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महाराष्ट्र के जलगांव में बड़ा रेल हादसा: परांडा स्टेशन के पास 8 यात्रियों की मौत

हादसे की शुरुआतमहाराष्ट्र के जलगांव जिले में परांडा रेलवे स्टेशन के नजदीक एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। पुष्पक एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह के कारणयात्री घबरा गए। इस अफवाह के चलते कई यात्रियों ने ट्रेन से छलांग लगा दी। कर्नाटक एक्सप्रेस से हुई टक्करदुर्भाग्यवश, उसी समय विपरीत दिशा से आ रही कर्नाटक एक्सप्रेस ने इन यात्रियों को कुचल दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में छहसे आठ लोगों की मौत हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों का बयानप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुष्पक एक्सप्रेस के ब्रेक लगाने के दौरान चिंगारियां उठीं, जिससे डिब्बों में आग लगने की अफवाह फैल गई। घबराएयात्रियों ने चलती ट्रेन से कूदने का प्रयास किया। इस दौरान कई यात्री सामने से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गए। रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रियाहादसे के बाद रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य जारी है, जबकि घायलों को नजदीकी अस्पताल मेंइलाज के लिए भेजा गया। प्रशासन का कहना है कि हादसे की जांच की जा रही है। भविष्य के लिए सबकयह घटना रेलवे सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन की खामियों को उजागर करती है। यात्रियों को आपात स्थिति में सही व्यवहार के लिए जागरूककरना बेहद जरूरी है। रेलवे प्रशासन को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। इस हादसे ने न केवल मृतकों के परिवारों में शोक का माहौल पैदा किया है, बल्कि यह रेलवे प्रबंधन के लिए चेतावनी भी है कि यात्रियों की सुरक्षाप्राथमिकता होनी चाहिए।

दिल्ली विधानसभा चुनाव: केजरीवाल की मिडिल क्लास के लिए की केंद्र से मांगे- जानिए पूरी मामला

दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, और आम आदमी पार्टी (AAP) भी चुनावी तैयारियों में जुटी है।पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में मिडिल क्लास के मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रखा और इस वर्गके लिए सात प्रमुख मांगें पेश की। केजरीवाल ने कहा कि चुनावी वक्त में अक्सर धर्म और जाति के नाम पर वादे किए जाते हैं, लेकिन मिडिल क्लासको कभी भी मुख्य एजेंडा नहीं बनाया जाता। उनका आरोप है कि यह वर्ग टैक्स टेररिज्म का शिकार हो चुका है, और उसे सरकार की नीतियों से कोईठोस लाभ नहीं मिल रहा। मिडिल क्लास के लिए टैक्स राहत की मांगअरविंद केजरीवाल ने मिडिल क्लास के लिए टैक्स राहत की मांग की। उनका कहना है कि यह वर्ग टैक्स टेररिज्म का शिकार हो रहा है और उसेकराधान के मामले में बहुत अधिक बोझ झेलना पड़ रहा है। इस वर्ग के लिए टैक्स में राहत देने की आवश्यकता है, ताकि वे आर्थिक रूप से अधिकमजबूत बन सकें। महंगाई पर नियंत्रणमहंगाई ने मिडिल क्लास की जिंदगी को कठिन बना दिया है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे इस वर्ग का जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है। केजरीवाल ने सरकार से महंगाई पर काबू पाने और कीमतों को नियंत्रित करने की अपील की है। स्वास्थ्य सेवाओं का सुधारकेजरीवाल ने मिडिल क्लास के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की। उनका कहना है कि इस वर्ग को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओंतक पहुंच नहीं है और उन्हें उच्च चिकित्सा खर्चों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने कीमांग की, ताकि मिडिल क्लास भी अच्छे इलाज का लाभ उठा सके। शिक्षा में सुधारमिडिल क्लास के बच्चों के लिए शिक्षा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर भी केजरीवाल ने जोर दिया। उनका कहना है कि शिक्षा के मामले में सुधारके बिना इस वर्ग के बच्चों के भविष्य पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में सरकार से ठोस कदम उठाने का अनुरोधकिया रोजगार के अवसर सृजनमिडिल क्लास के लिए रोजगार के अवसर सृजन पर भी केजरीवाल ने ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आजकल कई लोग उच्च शिक्षा प्राप्तकरने के बाद भी बेरोजगार हैं, और यह समस्या खासतौर पर मिडिल क्लास में अधिक है। केजरीवाल ने केंद्र सरकार से रोजगार सृजन की योजनाओं कोबढ़ाने की मांग की, ताकि मिडिल क्लास के लोगों को स्थिर रोजगार मिल सके सस्ती आवास योजनाओं की आवश्यकतामिडिल क्लास के लिए सस्ती आवास योजनाएं आवश्यक हैं। केजरीवाल ने कहा कि आजकल घर खरीदने के लिए मिडिल क्लास के पास पर्याप्तसंसाधन नहीं हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण आवास योजनाएं बनाने की अपील की, ताकि मिडिल क्लास अपने सपनोंका घर आसानी से खरीद सके। कर्ज पर ब्याज दरों में राहत केजरीवाल ने कर्ज पर ब्याज दरों में राहत की मांग की। उनका कहना था कि घर खरीदने, शिक्षा के लिए कर्ज लेने या अन्य वित्तीय जरूरतों के लिएमिडिल क्लास को उच्च ब्याज दरों का सामना करना पड़ता है, जो उनके लिए आर्थिक बोझ बन जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से ब्याज दरों में कटौतीकरने की मांग की, ताकि इस वर्ग को आर्थिक रूप से राहत मिल सके। मिडिल क्लास के मुद्दे पर AAP की चुनावी रणनीतिकेजरीवाल की इन सात मांगों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही हैं। उनका यह कदम मिडिल क्लास के बीच AAP को समर्थन दिलानेकी रणनीति के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि मिडिल क्लास का वोट बैंक चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कदम यह भी दर्शाता है किआम आदमी पार्टी सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश के मिडिल क्लास के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।विरोधी दलों की प्रतिक्रियाकेजरीवाल की इन मांगों पर विपक्षी दलों का कहना है कि यह सिर्फ एक चुनावी स्टंट है, जिसका उद्देश्य मिडिल क्लास को आकर्षित करना है।हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे AAP की स्मार्ट चुनावी रणनीति मानते हैं, जो इस वर्ग के मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बनाकर वोट बैंक कोप्रभावित करने की कोशिश कर रही है। भविष्य की दिशाआने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल की ये मांगें दिल्ली विधानसभा चुनाव में क्या असर डालती हैं। मिडिल क्लास के लिएउनकी इन मांगों को लेकर उठाए गए कदमों से AAP को कितनी राजनीतिक समर्थन मिलती है, यह चुनाव परिणामों में स्पष्ट हो जाएगा।

कर्नाटक के येल्लापुर में बड़ा हादसा: ट्रक खाई में गिरने से 8 लोगों की मौत, 10 घायल

