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भाजपा सांसद संबित पात्रा का आरोप: यूपीए सरकार ने 2008 मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, राजनीतिक इच्छाशक्ति का था अभाव

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने शनिवार को दावा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने साल 2008 के मुंबई हमले के बाद विदेशी दबावमें पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की थी। भुवनेश्वर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि 2014 से पहलेभी भारतीय सशस्त्र बल पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह से सक्षम थे, लेकिन देश के नेतृत्व में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी।संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस के दबाव में तत्कालीन प्रधानमंत्रीमनमोहन सिंह से पाकिस्तान के खिलाफ तुरंत कार्रवाई न करने के लिए कहा होगा, जबकि मुंबई हमले में लगभग 160 लोग मारे गए थे। अपने दावेके समर्थन में, संबित पात्रा ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के एक हालिया इंटरव्यू का हवाला दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हालात बदलेउन्होंने इंटरव्यू में चिदंबरम के उस कथन का हवाला दिया, जिसमें चिदंबरम ने कहा कि ‘पूरी दुनिया पाकिस्तान के खिलाफ बदले की कार्रवाई कोरोकने के लिए नई दिल्ली आई थी।’संबित पात्रा ने कहा कि चिदंबरम के बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि वे उस समय देश के गृहमंत्री थे। पात्रा ने कहा कि, ‘2014 से पहले भी भारतीय सशस्त्र बलों में वीरता थी और वे सक्षम थे, लेकिन देश के नेतृत्व में राजनीतिक इच्छाशक्तिका अभाव था। 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हालात बदले क्योंकि देश को एक मजबूत सशस्त्र बल और मजबूत राजनीतिकइच्छाशक्ति मिली।’ पात्रा ने यह भी दावा किया कि पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि यूपीए सरकार अमेरिका से सलाह-मशविरा करने के बाद ही कैबिनेट मंत्रियों का चयन करती थी। पाकिस्तान के खिलाफ बदले की कार्रवाईभाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, ‘हम सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत कैसे मजबूत हुआ है। भारतीय सशस्त्र बलों को पूरी आजादी दी गई और ऑपरेशन सिंदूर में, हमने देखा कि कैसे एकमजबूत संदेश दिया गया। भारत के विपक्ष के नेता चार दिनों से विदेशी दौरे पर हैं और उनका एकमात्र काम भारत को बदनाम करना है। यूपीए सरकारमें पी चिदंबरम गृह मंत्री थे, और कल पूर्व मंत्री मनीष तिवारी ने खुलासे किए। यह खुलासा चिंताजनक है, यह हमें डराता है कि एक सरकार जिसेभारत की संप्रभुता की रक्षा करने की संवैधानिक जिम्मेदारी दी गई थी, वह सरकार विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बन गई।संबित पात्रा ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के एक हालिया इंटरव्यू का हवाला दिया। उन्होंने इंटरव्यू में चिदंबरम के उस कथन का हवाला दिया, जिसमें चिदंबरम ने कहा कि ‘पूरी दुनिया पाकिस्तान के खिलाफ बदले की कार्रवाई को रोकने के लिए नई दिल्ली आई थी।’

बीजेपी ने जगदीश विश्वकर्मा को गुजरात भाजपा अध्यक्ष बनाया, OBC वर्ग को लुभाने की रणनीति

