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दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का आरोप पंजाब सरकार ने सिख गुरुओं से जुड़े FIR की फाइल रोकी, मामले की गंभीरता पर जताई चिंता

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को दावा किया कि आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने सिख गुरुओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में राज्य पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से संबंधित फाइल को रोक रखा है। अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर आम आदमी पार्टी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। विजेंद्र गुप्ता ने पत्रकारों से कहा कि विधानसभा सिख गुरुओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगी और सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सिख गुरुओं के कथित अपमान को लेकर पंजाब सरकार के रवैये पर गहरी चिंता जताई। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि संबंधित फाइल को लगातार रोके रखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब तक न तो एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई गई है, न ही शिकायत साझा की गई है और न ही कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है। मामले को किसी भी हाल में हल्के में नहीं लेगीउन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी साजिश की ओर इशारा करती है। इस मामले में चुप्पी और बार-बार हो रही देरी तथ्यों को छिपाने की जानबूझकर की गई कोशिश को दर्शाती है। इस केस के तार सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री तक जाते प्रतीत होते हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति छह जनवरी को हुई उस कथित घटना की जांच कर रही है, जो गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर हुई चर्चा के दौरान सामने आई थी। आतिशी ने समिति को दिए अपने जवाब में आरोपों को खारिज करते हुए उस दिन की विधानसभा कार्यवाही का बिना संपादन वाला वीडियो रिकॉर्ड मांगा है। गुप्ता ने दोहराया कि दिल्ली विधानसभा इस मामले को किसी भी हाल में हल्के में नहीं लेगी। उन्होंने कहा, यह सिर्फ एक प्रशासनिक या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गुरुओं के सम्मान, गरिमा और आस्था से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इतने संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या असंवेदनशीलता पूरी तरह अस्वीकार्य है।

योगी आदित्यनाथ ने यूपी में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया तेज, सरल और पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री स्तर से मिलने वाली स्वीकृति की सीमा, जो अभी 10 करोड़ रुपये तक है, उसे बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किया जाए। 50 से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री स्तर से और 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर से दी जाए, जिससे परियोजनाओं को समय पर वित्तीय मंजूरी मिले और काम तेजी से आगे बढ़े। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत करा लें। समयसीमा का पालन न करने वाले विभागों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी परियोजना की लागत में 15% से ज्यादा बढ़ोतरी होने पर विभाग कारण सहित पुनः अनुमोदन प्राप्त करे। उत्तर प्रदेश में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाएमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने राज्य की राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की व्यवस्था, एकमुश्त प्रावधान, डिजिटल वित्तीय सुधार, कोषागार प्रक्रियाएं, पेंशन व्यवस्था और विभागीय नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को सुदृढ़, पारदर्शी और रिजल्ट ओरिएंटेड वित्तीय प्रबंधन का आदर्श राज्य बनाना है। इसके लिए सभी विभाग समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू की जाए। राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान परमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अल्प-वेतनभोगी कर्मियों, जैसे आशा बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय हर माह तय तारीख को उनके बैंक खातों में पहुंच जाए। जिन योजनाओं में केंद्रांश मिलता है, वहां राज्य अपने मद से मानदेय समय पर जारी करे, ताकि किसी कर्मी को देरी न हो। यह व्यवस्था यथाशीघ्र लागू की जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का 1,10,555 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय देश में सबसे अधिक रहा। राज्य ने जितना शुद्ध लोक ऋण लिया, उससे भी ज्यादा राशि पूंजीगत कार्यों पर खर्च की, जो वित्तीय अनुशासन का मजबूत संकेत है। कुल व्यय का 9.39% निवेश पर खर्च कर उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा। राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और ऋण/जीएसडीपी अनुपात जैसे सभी संकेतक एफआरबीएम मानकों के अनुरूप रहे। वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल देयताएं घटकर जीएसडीपी के 27% पर आ गईं। नीति आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश का कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है और राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान पर है।

कांग्रेस का आरोप: फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग, मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश

कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) वाले राज्यों में फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इसके जरिये तय रणनीति के तहत योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक जैसा पैटर्न सामने आना बेहद गंभीर चिंता का विषय है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को लिखे पत्र में दावे और आपत्तियों के मौजूदा चरण के दौरान फार्म-7 के गलत इस्तेमाल पर विस्तार से आपत्ति जताई है। संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रहीपत्र में कहा गया है कि फार्म-7 का प्रयोग मौत या दोहराव जैसे ठोस तथ्यों पर आधारित आपत्तियों के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसका इस्तेमाल लक्षित तरीके से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस के मुताबिक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल समेत कई राज्यों में एक जैसी गतिविधियां सामने आई हैं। आरोप है कि पहले से छपे फार्म-7 भरे जा रहे हैं और चुनिंदा मतदाता समूहों के खिलाफ बड़ी संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। इसके बाद एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में ये फॉर्म जमा कराए जा रहे हैं। मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहापार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो इससे न केवल सत्ताधारी भाजपा को चुनावी लाभ मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में नागरिकों का मताधिकार भी छिन सकता है। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रक्रिया खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर वर्गों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर फार्म-7 के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कुछ राज्यों में इसका इस्तेमाल योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद खुलासा, एनसीपी के दोनों गुटों के विलय के इच्छुक

महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में एनसीपी प्रमुख का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अजित पवार के निधन के बाद से ही उनके राजनीतिक विरासत को लेकर अलग-अलग तरह से कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच अब उनके एक करीबी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वो जल्द एनसीपी के दोनों गुटों का विलय करने जा रहे थे। बारामती में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य और पवार परिवार के करीबी किरण गुजर ने कहा, “आज यहां अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन किया गया। ‘दादा’ की आखिरी इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय हो। सभी को एकजुट होना चाहिए। इस बारे में पूरे परिवार में बात हो रही थी। उनसे मेरी आखिरी फोन कॉल में उन्होंने मुझसे चुनाव से जुड़े कुछ कागजात मांगे थे।’ दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बतायादिवंगत अजित पवार के करीबी किरण गुजर ने दावा किया कि वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय के लिए उत्सुक थे, और यह जल्द ही होने वाला था। दिग्गज नेता के निधन के दो दिन बाद उनके किरण गुजर ने बताया कि उनसे यह बात खुद अजित पवार ने साझा की थी। 1980 के दशक के मध्य में राजनीति में आने से पहले से ही किरण गुजर अजित पवार से जुड़े हुए थे। वो दिवंगत नेता के करीबी सहयोगी और विश्वसनीय सहयोगी थे। अब किरण गुजर ने गुरुवार (29 जनवरी) को बातचीत में कहा कि अजित पवार ने बुधवार (28 जनवरी) को विमान दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बताया था। एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयारगुजर ने आगे कहा कि वह दोनों गुटों को मिलाने के लिए सौ प्रतिशत उत्सुक थे। उन्होंने मुझे पांच दिन पहले बताया था कि पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है। बता दें कि हाल के नगर निगम चुनावों के दौरान जिसमें दोनों गुटों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। अजित पवार ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों से यह भी कहा था कि वह अपनी पार्टी का NCP (SP) में विलय करना चाहते हैं। पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ने के बाद दोनों गुटों ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए भी गठबंधन जारी रखने का फैसला किया था। इतना ही नहीं गुजर ने दाने के साथ कहा कि अजित पवार के पास विलय और एकजुट एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार था।

78वीं शहीदी दिवस पर बापू को नमन, नेताओं ने अहिंसा और सत्य की राह को याद किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया और उनके महान विचारों को याद किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर बापू को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सिद्धांत पर जोर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से उन्होंने बापू को नमन करते हुए लिखा, “पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है। ‘अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते।’ (अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, अहिंसा ही सबसे बड़ा तप है और अहिंसा ही परम सत्य है, जिससे धर्म की स्थापना होती है।) शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलिवहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपिता को याद करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ लिखा, “महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं। वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफरत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। मगर राष्ट्रपिता ने हमें आजादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है। और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस। यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा।कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बापू के पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “वैश्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ परायी जाणे रे, पर-दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान ना आणे रे (सच्चा ईश्वर भक्त (वैष्णव) वही है, जो दूसरों के दुःख-दर्द को समझता है, दूसरों पर उपकार (भलाई) करता है, लेकिन अपने मन में किसी भी प्रकार का अहंकार (गर्व) नहीं आने देता है)” उन्होंने आगे लिखा, “जिस नफ़रत ने हमें बापू से जुदा किया, उसका तोड़ भी बापू की ही राह है… सत्य का उजाला, अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा।”

नेहरू और पटेल ने हिंदू महासभा और RSS की गतिविधियों की की कड़ी आलोचना, जयराम रमेश ने साझा किया