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुर क्षेत्र में आज सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यह दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्ग 63 (NH-63) पर हुई, जब एक फलों से लदा ट्रक नियंत्रण खो बैठा और खाई में गिर गया। इस हादसे में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 अन्य गंभीर रूप सेघायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। हादसे का विवरणप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक सुबह के समय येल्लापुर से गुजर रहा था। ट्रक फलों से भरा हुआ था और उसमें कुल 18 लोग सवार थे। बताया जारहा है कि ट्रक ड्राइवर ने अचानक गाड़ी से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद ट्रक सड़क से फिसलकर खाई में जा गिरा। खाई की गहराई काफी ज्यादाहोने के कारण ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ट्रक की गति काफी तेज थी, और सड़क पर अचानक आई मोड़ पर चालक ने ब्रेक लगाने की कोशिश की। हालांकि, सड़क गीली होने के कारण ट्रक फिसल गया और यह हादसा हो गया। मौके पर राहत बचाव कार्य जारीदुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायलों को ट्रक से बाहर निकालने की कोशिश की। साथ ही, पुलिस औरएंबुलेंस को हादसे की सूचना दी गई। प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को येल्लापुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने बताया कि 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतकों में से अधिकतर मजदूर बताए जा रहे हैं, जो ट्रक के अंदर यात्रा कर रहे थे। 10 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। इनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। घायलों का इलाज जारीघायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए निकटतम बड़े अस्पताल में भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से कुछ को सिर, रीढ़ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि घायलों के लिए सभी आवश्यक दवाओं और सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। पुलिस की जांच जारीहादसे के कारणों की जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ट्रक ओवरलोडेड था और सड़क पर तेज गति से चल रहा था। इसकेअलावा, सड़क की स्थिति और मौसम भी दुर्घटना का एक बड़ा कारण हो सकते हैं। पुलिस ने बताया कि ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज किया गयाहै, और दुर्घटना के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रियाघटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर कन्नड़ जिले के डीसी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने राहत कार्यों का जायजा लियाऔर मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। हादसे का प्रभावयह हादसा न केवल येल्लापुर बल्कि पूरे कर्नाटक में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग ट्रक मालिकों और चालकों से अपील कर रहे हैं कि वेवाहनों को अधिक गति से न चलाएं और ओवरलोडिंग से बचें। NH-63 पर बढ़ते हादसेराष्ट्रीय राजमार्ग 63, जो कर्नाटक के महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है, पर अक्सर सड़क हादसे होते हैं। यह सड़क घुमावदार पहाड़ियों और संकरे रास्तों सेहोकर गुजरती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क पर सुरक्षा उपायों को और बेहतर करने की आवश्यकताहै।सरकार और प्रशासन से मांग स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि NH-63 पर सड़क सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया जाए। उन्होंने सड़क परचेतावनी संकेत लगाने, स्पीड ब्रेकर बनाने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी से सड़कें बंद,  हिमाचल में 6 cm बर्फ, MP के 6 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, यूपी समेत 12 राज्यों में कोहरा

उत्तर भारत में हालिया बर्फबारी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कई इलाकों में भारी बर्फबारीके कारण यातायात और अन्य गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ा है। जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी से मुश्किलें बढ़ींगुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे इलाकों में बर्फबारी के कारण सामान्य जनजीवन बाधित हो गया है। श्रीनगर-लेह हाईवे और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीयराजमार्ग को भूस्खलन और बर्फबारी के चलते बंद करना पड़ा है। फंसे हुए वाहनों को निकालने के लिए प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। हवाई सेवाएं प्रभावितश्रीनगर एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे यात्रियों को कड़ाके की ठंड में लंबा इंतजार करना पड़ा। प्रशासन ने नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रासे बचने की अपील की है। वहीं बर्फबारी के चलते स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को बंद कर दिया गया है। नागरिकों को घर के अंदर रहने औरसुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। हिमाचल प्रदेश में 6 सेंटीमीटर तक बर्फबारी दर्जकुल्लू, मनाली, शिमला और लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। ऊंचाई वाले इलाकों में जनजीवन ठहर सा गया है। पर्यटन स्थलों पर असरबर्फबारी देखने बड़ी संख्या में पर्यटक मनाली और शिमला पहुंचे हैं, लेकिन सड़कें बंद होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने से उन्हें परेशानियों कासामना करना पड़ रहा है। किसानों की चिंताएं बढ़ींकिसानों की फसलों पर बर्फबारी कानकारात्मक असर पड़ सकता है। सेब और अन्य फसलों को ठंड से नुकसान पहुंचने की आशंका है। मध्य प्रदेश में गिरा तापमान, ठंड का प्रकोप जारीमध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। वहींघने कोहरे ने यातायात को प्रभावित किया है। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम होने के कारण वाहन चालकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।बता दें कि शीतलहर के कारण सर्दी-जुकाम और श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। उत्तर भारत के कई राज्यों में कोहरे का असरउत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान सहित 12 राज्यों में घने कोहरे ने रेल और सड़क यातायात को बाधित किया है। बता दें कि कोहरेके कारण कई ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। वहीं कोहरे के चलते सड़क हादसों की घटनाओं में वृद्धि हुई है।प्रशासन ने वाहन चालकों को फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करने और धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी है। प्रशासन की चेतावनी और तैयारियांमौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक भारी बर्फबारी की चेतावनी दी है। वहीं, उत्तर भारत के अन्य हिस्सों मेंशीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा। सावधानियां बरतने की अपीलबर्फबारी वाले क्षेत्रों में नागरिकों से अनावश्यक यात्रा न करने और ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों और हीटर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।वाहन चालकों को कोहरे में फॉग लाइट्स का उपयोग करने और बेहद सतर्कता के साथ गाड़ी चलाने की हिदायत दी गई है।

