भारतीय हॉकी के दिग्गज और लिएंडर पेस के पिता वेस पेस का 80 वर्ष की उम्र में निधन, भारतीय खेलों को दी अमूल्य विरासत

1972 में म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य और टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के पिता वेस पेस का 80 वर्षकी आयु में निधन हो गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेस पेस पार्किंसन रोग से पीड़ित थे, उन्हें मंगलवार सुबह शहर के एक अस्पताल में भर्तीकराया गया था.वेस पेस का भारतीय खेलों के साथ लंबा जुड़ाव रहा है. उनकी देखरेख में कई खिलाड़ियों को अलग-अलग खेलों में डेब्यू का मौका मिला. वेस नेभारतीय खेलों के लिए काफी कुछ किया। वह भारतीय हॉकी टीम में मिडफील्डर की पोजिशन पर खेलते थे. इसके अलावा उन्होंने फुटबॉल, क्रिकेटऔर रग्बी जैसे कई खेलों में भी हाथ आजमाए. वेस पेस 1996 से 2002 तक भारतीय रग्बी फुटबॉल संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया. बेटे की तारीफखेल चिकित्सा के चिकित्सक के रूप में उन्होंने एशियाई क्रिकेट परिषद, भारतीय क्रिकेट बोर्ड और भारतीय डेविस कप टीम सहित कई खेल निकायों केसाथ चिकित्सा सलाहकार के रूप में काम किया. 1972 में वेस पेस के ओलंपिक पदक जीतने के 24 साल बाद लिएंडर ने अटलांटा ओलंपिक1996 में भारतीय टेनिस को उसका पहला और एकमात्र पदक दिलाया था. लिएंडर ने पुरुष एकल में कांस्य पदक जीता था. यह 1952 के बाद भारतका ओलंपिक इंडिविजुअल स्पोर्ट्स में पहला पदक था. 1952 में केडी जाधव ने ऐसा किया था। वेस अक्सर अपने बेटे की तारीफ किया करते थे. वेसने लिएंडर की कामयाबी को लेकर कहा था ‘पहली बात तो लिएंडर एक ऐसे माहौल में पले बढ़े हैं, जिसने खेल संस्कृति को प्रोत्साहित किया है. साथही लिएंडर के पास अंतर्निहित प्रतिभा है. खेलों में मिला लंबा जुड़ाववेस ने बताया था’लिएंडर टेनिस कोर्ट पर काफी तेज हैं और मुझे यह भी लगता है कि वह जिद्दी भी हैं. लिएंडर हफ्ते में छह दिन, रोजाना तीन घंटे ट्रेनिंगकरते थे. अगर आप चैंपियन बनना चाहते हैं तो आपको इसे जारी रखना होगा. वहीं, लिएंडर पेस का मानना है कि ‘कभी हार न मानने’ का रवैया उनकेपरिवार में है लिएंडर ने कहा था, ‘यह सब विरासत में मिलता है लिएंडर पेस, जो स्वयं एक पिता हैं, का मानना है कि उनकी बेटी अयाना में भी ये गुणहैं. लिएंडर पेस ने कहा, ‘आपको मेरी बेटी पर गौर करना चाहिए। वह मेरे पिता से बहुत मिलती-जुलती है. वेस पेस का भारतीय खेलों के साथ लंबाजुड़ाव रहा है. उनकी देखरेख में कई खिलाड़ियों को अलग-अलग खेलों में डेब्यू का मौका मिला. वेस ने भारतीय खेलों के लिए काफी कुछ किया.