भाजपा ने जगदीश विश्वकर्मा को गुजरात भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। जगदीश विश्वकर्मा ओबीसी वर्ग से आते हैं। ऐसे में उन्हें राज्यइकाई की कमान देने को भाजपा द्वारा ओबीसी वर्ग को लुभाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। गुजरात भाजपा अध्यक्ष चुनाव के लिए पार्टीके चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने गांधीनगर स्थित पार्टी मुख्यालय ‘कमलम’ में राज्य के वरिष्ठ नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं कीएक बैठक में विश्वकर्मा के नाम की आधिकारिक घोषणा की।गुजरात सरकार के मंत्री और ओबीसी नेता जगदीश विश्वकर्मा केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिलकी जगह लेंगे। सीआर पाटिल का तीन साल का कार्यकाल जुलाई 2023 में समाप्त हो गया था, लेकिन वे पद पर बने हुए थे। अहमदाबाद कीनिकोल सीट से तीन बार विधायक रहे विश्वकर्मा शुक्रवार को इस पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले एकमात्र उम्मीदवार थे। विश्वकर्मावर्तमान में गुजरात सरकार में सहकारिता, नमक उद्योग, एमएसएमई, कुटीर, खादी और ग्रामीण उद्योग राज्य मंत्री हैं। आंदोलन के दौरान निकोल में हिंसा हुईजगदीश विश्वकर्मा इससे पहले भाजपा की अहमदाबाद शहर इकाई के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। विश्वकर्मा ने गुजरात भाजपा अध्यक्षनियुक्त किए जाने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन के 10 साल पूरे होनेके मौके पर बीती 25 अगस्त को अहमबाद के निकोल में एक रैली को संबोधित किया था। अब उस रैली के करीब एक महीने बाद निकोल सेविधायक जगदीश विश्वकर्मा को गुजरात भाजपा का नया अध्यक्ष चुना गया है। निकोल एक पाटीदार बहुल इलाका है और 2015 के आरक्षणआंदोलन के दौरान निकोल में हिंसा हुई थी। उत्तरी गुजरात में पिछड़े वर्गों को अपने पक्ष में करने की कोशिशजगदीश विश्वकर्मा को केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह का बेहद करीबी माना जाता है। विश्वकर्मा, जिन्हें ‘जगदीश पांचाल’ के नामसे भी जाना जाता है, काशीराम राणा के बाद गुजरात भाजपा अध्यक्ष बनने वाले केवल दूसरे ओबीसी नेता हैं। वह अहमदाबाद शहर से राज्य में भाजपाका शीर्ष पद संभालने वाले पहले पार्टी नेता भी होंगे। उनकी नियुक्ति को भाजपा द्वारा ओबीसी मतदाताओं को लुभाने के तौर पर देखी जा रही है। यहपार्टी द्वारा मध्य और उत्तरी गुजरात में पिछड़े वर्गों को अपने पक्ष में करने की कोशिश है। संयोग से, कांग्रेस ने हाल ही में मध्य गुजरात के ओबीसी नेताअमित चावड़ा को अपना राज्य अध्यक्ष नियुक्त किया है।जगदीश विश्वकर्मा इससे पहले भाजपा की अहमदाबाद शहर इकाई के अध्यक्ष के रूप में कामकर चुके हैं। विश्वकर्मा निकोल सीट से विधायक हैं। निकोल एक पाटीदार बहुल इलाका है और 2015 के आरक्षण आंदोलन के दौरान यहां हिंसा हुईथी।

सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दाड़लाघाट में शुरू की नई दूध प्रोत्साहन योजना, किसानों के खाते में सीधे 3 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त राशि जमा

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोलन जिले के दाड़लाघाट में कामधेनु हितकारी मंच के वार्षिक समारोह में प्रदेश की महत्वाकांक्षी दूध प्रोत्साहनयोजना का शुभारंभ किया। इस योजना के लागू होने से दुग्ध उत्पादकों की आय में इजाफा होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसदाैरान सीएम ने बटन दबाकर नई दूध प्रोत्साहन योजना में सोसायटी की ओर से एकत्रित किए जा रहे दूध पर 3 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त राशिसरकार की ओर से किसानों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से डाली। ढोल-नगाड़ों और फूल मालाओं से उनका स्वागत कियाइस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले दो वर्षों में जिस परिवार की पेंशन नहीं है, उनके लिए 1500 रुपये का इंतजाम करेंगे। उन्होंने कहा किराज्य सरकार ने सीमेंट पर कोई टैक्स नहीं बढ़ाया, भाजपा के आरोप निराधार हैं। उन्होंने साधन संपन्न लोगों से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने का भीआह्वान किया। सीएम ने घोषणा की कि दाड़लाघाट में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की जाएगी। सुक्खू ने कहा कि भाजपा पांच गुटों में बंटी हुईहै और सोशल मीडिया पर उन्हें गालियां देने में व्यस्त है। भाजपा की पूर्व सरकार ने जनता की संपदा को लुटाया है।सीएम ने कहा कि सरकार एकयोजना ला रही है। इसके तहत यदि आप अपने डीजल ट्रक को इलेक्ट्रिक में बदलते हैं तो सरकार इसके लिए 40 फीसदी सब्सिडी देगी। इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शनिवार को अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत दाड़लाघाट पहुंचे, जहां लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनी राम शांडिल, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, अर्की विधायक संजय अवस्थी और दून के विधायकराम कुमार भी मौजूद रहे। लोगों ने ढोल-नगाड़ों और फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। किसानों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से डालीकामधेनु हितकारी मंच नम्होल के अध्यक्ष नानक चंद, सचिव जीत राम कौंडल, संस्थापक सदस्य डॉ. देवराज शर्मा एवं लेख राम कौंडल ने कहा किकामधेनु संस्था की स्थापना एक अक्तूबर 2001 को मात्र 10-12 किसान परिवारों और 37 लीटर दूध से हुई। 24 वर्षों की यात्रा के बाद संस्थाबिलासपुर और सोलन जिलों की 70 पंचायतों के 6000 से अधिक परिवारों से जुड़ चुकी है। कुल्लू के आनी उपमंडल और शिमला ग्रामीण के धामीक्षेत्र के लगभग 1000 परिवार भी संस्था से जुड़े हैं। संस्था प्रतिदिन 50 हजार लीटर से अधिक दूध का एकत्रीकरण कर रही है, जिसका वितरण प्रदेशके आठ जिला मुख्यालयों में किया जाता है।सीएम ने बटन दबाकर नई दूध प्रोत्साहन योजना में सोसायटी की ओर से एकत्रित किए जा रहे दूध पर 3 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त राशि सरकार की ओर से किसानों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से डाली।

