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मनरेगा का नाम बदला तो भड़के डीके शिवकुमार, बोले ‘संवैधानिक अधिकार छीनने की कोशिश, यही भाजपा के अंत की शुरुआत’

मनरेगा योजना के नाम को बदलने के लिए लाए गए कानून विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी रामजी को लेकर देशभर में सियासत जारी है। ऐसे में अब कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस योजना के नाम बदलने को लेकर केंद्र सरकारपर जमकर निशाना साधा। साथ ही गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए देश के हर नागरिक को काम देने की व्यवस्था कीगई थी और यह अधिकार कांग्रेस सरकार ने संविधान के तहत दिया था। पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने कहा कि पूरे देश में कनकपुरा वहविधानसभा क्षेत्र है, जहां उन्होंने नरेगा योजना (बाद में मनरेगा) का प्रयोग सबसे पहले किया था। शिवकुमार ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा ने वहांजांच करवाई और बेवजह अनियमितताओं के आरोप लगाए। पंचायती राज सिस्टम और उसके अधिकारी सदमे मेंकर्नाटक के डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि पहले नरेगा के तहत बनने वाले भवनों और अन्य कार्यों में राज्य सरकार को सिर्फ 10 प्रतिशत पैसा देना होताथा, जबकि केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाती थी। लेकिन अब यह अनुपात बदलकर 60:40 कर दिया गया है। शिवकुमार का कहना है कि इसबदलाव का मकसद इस योजना को कमजोर करना और धीरे-धीरे खत्म करना है। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के नाम पर बनी योजना का’गला घोंटने’ की कोशिश की जा रही है। डीके शिवकुमार ने जानकारी दी कि मंत्री प्रियंक खड़गे ने इस मुद्दे पर दिल्ली में बैठक बुलाई है, जहां इस परविस्तार से चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ग्राम पंचायतों को मजबूत करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। डिप्टी सीएम ने आगे कहा किइस नए कानून से पूरा पंचायती राज सिस्टम और उसके अधिकारी सदमे में हैं। पहले नरेगा का पैसा सीधे उन लोगों के खाते में जाता था, जिन्होंने इसयोजना के तहत काम के लिए पंजीकरण कराया था। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि भाजपा कांग्रेस सरकार द्वारा दिए गए संवैधानिकअधिकार को छूने की हिम्मत करेगी। यह भाजपा के अंत की शुरुआत है। 100 दिन का रोजगार देनागौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू के द्वारा कल मंजूरी के बाद वीबी-जी राम जी कानून बना मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनादेश की एक बड़ी रोजगार योजना है। इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी। उस समय इसका नाम सिर्फ नरेगा (NREGA) था। इस कानून को संसद नेअगस्त 2005 में पास किया और इसे 2 फरवरी 2006 से देश में लागू किया गया। शुरुआत में यह योजना कुछ जिलों में लागू हुई, बाद में इसे पूरेदेश में लागू कर दिया गया। इस योजना का मकसद ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देना है। अगरसरकार काम नहीं देती, तो मजदूर को बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। साल 2009 में इस योजना का नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीयग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कर दिया गया और अब वीबी-जी राम जी।

ग्रीनलैंड पर अमेरिका की हरकत पर डेनमार्क ने चेतावनी दी, कहा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें

डेनमार्क के विदेश मंत्री ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका सहित सभी को डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। डेनमार्कके विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर को ग्रीनलैंड के लिए अमेरिका काविशेष दूत नियुक्त करने का एलान किया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात कही थी। अभीग्रीनलैंड, डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। खनिज के मामले में समृद्ध ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है। बीते मार्च में, उपराष्ट्रपति जेडी वेंसने भी ग्रीनलैंड में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे का दौरा किया और डेनमार्क पर वहां ध्यान ने देने का आरोप लगाया। हालांकि धीरे-धीरे यह मुद्दा सुर्खियों सेगायब हो गया। इस बीच अगस्त में डेनमार्क की सरकार ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से जुड़े तीन लोगों पर ग्रीनलैंडमें गुप्त अभियान चलाने का आरोप लगाया। अब रविवार को, ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत के रूप में नियुक्तकरने की घोषणा की। एलान करते हुए ट्रंप ने कहा कि ‘जेफ समझते हैं कि ग्रीनलैंड हमारी और हमारे सहयोगियों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कितनाजरूरी है। हम हमारे देश के हितों को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे।’ इस पर लैंड्री ने X पर साझा एक पोस्ट में लिखा ‘ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्साबनाने के लिए काम करना सम्मान की बात है।’ सम्मान करने की अपील कीइस पर डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘यह नियुक्ति ग्रीनलैंड में अमेरिकी हित की निरंतरता की पुष्टि करतीहै। हालांकि, हम इस बात पर जोर देते हैं कि अमेरिका सहित सभी देशों को डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।’ इस महीने कीशुरुआत में, डेनमार्क की रक्षा खुफिया सेवा ने एक वार्षिक रिपोर्ट में कहा था, ‘अमेरिका अपनी आर्थिक शक्ति का उपयोग अपनी इच्छा थोपने औरदोस्त और दुश्मन दोनों के खिलाफ सैन्य बल की धमकी देने के लिए कर रहा है’। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सत्ता संभालते ही ग्रीनलैंड पर कब्जे की इच्छाजताई थी। अब अमेरिका ने इस दिशा में कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। जिस पर डेनमार्क ने चिंता जताई है और बयान जारी कर उनकी क्षेत्रीयअखंडता का सम्मान करने की अपील की है।

बीएमसी चुनाव से पहले ठाकरे बनाम ठाकरे की बातचीत तेज, गठबंधन पर अब भी सस्पेंस बरकरार

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से ठीक पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के बीचगठबंधन को लेकर आखिरी समय की बातचीत तेज हो गई है। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच सोमवार को अहम मुलाकातें हुईं, लेकिन अब तककिसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोमवार को एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे सेमुलाकात की। वहीं, एमएनएस नेता बाला नंदगांवकर उद्धव ठाकरे के निवास मातोश्री पहुंचे। दोनों नेता अपनी-अपनी पार्टी प्रमुखों के भरोसेमंद मानेजाते हैं, जिससे इन बैठकों को बेहद अहम माना जा रहा है। मुंबई बीएमसी चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के बीच आखिरी समयकी बातचीत तेज हो गई है। संजय राउत और राज ठाकरे की मुलाकात के बावजूद गठबंधन पर सहमति नहीं बन सकी है। अंतिम समय में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकतासूत्रों के मुताबिक, गठबंधन की राह में सबसे बड़ी बाधा उन इलाकों को लेकर है, जहां दोनों दलों का मजबूत जनाधार है। दादर, शिवड़ी, विक्रोलीऔर भांडुप जैसे क्षेत्रों में सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पा रही है। यही वजह है कि लगातार बैठकों के बावजूद तस्वीर साफ नहीं हो सकी है।बीएमसी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होकर 30 दिसंबर तक चलेगी। ऐसे में गठबंधन को लेकर समय बेहदकम बचा है। राज्य की 29 नगर निगमों, जिनमें मुंबई भी शामिल है, के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन की जाएगी। हालांकिदोनों दल सार्वजनिक तौर पर यह कहते रहे हैं कि बातचीत खत्म हो चुकी है, लेकिन पर्दे के पीछे जारी बैठकों ने सियासी हलकों में अटकलें तेज कर दीहैं। माना जा रहा है कि अंतिम समय में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