UP विधानसभा में 24 घंटे चली मैराथन बहस सरकार का विजन 2047, विपक्ष की टिप्पणी और मंत्रीगण के तीखे वार

विजन डॉक्यूमेंट में चर्चा के तहत बुधवार 11 बजे शुरू हुई विधानसभा की कार्यवाही पूरी रात चलती रही. यह कार्यवाही आज सुबह 11 बजे तकचलेगी. रात भर बारी-बारी संबंधित विभाग के मंत्री बोलते रहे. विपक्षी नेताओं ने भी अपनी बात रखी. सदन में रात में कई बार सत्ता और विपक्ष केनेताओं के बीच वाद-प्रतिवाद की भी स्थिति बनी. मत्स्य पालन मंत्री डॉ. संजय निषाद ने सपा, बसपा और कांग्रेस कर निशाना साधा और कहा किहमारे आने से पहले ही कांग्रेस और बसपा साफ हो गए थे. अब बची खुची सपा भी सदन से साफ हो जाएगी. अपने विभाग का विजन 2047 हुए कहाकि मत्स्य पालकों को डिजिटल और एआई से लैस करना, आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना ही लक्ष्य है. बेहद है दुर्भाग्यपूर्णइसके लिए 28 प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिसे अध्यक्ष को सौंप दिया. उन्होंने कहा कि मुगलों और अंग्रेजों ने 1000 वर्ष लूटा, तब हम उनसे 20 और30 गुना अमीर थे लेकिन 70 साल में कांग्रेस ने इतना लूटा कि आज हमारा पैसा उनसे पीछे हो गया. इसके बावजूद आज भारत की अर्थव्यवस्थाब्रिटेन से आगे है, जो हमारे लिए गर्व का विषय है. मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के 2047 के विजन मेंहिस्सा लेना तो दूर, सुनने के लिए भी विपक्ष नहीं है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. अखिलेश यादव ने की टिप्पणीविजन को लेकर कहा कि होमगार्ड में महिला शक्ति बढ़ाने के साथ पुलिस की साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का लक्ष्य है. उन्हें इंसास राइफल के साथसामाजिक सुरक्षा देने का भी लक्ष्य है आज 49 जिलों में होमगार्ड सुरक्षा सेल के गठन का ऐतिहासिक काम हुआ है। कहा कि अगर 14 और 17 मेंबीजेपी सरकार न आती तो युवा पीढ़ी भगवान राम और कृष्ण की जन्मभूमि भूलती जा रही थी. कहा कि पहले सरकार में केवल पांच वीआईपी जिलोंमें बिजली मिलती थी, आज सभी 75 जिले में बिजली मिल रही है आज मूलभूत सुविधाओं की वजह से लोग शहर से गांव की ओर जा रहे हैं. कहाकि आज बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से दिल्ली का सफर दस घंटे से घटकर छह घंटे रह गया है. यूपी विधानसभा में विजन डॉक्यूमेंट के तहत पूरी रात सदनकी कार्यवाही चलती रही. इस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने टिप्पणी भी की.
हिमाचल में खुल सकते हैं विशेष विज्ञान, कला और खेल कॉलेज CM सुक्खू ने दिए संभावनाएं तलाशने के निर्देश

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में विज्ञान, कला और खेल के विशेष कॉलेजखोलने की संभावनाओं की जांच करें. शिक्षा विभाग की बैठक में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि गांव के छात्रों सहित सभी को अच्छीऔर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके. यहां जारी एक बयान में कहा गया है कि उन्होंने विभाग से यह लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया कि प्राथमिकशिक्षा में नामांकित शत-प्रतिशत बच्चे अपनी उच्च शिक्षा पूरी करें. उन्होंने महाविद्यालयों और उनमें पढ़ाए जाने वाले विषयों के युक्तिकरण पर भी जोरदिया और विभाग को इस संबंध में एक अध्ययन करने के निर्देश दिए ताकि अगले सत्र से आवश्यक बदलाव किए जा सकें. जरुरतों को किया जा सके पूराउन्होंने कहा कि विभाग उन नए विषयों की भी पहचान करेगा जिनमें निकट भविष्य में रोजगार की बेहतर संभावनाएं हैं. सुक्खू ने महाविद्यालयों कीग्रेडिंग पूरी करने के भी निर्देश दिए ताकि आवश्यक स्टाफ के पदों को भरा जा सके और अन्य बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा किया जा सके. उन्होंनेकहा कि राज्य सरकार शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को जल्द ही भरेगी ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो. मुख्यमंत्री ने विभाग को स्कूली पाठ्यक्रम में राज्य-विशिष्ट विषय-वस्तु शामिल करने के निर्देश दिए ताकि छात्र अपने परिवेश और राज्य के बारे में अच्छी तरह से जान सकें. अधिकारियों को दिए गए निर्देशउन्होंने शिक्षण संस्थानों में आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और छात्रों के समग्र विकास कोसुनिश्चित करने के लिए संस्थानों में अनिवार्य मॉक टेस्ट और जीरो पीरियड आयोजित करने को कहा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खूने राज्य में विज्ञान, कला और खेल के विशेष कॉलेज स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं.
