लोकगायिका से लोकनेता? मैथिली ठाकुर की बीजेपी नेताओं संग मुलाकात से अटकलें तेज़

बिहार को लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर को लेकर चर्चा है कि वे 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। यह चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि उन्होंने बीजेपी के नेताओं से मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान उनके पिता भी साथ में थे। विनोद तावड़े और नित्यानंद राय के साथ जबसे उनकी तस्वीर सामने आई है चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। दरअसल, विनोद तावड़े ने बीते रविवार को अपने एक्स हैंडल सेतस्वीरें शेयर कर लिखा कि वर्ष 1995 में बिहार में लालू राज आने पर जो परिवार बिहार छोड़कर चले गए, उस परिवार की बिटिया सुप्रसिद्ध गायिकामैथिली ठाकुर जी बदलते बिहार की रफ्तार को देखकर फिर से बिहार आना चाहती हैं। आज गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय जी और मैंने उनसे आग्रहकिया कि बिहार की जनता के लिए और बिहार के विकास के लिए उनका योगदान बिहार का सामान्य आदमी अपेक्षित करता है और वे उनकीअपेक्षाओं को पूरा करें। बिहार की बिटिया मैथिली ठाकुर जी को अनंत शुभकामनाएं! बला में अपने दादा और पिता द्वारा प्रशिक्षितविनोद तावड़े के इस पोस्ट से संकेत मिल रहा है कि मैथिली चुनाव लड़ सकती हैं। मैथिली ठाकुर ने भी एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है, “जोलोग बिहार के लिए बड़े सपने देखते हैं, उनके साथ हर बातचीत मुझे दूर दृष्टि और सेवा की शक्ति की याद दिलाती है। हृदय से सम्मानित और आभारीहूं. श्री नित्यानंद राय जी एवं श्री विनोद श्रीधर तावड़े जी।” मैथिली ठाकुर मधुबनी के बेनीपट्टी की रहने वाली हैं। चुनाव आयोग द्वारा मैथिली ठाकुरको बिहार का ‘स्टेट आइकॉन’ भी नियुक्त किया गया था। भारतीय शास्त्रीय और लोक संगीत में प्रशिक्षित मैथिली ठाकुर को 2021 के लिए बिहार केलोक संगीत में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए चुना गया था। मैथिली ठाकुर अपनेदो भाइयों के साथ लोक, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, हारमोनियम और तबला में अपने दादा और पिता द्वारा प्रशिक्षित की गई हैं।
गिल में है नेचुरल लीडरशिप वनडे कप्तानी पर बोले मोंटी, मिलेगा भारत को फायदा

इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने शुभमन गिल को टेस्ट के बाद भारतीय वनडे टीम की कप्तानी सौंपने के फैसले की सराहना की है। पनेसर ने इसेमास्टरस्ट्रोक बताया है और कहा कि गिल नेचुरल लीडर हैं जो जिम्मेदारी मिलने पर उभर जाते हैं। हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) ने इस महीने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली सीमित ओवरों की सीरीज के लिए गिल को वनडे टीम का कप्तान नियुक्त किया था।गिल ने रोहित शर्मा की जगह ली थी जिनके नेतृत्व में भारत ने इस साल चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। भारत को 19 अक्तूबर से ऑस्ट्रेलिया केखिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलनी है और इसके बाद दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। मुख्य चयनकर्ता अजीतअगरकर ने कहा था कि उन्होंने खुद रोहित को टीम प्रबंधन के फैसले की जानकारी दी थी। जिम्मेदारी मिलने पर अच्छा प्रदर्शन करतेरोहित की जगह गिल को कप्तान बनाए जाने से फैंस काफी आश्चर्य हो गए थे और इसे लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी।पनेसर ने हालांकि, भारतीय टीम प्रबंधन के इस कदम का स्वागत किया है और कहा कि लीडरशीप भूमिका गिल के लिए सही है। पनेसर ने कहा, मुझेलगता है कि यह एक बेहतरीन फैसला है क्योंकि मुझे गिल ने वाकई अच्छा प्रदर्शन किया है। रोहित शर्मा के रहते उन्हें कप्तान बनाना, उन्हें सीरीज केदौरान मदद और मार्गदर्शन दे सकता है। यह वाकई एक अच्छा कदम है। हमने इंग्लैंड में देखा है कि वह एक स्वाभाविक कप्तान हैं। जब आप शुभमनगिल को जिम्मेदारी देते हैं, तो आप उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देखते हैं। मुझे लगता है कि हम वनडे सीरीज में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देखेंगे। मुझे हैरानीनहीं होगी अगर उन्हें टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की कप्तानी भी दी जाए क्योंकि मुझे लगता है