सांसद से मंत्री तक का सफर: समाज के हर वर्ग के लिए समर्पण : कमलेश पासवान

कमलेश पासवान, जो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में राज्य ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्यरत हैं, का राजनीतिक सफर बहुत हीप्रेरणादायक रहा है। वे पांच बार संसद सदस्य रहे और अपने क्षेत्र में हमेशा से सक्रिय रहे। संसद में रहते हुए, उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के अवसरोंको बढ़ावा दिया, बुजुर्गों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। इन कार्योंसे उन्होंने समाज के हर वर्ग में विश्वास और समर्पण को मजबूत किया। 2024 में राज्य ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद कदम से कदम मिलाकर बदलाव की ओर2024 में जब कमलेश पासवान ने राज्य ग्रामीण विकास मंत्री का पद संभाला, तो उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अपनी प्राथमिकता को औरभी मजबूती से तय किया। मंत्री पद संभालने के सिर्फ छह महीने के अंदर ही वे गांवों के विकास के लिए कई अहम योजनाओं पर काम कर रहे हैं।उनका मानना है कि देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब गांवों का सर्वांगीण विकास होगा। उनके नेतृत्व में बनाई जा रही योजनाएं गांवों केबुनियादी ढांचे में सुधार, रोजगार सृजन और शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता जैसे अहम पहलुओं पर केंद्रित हैं। जब देश के गांव बदलेंगे, तभी देश बदलेगाकमलेश पासवान का हमेशा से यह मानना रहा है कि गांवों का विकास ही देश के समग्र विकास का आधार है। वे कहते हैं, “जब तक हमारे गांव नहींबदलेंगे, तब तक देश नहीं बदल सकता।” उनके इस दृष्टिकोण से यह साफ है कि गांवों की समस्याओं का समाधान किए बिना, पूरे देश का विकाससंभव नहीं है। इसलिए, वे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर निरंतर प्रयास कर रहे हैं, ताकि गांवों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता हो और गांवके लोग अपने जीवन स्तर को सुधार सकें। प्रधानमंत्री मोदी के कैबिनेट में युवा नेतृत्व की पहचानकमलेश पासवान, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट के एक युवा मंत्री हैं, ने अपने कार्यकाल में यह साबित किया है कि युवा नेतृत्व से बड़े बदलावआ सकते हैं। वे उन नेताओं में से एक हैं, जो सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए ठोस कदम भी उठातेहैं। उनका समर्पण और मेहनत उनके नेतृत्व की ताकत है, जो गांवों के लिए सकारात्मक बदलाव ला रही है। कमलेश पासवान का ग्रामीण विकास के प्रति समर्पणकमलेश पासवान का दृष्टिकोण और उनके द्वारा उठाए गए कदम यह दर्शाते हैं कि वे केवल मंत्री नहीं, बल्कि एक सशक्त नेतृत्व हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों केविकास के लिए दृढ़ नायक की तरह कार्य कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि गांवों का विकास न केवल देश की समृद्धि के लिए आवश्यक है, बल्कि यहएक मजबूत और समावेशी समाज की नींव भी रखता है। उनके प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भारतीय गांवों में एक बड़ाबदलाव आएगा, जो देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। ‎

