"National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |     "National   Voice  -   खबर देश की, सवाल आपका"   -    *Breaking News*   |    

बिहार मंत्रिमंडल में बड़ा सरप्राइज़, बिना चुनाव लड़े उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश मंत्री बने, जींस–शर्ट में ली शपथ

बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद बिहार में अब नई सरकार का गठन हो चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ 27 मंत्रियों ने मंत्रिपद कीशपथ ली है। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। नीतीश कुमार के साथ जिन 26 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें से14 भाजपा से, 9 जदयू से, 2 लोजपा से और एक-एक हम और रालोमो से हैं। एनडीए की इस कैबिनेट में नौ नए चेहरों को शामिल किया गया है।इनमें लोजपा के संजय कुमार सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने महुआ विधानसभा सीट पर लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव को हराया था। 26 मंत्रियोंमें से सिर्फ़ एक मुस्लिम सदस्य है। इस कैबिनेट में एक नाम ऐसे भी है जिसे बिना चुनाव लड़े ही शपथ दिलाई गई है। उस मंत्री का नाम है दीपकप्रकाश। दीपक प्रकाश को एनडीए में शामिल रालोमो के नेता उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। रालोमो को एनडीए में चुनाव लड़ने के लिए छह सीट मिलीथी जिसमें से वह चार सीट जीतने में सफल रहे। उपेंद्र कुशवाहा ने अपने विधायकों पर विश्वास न जताकर बेटे को मंत्री पद दिलवाया है। दीपकप्रकाश ने बिहार चुनाव नहीं लड़ा है। वह कहीं से विधायक नहीं है। उन्हें मंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर विधानसभा और विधानपरिषद का सदस्य बनना होगा। 2019 में दीपक प्रकाश की शादी हुई थी। मंत्रिमंडल की छवि देखने को मिलीदीपक प्रकाश इकलौते ऐसे मंत्री दिखे जो जींस-शर्ट पहनकर शपथ लेने पहुंचे। आमतौर पर मंत्री पद की शपथ लेने नेता कुर्ता पहनकर पहुंचते हैं।लेकिन उनके परिधान में युवा मंत्रिमंडल की छवि देखने को मिली। सफेद रंग की शर्ट और नीले रंग की जींस पहनकर पहुंचे दीपक प्रकाश युवाओं केमंत्रिमंडल में शामिल होने का संदेश दे रहे थे। उनके माथे पर तिलक भी लगा हुआ था। इसके बाद वह प्रधानमंत्रा नरेंद्र मोदी से भी मिले। रालोमो नेबिहार में 6 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें बाजपट्टी, मधुबनी, सासाराम, दिनारा, उजियारपुर और पारु शामिल हैं। इनमें सेबाजपट्टी से रामेश्वर कुमार महतो, मधुबनी से माधव आनंद, सासाराम से स्नेहलता और दिनारा से आलोक कुमार सिंह ने जीत हासिल की। सासाराम सेरालोमो की प्रत्याशी स्नेहलता पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी है। नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआउपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता पहली बार सासाराम ने विधायक चुनी गई हैं। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सदस्य हैं। वह लोकसभा सांसद भी रह चुकेहैं। 2000 में जंदाहा सीट से विधानसभा पहुंचे थे। वह बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। अब उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश कोराजनीति में प्रवेश कराया है। दीपक ने बिना चुनाव लड़े मंत्री पद की शपथ ली है। आज बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआ। इसमें मुख्यमंत्रीनीतीश कुमार समेत कुल 27 मंत्रियों ने शपथ ली। इसमें एक ऐसा नाम भी है जो बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बन गया।

पटना में एनडीए सरकार का भव्य आगाज़, गांधी मैदान में PM मोदी का ‘गमछा मोमेंट’ बना समारोह की सबसे बड़ी चमक

