Delhi BJP Targets 11,000 Buses by 2026, Slams AAP for Decade of Inaction

New Delhi: Delhi BJP President Shri Virendra Sachdeva has welcomed the addition of 400 new buses to the Delhi Transport Corporation (DTC) fleet under the leadership of BJP’s Rekha Gupta government. The inauguration of the new buses took place in the presence of Union Minister Shri Dharmendra Pradhan.Criticism of AAP’s Decade of InactionMr. Sachdeva criticized the former AAP government led by Arvind Kejriwal for failing to expand the DTC fleet over the past ten years. He stated that not a single bus was added during their tenure, and most existing DTC buses have now exceeded not only their legal fitness lifespan but also continued operating for over two years beyond that limit. “Running such buses is nothing short of compulsion,” he remarked. Addressing the Shortage in Public TransportHe further highlighted that Delhi is currently facing a shortage of public transport buses due to the negligence of the previous government. However, he assured citizens that the current administration is working swiftly and strategically to bridge this gap. Target of 11,000 Buses by End of 2026Shri Virendra Sachdeva emphasized that the Rekha Gupta-led BJP government is working with a clear vision and concrete goals. “We are committed to providing Delhiites with a robust and adequate public transport system consisting of 11,000 buses by the end of 2026,” he said.
दीघा के जगन्नाथ मंदिर को लेकर बवाल, ओडिशा के लोगों ने जताई नाराज़गी – बोले ‘जगन्नाथ धाम सिर्फ पुरी में ही है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दीघा में बनवाए गए नए जगन्नाथ मंदिर को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ओडिशा के लोगोंऔर पुरी के जगन्नाथ मंदिर से जुड़े सेवायतों का कहना है कि “जगन्नाथ धाम” सिर्फ पुरी में है, और उसे कहीं और दोहराना न केवल गलत है, बल्किउनकी धार्मिक भावनाओं का भी अपमान है।दीघा का नया मंदिर – क्या है इसकी खासियत?बंगाल सरकार ने समुद्र तट के मशहूर पर्यटन स्थल दीघा में करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया है। मंदिर पुरी केप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर की शैली पर आधारित है। इसका उद्घाटन 30 अप्रैल 2025 को अक्षय तृतीया के दिन हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसेराज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। उनका कहना है कि अब बंगाल के श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिएओडिशा नहीं जाना पड़ेगा। क्यों है ओडिशा में नाराज़गी?ओडिशा के लोगों को सबसे बड़ी आपत्ति इस बात से है कि इस मंदिर को भी “जगन्नाथ धाम” कहा जा रहा है। उनके अनुसार, “जगन्नाथ धाम” कोईसामान्य मंदिर नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा और हजारों वर्षों की आस्था का केंद्र है। पुरी का मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्किउसकी रथ यात्रा, महाप्रसाद और सेवायतों की भूमिका भी विशिष्ट और पवित्र मानी जाती है। पुरी के सेवायतों ने साफ कहा है कि वे दीघा में बने इस मंदिर को मान्यता नहीं देते और किसी भी सेवक को वहां पूजा-पाठ करने से मना किया गया है। राजनीति भी हो रही है गरमभाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धर्मका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। शुभेंदु ने सवाल उठाया कि सरकारी पैसे से मंदिर बनाना संविधान के खिलाफ है, और साथ हीपुरी की परंपरा की नकल करने की भी आलोचना की। ममता बनर्जी की सफाईममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दीघा का मंदिर पुरी के मंदिर की नकल नहीं, बल्कि एक श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि यहां की परंपराएं पुरी से अलग होंगी—जैसे कि यहां प्रसाद में गुजिया और पेड़ा चढ़ेगा, न कि खाजा। उन्होंने मंदिर को “धार्मिक औरसांस्कृतिक परियोजना” बताया और यह भी स्पष्ट किया कि इसकी देखरेख के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें इस्कॉन के वरिष्ठ सदस्य भीशामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर के रामबन में बादल फटने से तबाही, NH-44 बंद, प्रशासन ने जारी की चेतावनी

