‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर पीएम मोदी को एनडीए का सम्मान, आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई को दी सराहना

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के लिए सम्मानित किया. पहलगाम आतंकी हमले पर पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया की एनडीए की बैठक में जमकर सराहना की गई. इस दौरान पीममोदी ने बैठक को संबोधित भी किया. उन्होंने कहा कि 5 अगस्त एक ऐतिहासिक दिन था क्योंकि इसी दिन पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेषअधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था. एनडीए सरकार ने संविधान का पूरी भावना से पालन किया है. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह की भी प्रशंसा की और कहा कि वह इस मंत्रालय में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मंत्री बन गए हैं. विपक्ष परनिशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष सोच रहा होगा कि क्या ऑपरेशन सिंदूर पर बहस की मांग करके उसने कोई गलती की है. संघर्ष विराम की लगाई थी गुहारइस दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान पीएम मोदी के नेतृत्व और सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और अटूट प्रतिबद्धता कीप्रशंसा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया. श्रीनगर के बाहरी इलाके में 28 जुलाई को ‘ऑपरेशन महादेव’ नाम से हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा(एलईटी) के तीन दहशतगर्द मारे गए थे. भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों ने जून 2024 में सरकार बनने के बाद से संसद के सत्रों केदौरान अपनी इस तरह की दूसरी बैठक की. ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच भाजपा और उसके सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने पीएम मोदी काअभिनंदन किया. दरअसल, 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद 7 मई को भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकीठिकानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी. इसके पाकिस्तान ने भी कायराना हरकत करते हुए भारत में नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था. जवाब में भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को हमला बोला था चार दिन तक चले संघर्ष के बाद 10 मई को पाकिस्तान ने भारत के सामने घुटनेटेक दिए थे और संघर्ष विराम की गुहार लगाई थी. पीएम मोदी को किया सम्मानितराष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल दलों के नेताओं ने आज संसदीय दल की बैठक के दौरान पीएम मोदी को सम्मानित किया. आतंकवादके खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को सभी लोगों की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सम्मानित किया. संसद के मानसूनसत्र के दौरान एनडीए में शामिल दलों के नेताओं की इस पहली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया जिसमें ऑपरेशन सिंदूर और महादेव के दौरान सशस्त्र बलों की “अद्वितीय साहस” और अमनपरकप्रतिबद्धता की तारीफ की गई कश्मीरी पर्यटन स्थल बइसारान घाटी में लश्कर‑ए‑तैयबा/रजिस्टेंस फ्रंट ने 26 यात्रियों की हत्या की थी. जिनमेंअधिकांश हिंदू धर्मावलंबी थे.
प्रियंका गांधी की सुप्रीम कोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया “कौन सच्चा है भारतीय , यह तय नहीं कर सकते जज “जानें क्या है पूरा मामला”

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर अपने भाई राहुल गांधी का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज यहतय नहीं कर सकते कि कौन सच्चा भारतीय है. बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊकी एक अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई, लेकिन साथ ही कहा कि ‘अगर वह सच्चे भारतीय हैं, तो उन्हें ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था.’ सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी राहुल गांधी के उस बयान को लेकर थी जो उन्होंने दिसंबर 2022 में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान सेना को लेकर दिया था.इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘माननीय सुप्रीम कोर्ट के जजों का मैं सम्मान करती हूं. बयान को किया जा रहा है गलत तरीके से पेशलेकिन यह तय करना उनका काम नहीं है कि कौन सच्चा भारतीय है. विपक्ष के नेता का काम होता है सरकार से सवाल पूछना और उसे चुनौती देना. उन्होंने कहा कि उनके भाई राहुल गांधी को सेना का बहुत सम्मान है और वह कभी भी सेना के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते. प्रियंका ने कहा, ‘राहुलसेना का हमेशा सम्मान करते हैं उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. राहुल गांधी ने 9 दिसंबर 2022 को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरानएक भाषण में सेना से जुड़ा बयान दिया था, जिसे लेकर उनके खिलाफ लखनऊ की अदालत में मामला दर्ज हुआ था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उसमामले में उन्हें राहत दी, लेकिन साथ में यह भी कहा कि ‘एक सच्चा भारतीय ऐसा बयान नहीं देगा.वहीं इस मामले को लेकर भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ‘चीन को मजबूत करने की कसम खाई है. इसके जवाब मेंकांग्रेस ने कहा कि देशभक्त भारतीयों ने गलवां घाटी की घटना के बाद से सरकार से जवाब मांगा है लेकिन सरकार सच्चाई को ‘डीडीएलजे नीति- डिनाई (इंकार), डिस्ट्रैक्ट (ध्यान भटकाना), लाइ (झूठ), जस्टिफाई (सफाई)’ के जरिए छिपा रही है. राहुल ने कभी नहीं किया सेना का अपमानकांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने कभी सेना का अपमान नहीं किया. वे केवल सरकार से जवाब मांग रहे थे कि गलवां में चीन के हाथों हमारेजवानों की शहादत के बाद क्या कदम उठाए गए. भाजपा ने राहुल गांधी पर चीन के समर्थन का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका रवैया देश विरोधीहै. भाजपा नेताओं ने राहुल के पुराने बयानों को आधार बनाकर यह आरोप लगाया. एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कांग्रेस नेता राहुल गांधीको सेना पर टिप्पणी के मामले में लगी फटकार पर प्रियंका गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जज यहतय नहीं कर सकते कि कौन सच्चा भारतीय है.
