"National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |    

दिल्ली विधानसभा में स्कूल फीस बिल पर सियासी संग्राम, मानसून सत्र के पहले दिन ही घमासान के आसार

दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को दोपहर 2 बजे से शुरू होगा. पहले ही दिन स्कूल फीस नियंत्रण बिल सहित अन्य मुद्दों पर राजनीतिकघमासान के पूरे आसार हैं. 8वीं विधानसभा का तीसरा सत्र 4 से 8 अगस्त तक चलेगा लेकिन जरूरत पड़ी तो इसे बढ़ाया भी जा सकता है. सत्र कीशुरुआत में ही शिक्षा मंत्री आशीष सूद स्कूल फीस नियंत्रण बिल पेश करेंगे, जिसे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है. इसबिल से दिल्ली के लाखों अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी फीस से राहत मिलने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को साफ किया है किये बिल अभिभावकों के हित में है और स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाएगा लेकिन आम आदमी पार्टी ने बिल का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है. सत्र की दिशा कर सकती है आप नेता आतिशी समेत वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिये निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है. आप नेसवाल उठाया कि अगर बिल वाकई जनहित में है तो सरकार ने इसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया. विपक्ष के तीखे तेवरों से साफ है कि बिलपर सदन में जोरदार टकराव होगा. विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि सत्र में सभी मुद्दों पर खुली चर्चा होगी. सत्र में कई अन्य अहम विषयभी उठेंगे। विधायक अशोक गोयल रूरल कमेटी की पहली रिपोर्ट पेश करेंगे. साथ ही, विधानसभा अब पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है अध्यक्ष नेबताया कि विधायकों की हाजिरी अब रजिस्टर में नहीं बल्कि नेशनल ई-विधान ऐप (नेवा) पर लॉग-इन के जरिए दर्ज होगी.सत्र में दिल्ली के विकास और जनहित के कई मुद्दों पर चर्चा होगी लेकिन स्कूल फीस बिल पर सरकार और विपक्ष की सहमति, असहमति सत्र कीदिशा तय कर सकती है. ऱाजनीतिक शोर बनकर जाएगा रहदिल्ली की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बिल वाकई अभिभावकों को राहत देगा या सिर्फ राजनीतिक शोर बनकर रह जाएगा. पहले ही दिन स्कूल फीस नियंत्रण बिल सहित अन्य मुद्दों पर राजनीतिक घमासान के पूरे आसार हैं. 8वीं विधानसभा का तीसरा सत्र 4 से 8 अगस्त तकचलेगा लेकिन जरूरत पड़ी तो इसे बढ़ाया भी जा सकता है। प्रत्येक स्कूल में फीस रेगुलेशन कमेटी गठित होगी जिसमें अभिभावक, शिक्षक, स्कूलप्रशासन और SC/ST/पीछड़े वर्ग तथा महिलाएं शामिल होंगी. आलोचकों ने यह भी कहा कि बिल में ऑडिट व्यवस्था को खत्म किया गया है, जिसमें15% अभिभावकों का शिकायत में हस्ताक्षर अनिवार्य करने जैसा प्रावधान अभावग्रस्त है. सत्र की शुरुआत से ही शिक्षा मंत्री द्वारा बिल पेश किए जानेके कारण सदन में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव की संभावना है.

भाजपा का समाजवादी पीडीए पाठशाला पर हमला बच्चों को ‘ए फॉर अखिलेश’ सिखाना है ब्रेनवॉशिंग बोले भूपेंद्र सिंह चौधरी

