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दिल्ली विधानसभा में अपराध पर चर्चा नहीं होगी? नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने स्पीकर को लिखा पत्र

दिल्ली में बढ़ते अपराधों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों द्वारा विधानसभा में उठाए गए सवालों को हटाने के फैसले पर नेताप्रतिपक्ष आतिशी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखकर सवाल किया कि अगर दिल्ली में हत्या, लूट, बलात्कार और गोलीबारी जैसी घटनाएं होंगी, तो क्या इस पर विधानसभा में चर्चा नहीं होगी? आतिशी ने इसे हैरान करने वाला फैसला बताया औरकहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार अपराध रोकने में पूरी तरह विफल हो चुकी है, इसलिए वह इस पर चर्चा नहीं कराना चाहती। कानून-व्यवस्था पर चर्चा नहीं होविधानसभा अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी के विधायकों द्वारा उठाए गए अपराध से जुड़े मुद्दों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “कानून-व्यवस्थादिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।” इस फैसले से नाराज आतिशी ने अपने पत्र में लिखा कि जब से दिल्ली विधानसभा बनी है, तबसे विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं विधानसभा में उठाते आए हैं। यह पहली बार हो रहा है कि अपराध से जुड़े मुद्दों को चर्चा से बाहर रखा जा रहाहै। दिल्ली में अपराध बढ़ रहे, लेकिन चर्चा नहीं होगी?आतिशी ने सवाल किया कि अगर दिल्ली में कोई बलात्कार होता है, महिलाओं के खिलाफ हिंसा होती है, या सड़कों पर गोलियां चलती हैं, तो क्याविधानसभा में इस पर बात नहीं होगी? उन्होंने कहा कि दिल्ली के 70 विधायक लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर वे अपने इलाके में बढ़तेअपराध पर सवाल नहीं उठा सकते, तो फिर कौन उठाएगा? भाजपा पर हमलाआतिशी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि चुनाव से पहले डबल इंजन सरकार का वादा किया गया था, जिससे दिल्ली की समस्याएं हल करनेकी बात कही गई थी। लेकिन अब चुनाव जीतने के बाद भाजपा चर्चा ही नहीं होने देना चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र सरकारअपराध रोकने में नाकाम रही है और इसी वजह से वह दिल्ली विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस से बच रही है। लोकतंत्र के खिलाफ फैसलानेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि दिल्ली विधानसभा में हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभामें जनता के मुद्दों पर चर्चा रोकना लोकतंत्र का अपमान होगा। आतिशी ने इस फैसले को तुरंत बदलने की मांग की, ताकि विधायकों को अपने क्षेत्रोंकी समस्याएं उठाने का अवसर मिल सके।

नया इमिग्रेशन बिल 2025, अवैध अप्रवास पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

केंद्र सरकार ने अवैध अप्रवास और घुसपैठ को रोकने के उद्देश्य से इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 लोकसभा में पेश किया। यह विधेयक भारत मेंप्रवेश और विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट, वीजा, पंजीकरण और विदेशी नागरिकों के नियमन से संबंधित है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल परविस्तार से चर्चा करते हुए इसकी आवश्यकता और प्रभाव को स्पष्ट किया। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गृह मंत्री का बयानलोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पारसी समुदाय औरइजरायल से आए यहूदी भारत में सुरक्षित हैं और यहां सम्मान के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने उन लोगों को भी सुरक्षा प्रदान की हैजो पड़ोसी देशों में प्रताड़ित होकर भारत आए हैं। भारत का वैश्विक अप्रवासी समुदायगृह मंत्री ने बताया कि भारत का प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) विश्व में सबसे बड़ा है। उन्होंने महात्मा गांधी, सुंदर पिचाई, सत्य नडेला, ऋषि सुनक, कमला हैरिस और सुनीता विलियम्स का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोग वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। उन्होंने यहभी बताया कि भारत के 1.72 करोड़ एनआरआई (प्रवासी भारतीय) दुनियाभर में फैले हुए हैं, और यह विधेयक उनकी चिंताओं के समाधान की दिशामें भी एक कदम है। अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त प्रावधानगृह मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जो लोग भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में योगदान देना चाहते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन अवैध रूप सेघुसपैठ कर भारत की शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के खिलाफ यह कानून सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने रोहिंग्या और बांग्लादेशीघुसपैठियों का उदाहरण देते हुए कहा कि यह विधेयक देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लाया गया है। विपक्ष की चिंता: कांग्रेस ने जताई आपत्तिइस विधेयक को लेकर विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस ने चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में कहा कि इस विधेयक मेंसंतुलन की कमी है और इसके दुरुपयोग की आशंका है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जाए ताकि एक संतुलितऔर न्यायसंगत कानून बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशियों के प्रवेश को नियंत्रित करना जरूरी है, लेकिन नागरिकों के मौलिक अधिकारोंकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। चार पुराने कानून होंगे समाप्तइस विधेयक के लागू होने के बाद सरकार चार पुराने कानूनों को समाप्त कर देगी, जो अप्रवासन और विदेशी नागरिकों के नियमन से संबंधित हैं। येकानून हैं,फॉरेनर्स एक्ट 194, पासपोर्ट एक्ट 1920,रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट 1939, इमिग्रेशन एक्ट 2000 नए विधेयक का प्रभावइमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 के तहत, सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह विदेशी नागरिकों के प्रवेश, रहने और बाहर जाने की निगरानीकर सके। साथ ही, अवैध रूप से रहने वाले विदेशियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। इस कानून से भारत की सुरक्षा नीति को और अधिकप्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि, विपक्ष इस विधेयक को सरकार के अधिकारों में अत्यधिक वृद्धि करने वाला मान रहा है और इसे संतुलन सेरहित बता रहा है। अब यह देखना होगा कि यह विधेयक संसद में कितना समर्थन पाता है और इसके किस रूप में कानून बनने की प्रक्रिया पूरी होतीहै।

