
देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे। सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पीवी कुलकर्णी। मनीषा पुणे की एक सीनियर बॉटनी लेक्चरर हैं और उन्हें इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने उन्हें एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। इसी आधिकारिक हैसियत की वजह से प्रश्नपत्रों तक उनकी सीधी पहुंच थी। वहीं, पुणे से गिरफ्तार लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी भी लंबे समय से एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। इन दोनों ने मिलकर सिस्टम के इसी भरोसे का फायदा उठाया और पेपर को लीक कर दिया।
सवाल हूबहू मैच कर रहे
सीबीआई के अनुसार, यह खेल अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही शुरू हो चुका था। कुलकर्णी ने अपनी सहयोगी मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर ऐसे छात्रों को जोड़ना शुरू किया जो इसके लिए मोटी रकम दे सकें। अब आप सोच रहे होंगे यह दूसरी मनीषा कौन है? मनीषा वाघमारे पुणे में एक ब्यूटी सैलून चलाती हैं। इसके बाद पुणे में कुलकर्णी के घर पर चुनिंदा छात्रों के लिए एक ‘विशेष कोचिंग क्लास’ शुरू हुई। यह कोई साधारण क्लास नहीं थी। यहां छात्रों को न तो कोई कॉन्सेप्ट समझाया जा रहा था और न ही कोई थ्योरी पढ़ाई जा रही थी। यहां सीधे नीट परीक्षा के सवाल, उनके विकल्प और सही जवाब बताए जा रहे थे। छात्र चुपचाप इन्हें अपनी कॉपियों में नोट कर रहे थे। जब सीबीआई ने इन छात्रों की नोटबुक्स जब्त कीं, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। तीन मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से ये सवाल हूबहू मैच कर रहे थे