असम में डिजिटल पोर्टल लॉन्च संवेदनशील क्षेत्रों के मूल निवासियों को मिलेगा हथियार लाइसेंस, सरकार नहीं देगी हथियार

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने गुरुवार को एक डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया, जिसके जरिए राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले मूलनिवासी हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे. यह कदम सरकार और जिम्मेदार नागरिकों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए उठायागया है ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिल सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल लाइसेंस देगी. हथियार नहीं. मुख्यमंत्री सरमाने बताया कि इस पोर्टल के जरिए केवल वही लोग आवेदन कर सकेंगे. जो असम के मूल निवासी हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में रहते हैं. उनका उद्देश्य है कि ऐसे जिम्मेदार लोग जो बिना आपराधिक पृष्ठभूमि के हों, राज्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग करें. सरकार ने स्पष्टकिया है कि हथियार लाइसेंस केवल उन्हीं को मिलेगा, जो मानसिक रूप से स्वस्थ हों और जिनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज न हो. लाइसेंस देने से पहले एक मल्टी-लेयर जांच और गहन पड़ताल होगी, ताकि कोई भी गलत व्यक्ति हथियार के इस्तेमाल का लाइसेंस न पा सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि लाइसेंस चाहने वालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेनी होगी और यह साबित करना होगा कि वे किस तरह से खतरे में हैं. यहव्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि केवल वास्तविक जरूरतमंद लोगों को ही लाइसेंस मिले. सरकार ने साफ किया है कि वह हथियार उपलब्ध नहीं कराएगी, बल्कि भारतीय शस्त्र अधिनियम के तहत सिर्फ लाइसेंस जारी करेगी. मुख्यमंत्री नेउम्मीद जताई कि यह कदम कानून-व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाएगा और असम के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत होगी. असम केमुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने एक डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले मूल निवासी हथियार लाइसेंस के लिएआवेदन कर सकेंगे. लाइसेंस उन्हीं को मिलेगा, जो मानसिक रूप से स्वस्थ हों, आपराधिक पृष्ठभूमि न हो, ट्रेनिंग लें और खतरे का प्रमाण दें। सरकारहथियार नहीं देगी, केवल लाइसेंस जारी करेगी.
बिहार से वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस की सीधी लड़ाई, 17 अगस्त से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत जानें क्या है पूरा मामला

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में कांग्रेस ने बड़ा एलान किया है. कांग्रेस ने 17 अगस्त बिहार से वोटर अधिकार यात्रानिकालने का फैसला लिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हम यात्रा के जरिये वोट चोरी के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ेंगे. कांग्रेस पूरी देश मेंसटीक मतदाता सूची के लिए काम करेगी. एक्स पर पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी केवल चुनाव का मुद्दा नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र, संविधान और एक व्यक्ति, एक वोट के सिद्धांत की रक्षा से जुड़ी निर्णायक लड़ाई है. 17 अगस्त से वोटर अधिकार यात्रा के साथ हम बिहार की धरतीसे वोट चोरी के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं,उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में सटीक मतदाता सूची बनाने का मुद्दा उठाएंगे. रोडमैप की घोषणा थी कीयुवा, श्रमिक, किसान, प्रत्येक नागरिक उठे और इस जन आंदोलन में शामिल हो. इस बार वोट चोरों की हार, जनता की जीत, संविधान की जीत. राहुल गांधी ने भारत जोड़ों न्याय यात्रा का एक वीडियो भी साझा किया. कांग्रेस ने बुधवार को कहा था कि राहुल गांधी बिहार में विपक्षी गठबंधनइंडिया के नेताओं के साथ वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई को जन आंदोलन बनाने के लिए वोटर अधिकार यात्रा निकालेंगे. यात्रा 17 अगस्त से शुरूहोगी और एक सितंबर को पटना के गांधी मैदान में समाप्त होगी. कांग्रेस ने कहा था कि वोट चोरी उसके लिए ‘करो या मरो’ का मुद्दा है. वहीं कांग्रेस ने14 अगस्त की शाम को ‘लोकतंत्र बचाओ मशाल मार्च’ सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने आरोपों को लोगों तक ले जाने के लिए एकरोडमैप की घोषणा की थी. लोगों तक जाएंगे लेकरकांग्रेस नेता और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के एआईसीसी प्रभारी कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के साथइसे लोगों तक ले जाएगी. कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों पर ‘लोकतंत्र बचाओ मशालमार्च’ निकाला जाएगा. उन्होंने कहा कि 22 अगस्त से सात सितंबर के बीच कांग्रेस सभी राज्य मुख्यालयों पर वोट चोर, गद्दी छोड़ो रैलियां आयोजितकरेगी. 