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने शुक्रवार को सहारनपुर में आयोजित समाजवादी पार्टी की पीडीए पाठशाला की आलोचना की. उन्होंनेकहा कि इसमें बच्चों को ए फॉर अखिलेश और डी फॉर डिंपल जैसे पाठ पढ़ाया जाना शिक्षा नहीं, समाजवादी ब्रेनवॉश है। उन्होंने इसे मासूम बच्चोंकी कोमल चेतना में राजनीतिक विष घोलने का षड्यंत्र बताया और कहा कि इस विकृत सोच का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा. भाजपा के प्रदेशअध्यक्ष शुक्रवार को काशी आए और पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने जब शासन किया तब भी बच्चों के भविष्य के साथखिलवाड़ किया और अब विपक्ष में रहते हुए भी बच्चों की शिक्षा को राजनीतिक रंग देने की ओछी कोशिश कर रही है. सपा की पाठशाला में भीपरिवार से आगे सोच नहीं बढ़ पाई है. मंच नहीं बनने जाएगा दियाबच्चों को ए फॉर अब्दुल कलाम पढ़ाने की जगह ए फॉर अखिलेश और डी फॉर डिंपल सिखाया जा रहा है। बच्चों की शिक्षा को राजनीतिकविचारधारा थोपने का मंच नहीं बनने दिया जाएगा. सपा शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल माफिया, जर्जर स्कूल भवनों और शिक्षकों की भारी कमी सेजूझ रही थी. इसके विपरीत योगी आदित्यनाथ की सरकार में न सिर्फ शिक्षा की बुनियादी संरचना को मजबूती दी गई बल्कि डिजिटल शिक्षा, नईपाठ्यपुस्तकों और नकलविरोधी अभियानों के माध्यम से छात्रों को एक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक माहौल मिला है. प्रधानमंत्री जनसभा में मंचपर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहेंगे। इसके अलावा केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर, डिप्टी सीएम ब्रजेशपाठक, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य मौजूद रहेंगे. उनके साथ कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल, राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकरमिश्र दयालु और पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय मौजूद रहेंगे. परिवार से आगे नहीं बढ़ पाई सोचइसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और मेयर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, विधायक नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, अवधेश सिंह, नील रतन पटेल, सुनील पटेल, टी राम, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा भी मंच पर रहेंगे. भाजपाके प्रदेश अध्यक्ष पीएम मोदी की जनसभा में हिस्सा लेने के लिए बनारस पहुंचे। इस दारौन उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर सियासी तंजकिया. उन्होंने कहा कि सपा की पाठशाला में भी परिवार से आगे सोच नहीं बढ़ पाई है.

बाढ़ राहत, महिला सुरक्षा और तिरंगा उत्सव पर CM योगी का फोकस, लापरवाही नहीं चलेगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाढ़ राहत कार्य में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये किबाढ़ शरणालय में महिला सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की जाए. वहीं बच्चों के लिए दूध उपलब्ध कराने और रेस्क्यू कार्य में छोटी-मझली नाव का प्रयोगन करने के सख्त हिदायत भी दी. वह रविवार को अपने सरकारी आवास पर बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत कार्य की समीक्षा कर रहे थे. सीएम ने कहा किक्षति ग्रस्त मकानों का तत्काल सर्वे कर प्रभावित लोगों को मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास व जमीन का पट्टा उपलब्ध कराया जाए. बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिन चीजों की आवश्यकता हो, उसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को तत्काल बताएं ताकि उन चीजों की उपलब्धता सुनिश्चितकी जा सके वाले बच्चों के लिए दूध की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. तिरंगा को जाना है फहरायाकोई भी व्यक्ति जर्जर भवन में न रहे, उसे बिना देर किये बाढ़ शरणालय में शिफ्ट किया जाए.सीएम ने रक्षाबंधन के अवसर पर आगामी 8 अगस्त की सुबह से 10 अगस्त की रात्रि 12 बजे तक यूपीएसआरटीसी व नगरीय बस सेवा की बसों मेंमाताओं-बहनों को निःशुल्क यात्रा की घोषणा करने के साथ पर्याप्त मात्रा में बसें संचालित करने को कहा उन्होंने कहा कि आगामी 14 अगस्त कोविभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर तिरंगा यात्रा निकली जाए. स्कूल, कॉलेजों,डिग्री कॉलेजों व अन्य संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित करें. आगामी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भव्य रूप से सभी जगह तिरंगा फहराया जाए तथा राष्ट्रगान गया जाए। हर घर तिरंगा अभियानकी समीक्षा करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय अभियान से हर नागरिक को जुड़ना चाहिए. विगत वर्षों में यूपी का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है। इस वर्ष प्रदेश में4.60 करोड़ तिरंगों को फहराया जाना है. महोत्सव आयोजित करने का है लक्ष्यआगामी 8 अगस्त तक तिरंगा बनाने का कार्य पूर्ण कर लिया जाए. 9 अगस्त से 12 अगस्त तक तिरंगा यात्रा, तिरंगा महोत्सव व मेला का आयोजनहो. सीएम ने बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि मानक के अनुरूप ही स्कूलों की पेयरिंग की जाए. इस कार्य मेंअनियमितता बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए. बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसानों कोउनकी जरूरत के अनुसार तय रेट पर फर्टिलाइजर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए. रक्षाबंधन पर महिलाओं को तोहफा देते हुए योगी सरकार नेआठ अगस्त से लेकर दस अगस्त तक महिलाओं का परिवहन निगम की बसों में सफर फ्री कर दिया है। रक्षाबंधन (8–10 अगस्त) महिलाओं को यूपीपरिवहन निगम और नगरीय बसों में निःशुल्क यात्रा; तिरंगा यात्रा एवं अभियान की योजना, 4.60 करोड़ तिरंगा तक महोत्सव आयोजित करने का लक्ष्यहै.