बिहार विधानसभा सत्र के आखिरी दिन सीएम नीतीश कुमार की हरकत बनी चर्चा का विषय, फोटो सेशन का वीडियो वायरल

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले आखिरी बजट सत्र के दौरान जमकर सियासी गहमागहमी देखने को मिली। इस सत्र के आखिरी दिन बिहारविधान परिषद में एक फोटो सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत सभी प्रमुख नेता शामिल हुए। लेकिन इस दौरानएक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें नीतीश कुमार हाथ जोड़े बैठे नजर आ रहे हैं।काफी देर तक हाथ जोड़े रहने के कारण पास बैठे ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव ने उनके हाथों को नीचे कर दिया। पहले भी वायरल हो चुके हैं सीएम के वीडियोयह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी अजीब हरकत के कारण चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी उनके कई वीडियो सोशल मीडियापर वायरल हो चुके हैं। कभी वह बीजेपी नेताओं के पैर छूने की कोशिश करते दिखे, तो कभी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अजीबोगरीबहावभाव प्रदर्शित करते नजर आए। हाल ही में पटना के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान के दौरान उन्होंने मीडिया कर्मियों को नमस्कार करना शुरू कर दियाथा। इसके बाद उन्होंने अपने पास खड़े मुख्य सचिव से इशारों में बातचीत भी की। इतना ही नहीं, राष्ट्रगान खत्म होने से पहले ही वे मंत्री विजय चौधरीके साथ स्टेडियम का राउंड लगाने निकल पड़े, जिससे राष्ट्रगान को बीच में ही रोकना पड़ा। विपक्ष ने उठाए सवालनीतीश कुमार की हालिया हरकतों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राष्ट्रगान प्रकरण को लेकर आरजेडी ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनेकी मांग की थी। हालांकि, इसके बाद विधानसभा में उन्होंने राबड़ी देवी पर पलटवार किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी देखने कोमिली। समझाने में जुटे मंत्री और डिप्टी सीएमफोटो सेशन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ जोड़ने की हरकत से पहले ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव और फिर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हेंसमझाने की कोशिश की। सम्राट चौधरी ने इशारा करते हुए उन्हें सीधे देखने की सलाह दी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनके हावभाव को लेकर उनकेही साथी मंत्री असहज महसूस कर रहे थे। पहले भी सुर्खियों में रहे हैं अजीबोगरीब हावभाव को लेकरयह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में अजीब व्यवहार करते दिखे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूने कीकोशिश से लेकर सार्वजनिक मंच पर उनका हाथ पकड़ने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। सदन में महिलाओं से जुड़े बयान और हाल ही में रविशंकर प्रसादके पैर छूने की घटना भी काफी चर्चा में रही थी। अब इस नए वीडियो को लेकर विपक्ष किस तरह का रुख अपनाता है, यह देखने वाली बात होगी।