पटना के गांधी मैदान में नए एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भव्यता देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राजनीतिक दिग्गजमौजूद थे। समारोह में पीएम द्वारा ‘गमछा’ लहराने का क्षण सबसे बड़ा आकर्षण बन गया, जिससे करीब तीन लाख लोगों की भीड़ का एक हिस्साजोरदार उत्साह में झूम उठा। कार्यक्रम में कलाकारों ने लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत कर मंच पर मौजूद सितारों की चमक में और इजाफा किया।मंच पर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, ओडिशा, हरियाणातथा दिल्ली के मुख्यमंत्री मौजूद थे। जैसे ही जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में दसवीं बार शपथ ली, प्रधानमंत्री ने भीड़ कीओर ‘गमछा’ लहराया, जिसके बाद तालियों और जयकारों की गूंज तेज हो गई। मिथिला के लोकनृत्य सामा-चकेवा से हुईशपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। इससे पहले मिथिला क्षेत्र के लोकप्रिय लोकनृत्य ‘सामा-चकेवा’ की प्रस्तुति महिलाओं के एक दलने दी, जो भाई-बहन के प्रेम का उत्सव माना जाता है। इसके जरिए आगंतुकों का स्वागत किया गया। भाजपा और जदयू जो एनडीए की दो प्रमुखसहयोगी पार्टियां हैं ने क्रमशः 89 और 85 सीटें जीतीं। दोनों ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा था। बाद में विभिन्न महिला कलाकारों के समूहों नेराज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक गीत और नृत्य पेश किए। मुख्य मंच के अलावा दूसरे मंच पर भोजपुरी अभिनेता एवं गायक से भाजपा सांसदबने मनोज तिवारी, तथा भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह ने अपने लोकप्रिय गीतों से भीड़ का मनोरंजन किया। गांधी मैदान में आए विशिष्ट अतिथियों केलिए विशेष चाय और बिहार के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी-चोखा, मठरी, मखाना-खीर की व्यवस्था की गई थी। वीआईपी मेहमानों के लिए विशेष बैठकव्यवस्था भी की गई थी। पटना के गांधी मैदान में एनडीए सरकार के भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘गमछा’ लहराना सबसे बड़ाआकर्षण बन गया, जिस पर लाखों की भीड़ उत्साह से गूंज उठी। समारोह की शुरुआत मिथिला के लोकनृत्य सामा-चकेवा से हुई, जबकि विभिन्नमहिला कलाकारों ने राज्यभर के लोकगीत प्रस्तुत किए।

20 साल की सत्ता, 1 नेता नीतीश कुमार फिर बने बिहार की राजनीति के धुरी, एनडीए कैबिनेट के साथ नया अध्याय शुरू

