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नक्सलवाद पर रिजिजू का ‘एटमी’ वार! कांग्रेस और माओवादियों के बीच ‘गुपचुप’ रिश्तों का दावा

देश में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के वामपंथी उग्रवादियों और माओवादियों से संबंध रहे हैं। उनके इस बयान से राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी वामपंथी उग्रवादियों को जानते हैं और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ऐसे समूहों से संपर्क भी बनाए रखा था। उन्होंने यह भी कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ कांग्रेस सार्वजनिक रूप से उग्रवाद के खिलाफ बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उसके कुछ नेताओं पर ऐसे आरोप लग रहे हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के समय कुछ लोग वामपंथी उग्रवादी विचारधारा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इन लोगों को जानते हैं। हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिरकेंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने माओवादियों से मुलाकात भी की थी और उनसे संपर्क बनाए रखा था। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार, यह स्थिति चिंताजनक है और इसकी जांच होनी चाहिए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे इलाके, जो पहले नक्सलवाद के गढ़ माने जाते थे, अब विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार ने 31 मार्च तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य भी रखा है। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अपने नेतृत्व से सवाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नक्सलियों द्वारा हत्या की गई, तब पार्टी नेतृत्व की क्या भूमिका रही। उन्होंने कांग्रेस पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित और स्थिर है।

बंगाल चुनाव से पहले सियासी वार तेज: TMC का भाजपा पर पलटवार, ‘मोटा भाई-जवाब चाई’ से मांगा जवाब

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के चलते आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ ‘आरोप-पत्र’ जारी किया। अब इस पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पलटवार करते हुए भाजपा के खिलाफ ‘चार्जशीट’ जारी की है। तृणमूल कांग्रेस ने न केवल भाजपा-शासित राज्यों में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए, बल्कि मणिपुर में जातीय हिंसा और बंगाल में डिटेंशन कैंप मॉडल लागू करने की भाजपा की कथित मंशा पर भी तीखा हमला बोला। टीएमसी के इस आरोप-पत्र का नाम ‘मोटा भाई-जवाब चाई’ रखा है। आप हमें वंचित करतेटीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा पर अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यह पूर्वोत्तर राज्य पिछले तीन वर्षों से ‘खून से लथपथ’ है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा बंगाली और बांग्लादेशियों के बीच की लकीर को धुंधला करना चाहती है, ताकि वह असम की तर्ज पर बनाए गए अपने नफरत भरे डिटेंशन कैंप मॉडल को बंगाल में भी लागू कर सके। महुआ मोइत्रा ने अमित शाह की पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ ‘चार्जशीट’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आपने हर बंगाली को अपराधी घोषित कर दिया है। आप इसे चार चरणों में करते हैं: पहले आप हमारा अपमान करते हैं, फिर आप हमें वंचित करते हैं, फिर आप हमें अपराधी बनाते हैं, और फिर आप हमें परेशान करते हैं।”

नोएडा एयरपोर्ट जनसभा के लिए हाईटेक कंट्रोल रूम, 2500 बसों पर रखी जा रही नजर

हैलो, कंट्रोल रूम से बोल रहा हूं। आपकी बस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ में होने वाली जनसभा से अभी कितनी दूर है, इसकी जानकारी उपलब्ध करा दें। विभिन्न जनपदों से आने वाले 2500 बस चालकों के पास शुक्रवार से कलेक्ट्रेट के कंट्रोल रूम से फोन किए जाएंगे। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से छह से सात टीमें बनाई गई हैं। हर टीम में 10 से 12 लोगों की तैनाती की गई है। हर टीम के सदस्यों को 100-100 बसों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन सदस्यों का काम होगा कि हर बस चालक से उसकी लोकेशन लेकर अपडेट रहें। जनसभा स्थल पर पहुंचने पर बसों को कहां खड़ा किया जाएगा, इसकी भी जानकारी दी जाएगी। सभी कर्मियों को 27 से 28 मार्च शाम छह बजे तक कंट्रोल रूम में रहना होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई होगीकंट्रोल रूम में शामिल एक सदस्य ने बताया कि हर बस चालक को फोन करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि प्रधानमंत्री की जनसभा में आने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी न हो। इसके लिए सभी सदस्यों को दो दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। बातचीत के दौरान किसी को ऊंची आवाज में बोलने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही बसों में आने वाले लोगों को खाना-पानी मिला या नहीं, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम से लाइव लोकेशन पर भी काम किया जाएगा। कई जनपदों से लोग शुक्रवार दोपहर से ही आने लगेंगे। उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि कंट्रोल रूम में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई होगी।

