बंगलूरू में कांग्रेस की ‘वोट अधिकार रैली’ राहुल गांधी का भाजपा पर बड़ा हमला, वोट चोरी के खिलाफ साधा जमकर निशाना

कांग्रेस पार्टी आज “बंगलूरू में कांग्रेस की ‘वोट अधिकार रैली का आयोजन कर रही है. पार्टी का दावा है कि यह रैली 2024 के लोकसभा चुनावों मेंकर्नाटक में हुई कथित वोट चोरी के खिलाफ है. इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, मुख्यमंत्रीसिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार समेत कई बड़े नेता शामिल हुए. रैली का मुख्य उद्देश्य जनता को यह बताना है कि किस तरहलोकतांत्रिक प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई और मतदाताओं के अधिकार छीने गए.‘वोट अधिकार रैली’ के मंच से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोगऔर भाजपा पर तीखे हमले किए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के डाटा-लीक और वोट चोरी को लेकर किए गए खुलासों के बाद चुनाव आयोग नेअपनी वेबसाइट बंद कर दी. राहुल ने आरोप लगाया कि एक ही वोटर कई बार वोट डाल रहा है और भाजपा इसी तरह चुनाव जीत रही है. उन्होंने कहा, भाजपा ने संविधान पर सीधा अतिक्रमण किया है. बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की वेबसाइट पर भी गड़बड़ी मिली है. चुनाव आयोगको देशभर का डिजिटल चुनाव डाटा सार्वजनिक करना चाहिए. विधानसभा चुनाव है नजदीकराहुल गांधी ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ 25 सीटों के कारण ही सत्ता में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार वोट की चोरी करकेबनाई गई है, न कि जनता के समर्थन से.रैली को ‘हमारा वोट, हमारा हक, हमारी लड़ाई’ नाम दिया गया है. यह आयोजन सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ, जिसमें कई कार्यकर्ताओं और नेताओंकी मौजूदगी देखने को मिली. कांग्रेस ने महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदान पैटर्न और मतदाता सूची को आधार बनाकर पूरे चुनाव पर सवाल उठाएहैं. पार्टी का दावा है कि इस क्षेत्र में उसे 1,14,000 वोटों से हराया गया जबकि शेष छह क्षेत्रों में उसे बढ़त मिली थी. पूरी लोकसभा सीट पर कांग्रेसको 6,26,208 वोट मिले जबकि भाजपा को 6,58,915 वोट, और जीत का अंतर रहा 32,707 वोट. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यहअसामान्यता दिखाती है कि महादेवपुरा में कुछ गड़बड़ी हुई है. यह रैली ऐसे समय हो रही है जब देश में बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं. पार्किंग पर भी लगाई गई रोककांग्रेस इस रैली के जरिए न सिर्फ कर्नाटक बल्कि पूरे देश में यह संदेश देना चाहती है कि वह वोटरों के अधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर है. पार्टी काइरादा है कि यह आंदोलन पूरे देश में एक नई राजनीतिक जागरूकता पैदा करे और लोगों को यह एहसास दिलाए कि उनका वोट ही उनका सबसे बड़ाअधिकार है, जिसे कोई छीन नहीं सकता. बंगलूरू में यातायात प्रभावित रैली के मद्देनजर बंगलूरू ट्रैफिक पुलिस ने यातायात पर कई पाबंदियां लगाईहैं। एमजी रोड, क्यूबन रोड, ओल्ड एयरपोर्ट रोड, चालुक्य रोड, शांतला जंक्शन और आसपास के क्षेत्रों में गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाई गईहै. कई जगहों पर पार्किंग पर भी रोक लगाई गई है. प्रशासन की ओर से लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की गई है.