2027 की तैयारी शुरू हर हाथ में तिरंगा, हर बूथ पर मजबूत वोटर भाजपा का बूथ अभियान तेज

प्रदेश में भाजपा मतदाता सूची से गलत नाम हटाने के साथ ही पात्र लोगों का नाम जुड़वाने में जुटेगी। 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेशभाजपा की टीम को मतदाता पुनरीक्षण में सभी पात्रों के नाम सूची में शामिल कराने को कहा गया है. सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में रविवारको इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में हुई भाजपा की संगठनात्मक बैठक में सभी पदाधिकारियों को घर-घर पहुंचने और नए वोटरों को मतदाता बनवाने केअभियान में जुटने के निर्देश दिए गए. इस दौरान तिरंगा यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की गई. बैठक में सभी पदाधिकारियों को 18 साल की उम्र पूरीकर पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं पर खास फोकस करने को कहा गया. साथ ही पदाधिकारियों को हर बूथ पर 100 और विधानसभावार10-15 हजार नए मतदाता बनाने का लक्ष्य दिया गया है. समर्पण का संदेश स्पष्ट जाएगा कियापदाधिकारियों से कहा गया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सैकड़ों भाजपा समर्थक मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं इसलिए इस काम मेंसतर्क रहें. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि हर घर तिरंगा प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्र के प्रति गौरव, आस्था और उत्तरदायित्व कीभावना को जाग्रत करने का अभियान है. कार्यकर्ता मतदाता पुनरीक्षण अभियान में पूरी निष्ठा के साथ जुटें उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा किहर घर तिरंगा अभियान सिर्फ सरकार की पहल नहीं, बल्कि जन भावनाओं का स्वाभाविक प्रकटीकरण है.उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को हर गांव एवं शहर तक ले जाकर कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करें कि तिरंगा हर घर मेंफहराए. चुनाव का निर्णय बूथ पर होता है. इसलिए ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ केवल एक नारा नहीं बल्कि भाजपा की कार्य संस्कृति का आधार है. हरघर तिरंगा अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि इस अभियान से देश के प्रति हमारे समर्पण का स्पष्ट संदेश जाएगा. शामिल होने से न छूटने पाएसीएम योगी ने कहा कि मतदाता पुनरीक्षण लोकतंत्र की आधारशिला है हर कार्यकर्ता सुनिश्चित करे कि उसके बूथ पर कोई भी पात्र मतदाता सूची मेंशामिल होने से न छूटने पाए. 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा मतदाताओं को जोड़ने पर खास फोकस करें. तिरंगा यात्रा निकालने के कार्यक्रम को लेकर सीएम ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान केवल झंडा फहराने का आयोजन नहीं, बल्कि जन-जन में राष्ट्र भक्ति की भावना जगाने का जनआंदोलन है. हर घर तिरंगा अभियान और हर हाथ में स्वदेशी उत्पाद का मंत्र, आत्मनिर्भर भारत की भावना को जमीन पर उतारने कीदिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने आह्वान किया कि अभियान से जुड़कर घरों पर तिरंगा फहराएं, उसके साथ सेल्फी लें और ओडीओपी जैसे स्वदेशीउत्पादों को अपनाकर स्थानीय शिल्प को प्रोत्साहन दें. सीएम ने मालेगांव मामले में फैसले के बाद कांग्रेस को निशाने पर लिया है. कहा, जैसे ही सचसामने आया कांग्रेस की साजिशें बेनकाब हो गई हैं. भगवा को आतंक का प्रतीक बताने वालों का चेहरा अब उजागर हो गया है. ऑपरेशन सिंदूर परदुष्प्रचार करके विपक्ष देशविरोधी ताकतों की ढाल बन रहा है.