Donald Trump की ईरान को कड़ी चेतावनी: “अब फैसला लो, वरना वापसी का रास्ता नहीं बचेगा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द गंभीर होकर फैसला लेना होगा, वरना हालात ऐसे हो जाएंगे जहां से वापसी संभव नहीं होगी। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इसी के साथ उन्होंने नाटो देशों पर भी निशाना साधा और सहयोग न करने का आरोप लगाया.ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और अजीब हैं। वे हमसे डील करने के लिए भीख मांग रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए क्योंकि वो सैन्य रूप से खत्म हो चुके हैं और वापसी का कोई मौका उनके पास नहीं है, और फिर भी वे सबके सामने कहते हैं कि वे सिर्फ हमारे प्रस्ताव को देख रहे हैं। उन्हें जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो पीछे मुड़ना मुमकिन नहीं है, और यह अच्छा नहीं होगा! मिले-जुले संकेत दिएईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह “न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।”

द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या में किया श्रीराम यंत्र स्थापित, योगी आदित्यनाथ बोले– ‘रामराज्य की अनुभूति’

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की। इस अवसर पर राष्ट्रपति की उपस्थिति में गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सबसे पहले प्रदेशवासियों को भारतीय नवसंवत्सर की शुभकामना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरयू मैया अयोध्या धाम को पवित्र करते हुए अपने निर्मल जल से पूरे क्षेत्र को पवित्र करती हैं। रामराज्य की अनुभूति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में युद्ध चल रहे हैं और हम श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना कार्यक्रम में सहभागी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वर्तमान पीढ़ी की प्रशंसा की और कहा कि यह पीढ़ी नववर्ष पर ऐसे किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाती, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। रामराज्य की अनुभूति कर रहेमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व-मार्गदर्शन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन, श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, रामदरबार के पवित्र विग्रह की स्थापना, ध्वजा आरोहण और आज श्रीराम यंत्र की स्थापना का कार्यक्रम हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चे भारतीय को आनंद से विभोर कर देता है और यही भारत की आस्था है। सीएम योगी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा, कहा कि आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था। इसे अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे। नोएडा न जाना उनके लिए अंधविश्वास नहीं था, लेकिन राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, कृष्ण-कन्हैया के मथुरा-वृंदावन की बात करना अंधविश्वास का पर्याय था। लेकिन जो आस्था 500 वर्ष तक निरंतर बनी रही, संघर्षों का मुकाबला करती रही, वह न रुकी, न डिगी और न झुकी। आस्था को अपमानित करने वाली सत्ता के खिलाफ संघर्ष निरंतर जारी रहा। अंततः वह दिन आया, जब अयोध्या इस रूप में सबके सामने है। सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया है। यह रामराज्य की आधारशिला भी है। दुनिया में तमाम युद्ध चल रहे हैं, अव्यवस्था, आर्थिक अराजकता, भय-आतंक है और अयोध्याधाम में हजारों की संख्या में उपस्थित हम लोग भयमुक्त होकर राष्ट्रपति जी के अभिवादन और श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं।

1973 तक वडनगर में प्लेटफॉर्म ही नहीं था, पीएम के चाय बेचने के दावे पर अय्यर का बड़ा सवाल