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी है। शनिवार को रामबन के धारमकुंड इलाकेमें बादल फटने की घटना सामने आई, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। घटना के बादइलाके में बचाव और राहत कार्य तेज़ी से चल रहे हैं, जबकि प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सख़्त हिदायत दी है। 40 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त, कई परिवार बेघरधारमकुंड गांव में अचानक बादल फटने से पानी और मलबा तेज़ी से बहने लगा, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा। प्रशासन के अनुसार, करीब 40 घरों में पानी और मलबे का भराव हुआ है, जिनमें से 10 पूरी तरह तबाह हो गए हैं। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। NH-44 पर यातायात पूरी तरह बंदजम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) जो जम्मू और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाला सबसे अहम रास्ता है, उस पर भी बादल फटने का सीधा असरपड़ा है। भारी भूस्खलन और मलबा गिरने के कारण बनिहाल और नाशरी के बीच का हिस्सा पूरी तरह से बंद हो गया है। सैकड़ों यात्री और वाहन बीचरास्ते में फंसे हुए हैं। प्रशासन की अपील: बिना जानकारी यात्रा न करेंरामबन जिला प्रशासन ने आम लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे हाईवे पर यात्रा करने से पहले स्थिति की पूरी जानकारी लें। NH-44 कीस्थिति लगातार बदल रही है और मार्ग को साफ करने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तकयात्रा न करें। सेना और राहत दल मैदान में उतरेबचाव कार्यों में भारतीय सेना, NDRF और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया हैऔर उन्हें प्राथमिक चिकित्सा, खाने-पीने का सामान और आश्रय दिया जा रहा है। रास्तों से मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। मौसम विभाग का अलर्ट: अगले कुछ दिन बेहद संवेदनशीलभारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले कुछ दिनों तक क्षेत्र में भारी बारिश और भूस्खलन की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों मेंरहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में है। शिक्षण संस्थान बंद, जनजीवन प्रभावितरामबन और आस-पास के इलाकों में स्कूल और कॉलेजों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। परिवहन और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ा है।कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है। स्थानीय नेता बोले: ऐसा मंजर पहले नहीं देखारामबन से स्थानीय विधायक अर्जुन सिंह राजू ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि “अपने राजनीतिक जीवन में इतनी भयावह स्थिति कभी नहीं देखी।सरकार और प्रशासन हर संभव मदद देने में जुटा है और लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।”
स्वामी रामदेव की रूह अफज़ा पर विवादास्पद टिप्पणी: हाई कोर्ट में नया मोड़, वीडियो प्राइवेट, अगली सुनवाई 9 मई को

योगगुरु स्वामी रामदेव द्वारा लोकप्रिय पेय रूह अफज़ा को लेकर की गई “शरबत जिहाद” वाली टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयानको लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हमदर्द लैबोरेट्रीज ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें आरोप लगायागया कि रामदेव की टिप्पणी ब्रांड की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा रही है।पतंजलि और रामदेव का जवाबताजा अपडेट में रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद ने दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल करते हुए बताया है कि विवादित वीडियो को हटा दिया गयाहै। रामदेव के वकील ने कोर्ट को यह भी भरोसा दिलाया कि अदालत द्वारा दिए गए 24 घंटे के भीतर वीडियो को हटा दिया गया था। उन्होंने यह भीस्पष्ट किया कि वीडियो अब यूट्यूब पर ‘प्राइवेट’ कर दिया गया है। हमदर्द का दावा: वीडियो अब भी मौजूदहालांकि हमदर्द के वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को अवगत कराया कि वीडियो को तकनीकी रूप से हटाया नहीं गया है, बल्कि सिर्फ प्राइवेटमोड में रखा गया है, जिससे सब्सक्राइबर्स अभी भी उसे देख सकते हैं। उनका यह भी कहना था कि वही वीडियो आस्था चैनल पर भी प्रसारित हो रहाहै। हाई कोर्ट की नाराज़गीसुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अमित बंसल ने रामदेव पक्ष को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि रामदेव नेअदालत के पिछले आदेशों का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि “रामदेव पर किसी का नियंत्रण नहीं है।” यह टिप्पणी तब आई जब मुकुल रोहतगी ने अदालत को यह बताया कि पिछले आदेश के बाद भी एक नया वीडियो उसी प्रकार की भाषा और लहजेके साथ अपलोड किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया है। अगली सुनवाई कब?दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई को करेगा। अदालत अब यह जांचेगी कि रामदेव ने अपने कथनों से कोर्ट की अवमानना की हैया नहीं, और क्या आगे की कोई सख्त कार्रवाई बनती है। पृष्ठभूमि: “शरबत जिहाद” टिप्पणी पर बवालस्वामी रामदेव ने हाल ही में रूह अफज़ा को लेकर “शरबत जिहाद” जैसी विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसे कई लोगों ने सांप्रदायिक और ब्रांड कीछवि को नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया। इसके बाद सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इस टिप्पणी के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया और राहुल गांधी को कोर्ट का नोटिस, अगली सुनवाई 8 मई को