शुक्रवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने वर्ष 1948 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के दो पत्र सार्वजनिक किए। इन दोनों ही पत्रों में दोनों दिग्गज नेताओं ने हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों की कड़ी आलोचना की गई थी। जवाहरलाल नेहरू के संबोधन का लिंक भी शेयर कियादोनों नेताओं के पत्र को सार्वजनिक करते हुए जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘महात्मा गांधी की हत्या से दो दिन पहले जवाहरलाल नेहरू ने मुखर्जी को पत्र लिखा था, जबकि कुछ महीने बाद 18 जुलाई 1948 को सरदार पटेल ने भी उन्हें पत्र भेजा था। दोनों पत्रों में स्वयं को राष्ट्रवाद का संरक्षक बताने वालों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाया गया था। इस दौरान जयराम रमेश ने 30 जनवरी 1948 की रात महात्मा गांधी की हत्या के बाद ऑल इंडिया रेडियो पर दिए गए जवाहरलाल नेहरू के संबोधन का लिंक भी शेयर किया। महासभा की गतिविधियों की आलोचना कीजयराम रमेश ने अपने पोस्ट में यह लिखा कि नेहरू ने मुखर्जी को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि हिंदू महासभा ने पुणे, अहमदनगर और दिल्ली में प्रतिबंध आदेशों की अवहेलना करते हुए बैठकें की थीं। इन बैठकों के दौरान कुछ भाषणों में महात्मा गांधी को ‘देश के लिए बाधा’ बताया गया और उनके शीघ्र निधन की बात कही गई थी। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आरएसएस की गतिविधियों को और भी अधिक आपत्तिजनक बताया और कहा कि सरकार के पास संगठन से जुड़ी गंभीर जानकारी उपलब्ध है। इसके अलावा रमेश ने सरदार पटेल के पत्र का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों की आलोचना की थी।

गांधी पुण्यतिथि पर राहुल गांधी, ‘बापू व्यक्ति नहीं, भारत की अमर आत्मा “जानें और क्या कुछ कहा”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि वे एक सोच और जीवन जीने का तरीका हैं। राहुल गांधी के अनुसार, इतिहास में कई बार साम्राज्यवादी ताकतों, नफरत की विचारधारा और सत्ता के घमंड ने इस सोच को मिटाने की कोशिश की, लेकिन वे हर बार नाकाम रहे। राहुल गांधी ने बापू को “भारत की अमर आत्मा” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ एक पोस्ट में कहा, “महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं। वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफरत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। मगर राष्ट्रपिता ने हमें आजादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस। यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। ड्रा ने भी बापू के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलिकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मौके पर बापू को याद किया। उन्होंने कहा कि जिस नफरत ने बापू को हमसे अलग किया, उसका समाधान भी बापू के दिखाए रास्ते में ही मिलता है। उन्होंने सत्य की रोशनी, अहिंसा की शक्ति और प्रेम की करुणा को समाज के लिए सबसे जरूरी बताया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बापू के बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके मूल्य भारत की रग-रग में बसेइस अवसर पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इतिहास के कुछ दस्तावेजों का जिक्र किया। उन्होंने 1948 में जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के उन पत्रों को याद किया, जिनमें उन्होंने हिंदू महासभा और आरएसएस की गतिविधियों की आलोचना की थी। रमेश ने वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग आज भी बापू की विचारधारा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने नेहरू के उस ऐतिहासिक भाषण को भी साझा किया जो उन्होंने बापू की हत्या के बाद रेडियो पर दिया था। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने भी बापू को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 1948 में आज ही के दिन दुनिया को रास्ता दिखाने वाली महान आत्मा को हमसे छीन लिया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि आज भी कुछ लोग गांधी जी को देश की यादों से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग भले ही बापू को छोटा दिखाने की कोशिश करें, लेकिन उनके मूल्य भारत की रग-रग में बसे हैं।

बजट सत्र से पहले मोदी पर कांग्रेस का हमला जयराम रमेश बोले, संसद को पृष्ठभूमि बनाकर देते हैं ‘पाखंड से भरा देश के नाम संदेश’

कांग्रेस ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बजट सत्र पर उनकी टिप्पणियों को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे प्रत्येक सत्र की शुरुआत से पहले “देश को अपना वही पाखंडी संदेश” देते हैं। आज का प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा है। कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “वह (प्रधानमंत्री) राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए सर्वदलीय बैठकें नहीं बुलाएंगे और न ही उनकी अध्यक्षता करेंगे।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता महत्वाकांक्षी भारत के लिए है। उन्होंने निर्माताओं से आग्रह किया कि वे उनके लिए खुल रहे नए बाजारों से लाभ उठाएं। मोदी ने यह भी कहा कि देश लंबे समय से लंबित समस्याओं से उबर रहा है और दीर्घकालिक समाधानों की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब समाधान खोजने का समय आ गया है, न कि बाधाएं पैदा करने का। उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों तक कल्याणकारी योजनाओं की अंतिम-मील डिलीवरी सुनिश्चित करने पर भी काम कर रही है। बजट सत्र की शुरुआत में संसद भवन परिसर में अपने पारंपरिक संबोधन में उन्होंने पत्रकारों से कहा, “देश के सर्वांगीण विकास के लिए कदम उठाते समय हमारी प्राथमिकता हमेशा मानव-केंद्रित रहती है।” उन्होंने आगे कहा कि आत्मविश्वास से भरा भारत दुनिया के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है। पृष्ठभूमि बनाकर अपना वही पाखंड से भरा ‘देश के नाम संदेश’रमेश ने दावा किया कि वह अचानक अंतिम समय में विधेयक पेश करवाएंगे और आवश्यक विधायी जांच के बिना उन्हें संसद से पारित करवा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि मोदी संसद में बैठकर विपक्षी नेताओं की चिंताओं का जवाब नहीं देंगे, बल्कि दोनों सदनों में चुनावी रैलियों में भाषण देंगे। आगे उन्होंने कहा “प्रत्येक सत्र की शुरुआत से पहले, वह संसद को पृष्ठभूमि बनाकर अपना वही पाखंड से भरा ‘देश के नाम संदेश’ देंगे। आज का प्रदर्शन इसी श्रृंखला का हिस्सा है,”