राज ठाकरे के INDIA गठबंधन में शामिल होने की अटकलों पर बोले प्रशांत जगताप, ‘यह होगा स्वागत योग्य कदम’

महाराष्ट्र की राजनीति में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख और उद्धव ठाकरे के साथ आने को लेकर आयदिन चर्चाओं का बाजार गर्म रहता है. ऐसेमें मनसे गठबंधन और इंडिया गठबंधन के साथ आने के अटकलों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व पुणे महापौरप्रशांत जगताप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर राज ठाकरे गठबंधन में शामिल होते हैं, तो यह एक स्वागत योग्य कदम होगा. एएनआईएसे बातचीत के दौरान प्रशांत जगताप ने गुरुवार को कहा कि अगर राज ठाकरे इंडिया गठबंधन में शामिल होते हैं, तो यह बहुत अच्छा कदम होगा. सिर्फमैं ही नहीं, बल्कि गठबंधन के सभी नेता इस फैसले का समर्थन करेंगे. बता दें कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में आगामी नगर निगमऔर स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर विपक्षी दलों के बीच रणनीति तैयार की जा रही है. राज्य में जाएगा एक मजबूत संदेशइंडिया गठबंधन में कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और कई अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियां शामिल हैं, जोभाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं. जगताप ने यह भी कहा कि अगर ठाकरे बंधु उद्धव और राज एक साथ आते हैं, तोयह महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में कई बार प्रतिद्वंद्वी भी एकजुट हुएहैं. अगर ये दोनों भाई एक साथ इंडिया गठबंधन के तहत चुनाव लड़ते हैं. तो इससे विपक्ष को मजबूती मिलेगी और पूरे राज्य में एक मजबूत संदेशजाएगा. स्वागत योग्य है कदमहालांकि अभी तक राज ठाकरे या उनकी पार्टी मनसे की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन प्रशांत जगताप के बयान सेसाफ है कि गठबंधन के दरवाजे नए सहयोगियों के लिए खुले हैं. खासकर शहरी क्षेत्रों में मनसे का अच्छा प्रभाव है ऐसे में अगर पार्टी इंडिया गठबंधनसे जुड़ती है, तो भाजपा को चुनौती देना और भी प्रभावी हो सकता है. महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ आने को लेकरचर्चा बीते कई महीनों से तेज है। ऐसे में राज ठाकरे के INDIA गठबंधन में शामिल होने की अटकलों के बीच एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता प्रशांतजगताप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर राज ठाकरे गठबंधन में आते हैं. तो यह एक स्वागत योग्य कदम होगा.
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का बड़ा बयान ‘आप सरकार ने बनाया फर्जी फांसीघर, तत्काल हटाने के आदेश’

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को तत्कालीन आप सरकार की ओर से बनाए गए फांसी घर को फर्जी करार देते हुए तत्काल हटाने केनिर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस कक्ष को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा. उन्होंने पूरे मामले की जांच विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंपी है. उन्होंने कहा कि यह निर्माण न केवल ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ है बल्कि देश की जनता की भावनाओं के साथ किया गया गंभीर छल है.विधानसभाअध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को तत्कालीन आप सरकार की ओर से बनाए गए फांसी घर को फर्जी करार देते हुए तत्काल हटाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस कक्ष को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा. अगस्त 2022 में भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर इस कथित फांसीघर का उद्घाटनकिया गया जिसमें यह संदेश दिया गया कि यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी और एक सुरंग लाल किले तक जाती थी. सदन से किया बहिष्कारलेकिन राष्ट्रीय अभिलेखागार, आईसीएचआर, आईजीएनसीए, दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू के इतिहासकारों और एमसीडी की हेरिटेज सेल से प्राप्तदस्तावेज के आधार पर यह प्रमाणित हो गया कि ऐसा कोई फांसी घर या सुरंग कभी इस परिसर में मौजूद नहीं थी. तीन दिनों की चर्चा के बावजूदविपक्ष की ओर से इस निर्माण को लेकर कोई तर्कसंगत आधार या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. यह एक इरादतन फर्जीवाड़ा है जिसमें करोड़ोंरुपये खर्च कर जनता को गुमराह किया गया और विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई. विजेंद्र गुप्ता के संबोधन के दौरान आप विधायकों नेविरोध किया और नारेबाजी की। इसके बाद आतिशी के नेतृत्व में सदन से बहिष्कार कर दिया. विश्वासघात जैसा हो रहा है महसूसविजेंद्र गुप्ता ने बताया कि अब भवन को उसके 1912 के मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा. दोनों टिफिन रूम का मूल नक्शा स्थापित किया जाएगा. अगस्त 2022 को लगाए गए शिलापट्ट को हटाकर पूरे मामले की जांच विधानसभा की विशेषाधिकार समिति करेगी, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्रीअरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल और उपाध्यक्ष राखी बिड़लान को समन किया जाएगा. इसऐतिहासिक धरोहर के साथ जो छल किया गया, वह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक अपराध है. इससे मेरी ही तरह हजारों लोगों की भावनाएंआहत हुईं हैं. देश कभी इस तरह के कुकृत्य को माफ नहीं करेगा. जब यह फांसी घर बनाया गया था तब वे और विपक्ष के अन्य नेता भावनात्मक रूपसे इससे जुड़ गए थे. हमें लगा कि यह कोई शहादत स्थल है लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो विश्वासघात जैसा महसूस हुआ.