गुजरात में नगरपालिका- पंचायत चुनाव का ऐलान, जानिए पूरी अनुसूची

गुजरात राज्य चुनाव आयोग ने मंगलवार को जूनागढ़ नगर निगम और राज्य की 66 नगर पालिकाओं में चुनावों की घोषणा की। यह चुनाव 16 फरवरी2025 को आयोजित होंगे, और मतगणना 18 फरवरी 2025 को होगी। इन चुनावों को लेकर राज्य भर में राजनीतिक दल और आम जनता दोनों हीउत्साहित हैं। राज्य चुनाव आयोग ने चुनावों के लिए विस्तृत कार्यक्रम और दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चुनाव कार्यक्रम की प्रमुख तिथियांआधिकारिक चुनाव घोषणाचुनाव आयोग ने 20 जनवरी 2025 को इन चुनावों की आधिकारिक घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई, जिसके तहतउम्मीदवारों और पार्टियों को कई प्रतिबंधों का पालन करना होगा। नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथियांउम्मीदवार 23 से 30 जनवरी 2025 तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच31 जनवरी 2025 को सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी उम्मीदवारों ने आवश्यक शर्तों का पालनकिया है। अगर कोई उम्मीदवार अपना नामांकन वापस लेना चाहता है, तो इसे 2 फरवरी 2025 तक करना होगा। वहींमतदान 16 फरवरी 2025 को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। मतगणना और परिणाम मतगणना 18 फरवरी 2025 को की जाएगी, और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। जूनागढ़ नगर निगम और 66 नगर पालिकाओं का चुनावजूनागढ़ नगर निगमगुजरात के प्रमुख शहरों में से एक जूनागढ़ में नगर निगम चुनाव को विशेष महत्व दिया जा रहा है। यहां 60 वार्ड हैं, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों केउम्मीदवारों की प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलेगी। 66 नगर पालिकाओं में चुनावइसके अतिरिक्त, राज्य की अन्य 66 नगर पालिकाओं में भी चुनाव होंगे। इस चुनाव में 800 से अधिक वार्डों के लिए मतदान किया जाएगा। आचार संहिता और चुनाव व्यवस्थाआचार संहिता लागूचुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इस व्यवस्था के तहत किसी भी नई सरकारी योजना, परियोजनाया उद्घाटन पर रोक लगाई गई है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम)इस बार चुनावों में ईवीएम का उपयोग किया जाएगा, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। सुरक्षा इंतजामचुनाव के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। विशेष रूप से संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्तसुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारियांBJP की तैयारियां राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने का अवसर है। पार्टी ने चुनाव प्रचार केलिए अपने प्रमुख नेताओं को मैदान में उतारा है। कांग्रेस पार्टी की रणनीतिकांग्रेस पार्टी भी अपने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकने में लगी है। पार्टी जमीनी मुद्दों पर केंद्रित होकर मतदाताओं से समर्थन जुटाने की कोशिश कररही है। आम आदमी पार्टी का उत्थानआम आदमी पार्टी (आप) ने भी राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसेमुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। मतदान प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाएंमतदान केंद्रों की संख्याराज्य चुनाव आयोग ने इस बार कुल 10,000 मतदान केंद्रों की व्यवस्था की है, जहां मतदाताओं को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष प्रावधानदिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि वे बिना किसी कठिनाई के अपना मताधिकार इस्तेमाल कर सकें। मतदाता जागरूकता अभियानमतदान प्रतिशत को बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक मतदाता जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। प्रमुख चुनावी मुद्दे?स्थानीय निकाय चुनावों में शहरी विकास, जल आपूर्ति, सफाई, सड़कों की मरम्मत और सीवेज व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, छोटे औरमध्यम आकार के शहरों में रोजगार के अवसरों की कमी और स्थानीय उद्योगों का विकास भी प्रमुख चिंता का विषय बन चुका है। कई वार्डों मेंजलभराव, कचरे के सही निपटान और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी चुनाव के एजेंडे में शामिल हैं। बता दे कि इन चुनावों को आगामी विधानसभाचुनावों का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है, और राजनीतिक दल इसे अपनी साख साबित करने का एक बड़ा अवसर मानते हैं।