नीतीश सरकार का बड़ा कदम बिहार में रोजगार के लिए जरूरी होगा राज्य का शैक्षणिक प्रमाणपत्र,शिक्षक भर्ती में बाहरी आवेदकों को झटका

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों राज्य में पहली बार डोमिसाइल नीति पर सीधे एलान कर दिया था. शुरुआत उन्होंने शिक्षा विभाग सेकी बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से ली जाने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा – 4 से डोमिसाइल नीति लागू करने का उन्होंने एलान किया था. उसएलान के साथ यह बात चल निकली थी कि अब बिहार का डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाने वालों की बाढ़ आएगी, क्योंकि नौकरी में इससेप्राथमिकता मिलेगी. लेकिन बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने राज्य मंत्रिपरिषद् की बैठक में इस पॉलिसी पर मुहर लगाते समय साफ किया किजिनके पास बिहार के शिक्षण संस्थान से मैट्रिक या इंटर का प्रमाणपत्र होगा उन्हें ही इस नीति का लाभ मिलेगा. शैक्षणिक इकाई का मान्य होगा प्रमाण पत्रअगस्त की पहली कैबिनेट बैठक में मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने 36 फैसलों पर सहमतिजताई. इसमें शिक्षक भर्ती के लिए डोमिसाइल नीति के प्रस्ताव पर मुहर लगाना एक अहम बिंदु था. इस प्रस्ताव में लिखा गया है “बिहार राज्यविद्यालय अध्यापक (नियुक्ति, स्थानान्तरण, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवाशत) (संशोधन) नियमावली, 2025 के गठन के उपरांत बिहार राज्य सेशैक्षणिक अर्हता प्राप्त अभ्यर्थी विद्यालय अध्यापक के पद पर अधिक संख्या में नियुक्त हो सकेंगे. मतलब साफ है कि बिहार में पढ़ने वालों को हीशिक्षक भर्ती परीक्षा में प्राथमिकता मिलेगी. यानी, डोमिसाइल के नाम पर जो आरक्षण जैसी सुविधा मिलेगी, उसके लिए बिहार की शैक्षणिक इकाईका प्रमाणपत्र ही मान्य होगा. बाहरी भी ले सकेंगें प्राथमिकताएंपिछले हफ्ते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर एलान किया था कि शिक्षकों की बहाली में बिहार के निवासियों (DOMICILE) कोप्राथमिकता देने हेतु शिक्षा विभाग को संबंधित नियम में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया है. शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण (TRE-4) सेही इसे लागू करने की बात कही गई थी। सीएम ने लिखा था कि वर्ष 2025 में TRE-4 एवं वर्ष 2026 में TRE-5 का आयोजन किया जाएगा. TRE-5 के आयोजन के पूर्व STET का आयोजन करने का भी निर्देश दिया गया है. अब कैबिनेट ने मुख्यमंत्री के उसी एलान पर मुहर लगाई है औरएक पंक्ति में स्पष्ट कर दिया है कि आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने से कोई बिहार का निवासी नहीं हो जाएगा, बल्कि यहां पढ़ने वालों को ही इसकालाभ मिलेगा. शिक्षक भर्ती परीक्षा से बिहार में डोमिसाइल नीति लागू होने के साथ ही एक चर्चा चल निकली थी कि अब यहां का आवासीयप्रमाणपत्र बनवाकर बाहरी भी प्राथमिकता ले सकेंगे. लेकिन, अब बिहार कैबिनेट ने सबकुछ साफ कर दिया है.