कि वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो जिम्मेदारी मिलने पर अच्छाप्रदर्शन करते हैं। हमारा लक्ष्य दक्षिण अफ्रीका में होने वाला विश्व कपदूसरी तरफ, गिल भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और उनकी नजरें 2027 वनडे विश्व कप पर टिकी हैं। इस बड़े आयोजन से पहले भारत के लगभग20 वनडे मैच खेलने की उम्मीद है और नए कप्तान का लक्ष्य प्रतिष्ठित ट्रॉफी के साथ स्वदेश लौटना है। गिल ने हाल ही में बीसीसीआई के एकवीडियो में कहा था, अपने देश की वनडे टीम की कप्तानी करना और एक ऐसी टीम का नेतृत्व करना जो अच्छा प्रदर्शन कर रही है, मेरे लिए सबसे बड़ासम्मान है। यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। मुझे उम्मीद है कि मैं अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगा। मुझे लगता है कि विश्व कप से पहले हमारे पासलगभग 20 वनडे मैच हैं और जाहिर है कि हमारा लक्ष्य दक्षिण अफ्रीका में होने वाला विश्व कप है।
जयपुर SMS अस्पताल में भीषण अग्निकांड, ICU में लगी आग से 8 मरीजों की मौत, देश भर में शोक प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने जताया दुख, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

जयपुर में कल देर रात सवाई मान सिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू वार्ड में अचानक लगी आग से आठ मरीजों की मौत के बादप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि “जयपुर, राजस्थान के अस्पताल में आग की त्रासदी के कारण लोगोंकी जान जाना अत्यंत दुखद है। जिन्होंने अपने प्रियजन खोए हैं, उन्हें मेरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”अस्पताल पहुंचेमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा कि जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटनाअत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों एवं अधिकारियों से जानकारी ली और त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मरीजोंकी सुरक्षा, इलाज और प्रभावित लोगों की देखभाल के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभु श्रीरामदिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें। राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है और उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धहै। जनहानि का समाचार अत्यंत दु:खद और पीड़ादायकहादसे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के ICU में आग लगने से सात लोगों की मृत्यु बहुत दुखी करनेवाली है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि इस हादसे में कम से कम जनहानि हो। प्रभु दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं घायलों कोशीघ्र स्वस्थ करें। साथ ही यह भी कहा है कि राज्य सरकार इस घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाकर यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में कहीं भी ऐसेहादसों की पुनरावृत्ति न हो सके। इधर प्रदेश की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी एक्स पर लिखा है कि जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में आगलगने की हृदय विदारक घटना में मरीजों की जनहानि का समाचार अत्यंत दु:खद और पीड़ादायक है। गहरी संवेदना व्यक्त करती हूंईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। प्रभु श्रीराम हादसे मेंघायल हुए नागरिकों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें । नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने शोक संदेश में कहा कि एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमासेंटर के ICU में आग लगने से 3 महिलाओं सहित 8 लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। इस भीषण घटना ने मन कोझकझोर कर रख दिया है, हृदय अत्यंत व्यथित है। मेरी गहरी संवेदनाएं दिवंगतों के परिजनों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्माओंको अपने श्रीचरणों में एवं शोकाकुल परिजनों को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामनाकरता हूं। अभी जयपुर जिला कलेक्टर से घटना की पूरी जानकारी ली है और थोड़ी ही देर में SMS अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंच रहा हूं। हादसे कोलेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में सरकार नाम की चीज नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री अब तक सो रहे हैं। डोटासरा ने कहाकि ये सरकार किसी काम की नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मंत्री निजी कंपनियों को क्लीन चीट देने में लगे हैं।