अलीगढ़ को 1194 करोड़ की सौगात 5 अगस्त को जनसभा में करेंगें सीएम योगी, 188 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 अगस्त को अलीगढ़ आ रहे हैं. इस संबंध में 3 अगस्त शाम जारी हुए कार्यक्रम में कुछ बदलाव किया गया है. जिसके तहत वे अब कलक्ट्रेट में मंडलीय समीक्षा के बाद नुमाइश मैदान में जनसभा को भी संबोधित करेंगे. जहां 1194 करोड़ 75 लाख की 188 परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास भी तय किए गए हैं. वे शहर में 3 घंटे 50 मिनट तक रहेंगे. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी कार्यक्रम के अनुसारमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 4 अगस्त को लखनऊ से सहारनपुर व मेरठ मंडल की समीक्षा के लिए रवाना होंगे. जनसभा को करेंगें संबोधित4 अगस्त रात वे मेरठ में विश्राम के बाद 5 अगस्त सुबह 9:50 बजे आईटीआई मैदान में बनाए जा रहे हेलीपैड पर उतरेंगे। यहां से 10 बजे कलक्ट्रेटपहुंचकर 11:15 बजे तक मंडल के मंत्री, सांसदों, विधायकों व विधान परिषद सदस्यों संग बैठक करेंगे. इसके बाद 11:15 बजे से 12:15 बजे तकमंडलीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे. इसमें मंडल के सभी अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े रहेंगे. इसके बाद सीएम 12:30 बजे नुमाइश मैदान पहुंचकर जनसभा को संबोधित करेंगे. इससे पहले विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन, 1194 करोड़ 75 लाख की 188 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास और चयनित लाभार्थियों को प्रमाण पत्र, लाभ वितरण करेंगे. जनसभा को गया है जोड़ासीएम युवा, विश्वकर्मा श्रम सम्मान, 70 प्लस आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड, एनआरएलएम क्रेडिट लिंकेज चैक, पीएम एवं सीएम आवासलाभार्थीगनों को लाभान्वित करने के साथ ही विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण एवं अन्न प्रासन्न भी कराएंगे. इसके बाद दोपहर 1:40 बजे वे आगरा कोरवाना हो जाएंगे. अधिकारिक कार्यक्रम आने के बाद अधिकारियों ने तैयारी तेज कर दी हैं. बता दें कि अब तक सीएम का सर्किट हाउस में सिर्फसमीक्षा के लिए आने का कार्यक्रम बन रहा था. मगर इसमें बदलाव कर जनसभा को जोड़ा गया है. सीएम 12:30 बजे नुमाइश मैदान पहुंचकरजनसभा को संबोधित करेंगे। इससे पहले विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन, 1194 करोड़ 75 लाख की 188 विकास परियोजनाओं कालोकार्पण-शिलान्यास और चयनित लाभार्थियों को प्रमाण पत्र, लाभ वितरण करेंगे.

