्रों का मानना है कि ब्रिटिश अधिकारियों को यह आशंका थी किहैंगर में विमान की संवेदनशील तकनीकी जानकारी भारतीय तकनीशियनों की पहुंच में आ सकती है। हालांकि, अब मरम्मत प्रक्रिया के लिए विमान कोहैंगर में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी गई है। ब्रिटिश उच्चायोग का बयानभारत में ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने बताया कि F-35B को जल्द से जल्द पुनः उड़ान के लिए तैयार करने का प्रयास जारी है। उन्होंने भारतीयएजेंसियों के सहयोग के लिए आभार जताया, जिन्होंने आपात स्थिति में विमान को उतरने और सुरक्षित रखने में मदद की।

कोलकाता लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप: तीन आरोपी गिरफ्तार, सियासत गरमाई, कॉलेज परिसर में दरिंदगी, तीन आरोपियों की पहचान

दक्षिण कोलकाता के कसबा इलाके में स्थित साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में एक छात्रा से गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, यह शर्मनाक घटना 25 जून की शाम 7:30 बजे से रात 10:50 बजे के बीच कॉलेज परिसर में हुई। पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करली गई है और पुलिस जांच में जुटी है। इस मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक पूर्व छात्र और दो वर्तमान छात्र शामिल हैं। एक पूर्व यूनिट अध्यक्ष भी शामिलगिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 31 वर्षीय मोनोजित मिश्रा (पूर्व छात्र और पूर्व यूनिट अध्यक्ष), 19 वर्षीय जैब अहमद और 20 वर्षीय प्रमितमुखर्जी उर्फ प्रमित मुखोपाध्याय के रूप में हुई है। पुलिस ने मिश्रा और अहमद को 26 जून को तालबागान क्रॉसिंग के पास से पकड़ा, जबकि प्रमितको 27 जून की सुबह उसके आवास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीनों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं। अदालत ने उन्हें पांच दिन कीपुलिस हिरासत में भेजा है। कॉलेज की इमारत बनी अपराध स्थलपुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह वारदात कॉलेज की इमारत के भीतर ही अंजाम दी गई। पीड़िता का प्रारंभिक मेडिकल परीक्षण हो चुका है और कईगवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। घटनास्थल को सील कर दिया गया है और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गयागिरफ्तार आरोपियों को 27 जून को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने 14 दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने फिलहालउन्हें मंगलवार तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया है। विपक्ष का ममता सरकार पर हमलाइस वारदात के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुएकहा कि रथ यात्रा के चलते कोलकाता पुलिस का बड़ा हिस्सा दीघा भेज दिया गया था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। उन्होंने ममता बनर्जी सेइस्तीफे की मांग की और कहा कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। भाजपा का गंभीर आरोप: TMC कनेक्शन की आशंकाबीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने घटना को “दिल दहला देने वाला” बताया और आरोप लगाया कि इसमें तृणमूल कांग्रेस से जुड़ाव्यक्ति भी शामिल हो सकता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल को महिलाओं के लिए “डरावना राज्य” करार दिया और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालउठाए। मेयर फिरहाद हकीम की प्रतिक्रियाकोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने घटना को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी पूरी जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पुलिस रिपोर्ट आनेके बाद वे इस पर बयान देंगे।

अहमदाबाद रथ यात्रा में हाथियों का बेकाबू होना बना अफरातफरी का कारण, कई लोग घायल, भीड़ और तेज आवाज से हाथी बेकाबू

अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान खड़िया गोलावद इलाके में अफरातफरी मच गई जब भारी भीड़ और डीजे की तेज आवाज सेतीन हाथी बेकाबू हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक नर हाथी अचानक उग्र हो गया और दौड़ने लगा, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में भगदड़जैसी स्थिति बन गई। घायल हुए कई लोगघटना में दो से तीन लोगों को चोटें आईं, जिनमें एक युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अन्य घायलों को प्राथमिक उपचारदिया गया। बताया गया कि हाथियों के अचानक बेकाबू होने से वे रेलिंग तोड़ते हुए दौड़ पड़े और कुछ श्रद्धालु उनकी चपेट में आ गए। वीडियो वायरल, प्रशासन सतर्कइस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें हाथियों को दौड़ते और भीड़ को तितर-बितर होते देखा जासकता है। घटना के बाद चिड़ियाघर की टीम और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और हाथियों को इंजेक्शन देकर शांत किया गया। यात्रा कुछ देर रोकी गई, फिर शुरू हुईहाथियों को काबू में लाने के बाद रथ यात्रा को कुछ देर रोक दिया गया था। स्थिति सामान्य होने के बाद यात्रा को फिर से शुरू किया गया। कांकड़ियाचिड़ियाघर के निदेशक ने बताया कि तेज आवाज के कारण हाथी डर गए थे और उन्होंने पीछे की ओर दौड़ लगाई थी। अब तक की पहली बड़ी घटनाअधिकारियों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में रथ यात्रा के दौरान ऐसा कोई हादसा सामने नहीं आया था। इस अप्रत्याशित घटना के बाद पुलिस औरआयोजन समिति द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि यात्रा के दौरान तेज सीटी या साउंड का प्रयोग नकिया जाए, जिससे हाथी उत्तेजित न हों। सरकार की प्रतिक्रियाघटना पर गुजरात के मुख्यमंत्री और गृह राज्य मंत्री ने संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और पूरे कार्यक्रम पर निगरानी रखनेके निर्देश दिए हैं। इस घटना के बाद रथ यात्रा की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।

कृत्रिम वर्षा पर आम आदमी पार्टी का बीजेपी पर हमला, सौरभ भारद्वाज बोले, अब केजरीवाल के विजन की कर रहे नकल

आम आदमी पार्टी ने कृत्रिम वर्षा परियोजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज नेकहा कि बीजेपी अब अरविंद केजरीवाल के विजन की नकल कर रही है, जबकि पहले उसी योजना का मजाक उड़ाया करती थी। उन्होंने आरोपलगाया कि जब आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में वैज्ञानिक तरीके से सर्दियों के प्रदूषण को कम करने के लिए कृत्रिम वर्षा कराना चाहती थी, तब केंद्र सरकार ने कोई अनुमति नहीं दी और बीजेपी ने इसे “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” कहकर मजाक बना दिया। लेकिन अब जब दिल्ली और केंद्रदोनों जगह बीजेपी की सरकार है, तो तुरंत सभी मंजूरी दे दी गई है। भारद्वाज ने कहा कि 19 जून को जब दिल्ली में बादल छाए हुए थे और मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई थी, उसी समय मुख्यमंत्री रेखागुप्ता ने कृत्रिम वर्षा कराने की घोषणा कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बारिश वैसे ही होने वाली थी, तब कृत्रिम वर्षा की क्या आवश्यकताथी? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार सिर्फ झूठी वाहवाही लूटना चाहती थी। अब जब न बादल हैं और न बारिश के आसार, तो बीजेपीकृत्रिम वर्षा को भी टाल रही है। उन्होंने कहा कि यह सब दिल्ली की जनता के साथ मजाक है और बीजेपी ने दिल्ली सरकार को फुलेरा की पंचायतबना दिया है, जो जब चाहे कुछ भी कहती और करती है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कृत्रिम वर्षा का सही समय अक्टूबर से जनवरी के बीच होता है, जब दिल्ली में प्रदूषण चरम पर होता है। वैज्ञानिक भी मानतेहैं कि जून-जुलाई की आर्द्रता और वातावरण कृत्रिम वर्षा के लिए उपयुक्त नहीं होते। उन्होंने पूछा कि जब परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं तो इतनीजल्दी कृत्रिम वर्षा की घोषणा क्यों की गई? क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है? उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब आम आदमी पार्टी ने सात साल पहले कृत्रिम वर्षा की योजना बनाई थी, तब बीजेपी ने उसे भ्रष्टाचार और पैसे कीबर्बादी बताकर विरोध किया था। लेकिन अब वही पार्टी उसी योजना को लागू कर रही है। भारद्वाज ने पूछा कि अगर उस समय यह योजना गलत थी, तो अब बीजेपी खुद इसे क्यों अपना रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का यह रवैया दोहरापन दर्शाता है और जनता को गुमराह करने काप्रयास है। प्रेस वार्ता के अंत में सौरभ भारद्वाज ने दो सीधे सवाल रखे—पहला, जब वैज्ञानिक मानते हैं कि अक्टूबर-जनवरी के बीच ही कृत्रिम वर्षा का परीक्षणकारगर हो सकता है, तो जून-जुलाई में इसे करने की जल्दबाज़ी क्यों है? और दूसरा, जब आप सरकार ने पहले यह प्रयास किया था, तो बीजेपी नेउसका विरोध क्यों किया था? उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली की जनता के हित में पारदर्शिता चाहती है और बीजेपी से इन सवालों केजवाब मांगती है।