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित जातिवादी टिप्पणी करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां प्रधानमंत्री की जाति के लिए नहीं, बल्कि उनके चरित्र के लिए थीं। अय्यर ने अपने पुराने विवादित बयान पर सफाई देते हुए कहा, उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया। अय्यर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस बयान को जाति से इसलिए जोड़ा क्योंकि अय्यर खुद एक ब्राह्मण हैं। उन्होंने ‘चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता’ वाले बयान पर भी अपनी बात रखी। अय्यर ने कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा। उन्होंने बताया कि उनकी आलोचना मोदी के ‘इतिहास के कम ज्ञान’ को लेकर थी। अय्यर के अनुसार, उन्होंने यह सवाल उठाया था कि कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे उनकी नजर में कुछ ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी नहीं है, वह उस भूमिका (प्रधानमंत्री की) में कैसे हो सकता है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू थे। देश में सांप्रदायिक बंटवारे को बढ़ावा दियाअय्यर ने बताया कि उन्होंने मजाक में कहा था कि अगर मोदी चुनाव हार जाते हैं, तो उनके लिए चाय बांटने का इंतजाम किया जा सकता है। उन्होंने मोदी के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने के दावे पर भी सवाल उठाए। अय्यर ने दावा किया कि 1973 तक वडनगर में कोई रेलवे प्लेटफॉर्म ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे भ्रामक दावों ने मोदी को प्रधानमंत्री बनने में मदद की। अंग्रेजी बोलने पर खुद को ‘मैकाले की संतान’ कहे जाने पर भी अय्यर ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को तमिल भाषा आती है? इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिमों के बारे में की गई टिप्पणियों ने देश में सांप्रदायिक बंटवारे को बढ़ावा दिया है।

कांशीराम जी सफल हुए क्योंकि कांग्रेस अपना काम ठीक से नहीं कर पाई — राहुल गांधी का आत्मचिंतन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे। जहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कांशीराम जयंती के अवसर पर आयोजित सामाजिक परिवर्तन दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांशीराम जी समाज में बराबरी की बात करते थे। कांग्रेस अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी। यही कारण है कि कांशीराम जी सफल हुए। अगर कांग्रेस ठीक तरह से काम करती तो कांशीराम जी कभी सफल न होते। उन्होंने कहा कि अगर जवाहर लाल नेहरू जी जिंदा होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते और अब भाजपा ने सरकार के 85 प्रतिशत हिस्से की अनदेखी की है।राहुल गांधी ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी में देख लीजिए, कार्पोरेट इंडिया में देख लीजिए, बड़ी-बड़ी कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट की सूची निकालकर देख लीजिए आपको दलित, पिछड़ा और आदिवासी कहीं नहीं मिलेगा। किसी प्राइवेट अस्पताल में जाकर देख लीजिए। डॉक्टरों के नाम पढ़िए आपको एक दलित, पिछड़ा और आदिवासी नहीं मिलेगा। वहीं, मनरेगा मजदूरों की सूची निकाल लीजिए वहां पर 85 प्रतिशत दलित और पिछड़ा मिलेंगे। साइकोलॉजिकली खत्म कर दियाउन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार में दलित, आदिवासी और ओबीसी के लिए मौके कम किए जा रहे हैं। इंटरव्यू से बच्चों को निकाला जा रहा है। उन्हें पब्लिक सेक्टर में मौका नहीं मिल पाता है। हम सभी की बराबरी चाहते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि हमारे संविधान में हमारे देश के हजारों साल की विचारधारा है। इसमें सावरकर की विचारधारा नहीं है। गोडसे की विचारधारा नहीं है। इसलिए वो लोग इसे नहीं मानते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ भी कह लें लेकिन वो संविधान की विचारधारा को नहीं मानते हैं। गांधी जी, आंबेडकर जी और कांशीराम जी ने बहुत मुश्किलें झेली पर वो कभी कंप्रोमाइज्ड नहीं हुए जबकि मोदी जी तो कंप्रोमाइज्ड हैं। हमने उन्हें पकड़ लिया है। हमने नरेंद्र मोदी को साइकोलॉजिकली खत्म कर दिया है। वो अमेरिका के दबाव में हैं। वो अब अमेरिका का काम कर रहे हैं।

“अमेरिका कौन होता है हमें बताने वाला?, संसद में गूंजी राहुल गांधी की दहाड़!

