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ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव में हमारे साथ धोखा हुआ

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। ममता बनर्जी ने दावा किया कि इस चुनाव में न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ियां हुईं, बल्कि काउंटिंग के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया। टीएमसी ने चुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए 10 सदस्यीय टीम बनाई है। पार्टी हार के कारणों और कथित अनियमितताओं की जांच करेगी। जब मीडिया ने उनसे लोकभवन जाकर इस्तीफा देने के बारे में सवाल किया तो ममता भड़क गईं। उन्होंने कहा, ”मैं क्यों जाऊंगी? हम तो हारे नहीं हैं, जो जाएंगे। अगर मैं जीत गई होती तो शपथ से पहले इस्तीफा देने जाती। लोकभवन जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। चोरी करके जीतने से उन्हें अगर लगता है कि मुझे इस्तीफा देना होगा तो ऐसा नहीं होगा।” उन्होंने कहा, मैं स्पष्ट कहती हूं कि हम हारे नहीं हैं। उन्होंने जबरन हमें हराया है। चुनाव आयोग के साथ मिलकर वो जीते हैं, लेकिन नैतिक तौर पर मेरी जीत हुई है। गृह मंत्री भी शामिलममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया ‘आयोग इस चुनाव में लोगों के संवैधानिक अधिकारों को लूटने और ईवीएम को लूटने के वाला खलनायक बन गया। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वोटिंग के बाद ईवीएम में 80-90% चार्ज है? यह कैसे हो सकता है? उन्होंने आरोप लगाया ‘चुनाव से दो दिन पहले, उन्होंने हमारे लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। उन्होंने हर जगह छापेमारी करना शुरू कर दिया। उन्होंने सभी आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को बदल दिया।’ ‘उन्होंने अपनी पार्टी से लोगों को चुना और भाजपा ने सीधे चुनाव आयोग के साथ मिलकर खेल खेला। यह भाजपा और चुनाव आयोग के बीच एक बेटिंग है। हमने पूरी मशीनरी के खिलाफ लड़ाई लड़ी।’ इसमें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी शामिल हैं और सीधा दखल दे रहे हैं। ‘

Kerala में BJP की ऐतिहासिक एंट्री, 2 सीटों पर जीत से बढ़ी ताकत

केरल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा अब राज्य में केवल एक ‘वोट-कटवा’ पार्टी नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति बन चुकी है। केरल भाजपा अध्यक्ष ने दावा कि पार्टी उम्मीदवारों को दो महत्वपूर्ण सीट नेमोम और चथन्नूर में जीत मिली है। राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि राज्य में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के अब दो विधायक होंगे। उन्होंने नेमोम और चथन्नूर निर्वाचन क्षेत्रों में मिली बढ़त को कांग्रेस और माकपा (CPI-M) के उन दावों का करारा जवाब बताया है, जिसमें कहा गया था कि भाजपा का खाता भी नहीं खुलेगा। पार्टी मुख्यालय में राजीव चंद्रशेखर ने कहा, ‘आज नेमोम और चथन्नूर की जनता ने कांग्रेस और माकपा को स्पष्ट जवाब दे दिया है। अब विधानसभा में भाजपा-एनडीए के दो विधायक होंगे।’ चंद्रशेखर ने शुरू से ही इस चुनाव को ‘माकपा विरोधी चुनाव’ करार दिया था। उन्होंने कहा कि लोग भ्रष्टाचार और सबरीमाला से जुड़े कथित मुद्दों से तंग आ चुके थे, जिसका असर नतीजों में दिख रहा है। लेकिन जनता ने उनके घमंड को तोड़ दियाचुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कोल्लम जिले की चथन्नूर सीट से भाजपा उम्मीदवार बीबी गोपकुमार ने 4, 398 वोटों से जीत दर्ज की है। वहीं, राजधानी की हाई-प्रोफाइल नेमोम सीट पर खुद राजीव चंद्रशेखर 18 में से 14 राउंड पूरे होने के बाद 4,100 से ज्यादा वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं। इन दोनों सीटों पर भाजपा की जीत अब महज औपचारिक घोषणा की बात रह गई है। चंद्रशेखर ने केवल केरल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित देश के अन्य हिस्सों में हुए चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने प्रचार के दौरान बार-बार कहा था कि भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलेगी, लेकिन जनता ने उनके घमंड को तोड़ दिया है।

बारामती में ‘पवार बनाम पवार’ की सियासत? रोहित पवार के बयान से महाराष्ट्र राजनीति में हलचल

महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाने वाला बारामती एक बार फिर चर्चा में है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता रोहित पवार ने एक बड़ा बयान देकर सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर बारामती में ‘पवार बनाम पवार’ की लड़ाई करवाना चाहते हैं ताकि इस परिवार की साख और विरासत को खत्म किया जा सके। बारामती उपचुनाव के दौरान वोट डालने के बाद रोहित पवार ने जो बातें कहीं, उन्होंने भविष्य की राजनीति की एक नई तस्वीर पेश कर दी है। रोहित पवार का निशाना सीधे तौर पर भाजपा और उनके सहयोगियों पर था। उन्होंने कहा कि बारामती की जनता कभी नहीं चाहती कि पवार परिवार के लोग आपस में लड़ें, लेकिन महायुति सरकार में शामिल कुछ दल इस तरह की प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा दे रहे हैं। रोहित का मानना है कि यह सब शरद पवार साहब और दिवंगत अजीत पवार द्वारा बनाई गई विरासत को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पर्दे के पीछे से ऐसी चालें चल रहे हैं जिससे 2029 के चुनावों में भी परिवार के ही दो सदस्य आमने-सामने खड़े हो जाएं। परिवार के भीतर अब भी पुराने रिश्तों और अजीत पवार की कमीभविष्य की राजनीति को लेकर रोहित पवार ने एक अंदेशा जताया है। उन्होंने कहा कि अगर अजीत पवार की पार्टी से जय पवार मैदान में उतरते हैं, तो मुमकिन है कि उनके सामने युगेंद्र पवार को खड़ा होना पड़े। अगर ऐसा होता है, तो बारामती के लोग एक बार फिर उसी पारिवारिक जंग को देखेंगे जिसे वे पसंद नहीं करते। रोहित ने स्पष्ट किया कि न तो परिवार और न ही जनता इस तरह की कलह चाहती है, लेकिन राजनीतिक गठबंधन अपने फायदे के लिए ऐसा माहौल बना रहे हैं। रोहित पवार ने एक बहुत बड़ी बात कही कि अजीत पवार दोनों गुटों को एक करना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि अगर अजीत पवार आज जीवित होते, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों का विलय हो चुका होता। रोहित के अनुसार, अगर अजीत दादा होते और यह विलय हो जाता, तो वह पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि 2029 में अजीत पवार ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनते। यह बयान दिखाता है कि परिवार के भीतर अब भी पुराने रिश्तों और अजीत पवार की कमी को महसूस किया जा रहा है।

महिला आरक्षण पर संसद में बड़ा बयान, मोदी ने दिया ‘क्रेडिट का ब्लैंक चेक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जब संसद में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लिया, तो उन्होंने इस आशंका को दूर किया कि परिसीमन के दौरान राज्यों के हिस्से में आने वाली सीटों के अनुपात में कोई बदलाव होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इसका श्रेय नहीं चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ”अब कुछ लोगों को लग रहा है कि यह मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है? इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक बात है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन सब साथ चलेंगे तो किसी को भी लाभ नहीं होगा, यह लिखकर ले लो क्योंकि फिर इसका अलग पहलू हो जाता है। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए। जैसे ही यह पारित हो जाए, मैं सबका आभार प्रकट करने के लिए तैयार हूं। …ले लो क्रेडिट। जिसकी फोटो आप (विपक्ष) कहेंगे, हम सरकारी खर्चे से उसकी फोटो छपवा देंगे। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’ समय की मांग है कि अब ज्यादा विलंब न होउन्होंने कहा, ”देश की नारी शक्ति का यह हक है। हमने कई दशकों से इसे रोका हुआ था, अब प्रायश्चित कर उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है। तीन दशक तक आपने इसे रोककर रखा, फिर भी कुछ कर नहीं पाए, तो अब तो करो।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”यह प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। पहले से चले जा रहे अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा। गारंटी कहिए तो गारंटी कहता हूं। वादे की बात करें तो वादा करता हूं। नीयत साफ हो तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने कहा कि हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है। नीयत में खोट को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी। समय की मांग है कि अब ज्यादा विलंब न हो।