देश की पहली 100% सौर ऊर्जा और कागज रहित विधानसभा बनी दिल्ली, ई-विधान प्रणाली का शुभारंभ

दिल्ली विधानसभा ने पर्यावरण और तकनीक के क्षेत्र में मिसाल कायम की है. रविवार को केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने500 किलोवॉट के सौर ऊर्जा संयंत्र और नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) का शुभारंभ किया. इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता औरमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद रहीं. इस तरह दिल्ली अब देश की पहली ऐसी विधानसभा बन गई है जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलेगी और कागज रहितडिजिटल कार्यवाही करेगी. सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र में कागज का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होगा। सभी विधायकों की उपस्थिति भी नेवासे ही लगेगी. वहीं, सौर संयंत्र न सिर्फ विधानसभा को 100 फीसदी नवीकरणीय ऊर्जा देगा बल्कि माह करीब 15 लाख रुपये की बचत भी कराएगा. इससे सालाना 1.75 करोड़ रुपये तक की बचत का अनुमान है. नेट मीटरिंग से अतिरिक्त बिजली भी पैदा होगी. वहीं, ई-विधान प्रणाली के जरिएविधानसभा की सारी कार्यवाही अब डिजिटल होगी जिससे समय, संसाधन और पर्यावरण की रक्षा होगी. जिम्मेदारी का है प्रतीककेंद्रीय मंत्री मेघवाल ने इसे देश के लिए नजीर बताया उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल और स्वच्छ भारत का सपना साकारहो रहा है. दिल्ली विधानसभा की यह पहल दूसरों के लिए प्रेरणा है. उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से हरसंभव सहयोग का वादा किया. अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 1912 में बने इस ऐतिहासिक भवन में कभी देश की पहली संसद चली थी. अब ये आधुनिक हो गई है ई-विधानप्रणाली सिर्फ 100 दिनों में तैयार हुई सोमवार सुबह 11 बजे इसका परीक्षण होगा और दोपहर 2 बजे विधानसभा का मानसून सत्र पूरी तरह से सौरऊर्जा से पैदा की गई बिजली से रौशन होगा. बिजली बचत का पैसा जनता के विकास में लगेगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ये पर्यावरण के प्रतिउनकी सरकार की जिम्मेदारी का प्रतीक है. शानदार मेल का दिया करारइस साल मार्च में नागालैंड में पहली ई-विधानसभा स्थापित हुई जिसके बाद 19 राज्यों की विधानसभाएं इससे जुड़ीं. दिल्ली विधानसभा 20वीं हैं, जोई-विधान प्रणाली से चलेगी. मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने प्रोजेक्ट को कम बजट और सीमित समय में पूरा करने के लिए अध्यक्ष की तारीफ की. ऊर्जामंत्री आशीष सूद ने इसे दिल्ली के सौर ऊर्जा अभियान का हिस्सा बताया. उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने इसे लोकतंत्र और सतत विकास का शानदारमेल करार दिया.रविवार को विधानसभा के भीतर विधायकों का लाइव नेवा टेस्ट लिया गया. उन्हें ई-विधान में स्मार्ट डेलीगेट यूनिट्स, वोटिंग पैनल, आरएफआईडी, एनएफसी एक्सेस, रियल-टाइम दस्तावेज और एचडी कैमरों से लैस एवी सिस्टम की जानकारी दी गई. ई-विधानसभा में लॉगइन करना व फाइलों कोदेखना भी सिखाया गया.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन, आदिवासी नेता और राज्य निर्माण के पुरोधा है रहे