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन विपक्ष को एकजुट करने वाले ‘चाणक्य’ ने था कहा 2024 में एक उम्मीदवार बनाम हो एक उम्मीदवार “जानें मलिक की पूरी कहानी”

जे एंड के सहित कई राज्यों के पूर्व राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को आरएमएल अस्पताल में निधन हो गया है. पुलवामा के आतंकी हमले को लेकर मलिक ने बड़ा खुलासा किया था. उसके बाद उन्होंने भाजपा के खिलाफ ‘विपक्षी चाणक्य’ की भूमिका निभाईथी. मलिक ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिए विपक्षी दलों को एक मंत्र दिया था. अपने राजस्थान दौरे के दौरान पूर्वराज्यपाल ने कहा था मैंने दिल्ली में सभी राजनीतिक दलों से बात की है. वे इस बात पर राजी हैं कि लोकसभा चुनाव में ‘एक उम्मीदवार के बदले एकउम्मीदवार’ खड़ा करेंगे. ऐसा संभव हो गया तो ये लोग (भाजपा) दिल्ली में बचेंगे नहीं. मलिक ने लोकसभा चुनाव से पहले कहा था, वे हर माह दसपब्लिक मीटिंग करेंगे. हालांकि उन्होंने दावा किया था कि वे न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही कोई पार्टी ज्वाइन करेंगे. वे विपक्षी दलों के बीच एकता कोस्थापित करने का काम करेंगे. मलिक का कहना था. लोग ऐसी स्थिति पैदा करें कि उन्हें सरकार से मांगना ही न पड़े सरकार उनसे पूछे कि क्या चाहिए. ये तभी संभव हो सकेगा, जब दिल्ली में सरकार को बदला जाएगा. मंच पर आना होगा आनेइसके लिए विपक्षी दलों कुछ एकता दिखाई है लोगों को जात-पात छोड़कर एक मंच पर आगे आना होगा. अगर एक समान मकसद के लिए सभी दल एकत्रित हो जाते हैं तो दिल्ली में भाजपा को कोई बचा नहीं सकता बाद में मलिक की तबीयत बिगड़ती चली गई. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मलिक ने कहा था, मैंने दिल्ली में सभी पार्टियों से बात कर ली है. सभी राजनीतिक दल इस बात पर सहमत हैं कि 2024 केलोकसभा चुनाव में ‘एक उम्मीदवार के बदले एक उम्मीदवार खड़ा हो’ की रणनीति पर काम करेंगे. ऐसा संभव हो जाता है तो वोट नहीं बटेंगे. उसकेबाद भाजपा वाले दिल्ली में नहीं लौट पाएंगे. तब इनका नाम लेने वाला कोई नहीं होगा. मलिक ने कहा था, आज जिस घमंड को लेकर ये लोग घूमरहे हैं, वह चूर-चूर हो जाएगा. मैने लोगों से कहा है कि एक बात यह भी समझ लो कि 2024 के आम चुनाव में, ये लोग बच गए तो उसके बाद आपनहीं बचेंगे. दूसरे मुद्दों पर घेरा भाजपा कोआपके पास यह आखिरी मौका है. पूर्व राज्यपाल मलिक ने कई मुद्दों पर खुलकर बोला उन्होंने पुलवामा के अलावा कई दूसरे मुद्दों पर भी भाजपा कोघेरा था. वह चाहे जंतर मंतर पर बैठे पहलवान हों या अदाणी का मुद्दा हो, इन्हें लेकर मलिक खासे मुखर रहे. किसानों को लेकर, राज्यपाल रहते हुए भीमलिक ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया था. मलिक ने कहा था, राजनाथ सिंहप्रधानमंत्री पद के ‘सीरियस उम्मीदवार’ हैं. अगर उनके भाग्य में है तो वह प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे. पुलवामा हमले को लेकर उनके द्वारा दिए गए बयान परजब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि जब वे राज्यपाल थे, तब उन्होंने कुछ क्यों नहीं कहा था। सीकर में दो दिवसीय दौरे पर मलिक ने कहाथा, मैंने तब भी पुलवामा मुद्दे पर बोला था। कोई एक दिन नहीं, कई बार उस बाबत बोला था. हमले के दिन, अगले दिन और फिर बाद में भी कईदफा इस मुद्दे को उठाया था. प्रधानमंत्री को पुलवामा मुद्दे पर बयान देना चाहिए था। इस बाबत अगर कोई जांच हुई है, कौन कसूरवार है, उस परकार्रवाई हुई है या नहीं, इस संबंध में पीएम बताएं.