Delhi BJP Yuva Morcha Hosts Mock Parliament to Mark 50 Years of Emergency, Calls for Youth Vigilance Against Authoritarianism

To mark the 50th anniversary of the Emergency imposed in 1975, the Delhi unit of the Bharatiya Janata Yuva Morcha (BJYM) organized a Mock Parliament on 27 June at the NDMC Convention Centre. The event, themed around the erosion of democratic rights during the Emergency, witnessed participation from students of various Delhi colleges. Union External Affairs Minister S. Jaishankar and Delhi BJP President Virendra Sachdeva were present as chief guests, along with Delhi BJYM President Sagar Tyagi. The programme began with a ceremonial lamp lighting and a special exhibition showcasing the events and impacts of the Emergency. In his welcome speech, Sagar Tyagi described the Emergency as a dark chapter in India’s democratic journey and emphasized the importance of educating today’s youth about the dangers of authoritarianism. Virendra Sachdeva said the Emergency was a time when the Constitution was strangled to help one family retain power. He noted that people were jailed without cause and some even lost their lives. He urged youth to come out of mobile addiction and serve the nation with sincerity. S. Jaishankar, in his address, stressed that the Emergency was not just a political crisis but a direct attack on India’s way of life and civil liberties. He pointed out that key constitutional amendments during that period the 38th, 39th, and 42nd were aimed at silencing the judiciary and removing fundamental rights. He criticized Congress for never apologizing for the Emergency, adding that even if someone’s life was in danger, courts had no power to intervene at that time. He remarked that slogans like “Indira is India, and India is Indira” showed how the nation was equated with a single individual. He recounted the widespread fear created through police raids and arrests, saying people had no idea when they would be freed. He also mentioned that due to a bilateral agreement signed with Sri Lanka during the Emergency, India lost its traditional fishing rights an issue that continues to affect Indian fishermen. Listing six key lessons from the Emergency, S. Jaishankar said democracy is in India’s DNA and the 1977 elections were a result of people rejecting dictatorship. He warned that placing family above the nation weakens democracy and that Indians must be cautious of those who criticize the country abroad. Empowering citizens, he said, is essential to prevent future authoritarianism. He also underlined the importance of national pride, citing the example of Operation Sindoor, after which Indian leaders across party lines projected a strong image abroad. Lastly, he said that the Emergency should not be seen as just a historical event because even today, many of its architects and supporters have shown no regret. The Mock Parliament concluded with a clear message to the youth: protecting democracy requires not just awareness but active participation and moral courage.

आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा ने आयोजित की मॉक पार्लियामेंट, एस. जयशंकर ने संविधान संशोधनों और कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली में 27 जून को दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा द्वारा आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष मॉक पार्लियामेंट का आयोजनकिया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में हुआ, जिसमें केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और दिल्ली भाजपा अध्यक्षवीरेंद्र सचदेवा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और आपातकाल पर आधारित प्रदर्शनी के अवलोकन सेहुई। विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने इस मॉक पार्लियामेंट में हिस्सा लिया और आपातकाल के इतिहास व उसके प्रभावों को समझा। दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष सागर त्यागी ने अपने स्वागत भाषण में आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्यायबताया और कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इसके बारे में जानना जरूरी है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने अपने संबोधन में कहा कि यहआयोजन इसलिए जरूरी है ताकि युवा यह समझ सकें कि किस तरह कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए संविधान और मौलिक अधिकारों का गलाघोंट दिया था। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान सत्ता की भूख में कई लोगों की आजादी और जान जोखिम में पड़ी। उन्होंने युवाओं से मोबाइलकी लत से निकलकर देशसेवा की भावना अपनाने की अपील की और लालच से बचने का संदेश एक रोचक कथा के माध्यम से दिया। केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक संकट नहीं था, बल्कि यह आम नागरिकों की स्वतंत्रता औरजीवनशैली पर सीधा हमला था। उन्होंने कहा कि उस समय संविधान में किए गए संशोधनों विशेष रूप से 38वां, 39वां और 42वां संशोधन नेन्यायपालिका की शक्ति और नागरिक अधिकारों को खत्म करने का प्रयास किया। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने आज तक देश से माफी क्योंनहीं मांगी, जबकि उस दौरान संविधान को इस हद तक दबा दिया गया था कि अगर किसी की जान भी चली जाए तो अदालत से भी कोई राहत नहींमिल सकती थी। जयशंकर ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज संविधान की प्रति हाथ में लेकर घूमते हैं, वे असल में उसकी आत्मा को नहींसमझते। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1975 में इमरजेंसी का विरोध करने वाले कुछ लोग आज उन्हीं दलों के साथ खड़े हैं जिन्होंने इमरजेंसी लागूकी थी। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी की जड़ में केवल एक बात थी “किस्सा कुर्सी का”। उन्होंने बताया कि उस समय भय का माहौल पुलिसिया दमन केजरिए बनाया गया था, जिससे छात्रों से लेकर दुकानदार तक सभी डर के साए में जीते थे। अपने संबोधन के अंत में जयशंकर ने छह महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया पहला, लोकतंत्र भारत के डीएनए में है, इसलिए जनता के दबाव मेंचुनाव कराना पड़ा; दूसरा, परिवारवाद लोकतंत्र को कमजोर करता है; तीसरा, देश की छवि विदेश में बिगाड़ने वालों से सतर्क रहना चाहिए; चौथा, नागरिकों को सशक्त बनाना आवश्यक है ताकि वे इमरजेंसी जैसी स्थिति को रोक सकें; पांचवा, राष्ट्रभक्ति की भावना होनी चाहिए, जैसा ‘ऑपरेशनसिंदूर’ के बाद देखा गया; और छठवां, इमरजेंसी को केवल इतिहास की घटना न मानें, क्योंकि आज भी ऐसे लोग हैं जिन्हें उस समय पर कोई पछतावानहीं है। इस आयोजन का उद्देश्य था युवाओं को यह समझाना कि लोकतंत्र की रक्षा केवल भाषणों से नहीं होती, बल्कि उसके मूल्यों को समझना और संकटके समय उसके पक्ष में खड़ा होना भी उतना ही जरूरी है। मॉक पार्लियामेंट जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को भारत के संवैधानिक इतिहास और लोकतंत्र कीकीमत का बोध कराने की दिशा में एक प्रभावी कदम हैं।

कांग्रेस का आरोप: NEET घोटाले पर घिरी NTA, कहा – बन चुकी है ‘नेशनल करप्शन एजेंसी’, कांग्रेस का गंभीर आरोप, NTA की भूमिकापर उठाए सवाल

कांग्रेस ने परीक्षाओं में बढ़ती धांधली को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) पर सीधे तौर पर हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यहसंस्था अब ‘नेशनल करप्शन एजेंसी’ बन चुकी है और केंद्र सरकार इसे बचाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने NEET और CUET जैसी परीक्षाओंमें सामने आए गड़बड़ी के मामलों पर नाराज़गी जताई है। मोदी सरकार क्यों कर रही है NTA का बचाव?दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनएसयूआई के प्रभारी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य कन्हैया कुमार ने सवालकिया कि जब NTA पर गंभीर आरोप लगे हैं, तो मोदी सरकार निष्पक्ष जांच से क्यों बच रही है? उन्होंने यह भी कहा कि पिछले सात महीनों सेलगातार परीक्षाओं में गड़बड़ी सामने आ रही है, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। बिना मिलीभगत के गड़बड़ी संभव नहींकन्हैया कुमार ने महाराष्ट्र में दर्ज FIR का हवाला देते हुए कहा कि यदि CBI कहती है कि NTA के किसी अधिकारी की भूमिका नहीं है, तो भ्रष्टाचारनिरोधक अधिनियम के तहत मामला क्यों दर्ज किया गया? उन्होंने पूछा कि जिन अभिभावकों ने आरोप लगाए हैं, उनकी बातों को नज़रअंदाज़ क्योंकिया जा रहा है? क्या किसी ऊपरी अधिकारी की सहमति के बिना इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव है? देश की हर परीक्षा पर उठ रहे हैं सवालकन्हैया ने कहा कि पीएम मोदी परीक्षा पर चर्चा करते हैं, लेकिन देश में शायद ही कोई ऐसी परीक्षा बची हो जिस पर संदेह न हो। उन्होंने CUET परीक्षा पर भी सवाल उठाए और कहा कि 300 से अधिक विश्वविद्यालयों में दाखिला इसी के माध्यम से होता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया पारदर्शी नहींरही। उन्होंने आरोप लगाया कि सीयूईटी का डेटा निजी कॉलेजों के पास लीक हो रहा है, जिससे वे छात्रों के अभिभावकों को एडमिशन के लिए कॉलकरते हैं। पब्लिक यूनिवर्सिटी को जानबूझकर रोका जा रहा हैकन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि जानबूझकर सरकारी विश्वविद्यालयों की एडमिशन प्रक्रिया में देरी की जा रही है ताकि निजी कॉलेजों की सीटेंपहले भर जाएं। इससे छात्रों और अभिभावकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के कारण देश मेंहर घंटे दो युवा आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। शिक्षा बजट और शिक्षकों की कमी पर भी सवालकन्हैया ने शिक्षा बजट में लगातार हो रही कटौती, शिक्षकों की भर्ती में देरी और नए चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के बावजूद शिक्षकों की संख्या नबढ़ने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिना योग्य शिक्षकों के देश ‘विश्वगुरु’ नहीं बन सकता और बिना कुशल डॉक्टरों के हमारी स्वास्थ्य व्यवस्थामजबूत नहीं हो सकती। NEET से बनते हैं डॉक्टर, इसलिए हो निष्पक्ष जांचएनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने मांग की कि NTA के अधिकारियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि NEET जैसीपरीक्षा कोई सामान्य परीक्षा नहीं, बल्कि यह देश के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ तैयार करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार भी NEET परीक्षा मेंओएमआर शीट को पैसे लेकर बदला गया, और सरकार आंखें मूंदे बैठी है।