असम को 10,601 करोड़ की सौगात, पीएम मोदी ने डिब्रूगढ़ में उर्वरक संयंत्र की रखी आधारशिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम दौरे के दौरान राज्य को एक बड़ी विकास परियोजना की सौगात दी। पीएम मोदी ने डिब्रूगढ़ जिले में10,601 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखी। यह संयंत्र सालाना करीब 12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकउत्पादन की क्षमता वाला होगा। इस मौके पर आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज असम और पूरे पूर्वोत्तरके लिए ऐतिहासिक दिन है। नामरूप और डिब्रूगढ़ लंबे समय से जिस परियोजना का इंतजार कर रहे थे, वह सपना अब साकार हो रहा है। उन्होंनेबताया कि इस क्षेत्र में औद्योगिक प्रगति का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। इससे पहले गुवाहाटी में एयरपोर्ट के एक नए टर्मिनल का उद्घाटन भीकिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज असम विकास की नई रफ्तार पकड़ चुका है और यह सिर्फ शुरुआत है। जरूरतों को नजरअंदाज कियाप्रधानमंत्री ने इस आधुनिक उर्वरक संयंत्र के लिए देशभर के किसानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार में उद्योगऔर कनेक्टिविटी साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिससे असम के सपनों को पंख मिल रहे हैं और युवाओं में नए अवसरों की उम्मीद जगी है। पीएम मोदीने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे अहम है। इसी सोच के साथ सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता देकरलगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि करीब 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संयंत्र हर साल 12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकका उत्पादन करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैक्ट्री के शुरू होने से उर्वरकों की आपूर्ति और आसान होगी और लॉजिस्टिक लागत भी काफी कमहोगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कीनीतियों ने दशकों तक किसानों की स्थिति को बदतर बनाया, जबकि उनकी सरकार किसानों को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।पीएम ने कहा कि खाद कारखाने जैसे प्रोजेक्ट न केवल किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराएंगे, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास कोभी बढ़ावा देंगे। कांग्रेस शासन के दौरान असम ही नहीं, बल्कि देशभर में कई यूरिया फैक्ट्रियां बंद कर दी गई थीं। इसके चलते किसानों को खाद केलिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था और हालात संभालने के लिए कई बार पुलिस तक तैनात करनी पड़ती थी। पीएम मोदी ने कहा कि उससमय किसानों को इतनी परेशानी झेलनी पड़ी कि कहीं-कहीं लाठीचार्ज तक की नौबत आ जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार नेकिसानों की जरूरतों को नजरअंदाज किया। 11 वर्षों में हमारे प्रयासों से 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकलेप्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी डबल इंजन सरकार कांग्रेस के समय पैदा हुई इन समस्याओं को पूरी ईमानदारी से ठीक करने में जुटी है। बीते 11 वर्षों मेंकाफी काम हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि जहां कांग्रेस के दौर में खाद कारखाने बंद हुए, वहींउनकी सरकार ने देश के अलग-अलग हिस्सों में नए उर्वरक संयंत्र लगाए हैं, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके और उन्हें दोबारा ऐसीपरेशानियों का सामना न करना पड़े। पीएम मोदी ने कहा आज बीज से बाजार तक भाजपा सरकार किसानों के साथ खड़ी है। खेत के काम के लिएसीधे खाते में पैसे पहुंचाए जा रहे हैं। ताकि किसान को उधार के लिए भटकना न पड़े। अब तक पीएम किसान सम्मान निधि के तहत लगभग 4 लाखकरोड़ रुपए किसानों के खाते में भेजे गए हैं। इसी साल किसानों की मदद के लिए 35 हजार करोड़ रुपए की दो नई योजनाएं शुरू की गई हैं। पीएमधन धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन इससे खेती को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आगे कहा ‘सबका साथ, सबका विकास… हमारा येविजन, देश के गरीब वर्ग के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया है। पिछले 11 वर्षों में हमारे प्रयासों से 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकलेहैं। देश में एक नया मध्यम वर्ग तैयार हुआ है।