15 सितंबर से 15 अक्तूबर के बीच वोट के अधिकार को बचाने और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलायाजाएगा. कांग्रेस ने 17 अगस्त बिहार से वोटर अधिकार यात्रा निकालने का फैसला लिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हम यात्रा के जरियेवोट चोरी के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ेंगे. कांग्रेस पूरी देश में सटीक मतदाता सूची के लिए काम करेगी.
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित कोर्ट ने कहा नियमों की अनदेखी से बिगड़ी है स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़ने के 11 अगस्त के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखलिया. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले हर व्यक्ति को जिम्मेदारी लेनी होगी. शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पूरीसमस्या स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता के कारण है. नियमों का पालन न करने की वजह से समस्या इतनी बढ़ गई है. सुनवाई केदौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अधिकारियों से पशु जन्म नियंत्रण नियमों के कार्यान्वयन पर उनका रुख पूछा. कोर्ट ने कहा कि पूरी समस्या नियमों केकार्यान्वयन में अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण है। नियम और कानून संसद की ओर से बनाए जाते हैं. लेकिन उनका पालन नहीं किया जाता।स्थानीय अधिकारी वह नहीं कर रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए. बहुसंख्यक चुपचाप है पीड़ितएक ओर इंसान पीड़ित हैं, तो दूसरी ओर जानवर भी पीड़ित हैं और पशु प्रेमी यहां मौजूद हैं. दिल्ली सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया किरेबीज फैलाने वाले कुत्तों के काटने से बच्चों की मौत हो रही है आवारा कुत्तों के मुद्दे का समाधान किया जाना चाहिए. न कि इस पर विवाद किया जानाचाहिए. दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ को बतायाकि नसबंदी से रेबीज नहीं रुकता, भले ही आप उन्हें टीका लगा दें. इससे बच्चों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं नहीं रुकतीं. सॉलिसिटर जनरल नेसुप्रीम कोर्ट के सामने एक आंकड़ा पेश किया, जिसमें कहा गया है कि 2024 में देश में कुत्तों के काटने के 37 लाख मामले सामने आएं. इस दौरानरेबीज से 305 मौतें हुईं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मॉडल के अनुसार यह संख्या कहीं अधिक है. उन्होंने कहा कि बच्चे खुले में खेलने नहीं जा पा रहे हैं. कोर्ट को इसका समाधान ढूंढ़ना होगा. यह अल्पसंख्यकों का मुखर दृष्टिकोण है जबकि बहुसंख्यक चुपचाप पीड़ित हैं. बहस करने की है जरुरतकुत्तों की देखभाल करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर है. इस मामले परगहराई से बहस करने की जरूरत है. सिब्बल ने 11 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पारित कुछ निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की. जिनमेंदिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द उठाना शुरू करने और उन्हें आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने केनिर्देश शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या नगर निगम ने कुत्तों के लिए आश्रय गृह बनाए हैं? क्या कुत्तों की नसबंदी की गई है? अबकुत्तों को उठाया जा रहा है. हालांकि, आदेश में कहा गया है कि एक बार नसबंदी हो जाने के बाद आवारा कुत्तों को समुदाय में नहीं छोड़ा जानाचाहिए.वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 11 अगस्त के उस आदेश का भी विरोध किया, जिसमें अधिकारियों को आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में रखनेका निर्देश दिया गया था. उन्होंने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाएं तो होती हैं लेकिन इस साल दिल्ली में रेबीज से एक भी मौत नहीं हुई है. बेशक, कुत्तों के काटने की घटनाएं बुरी हैं लेकिन आप इस तरह की भयावह स्थिति पैदा नहीं कर सकते.