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बंपर जीत के बाद नई कैबिनेट का गठन गुरुवार को पूरा हो गया है। 243 सदस्यों वाली विधानसभा मेंफिलहाल 27 मंत्री रखे गए हैं। इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के अलावा विजय सिन्हा को भी उपमुख्यमंत्री बनाया गयाहै। इसके अलावा 24 अन्य नेताओं को भी कैबिनेट में जगह दी गई है।इसी के साथ एक बार फिर राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार का कार्यकाल शुरू हो गया। बिहार में अब बीते 20 वर्षोंकी तर्ज पर ही नीतीश के फिर से सत्ता के शीर्ष पर काबिज हैं। 2005 के अंत में शुरू हुआ नीतीश कुमार का शासन अब अगले पांच साल चल सकताहै। राम मनोहर लोहिया की समाजवादी नीतियों से काफी प्रभावित थेऐसे में यह जानना अहम है आखिर नीतीश कुमार कौन हैं, उनका सियासी सफर कैसा रहा है? बिहार में 2005 में पहली बार नीतीश के मुख्यमंत्री बननेके बाद से अब तक क्या-क्या हुआ है? किस तरह राज्य में अलग-अलग पार्टियों की सीटें और वोट प्रतिशत लगातार ऊपर-नीचे हुए हैं, लेकिन नीतीशकुमार किंग या किंगमेकर ही रहे हैं? इसके अलावा कैसे कम सीटें और वोट पाने के बावजूद नीतीश कुमार ने कैसे अपनी सत्ता बनाए रखी? नीतीशकुमार का जन्म 1951 में नालंदा के कल्याण बीघा गांव में हुआ था। नीतीश के पिता देश के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहे थे, ऐसे में वे खुदसियासत में काफी रुचि रखते थे। वे राम मनोहर लोहिया की समाजवादी नीतियों से काफी प्रभावित थे। धड़ा बाद में जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू बनाबताया जाता है कि उनके और लालू प्रसाद यादव के सियासी सफर की शुरुआत लगभग एक ही समय हुई थी। यह समय था कर्पूरी ठाकुर केसमाजवादी नेतृत्व का। कर्पूरी ठाकुर जनता पार्टी की सरकार के दौरान 1970 के दशक में बिहार में ओबीसी आरक्षण के अगुआ रहे थे। नीतीश पहलीबार सियासत में 1977 में उतरे, जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन चुका था। इस दौर में जनता पार्टी मजबूती से उभरी और लगभग पूरेदेश में वर्चस्व बनाया। हालांकि, नीतीश कुमार चुनावी राजनीति में बेहतर शुरुआत नहीं कर पाए। वे जनता पार्टी की तरफ से हरनौत विधानसभा सीटसे उतरे और एक निर्दलीय उम्मीदवार से हार गए। यह वह दौर था, जब नीतीश कुमार ने निराशा में राजनीति तक छोड़ने का मन बना लिया था।हालांकि, उनके करीबियों ने किसी तरह उन्हें मना लिया। 1985 में वे एक बार फिर हरनौत सीट से ही लोक दल के टिकट पर चुनाव लड़े औरआखिरकार जीते।बाद में नीतीश ने 1989 में लोकसभा चुनाव में बाढ़ से जीत हासिल करने के बाद वे बिहार की राजनीति से कुछ दूर भी हुए। वे वीपी सिंह की सरकारमें कृषि राज्य मंत्री बने। 1991 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर बाढ़ से फिर जीत हासिल की। हालांकि, तीन साल बाद ही उन्होंने जनता दल सेअलग होकर 1994 में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर समता पार्टी बना ली। उनका यही धड़ा बाद में जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू बना।

दिल्ली कार ब्लास्ट केस में नया विवाद, वायरल वीडियो पर ओवैसी का बड़ा हमला ओवैसी बोले ‘ये धर्म नहीं, आतंकवाद है’

दिल्ली में 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट मामले को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। इस घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी और दो दर्जन सेज्यादा लोग घायल हुए थे। अब आरोपी डॉ. उमर-उल-नबी का एक पुराना और बिना तारीख का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह सुसाइडबॉम्बिंग को ‘शहादत’ बताते हुए उसे ‘गलत समझा गया’ कहते हैं।एआईएमआईए चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस वीडियो को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, इस्लाम में आत्महत्याहराम है और बेगुनाहों की हत्या बेहद बड़ा गुनाह है। ऐसे कृत्य न धर्म से जुड़े हैं, न किसी गलतफहमी से, ये सीधा-सीधा आतंकवाद है। ओवैसी नेअपने पोस्ट में साफ कहा कि नबी का तर्क पूरी तरह गलत है और इसका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं। भयानक वारदात की योजना बनाईवहीं ओवैसी ने गृह मंत्री अमित शाह से भी जवाब मांगा। उन्होंने याद दिलाया कि अमित शाह ने संसद में कहा था कि ‘पिछले छह महीनों में कोई भीकश्मीरी युवक किसी आतंकी संगठन में शामिल नहीं हुआ।’ तो फिर, ‘ये ग्रुप आया कहां से? इसकी पहचान पहले क्यों नहीं हुई? ज़िम्मेदारी किसकीहै?’ वहीं एनआईए ने मंगलवार को जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को 10 दिन की हिरासत में लिया है। एजेंसी के मुताबिक, जासिर ने ड्रोनमॉडिफाई करके, रॉकेट बनाने की कोशिश करके आतंकियों को तकनीकी मदद दी वह उमर-उल-नबी का करीबी और सक्रिय सहयोगी था। एनआईएका कहना है कि दोनों ने मिलकर दिल्ली की इस भयानक वारदात की योजना बनाई। गलतफहमी से, ये सीधा-सीधा आतंकवादओवैसी ने पूछा कि आरोपी का वीडियो छह से सात महीने पुराना बताया जा रहा है। ‘अगर ये वीडियो इतना पुराना था, तो इसे किसी ने पहले क्योंनहीं देखा? दिल्ली में पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन है, तो जिम्मेदारी किसकी है?’ दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार धमाकेके आरोपी आतंकी उमर नबी के वीडियो पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- इस्लाम में आत्महत्या हराम, बेगुनाहों की हत्या बड़ा गुनाह है। ओवैसी ने कहा- ऐसे कृत्य न धर्म से जुड़े हैं, न किसी गलतफहमी से, ये सीधा-सीधा आतंकवाद है।