भारत-न्यूजीलैंड ने रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर जताई प्रतिबद्धता, मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी बनी सहमति

न्यूजीलैंड रक्षा मंत्रालय की अंतरराष्ट्रीय शाखा की प्रमुख कैथलीन पीयर्स ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ से मुलाकातकी. इस दौरान दोनों नेताओं ने प्रमुख रणनीति क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई. एक्स पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ताने कहा, न्यूजीलैंड के रक्षा मंत्रालय की अंतरराष्ट्रीय शाखा की प्रमुख कैथलीन पीयर्स और न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक जॉन राटा ने आज रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ से मुलाकात की. बैठक में मजबूत रक्षा संबंधों और प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई. इसीदिन रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी कैथलीन पीयर्स से मुलाकात की. एक्स पर पोस्ट में रक्षा मंत्रालय ने कहा, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह नेनई दिल्ली में कैथलीन पीयर्स और पैट्रिक जॉन राटा से मुलाकात की. दोनों पक्षों ने रणनीतिक वार्ता की शुरुआत का स्वागत किया और रक्षा संबंधोंको और मजबूत करने पर सहमति जताई. आर्थिक संबंधों को और करना है मजबूतरक्षा सहयोग के प्रति यह प्रतिबद्धता ऐसे समय में दोहराई गई है जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर बातचीत कादूसरा दौर हाल ही में नई दिल्ली में पूरा हुआ है। इस व्यापार वार्ता में, वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, उत्पत्ति के नियम, सीमा शुल्कप्रतिक्रियाएं और व्यापार सुगमता, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, साफ-सफाई से जुड़े नियम, और आर्थिक सहयोग समेत कई क्षेत्रों में अच्छी प्रगति हुईहै. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, इस चर्चा में दोनों देशों ने कई मुद्दों पर जल्द सहमति बनाने की इच्छा जताई है. दोनों पक्षों नेएक संतुलित, व्यापक और दूरदर्शी समझौते पर पहुंचने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. भारत और न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के लिएबातचीत का दूसरा दौर 25 जुलाई को नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. इसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को औरमजबूत करना है. घनिष्ठ रहा है दोस्तानाभारत और न्यूजीलैंड के बीच रिश्ते ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ और दोस्ताना रहे हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश राष्ट्रमंडल के सदस्य हैं, समानकानून प्रथाएं और लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के जरिये अपने नारिकों के लिए विकास और समृद्धि हासिल करने की समान सोच रखते हैं. जो इनरिश्तों को और मजबूत करने की एक मजबूत नींव प्रदान करती है. न्यूजीलैंड के रक्षा मंत्रालय की अंतरराष्ट्रीय शाखा की प्रमुख कैथलीन पीयर्स औरन्यूजीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक जॉन राटा ने सोमवार को रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ से मुलाकात की. बैठक में मजबूत रक्षा संबंधों और प्रमुखरणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई. इसी दिन रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी पीयर्स से मुलाकात की.