गुजरात में 40 छात्रों ने ब्लेड से काटा हाथ, वीडियो गेम से मिली खतरनाक प्रेरणा

गुजरात के अमरेली जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां एक प्राथमिक विद्यालय के 40 छात्रों ने अपने हाथों पर ब्लेड से खुद कोघायल कर लिया। बताया जा रहा है कि एक छात्र ने वीडियो गेम से प्रेरित होकर अपने सहपाठियों को इस खतरनाक कार्य के लिए उकसाया और उन्हें10 रुपये का लालच दिया। खेल-खेल में बच्चों ने किया खुद को घायलघटना हत्यामोटा मुंजियासर के बड़े स्कूल की है, जहां करीब 300 छात्र पढ़ते हैं। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने अपने सहपाठियों से कहा कियदि वे ब्लेड से हाथ काटेंगे तो उन्हें 10 रुपये मिलेंगे, अन्यथा उन्हें 5 रुपये देने होंगे। इस लालच में आकर 40 छात्रों ने पेंसिल शार्पनर के ब्लेड सेअपने हाथों पर कट लगा लिए। स्कूल प्रशासन की लापरवाहीआरोप है कि शिक्षकों ने इस घटना को आठ दिनों तक छिपाए रखा, जिससे अभिभावकों में रोष फैल गया। जब कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों केहाथों पर कट के निशान देखे तो उन्होंने इसकी शिकायत स्कूल प्रशासन से की। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू की गई। अभिभावकों ने पुलिस में की शिकायतघटना की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत के जरिए पुलिस को सूचना दी गई। बागासरा पुलिस स्टेशन के पीएसआई को देर शाम अभिभावकोंऔर सरपंच की ओर से शिकायत सौंपी गई। इसमें स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। स्कूल प्रशासन का पक्षमोटा मुंजियासर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मकवाना ने बताया कि बच्चों ने एक खेल के दौरान अपने हाथों पर ब्लेड से कट लगा लिए। जबयह बात स्कूल प्रशासन को पता चली, तो तुरंत अभिभावकों की बैठक बुलाई गई और उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी दी गई। कैसे हुआ मामले का खुलासा?जब अभिभावकों ने अपने बच्चों के हाथों पर कट के निशान देखे तो उन्होंने स्कूल प्रशासन से सवाल किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामपंचायत और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि यह घटना ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण नहीं, बल्कि’ट्रुथ एंड डेयर’ नामक खेल के दौरान हुई। पुलिस की जांच जारी धारी के सहायक पुलिस अधीक्षक जयवीर गढ़वी ने स्कूल का दौरा किया और सीसीटीवी फुटेज की जांच की। साथ ही बच्चों से पूछताछ कर इसघटना के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश की। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और स्कूल प्रशासन से भी पूछताछ जारी है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालइस घटना ने एक बार फिर बच्चों पर वीडियो गेम और खतरनाक चैलेंज गेम्स के प्रभाव को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों कोडिजिटल कंटेंट के प्रति जागरूक किया जाना जरूरी है, ताकि वे इस तरह के खतरनाक कार्यों से बच सकें। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपनेबच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज न करें।

तमिलनाडु विधानसभा ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित, भाजपा और एआईएडीएमके ने किया विरोध

तमिलनाडु विधानसभा ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव कोमुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने पेश किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। वहीं, विधानसभा में भाजपा विधायक वनथी श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि विपक्षी दल एआईएडीएमके ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि केंद्र सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन करने की कोशिश कर रही है, जिससे वक्फ बोर्ड कीशक्तियां प्रभावित होंगी। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को कमजोर करेगा और केंद्र सरकार को इसकी कोईपरवाह नहीं है। मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि भारत में सभी धर्मों के लोग सद्भाव और समानता के साथ रहते हैं। भारतीय संविधान ने हरनागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिया है और सरकारों का कर्तव्य है कि वे इन धार्मिक अधिकारों की रक्षा करें। विधानसभा ने केंद्रसरकार से वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वापस लेने की मांग की, क्योंकि इससे मुस्लिम समुदाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए एआईएडीएमके के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने डीएमके सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा किडीएमके धर्म और भाषा के आधार पर एक खास नैरेटिव बनाने की जल्दी में है। उन्होंने यह भी पूछा कि इस विधेयक पर पहले संयुक्त संसदीय समितिबनाई गई थी, लेकिन डीएमके और अन्य दल न्यायपालिका में इसे चुनौती क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की जल्दबाजीपर भी सवाल उठाया और इसे वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे समाज में भ्रम और असंतोष पैदा होगा। केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वक्फ अधिनियम 1995 में सुधार के उद्देश्य से पेश किया है। सरकार का दावा है कि इस संशोधनसे वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। संपत्ति को वक्फ घोषित करने से पहलेउचित नोटिस और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। इसके अलावा, महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य बनाया जाएगा, ताकि वक्फबोर्डों के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। तमिलनाडु सरकार के इस विरोध के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रसरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