लोकसभा में गुरुवार को ईरान-इस्राइल युद्ध के चलते पैदा हुए उर्जा संकट पर राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने ईरान युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है। देश में एलपीजी को लेकर संकट है। स्ट्रीट वेंडर्स पर ज्यादा प्रभाव पड़ा है। अमेरिका कौन होता है हमें यह बताने वाला कि हम किससे तेल खरीदेंगे, किससे गैस खरीदेंगे? छोटे व्यापारी परेशान हो रहे हैं। राहुल गांधी में सदन में कहा कि हर कोई जानता है कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है। इस युद्ध के दूरगामी परिणाम होने वाले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, उस मुख्य समुद्री रास्ते को बंद कर दिया गया है। इसका बहुत बड़ा असर पड़ेगा, खासकर हमारे देश पर, क्योंकि हमारे तेल और प्राकृतिक गैस का बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। पहेली को समझने की कोशिश कर रहाराहुल गांधी ने आगे कहा कि मुश्किलें अभी बस शुरू हुई हैं। रेस्तरां बंद हो रहे हैं। एलपीजी को लेकर लोगों में घबराहट फैल रही है। सड़क पर सामान बेचने वाले लोग प्रभावित हो रहे हैं और जैसा मैंने कहा, यह सिर्फ शुरुआत है। किसी भी देश की बुनियाद उसकी ऊर्जा सुरक्षा होती है और मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा हूं, लेकिन अमेरिका को यह तय करने देना कि हम तेल किससे खरीदेंगे, गैस किससे खरीदेंगे, क्या हम रूस से तेल खरीद सकते हैं या नहीं और अलग-अलग तेल आपूर्तिकर्ता देशों के साथ हमारे संबंध कैसे होंगे, यह सब मानो सौदे में दे दिया गया है। ट्रंप के बयान को लेकर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मेरे लिए यह हमेशा एक बहुत उलझाने वाली बात रही है कि भारत जैसा बड़ा देश किसी दूसरे देश को यह तय करने क्यों देगा कि हम किससे तेल खरीदें। क्यों किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति हमें अनुमति दें कि हम रूस से तेल खरीद सकते हैं या नहीं और हमारे अंतरराष्ट्रीय संबंध कैसे होंगे। यह मेरे लिए एक पहेली रही है और मैं इस पहेली को समझने की कोशिश कर रहा हूं।

ईरान-इस्राइल-अमेरिका युद्ध से एलपीजी संकट की आशंका, मोदी ने हाई-लेवल बैठक बुलाई

ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में रसोई गैस की संभावित कमी से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के असर देश के उपभोक्ताओं को बचाने के लिए रणनीतिक योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। मौजूदा संकट की वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना बताया जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल की सैन्य कार्रवाई व ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह समुद्री मार्ग बंद हो गया है। यह मार्ग भारत की उर्जा सुरक्षा के लिए बहुत अहम है, क्योंकि देश अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 62 फीसदी आयात करता है। जमाखोरी और काला बाजारी को रोका जा सकेभारत में हर साल करीब 31.3 मिलिटन टन एलपीजी की खपत होती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एलपीजी वितरण को दो हिस्सों में बांटा है। घरेलू क्षेत्र यानी घरों में इस्तेमाल होनी वाली गैस कुल खपत का 87 फीसदी है। वहीं, होटल, रेस्तरां और उद्योग जैसे व्यावसायिक क्षेत्र 13 फीसदी गैस का इस्तेमाल करते हैं। सरकार ने आम लोगों और घरों को ध्यान में रखे हुए घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है। इसकी वजह बाजार कीमत पर मिलने वाले वाणिज्यिक सिलिंडर पर निर्भर होटल, रेस्तरां और उद्योगों को भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस कमी का असर मुंबई और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों में भी दिखने लगा है। इस पर इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने भी चिंता जताई है। संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने कई आपात कदम उठाए हैं। रिफाइनरी को निर्देश दिया गया है कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम करके एलपीजी का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सिलिंडर की दोबार बुकिंग का समय 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी को रोका जा सके।

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, सीमा से जुड़े देशों के लिए FDI नियम आसान

केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, चीन सहित भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को आसान बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का चीन के साथ व्यापारिक घाटा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अहम फैसले के तहत सरकार ने 2020 में जारी ‘प्रेस नोट 3’ के प्रावधानों में ढील दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए यह सख्त नियम लागू किया गया था। पुराने नियमों के अनुसार, भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों- चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान- से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगेगौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में भारी तनाव आ गया था। इसके परिणामस्वरूप, भारत सरकार ने टिकटॉक, वीचैट और यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। देश में रणनीतिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए भी केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कनेक्टिविटी इन्वेस्टमेंट एजेंडा 2024’ के तहत कैबिनेट ने कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है। इन फैसलों में रेलवे, हाईवे, एविएशन और ग्रामीण जल आपूर्ति जैसे प्रमुख सेक्टर्स शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।