शिवसेना (यूबीटी) और मनसे साथ मिलकर लड़ेंगी महाराष्ट्र निकाय चुनाव, ठाकरे भाइयों की नजदीकियों से बदले सियासी समीकरण

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मंगलवार को घोषणा की कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) जरूर मिलकरमहाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव लड़ेंगे. कई महीनों की अटकलों के बाद चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे जुलाई में फिर एक मंच परआए. दोनों नेता महाराष्ट्र सरकार की पहली से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन-भाषा की नीति और कथित तौर पर हिंदी भाषा थोपे जाने केखिलाफ एक साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. इसके बाद जब सरकार ने अपना फैसला वापस लिया, तब दोनों नेताओं ने एक साझा विजय रैलीका भी आयोजन किया था. नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब राउत से पूछा गया कि क्या शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की मनसेमिलकर आगामी स्थानीय चुनाव लड़ेंगी. तो उन्होंने कहा ‘जरूर. उन्होंने आगे कहा, ‘दोनों ठाकरे एक साथ बैठकर इस पर चर्चा करेंगे. बृहन्मुंबई महानगरपालिका और अन्य नगर निगमों में आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं. ठाकरें भाइयों के बीच नजदीकियांराऊत ने कहा कि चचेरे भाइयों के बीच फिर से संबंध सुधरने के बाद शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास है कि यह गठबंधनमुंबई, पुणे, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर, ठाणे और कल्याण-डोंबिवली जैसे शहरों की नगरपालिकाओं में बहुमत हासिल करेगा। गौरतलब है कि राजठाकरे ने 2005 में अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मतभेद के चलते शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बनाई थी. उन्होंने मनसेको ‘मूल निवासियों के अधिकारों’ की असली आवाज़ बताकर जनता के सामने पेश किया. तबसे लेकर अब तक दोनों चचेरे भाइयों की पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती रही हैं. शिवेसना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी और मनसे मिलकर महाराष्ट्र के आगामी स्थानीयनिकाय चुनाव लड़ेंगे. तीन भाषा की नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान ठाकरे भाइयों के बीच नजदीकियां बढ़ीं. महायुति को टक्कर देने की संभावनाराउत ने कहा कि दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं को आगामी निकाय चुनाव में बहुत मिलने का भरोसा है. एनसीपी नेता छगन भुजबळ ने सुझाव दियाकि यह गठबंधन सिर्फ मुंबई तक सीमित रह सकता है. अन्य निकायों में विस्तारित न हो. “स्थानीय निकाय चुनावों के लिए शिवसेना (यूबीटी) औरमनसे मिलकर लड़ेगी” विषय को लेकर उत्साह जताया गया है कि कार्यकर्ता इस गठबंधन से मजबूत बहुमत की उम्मीद कर रहे हैं पहले से अलग–अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके शिवसेना (यूबीटी) ने अब मोड़ लिया है पहले स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ने की बात कही गई थी. लेकिन हाल के घटनाक्रम में रुख बदल गया है. BMC और अन्य नगर निगम चुनाव रणनीति यह गठबंधन बीएमसी (मुंबई), पुणे, नासिक सहित अन्यनगरीय निकायों में भाजपा-महायुति को टक्कर देंगे की संभावना जताई जा रही है.
सत्येंद्र जैन केस में CBI को नहीं मिला भ्रष्टाचार का सबूत, कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट की मंजूरी दी आप ने भाजपा पर बोला हमला

आप नेता सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की पहलीप्रतिक्रिया आई है। जिसमें उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि आठ साल तक जांच चली. लेकिन भ्रष्टाचार का एक रुपया भी बरामद नहीं हुआ साथही उन्होंने भाजपा पर भी तंज कसा. आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने एक्स पर लिखा कि आठ साल तक जांच चली. सीबीआई-ईडी कीरेड और मीडिया ट्रायल हुआ. यहां तक कि बच्चों के कपड़े तक खंगाले गए. लेकिन कोर्ट में खुद सीबीआई ने कहा कि एक रुपये का भी भ्रष्टाचार नहींमिला. आगे लिखा कि तो जिन्होंने झूठा केस गढ़ा था. जिन्होंने सत्येंद्र जैन को विलेन बनाकर चैनलों पर चीख-चीखकर टीआरपी बटोरी गई. जिन्होंने“भ्रष्टाचार उजागर” की भाजपाई स्क्रिप्ट पढ़ पढ़कर सत्येंद्र को जेल भेजने का जश्न मनाया था. भाजपा पर तंज कसते हुए लिखा कि भाजपा औरउसकी झूठ फैलाने की नौकरी बजाकर जीने वाली जमात को अब माफी मांगनी चाहिए कि देश से, सच्चाई से और उस परिवार से जिसे आठ सालतक बदनाम किया गया. क्या झूठ फैलाने वालों की कोई जवाबदेही नहीं होती है. विजेंद्र गुप्ता करते है झूठी शिकायतआप नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्येंद्र जैन पर केस क्लोज होने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है एक्स पर भारद्वाज ने लिखा कि दिल्ली विधानसभा अध्यक्षविजेंद्र गुप्ता विजेंद्र गुप्ता झूठी शिकायत करते हैं. एलजी उसे सीबीआई को भेज देते हैं. शिकायत में कुछ होता नहीं, फिर भी सत्येंद्र जैन पर झूठा केसदर्ज होता है. बिना सबूत के सीबीआई जांच शुरू करती है और सत्येंद्र जैन और उनके परिवार और पार्टी को लगातार परेशान किया जाता है. क्या इसतरह के उत्पीड़न के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में पेशेवरों की अनियमित नियुक्ति और असंबंधित परियोजना निधि से भुगतान के आरोपों से संबंधित एक मामले मेंकेंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की तरफ से दायर क्लोजर रिपोर्ट को राउज एवेन्यू कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. मामला दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्रीसत्येंद्र जैन और अन्य के खिलाफ था.