दिल्ली में मोदी शाह से मुलाकात करेंगे नीतीश, बिहार की सियासत में हलचल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दिल्ली के लिए रवाना हुए। बिहार विधान सभा चुनाव की भारी जीत के बाद आज पहली बार वह नई दिल्ली के लिएरवाना हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक़ वह अपनी आंख का इलाज कराने के लिए दिल्ली गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी औरगृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात करेंगे। बताया यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने स्वास्थ्य के रुटीन चेकअप के लिए दिल्ली गएहैं। इस संबंध में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान मुख्य रूप से भाजपा और जदयू के बीच आगामी राजनीतिक रणनीतियों परचर्चा होगी। आलाकमान ने हाल ही में दो ऐसे फैसले लिएबिहार की सियासत में इन दिनों बड़े बदलाव की सुगहाट तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के भीतर हुए दो हालिया संगठनात्मक बदलावों की राज्यके राजनीतिक समीकरणों में खूब चर्चा है। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा न केवल औपचारिक माना जा रहा है, बल्कि इसके पीछेभविष्य की बड़ी रणनीति के भी संकेत मिल रहे हैं। भाजपा आलाकमान ने हाल ही में दो ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका सीधा प्रभाव बिहार की राजनीतिपर पड़ना तय माना जा रहा है। बिहार के कद्दावर विधायक नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने को राज्य में पार्टीकी पकड़ मजबूत होना माना जा रहा है। पार्टी ने बिहार भाजपा की कमान नए चेहरे को सौंपकर सांगठनिक फेरबदल की प्रक्रिया पूरी कर दी है। बदलावों के बीच गठबंधन को किस स्वरूप में आगे ले जातेराजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का यह दिल्ली दौरा गठबंधन की नई दिशा तय करेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसदौरान भाजपा और जदयू के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई मुद्दों पर सहमति बन सकती है। इसके तहत यह माना जा रहा है कि एनडीए के भीतर सीटों केतालमेल और आगामी रणनीति पर कोई ठोस फैसला लिया जा सकता है। वहीं बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार में किस पार्टी से किसे जगह मिलेगी, इसके नामों पर भी अंतिम मुहर लग सकती है। और सबसे ख़ास बात यह कि, नए प्रदेश नेतृत्व और जदयू के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर भी चर्चाहोने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने नितिन नवीन को बड़ी जिम्मेदारी देकर यह साफ कर दिया है किबिहार उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब गेंद नीतीश कुमार के पाले में है कि वे इन बदलावों के बीच गठबंधन को किस स्वरूप में आगे ले जातेहैं।

कॉमेडी क्लासिक ‘वेलकम’ के 18 साल पूरे, अनिल कपूर ने याद किए फिरोज खान

कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम’ की रिलीज को आज रविवार को 18 साल पूरे हुए हैं। इस फिल्म का चार्म आज भी दर्शकों के बीच बरकरार है। इसमें अक्षयकुमार, अनिल कपूर, नाना पाटेकर कैटरीना कैफ और फिरोज खान जैसे सितारे नजर आए। फिरोज खान अब इस दुनिया में नहीं हैं। फिल्म की रिलीजको 18 साल होने पर एक्टर अनिल कपूर ने उन्हें याद किया है। साथ ही खुलासा किया कि फिल्म जब ठहर गई थी तो वह फिरोज खान ही थे जिन्होंनेइसे उठाया। अनिल कपूर ने अपने एक्स अकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने फिल्म की कुछ झलकियां शेयर करते हुए लिखा है, ‘फिल्म’वेलकम’ के 18 साल। यह फिरोज खान साहब के लिए है। RDX के बिना ‘वेलकम’, वेलकम नहीं थी। ठीक वैसे ही जैसे मोगैम्बो के बिना ‘मिस्टरइंडिया’ अधूरी थी। दोनों की जगह कोई नहीं ले सकता, बस बात खत्म’। अगले साल रिलीज होगीएक अन्य पोस्ट में अनिल कपूर ने एक किस्सा सुनाया है, जब फिल्म में ठहराव आ रहा था। ऐसे में फिल्म के निर्देशक अनीस बज्मी ने फिरोज खान परभरोसा जताया था और इसका असर भी हुआ। अनिल कपूर ने लिखा है, ‘मुझे याद है, जब मैंने स्क्रिप्ट सुनी थी और सोच रहा था कि यह कैसी बनेगी? पिक्चर यहीं रुक जाती है, बैठ जाती है। अनीस भाई ने कहा, ‘चिंता मत करो… फिरोज साहब पिक्चर संभाल लेंगे’। और, उन्होंने ऐसा ही किया।RDX ने फिल्म को ऊपर उठा दिया। यह फिल्म, यह किरदार, यह मैडनेस और जादू’। बता दें कि साल 2009 में फिरोज खान का निधन हो गया था।फिल्म ‘वेलकम’ के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो इसने 70.13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया था। इसे करीब 48 करोड़ रुपये कीलागत में बनाया गया था। बॉक्स ऑफिस पर यह सुपरहिट साबित हुई थी। साल 2015 में इसका सीक्वल वेलकम बैक आया। इसकी तीसरी कड़ी’वेलकम टू द जंगल’ है, जो अगले साल रिलीज होगी।