हिंदू राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक और कदम: 22 जनवरी को लखनऊ से प्रारंभ होगी यात्रा

सनातनी समाज के युवा ह्रदय सम्राट अंशुमान त्रिवेदी और पंकज तिवारी के नेतृत्व में हिंदू राष्ट्र निर्माण यात्रा की शुरुआत 22 जनवरी 2025 कोलखनऊ से होगी। इस यात्रा का उद्देश्य सनातन संस्कृति और हिंदू राष्ट्र के निर्माण के प्रति जागरूकता फैलाना है। यात्रा की शुरुआत प्रभु श्री राम कीप्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर की जाएगी।यात्रा का आरंभ और मार्गयह यात्रा इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के सामने से कुर्सी रोड लखनऊ से शुरू होकर हनुमान सेतु तक जाएगी। यात्रा का शुभारंभ माननीय पवन सिंह चौहान जी, विधान परिषद सदस्य द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया जाएगा। यात्रा में शामिल होने के लिए सनातनी समाज से जुड़े सभी लोग आमंत्रित हैं, ताकिएकजुटता का परिचय दिया जा सके और सनातन संस्कृति की शक्ति को सशक्त किया जा सके।सनातनी समाज की एकता का प्रतीकयात्रा का उद्देश्य न केवल हिंदू राष्ट्र निर्माण की दिशा में लोगों को जागरूक करना है, बल्कि यह सनातनी समाज की एकजुटता का भी प्रतीक बनेगी।अंशुमान त्रिवेदी के नेतृत्व में यह यात्रा समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास करेगी और सनातन धर्म के महत्व को समाज में जागरूक करेगी।सनातनी समाज से अपीलयात्रा के आयोजकों ने सनातनी समाज से अपील की है कि वे इस गौरवपूर्ण अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर यात्रा का हिस्सा बनेंऔर हिंदू राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान दें। यह यात्रा न केवल एक धार्मिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए है, बल्कि यह समाज के एकजुट होने काभी एक महत्त्वपूर्ण क्षण होगा। 

70 घंटे कम करने वाले बयान पर नारायण मूर्ति ने दी सफाई, बोले- ये सबकी व्यक्तिगत पसंद