समर्थन करने के लिए नहीं मिला कोई सबूतविशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने कहा था कि कई वर्षों की जांच के बावजूद आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या किसी अन्यअपराध के तहत आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई सुबूत नहीं मिला. कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी जांच एजेंसी को कोई सुबूत नहींमिला ऐसे में आगे की कार्यवाही का कोई औचित्य नहीं है। भ्रष्टाचार के प्रावधानों को लागू करने के लिए कुछ सामग्री तो होनी ही चाहिए. केवलकर्तव्य की उपेक्षा या कर्तव्य का अनुचित प्रयोग ही अधिनियम के तहत उल्लंघन नहीं माना जा सकता. दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की एकशिकायत के आधार पर सत्येंद्र जैन और अन्य लोक निर्माण विभाग अधिकारियों के खिलाफ 2018 में प्राथमिकी की गई थी।आरोप है कि जैन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भर्ती और वित्तीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सलाहकारों की एक क्रिएटिव टीम कीअनियमित रूप से नियुक्ति की गई थी. यह भी आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया में मानक भर्ती प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया था औरवित्त विभाग की मंजूरी के बिना बारापुला फेज-तीन जैसी असंबंधित परियोजनाओं पर खर्च कर दिया गया था. लगभग चार वर्षों तक मामले की जांचकरने के बाद सीबीआई को कोई आपराधिक मामला या व्यक्तिगत लाभ, रिश्वतखोरी के सुबूत नहीं मिले.
दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता का विपक्ष पर तीखा हमला ‘ऑपरेशन सिंदूर और महादेव’ को सेना के शौर्य का बताया प्रतीक “सेना पर सवाल उठानेवालों को नहीं बख्शेंगी देश की बेटियाँ”

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा के मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव को लेकर भारतीय सेना के शौर्य को नमन किया. उन्होंनेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व की सराहना करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला भी बोला. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सैन्य अभियान मात्ररणनीतिक नहीं बल्कि हर भारतीय परिवार के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक था. उन्होंने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला और वर्षों पहले युद्ध केदौरान कांग्रेस की सरकारों की ओर से लिए गए निर्णयों पर सवाल उठाया. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर उन सभी आंसुओं का उत्तर था जोहमारी बहनों की आंखों से निकले. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक संवेदनशील भाई, साहसी पिता और राष्ट्रनायक की भूमिका निभा रहे हैं. राजनीति पर उठाए गंभीर सवालमुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे देशहित से दूर होते जा रहे हैं. उन्हें देश की प्रगति से नहीं बल्कि अपनी राजनीति से प्रेम है. बिनानाम लिए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के बयान पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ नेता मंचों पर संवेदनाओं का नाटक करते हैं वहीं संसद मेंदेश की सेना और सरकार पर सवाल उठाते हैं जिन्हें अपने प्रधानमंत्री और सेनाओं पर भरोसा नहीं वे हमेशा विदेशी आकाओं के पांव छूते दिखते हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन पर सीधा कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग वर्षों तक ग्लैमर और रोल में खोए रहे आज वेसेना के रोल पर सवाल उठा रहे हैं, क्या उनके लिए देश की बेटियों की इज्जत से बड़ा कोई मंच हो सकता है. मुख्यमंत्री ने 1965, 1971, कारगिलयुद्ध और कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के पलायन जैसे ऐतिहासिक विषयों को उठाते हुए पूर्ववर्ती सरकारों की निर्णयहीनता और दबाव की राजनीति परगंभीर सवाल उठाए. राजनीति का लगाया आरोपउन्होंने कहा कि जब देश ने युद्ध जीता तब नेताओं ने उसे बातचीत की टेबल पर हार में बदल दिया. आज जब भारत निर्णायक नेतृत्व में आत्मनिर्भर औरसाहसी कदम उठा रहा है, तब उसे नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर उन सभी आंसुओं का उत्तर था जोहमारी बहनों की आंखों से निकले. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक संवेदनशील भाई, साहसी पिता और राष्ट्रनायक की भूमिका निभा रहे हैं. धन्यवाद प्रस्तावके माध्यम से NDA सांसदों ने ऑपरेशन सिंदूर और महादेव की सराहना की गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों कोपाकिस्तान भागने से रोका, और कांग्रेस पर वोट बैंक राजनीति का आरोप लगाया.