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया. वे 81 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उन्होंने दिल्ली के सरगंगा राम अस्पताल में अंतिम सांसद ली. उनके बेटे और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘आदरणीय दिशोमगुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं. इस बीच सर गंगा राम अस्पताल की ओर से बताया गया कि शिबू सोरेन को आजसुबह 8:56 बजे मृत घोषित कर दिया गया. लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. वे किडनी की बीमारी से पीड़ित थे और डेढ़ महीने पहले उन्हेंस्ट्रोक भी हुआ था. पिछले एक महीने से वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे. 81 वर्षीय शिबू लंबे समय से अस्पताल में नियमित रूप से इलाज करा रहेथे। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 जून को अपने पिता के अस्पताल में भर्ती होने पर कहा था, ‘उन्हें हाल ही में यहां भर्ती कराया गया था. अन्याय के खिलाफ उठाई थी आवाजइसलिए हम उनसे मिलने आए थे उनकी स्वास्थ्य समस्याओं की जांच की जा रही है शिबू सोरेन पिछले 38 वर्षों से झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता थेऔर उन्हें पार्टी के संस्थापक संरक्षक के रूप में जाना जाता है. शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था. बचपन सेही उन्होंने आदिवासी समुदाय की समस्याओं, शोषण और अन्याय को करीब से देखा. 1960 के दशक में उन्होंने आदिवासी अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष शुरू किया। 1970 के दशक में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की. उनका मुख्य उद्देश्यअलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चलाना था. इस आंदोलन में उन्होंने आदिवासियों के जमीन छीनने, शोषण और अन्याय के खिलाफआवाज उठाई. गठन की दिशा में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका1980 में शिबू सोरेन पहली बार लोकसभा सदस्य बने. इसके बाद उन्होंने कई बार संसद में आदिवासी मुद्दों को उठाया और झारखंड राज्य गठन कीदिशा में सक्रिय भूमिका निभाई. उनके प्रयासों और लंबे संघर्ष के परिणामस्वरूप 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ. राज्य गठन केबाद शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने- 2005, 2008 और 2009 में। हालांकि, राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन की खींचतान केकारण उनका कार्यकाल लंबा नहीं चल सका। इसके बावजूद उन्होंने आदिवासी कल्याण, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई पहलकी. उनकी राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव भी आए भ्रष्टाचार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में वे आरोपित हुए, हालांकि बाद में कई मामलों मेंबरी भी हुए.

ट्रंप ने व्यापार घाटा कम करने के लिए पारस्परिक टैरिफ लगाने का बचाव किया, कहा ‘देश का कर्ज चुकाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दर्जनों व्यापारिक साझेदार देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने के अपने फैसले का बचाव किया है. ट्रंप ने कहा कि ऐसाकई साल पहले कर दिया जाना चाहिए था. ट्रंप ने कहा कि टैरिफ से मिलने वाले पैसों से अमेरिका अपना कर्ज उतारेगा. मीडिया से बात करते हुए ट्रंपने कहा कि ‘हम कर्ज का भुगतान करेंगे. देश में बहुत सारा पैसा आने वाला है और इतना पैसा देश में कभी एकसाथ नहीं आया होगा. इससे पहले कर्जका भुगतान करेंगे। हमें ये कई साल पहले कर देना चाहिए था. मैंने अपने पहले कार्यकाल में चीन के साथ ये किया था, लेकिन कोरोना महामारी केचलते अन्य देशों के साथ ऐसा नहीं हो सका. अमेरिका का व्यापार घाटाट्रंप ने कहा, ‘मैं किसी तरह का दबाव नहीं, बल्कि निष्पक्षता चाहता हूं. हम जहां भी और जितना हो सके, पारस्परिक कर देखना चाहते हैं। कभी-कभी, यह उनके लिए बहुत ज़्यादा हो जाता है। यह एक बहुत बड़ी राशि होगी और मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि इससे हमारा देश सैकड़ों अरब डॉलरकमाएगा. व्हाइट हाउस में आने के छह महीनों के भीतर ही ट्रंप ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को तबाह कर दिया और अमेरिका की आर्थिक ताकत काइस्तेमाल कर उन देशों को दंडित देना शुरू किया, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है. 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उन देशों से आयातपर 50 प्रतिशत तक पारस्परिक कर लगाने और लगभग सभी अन्य देशों पर 10 प्रतिशत आधारभूत कर लगाने की घोषणा की, जिनके साथ अमेरिकाका व्यापार घाटा है. आयात कारों को ठहराया उचितउन्होंने व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के लिए 1977 के एक कानून का हवाला दिया, जिसके जरिए उन्होंने अपने व्यापक आयातकरों को उचित ठहराया. जब पारस्परिक करों की आलोचना हुई तो उन्होंने विभिन्न देशों को बातचीत का मौका देने के लिए पारस्परिक शुल्कों को 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया. आखिरकार, कुछ देशों ने ट्रंप की मांगों के आगे घुटने टेक दिए और अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कर लिया. व्हाइट हाउस में आने के छह महीनों के भीतर ही ट्रंप ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को तबाह कर दिया और अमेरिका की आर्थिक ताकत का इस्तेमाल करउन देशों को दंडित देना शुरू किया, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है.