चीनी MSP बढ़ाने का श्रेय मैंने लिया PM से मुलाकात के बाद फैसले का दावा CM सिद्धारमैया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार ने चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने पर विचार करने का जोफैसला लिया है, उसका श्रेय उन्हें जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात के बाद यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय खाद्यएवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा था कि केंद्र ने 2025-26 के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है।उन्होंने कहा कि केंद्र उद्योग की इस मांग को भी देखेगा कि चीनी का एमएसपी बढ़ाया जाए। फरवरी 2019 से चीनी का एमएसपी 31 रुपये प्रतिकिलोग्राम है, जबकि चीनी उद्योग संगठन (आईएसएमए) उत्पादन लागत बढ़ने के चलते इसे 40 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहा है।सिद्धारमैया ने कहा, प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि वह एमएसपी को 31 रुपये बढ़ाकर 40 रुपये करने पर विचार करेंगे। मैंने 41 रुपये प्रति किलोग्राम कीमांग की थी। मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया तो उन्होंने यह कदम उठाया। प्रह्लाद जोशी की घोषणा से खुशीउपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि चीनी कारखानों ने उनसे और मुख्यमंत्री से कहा था कि पिछले सात-आठ साल से चीनी की कीमतें नहीं बढ़ीहैं, इसलिए उन्हें बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा, हमने प्रधानमंत्री से आग्रह किया। किसान और मिल दोनों को फायदा होना चाहिए। अगर फैक्ट्रियां रहेंगीतो किसान भी रहेंगे और किसान रहेंगे तो फैक्ट्रियां भी चलेंगी। शिवकुमार ने कहा कि केंद्र बिजली, ब्याज दरें, गुड़, गन्ने से जुड़े मामलों में फैसला लेताहै और कर्नाटक ने इस पर न्याय करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रह्लाद जोशी की घोषणा से खुशी है। केंद्र से अधिसूचना जारी करने की मांग कीसिद्धारमैया ने सोमवार को दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की थी और राज्य से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की थी। उन्होंने एक विस्तृत ज्ञापन भी दिया, जिसमें पुरानी लंबित मांगों को शामिल किया गया था, जिनमें गन्ना किसानों का मुद्दा भी था।मुख्यमंत्री ने कहा था कि चीनी का एमएसपी 31 रुपयेप्रति किलो पर स्थिर है, जिस वजह से मिलें किसानों को सही दाम नहीं दे पा रहीं। उन्होंने पीएम से एमएसपी बढ़ाने, कर्नाटक की डिस्टिलरी के लिएतय इथेनॉल खरीद की गारंटी देने और राज्यों को पारदर्शी व किसान-हितैषी मूल्य तय करने में मदद के लिए केंद्र से अधिसूचना जारी करने की मांग कीथी।