1956 में कांग्रेस ने बेचा था खनन मंत्रालय” BJP सांसद निशिकांत दुबे का बड़ा आरोप, राहुल गांधी पर बोला सीधा हमला

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने साल 1956 में खनन औरपेट्रोलियम मंत्रालय बेच दिया था। भाजपा सांसद ने कहा कि तत्कालीन खनन मंत्री केडी मालवीय ने यह मंत्रालय सेराजुद्दीन एंड कंपनी नाम की खननकंपनी को सौंप दिया था। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ दस्तावेज साझा करते हुए कहा कि सेराजुद्दीन एंड कंपनी उससमय मैंगनीज अयस्क की बड़ी ठेकेदार कंपनी थी और उसे बेहद फायदे वाले खनन पट्टे मिले थे।भाजपा सांसद ने लिखा, ‘राहुल गांधी की पार्टी की करतूतें बेमिसाल हैं, तभी तो कांग्रेस पार्टी के पास बेहिसाब संपत्ति है। 1956 में प्रधानमंत्रीजवाहरलाल नेहरू जी ने खुद लोकसभा में माना था कि मंत्रालय सेराजुद्दीन को बेचा गया था।’ कांग्रेस के पुराने शासनकाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गईनिशिकांत दुबे ने आगे कहा कि केडी मालवीय पर सुप्रीम कोर्ट के जज एसके दास ने जांच की थी, और उनके खिलाफ चार चार्जशीट दाखिल हुई थीं।इसके बाद उन्होंने 1963 में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1977 में केडी मालवीय को मुंबई हाई ऑयल स्कैम केमामले में जेल भेजा गया था, लेकिन 1980 में कांग्रेस सरकार ने वह केस वापस ले लिया ताकि ‘गांधी परिवार के भ्रष्टाचार का पर्दां न उठे।’ भाजपानेता के इन आरोपों से एक बार फिर कांग्रेस के पुराने शासनकाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी, यह आपकी पार्टी का असली संविधाननिशिकांत दुबे ने इससे पहले 3 अक्तूबर को भी कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि 1975 में इंदिरा गांधी के शासन में जयपुर कीमहारानी गायत्री देवी और उनके बेटे कर्नल भवानी सिंह को जेल भेजा गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ‘इंदिरा गांधी, महारानी गायत्री देवी कीसुंदरता से ईर्ष्या करती थीं। इसलिए उन्हें और उनके बेटे को 1975 में ड्रग्स, हवाला और हथियारों की तस्करी जैसे झूठे आरोपों में जेल में डाल दियागया।’भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, उन्होंने दावा किया है कि कांग्रेस ने 1956 में खनन मंत्रालय को बेच दियाथा। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए कहा, ‘राहुल गांधी, यह आपकी पार्टी का असली संविधान है, इसे आप कोलंबिया में जाकरभी बताइए।’
वी.के. मल्होत्रा सेवा, सिद्धांत और समर्पण का जीवंत प्रतीक जनसंघ से भाजपा तक विजय कुमार मल्होत्रा का प्रेरणादायक सफर

कुछ दिन पहले, भारतीय जनता पार्टी परिवार ने अपने सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक, विजय कुमार मल्होत्रा जी को खो दिया। उन्होंने अपने जीवन मेंबहुत-सी उपलब्धियां हासिल कीं। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण ये है कि उन्होंने कठोर परिश्रम, दृढ़ निश्चय और सेवा से भरा जीवन जिया। उनके जीवनको देखकर समझा जा सकता है कि आरएसएस, जनसंघ और भाजपा के मूल संस्कार क्या हैं।विपरीत परिस्थितियों में साहस का प्रदर्शन, स्वयं से ऊपरसेवा भावना, साथ ही राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता उनके व्यक्तित्व की बहुत बड़ी पहचान रही। वीके मल्होत्रा जी के परिवारने विभाजन का भयावह दौर झेला। उस आघात और विस्थापन ने उन्हें कड़वा या आत्मकेंद्रित नहीं बनाया। इसके बजाए, उन्होंने स्वयं को दूसरों कीसेवा में समर्पित कर दिया। उन्हें आरएसएस और जनसंघ की विचारधारा में राष्ट्रसेवा का रास्ता नजर आया। बंटवारे का वो समय बहुत चुनौतीपूर्ण था।