ऑपरेशन सिंदूर पर गरमाया विधानसभा सत्र AAP-BJP में तीखी बहस, संजीव झा मार्शल आउट विधानसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हंगामा

विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के साथ शुरू हुआ. इस दौरान युद्धविराम को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपाविधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कई बार हंगामा भी हुआ. आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया कि जब भारतीय सेना पाक अधिकृतकश्मीर के नजदीक तक पहुंच गई थी तब सरकार पीछे क्यों हटी. इस दौरान आप विधायक संजीव झा की टिप्पणी को लेकर उन्हें मार्शल आउट करदिया गया. चर्चा की शुरुआत भाजपा विधायक अभय वर्मा ने की. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि नारी सम्मानऔर राष्ट्र की गरिमा की रक्षा का प्रतीक है. मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि जब देश एकजुट था और सेना मोर्चे पर थी तो ऐसी स्थिति में विपक्ष कीतरफ से सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन बहस में मोड़ तब आया जब आप विधायक कुलदीप कुमार और संजीव झा ने पूछा कि आखिर किसकेकहने पर युद्धविराम किया गया. जब सेना तैयार थी तब पीओके वापस लेने का मौका क्यों गंवाया गया. संजीव झा ने कहा कि भारत ने अपनी रणनीतिक बढ़त खो दी और ऐसा प्रतीत होता है कि यह अंतरराष्ट्रीय दबाव खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप केबयान के चलते हुआ. उन्होंने प्रधानमंत्री के युद्ध विराम के निर्णय को कायरताचर्चा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि हम भारतीय सेना का सम्मानकरते हैं लेकिन हमें यह जानने का अधिकार है कि जब सैन्य जीत संभव थी तब राजनीतिक नेतृत्व ने क्यों कदम पीछे खींचे. देश के नागरिकों को जवाबचाहिए कि क्या भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर यह निर्णय लिया. आतिशी ने यह भी कहा कि भाजपा को हर सवाल को राष्ट्रविरोध की तरहदेखना बंद करना चाहिए लोकतंत्र में सवाल पूछना गुनाह नहीं है विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आखिर आम आदमी पार्टी को ऑपरेशन सिंदूर से समस्या क्या है. यह सेना और नारी गरिमा की रक्षा का ऐतिहासिक क्षण था।राजनीतिक आरोपों की आड़ में सेना की छवि को कमजोर नहीं किया जा सकता. इस बीच भाजपा विधायक मारवाह ने आप विधायकों की टोका-टाकी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हम गुंडागर्दी भी करेंगे और पिटाई भी करेंगे. इसको लेकर भी सदन में तीखी प्रतिक्रिया हुई. अध्यक्ष ने इस बयानको कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया. वहीं भाजपा विधायकों ने कहा कि भारत ने घर में घुसकर मारा है और ऑपरेशन सिंदूर के बाद कश्मीर में कोईबड़ी आतंकी घटना नहीं हुई है. यह भारतीय सेना की रणनीति और साहस का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि ऐसा देश के किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं किया था. उनके बयान को लेकर भाजपा विधायकों ने आक्रोश जताया. सूर्य प्रकाश खत्री नेसंजीव झा की टिप्पणी को देशद्रोह के समान बताते हुए विरोध किया. अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि यह निर्णय सेना और सरकार की संयुक्तरणनीति का हिस्सा था इसे राजनीति में घसीटना अनुचित है. इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने संजीव झा से उनकी टिप्पणी वापस लेनेको कहा लेकिन उनके मना करने पर उन्हें मार्शल बुलाकर सदन से बाहर करवाया गया. इसके बाद आप विधायकों ने सदन में विरोध किया औरअध्यक्ष पर एकपक्षीय रवैया अपनाने का आरोप लगाया.