ममता बनर्जी का बड़ा हमला ‘चुनाव आयोग का अनियोजित बोझ, बीएलओ आत्महत्या करने को मजबूर ‘दो महीनों में तीन साल का काम करवाया जा रहा’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को जलपाईगुड़ी के माल ब्लॉक में एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत पर दुख व्यक्तकिया और आरोप लगाया कि मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर अमानवीय दबाव डाला हैऔर अब तक 28 मौतें हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मृतका, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जो बीएलओ के रूप में कार्यरत थी, ने भारत केचुनाव आयोग (ईसीआई) की तरफ से किए जा रहे पुनरीक्षण कार्य के असहनीय दबाव के कारण आत्महत्या कर ली। एक्स पर पोस्ट किए गए एककड़े शब्दों वाले बयान में, सीएम ममता बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए उसे ‘अनियोजित, अथक कार्यभार’ बताया। उन्होंने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा- ‘गहरा सदमा और दुख हुआ। आज फिर, हमने जलपाईगुड़ी के माल में एक बूथलेवल अधिकारी को खो दिया, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जिसने चल रहे एसआईआर कार्य के असहनीय दबाव में अपनी जान ले ली। अनियोजित अभियान को तुरंत रोक देउन्होंने कहा कि एसआईआर शुरू होने के बाद से अब तक 28 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, कुछ डर और अनिश्चितता के कारण, तो कुछ तनाव औरकार्यभार के कारण। उन्होंने कहा, ‘तथाकथित चुनाव आयोग की तरफ से लगाए गए अनियोजित और अथक कार्यभार के कारण इतनी कीमती जानें जारही हैं। एक प्रक्रिया जो पहले तीन साल में पूरी होती थी, अब राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए चुनाव से ठीक पहले दो महीनों में पूरी कीजा रही है, जिससे बीएलओ पर अमानवीय दबाव पड़ रहा है। सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से विवेक से काम लेने और अभियान को तुरंतस्थगित करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि अगर एसआईआर कार्य की वर्तमान गति जारी रही तो और भी जानें जा सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंचुनाव आयोग से आग्रह करती हूं कि वह विवेक से काम ले और और जानें जाने से पहले इस अनियोजित अभियान को तुरंत रोक दे।’ सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधाबता दें कि टीएमसी नेताओं ने बार-बार चुनाव आयोग पर समय सीमा आगे बढ़ाने और चुनावों से पहले बीएलओ पर अत्यधिक क्षेत्रीय सत्यापन कार्यका बोझ डालने का आरोप लगाया है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि लंबे काम के घंटे, यात्रा संबंधी जरूरतों और समय सीमा पूरी करने के दबाव केकारण कई कर्मचारी बेहाल हो गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।हालांकि, विपक्षी दलों ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सरकार क्षेत्रीय स्तर के कर्मचारियों को कम प्रशासनिक सहायता देने कीजिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। चुनाव आयोग की तरफ से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण किया जारहा है। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से इसमें शामिल बीएलओ की मौत से जुड़ी घटनाएं सामने आ रही है। वहीं जलपाईगुड़ी में एक बीएलओ कीमौत के मामले में सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।

महा-युति में बढ़ी खटपट! NCP-SP का तंज, ‘भाजपा को अब शिंदे की जरूरत नहीं’ अकेले पहुंचे कैबिनेट मीटिंग में “आत्मसम्मान है तो गठबंधन छोड़ दें”