मल्होत्रा जी ने सामाजिक कार्यों को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। उन्होंने उन हजारों विस्थापित परिवारों की मदद की, जिन्होंने सब कुछ खो दियाथा। उनका जीवन संवारने और उन्हें फिर से खड़े होने में मदद की। यही जनसंघ की प्रेरणा थी। उन दिनों उनके साथी मदनलाल खुराना जी औरकेदारनाथ साहनी जी भी बढ़-चढ़कर सेवा कार्यों में शामिल होते थे। उन लोगों की निस्वार्थ सेवा को आज भी दिल्ली के लोग याद करते हैं। सिख समुदाय के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहे1967 के लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव तब अपराजेय मानी जाने वाली कांग्रेस के लिए चौंकाने वाले रहे थे। इसकी बहुत चर्चाहोती है, लेकिन एक कम चर्चित चुनाव भी हुआ। वो था, दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल का पहला चुनाव। राष्ट्रीय राजधानी में जनसंघ ने शानदारजीत दर्ज की। आडवाणी जी काउंसिल के चेयरमैन बने और मल्होत्रा जी को चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर की जिम्मेदारी दी गई, जो मुख्यमंत्री केलगभग बराबर का पद था। तब उनकी उम्र केवल 36 वर्ष थी। उन्होंने अपने कार्यकाल को दिल्ली की जरूरतों, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों सेजुड़े मुद्दों पर फोकस किया। उन्होंने 1960 के दशक में गौ रक्षा आंदोलन में भी हिस्सा लिया, जहां उनके साथ पुलिस की ज्यादतियां भी खूब हुईं।आपातकाल विरोधी आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। जब सिखों का बेरहमी से कत्लेआम हो रहा था, तब वे सिख समुदाय के साथ पूरीमजबूती से खड़े रहे। आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहेराजनीति, वीके मल्होत्रा जी के व्यक्तित्व का केवल एक पहलू थी। वो एक उत्कृष्ट शिक्षाविद भी थे। उन्होंने स्कूल में डबल प्रमोशन हासिल किया।मैट्रिक और ग्रेजुएशन निर्धारित समय से पहले पूरी कर ली। उनकी हिंदी पर इतनी अच्छी पकड़ थी कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भाषणों का हिंदीअनुवाद प्रायः वही करते थे। वे आरएसएस से जुड़ी कई संस्थाओं के संस्थापक और संरक्षक रहे। उनके मार्गदर्शन में बनी संस्थाएं प्रतिभा और सेवा कीपाठशालाएं बनीं। उन्होंने एक ऐसे समाज का विजन दिया, जो आत्मनिर्भर हो और मूल्यों पर टिका हो। उन्होंने खेल जगत में भी अमिट छाप छोड़ी।तीरंदाजी उनका गहरा शौक था और वो कई दशकों तक आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहे।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर कांग्रेस का कड़ा पलटवार, कहा अभिव्यक्ति की आजादी संवैधानिक है अधिकार

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अभिव्यक्ति की आजादी वाले बयान पर कांग्रेस पार्टी ने पलटवार किया है। कांग्रेस ने कहा है कि अभिव्यक्ति की आजादीसंवैधानिक अधिकार है और इसे नहीं छीना जा सकता।दरअसल किरेन रिजिजू ने अपने एक बयान में आरोप लगाया कि देश को तोड़ने की बात करनाअभिव्यक्ति की आजादी नहीं है। किरेन रिजिजू के बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘अभिव्यक्ति कीआजादी एक संवैधानिक अधिकार है और इसे नहीं हटाया जा सकता। यह कोई बिहार की वोटर लिस्ट नहीं है, जिसे चुनाव आयोग हटा देगा। अगरअभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार नहीं होता तो किरेन रिजिजू को भी कोई बयान देने में मुश्किल होती। आप जो भी कह रहे हैं वो इसलिए क्योंकिदेश में अभिव्यक्ति की आजादी है।’ माओवादियों का समर्थन करना चाहिएएक दिन पहले ही एक इंटरव्यू में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर देशविरोधी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि’हमारे देश में, जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हैं, वे जम्मू कश्मीर और उत्तर पूर्व को देश से तोड़ना चाहते हैं। क्या ये ही उनकीअभिव्यक्ति की आजादी है? उन्हें उन अधिकारों को सुरक्षित करने की बात करनी चाहिए, जो संविधान में दिए गए हैं, न कि देश को तोड़ने की बातकरनी चाहिए। न कि माओवादियों का समर्थन करना चाहिए और न ही अनुच्छेद 370 का बचाव करना चाहिए।’ कश्मीर और उत्तर पूर्व को देश से तोड़ना चाहतेकिरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को राजनीतिक मंच का इस्तेमाल पीएम मोदी पर निजी हमले के लिए नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि’सुबह से लेकर शाम तक ये लोग प्रधानमंत्री मोदी को गालियां देते हैं और कहते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी को खत्म किया जा रहा है। दरअसल वेअभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का गलत इस्तेमाल करना चाहते हैं और देश को तोड़ना चाहते हैं।’केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू नेकांग्रेस पर देशविरोधी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ‘हमारे देश में, जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हैं, वे जम्मूकश्मीर और उत्तर पूर्व को देश से तोड़ना चाहते हैं।’