भारत पर अमेरिकी टैरिफ की मनमानी के खिलाफ चीन ने दिया साथ, कहा टैरिफ का हो रहा गलत इस्तेमाल

टैरिफ के मुद्दे पर अमेरिकी मनमानी के खिलाफ भारत को चीन का साथ मिला है। चीन ने कहा है कि अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ का गलत इस्तेमालकिया जा रहा है और हमारा इसके प्रति विरोध साफ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्तटैरिफ लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. जिसके बाद अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया कुल टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत होगया है. जब इसे लेकर चीन से प्रतिक्रिया मांगी गई तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि ‘टैरिफ के दुरुपयोग के प्रति चीनका विरोध सही और स्पष्ट है. भारत पर टैरिफ लगाने का एलानअमेरिका के टैरिफ लगाने के फैसले पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। भारत ने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिका का यह कदम अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैरवाजिब है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ‘यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत परऐसे कदमों के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया है जब कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हित में ऐसे कदम उठा रहे हैं. हम दोहराते हैं कि येकदम अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण हैं. भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा. गौरतलब है कि अमेरिका नेरूस से कच्चा तेल खरीदने के चलते भारत पर टैरिफ लगाने का एलान किया है. रुस से खरीदता है कच्चा तेललेकिन चीन भी बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल खरीदता है, लेकिन चीन के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने चुप्पी साधी हुई है। अमेरिका और चीन केबीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी चल रही है. हाल ही में स्टॉकहोम में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत भीहुई. अमेरिका ने चीन पर लगाए गए 145 प्रतिशत टैरिफ को फिलहाल 90 दिनों के लिए स्थगित किया हुआ है. अमेरिका ने रूस से कच्चा तेलखरीदने के चलते भारत पर टैरिफ लगाने का एलान किया है, लेकिन चीन भी बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल खरीदता है, लेकिन चीन के मुद्दे परअमेरिकी राष्ट्रपति ने चुप्पी साधी हुई है.
एनपीओ पर टैक्स के प्रावधानों पर उठे सवाल, केंद्र ने आयकर विधेयक 2025 लिया वापस “गुमनाम दान पर टैक्स को लेकर मचा था विवाद”

केंद्र सरकार ने लोकसभा से आयकर विधेयक 2025 को वापस ले लिया है. विधेयक की जांच के लिए बनी प्रवर समिति की रिपोर्ट के बाद यहफैसला लिया गया. इस विधेयक को फरवरी में लोकसभा में पेश किया गया था. बताया जा रहा है कि नया विधेयक 11 अगस्त को लोकसभा में पेशकिया जाएगा. केंद्र सरकार ने आयकर विधेयक 2025 को 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया था. विधेयक की जांच के लिए भाजपा सांसद बैजयंतपांडा की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय प्रवर समिति बनाई गई थी. समिति ने विधेयक की जांच की और 285 सुझाव दिए थे। समिति ने 21 जुलाई2025 को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत कर दी. केंद्र सरकार ने प्रवर समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार द्वारा स्वीकार कर ली हैं. कुछसुझाव भी प्राप्त हुए हैं जिन्हें सही विधायी अर्थ प्रदान करने के लिए शामिल करने की आवश्यकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार कोलोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 वापस ले लिया. उन्होंने कहा कि सरकार प्रवर समिति की ओर से सुझाए गए बदलावों को शामिल करने केबाद विधेयक को नए रूप में लेकर आएगी. बताया जा रहा है कि विधेयक का नया संस्करण 11 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जाएगा. ऐसे दान पर दी जानी छूटसूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि विधेयक के विभिन्न संस्करणों के कारण भ्रम से बचने तथा सभी परिवर्तनों को शामिल करतेहुए एक स्पष्ट और नया संस्करण उपलब्ध कराने के लिए आयकर विधेयक का नया संस्करण सोमवार को सदन में विचार के लिए पेश किया जाएगा.