पीओके में प्रदर्शनकारियों ने झुकाया पाकिस्तान सरकार को, शहबाज शरीफ ने मांगे मानीं, हिंसक प्रदर्शन समाप्त

पीओके में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को झुका दिया है। पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अधिकतर मांगें मानली हैं और समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही पीओके में बीते कई दिनों से चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन बंद हो गए। पाकिस्तान केकब्जे वाले कश्मीर में बीते कई दिनों से हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, जिनमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और सैंकड़ों घायल हुए। शनिवार को पाकिस्तान की संघीय सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच विरोध प्रदर्शनों को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससमझौते के तहत पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कई मांगें मान ली हैं। पीओके में बिगड़ते हालात को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्रीशहबाज शरीफ ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को मुजफ्फराबाद भेजा। पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ केनेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल ने लगातार दो दिनों तक गहन चर्चा की, जो बीती रात को समाप्त हुई। 20 मंत्रियों और सलाहकारों तक सीमित किया जाएगासंसदीय कार्य मंत्री तारिक फजल चौधरी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। उन्होंने लिखा कि’प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएसी) के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। प्रदर्शनकारी अपने घरोंको लौट गए हैं। सभी सड़कें फिर से खोल दी गई हैं। यह शांति की जीत है।’ विरोध प्रदर्शन समाप्त करने के लिए 25 बिंदुओं वाले एक समझौतादस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें पाकिस्तान सरकार हिंसा में मारे गए लोगों के लिए मुआवजा देगी, हिंसा की घटनाओं के लिए आतंकवाद केमामले दर्ज किए जाएंगे, जिनमें प्रदर्शनकारी मारे गए। शरीफ सरकार ने पीओके के मुजफ्फराबाद और पुंछ संभागों के लिए दो अतिरिक्त इंटरमीडिएटऔर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की। स्थानीय सरकार मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए 15 दिनों के भीतर स्वास्थ्य कार्डके लिए धनराशि जारी करेगी और संघीय सरकार द्वारा पीओके के प्रत्येक जिले में चरणबद्ध तरीके से एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें उपलब्धकराई जाएंगी। यह भी सहमति हुई कि संघीय सरकार पीओके में बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 10 अरब पाकिस्तानी रुपये देगी। जैसा किप्रदर्शनकारियों की मांग थी, उसके अनुसार, पीओके में मंत्रिमंडल का आकार घटाकर 20 मंत्रियों और सलाहकारों तक सीमित किया जाएगा, औरप्रशासनिक सचिवों की संख्या भी 20 से अधिक नहीं होगी। नेताओं के बीच बातचीत टूट गई तो हिंसासरकार के आकार को कम करने के लिए कुछ विभागों का विलय किया जाएगा। यह सहमति बनी कि पाकिस्तान सरकार नीलम घाटी सड़क केकाहोरी/कामसेर (3.7 किमी) और चपलानी (0.6 किमी) पर दो सुरंगों के निर्माण के लिए अध्ययन करेगी। साथ ही कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञोंवाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति पीओके विधानसभा के सदस्यों के मुद्दे पर विचार-विमर्श करेगी। इस बात पर भी सहमति बनी कि मीरपुर में एकअंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण के लिए कदम उठाए जाएंगे। संपत्ति के हस्तांतरण पर कर तीन महीने के भीतर पंजाब या खैबर पख्तूनख्वा के बराबरकर दिया जाएगा। समझौते की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए एक निगरानी और कार्यान्वयन समिति का गठन किया जाएगा।जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएसी) के नेतृत्व में पीओके में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने 38 बिंदुओं का एक चार्टरजारी किया था, जिसकी मांगें पूरी न होने पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरने की चेतावनी दी थी। जब 29 सितंबर को प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के अधिकारियों और नेताओं के बीच बातचीत टूट गई तो हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 10 लोग मारे गए।