जी राम जी योजना पर सियासी संग्राम, कांग्रेस आंदोलन के मूड में, शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान

जी राम जी योजना पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच रार गहराती हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने इसके विरोध में पूरे देश में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से लोगों के बीच जाने की तैयारी कर ली है। वहीं, केंद्र सरकार भी अपने मंत्रियों और भाजपा संगठन के माध्यम से जनता को इसकीखूबियां बताने की योजना बना रही है। इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जी राम जी योजना के अंतर्गत किसानों-श्रमिकोंको सौ से बढ़ाकर 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर करने में मदद मिलेगी। भूतपूर्वप्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी की स्मृति में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज जो एनडीए सरकार केंद्रमें शासन कर रही है, उसके विचारों की नींव चौधरी चरण सिंह ने ही रखी थी। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए हीश्रमिकों की कार्य योजना को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है जिससे उनका कल्याण हो सके। जनता के बीच अपनी-अपनी बात रखने की तैयारीशिवराज सिंह ने कहा कि इससे किसानों-श्रमिकों का जीवन बदलेगा और इससे इससे गाँव की तस्वीर बदलने वाले काम होंगे। हमने किसानों कीआवाज सुनकर ही खेती के सीजन में इस योजना को बंद रखने का निर्णय लिया है और अब जाकर ये योजना मजदूरों एवं किसान दोनों के कल्याण केलायक बनी है। उन्होंने कहा कि हम किसानों के साथ बेईमानी नहीं होने देंगे। शिवराज सिंह जी ने कहा कि जिस समय पंडित जवाहर लाल नेहरू केखिलाफ बोलने का कोई साहस नहीं करता था, तब चौधरी चरण सिंह ने उनके सहकारी खेती के विदेशी सिद्धांत का जमकर विरोध किया। गांधीवादीविचारधारा से प्रेरित चौधरी ने हिंडन नदी के किनारे जाकर नमक तोड़ा और जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करके किसान को जमीन का मालिक बनाया।जिक्र करते हुए कहा कि इसका मकसद संविधान में बदलाव करना था। जी राम जी योजना को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच टकराव तेज होगया है। सरकार का दावा है कि नई योजना के तहत किसानों और मजदूरों को 125 दिन का रोजगार मिलेगा और इससे गांवों का विकास होगा। वहींकांग्रेस ने इसे गरीब विरोधी बताते हुए देशभर में आंदोलन का ऐलान किया है। दोनों पक्ष जनता के बीच अपनी-अपनी बात रखने की तैयारी में हैं।