विधेयक की जांच कर रही 31 सदस्यों वाली संसदीय समिति ने अपने सुझाव में कहा है कि गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ), विशेष रूप से धर्मार्थऔर परमार्थ उद्देश्यों वाले संगठनों के लिए गुमनाम दान पर कर लगाने के संबंध में अस्पष्टता को दूर किया जाना चाहिए. समिति ने गैर-लाभकारीसंस्थाओं (एनपीओ) की ‘प्राप्तियों’ पर कर लगाने का विरोध किया, क्योंकि यह आयकर अधिनियम के तहत वास्तविक आय कराधान के सिद्धांत काउल्लंघन है. सुझावों में ‘आय’ शब्द को फिर से लागू करने की सिफारिश की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल एनपीओ की शुद्ध आय परही कर लगाया जाए. पंजीकृत एनपीओ को मिलने वाले ‘गुमनाम दान के संबंध में महत्वपूर्ण अंतर’ है, इसे देखते हुए समिति ने सुझाव दिया किधार्मिक और परमार्थ न्यास (ट्रस्ट), दोनों को ऐसे दान पर छूट दी जानी चाहिए. मकसद है सरल बनानासमिति ने कहा, ‘‘विधेयक का घोषित मकसद इसे सरल बनाना है. लेकिन समिति को लगता है कि धार्मिक व परमार्थ ट्रस्ट के संबंध में एक महत्वपूर्णचूक हुई है, जिसका भारत के एनपीओ क्षेत्र के एक बड़े हिस्से पर काफी प्रतिकूल असर पड़ सकता है. आयकर विधेयक, 2025 के खंड 337 में सभीपंजीकृत एनपीओ को मिलने वाले गुप्त दान पर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए स्थापितएनपीओ को ही सीमित छूट दी गई है. यह आयकर अधिनियम, 1961 की वर्तमान धारा 115बीबीसी से बिल्कुल अलग है। मौजूदा कानून में अधिकव्यापक छूट प्रदान की गई है। इसके मुताबिक, अगर कोई ट्रस्ट या संस्था पूरी तरह से धार्मिक और परमार्थ कार्यों के लिए बनाई गई हो, तो गुप्त दानपर कर नहीं लगाया जाता है। ऐसे संगठन आमतौर पर पारंपरिक माध्यमों (जैसे दान पेटियों) से योगदान प्राप्त करते हैं, जहां दान देने वाले की पहचानकरना असंभव है.
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता हुई असफल ट्रंप ने 25% अतिरिक्त टैरिफ का एलान, कुल शुल्क 50% तक पहुंचा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर लगाया गया 25 फीसदी आयात शुल्क 7 अगस्त (अमेरिकी समयानुसार) से प्रभावी होजाएगा. यानी भारत और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधियों के बीच पांच चरणों की बैठक के बावजूद ट्रंप प्रशासन भारत की तरफ से कई वर्गों में टैरिफघटाने के प्रस्ताव को नहीं माना है. इसके बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस के साथ व्यापार का जिक्र करते हुए भारत पर 27 अगस्त से अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ भी लगाने का एलान किया है. यानी इस महीने के अंत तक भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंचसकता है.इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कबसे जारी है? अमेरिका और अलग-अलग देशों के बीच हुए व्यापार समझौतों का भारत से वार्ता पर कैसे असर पड़ा? भारतीय प्रतिनिधियों की तरफ से अमेरिका कोटैरिफ के लिए क्या प्रस्ताव दिया गया था? इसके अलावा ट्रंप आखिरी समय में इस समझौते से क्यों बिफर गए और अब आगे की राह क्या है?भारतऔर अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत ट्रंप के राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के करीब एक महीने बाद फरवरी में शुरू हो गई थी. एलान भी दिया था करयानी भारत उन पहले कुछ देशों में था, जिसने अमेरिका के साथ जल्द से जल्द व्यापार समझौते को प्राथमिकता दी. दोनों देशों ने व्यापार वार्ता केलिए अपने प्रतिनिधिमंडलों का भी एलान कर दिया था. हालांकि, बीते पांच महीनों में पांच बैठकों के बावजूद भारत-अमेरिका समझौता नहीं कर पाए.