विजन 2047 नहीं, इंसाफ 2025 चाहिए, लोकदल ने यूपी सरकार के दस्तावेज़ को बताया जनता से सबसे बड़ा राजनीतिक धोखा

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का “विजन डॉक्यूमेंट 2047” असल में जनता के साथ एक सुनियोजित धोखाहै. यह दस्तावेज़ सिर्फ़ कागज़ी जुमलों और झूठे वादों का पुलिंदा है जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान आज की असल समस्याओं से भटकाना है. यहसरकार जनता को 2047 का सपना दिखा रही है. जबकि हालात में लोग महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों की आत्महत्याओं और कानून-व्यवस्था कीबदहाली से जूझ रहे हैं. यह वैसा ही है जैसे किसी डूबते आदमी से कहा जाए इंतज़ार करो, 22 साल बाद तुम्हें किनारे लगा देंगे यह सरकार न आज कीसमस्याएँ सुलझा रही है. न कल की, बल्कि केवल चुनावी नौटंकी और प्रचार तंत्र से जनता को बेवक़ूफ़ बना रही है. राजनीतिक धोखा दिया करारलोकदल अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि जनता अब इन खोखले नारों और कागज़ी सपनों के जाल में फँसने वाली नहीं है. हम 2047 नहीं, 2025 में हक़और न्याय चाहते हैं जनता अब हिसाब लेगी और इस सत्ता से धोखे का बदला ज़रूर लेगी. विधान परिषद में लाल बिहारी यादव ने इस विजन डॉक्यूमेंटको “चुनावी घोषणापत्र” जैसा बताते हुए कहा कि जिन वादों को सरकार ने दशकों में पूरा नहीं किया. उनपर भरोसा कैसे किया जाए? उन्होंने काले धनवापसी, ₹15‑लाख, 2 करोड़ नौकरियाँ, किसानों की आमदनी दोगुनी करने जैसे वादों का हवाला दिया, जो पूरी नहीं हुईं. लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्षसुनील सिंह ने “विजन डॉक्यूमेंट 2047” को जनता के साथ “सबसे बड़ा राजनीतिक धोखा” करार दिया. झूठे वादों का है पुलिंदाउन्होंने कहा कि यह दस्तावेज़ केवल कागज़ी जुमलों और झूठे वादों का पुलिंदा है. जिसका उद्देश्य जनता को असल समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोज़गारीऔर किसानों की समस्याओं से भटकाना है. उन्होंने इसे उस स्थिति से जोड़ा जैसे “डूबते आदमी से कहा जाए. इंतज़ार करो, 22 साल बाद किनारेलगाएंगे और निष्कर्ष में कहा कि जनता अब 2047 नहीं, 2025 में हक और न्याय चाहती है और धोखे का हिसाब लेगी. यह प्रेस नोट उनके जुड़ेबयान की रूपरेखा है जिसे आपने साझा किया. जिसमें यह अति‑प्रसंग और तीखी आलोचना शामिल है.