आंध्र प्रदेश के आदिवासी स्कूल में दूषित पानी से दो छात्राओं की मौत, पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू सरकार को लापरवाही का दोषी ठहराया

आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मन्यम जिले के कुरुपम गर्ल्स जनजातीय गुरुकुल स्कूल में दूषित पानी पीने से दो आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई औरसैकड़ों छात्राएं बीमार हो गईं। इस घटना ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने इस हादसे के लिए चंद्रबाबू नायडू की गठबंधन सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार की घोर लापरवाही ने मासूमबच्चियों की जान ले ली। पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि कुरुपम गर्ल्स जनजातीय गुरुकुल स्कूल में लगा आरओ प्लांट कुछ समय पहले गिरगया था, जिसके बाद छात्राओं को दूषित पानी पीना पड़ा। इसी कारण स्कूल में पीलिया फैल गया। चार दिनों के भीतर दो बच्चियों की मौत हो गईऔर कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्होंने सवाल उठाया, ‘क्या यही जिम्मेदार सरकार का रवैया है? मुख्यमंत्री और मंत्री क्या कर रहे हैं जब गरीबबच्चियां मर रही हैं? क्या उन्हें आदिवासी बेटियों का दर्द दिखाई नहीं दे रहा?’ छात्राओं से मुलाकात की और सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार बतायाउन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे लोकेश, जो शिक्षा मंत्री हैं, ने निजी हितों के लिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोरकर दिया है। जगन ने कहा, ‘आपकी नीतियों के कारण करीब 5 लाख बच्चे सरकारी स्कूल छोड़ चुके हैं।’ उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार लापरवाही, जैसे होस्टल में फूड प्वाइजनिंग, आरओ प्लांट की खराबी, और असुरक्षित स्कूल परिस्थितियां, अब आम बात बन गई हैं। उन्होंने कहा, ‘इन निर्दोषबच्चियों की मौतें सरकार की सीधी हत्या हैं।’ जगन ने मुख्यमंत्री नायडू से नैतिक जिम्मेदारी लेने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की।साथ ही उन्होंने कहा, ‘सरकार तुरंत जागे, स्कूलों में सुरक्षित सुविधाएं बहाल करे और मृत छात्राओं के परिवारों को प्रत्येक को 25 लाख रुपये कामुआवजा दे।’ इधर वाईएसआरसीपी नेताओं ने पार्वतीपुरम जिले के आदिवासी आवासीय स्कूलों में फैल रहे स्वास्थ्य संकट पर गहरी चिंता जताई। पूर्वउपमुख्यमंत्री पुष्पा श्रीवाणी, अराकू सांसद तानूजा रानी, पूर्व विधायक राजन्ना डोरा और जिला परिषद अध्यक्ष माजी चिन्ना श्रीनु ने किंग जॉर्जहॉस्पिटल (केजीएच) में भर्ती छात्राओं से मुलाकात की और सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार बताया। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांगउन्होंने बताया कि अनजली और कल्पना नाम की दो छात्राओं की मौत हो चुकी है, जबकि 120 से अधिक बच्चियां अस्पताल में भर्ती हैं। इस मुख्यकारण दूषित पानी, खराब सफाई व्यवस्था, और बंद पड़े आरओ प्लांट्स है। पुष्पा श्रीवाणी ने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार के समय लगाए गएआरओ प्लांट्स महीनों से खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत नहीं हुई। उन्होंने कहा, ‘छात्राओं को मजबूर होकर असुरक्षित पानी पीना पड़ा। सरकारजिम्मेदारी लेने के बजाय निचले कर्मचारियों को निलंबित कर मामला दबा रही है।’ उन्होंने यह भी बताया कि होस्टलों में पंखे, मच्छरदानी जैसी मूलभूतसुविधाएं नहीं हैं, और सफाई कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला। अराकू की सांसद तानूजा रानी ने कहा कि 129 छात्राएं फिलहालपीलिया से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा, ‘बार-बार चेतावनी देने के बावजूद सरकार ने न तो शुद्ध पानी की व्यवस्था की, न ही डॉक्टरों की टीम भेजी।’ उन्होंनेआरोप लगाया कि जनजातीय कल्याण मंत्री सिर्फ मीडिया दबाव के बाद स्कूल पहुंचे और प्रशासन को बचाने के लिए उलझी बातें कर रहे हैं।वाईएसआरसीपी नेताओं ने कहा कि यह हादसा गठबंधन सरकार के पिछले 15 महीनों में आदिवासी कल्याण की पूरी तरह विफलता को दिखाता है।उन्होंने तुरंत कदम उठाने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