भारत की ग्रोथ मजबूत, 7% तक विकास दर का अनुमान, लेकिन कमजोर रुपया और ग्लोबल उथल-पुथल बनी चुनौती

संसद में आज पेश किए गए ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26’ ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मिली-जुली तस्वीर पेश की है। सरकार ने साफ किया है कि अगले वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, सर्वे में आगाह किया गया है कि कमजोर होता रुपया और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतें महंगाई को थोड़ी हवा दे सकती हैं। अच्छी खबर यह है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी के दाम घट रहे हैं। साथ ही, अच्छी फसल के कारण खाने-पीने की चीजों के दाम भी काबू में रहने की उम्मीद है, जो महंगाई को ज्यादा बढ़ने नहीं देंगे। कुल मिलाकर आर्थिक सर्वे का संदेश साफ है- भारत की ग्रोथ स्टोरी मजबूत है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनी रहेगी। हालांकि, कमजोर रुपया और ग्लोबल मार्केट की उथल-पुथल के बीच सरकार को फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे। राहत मिलने की उम्मीदसर्वे और हालिया व्यापार समझौतों का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर भी दिखने वाला है। भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारतीय ऑटो सेक्टर सतर्क हो गया है। यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क 110% से घटकर 10% होने जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, इससे टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी देसी कंपनियों को यूरोपीय कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। महंगाई के काबू में रहने और ग्रोथ को सहारा देने के लिए आरबीआई अगले हफ्ते ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। यह इस साइकिल की आखिरी कटौती हो सकती है, जिससे होम लोन और कार लोन लेने वालों को थोड़ी और राहत मिलने की उम्मीद है।

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शशि थरूर ने तोड़ी चुप्पी, कांग्रेस में कलह की अटकलों पर लगा विराम

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर और राहुल गांधी के बीच एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “सब ठीक है।” उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। थरूर ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुई इस बातचीत को “बहुत ही रचनात्मक और सकारात्मक” बताया। उन्होंने साफ किया कि अब वे और पार्टी नेतृत्व एक ही बात पर सहमत हैं। पिछले कुछ महीनों से शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव की खबरें आ रही थीं। थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उनके कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि वे 17 साल से कांग्रेस में हैं और उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। भाजपा में जाने की अफवाहें उड़ने लगींविवाद की शुरुआत तब हुई जब थरूर पार्टी की एक अहम बैठक में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि वे एक साहित्य उत्सव में गए थे और इसकी जानकारी नेतृत्व को पहले ही दे दी गई थी। इसके अलावा, कोच्चि में पार्टी के एक कार्यक्रम में उनके साथ हुए खराब व्यवहार की खबरों पर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी। पार्टी के भीतर असली बेचैनी तब बढ़ी जब पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकट प्रबंधन की तारीफ की थी। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद भाजपा ने थरूर को एक अंतरदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस दल में कांग्रेस का कोई और नेता शामिल नहीं था, जिससे उनके भाजपा में जाने की अफवाहें उड़ने लगीं। वंशवादी राजनीति की आलोचना कीतनाव तब और बढ़ गया जब थरूर ने प्रधानमंत्री के एक भाषण की सोशल मीडिया पर सराहना की और “भारतीय राजनीति एक पारिवारिक व्यवसाय है” शीर्षक से एक लेख लिखा। इस लेख में उन्होंने वंशवादी राजनीति की आलोचना की थी, जिससे कांग्रेस नेतृत्व काफी नाराज हुआ था। हालांकि, थरूर ने हमेशा यही कहा कि उनकी टिप्पणियां किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से प्रेरित थीं। उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री की तारीफ करने का मतलब यह नहीं है कि वे भाजपा में शामिल हो रहे हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता का संदेश है। अब राहुल गांधी से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद सुलझ गए हैं।