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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संसद या विधानसभाएं बहस और चर्चा की जगह हैं, लेकिन संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए सदन को चलनेन देना ठीक नहीं है. शाह ने अखिल भारतीय सभापति सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बात कही. संसद का मानसून सत्र विपक्ष के विरोध के चलतेबार-बार बाधित हुआ और सत्र के दौरान काफी कम काम हुआ. गृह मंत्री ने यह भी कहा कि जब संसद में सीमित बहस या चर्चा होती है, तो इससे राष्ट्रनिर्माण में सदन का योगदान प्रभावित होता है. अमित शाह ने कहा ‘लोकतंत्र में बहस होनी ही चाहिए. लेकिन किसी के संकीर्ण राजनीतिक लाभ केलिए, विपक्ष के नाम पर सदन को चलने न देना ठीक नहीं है. विपक्ष को हमेशा संयमित रहना चाहिए. देश को इस पर विचार करना होगा, जनता कोइस पर विचार करना होगा और निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस पर विचार करना होगा.

लोकतांत्रिक स्थिति रही है बिगड़
शाह ने कहा कि सभी चर्चाओं में सार्थकता होनी चाहिए और सभी को अध्यक्ष पद की गरिमा और सम्मान बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा ‘हमें जनता के मुद्दों को उठाने के लिए एक निष्पक्ष मंच प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए. हमें यह सुनिश्चित करना होगाकि सदन का संचालन नियमों के अनुसार हो हस्तिनापुर में द्रौपदी के अपमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ‘जब भी सदन की गरिमा से समझौताहुआ है, देश को इसके भयंकर परिणाम देखने को मिले हैं. गृह मंत्री ने आजादी के बाद से भारत की लोकतांत्रिक परंपरा की सराहना की और कहा कि’यहां लोकतंत्र की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सत्ता परिवर्तन के दौरान खून की एक बूंद भी नहीं गिरी है, जबकि कई देशों में लोकतांत्रिक स्थिति लगातारबिगड़ रही है.

सदन का संचालन नियमों के अनुसार
शाह ने संसद के पहले निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल को भी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि ‘100 साल पहले आज ही के दिन, महान स्वतंत्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल को लोकसभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिससे भारत के विधायी इतिहास की शुरुआत हुई. शाह नेकहा कि ‘अगर देश को आजादी दिलाना अहम था तो लोकतंत्र की स्थापना और विधायी प्रक्रियाओं की स्थापना भी उतनी ही महत्वपूर्ण काम है. विट्ठलभाई पटेल ने कठिन समय में भी लोकतंत्र की स्थापना और उसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हम सभी को यह बात याद रखनीचाहिए. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा ‘हमें जनता के मुद्दों को उठाने के लिए एक निष्पक्ष मंच प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए. हमें यह सुनिश्चितकरना होगा कि सदन का संचालन नियमों के अनुसार हो.

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