महाराष्ट्र में सत्तासीन महायुति गठबंधन में खटपट की खबरों को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- शरद पवार (राकांपा-एसपी) ने तंज कसा है। पार्टी केप्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना मंत्रियों के बीच पैदा हुए कथित तनाव इस ओरइशारा करता है कि भाजपा को अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की जरूरत नहीं रही। उन्होंने उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया था किशिंदे मंत्रियों की गैरमौजूदगी की वजह से अकेले ही मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल हुए। क्रास्टो ने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि फडणवीस कोशिंदे का कोई सम्मान नहीं और मंत्रियों को भी उपमुख्यमंत्री के प्रति कोई खास सम्मान नहीं है। क्रास्टो ने एक्स पर लिखा, “अगर एकनाथ शिंदे मेंथोड़ा भी आत्मसम्मान है तो उन्हें भाजपा के साथ गठबंधन छोड़ देना चाहिए। अगर वह सही समय पर बाहर नहीं निकले, तो जल्द ही उन्हें बाहर कारास्ता दिखा दिया जाएगा।” कार्यकर्ताओं को शामिल किए जाने के खिलाफ यह नाराजगी दर्शायीमहाराष्ट्र में महायुति गठबंधन भाजपा, शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा से मिलकर बना है। क्रास्टो ने दावा किया किभाजपा ने साफ संदेश दे दिया है कि उसे अब शिंदे की जरूरत नहीं है। शिवसेना के शिंदे को छोड़कर सभी मंत्री मंगलवार की साप्ताहिक कैबिनेट बैठकसे दूर रहे। माना जा रहा है कि भाजपा की तरफ से राज्य के कई हिस्सों में शिवसेना नेताओं और कार्यकर्ताओं को शामिल किए जाने के खिलाफ यहनाराजगी दर्शायी गई। इससे स्थानीय निकाय चुनावों से पहले महायुति में तनाव बढ़ गया है। बाद में फडणवीस और शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना मंत्रियोंकी बैठक हुई, जिसके बाद स्थिति शांत हुई। पत्रकारों से बात करते हुए शिंदे ने बताया कि महायुति की सहयोगी पार्टियां एक-दूसरे के नेताओं कोशामिल करने से परहेज करेंगी, ऐसा निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा की तरफ से राज्य के कई हिस्सों में शिवसेना नेताओं औरकार्यकर्ताओं को शामिल किए जाने के खिलाफ यह नाराजगी दर्शायी गई। इससे स्थानीय निकाय चुनावों से पहले महायुति में तनाव बढ़ गया है।

CM स्टालिन का केंद्र पर हमला ‘तमिलनाडु ने BJP को हराया, इसलिए मेट्रो प्रोजेक्ट खारिज, ‘जब आगरा–भोपाल को मेट्रो मिली, हमें क्यों नहीं?’

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने मदुरै औरकोयंबटूर के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट इसलिए खारिज किए हैं क्योंकि तमिलनाडु ने चुनावों में भाजपा को नकारा है। स्टालिन ने इसे जनता से बदला लेने जैसाकदम बताया। सीएम स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मदुरै- जिसे ‘मंदिरों का शहर’ कहा जाता है और कोयंबटूर- जिसे ‘दक्षिण भारत कामैनचेस्टर’ कहा जाता है- दोनों को मेट्रो की जरूरत है। लेकिन केंद्र ने कमजोर और तर्कहीन कारणों के आधार पर इन प्रोजेक्ट्स को ठुकरा दिया। रिपोर्टोंके अनुसार, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्य सरकार की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) लौटा दी है। मंत्रालय का कहना है कि मेट्रोरेल पॉलिसी 2017 के मुताबिक, सिर्फ उन्हीं शहरों को केंद्रीय मदद दी जा सकती है जिनकी आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 20 लाख सेज्यादा हो। जबकि कोयंबटूर की आबादी- लगभग 15.84 लाख और मदुरै की आबादी- लगभग 15 लाख है। इस आधार पर दोनों शहर पात्रता सेबाहर बताए गए। मेट्रो जवाब उनकी आकांक्षाओं को ठेस पहुंचातासीएम स्टालिन ने कहा कि नीति का एक जैसा उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आगरा, भोपाल और पटना, जहां आबादी 20 लाख से कम है, को मेट्रो मंजूर हो सकती है, तो मदुरै और कोयंबटूर को क्यों नहीं? उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण रवैया और विपक्ष-शासित राज्यों को सजादेने जैसा बताया। सीएम स्टालिन ने आगे कहा कि सरकार जनता की सेवा के लिए होती है, लेकिन केंद्र प्रतिशोध की भावना से काम कर रहा है औरयह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मदुरै और कोयंबटूर जैसे तेजी से बढ़ते शहर आधुनिक मेट्रो सिस्टम के हकदार हैं, औरकेंद्र का नो मेट्रो जवाब उनकी आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाता है। नीति को नाकाम करेंगे और मदुरै व कोयंबटूर में मेट्रो रेल बनवाकर रहेंगेतमिलनाडु सरकार ने फरवरी से दिसंबर 2024 के बीच दोनों शहरों के लिए, डीपीआर, कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान, अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट, केंद्र को भेजी थी। मार्च 2025 में केंद्र ने संसद में कहा था कि प्रोजेक्ट्स पर विचार हो रहा है, लेकिन अब इन्हें खारिज कर दिया गया। केंद्र सरकार कीतरफ से तमिलनाडु के दो शहरों, मदुरै और कोयंबटूर के लिए मेट्रो का प्रस्ताव लौटाए जाने के बाद सीएम स्टालिन ने करारा हमला बोला है। इस दौरानउन्होंने कहा कि उनकी सरकार और दोनों शहरों के लोग मिलकर केंद्र की प्रतिशोधी नीति को नाकाम करेंगे और मदुरै व कोयंबटूर में मेट्रो रेल बनवाकररहेंगे।