गौरतलब है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस साल अप्रैल में भारत आए थे. उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने भारत के साथ बातचीत के मसौदेको अंतिम रूप भी दिया. माना जा रहा था कि इस बैठक के बाद भारत को कई क्षेत्रों में छूट मिल गई. तब सामने आया था कि भारत ने अमेरिका कोउसके औद्योगिक उत्पादों के निर्यात पर कोई भी टैरिफ न लगाने का प्रस्ताव दिया था. औद्योगिक उत्पाद अमेरिका की तरफ से भारत को किए जानेवाले कुल निर्यात का 40 फीसदी हैं. भारत ने एल्कोहल के साथ अमेरिकी कारों पर भी टैरिफ दर घटाने पर सहमति जताई थी. साथ ही अमेरिका के45 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार घाटे को कम करने के लिए उसकी ऊर्जा और हथियार खरीद को 25 अरब डॉलर तक बढ़ाने का भरोसा दिया था. मतभेदों को कर चुके है खत्मबताया जाता है कि पांचवीं चरण की बैठक आते-आते दोनों देश अपने मतभेदों को खत्म कर चुके थे. ट्रंप भी इसे लेकर जल्द ‘बड़ा समझौता’ करने काएलान कर चुके थे. हालांकि, इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन भारत की ओर से टैरिफ में कमी से खुश नहीं था. दूसरी तरफ भारतीय अधिकारी इस उम्मीदमें थे कि सिर्फ टैरिफ में छूट देकर वह अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को बचा सकते हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने व्यापार समझौते को लेकर बातचीत मेंशामिल रहे भारत और अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की है। इसके हवाले पर दावा किया गया है कि अमेरिका जैसे-जैसे दक्षिण-पूर्वीएशियाई देशों, जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया, जापान आदि से मनमुताबिक व्यापार समझौते की तरफ पहुंचने लगा, वैसे ही उसे भारत के साथ होनेवाली बातचीत में अपने लिए ज्यादा मौके नजर आने लगे. आखिरकार यूरोपीय संघ से हुए व्यापार समझौते ने अमेरिका-भारत की बातचीत में ट्रंपप्रशासन को और ज्यादा शर्तें लगाने का मौका दे दिया. उधर भारतीय अधिकारी कुछ सेक्टर्स को भारत के लिए अहम बताते हुए अमेरिकी मांगों केआगे नहीं झुके.
दिल्ली में सियासत, लेकिन चर्चा में रहा रुद्रांश शिंदे की फैमिली मीटिंग में खास जिक्र शिंदे के पोते ने पीएम से जताई फाइटर प्लेन की ख्वाहिश

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे बुधवार को अपने पूरे परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे. लेकिनइस मुलाकात की सबसे खास बात वह शख्स रहा जो वहां मौजूद नहीं था – उनका पांच साल का पोता रुद्रांश. पीएम मोदी से मुलाकात के बारे मेंबताते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा- प्रधानमंत्री ने उनसे मिलते ही सबसे पहले रूद्रांश के बारे में पूछा. इस उन्होंने बताया कि वो अभी घर पर है और खेलरहा है. इस दौरान एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी को ये भी बताया कि – उनके पोते रुद्रांश ने उनसे एक खास फरमाइश की है। शिंदे ने बताया कि मेरेदिल्ली आने के दौरान उसने कहा – दादा, मोदी बाबा से मेरे लिए फाइटर प्लेन और खिलौने लेकर आना. यह सुनकर पीएम मोदी जोर से हंस पड़े। इसखास मुलाकात में शिंदे के साथ उनकी पत्नी लता शिंदे, सांसद बेटा श्रीकांत शिंदे, बहू वृशाली शिंदे शामिल थे. हालांकि रुद्रांश नहीं आया, लेकिनउसकी मौजूदगी हर बातचीत में महसूस की गई. परिवार के साथ की मुलाकातइस खास मुलाकात में शिंदे के साथ उनकी पत्नी लता शिंदे, सांसद बेटा श्रीकांत शिंदे, बहू वृशाली शिंदे शामिल थे. हालांकि रुद्रांश नहीं आयालेकिन उसकी मौजूदगी हर बातचीत में महसूस की गई.इसके बाद में मीडिया से बात करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, ‘मेरे पोते ने सही मांग की है. फाइटर प्लेन हमारे लिए भी काम आ सकते हैं खासकरमहाराष्ट्र की राजनीति और आगामी नगर निगम चुनावों के लि. उनके इस मजाकिया बयान से यह साफ हो गया कि वे चुनावी लड़ाई को भी फाइट कीतरह देख रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि जब एकनाथ शिंदे पीएम मोदी से मिलने लोक कल्याण मार्ग पहुंचे, उसी समय उद्धव ठाकरे भी अपने परिवारके साथ दिल्ली में थे. बता दें कि उद्धव ठाकरे विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं. इस पर तंज कसते हुए शिंदे बोले, ‘वो 10 जनपथ गए हैं और हम लोक कल्याण मार्ग पर आए हैं, जैसा कि बालासाहेब ठाकरे ने हमें सिखाया था. भगवान शंकर का चित्र किया भेंटइस दौरान एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी को भगवान शंकर का चित्र भेंट किया. उन्होंने इसे ‘ऑपरेशन महादेव’ की सफलता के उपलक्ष्य में सौंपा- जम्मू-कश्मीर में हुआ यह आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, जिसमें पहलगाम हत्याकांड में शामिल एक आतंकी मारा गया. जब पत्रकारों ने उनसे ऑपरेशनटाइगर (जो शिवसेना उद्धव गुट को कमजोर करने की साजिश माना गया था) के बारे में पूछा तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया- ‘अभी हम ऑपरेशनसिंदूर और ऑपरेशन महादेव की बात कर रहे हैं, ना कि ऑपरेशन टाइगर की. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और पीएम मोदी की यहमुलाकात एक तरफ सियासी रणनीति का हिस्सा रही, वहीं दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे के पोते रुद्रांश की फाइटर प्लेन की मांग ने माहौल को हल्काबना दिया. महाराष्ट्र की राजनीति में जहां एक तरफ ठाकरे बनाम शिंदे की लड़ाई तेज़ हो रही है, वहीं बच्चे की यह फरमाइश सबके चेहरे पर मुस्कानलाई है.
अमेरिका की टैरिफ नीति पर सियासी भूचाल कांग्रेस ने कहा ‘ब्लैकमेल’, विपक्ष ने पीएम मोदी की विदेश नीति पर उठाए सवाल जानें क्या हैपूरा मामला

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 25% अतिरिक्त टैरिफ (कर) लगाने के फैसले ने देश में सियासीहलचल तेज कर दी है. यह टैक्स भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के चलते लगाया गया है. इस फैसले के बाद अब भारत से अमेरिकी बाजार में जानेवाले सामान पर कुल 50% टैक्स लगने लगेगा. इस मामले में अब विपक्षी दलों की लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है. कांग्रेस, जेएमएम और वामदलों के सांसदों ने सरकार की विदेश नीति और प्रधानमंत्री की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. अमेरिका के टैरिफ नीति पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेसप्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे ब्लैकमेल करार दिया. उन्होंने कहा कि ये सीधा ब्लैकमेल है. आज हम इस हालत में हैं कि एक महाशक्ति हमें धमका सकतीहै, ये शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों से हमारी विदेश नीति, प्रधानमंत्री के विदेश दौरों, प्रवासी कार्यक्रमों का मकसद सिर्फ मोदी जीकी छवि बनाना रहा, देश के हितों की बजाय। अब उसकी कीमत देश चुका रहा है. हम उम्मीद करते हैं कि कोई ऐसा समझौता न हो जो भारत के हितोंके खिलाफ जाए. देना होगी जवाबवहीं अमेरिका के इस फैसले पर जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा कि इस फैसले का असर भारत से ज्यादा अमेरिका पर पड़ेगा. उन्होंने कहा किभारत की जनता तो कम में भी जीना जानती है यहां गरीबी है, लोग अभाव में रहना जानते हैं. उन्होंने कहा कि महंगाई अमेरिका में बढ़ेगी, क्योंकि उन्हेंभारतीय सामान महंगा मिलेगा। माजी ने कहा कि प्रधानमंत्री को ‘मन की बात’ में इस पर बोलना चाहिए कि ट्रंप से उनके इतने अच्छे रिश्ते थे. साथ हीअब हमें वैकल्पिक व्यापार साझेदारों की तलाश करनी चाहिए, क्योंकि दुनिया सिर्फ अमेरिका नहीं है. इसके साथ ही वामपंथी पार्टी सीपीआई केसांसद पी संतोश कुमार ने अमेरिका के टैरिफ को लेकर प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि ट्रंप का दूसरा कार्यकाल भारत को नीचादिखाने वाला है. हमें जवाब देना चाहिए.भारत का नेतृत्व है कमजोरउन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर चौथे नंबर पर हैं लेकिन जब कुछ गंभीर होता है, जैसे पहलगाम की घटना के बाद भारत-पाक तनाव, तब वो कुछ नहीं बोलते पूरी दुनिया को लग रहा है कि भारत का नेतृत्व कमजोर है. अब देशहित सबसे ऊपर है, इसलिए जवाब देना जरूरी है. अमेरिकाद्वारा भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने को लेकर देश में सियासी बहस तेज हो गई है. विपक्षी दल लगातार रूप से अमेरिका की टैरिफनीति का विरोध कर रहे हैं। साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी के विदेश नीति पर सवाल भी उठा रहे हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तो इसे अमेरिका कीब्लैकमेलिंग तक बता दिया.