बांग्लादेश में ‘जुलाई विद्रोह’ की बरसी पर उबाल, एनसीपी ने नया संविधान मांगा, बीएनपी ने युवाओं से समर्थन की अपील की

ढाका में रविवार को बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर उफान पर आ गई. जब नेशनल सिटिजन पार्टी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के छात्रसंगठन जातीयताबादी छात्र दल ने अलग-अलग रैलियां निकालीं. ये रैलियां पिछले साल 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाने वाले’जुलाई विद्रोह’ की पहली बरसी के मद्देनजर आयोजित की गईं थीं. ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में आयोजित रैली में NCP ने अपने 24 सूत्रीयघोषणापत्र को जारी किया. पार्टी संयोजक नाहिद इस्लाम ने ‘न्यू बांग्लादेश’ और ‘सेकेंड रिपब्लिक’ की मांग करते हुए मौजूदा संविधान को खत्म करसंविधान सभा के जरिए नया संविधान बनाने की बात कही. घोषणापत्र में रैपिड एक्शन बटालियन को भंग करने, पिछले शासन के दौरान हुए फर्जीएनकाउंटर और गुमशुदगियों पर सख्त कार्रवाई की बात भी शामिल है. मांग को किया खारिजवहीं दूसरी ओर बीएनपी के छात्र संगठन जेसीडी ने ढाका के शहबाग इलाके में रैली की. रैली में छात्रों और पहली बार वोट देने वालों से अपील की गईकि वे पार्टी के चुनाव चिह्न ‘धान की बाली’ को वोट दें. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान ने लंदन सेवर्चुअल संबोधन में कहा कि बांग्लादेश अब प्रतिशोध की राजनीति से आगे बढ़ना चाहता है और सबको मिलकर एक नया भविष्य बनाना होगा. रैलीआयोजकों ने टकराव की आशंका को देखते हुए समय और स्थान में बदलाव कर एक-दूसरे से दूरी बनाई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके मेंकड़ी निगरानी रखी और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई. हालांकि बीएनपी ने एनसीपी की ‘सेकेंड रिपब्लिक’ की मांग को खारिज कर दिया. सुरक्षा एजेंसियों ने की कड़ी निगरानीबीएनपी नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश के 1972 के संविधान को खत्म करने की मांग देश की संवैधानिक नींव को कमजोरकर सकती है. जुलाई विद्रोह की सालगिरह से पहले हो रहे इन प्रदर्शनों और घोषणाओं ने संकेत दे दिया है कि बांग्लादेश में राजनीति एक बार फिरअस्थिर मोड़ ले सकती है. जनता, खासकर युवा और नए मतदाता, इस बदलाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. बांग्लादेश में ‘जुलाई विद्रोह’ कीपहली बरसी से पहले बीएनपी और एनसीपी ने अलग-अलग रैलियां निकालीं. एनसीपी ने नया संविधान और ‘सेकंड रिपब्लिक’ की मांग की, जबकिबीएनपी ने पहली बार वोट देने वालों से समर्थन मांगा. सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी निगरानी रखी.