जातीय हिंसा के 2 साल बाद मोहन भागवत का मणिपुर दौरा, जनजातीय नेताओं व नागरिकों से करेंगे मुलाकात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत कल मणिपुर पहुंचने वाले हैं। 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से यह उनकापहला राज्य दौरा है। संगठन के एक पदाधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। आरएसएस के राज्य महासचिव तरुण कुमार शर्मा ने पीटीआई कोबताया, भागवत अपनी तीन दिन की यात्रा के दौरान नागरिकों, उद्यमियों और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। शर्मा ने कहा, हमारे सरसंघचालक की यह यात्रा आरएसएस की शताब्दी समारोह से जुड़ी हुई है। वह 20 नवंबर को गुवाहाटी से आएंगे और 22 नवंबर को रवानाहोंगे। मुख्य रूप से संगठन के अंदरूनी कार्यक्रम का हिस्साएक अन्य संघ पदाधिकारी ने कहा कि दो साल पहले हिंसा भड़कने के बाद यह भागवत की पहली यात्रा होगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने आखिरी बार2022 में मणिपुर का दौरा किया था। शर्मा ने बताया कि यात्रा के दौरान प्रमुख नागरिकों, जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों और युवा नेताओं केसाथ अलग-अलग बातचीत के सत्र आयोजित किए जाएंगे। शर्मा ने कहा, आगमन के दिन वह इंफाल के कोन्जेंग लाइकाई में उद्यमियों और अन्यप्रमुख लोगों से मुलाकात करेंगे। 21 नवंबर को भागवत मणिपुर की पहाड़ियों के जनजातीय नेताओं से मुलाकात और बातचीत करेंगे। जब पूछा गयाकि क्या आरएसएस प्रमुख उन राहत शिविरों का दौरा करेंगे, जहां पिछले दो साल से विस्थापित लोग रह रहे हैं, तो शर्मा ने कहा, अभी तक यहकार्यक्रम में शामिल नहीं है। यह यात्रा मुख्य रूप से संगठन के अंदरूनी कार्यक्रम का हिस्सा है। राहत शिविरों का दौरा इसमें शामिल नहींमई 2023 से मणिपुर में मेतेई और कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं।मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद केंद्र ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। राज्य विधानसभा को निलंबित कर दिया गयाहै, जिसकी अवधि 2027 तक थी। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 2023 की जातीय हिंसा के बाद मणिपुर का अपना पहला दौरा करेंगे। वह तीनदिन की यात्रा में नागरिकों, उद्यमियों और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। उनकी यात्रा मुख्य रूप से संगठन के कार्यक्रमों से जुड़ीहै और राहत शिविरों का दौरा इसमें शामिल नहीं है।

दिल्ली नगर निगम की बैठक में नागरिकों के लिए बड़े फैसले, प्रदूषण नियंत्रण पर खास जोर