EC ने ठुकराई राहुल गांधी की मांग, मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट देने से किया इनकार, निर्वाचन आयोग ने दी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की याद

निर्वाचन आयोग (EC) ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची की मशीन-रीडेबल औरडिजिटल कॉपी की मांग की थी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, मौजूदा कानूनी ढांचे में इस प्रकार की मांग स्वीकार्य नहीं है। आयोग ने इस पर सुप्रीमकोर्ट के 2019 के फैसले का हवाला देते हुए कांग्रेस पार्टी को भी उसके पालन का सुझाव दिया है। कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा बतायाEC के अनुसार, राहुल गांधी की यह मांग नई नहीं है। आयोग का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पिछले आठ वर्षों से इसी प्रकार की मांग करतीरही है, जिसे अब एक बार फिर से नए रूप में सामने लाया जा रहा है। आयोग ने इसे कांग्रेस की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बताया है, जिसेजानबूझकर दोहराया जा रहा है।सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कर दी थी स्थिति स्पष्टचुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की ओर से पहले भी यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया था। कमलनाथ बनाम भारत निर्वाचन आयोग केस[WP(C) No. 935/2018] में शीर्ष अदालत ने यह तय कर दिया था कि मतदाता सूची को टेक्स्ट मोड में ही देना अनिवार्य है, searchable याmachine-readable फॉर्मेट में देना अनिवार्य नहीं है।

तेलंगाना में युवती ने चलाई कार रेलवे ट्रैक पर, बेंगलुरु-हैदराबाद ट्रेन रोकनी पड़ी, 3 किलोमीटर तक रेलवे ट्रैक पर दौड़ाई कार, ट्रेन सेवाएंबाधित