भारत पर अमेरिका का ‘डबल स्टैंडर्ड’? बोल शशि थरूर हमारे किसानों की 70 करोड़ जिन्दगियों पर लगा रहा है दांव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 25% अतरिक्त टैक्स लगा दिए है. यह टैक्स भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकरलगाया गया है. इस फैसले के बाद भारत से अमेरिकी बाजार में जाने वाले सामान पर कुल 50% टैक्स लगने लगेगा. ऐसे में भारत में इस बात कोलेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है उन्होंने अमेरिका के इस कदम को अनुचित औरदोहरे मापदंड वाला बताया. साथ ही कहा कि अमेरिका खुद रूस से कई चीजें मंगा रहा है, लेकिन भारत को निशाना बना रहा है. कांग्रेस सांसद ने कहाकि अमेरिका ने चीन को 90 दिन की छूट दी है जबकि वह हमसे कहीं ज्यादा रूसी तेल खरीदता है उन्होंने कहा कि यह दोस्ती का संकेत नहीं है. अमेरिका से हमें ऐसी उम्मीद नहीं थी. थरूर ने इस फैसले को अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैरजरूरी बताया. साथ ही कहा कि अमेरिका भारत के साथदोहरा रवैया अपना रहा है. निर्यात को होगा नुकसानबता दें कि बीते छह अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक आदेश पर साइन किए, जिसके बाद भारत से आयात होने वाले सामान पर अबकुल 50% टैक्स लगेगा। उन्होंने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े कारण बताए, खासकर भारत के रूस से तेल आयात को लेकर. थरूर ने यह भी इशारा किया कि अब भारत में अमेरिकी सामान पर जवाबी टैक्स लगाने की मांग तेज हो सकती है. उन्होंने कहा कि अमेरिका खुद रूससे यूरेनियम और पैलेडियम जैसी चीजें खरीद रहा है. हमें अब इससे सबक लेना चाहिए और उसी हिसाब से कदम उठाने होंगे. इसके साथ ही थरूर नेकहा कि 50% टैक्स की वजह से भारतीय सामान अब अमेरिका में बहुत महंगे हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि अगर हमारे प्रतियोगी देशों जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस, बांग्लादेश और पाकिस्तान पर कम टैक्स है, तो अमेरिकी लोग सस्ता सामान वहीं से खरीदेंगे. इससे हमारे निर्यात को नुकसानहोगा. बताया दोहरा रवैयाइसके साथ ही ट्रंप के टैरिफ के जवाब में थरूर ने सुझाव दिया कि भारत को अब अपने व्यापारिक रिश्तों को अन्य देशों की ओर मोड़ना चाहिए। उन्होंनेकहा कि हमने यूके के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) साइन किया है. यूरोपीय यूनियन (ईयू) से बातचीत चल रही है. हमें नए बाजारों की तलाशकरनी चाहिए. इसके अलावा भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिका के इस कदम की कड़ी आलोचना की है. मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला बहुतदुर्भाग्यपूर्ण है. यह हमारे रणनीतिक रिश्तों की भावना के खिलाफ है. मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि भारत की तेल खरीद जरूरतोंके अनुसार होती है और यह 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है. भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारतीय सामान पर 25% अतिरिक्त टैक्स लगा दिया है. जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे अनुचित और दोहरा रवैया बताया. उन्होंने कहाकि अमेरिका खुद रूस से सामान मंगाता है और चीन को छूट देता है फिर भारत के साथ दोहरा मापदंड क्यों? यह कदम दोस्ताना नहीं, बल्किअन्यायपूर्ण है.