“Samrat Choudhary बने CM! गांव में जश्न का माहौल

बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव हो चुका है और सम्राट चौधरी के नाम पर मुख्यमंत्री की मुहर लग गई है। आधिकारिक घोषणा के साथ ही उनके पैतृक गांव लखनपुर (तारापुर, मुंगेर) में जश्न का माहौल चरम पर पहुंच गया है। ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और लोग इसे अपने क्षेत्र के लिए गर्व और ऐतिहासिक पल मान रहे हैं। गांव के बुजुर्गों और उनके बचपन के साथियों ने सम्राट चौधरी से जुड़ी कई दिलचस्प यादें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि उस समय गांव में केवल एक मदरसा हुआ करता था, जहां सभी समुदायों के बच्चे साथ पढ़ते थे। इसी मदरसे में सम्राट चौधरी ने अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की, जहां हिंदी, उर्दू और संस्कृत तीनों भाषाएं सिखाई जाती थीं। खास बात यह रही कि उन्होंने क, ख से पहले ‘अलिफ, बे’ सीखकर अपनी पढ़ाई की शुरुआत की। विद्यालय के रूप में संचालित हो रहाबचपन में पढ़ाई के साथ-साथ सम्राट चौधरी खेलकूद, खासकर क्रिकेट में भी काफी रुचि रखते थे। उनके पिता शकुनि चौधरी चाहते थे कि वे क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करें और इसी वजह से उन्हें कई बार डांट भी पड़ती थी। खेल के दौरान साथियों के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक जरूर होती थी, लेकिन आपसी भाईचारा हमेशा कायम रहा। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी सम्राट चौधरी जब गांव आते हैं तो अपने पुराने दोस्तों से जरूर मिलते हैं और वही सादगी बनाए रखते हैं। गांव में आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिलती है। उर्दू मध्य विद्यालय लखनपुर के प्रिंसिपल मोहम्मद ताबीर ने बताया कि पहले यह एक मदरसा था, जहां सम्राट चौधरी ने पढ़ाई की थी, जो अब एक विद्यालय के रूप में संचालित हो रहा है। उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना से पूरे इलाके में खुशी और उत्साह का माहौल है।

Mamata Banerjee का BJP पर बड़ा हमला ‘बाहर से बुलाए वोटर!’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भाजपा पर तीखा हमला किया। उत्तर 24 परगना जिले के टेंटुलिया में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को असम के स्थानीय लोगों के वोटों पर भरोसा नहीं था। इसलिए पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए बाहर से लोग बुलाए। ममता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश से 50,000 लोगों को ट्रेन में भरकर असम लाया गया। 90 लाख नाम हटा दिए गएममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के राज में देश की कोई भी एजेंसी निष्पक्ष नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केसरिया पार्टी ने सभी एजेंसियों को खरीद लिया है। भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, ‘एक सांप पर तो भरोसा किया जा सकता है, लेकिन भाजपा पर कभी नहीं।’ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी और भाजपा के बीच जुबानी जंग काफी तेज हो गई है। रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 90 लाख नाम हटा दिए गए हैं। एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इन 90 लाख नामों में से 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुस्लिम हैं। उन्होंने असम के एनआरसी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी 19 लाख नाम लिस्ट से बाहर किए गए थे, जिनमें 13 लाख हिंदू और 6 लाख मुस्लिम थे। ममता बनर्जी ने लोगों को आगाह किया कि वे भाजपा पर कभी विश्वास न करें। असम की 126 सीटों के लिए गुरुवार को मतदान हुआ था।

केरल में एलडीएफ सरकार पैंसे, लॉटरी और शराब पर निर्भर, UDF का मुद्दा केरल 2.0

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार राज्य को प्रवासियों की ओर से भेजे गए पैंसे (रेमिटेंस), लॉटरी और शराब पर निर्भर बनाए रख रही है। इस तरह की व्यवस्था आगे नहीं चल सकती। उन्होंने कहा, संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के लिए यह एक अहम मुद्दा है, जो पिछले एक दशक से सत्ता से बाहर है। उन्होंने एलडीएफ सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया। थरूर ने कहा कि राज्य सरकार के पास सितंबर तक वेतन देने के लिए पैसे खत्म हो जाते हैं और उसे भुगतान करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। हमारे पास एक बहुत ही सकारात्मक संदेशजब पूछा गया कि क्या कांग्रेस का मुख्य मुद्दा पिनरई विजयन सरकार के खिलाफ सत्ता की नाराजगी होगा, तो शशि थरूर ने कहा, नहीं, मुझे लगता है कि हमारा मुद्दे इससे कहीं ज्यादा बेहतर और आगे की सोच वाला है। यह केरल 2.0 के बारे में है। थरूर ने कहा, हां, सरकार के खिलाफ लोगों में कुछ नाराजगी है। हमारे अभियान के प्रमुख नारों में से एक यह है कि अब समय आ गया कि सरकार ने जो भी गलत काम किए हैं, उनका हिसाब लिया जाए। इसके अलावा हमारे पास एक बहुत ही सकारात्मक संदेश भी है। उदाहरण के लिए , महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा से लेकर बेहतर पेंशन भुगतान तक हमने पांच खास गारंटी देने की बात की है, जिसे वाम मोर्चा सरकार लगातार पूरा करने में असफल रही है।