जुबीन गर्ग की मौत पर बैंडमेट का बड़ा आरोप, कहा मैनेजर और आयोजक ने दिया था जहर

इन दिनों सिंगर जुबीन गर्ग की मौत को लेकर जांच चल रही है। इस दौरान सिंगर के एक बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी ने नया खुलासा किया है।पीटीआई की खबर के अनुसार शेखर ज्योति गोस्वामी ने जांच एजेंसियों को बताया है कि जुबीन गर्ग को जहर दिया गया। शेखर ज्योति गोस्वामी नेअपने बयान में जुबीन गर्ग के शो के आयोजक श्यामकानु महंत और मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसिड रिफ्लक्स बताकर खारिज कर दियापुलिस के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार जुबीन गर्ग के बैंड के साथी शेखर ज्योति गोस्वामी ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। बैंडमेट ने आरोपलगाया है कि जुबीन गर्ग को सिंगापुर में जहर दिया गया था। शेखर ज्योति गोस्वामी ने एसआईटी (SIT) को दिए गए अपने बयान में कहा कि जुबीनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और शो के आयोजन श्यामकानु महंत ने सिंगर को जहर दिया। साथ ही इस साजिश को छिपाने के लिए जानबूझकर एकविदेशी जगह को चुना। शेखर ज्योति गोस्वामी ने यह भी बताया कि मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा ने उन्हें यॉट के वीडियो शेयर करने से मना किया था। साथ हीसिंगर के बैंडमेट शेखर ने यह आरोप भी लगाया कि मैनेजर ने खुद शराब अरेंज करने पर जोर दिया था।आयोजकों को इसके लिए मना कर दिया। इसबात से ही शक बढ़ जाता है। शेखर ने कहा, ‘आखिरी पलों में जुबीन गर्ग हांफ रहे थे, मुंह और नाक से झाग निकल रहा था। लेकिन मैनेजर ने इनबातों को एसिड रिफ्लक्स बताकर खारिज कर दिया। वह कहते सुनाई दिए, ‘जाबो दे, जाबो दे’ ( जाने दो, जाने दो)। इस बयान पर आगे जांच होगी। असम सरकार ने निष्पक्ष जांच का वादावहीं दूसरी तरफ असम पुलिस ने शनिवार को सिंगापुर से आई जुबीन गर्ग की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट उनकी पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग को सौंप दी।पीटीआई के मुताबिक एसआईटी का एक अधिकारी यह रिपोर्ट सौंपने के लिए गुवाहाटी के काहिलीपारा इलाके में गरिमा के घर गया था। इससे पहलेअसम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी शुक्रवार को कहा था कि राज्य सरकार ने सिंगापुर में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट गुरुवार को गरिमा को सौंपदी है। उन्होंने कहा, ‘यह गरिमा पर निर्भर है कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करती हैं या नहीं।’सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले में एसआईटी अधिकारी मोरमी दास ने भी मीडिया से बात की है। वह कहती हैं, ‘मैंने आज गरिमा (जुबीन गर्ग कीपत्नी) और पाल्मी (जुबीन गर्ग की बहन) के बयान दर्ज किए। मैं इस समय और कोई टिप्पणी नहीं कर सकती हूं, क्योंकि जांच अभी जारी है।’सिंगर जुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग दुर्घटना में हुआ। सिंगर जुबीन, पूर्वोत्तर भारत महोत्सव के लिए सिंगापुर में थे।जुबीन गर्ग की मौत से उनके फैंस काफी दुखी हुए। सिंगर की मौत को लेकर आगे चलकर असम सरकार ने निष्पक्ष जांच का वादा किया। स्पेशलइंवेस्टिगेशन टीम भी बनी।