मतदाता सूची है मेरी पहचान, ममता ने बंगाली पहचान पर बने हमले को लिया आड़े हाथों चुनाव आयोग और बीजेपी को दी चेतावनी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा को चुनौती दी. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो नेभाजपा का नाम न लेते हुए निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘आप मुझे तब तक नहीं हरा सकते जब तक मैं आपको इजाजत ना दूं. सीएम ममता ने बुधवारको झारग्राम के पंचमाथा मोड़ में एक जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि वह एक शेरनी हैं और किसी को भी उन्हें घायल करनेऔर उन्हें खतरनाक बनाने का जोखिम उठाने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए. उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को चेतावनी दी कि वे उन्हें कम नआंकें और स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. अपने राजनीतिक अतीत का स्पष्ट उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि वह माकपा कीगोलियों से बच निकलीं. बनर्जी ने कहा, ‘मेरा सिर कुचल दिया गया, मेरा शरीर खून से लथपथ हो गया. मुझे डर नहीं है. मैं तुम्हें चींटियों की तरहकुचल दूंगी। मैं एक जिंदा शेरनी हूं. मुझे घायल करने की कोशिश मत करो, मैं खतरनाक हो जाऊंगी. ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि आप मुझेतभी हरा सकते हैं, जब मैं इसकी इजाजत दूं. अगर मैं नहीं चाहती. तो आप नहीं कर सकते. ममता बनर्जी को हराना आसान नहीं है. जरा भी नहीं आई शर्मबनर्जी की यह टिप्पणी चुनाव आयोग द्वारा उनकी सरकार को दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) सहित चार सरकारी अधिकारियों कोनिलंबित करने के निर्देश के बाद आई है.आक्रोश व्यक्त करते हुए, बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘आयोग अमित शाह के एजेंट की तरहकाम कर रहा है. यह अमित शाह के हाथों की कठपुतली की तरह काम कर रहा है. बंगाल इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा. मैं अपने अधिकारियोंको सजा नहीं मिलने दूंगी अगर हिम्मत है तो करके देखो. सीएम बनर्जी ने मतदाताओं से मतदाता सूची में अपना नाम जांचने और सतर्क रहने की भीअपील की. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘मतदाता सूची में आपका नाम ही आपकी पहचान है. अभी पंजीकरण कराएं और बाद में दोबारा जांच लेंचुनाव के दिन अपना नाम गायब पाकर चौंकें नहीं उन्होंने एनआरसी से जुड़ी भय फैलाने की कोशिशों पर चिंता दोहराते हुए कहा, ‘असम से बंगाल मेंलोगों को डराने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं उन्हें जरा भी शर्म नहीं है. उत्पीड़न नहीं करेगा बर्दाश्तजनसभा को संबोधित करते हुए सीएम ममता ने जंगलमहल में बिताए अपने समय की यादें ताजा कीं और 1992 में बेलपहाड़ी की अपनी यात्रा कोयाद किया. उन्होंने कहा, ‘लोग खाने के लिए चींटियां और जड़ें उबाल रहे थे। उस दिन, मैंने चीजें बदलने का फैसला किया. इसलिए मैंने ‘खाद्य साथी’ शुरू किया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बंगाल में कोई भी भूखा न रहे. सीएम ने बंगाली भाषी लोगों को कलंकित करने की कोशिशों की भीआलोचना की। उन्होंने कहा कि अब अगर आप बंगाली बोलते हैं. तो आपको बांग्लादेशी या रोहिंग्या कहा जाता है। यह बंगाली भाषा पर हमला है. उन्होंने जनता से इसका विरोध करने की अपील की। साथ ही कहा, ‘जय बांग्ला’ कहो विरोध करो हम बिना लड़े एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। आपकावोटर कार्ड सिर्फ एक कार्ड नहीं है, यह आपकी पहचान का प्रमाण है.उन्होंने आत्मविश्वास से भरे लहजे में कहा, ‘आप मुझे तभी हटा सकते हैं जब मैं पद छोड़ने का फैसला करूं. वरना, आपके समर्थक भी मुझे वोट देंगे. उन्होंने राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी सीधे संबोधित किया और उन्हें अपने समर्थन का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा, ‘आप जनता के लिए कामकरते हैं। आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी है. वे आपको डराने की कोशिश करेंगे, लेकिन कामयाब नहीं होंगे। बंगाल चुनाव के नाम पर उत्पीड़नबर्दाश्त नहीं करेगा.