मलयेशिया दौरे पर पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने साझा बयान में शेर सुनाया, मलयेशियाई पीएम ने हंसकर टाला मोमेंट

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मलयेशिया के आधिकारिक दौरे पर हैं। सोमवार को पाकिस्तानी पीएम ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान, मलयेशिया के साथ साझा हितों वाले प्रोजेक्ट्स पर सहयोग करना चाहता है। हालांकि मलयेशियाई पीएम के साथ साझा बयान जारी करते समयशहबाज शरीफ कुछ ऐसा कर गए, जिसके लिए उनकी आलोचना हो रही है। दरअसल साझा बयान में शहबाज शरीफ शेर सुनाते नजर आए औरउन्होंने संयुक्त बयान जैसे गंभीर इवेंट को भी मुशायरे में तब्दील कर दिया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 5 अक्तूबर से 7 अक्तूबर तकमलयेशिया के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरे पर रविवार को पाकिस्तानी पीएम ने मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बैठककी। इस बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त साझा बयान जारी किया। इस दौरान पाकिस्तानी पीएम ने अल्लामा इकबाल का एक शेर सुनाया, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुद बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है…’। मलयेशिया के पीएम ही बात को हंसकर टाल गएपाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ का मलयेशिया दौरा किसी अहम समझौते को लेकर चर्चा में नहीं है लेकिन पाकिस्तानी पीएम की अजीब हरकतोंके चलते चर्चा में बना हुआ है। पहले जहां पाकिस्तानी पीएम मलयेशियाई पीएम के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में मुशायरा करते नजर आए, वहींमलयेशियाई पीएम के साथ द्विपक्षीय बातचीत में फटे हुए कागज से पढ़कर अपना संबोधन देते दिखाई दिए। फटे कागज से पढ़ते हुए संबोधन देतेहुए पाकिस्तानी पीएम कैमरों में कैद भी हुए, जिसके लिए उनका खूब मजाक भी बनाया जा रहा है। पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ का मलयेशियादौरा किसी अहम समझौते को लेकर चर्चा में नहीं है लेकिन पाकिस्तानी पीएम की अजीब हरकतों के चलते चर्चा में बना हुआ है। जिस वक्तपाकिस्तानी पीएम ये शेर सुना रहे थे तो वहां मौजूद लोग अचरज भरी निगाहों से उन्हें देख रहे थे क्योंकि उन्हें पाकिस्तानी पीएम की बात समझ ही नहींआ रही थी। पाकिस्तानी पीएम ने इसका मतलब समझाने की बात कही तो मलयेशिया के पीएम ही बात को हंसकर टाल गए, जिससे पाकिस्तानीपीएम झेंप गए।
उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न बढ़ा, राजेंद्र पाल गौतम ने योगी सरकार पर लगाया संरक्षण और असंवेदनशीलता का आरोप “जानें क्या कुछ कहा”

राजेन्द्र पाल गौतम ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा – नमस्कार साथियों। आज बेहद गंभीर मुद्दे पर हम आप लोगों से बात करने के लिए आएहैं। आप सबको पता है कि उत्तर प्रदेश के अंदर पिछले लगभग 10 वर्षों से दलितों के ऊपर क्रूरतम शारीरिक हमले हुए हैं, हत्या हुई हैं, सामाजिकबहिष्कार की घटनाएं हुई हैं और संस्थागत भेदभाव, लगातार 10 वर्षों में दलित उत्पीड़न बहुत तेजी से उत्तर प्रदेश के अंदर बढ़ा है।पूरे देश के पांचराज्य जहां बीजेपी की सरकार है, वो दलित उत्पीड़न के मामले में टॉप पर हैं। पांच राज्यों में दलित उत्पीड़न की 75% घटनाएं बीजेपी शासित पांचराज्यों में घटी हैं। उनमें से अकेले उत्तर प्रदेश के अंदर 26.2% दलित उत्पीड़न की घटनाएं हुई हैं और यह एनसीआरबी का डाटा है, कोई मेरा बनायाहुआ डाटा नहीं है। अभी मैं आपको एक वीडियो दिखाता हूं। (वीडियो दिखाया गया) यह रायबरेली की घटना है. आपने ये वीडियो देखा होगा जैसे हीउसको बुरी तरह चारों तरफ से ये लोग पीट रहे हैं हमलावर, तो वो व्यक्ति राहुल गांधी जी का नाम लेता है। तो वो सभी लोग उसका मजाक उड़ाते, कहते हैं- ओहो, राहुल गांधीवादी, लेकिन यहां तो सब बाबावादी हैं। तो क्या बाबावादी इस उत्तर प्रदेश के अंदर, यहां की सरकार का इस देश केसंविधान में और कानून में भरोसा नहीं है? क्या उत्तर प्रदेश के अंदर अब न्यायालयों की, जांच एजेंसियों की, पुलिस की कोई जरूरत नहीं है? क्या वहांदरिंदों को खुलेआम लोगों की हत्या करने की छूट दे दी गई है? बात-बात पर बुलडोज़र चलाने वाले योगी जी, वो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस केद्वारा डायरेक्शन देने के बाद भी उसको भी नहीं मानते। समाज को कई प्रकार से अपमानित और प्रताड़ित करने की घटनाएंआपने देखा होगा एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डायरेक्शन दे रहे हैं और कह रहे हैं – आप पर कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट होगी, आप इस तरह नहीं करसकते, किसी पर इस तरह बुलडोज़र नहीं चला सकते। लेकिन आपने पिछले दिनों देखा जिस दिन स्टेटमेंट आई, उसी दिन बुलडोजर चला। तो इसमेंजिस तरह दलितों की लगातार उत्तर प्रदेश के अंदर घटनाएं बढ़ रही हैं। क्या दलितों पर उत्पीड़न करने वाले लोगों को भारतीय जनता पार्टी और योगीजी का पूरा संरक्षण प्राप्त है। क्योंकि मैं आपको बताता हूं कुछ घटनाएं अभी लेटेस्ट 2025 की। एक तो यह रायबरेली की घटना तो अभी दो-तीन कीरात की है। हापुड़ में 5 अक्टूबर 2025 को दलितों के धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उनके ऊपर पथराव किया, हमला किया। मैनपुरी में सितंबर में ही2025 में दलित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया। प्रयागराज के अंदर हिरासत में दलित युवक को पुलिस के अधिकारियों ने पीट-पीट करमार डाला। अमरोहा में तलवार के द्वारा हमला किया गया दलितों पर। प्रयागराज के अंदर अप्रैल 2025 में एक दलित युवक की हत्या की और शवको जला दिया। एटा में दबंगों ने दलित परिवार की शादी पर हमला किया और दूल्हे सहित अन्य लोगों को घायल किया। मुरादाबाद में मार्च 2025 में 14 वर्षीय दलित लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार। अयोध्या में फरवरी 2025 में एक दलित परिवार की बेटी का निर्वस्त्र शव मिला और आंखेंफोड़ दी गईं। मेरठ में दलित बारात पर हमला मार्च 2025 में। सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में दलित विरोधीघटनाएं बढ़ी हैं।तो एक तरफ दलितों की लगातार बारात पर हमले, दलित बेटियों के साथ सामूहिक बलात्कार करके हत्या, दलित युवाओं की खुलेआम हत्या औरसाथ ही साथ उनको दूसरे तरीके से भी अपमानित किया जा रहा है जब वो पुलिस के पास कार्रवाई के लिए जाते हैं तो पुलिस कोई कार्रवाई नहींकरती, संस्थागत भेदभाव हो रहा है और दूसरी तरफ इस तरह की भी घटनाएं आ रही है कि डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर, जिसको दलित समाज के लोगअपना भगवान मानते हैं। लगातार उत्तर प्रदेश के अंदर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जी की मूर्तियों को तोड़ना, तथागत गौतम बुद्ध की मूर्तियों को तोड़ना, उन पर कालिख लगाना… यानी उस समाज को कई प्रकार से अपमानित और प्रताड़ित करने की घटनाएं लगातार उत्तर प्रदेश के अंदर बढ़ी हैं।रायबरेली के अंदर बुरी तरीके से मारा गयातो सवाल यह है कि खुलेआम जिस तरह उत्तर प्रदेश के अंदर दलितों की खुलेआम दिन दहाड़े हत्या की जा रही हैं, मॉब लिंचिंग की जा रही हैं… क्याउत्तर प्रदेश की सरकार कानून व्यवस्था में पूरी तरह विफल हो गई है? क्या योगी जी ने ऐसे दरिंदों को खुली छूट दे दी है? क्या इन दरिंदों को योगी जीका संरक्षण प्राप्त है? क्या योगी जी की सरकार को और उनके गुंडों को कानून के ऊपर संविधान के ऊपर भरोसा नहीं है? क्या उत्तर प्रदेश मेंन्यायालयों की भी जरूरत नहीं है? क्या बिना किसी जांच के किसी को एट साइट सजा देने के लिए खुली छूट दरिंदों को दे दी गई है? इन सवालों काजवाब उत्तर प्रदेश की सरकार को देना पड़ेगा।एनसीआरबी का जो डाटा 2023 का है, क्योंकि उसके बाद का कोई डाटा अभी तक इन्होंने रिलीज नहींहोने दिया। वो डाटा बताता है टोटल एट्रोसिटी के 57,789 केस 2023 में रिपोर्ट हुए। उनमें से अकेले उत्तर प्रदेश के अंदर 15,130, यानी कि26.2% केस रजिस्टर्ड हुए। और आप देखेंगे रेट ऑफ क्राइम अगेंस्ट एससी पर लाख, यानी प्रति 1 लाख पर 28.7 दलितों के साथ उत्पीड़न कीघटनाएं हो रही हैं और उसमें नेशनल एवरेज में भी उत्तर प्रदेश टॉप पर है। राजस्थान में 8,449, मध्य प्रदेश में 8,232, बिहार में 7,159, तो येअसॉल्ट, सेक्सुअल वायलेंस, मर्डर, लैंड डिस्प्यूट, सोशल बॉयकॉट, अब्यूज, इंटिमीडेशन, इस तरह की घटनाएं लगातार उत्तर प्रदेश के अंदर घट रहीहैं। यह किस तरह गर्दन पर पैर रखकर और इस हरिओम नामक एक दलित युवक को दो और तीन की रात को रायबरेली के अंदर बुरी तरीके से मारागया और जब उसने अपने मुंह से राहुल गांधी नाम बोला, तो उसका मजाक उड़ाते हुए कहते – ओहो राहुल गांधीवादी, यहां तो सब बाबावादी हैं।