बैठक में नागरिक सुविधाओं और शहर की समस्याओं पर व्यापक चर्चादिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक अध्यक्ष सत्या शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस बैठक में शहर से जुड़ी कई गंभीर समस्याओंपर गहन विचार-विमर्श किया गया। चर्चा का मुख्य केंद्र स्वच्छता व्यवस्था, पार्कों की स्थिति, कर्मचारियों की कमी, आवारा पशुओं की बढ़ती परेशानीऔर सबसे महत्वपूर्ण—वायु प्रदूषण नियंत्रण रहा। अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा कि सभी कार्य समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरे होने चाहिए, ताकिनागरिकों को तुरंत राहत महसूस हो सके। पार्षदों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिएगए। वायु और धूल प्रदूषण रोकने के लिए कड़ी निगरानी की व्यवस्थाबैठक में निर्णय लिया गया कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगरानी बेहद सख़्त की जाएगी। अध्यक्ष सत्या शर्मा ने सभी जोनल डीसी औरसंबंधित अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें निर्धारित समय पर हर हाल में चलाई जाएँ। हर मशीन की रोज़ाना रनिंगरिपोर्ट, फोटो-लॉग, और किलोमीटर रिपोर्ट सीधे स्थायी समिति को भेजनी होगी, ताकि साफ-सफाई में किसी भी प्रकार की ढिलाई न हो। उन्होंने यहभी स्पष्ट किया कि किसी भी मशीन के खराब होने पर उसे अधिकतम 72 घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य है। इसके साथ ही सड़कों पर जमा ढीलीमिट्टी, निर्माण का मलबा और कंस्ट्रक्शन डेब्रिस को 24 घंटे के अंदर हटाने का आदेश दिया गया है, जिससे धूल प्रदूषण पर तुरंत नियंत्रण पाया जासके। कूड़ा या बायोमास जलाने पर जीरो टॉलरेंस की नीतिबैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि किसी भी वार्ड में कूड़ा, पत्तों या बायोमास को जलाने की अनुमति नहीं होगी। इस पर निगरानी रखने के लिएरात और सुबह की विशेष पेट्रोलिंग टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों को आदेश है कि यदि कहीं भी कूड़ा जलाने की घटना मिलती है, तो तुरंत कार्रवाईकी जाए। साथ ही, टूटी सड़कों की मरम्मत और पैचवर्क को तेज़ी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि धूल उड़ने की समस्या कम हो सके। सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए तेज़ी से हो रहे कार्यअध्यक्ष सत्या शर्मा ने बताया कि दिल्ली नगर निगम इस साल पिछले वर्षों की तुलना में अधिक संख्या में मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और पानी केटैंकर तैनात कर रहा है। मुख्य सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे धूल पर नियंत्रण में अच्छी सफलता मिल रही है।उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक दिल्ली की सड़कों के 3000 से अधिक गड्ढों को भर दिया गया है। इससे न केवल सड़क सुरक्षा में सुधार हुआ है, बल्कि धूल कम होने से प्रदूषण स्तर में भी गिरावट देखने को मिली है। बेहतर सड़कें शहरवासियों की दैनिक आवाजाही को भी सुगम बनाती हैं। 14 नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की खरीद का बड़ा निर्णयबैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया कि नगर निगम अब 14 नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदेगा। ये आधुनिक मशीनें गहरीसफाई करने में सक्षम होंगी और सड़क की धूल को प्रभावी तरीके से सोखेंगी। इन मशीनों से प्रदूषण नियंत्रण को नई ताकत मिलेगी और शहर कीसफाई व्यवस्था और भी मजबूत होगी। इसके साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाकों और बाजारों में विशेष सफाई अभियान तुरंत शुरू करने का भी निर्णयलिया गया, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर जमा कचरा तुरंत हटाया जा सके। जोनल अधिकारियों को साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपना अनिवार्यबैठक के अंत में अध्यक्ष ने सभी जोनल डीसी को आदेश दिया कि वे अपने क्षेत्रों की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट स्थायी समिति को देना सुनिश्चित करें।इससे हर हफ्ते समीक्षा हो सकेगी और कार्यों की गुणवत्ता पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। बैठक को समाधान-उन्मुख बताते हुए पार्षदों ने कई सुझावदिए और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी।दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने का मजबूत संकल्पअध्यक्ष सत्या शर्मा ने विश्वास जताया कि इन नए निर्णयों और कदमों के जरिए दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार आएगा और शहर की सफाईव्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ देने और प्रदूषण कम करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता केसाथ काम कर रहा है।