चुनाव आयोग पर पी. चिदंबरम का हमला SIR प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए खतरा, 65 लाख मतदाता वंचित

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने बिहार में मतदाता सूची की विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनावआयोग (ईसीआई) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि आयोग राज्यों की चुनावी संरचना और मतदाता स्वरूप को बदलने की कोशिश कर रहाहै जो अधिकारों का “दुरुपयोग” है और इसका विरोध राजनीतिक व कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए. पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मएक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि बिहार में 65 लाख मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं, जबकि तमिलनाडु में 6.5 लाख नए मतदाताओंको जोड़ने की खबरें चिंताजनक और गैरकानूनी हैं. उन्होंने कहा ‘इन लोगों को स्थायी रूप से पलायन कर चुके बताना प्रवासी मजदूरों का अपमान हैऔर यह तमिलनाडु की जनता के अपने चुने हुए प्रतिनिधि चुनने के अधिकार में सीधी दखलअंदाजी है. कानूनी विरोध है जरुरीउन्होंने सवाल उठाया कि जब छठ पूजा जैसे त्योहारों में प्रवासी मजदूर अपने राज्य लौट सकते हैं तो क्या विधानसभा चुनाव के समय नहीं लौट सकते? चिदंबरम ने यह भी कहा ‘कोई भी व्यक्ति तभी मतदाता सूची में शामिल हो सकता है जब उसका स्थायी और कानूनी निवास हो। प्रवासी मजदूरों काऐसा निवास बिहार या उनके गृह राज्य में होता है. फिर उन्हें तमिलनाडु में मतदाता के रूप में कैसे जोड़ा जा सकता है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावआयोग जानबूझकर राज्यों की चुनावी पहचान और पैटर्न को बदलने का प्रयास कर रहा है. विपक्ष इस पूरे मुद्दे पर संसद में विरोध कर रहा है और इसपइसके साथ चिदंबरम ने दोहराया, ‘चुनाव आयोग का यह व्यवहार लोकतंत्र के लिए खतरा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस लड़ाईको राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ा जाना चाहिए.र चर्चा की मांग कर रहा है. कांग्रेस पार्टी की तरफ से चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए जाने के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की तरफ सेभी निशाना साधा गया है. उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है. इसलिए इसका राजनीतिक और कानूनी विरोध जरूरीहै. संरचना को बदलने की कोशिशवहीं दूसरी ओर चिदंबरम ने दावा किया कि तमिलनाडु में लगभग 6.5 लाख प्रवासी मजदूरों को मतदाता सूची में शामिल किया गया है, जो उन्होंने”चुनावी संरचना को बदलने” की कोशिश बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्य (जैसे बिहार) में दृढ़ निवास रखते हैं फिरउन्हें तमिलनाडु में कैसे वोटर के रूप में जोड़ा जा सकता है? कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को “मताधिकार की डकैती” और“exercise of exclusion” करार दिया है. सियासी स्तर पर विरोध के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में भी शिकायतें दर्ज की गई हैं. वहीं, ECI ने इनआरोपों को “misleading” बताते हुए कहा कि प्रक्रिया संवैधानिक और वैध है। चिदंबरम का मानना है कि यह SIR प्रक्रिया भारत में चुनावीलोकतंत्र की संरचना को बदलने का गंभीर प्रयास है. जिसका राजनीतिक और संवैधानिक तरीके से विरोध आवश्यक है.