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी औरराहुल गांधी को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट के आधार पर जारी किया गया है। अब कोर्ट 8 मई कोअगली सुनवाई में तय करेगा कि आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जाए या नहीं। क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?इस केस की जड़ें 2014 में उस वक्त पड़ीं, जब बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने एक आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने आरोप लगायाकि कांग्रेस पार्टी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को अवैध तरीके से Young Indian नाम की कंपनी के जरिए अपने कब्जे में लिया। इसकंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 38-38% हिस्सेदारी है। सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि कांग्रेस पार्टी ने AJL को करीब 90 करोड़ रुपये का बिना ब्याज का कर्ज दिया, जिसे बाद में Young Indian कोमात्र 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया गया। इस डील के जरिए Young Indian को AJL की करोड़ों की संपत्तियों का मालिकाना हक मिलगया। कोर्ट ने क्या कहा?कोर्ट ने साफ किया कि आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी दी जाएगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलेगा। विशेष न्यायाधीश विशालगोगने ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का हक है। अभी केस की मेरिट पर बात करना जल्दबाज़ी होगी।” कोर्ट की इस टिप्पणी को कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कांग्रेस का जवाबकांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि यह पूरा मामला केंद्र सरकार द्वारा जांचएजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “सरकार विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम इससे डरने वाले नहीं हैं।सोनिया और राहुल गांधी पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और सच्चाई जल्द सामने आएगी।” ED की कार्रवाईप्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में गहन जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। ED का दावा है कि यह केवल आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्किमनी लॉन्ड्रिंग का एक जटिल मामला है, जिसमें राजनीतिक लाभ लेने की भी कोशिश की गई है। ED ने राहुल और सोनिया गांधी से कई बार पूछताछ की है। इस दौरान वित्तीय दस्तावेज़, लेन-देन और कंपनी की शेयर होल्डिंग से जुड़े सवालों परविस्तार से जवाब मांगे गए। आगे क्या?अब सभी की नजरें 8 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। कोर्ट यह तय करेगा कि आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू हो या उन्हें राहत दीजाए। इस फैसले का कांग्रेस की साख और 2024 के बाद की राजनीतिक रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
भारत ने पाकिस्तान के यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कसी नकेल, जानिए क्या है पूरा मामला

हाल ही में भारत सरकार ने पाकिस्तान से चलाए जा रहे कुछ यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। सरकारका आरोप है कि ये चैनल भारत के खिलाफ झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर देश की सुरक्षा और एकता को नुकसान पहुंचा रहे थे। क्यों हुई कार्रवाई?भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आईटी नियम, 2021 के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 16 यूट्यूब चैनलों कोब्लॉक करने का आदेश दिया। इनमें से 6 चैनल पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे, जबकि 10 चैनल भारत में थे लेकिन इनकी सामग्री भ्रामक औरउकसाने वाली थी। सरकार का कहना है कि इन चैनलों पर पोस्ट किए जा रहे वीडियो में सांप्रदायिक तनाव फैलाने, दहशत पैदा करने और भारत के संवेदनशील मुद्दों कोतोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा था। इन चैनलों की पहुंच करोड़ों लोगों तक थी और इन्हें लाखों सब्सक्राइबर्स फॉलो कर रहे थे। पाकिस्तान का दुष्प्रचार तंत्रये पहली बार नहीं है जब भारत ने पाकिस्तान के दुष्प्रचार नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की हो। इससे पहले भी जनवरी 2022 में भारत ने पाकिस्तान सेसंचालित 35 यूट्यूब चैनलों और 2 वेबसाइट्स को ब्लॉक किया था। इनमें से कई चैनल ‘अपनी दुनिया नेटवर्क’ और ‘ताल्हा फिल्म्स नेटवर्क’ जैसेसमूहों से जुड़े थे, जिनका मकसद भारत में झूठी खबरें फैलाना और आम लोगों की सोच को भटकाना था। इन यूट्यूब चैनलों की सामग्री पेशेवर तरीके से तैयार की गई थी, ताकि ऐसा लगे कि ये भारत के अंदर से ही चलाई जा रही हैं। लेकिन जांच में पताचला कि इनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। सोशल मीडिया पर भी सख्तीयूट्यूब के अलावा सरकार ने कुछ इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स को भी ब्लॉक किया है, जो पाकिस्तान से भारत विरोधी कंटेंट फैला रहे थे।हालांकि सोशल मीडिया पर एक अफवाह यह भी फैल रही है कि पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर्स—बाबर आजम, शाहीन अफरीदी, मोहम्मद रिजवानऔर हारिस रऊफ के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को भारत ने बंद करवा दिया है। लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह महज अफवाहसाबित हुई है। भारत का सख्त संदेशभारत सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जा रहे झूठ और नफरत को बर्दाश्त नहीं करेगी। ऐसे चैनल औरअकाउंट्स जो देश की अखंडता, सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के खिलाफ काम करेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी खबर या वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें। झूठी खबरें सिर्फ भ्रमनहीं फैलातीं, वे समाज के ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।