आरएसएस कोई राजनीतिक संगठन नहीं, भारत माता की जय ही हमारा सार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों पश्चिम बंगाल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उत्तर बंगाल से कोलकाता पहुंचेभागवत ने साइंस सिटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर आप संघ को समझना चाहते हैं, तो तुलना करने से गलतफहमियां पैदा होंगी। अगर आप संघ को केवल एक अन्य सेवा संगठन मानते हैं, तो आप गलत होंगे। आरसएस प्रमुख ने कहाकि कई लोगों में ‘संघ’ को भाजपा के नजरिए से समझने की प्रवृत्ति होती है, जो एक बहुत बड़ी गलती है। संघ की स्थापना का सार एक ही वाक्य में है’भारत माता की जय’। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि अपनी खास संस्कृति, परंपरा और स्वभाव का नाम है। संघ का लक्ष्य इनमूल्यों को बनाए रखते हुए भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए समाज को तैयार करना है। वैश्विक नेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना होगाभागवत ने साफ किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म किसी राजनीतिक मकसद, प्रतिस्पर्धा या विरोध के लिए नहीं हुआ। उनका कहना था किसंघ पूरी तरह हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए समर्पित है। संघ की भूमिका समझाने के लिए भागवत ने इतिहास का उदाहरण भीदिया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष भले ही थम गया, लेकिन राजा राम मोहन राय के समय सेशुरू हुई समाज सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रही। उन्होंने इसे समुद्र के बीच एक ऐसे द्वीप की तरह बताया, जो समय के साथ मजबूती से कायमरहा। अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने समाज को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक महान विरासत वाला देश है और उसे वैश्विकनेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि अतीत में हम अंग्रेजों से युद्ध हार गए थे, लेकिन अब वक्त है कि हम अपने समाज कोसंगठित और सशक्त बनाएं। उनका पूरा भाषण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की सोच और एकजुटहिंदू समाज के साथ समृद्ध भारत के लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

अरावली बचाओ अभियान, गांव बाता के युवाओं ने पंचायत स्तर पर सौंपा पहला ज्ञापन

अरावली पर्वत माला बचाओ अभियान की दिशा में क्षेत्र के युवाओं ने पहली पहल की है। कल पंचायत समिति स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में गांवबाता के 36 युवाओं ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर पहला ज्ञापन सौंपा। इस अभियान का नेतृत्व समाजसेवी भाई विक्रम दास वैष्णव ने किया।ज्ञापन में युवाओं ने अरावली पर्वत माला के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अरावली केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि लाखों जीव-जंतुओंका घर, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने वाला एक प्राकृतिक सिस्टम और बढ़ते रेगिस्तान को रोकने वाली पहाड़ियाँ हैं। युवाओं ने अपील की कि जाति, धर्म और राजनीति को एक तरफ रखते हुए आने वाले पर्यावरणीय संकट से लड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। ज्ञापन सौंप भाई विक्रम दास वैष्णव ने कहा कि आने वाले समय में यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है यदि सरकार या न्यायपालिका अपना निर्णय वापस नहींलेती। उन्होंने राजस्थान के सभी युवाओं और नागरिकों से आग्रह किया कि अरावली बचाओ अभियान को सफल बनाने के लिए हर संभव योगदान देंऔर आंदोलन में सक्रिय रहें। युवाओं ने यह संकल्प लिया कि जब तक अरावली पर्वत माला सुरक्षित नहीं होती, तब तक वे अभियान को जारी रखेंगेऔर आवश्यकता पड़ने पर उग्र आंदोलन के लिए भी तैयार रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम के लिए नेपाल और मॉरीशस के अतिथियों का हुआ आगमन, शहर में हुआ जोरदार स्वागत

अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम भारत-2025′ के ऐतिहासिक आयोजन के लिए जनपद में उत्साह का माहौल है। इस भव्य समागम में मुख्य अतिथि के रूपभाग लेने के लिए नेपाल के मधेशी आयोग के प्रथम प्रमुख आयुक्त डॉ. विजय कुमार दत्त आजमगढ़ पहुंचे. मॉरीशस की भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन कीचेयरपर्सन डॉ. वर्षारानी विशेष्वर ‘दुल्चा’ आजमगढ़ में विविध गतिविधियों में शिरकत की। नेपाल के मधेशी आयोग के प्रथम प्रमुख आयुक्त डॉ. विजय कुमार दत्त ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आजमगढ़ तमसा के तीर पर बसा प्राचीन शहर है। आजमगढ़ जनपद में भोजपुरी को लेकर होरही अंतरराष्ट्रीय संगम को अदभुत बताया। कहा कि भाषा और संस्कृति को जोड़ने वाला यह संगम है। नेपाल का संबंध वैदिक और रामायणकालीनउन्होंने कहा कि नेपाल और भारत दो देश है लेकिन आत्मा से जुड़े हुए है। हमारी संस्कृति और परंपराएं एक है यह भोजपुरी संगम दोनों देशों के संबंधोंको और प्रगाढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत संस्कृति और भाषा से हम एक है।भारत और नेपाल का संबंध वैदिक और रामायणकालीन है।भोजपुरी की माटी पर​ कदम रखते ही अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रीय कला सेवा संस्थान के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों नेफूल-मालाओं से अगवानी की इस अवसर पर स्वागत समारोह में प्रमुख रुप से अंतरराष्ट्रीय मुख्य संयोजक अरविंद चित्रांश, संगोष्ठी प्रभारी डॉ प्रियातिवारी, कवि सम्मेलन प्रभारी डॉ ईश्वर चंद्र त्रिपाठी, कवि सम्मेलन संचालक श्री संजय पाण्डेय ‘ सरस’, संरक्षक सदस्य सारिका श्रीवास्तव, संरक्षक श्री कृष्ण मोहन त्रिपाठी, भाजपा पूर्व अध्यक्ष लालगंज आजमगढ़ सूरज कुमार श्रीवास्तव, असोसिएट प्रोडूसर मुंबई अमित वर्मा, राजेश कुमार श्रीवास्तव व्यवस्था प्रभारी पवन कुमार कोषाअध्यक्ष,डॉ अवनीश अस्थान, डॉ सुभाष सिंह, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर,रजनी श्रीवास्तव, मयंकप्रख्यात मॉडल पुष्पांजलि एवं आरुषी गुप्ता, प्रिंसिपल योगेश, अस्थाना उपस्थित रहे। कलाकार और साहित्यकार भी आजमगढ़ पहुंच रहेआजमगढ़ में अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम का भव्य आयोजन 22 दिसंबर को भारतीय लोक संस्कृति और भोजपुरी भाषा के सर्वांगीण विकास के संकल्पके साथ ‘राष्ट्रीय कला सेवा संस्थान’ अपने गौरवशाली 25वें वर्ष के उपलक्ष्य में आगामी 22 दिसंबर को एक ऐतिहासिक समागम करने जा रहा है।’अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम भारत-2025′ और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का यह भव्य आयोजन सोमवार सुबह 11:00 बजे से स्थानीय हरिऔध कला केंद्र मेंसंपन्न होगा।इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भोजपुरी साहित्य, कला और परंपराओं को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। इस कार्यक्रममें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी की महत्ता को रेखांकित करने के लिए नेपाल से मधेशी आयोग के प्रथम प्रमुख आयुक्त डॉ. विजय कुमार दत्त औरमॉरीशस से भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन की चेयरपर्सन डॉ. वर्षारानी विशेष्वर ‘दुल्चा’ मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इनके साथ ही रूस, इटली, तुर्की, थाईलैंड, दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों से भी भोजपुरी प्रेमी और विद्वान विशिष्ट अतिथि के रूप में आजमगढ़ की धरती पर जुटेंगे। अंतरराष्ट्रीयसंयोजक अरविद चित्रांश ने बताया कि इस मौके पर शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे और पारंपरिक चित्रकला प्रदर्शनी के साथ-साथ’बिटिया की विदाई’ जैसे लोकनाट्यों का मंचन भी होगा।आयोजन की गरिमा बढ़ाने के लिए देश के जाने-माने कलाकार और साहित्यकार भीआजमगढ़ पहुंच रहे हैं।