तेलंगाना के शंकरपल्ली क्षेत्र में एक युवती द्वारा रेलवे ट्रैक पर कार चलाए जाने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया। घटना का वीडियोसोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, युवती ने करीब 3 किलोमीटर तक कार को रेलवे पटरियों पर चलाया, जिससेबेंगलुरु-हैदराबाद एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को बीच रास्ते में रोकना पड़ा। यह घटना गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे नागुलापल्ली और शंकरपल्ली के बीचगेट नंबर 22 के पास हुई। कार फंसी क्रॉसिंग पर, कर्मचारियों ने पकड़ाप्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब कार शंकरपल्ली के पास एक रेलवे क्रॉसिंग पर फंस गई, तो रेलवे इंजीनियरिंग स्टाफ ने हस्तक्षेप किया। कार को ट्रैकपर देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। रेलवे कर्मचारियों ने युवती को रोका और उसे शंकरपल्ली पुलिस को सौंप दिया गया। युवती ने कर्मचारियों पर बरसाए पत्थर‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, युवती ने पहले लोहे की रॉड से हमला करने का प्रयास किया और फिर कर्मचारियों पर पत्थर फेंके। पुलिसके अनुसार वह मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रही थी और खुद को नियंत्रित नहीं कर पा रही थी। उसे आखिरकार काबू में कर मेडिकल जांच केलिए भेजा गया।लखनऊ की रहने वाली, नौकरी जाने से थी परेशानप्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवती उत्तर प्रदेश के लखनऊ की निवासी है और हैदराबाद में एक आईटी कंपनी में कार्यरत थी। हाल ही मेंनौकरी जाने से वह मानसिक तनाव में थी। पुलिस ने उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन बताया गया है कि युवती कुछ शिकायत लेकर सुबह6:30 बजे हैदराबाद के नरसिंगी पुलिस स्टेशन गई थी, जहां से वह जल्दबाजी में निकल गई और अपना बैग भी वहीं छोड़ गई। रेलवे ट्रैक सुरक्षा पर उठे सवालइस घटना के कारण नागुलापल्ली और शंकरपल्ली के बीच करीब आधे घंटे तक ट्रेनों की आवाजाही रुकी रही। युवती और उसकी कार को ट्रैक सेहटाने के बाद लगभग 8 बजे रेल सेवाएं पुनः बहाल की गईं। युवती द्वारा रेलवे ट्रैक पर वाहन चलाने की घटना ने रेलवे सुरक्षा उपायों पर सवाल खड़ेकर दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ट्रैक की निगरानी और मजबूत की जानी चाहिए।

SCO समिट में भारत-पाक के रक्षा मंत्रियों के बीच सilता, आतंकवाद पर राजनाथ सिंह का कड़ा रुख, SCO बैठक में आमने-सामने हुए भारतऔर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की हालिया बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक ही मंच परदिखाई दिए। यह पहली बार था जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रक्षा मंत्री एक ही मंच पर मौजूद थे।हालांकि, दोनों के बीच किसी भी तरह की बातचीत नहीं हुई और न ही कोई औपचारिक अभिवादन का आदान-प्रदान हुआ।पाकिस्तान के मंत्री दिखे अलग-थलगबैठक के दौरान राजनाथ सिंह और ख्वाजा आसिफ ने अलग-अलग एंट्री की और ग्रुप फोटो सेशन में हिस्सा लिया। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल केप्रमुख ख्वाजा आसिफ पूरे समय अकेले दिखाई दिए, जबकि भारतीय रक्षा मंत्री ने चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन, रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव औरबेलारूस के समकक्ष विक्टर ख्रेनिन से मुलाकात की और द्विपक्षीय चर्चा की। तल्ख रिश्तों की वजह: पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूरभारत और पाकिस्तान के बीच हालिया कूटनीतिक तनाव की मुख्य वजह अप्रैल में पहलगाम में हुआ आतंकी हमला है, जिसमें पाक समर्थितआतंकियों की भूमिका सामने आई थी। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत कड़ी सैन्य कार्रवाई की थी। इसी वजह से भारत नेपाकिस्तान के साथ बातचीत बंद कर दी है और छह दशक पुराने सिंधु जल समझौते को भी स्थगित कर दिया गया है। SCO मंच से पाकिस्तान पर राजनाथ सिंह का सीधा हमलाराजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े टीआरएफ केपाकिस्तानी संपर्कों का जिक्र किया और पहलगाम हमले को लेकर पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया। साथ ही, उन्होंने यह स्पष्ट किया किभारत भविष्य में भी आतंकवाद के खिलाफ इसी तरह की कठोर कार्रवाइयों के लिए तैयार है। संयुक्त बयान से भारत का इनकारSCO बैठक में जब पाकिस्तान और चीन ने मिलकर ऐसा साझा बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) लाने की कोशिश की, जिसमें बलूचिस्तान का उल्लेख थालेकिन पहलगाम हमले का कोई जिक्र नहीं था, तब भारत ने उस ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। भारत के सख्त रुख के चलते सम्मेलनके बाद कोई संयुक्त प्रस्ताव जारी नहीं हो सका। भारत ने पाकिस्तान की रणनीति को किया बेनकाबपाकिस्तान ने संयुक्त बयान में बलूचिस्तान का हवाला देकर वहां के आंदोलन को बाहरी ताकतों की साजिश बताने की कोशिश की, लेकिन भारत नेइस प्रयास को विफल कर दिया। पाकिस्तान लंबे समय से भारत पर बलूचिस्तान को अस्थिर करने का आरोप लगाता रहा है, जबकि वहां की जनतापाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के विरोध में स्वतंत्रता की मांग कर रही है।