लाल किले से ऐतिहासिक संबोधन, पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर आरएसएस के शताब्दी वर्ष को बताया राष्ट्रनिर्माण का प्रेरक क्षण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आज लाल किले से अपने 103 मिनट लंबे भाषण में संघ केयोगदानों को रेखांकित किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 100 साल की अवधि में संघ ने राष्ट्रनिर्माण के काम में योगदान दिया है. इस बात काउल्लेख इसलिए अहम है क्योंकि लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री ने पहली बार आरएसएस का जिक्र किया है. पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह 2025 में लगातार 12वें साल ध्वजारोहण किया. उन्होंने संघ को दुनिया का सबसे बड़ा NGO बताया औरकहा कि यह संगठन देश के अलग-अलग हिस्सों में योगदान दे रहा है. पीएम मोदी ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा, समर्पण संगठन औरअप्रतिम अनुशासन आरएसएस की पहचान रही है. उन्होंने कहा, आज लाल किले की प्राचीर से वे उन स्वयंसेवकों को पूरे आदर के साथ याद करना चाहते हैं. जिन्होंने 100 साल की यात्रा में योगदानदिया है. पीएम मोदी ने कहा, देश गर्व करता है कि आरएसएस की यह भव्य और समर्पित यात्रा हमें प्रेरित करती रहेगी. आम तौर पर स्वतंत्रता दिवसभाषणों में प्रधानमंत्री मोदी विकास योजनाओं को गिनाने के अलावा नीतिगत घोषणाएं भी करते हैं. 2024 के भाषण में उन्होंने समान नागरिक संहिताका जोरदार समर्थन किया था. उन्होंने कानून के वर्तमान ढांचे को ‘सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण’ बताकर देश में एक साथ चुनाव (One Nation One Election) कराने की वकालत भी की थी. आज मैं गर्व के साथ एक बात का जिक्र करना चाहता हूं आज से 100 साल पहले एक संगठन का जन्महुआ- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संघ के लोग 100 साल से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं. व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर 100 साल तकमां भारती के कल्याण का लक्ष्य लेकर संघ के लोगों ने मातृभूमि के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है. ऐसा आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है. बीते 100 साल के दौरान देश की यात्रा में संघ का अहम योगदान है. प्रधानमंत्री मोदी ने जब79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपना भाषण शुरू किया तब उन्होंने उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल जैसे राज्यों में प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहेलोगों के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं. इसके अलावा उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति, आत्मनिर्भर भारत, तकनीक के मोर्चे पर देश की समृद्धि, ऊर्जा के विषय में देश के संकल्प और विकसित भारत बनाने के मिशन का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि 2030 तक जो लक्ष्य पूरा कियाजाना था, उसे हमने पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है. लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करने से पहले पीएम मोदी नेबलिदानी सपूतों को राष्ट्रीय समर स्मारक जाकर नमन किया. पीएम मोदी ने अपने शुरुआती संबोधन में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेखकिया. उन्होंने भाषण के सातवें मिनट में ही पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने वाले भारत के वीर सपूतों के पराक्रम का जिक्र कर पूरीदुनिया को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ देश की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को भी रेखांकित किया.
संयुक्त राष्ट्र महासभा सितंबर में न्यूयॉर्क यात्रा पर जा सकते हैं पीएम मोदी, ट्रंप से द्विपक्षीय बैठक की संभावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यानी सितंबर में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं. वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के वार्षिक उच्च-स्तरीय सत्र को संबोधित कर सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी वक्ताओं की मसौदा सूची के हवाले से यह खबर आ रही है. यूएनजीए का 80वांसत्र 9 सितंबर को शुरू होगा. उच्च-स्तरीय आम बहस 23 से 29 सितंबर तक चलेगी. इसमें ब्राजील पारंपरिक रूप से सत्र का पहला वक्ता होगा, उसके बाद अमेरिका का नंबर आएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 23 सितंबर को यूएनजीए मंच से विश्व नेताओं को संबोधित करेंगे. यह व्हाइटहाउस में अपने दूसरे कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्र सत्र को उनका पहला संबोधन होगा. महासभा के 80वें सत्र की उच्च-स्तरीय बहस के लिए वक्ताओं कीप्रारंभिक सूची के हिसाब से भारत के शासनाध्यक्ष (HG) 26 सितंबर की सुबह सत्र को संबोधित करेंगे. ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठकइस्राइल, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शासनाध्यक्ष भी उसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस को संबोधित करेंगें. पीएम मोदी ने इससाल फरवरी में वॉशिंगटन डीसी की यात्रा की थी इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी. बैठक के बाद जारी एकसंयुक्त बयान में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर बातचीत करने की योजना कीघोषणा की थी. भारत और अमेरिका में व्यापार वार्ता चल ही रही थी कि ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया. इससमें नई दिल्ली की ओर सेरूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरक्त टैरिफ भी शामिल है. जो 27 अगस्त से लागू होगा. टैरिफ को भारत के विदेश मंत्रालय ने अनुचित औरअविवेकपूर्ण बताया था. उच्च सत्तरीय बैंठकेंभारत ने कहा’किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा. हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस के लिए वक्ताओं की सूची अभी प्रारंभिक है अगले कुछ हफ्तों में कार्यक्रमों और वक्ताओं में बदलाव कीसंभावना है संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वर्ष का सबसे व्यस्त राजनयिक सत्र माना जाने वाला यह सम्मेलन हर साल सितंबर में शुरू होता है. इस साल यहसत्र इस्राइल-हमास युद्ध और यूक्रेन संघर्ष के बीच आयोजित हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यूएनजीए सत्र के लिए न्यूयॉर्क जा सकते हैं. ऐसे में अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में आई गिरावट के बीच पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात होसकती है. ट्रंप के अलावा पीएम मोदी यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ भी उच्च स्तरीय बैठकें कर सकते हैं.
स्वतंत्रता दिवस पर मांस बिक्री पर रोक से मचा राजनीतिक घमासान, ओवैसी और अजित पवार ने बताया आज़ादी का उल्लंघन

देश के कई नगर निकायों की ओर से इस स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के आदेश के बाद एक बड़ा राजनीतिकविवाद छिड़ गया है. कई राजनेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर इस प्रतिबंध को लोगों की खान-पान की आजादी पर नकेल कसने वाला बताया है. उनका कहना है कि देश अपनी आजादी का जश्न मना रहा है और इस दौरान ही आजादी का हनन हो रहा है. हैदराबाद के सांसद औरएआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम की ओर से 15 और 16 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी) कोबूचड़खानों और मांस की दुकानों को बंद रखने के आदेश की आलोचना की. उन्होंने लिखा, ‘ऐसा लगता है कि देश में कई नगर निगमों ने 15 अगस्तको बूचड़खानों और मांस की दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया है.निर्देश किया जारीदुर्भाग्य से ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम ने भी ऐसा ही आदेश दिया है. यह कठोर और असंवैधानिक है. ओवैसी ने कहा, ‘मांस खाने और स्वतंत्रता दिवसमनाने के बीच क्या संबंध है? तेलंगाना के 99% लोग मांस खाते हैं. ऐसे फैसले मांस प्रतिबंध लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकार का उल्लंघन करते हैं. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में इसी तरह के मांस प्रतिबंध के आदेश पर उपमुख्यमंत्री अजितपवार ने आपत्ति जताई. अजित ने कहा, ‘ऐसा प्रतिबंध लगाना गलत है बड़े शहरों में विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग रहते हैं. अगर यह भावनात्मकमुद्दा है तो लोग इसे एक दिन के लिए स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन अगर आप महाराष्ट्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ऐसे आदेश लगातेहैं तो यह मुश्किल है. मुंबई के पास ठाणे स्थित कल्याण डोंबिवली नगर निगम ने भी ऐसा ही निर्देश जारी किया है. बदनाम करने की कर रहा है कोशिशशिवसेना (उद्धव गुट) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि नगर आयुक्त को निलंबित कर दिया जाना चाहिए. यह तय करना उनका काम नहीं है कि कौनक्या खाए. उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्रता दिवस पर हम क्या खाते हैं, यह हमारा अधिकार है, हमारी आजादी है. वे हमें यह नहीं बता सकते कि हमें क्या खानाचाहिए. आप हमारे घरों में क्यों घुस रहे हैं? नगर निगम को सड़कों पर गड्ढों जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना केप्रवक्ता अरुण सावंत ने कहा कि महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना-राकांपा सरकार ने मांस पर प्रतिबंध को मंजूरी नहीं दी है. उन्होंने कहा, ‘विपक्ष राज्यसरकार पर झूठे आरोप लगा रहा है और उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है.