सौरभ भारद्वाज का आरोप भाजपा सरकार बर्बाद कर रही है सरकारी अस्पताल, दे रही निजी हाथों में

दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस बढ़ाकर शिक्षा माफियाओं को फायदा पहुंचाने के बाद भाजपा सरकार अब प्राइवेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाने केलिए सरकारी अस्पतालों को बर्बाद कर रही है। यही वजह है कि जानबूझ कर सरकारी अस्पतालों में सर्जिकल उपकरण, ग्लब्स व दवाओं की कमी कीजा रही है।उधर, स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों द्वारा दवाइयों की खरीद पर रोक लगा रखी है ,अस्पताल अधीक्षकों को अपने स्तर पर दवा खरीद कीअनुमति नहीं दी जा रही है। परिणाम स्वरूप सरकारी अस्पतालों में हाहाकार मचा हुआ है। भाजपा सुविधाओं का अभाव दिखाकर स्वास्थ्य सेवाओं कोनिजी हाथों में देना चाहती है। शनिवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने ये बातें कहीं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा नहीं मिलने पर कड़ी प्रतिक्रियाउधर, “आप” के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा नहीं मिलने पर कड़ीप्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर कहा कि भाजपा ने 6 महीनों में ही दिल्ली के अस्पतालों का क्या हाल कर दिया है? आज दिल्ली की जनता दवाई, स्ट्रेचर और ग्लव्स तक के लिए तरस रही है। ये वही दिल्ली है जहाँ अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए बड़ी मुश्किल से इन अस्पतालों को ठीककिया था और यह सुनिश्चित किया था कि किसी भी सरकारी अस्पताल में आम आदमी को दवाई बाहर से नहीं खरीदनी पड़े, लेकिन भाजपा ने 6 महीनों में सब बर्बाद कर दिया। सरकारी अस्पतालों के इतने बुरे हाल कभी नहीं“आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार को करीब आठ महीने हो गए हैं। इस समय दिल्ली केसरकारी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है। सरकारी अस्पतालों के इतने बुरे हाल कभी नहीं थे। एक समय था जब दिल्ली सरकार के अस्पतालों मेंसभी दवाइयां मुफ्त मिलती थीं, क्योंकि अरविंद केजरीवाल ने सभी दवाइयां मुफ्त कराई थीं, सभी जांच भी मुफ्त होती थीं। योजना थी कि अगरदिल्ली सरकार के अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन नहीं हो रहा या कोई जांच नहीं हो पा रही तो निजी जांच केंद्र में भेजकर मुफ्त जांच कराईजाती थी। अगर कोई ऑपरेशन समय पर सरकारी अस्पताल में नहीं हो पा रहा था, मरीजों का बोझ ज्यादा है या सर्जन उपलब्ध नहीं होते थे तो निजीअस्पताल में इलाज कराया जाता था।

Teaching RSS History in Schools a Dangerous Attempt at Hindutva Indoctrination says Devender Yadav

Delhi Pradesh Congress Committee president Shri Devender Yadav said that it was a retrograde, dangerous move by the BJP Government in Delhi to teach the 100-year history of the RSS in Delhi schools, which would be a determined attempt for Hindutva indoctrination disguised as education to poison the impressional minds of the school children, to cover up its anti-national activities, including the murder of Father of the Nation Mahatma Gandhi.Devender Yadav said that what kind of RSS history would be taught in schools as RSS had colluded with the British and Mohammad Ali Jinna to divide the country to create Pakistan, which had betrayed the freedom movement led by the Congress to kneel down before the British rulers to implement its narrow political agenda, which did not recognize the Indian Constitution and did not hoist the national flag at its Nagpur headquarters for over 51 years, and which was banned by Sardar Patel following Gandhi’s assassination in 1948, as the history of RSS was the history of the division and ruination of the country, to implement a singular agenda in a multi-cultural and diverse nation like India.RSS ideology been implemented in the countryDevender Yadav said that had the RSS ideology been implemented in the country, the country would not have been able to setup great temples of leaning like the IITs (Indian Institute of Technology), IIMs (Indian Institute of Management), AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) and ISRO (Indian Space Research Organisation) but the Congress Government took the initiative to establish these great centres of leaning to pilot the country into the orbit of development and progress, to be one among the pantheon of great economies like the developed countries. Devender Yadav said that the Rekha Gupta Government’s move to teach RSS history will ruin the future of school children in Delhi, and also the reputation of Delhi Schools, to make them narrow minded citizens which would be destructive not only for the future of the children, but also the future of the nation, He said that poisoning the young mind in their formative years with a dangerous narrative was the most destructive strategy.

भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा को श्रद्धांजलि, पार्टी मुख्यालय में शोक सभा का आयोजन

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा के निधन पर आज दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में एकशोक सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर पार्टी के शीर्ष नेताओं, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की औरउनके योगदान को याद किया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्रसचदेवा, और कई वरिष्ठ नेताओं ने सभा में भाग लिया। सभा में पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या मौजूद रही, जिन्होंने विजय कुमार मल्होत्रा जी केसाथ अपने अनुभवों को साझा किया। सभा की शुरुआत विजय कुमार मल्होत्रा के चित्र पर माल्यार्पण और मौन श्रद्धांजलि से हुई। इसके बादवक्ताओं ने उनके राजनीतिक जीवन, समाजसेवा और संगठन निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण किया। जेपी नड्डा ने कहा-“विजय कुमार मल्होत्रा जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और संगठन को समर्पित रहा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी को मजबूत किया औरजनसेवा को सर्वोपरि रखा। उनका जाना भारतीय राजनीति और भाजपा परिवार के लिए एक गहरी क्षति है।” गृह मंत्री अमित शाह ने कहा-डॉ. मल्होत्रा भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी के निर्माण तक, हर दौर में पार्टी के स्तंभ रहे। उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा करनेमें जो भूमिका निभाई, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।” विजय कुमार मल्होत्रा ने जनसंघ के दौर से राजनीति की शुरुआत की थी और वह भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। वे दक्षिण दिल्ली से कईबार लोकसभा सांसद रहे और एक बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी बनाए गए थे। उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ और अंतर्राष्ट्रीय कुश्तीमहासंघ में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्हें एक शालीन, विचारशील और संगठन-निष्ठ नेता के रूप में याद किया जाता है। सभा के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर डॉ. मल्होत्रा को अंतिम श्रद्धांजलि दी। अनेक कार्यकर्ताओं की आंखें नम थीं, जो उनकेसाथ वर्षों तक काम कर चुके थे। भाजपा नेताओं ने यह भी घोषणा की कि उनके सम्मान में पार्टी की ओर से विभिन्न जिलों में श्रद्धांजलि सभाएंआयोजित की जाएंगी। डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा का निधन भारतीय राजनीति और भाजपा संगठन के लिए एक युग का अंत है। उनके आदर्श, सादगी, समर्पण और दूरदर्शिता को हमेशा याद किया जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान भारत का विकास कोई संयोग नहीं, यह नीति और परिश्रम का फल है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भी भारत की स्थिति मजबूत है और भारतीय अर्थव्यवस्था इन बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है। वित्त मंत्री ने कहा कि दुनियाभर केदेशों के सामने अनिश्चितता का माहौल है। देशों को इस अनिश्चितता के माहौल से भी निपटना है और साथ ही व्यापार, वित्त और ऊर्जा असंतुलन काभी सामना करना एक बड़ी चुनौती है। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2025 में अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा ‘भू-राजनीतिक संघर्ष तेज हो रहे हैं।प्रतिबंध, टैरिफ और अलगाव की रणनीतियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नया आकार दे रही हैं। भारत के लिए, ये बदलाव चिंताजनक भी हैं, लेकिनसाथ ही हमारे जुझारूपन को भी उजागर करते हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलावबाहरी झटकों को झेलने की हमारी क्षमता मजबूत है और हमारी आर्थिक क्षमता भी विकसित हो रही है।’सम्मेलन में ‘अशांत समय में समृद्धि कीतलाश’ विषय पर सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ‘युद्ध और रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता, सहयोग और संघर्ष को फिर से परिभाषित कर रहीहैं। जो गठबंधन कभी मजबूत दिखते थे, उनके लिए परीक्षा का समय है और दुनिया में नए गठबंधन उभर रहे हैं।’ वित्त मंत्री ने कहा कि हम जिस चीजका सामना कर रहे हैं, वह कोई अस्थायी बाधाएं नहीं हैं बल्कि हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव होते देख रहे हैं। दुनिया में नए गठबंधन उभर रहेनिर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि ‘भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली है और लगातार बढ़ रही है। वर्षों से सकलघरेलू उत्पाद में उपभोग और निवेश की स्थिर हिस्सेदारी के साथ, भारत का विकास उसके घरेलू कारकों पर टिका हुआ है, जो बाहरी प्रभाव को कमकरता है।’ सीतारमण ने कहा, ‘भारत का उदय न तो आकस्मिक है और न ही क्षणिक; बल्कि, यह कई कारकों के एक मजबूत संयोजन का परिणामहै।’वित्त मंत्री ने कहा कि ‘युद्ध और रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता, सहयोग और संघर्ष को फिर से परिभाषित कर रही हैं। जो गठबंधन कभी मजबूत दिखते थे, उनके लिए परीक्षा का समय है और दुनिया में नए गठबंधन उभर रहे हैं।’

लद्दाख में राज्य के दर्जे की मांग के बीच सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, पत्नी ने NSA लगाने पर उठाए सवाल

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने लद्दाख प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत की गई उनकेपति की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 24 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसक झड़पों के बाद उन्हें हिरासत में लेलिया गया था। जिसके बाद से वह राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं।वांगचुक को लद्दाख में प्रदर्शनों के दो दिन बाद 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीयसुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर उसकेंद्र शासित प्रदेश में हुए विरोध प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे। वांगचुक से कोई संपर्क नहीं हो पायागीतांजलि आंगमो ने दो अक्तूबर को शीर्ष अदालत में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अपनी याचिका दायर की है। आंगमो ने सोनम वांगचुक केखिलाफ एनएसए कानून के तहत कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीचहुई झड़प के बाद लेह में भड़की हिंसा के कुछ दिनों बाद सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।आंगमो ने वकील सर्वम रीतम खरे के माध्यम सेदायर अपनी याचिका में वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी है और उनकी तत्काल रिहाई का अनुरोध किया है। याचिका में वांगचुक पर रासुका लगानेके फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं। आंगमो ने आरोप लगाया कि उन्हें अभी तक हिरासत आदेश की प्रति नहीं मिली है, जो नियमों का उल्लंघन है।इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उनका अभी तक वांगचुक से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठीइससे पहले गीतांजलि जे. आंगमो ने लद्दाख के पुलिस महानिदेशक के बयानों को झूठा और गढ़ी गई कहानी बताते हुए कहा था कि यह एक सोची-समझी साजिश है, जिसके जरिए किसी को फंसाकर मनमर्जी करने की कोशिश हो रही है। गीतांजलि ने कहा था, ‘हम डीजीपी के बयान की कड़ी निंदाकरते हैं। सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि पूरा लद्दाख इन आरोपों को खारिज करता है। ये एक बनावटी कहानी है, ताकि किसी को बलि का बकरा बनाया जासके और वे जो चाहें वो कर सकें।’उन्होंने सवाल उठाया था कि सीआरपीएफ को गोली चलाने का आदेश किसने दिया? अपने ही नागरिकों पर गोलीकौन चलाता है? खासकर वहां, जहां कभी हिंसक प्रदर्शन नहीं हुए। गीतांजलि का कहना था कि सोनम वांगचुक का इस पूरी घटना से कोई लेना-देनानहीं था। वे तो उस समय किसी और जगह शांतिपूर्वक भूख हड़ताल पर बैठे थे। वे वहां मौजूद ही नहीं थे, तो वे किसी को कैसे उकसा सकते हैं?अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करके जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया गया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहतपूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटा गया। इसमें जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासितप्रदेश बनाया गया। वहीं, लद्दाख को बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। इस बदलाव के तहत जम्मू कश्मीर में पिछलेसाल नई विधानसभा का भी गठन हो गया। वहीं, दूसरी ओर राज्य पुनर्गठन के साथ ही लद्दाख में इस केंद्र शासित प्रदेश को छठी अनुसूची में शामिलकरने और इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठने लगी। इसे लेकर अलग-अलग समय पर प्रदर्शन हुए। इन्हीं मांगो को लेकर चल रहे ताजा प्रदर्शनके दौरान हिंसा भड़क उठी।