SIR पर सियासी संग्राम विपक्ष का चुनाव आयोग और केंद्र पर बड़ा हमला, 65 लाख नामों की कटौती पर बवाल

मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर हमलावर है. बिहार में चुनाव से पहले आयोग की इसप्रक्रिया को लेकर कांग्रेस से लेकर राजद तक, सभी विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं. संसद के अंदर और बाहर विपक्ष विरोध प्रदर्शन कर रहा है राज्यों मेंभी इसे लेकर विपक्ष का हल्लाबोल जारी है. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘7 अगस्त को दिल्ली में एक बैठक होगी। विपक्षी गठबंधन’INDIA’ के नेता वहां मौजूद रहेंगे.’ उन्होंने कहा कि हम संसद के अंदर और बाहर SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. चुनाव आयोग इस देशके लोकतांत्रिक मूल्यों को सुनियोजित तरीके से निशाना बना रहा है. हमें चुनाव आयोग से निष्पक्षता की उम्मीद थी लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे हैं. गड़बड़ियों का हो रहा है खुलासाबिहार में कई मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं ऐसे में निष्पक्ष लोकतंत्र कैसे चल सकता है? हम 5 अगस्त को बंगलूरू में चुनाव आयोग कीगंभीर गड़बड़ियों का खुलासा करने जा रहे हैं.इससे पहले बिहार में एसआईआर को लेकर बवाल मचा हुआ है. जहां हाल ही में चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को पूरा कर मसौदा मतदाता सूची तैयार कीहै. इस दौरान करीब 65 लाख नाम मतदाता सूची से काटे जाने की बात सामने आई है. राजद नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नेअपना नाम भी मतदाता सूची में न होने की बात कही थी. हालांकि, चुनाव आयोग ने सबूत के साथ इसका खंडन कर दिया था. इस बीच तेजस्वी केआरोप पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, ‘राहुल गांधी और तेजस्वी यादव सिर्फ झूठ बोलते हैं और भ्रम फैलाते हैं. एसआईआर (विशेष गहनपुनरीक्षण) पर झूठ बोलते-बोलते उन्होंने अपनी मतदाता पहचान पत्र के बारे में भी झूठ बोला. यह (चुनाव आयोग) एक संवैधानिक संस्था है लेकिनउन्होंने इसे भी नहीं छोड़ा उन्होंने इसकी भी आलोचना की. सीएम भावी है समझतेअगर तेजस्वी यादव, जो खुद को भावी सीएम समझते हैं, ऐसे ओछे झूठ बोलेंगे और भ्रम फैलाएंगे, तो वह संस्था निश्चित रूप से कानूनी रास्ताअपनाएगी.’सीमांचल जैसे मुस्लिम‑बहुल इलाकों में 7.62 लाख नाम हटाए गए, जिससे राजनीतिक मुकाबले में स्पष्ट असर होने की आशंका जताईगई है विरोधियों ने सवाल उठाया कि SIR में केवल 11 “मान्य दस्तावेजों” को स्वीकार किया गया, जबकि आधार कार्ड, वोटर ID या राशन कार्ड कोअस्वीकृत किया गया–जिससे गरीब, प्रवासी तथा पिछड़े वर्ग वंचित हो सकते हैं तेजस्वी यादव ने दावा किया कि उनका नाम सूची में नहीं है, जबकिउनके पास वैध EPIC है. चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए फैक्ट चेक सोशल मीडिया पर साझा किया चुनाव आयोग ने बार‑बार कहाहै कि यह प्रक्रिया संवैधानिक और पारदर्शी है, जिसमें सभी योग्य नागरिकों को शामिल किया जाएगा, और दलों के बूथ‑स्तरीय एजेंटों की बड़ी संख्यातैनात की गई है.