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख बिजनेस टाइकून और इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने सोमवार को अपनी 70 घंटे के वर्किंगआवर संबंधी विवादास्पद टिप्पणी पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विचार उनकी व्यक्तिगत पसंद थी और इसे किसी अन्य परलागू नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले यह टिप्पणी कई लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई थी, विशेषकर उन व्यक्तियों के लिए जो कार्य-जीवन संतुलन के महत्व को समझते हैं। विवादास्पद टिप्पणी का सारहाल ही में नारायण मूर्ति ने एक सार्वजनिक मंच पर सुझाव दिया था कि एक पेशेवर को हर सप्ताह 70 घंटे काम करना चाहिए। यह बयान कई लोगोंके लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि आजकल कामकाजी घंटों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ गई है और लोग कार्य-जीवन संतुलन के महत्व पर जोर देरहे हैं। मूर्ति का यह विचार, जो एक प्रतिष्ठित कारोबारी नेता के रूप में उनकी राय को दर्शाता था, खासकर युवाओं और विभिन्न उद्योगों के कर्मचारियोंमें चर्चा का कारण बन गया था। इसके बाद उनकी टिप्पणी पर तीव्र आलोचनाएं आईं, क्योंकि कई लोगों का मानना था कि अत्यधिक कामकाजी घंटेमानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। मूर्ति का स्पष्टीकरणअपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए, नारायण मूर्ति ने कहा कि उनका यह विचार केवल उनकी व्यक्तिगत पसंद पर आधारित था। उन्होंने इसे अपनेअनुभवों से साझा किया था और इसका उद्देश्य किसी अन्य व्यक्ति पर दबाव डालना नहीं था। मूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति इस तरहके कार्य-घंटे को अनिवार्य रूप से नहीं अपनाए, यह पूरी तरह से उनकी इच्छा पर निर्भर करता है। उन्होंने यह बताया कि कुछ लोग अपने काम में गहरीडूबने और अतिरिक्त समय देने की इच्छा रखते हैं, जबकि दूसरों के लिए काम और व्यक्तिगत जीवन का संतुलन अधिक महत्वपूर्ण होता है। कार्य-जीवन संतुलन का महत्वमूर्ति के बयान के बाद कार्य-जीवन संतुलन पर काफी चर्चा हुई। आजकल के समय में, कार्य-जीवन संतुलन कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दाबन चुका है। लगातार लंबे घंटों तक काम करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विभिन्न शोधों में यह साबितहुआ है कि अत्यधिक काम से तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके विपरीत, पर्याप्त विश्राम और व्यक्तिगतसमय कर्मचारियों की मानसिक स्थिति और उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं। भारतीय कारोबारी संस्कृति में मूर्ति का योगदाननारायण मूर्ति का बयान भारतीय कारोबारी संस्कृति को भी दर्शाता है। भारत में पारंपरिक रूप से कामकाजी घंटों का लंबा होना सामान्य था, और यहविशेषकर प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप उद्योगों में देखा जाता था। मूर्ति ने अपनी कंपनी की शुरुआत के समय में कठिन परिश्रम और लंबे घंटे काम करनेकी आवश्यकता को महसूस किया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब कार्य-जीवन संतुलन को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा है, औरयह हर व्यक्ति की व्यक्तिगत प्राथमिकता होनी चाहिए कि वह कितने घंटे काम करना चाहता है। बता दें कि नारायण मूर्ति की टिप्पणी और उनकेस्पष्टीकरण ने भारतीय कार्य संस्कृति में एक महत्वपूर्ण विमर्श को जन्म दिया है। यह बात स्पष्ट है कि हर व्यक्ति का काम करने का तरीका अलग होसकता है, और यह उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। हालांकि, कार्य-जीवन संतुलन को महत्व देना आवश्यक है ताकि कर्मचारियोंकी मानसिक और शारीरिक भलाई सुनिश्चित हो सके। मूर्ति का बयान इस बहस को एक नई दिशा में ले गया है, जहां कामकाजी घंटों और कार्य-जीवनसंतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करना जरूरी हो गया है।

कर्नाटक में महात्मा गांधी की स्मृति में कांग्रेस का विशेष आयोजन, सिद्धरमैया बोले- गांधी सच्चे हिन्दू, मरते वक्त हे राम कहा

कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस ने महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के 100 वर्ष पूरे होने पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसरपर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस ऐतिहासिकआयोजन का उद्देश्य गांधीजी के आदर्शों को याद करना और उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना था। महात्मा गांधी और बेलगावी का ऐतिहासिक संबंधमहात्मा गांधी ने 1924 में बेलगावी में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी। यह उनके जीवन में कांग्रेस अध्यक्ष के रूपमें एकमात्र अवसर था। यह अधिवेशन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसी ऐतिहासिक घटना के 100 साल पूरेहोने पर कांग्रेस ने इस आयोजन को एक विशेष श्रद्धांजलि के रूप में मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत और नेता गण का स्वागतमंगलवार को मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा दिल्ली से बेलगावी पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनकास्वागत किया। हवाई अड्डे पर कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ मौजूद थी, जिन्होंने पार्टी के नेताओं का जोरदार अभिनंदन किया। इसके बाद नेता कार्यक्रमस्थल की ओर रवाना हुए। प्रियंका गांधी का संबोधनप्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि गांधीजीने अपने विचारों और कर्मों से स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। प्रियंका ने युवाओं से अपील की कि वे गांधीजी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज मेंसकारात्मक बदलाव लाएं। मल्लिकार्जुन खड़गे का वक्तव्यकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गांधीजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि शांति और अहिंसा के माध्यम सेहर संघर्ष जीता जा सकता है। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा समय में गांधीजी के विचारों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिनकांग्रेस उनके आदर्शों को संरक्षित और प्रचारित करती रहेगी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयानमुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस आयोजन को गांधीजी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकारगांधीजी के आदर्शों को अपनी नीतियों और योजनाओं में शामिल कर रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष प्रदर्शनकार्यक्रम में गांधीजी के जीवन पर आधारित एक नाट्य प्रस्तुति हुई, जिसमें उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया गया। इसके अलावा, स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से गांधीजी के आदर्शों को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के उद्देश्य और प्रासंगिकताइस आयोजन का मुख्य उद्देश्य गांधीजी के आदर्शों और कांग्रेस के मूल्यों को जनता के बीच पुनर्जीवित करना था। कांग्रेस नेताओं ने जोर दिया किगांधीजी के विचार आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने स्वतंत्रता संग्राम के समय थे। सुरक्षा प्रबंध और समापनकार्यक्रम स्थल पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। समारोह का समापन गांधीजी के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम” के सामूहिक गायन औरगांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ। बता दें कि महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की शताब्दी पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम नेन केवल उनके योगदान को सम्मानित किया बल्कि उनकी शिक्षाओं को वर्तमान समय में भी प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया। कांग्रेस ने इस आयोजन केमाध्यम से जनता और कार्यकर्ताओं के बीच गांधीजी के आदर्शों की महत्ता को दोबारा उजागर किया।

*महाकुंभ 2025 में गौतम अदाणी की सहभागिता, श्रद्धालुओं की सेवा में अदाणी समूह*

21 जनवरी 2025 को अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले में हिस्सा लिया। उन्होंने त्रिवेणी संगम मेंपूजा-अर्चना की, बड़े हनुमान जी के दर्शन किए और इस्कॉन पंडाल में आयोजित भंडारा सेवा में श्रमदान किया। इस मौके पर उन्होंने अपनी प्रसन्नताव्यक्त करते हुए कहा, “महाकुंभ के लिए यहां आकर मैं अत्यधिक उत्साहित हूं।” श्रद्धालुओं के लिए विशेष पहल: महाप्रसाद सेवाअदाणी समूह ने महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए कई प्रयास किए हैं। इस्कॉन के सहयोग से उन्होंने “महाप्रसाद सेवा” की शुरुआत की, जिसके तहत प्रतिदिन लगभग 1 लाख भक्तों को भोजन कराने का लक्ष्य है। इस सेवा में रोटी, दाल, चावल, सब्जियां और मिठाई शामिल हैं। इसपहल में 18,000 सफाई कर्मियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। गीता प्रेस के साथ साझेदारीअदाणी समूह ने गीता प्रेस के साथ मिलकर ‘आरती संग्रह’ की एक करोड़ प्रतियां तैयार की हैं, जिन्हें महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं को निःशुल्क वितरितकिया जाएगा। इस संग्रह में शिव, विष्णु, गणेश, लक्ष्मी, दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की आरतियां शामिल हैं। गौतम अदाणी ने इस पहल के बारे मेंकहा, “महाकुंभ भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। गीता प्रेस के सहयोग से ‘आरती संग्रह’ वितरित करना हमारे लिए सम्मान की बात है।” उत्तर प्रदेश के विकास में अदाणी समूह की प्रतिबद्धतामहाकुंभ में अदाणी समूह की सक्रिय भागीदारी न केवल उनकी सामाजिक सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाती है, बल्कि उत्तर प्रदेश में विकास के अवसरोंके प्रति उनकी रुचि को भी प्रकट करती है। गौतम अदाणी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं, और अदाणी समूह राज्य के विकासमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।” समाज सेवा और धार्मिक आयोजनों में योगदानमहाकुंभ 2025, जो 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है, में अदाणी समूह की पहलें लाखों श्रद्धालुओं को सुविधाप्रदान करेंगी। ये प्रयास अदाणी समूह की सामाजिक सेवा और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं।