"National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |    

गंभीर ने रोहित शर्मा के मजे लिए, बोले “सबको लगा आज फेयरवेल मैच था ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज 2-0 से जीती

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जा रही है जिसमें रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी हिस्सा लेरहे हैं। सीरीज की शुरुआत से ही इस बात की अटकलें लगाई जा रही है कि रोहित और कोहली की यह आखिरी सीरीज हो सकती है। हालांकि, इसेलेकर ना तो इन दोनों खिलाड़ियों ने कोई आधिकारिक बयान दिया है और ना ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से कुछ कहागया है। अब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें मैच के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर रोहित के मजे ले रहे हैं।रोहित का बल्लाऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में खामोश रहा था और वह सस्ते में आउट हो गए थे। लेकिन उन्होंने एडिलेड में खेले गए दूसरे मैच में शानदारबल्लेबाजी की और 73 रनों की पारी खेली। रोहित ने इस दौरान श्रेयस अय्यर के साथ मिलकर शतकीय साझेदारी की जिससे भारत ने ऑस्ट्रेलिया केसामने 265 रनों का लक्ष्य रखा था। हालांकि, रोहित की यह मेहनत टीम के काम नहीं आ सकी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने आठ विकेट खोकर लक्ष्यहासिल कर लिया। रोहित के मजे लिएमैच के बाद जब टीम होटल पहुंची तो गंभीर ने रिटायरमेंट की अटकलों को लेकर रोहित के मजे लिए। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में दिखरहा है कि जब रोहित टीम होटल पहुंचे तो उनके पीछे गंभीर आ रहे थे। गंभीर ने रोहित से कहा, ‘रोहित सबको लग रहा था कि आज फेयरवेल मैच था, एक फोटो तो लगा दो।’ इस पर पूर्व भारतीय कप्तान अपनी हंसी नहीं रोक सके। यह वीडियो देखकर फैंस काफी खुश हुए। तीन मैचों की सीरीज गंवा दीभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज की बात करें तो भारतीय टीम ने तीन मैचों की सीरीज गंवा दी है। भारत को पर्थ और एडिलेड में खेले गएमैच में हार मिली थी और अब टीम का अंतिम वनडे शनिवार को सिडनी में खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को दूसरे वनडे मैच में दो विकेट सेहराकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। भारतने रोहित शर्मा और श्रेयस अय्यर के अर्धशतकों से 50 ओवर में नौ विकेट पर 264 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया के लिए मैथ्यू शॉर्ट और कूपरकोनोली ने अर्धशतक लगाए जिससे टीम ने 46.2 ओवर में आठ विकेट पर 265 रन बनाकर मैच जीता।

कर्पूरी ठाकुर के जन्मस्थान पहुंचे पीएम मोदी, कांग्रेस ने कसा तंज पूछा, “क्या जनसंघ ने 1979 में उनकी सरकार नहीं गिराई थी?”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार दौरे पर हैं और विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे। पीएम मोदी बिहार के समस्तीपुर मेंसमाजवादी नेता और पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर के जन्मस्थान जाएंगे और समस्तीपुर और बेगूसराय में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। पीएम मोदीके पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर के जन्मस्थान जाने पर कांग्रेस ने तंज कसा है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या ये सच नहीं है किजनसंघ ने ही अप्रैल 1979 में बिहार में कर्पूरी ठाकुर की सरकार गिराई थी? प्रधानमंत्री और उनकी ‘ट्रबल इंजन सरकारकांग्रेस ने ये भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनकी ‘ट्रबल इंजन सरकार’ ने बिहार में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी औरआर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए कुछ नहीं किया। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश नेसोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘क्या ये मानी हुई बात नहीं है कि जनसंघ, जिससे भाजपा बनी, ने अप्रैल 1979 में बिहार में कर्पूरीठाकुर की सरकार गिरा दी थी क्योंकि तत्कालीन सीएम कर्पूरी ठाकुर ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया था?’ भारत रत्न सम्मान से सम्मानितगौरतलब है कि मोदी सरकार में कर्पूरी ठाकुर को बीते साल भारत रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी ने आज बिहार दौरे को लेकरसोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को सादर नमन! आज समस्तीपुर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्यप्राप्त होगा। फिर दोपहर करीब 12:15 बजे वहां के अपने परिवारजनों से संवाद का सुअवसर मिलेगा। इसके बाद लगभग 2 बजे बेगूसराय कीजनसभा में अपने भाई-बहनों का आशीर्वाद प्राप्त करूंगा। बिहार की जनता-जनार्दन का जोश और उत्साह बताता है कि इस बार के विधानसभा चुनावोंमें भी भाजपा-एनडीए को प्रचंड जीत मिलने जा रही है।’ कांग्रेस नेता ने लिखा कि ‘क्या ये सच नहीं है कि उस समय संघ और जनसंघ के नेताओं नेकर्पूरी ठाकुर को सबसे ज्यादा गालियां दी थीं?’ जयराम रमेश ने पूछा, ‘क्या यह सच नहीं है कि 28 अप्रैल, 2024 को उन्होंने खुद जाति जनगणनाकी मांग करने वालों को ‘शहरी नक्सली’ कहा था और संसद (20 जुलाई 2021) और सुप्रीम कोर्ट (21 सितंबर 2021) दोनों में उनकी सरकार नेजाति जनगणना को साफ तौर पर खारिज कर दिया था?’

प्रधानमंत्री मोदी ने 17वें रोजगार मेले में बांटे 51 हजार नियुक्ति पत्र, कहा युवा सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कई यूरोपीय देशों के साथ निवेश साझेदारी की है, जिससे हजारों नए रोजगार के मौके पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमनेनिवेश को बढ़ावा देने और स्टार्ट-अप्स और MSME को सपोर्ट करने के लिए ब्राजील, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और कनाडा जैसे देशों के साथ कईसमझौते भी किए हैं।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित 17वें रोजगार मेले में 51 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्रबांटें। प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम से जुड़े। इस दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवा वर्ग कासशक्तिकरण उनकी सरकार की प्राथमिकता है। नए रोजगार के मौके पैदा हुएप्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कई यूरोपीय देशों के साथ निवेश साझेदारी की है, जिससे हजारों नए रोजगार के मौके पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमनेनिवेश को बढ़ावा देने और स्टार्ट-अप्स और MSME को सपोर्ट करने के लिए ब्राजील, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और कनाडा जैसे देशों के साथ कईसमझौते भी किए हैं। ये सहयोग निर्यात को मजबूत करेंगे और भारत के युवाओं के लिए विकास और अवसरों के नए रास्ते खोलेंगे।’ रोजगार मेले मेंविभिन्न सरकारी विभागों में नौकरियों के लिए 51,000 से ज्यादा नियुक्ति पत्र बांटे गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भर में रोजगार मेलों के जरिए अबतक 11 लाख से ज्यादा नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं।

यूएन की 80वीं सालगिरह पर बोले एस. जयशंकर बहुप्रतिक्षेप सहयोग में विश्वास बनाए रखना होगा, संगठन में सुधार की सख्त जरूरत

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बहुपक्षीय सहयोग में विश्वास बनाए रखने की जरूरत परजोर दिया। साथ ही संगठन के सामने आने वाली चुनौतियों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज दुनिया सामाजिक-आर्थिक प्रगति, व्यापारिकअसमानताओं और आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता जैसी समस्याओं से जूझ रही है। जयशंकर ने 80वीं वर्षगांठ पर जारी स्मारक डाक टिकट के विमोचनसमारोह में कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की बात केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, तो विकास और सामाजिक-आर्थिक प्रगति कीस्थिति और भी चिंताजनक है। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी 2030) की गति धीमी पड़ना ग्लोबल साउथ की कठिनाइयों का संकेत है। दुनिया में कई संघर्ष चल रहेएस जयशंकर ने आगे कहा कि दुनिया में कई संघर्ष चल रहे हैं, जिनसे न केवल मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि वैश्विक समुदाय की स्थिरता भीखतरे में है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ग्लोबल साउथ ने इसका दर्द झेला है, जबकि विकसित देश खुद को प्रभाव से अलग रख रहे हैं। विदेश मंत्रीने कहा कि हालांकि समय कठिन है, लेकिन बहुपक्षीयता के प्रति हमारा विश्वास मजबूत रहना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता है, लेकिन हमें इसे और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रखने होंगे। एस जयशंकर ने भारत की वैश्विक शांति में भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा किभारत हमेशा शांति स्थापना अभियानों में सक्रिय रहा है और इसे अपनी जिम्मेदारी मानता है। जयशंकर ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘चीफ्सऑफ आर्मी स्टाफ कॉन्क्लेव’ का भी उल्लेख किया, जिसमें 30 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सुरक्षा और विकास के आदर्शों के प्रति हमेशा समर्पित रहाविदेश मंत्री ने कहा कि भारत शांति, सुरक्षा और विकास के आदर्शों के प्रति हमेशा समर्पित रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमारा लक्ष्यएक बेहतर और सुरक्षित दुनिया बनाना है। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी 80वीं वर्षगांठ पर दुनिया से एकजुट होकर वैश्विकचुनौतियों का सामना करने का आह्वान किया। इसके साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा किसंगठन की निर्णय लेने की प्रक्रिया न तो उसके सदस्य देशों का सही प्रतिनिधित्व करती है और न ही वैश्विक प्राथमिकताओं को संबोधित करती है।उन्होंने कहा कि यूएन की बहसें अब बेहद ध्रुवीकृत हो गई हैं और उसका कामकाज ठप पड़ता जा रहा है। जयशंकर ने कहा कि किसी भी सार्थक सुधारको उसकी अपनी प्रक्रिया के जरिये ही रोका जा रहा है

भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे का 70 वर्ष की उम्र में निधन, रचनात्मकता के एक युग का अंत

भारतीय विज्ञापन जगत के प्रखर व्यक्तित्व और रचनात्मक क्रांति के वाहक पीयूष पांडे का गुरुवार को 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें भारतीयविज्ञापन का आत्मा और चेहरा माना जाता था। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। देश के बड़े दिग्गज नेताओं समेत कई लोगों नेउनके निधन पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा किपांडे की रचनात्मकता की हमेशा प्रशंसा की जाती थी और उन्होंने विज्ञापन और संचार की दुनिया में अभूतपूर्व योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वेउनके साथ बिताए गए पलों को हमेशा याद रखेंगे। उनके निधन से वे गहरे दुखी हैं और उनके परिवार एवं प्रशंसकों के साथ अपने विचार साझा किए।ओम शांति। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर शोक व्यक्त कियापीयूष पांडे के निधन पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर शोक व्यक्त किया। उन्होंने पीयूष पांडे कोभारतीय विज्ञापन के दिग्गज और प्रेरक बताया और कहा कि उन्होंने रोजमर्रा की भाषा, सटीक हास्य और सच्ची गर्मजोशी को विज्ञापन में बखूबी पेशकिया। उन्होंने पांडे के परिवार और पूरे रचनात्मक समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी पीयूष पांडे के निधनपर शोक जताया। उन्होंने उन्हें विज्ञापन जगत का ‘फेनोमेनन’ बताया, जिन्होंने कहानी कहने की कला को नई परिभाषा दी। गोयल ने कहा कि उनकेविचार और कहानियां अमर हैं। वे न केवल एक महान विज्ञापन विशेषज्ञ थे बल्कि सच्चे मित्र भी थे, और उनके जाने से गहरा खालीपन महसूस हो रहाहै। एक युग शांतिपूर्वक समाप्त हो गयाभाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि पीयूष पांडे के जाने से रचनात्मकता और प्रतिभा का एक युग शांतिपूर्वक समाप्त हो गया है। उनके प्रयोग औरकाम आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे। ठाकुर ने पांडे को भारतीय विज्ञापन के वास्तुकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तित्वबताया। वहीं उदय कोटक ने लिखा कि पांडे ने 2003 में कोटक महिंद्रा बैंक के लिए ‘कॉमन सेंस’ अभियान शुरू किया और हर बार अपनी रचनात्मकसोच को भारतीय संदर्भ में पिरोया। वे सरलता और विनम्रता के साथ बेहद अलग सोच रखने वाले व्यक्ति थे।

तीन दशक बाद बड़ा बदलाव, सीएम योगी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि की

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग के विभागीय अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक की वृद्धि किए जाने का निर्णयलिया है। कहा कि बदलावों से विभागीय अधिकारियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। उच्च स्तर पर अनुमोदन की आवश्यकता घटनेसे निविदा, अनुबंध गठन एवं कार्यारंभ की प्रक्रिया में गति आएगी। यह सुधार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिताको बढ़ाने में सहायक होगा। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकार वर्ष1995 में निर्धारित किए गए थे। इस बीच निर्माण कार्यों की लागत में पांच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के अनुसार वर्ष1995 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग 5.52 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यकमुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए और परियोजनाओं काक्रियान्वयन समयबद्ध रूप से किया जा सके। अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री को सिविल, विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिएवित्तीय अधिकारों की वर्तमान व्यवस्था की जानकारी दी। विमर्श के उपरांत निर्णय लिया गया कि सिविल कार्यों के लिए अधिकारियों के वित्तीयअधिकारों की सीमा अधिकतम पांच गुना तक व विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए कम से कम दो गुना तक बढ़ाई जाएगी। स्वीकृति का अधिकार होगामुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार, मुख्य अभियंता को अब 2 करोड़ के स्थान पर 10 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार होगा। अधीक्षणअभियंता को 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार दिया जाएगा।अधिशासी अभियंता के वित्तीय अधिकार 40 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ किए जाएंगे। सहायक अभियंता को भी सीमित दायरे में टेंडर स्वीकृति एवं छोटेकार्यों की अनुमति देने के अधिकार बढ़ाए जाएंगे। बता दें कि यह पुनर्निर्धारण तीन दशकों के बाद होने जा रहा है।

पीयूष गोयल का बयान भारत जल्दबाजी या दबाव में नहीं करेगा व्यापार समझौते, राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत जल्दबाजी में या बंदूक की नोक पर व्यापार समझौते नहीं करता। उन्होंने कहा किभारत यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका सहित अन्य देशों व क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। जर्मनी मेंआयोजित बर्लिन डायलॉग के दौरान बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कहा, “हम यूरोपीय संघ के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं। हम अमेरिका सेबात कर रहे हैं, लेकिन हम जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करते और न ही हम कोई समय सीमा तय करके या बंदूक तानकर कोई समझौता करते हैं. डॉयलॉग में भाग लेने के लिए फिलहाल बर्लिनपीयूष गोयल डॉयलॉग में भाग लेने के लिए फिलहाल बर्लिन में हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते को दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत कभी भी जल्दबाजी में या तात्कालिक आवेश में निर्णय नहीं लेता। उन्होंने कहा कि भारत जरूरत से अधिक टैरिफ से निपटने केलिए नए बाजारों की तलाश कर रहा है। गोयल ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत ने कभी भी राष्ट्रीय हित के अलावा किसी अन्य आधार पर यहनिर्णय लिया है कि उसके मित्र कौन होंगे… और यदि कोई मुझसे कहता है कि आप यूरोपीय संघ के मित्र नहीं हो सकते, तो मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगाया कोई कल मुझसे कहता है कि मैं केन्या के साथ काम नहीं कर सकता, यह स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने कहा कि किसी देश से कोई विशेष उत्पादखरीदने का निर्णय पूरी दुनिया को लेना होगा। ये टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिका भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने कादबाव बना रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल में पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन की प्रतिमा का अनावरण किया, आदर्शों को बताया पीढ़ियों के लिए प्रेरणा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों केरल के दौरे पर हैं। इस दौरान गुरुवार को उन्होंने केरल राजभवन परिसर में भारत के पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन कीप्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा भारत के पहले दलित राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि स्वरूप स्थापित की गई है। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथकोविंद, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन मौजूद थे। कार्यक्रम मेंराष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि केआर नारायणन का जीवन साहस, मेहनत और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने शिक्षा की शक्ति के बल परदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचकर यह दिखाया कि अवसर और दृढ़ निश्चय से सब कुछ संभव है। देश की सेवा कीमुर्मू ने कहा कि राजनीति में आने से पहले नारायणन ने भारतीय विदेश सेवा में शानदार करियर बनाया और हमेशा भारत के मूल्यों शांति, न्याय औरसहयोग को ईमानदारी से निभाया। राष्ट्रपति ने बताया कि नारायणन न सिर्फ भारत के राष्ट्रपति रहे, बल्कि उन्होंने उपराष्ट्रपति के रूप में भी देश की सेवाकी। उन्होंने कहा कि नारायणन हमेशा केरल से जुड़े रहे और अपने राज्य की सामाजिक प्रगति, शिक्षा और समानता की भावना से प्रेरणा लेते रहे। उनकेलिए शिक्षा सभी का अधिकार थी, न कि कुछ लोगों का विशेषाधिकार। पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगीमुर्मू ने इस दौरान यह भी कहा कि नारायणन ने नैतिकता, ईमानदारी, करुणा और लोकतांत्रिक मूल्यों की विरासत छोड़ी है, जो आने वाली पीढ़ियों कोप्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि आज जब हम उन्हें याद कर रहे हैं, तो उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत के निर्माणकी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का धन्यवाद किया, जिनके मार्गदर्शन में यह पहलशुरू की गई थी। गौरतलब है कि केआर नारायणन ने 1997 से 2002 तक भारत के 10वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। उनका निधन 9 नवंबर2005 को 85 वर्ष की आयु में हुआ था।

लंदन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर फ्रांसेस्का ओरसिनी के निर्वासन पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- मोदी सरकार की विद्वानों के प्रति दुश्मनी

वीजा शर्तों के कथित उल्लंघन के कारण नई दिल्ली स्थित आईजीआई हवाई अड्डे से निर्वासित की गईं लंदन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर फ्रांसेस्काओरसिनी के मामले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि ओरसिनी को देश से बाहर करने का फैसला आव्रजनसंबंधी औपचारिकताओं के चलते नहीं किया गया बल्कि यह आजाद, गंभीर सोच वाले विद्वानों के प्रति मोदी सरकार की दुश्मनी को दर्शाता है। लंदनयूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) में एमिरेट्स प्रोफेसर और हिंदी की विद्वान फ्रांसेस्का ओरसिनी को सोमवार कोहांगकांग से नई दिल्ली आने के तुरंत बाद निर्वासित कर दिया गया। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार वीजा शर्तों के उल्लंघन के कारणओरसिनी को मार्च 2025 से ‘काली सूची’ में डाला गया था। जिसके चलते उन्हें हवाई अड्डे से ही वापस भेज दिया गया। कांग्रेस महासचिव (संचारप्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि दक्षिण एशियाई साहित्य की प्रसिद्ध विद्वान को पांच साल का वैध वीजा होने के बावजूद भारत में प्रवेश से रोक दियागया। सामूहिक समझ को समृद्ध कियासोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में जयराम रमेश ने लिखा कि ‘हिंदी और उर्दू साहित्यिक संस्कृतियों पर ओरसिनी के काम ने भारत की सांस्कृतिकविरासत की हमारी सामूहिक समझ को समृद्ध किया है, जिससे भक्त ब्रिगेड को एलर्जी है।’ रमेश ने आरोप लगाया, ‘उन्हें देश से बाहर करने का फैसलाआव्रजन संबंधी औपचारिकता का मामला नहीं है, बल्कि मोदी सरकार की आजाद, गंभीर सोच वाले, पेशेवर विद्वानों के प्रति दुश्मनी की निशानी है।’ भारतीय साहित्य की एक महान विद्वान बतायाओरसिनी के निर्वासन पर प्रतिक्रिया देते हुए, इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने ओरसिनी को भारतीय साहित्य की एक महान विद्वान बताया। उन्होंने लिखाकि उनके कामों ने हमारी अपनी सांस्कृतिक विरासत की समझ को समृद्ध रूप से बढ़ाया है। गुहा ने एक्स पर लिखा, ‘बिना किसी कारण के उन्हेंनिर्वासित करना एक असुरक्षित, विक्षिप्त और यहां तक कि मूर्ख सरकार की निशानी है।’ एक अन्य इतिहासकार मुकुल केसवन ने कहा था कि विद्वानोंऔर विद्वत्ता के प्रति एनडीए सरकार की दुश्मनी देखने लायक है। गुहा ने एक्स पर लिखा, ‘बिना किसी कारण के ओरसिनी को निर्वासित करना एकअसुरक्षित, विक्षिप्त और यहां तक कि मूर्ख सरकार की निशानी है।’ एक अन्य इतिहासकार मुकुल केसवन ने कहा था कि विद्वानों और विद्वत्ता के प्रतिएनडीए सरकार की दुश्मनी देखने लायक है।

महागठबंधन की महिला-युवा केंद्रित रणनीति, तेजस्वी यादव का लवकुश और जीविका दीदियों को साधने का बड़ा दांव

बीते चुनाव में मामूली अंतर से सत्ता में आने से चूके महागठबंधन ने इस बार जदयू के कोर वोट बैंक महिला वर्ग और लवकुश समीकरण को तोड़ने कीयोजना बनाई है। राजद ने पहले थोक के भाव महिलाओं को टिकट बांटे। अब करीब दो लाख जीविका दीदियों को सत्ता में आने पर स्थायी करने वप्रति माह 30,000 रुपये वेतन देने की घोषणा की है। विधानसभा चुनाव में तेजस्वी की रणनीति युवा, महिला वर्ग को साधने व जदयू के लवकुशसमीकरण को झटका देने की है। युवाओं के लिए वह हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी की घोषणा कर चुके हैं। अब उन्होंने संविदा कर्मियों कोनियमित करने का एलान किया है। पार्टी को लगता है कि इनसे युवाओं में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी का आकर्षण कम होगा। विपक्ष को दबाव में ला दिया थापिछले कई चुनावों में नीतीश को महिला वर्ग के साथ 8 फीसदी आबादी वाले लवकुश (कुर्मी-कुशवाहा) का मजबूत समर्थन मिलता रहा है। राजदइसे ही तोड़ना चाहता है। इस क्रम में उसने पहली बार जदयू के 13 के मुकाबले 24 महिलाओं व कुशवाहा बिरादरी के 11 लोगों को टिकट दिया।बीते तीन चुनाव से राज्य में आधी आबादी सशक्त वोट बैंक के रूप में उभरी है। पंचायत चुनावों में 50 फीसदी और सरकारी नौकरी में 50 फीसदीआरक्षण, छात्राओं के लिए अलग योजना के कारण इस वर्ग का नीतीश के प्रति आकर्षण रहा है। चुनाव से ठीक पहले नीतीश ने सीएम महिलास्वरोजगार योजना के तहत 1.21 करोड़ महिलाओं को दस हजार रुपये की सहायता देने के साथ सामाजिक न्याय पेंशन योजना में एकमुश्त 700 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी, जीविका दीदियों का मानदेय बढ़ा कर विपक्ष को दबाव में ला दिया था। तेजस्वी ने इसकी काट के लिए सत्ता में आने परमाई बहन योजना के तहत प्रतिमाह 2,500 रुपये देने की घोषणा की है। चुनावी वादे क्रूर मजाकभाजपा ने तेजस्वी पर अव्यावहारिक चुनावी वादों से जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, तेजस्वी केचुनावी वादे क्रूर मजाक हैं। इतने बड़े वादों के पीछे उनकी नीयत क्या है? जबकि बिहार सरकार के मौजूदा बजट से कई गुना ज्यादा राशि की जरूरतपड़ेगी। लोग महागठबंधन की चालबाजी में न आएं। तेजस्वी आप बिहार की जनता को बेवकूफ बनाना बंद कीजिए। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान नेसीट बंटवारे को लेकर जारी खींचतान के लिए महागठबंधन पर निशाना साधा। कहा कि सियासी दलों के बीच यह टकराव गठबंधन के पूरी तरह ध्वस्तहोने का संकेत है। पासवान ने कहा, राहुल गांधी कहां हैं? क्या राहुल और तेजस्वी यादव की नैतिक जिम्मेदारी नहीं थी कि वे साथ बैठकर गठबंधन मेंआने वाली बाधाओं को दूर करें? यह कांग्रेस की गंभीरता की कमी को दर्शाता है। वे चाहे कुछ भी करें। उन्होंने कहा, हकीकत यही है कि 14 नवंबर केबाद एनडीए बिहार में सरकार बनाएगा।