छठ जैसे पर्व की तरह मनाएं लोकतंत्र का उत्सव, मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिहार में मतदाताओं को किया संबोधित

भोजपुरी में बिहार के मतदाताओं का अभिवादन करते हुए देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को पटना में कहा कि जिस तरह हमअपने पर्व-त्योहारों और विशेष रूप से लोक आस्था के महापर्व छठ को मनाते हैं, उसी तरह से बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान को उत्साह के साथमनाएं। उन्होंने मतदान की तारीखों पर फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी, लेकिन यह जरूर कहा कि 22 नवंबर से पहले चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्नकरा ली जाएगी। जो प्रत्याशी खड़े हों, वह पोलिंग एजेंट्स जरूर दें। मॉक पोल अपनी आंखों के सामने जरूर देखने कहें। मतदान के खत्म होते समयपोलिंग एजेंट्स फॉर्म 17सी भी ले लें। जिन लोगों को नगर निगम ने मकान का कोई नंबर तय नहीं किया है, वहां एक ही मकान में कई लोगों के नंबरमतदाता सूची में दर्ज होने की आशंका रहती है। क्योंकि, कुछ चिह्नित करने के लिए बीएलओ यह करते हैं। चुनाव के पहले पुनरीक्षण हर बार होता है, इसलिए उसे चुनाव के बाद कराने की मांग का कोई अर्थ नहीं है। बिहार के एसआईआर में दावा-आपत्ति का पूरा अवसर दिया गया। इस प्रक्रिया कीदेखरेख के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपने बूथ लेवल एजेंट्स दिए थे। एसआईआर में अब भी समय है कि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल कोऐसा लगता है कि योग्य मतदाता छूट गया है या अयोग्य मतदाता का नाम सूची में है तो वह दावा-आपत्ति कर सकता है। उनके दावे-आपत्ति कानिपटारा ईआरओ स्तर से हो जाएगा।15 दिनों के अंदर ईपिक मिल जाएगाजिनके वोटर कार्ड के डाटा में कोई परिवर्तन होगा, उन्हें 15 दिनों के अंदर ईपिक मिल जाएगा। वोटर की जांच किस तरह करनी है, उसी के तहत जांचकी गई है। जिन लोगों ने मतदाता सूची के लिए नामांकन भरा होगा, वह आधार देने के लिए बाध्य नहीं हैं। चुनाव आयोग, आधार अथॉरिटी के नियमऔर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आधार न जन्मतिथि और न ही नागरिकता का प्रमाणपत्र है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया तो हमने पुनरीक्षण मेंआधार कार्ड लेने की व्यवस्था दी। संविधान के तहत, मतदाता बनने के लिए भारत का नागरिक होना जरूरी है। वोटर जहां रहता है, उसके आसपास केबूथ का मतदाता हो सकता है। गैर-भारतीय होने के आधार पर कितने नाम कटे, इसपर मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा किसभी चिह्नित अयोग्य मतदाताओं का नाम हटाया गया है। इसकी सूची जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के पास भी है और राजनीतिक दलों के पास भीहै। बूथ लेवल एजेंट्स की पहली बार चुनाव आयोग ने ट्रेनिंगमुख्य चुनाव आयुक्त ने जानकारी दी कि बूथ लेवल एजेंट्स की पहली बार चुनाव आयोग ने ट्रेनिंग की। बिहार के सभी बूथ लेवल एजेंट्स- 1 कीट्रेनिंग कुछ माह पहले ही दिल्ली में ट्रेनिंग हुई। उसके बाद बूथ लेवल ऑफिसर्स की ट्रेनिंग हुई। इसके बाद देशभर के 700 बूथ लेवल सुपरवाइजर्स-एजेंट्स की ट्रेनिंग की गई। मतदाता सूची के मामले में विशेष गहन पुनरीक्षण बड़ा टास्क था। सभी मतदाताओं के सहयोग के साथ स-समय यह पूराहुआ। बूथ लेवल ऑफिसर्स के साथ तमाम अधिकारी, जो इस काम को करते हैं- उनका मानदेय भी बढ़ाया गया। खास तौर पर ARO और AERO को भी मानदेय की व्यवस्था की गई। चुनाव आयोग ने वोटर कार्ड के 15 दिनों के अंदर मिलने की व्यवस्था की। बीएलओ को मतदाता सुगमता सेपहचाने जा सकें, इसके लिए आईडी भी दिए गए। इस बार बूथ के कमरे के ठीक बाहर मतदाताओं को सभी 90 हजार मतदान केंद्रों पर मोबाइलरखने की व्यवस्था रहेगी। वोटर स्लिप में इस बार बूथ की संख्या और पता बड़े फॉन्ट में रखा जा रहा है, ताकि आसानी से पढ़ा जा सके। चुनाव आयोगने तकनीक का सहारा बहुत पहले से ले रहा है। 40 एप्लिकेशन थे। उसकी जगह अब वन स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म- ECINET लाया गया। बिहारचुनाव में यह प्लेटफॉर्म सक्रिय रहेगा। चूंकि 1500 से ज्यादा मतदाताओं वाले मतदान केंद्रों में लंबी भीड़ रहती थी और परेशानी ज्यादा होती थी, इसलिए अब 1200 से ज्यादा किसी भी बूथ पर वोटर नहीं रहेंगे।