भुवनेश्वर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन हिंसक हुआ, पुलिस से झड़प और लाठीचार्ज

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों की जांच के लिए कमेटी गठितकरने और कांग्रेस विधायकों के निलंबन के खिलाफ यह प्रदर्शन किया जा रहा था। लेकिन यह जल्द ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प मेंबदल गया।पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकरावसोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर रखी कुर्सियां उठाकर पुलिस पर फेंक रहे हैं। हालात बिगड़तेदेख पुलिस को पीछे हटना पड़ा, लेकिन जल्द ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया गया। इससे पहले, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया। कई कार्यकर्ता घायल, विधानसभा बना किलालगातार बढ़ते तनाव के कारण पुलिस को बार-बार लाठीचार्ज करना पड़ा, जिससे कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबर है। स्थिति कोदेखते हुए विधानसभा के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है, जिससे यह किसी किले जैसा नजर आ रहा है। क्या है पूरा मामला?मंगलवार को ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने भाजपा सरकार के आठ महीनों में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की जांच के लिएकमेटी बनाने की मांग की थी। जब उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो उन्होंने सदन में घंटी बजाकर, ‘राम धुन’ गाकर और सीटी-बांसुरी बजाकरविरोध जताया। इस हंगामे के चलते स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने 12 कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया। निलंबित विधायकों का रातभर धरनासभी 12 निलंबित विधायकों ने मंगलवार रात विधानसभा में ही गुजारी, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता बाहर धरने पर बैठ गए। बुधवार को मामला औरगरमाया जब निलंबित विधायकों को बलपूर्वक विधानसभा से बाहर निकाला गया। इस दौरान दो और विधायकों को निलंबित कर दिया गया, जिससेकांग्रेस और भड़क उठी। विधानसभा घेराव का ऐलानइस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने विधानसभा घेरने का फैसला किया और गुरुवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों केबीच हिंसक झड़प हुई, जो अभी भी पूरी तरह शांत होती नहीं दिख रही। स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है।

केंटकी के गवर्नर एंटी बेशियर ने गर्भपात को किया वीटो, बोले डाल सकता है गर्भवती महिलाओं को खतरे में

केंटकी के गवर्नर एंटी बेशियर ने रिपब्लिकन पार्टी द्वारा लाए गए गर्भपात विधेयक के खिलाफ वीटो कर दिया है. एंडी बेशियर का कहना है कि आपातस्थिति में यह विधेयक गर्भवती महिलाओं के जीवन को खतरे में डालेगा और डॉक्टर्स के निर्णय को भी कमजोर करेगा.वर्जीनिया के रिपब्लिकन गवर्नरग्लेन यंगकिन ने श्रम और बंदूक कानून सुधार वाले विधेयकों पर वीटो लगा दिया है. यंगकिन की आपत्तियों की डेमोक्रेट्स की जनरल असेंबली नेआलोचना की. यंगकिन ने 158 विधेयकों पर वीटो लगाया और करीब 600 पर हस्ताक्षर किए. बेशियर एक गर्भपात अधिकार समर्थक हैं जिन्हें साल2028 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है. हालांकि केंटकी में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत है.ऐसे मेंगवर्नर का वीटो का फैसला सीनेट में पलटा जा सकता है.बिल समर्थकों का कहना है कि इससे डॉक्टर्स के मन में स्पष्टता आएगी, जो अभी केंटकी केकानून को तोड़ने से डरते हैं. केंटकी में वैसे तो गर्भपात प्रतिबंधित है लेकिन कानून में प्रावधान है कि अगर महिला की जान को खतरा है तो उसकागर्भपात किया जा सकता है. नए विधेयक में आपात स्थितियों की सूची दी गई है. जिसमें मां की जान बचाने के लिए गर्भपात किया जा सकता है. उलट सकता है पासाहालांकि केंटकी गवर्नर का मानना है कि इस विधेयक को लेकर पासा उलट भी सकता है और अब उन्हें कानून में खामियां भी लगती हैं.वर्जीनिया केरिपब्लिकन गवर्नर ग्लेन यंगकिन ने श्रम और बंदूक कानून सुधार वाले विधेयकों पर वीटो लगा दिया है.यंगकिन की आपत्तियों की डेमोक्रेट्स की जनरलअसेंबली ने आलोचना की यंगकिन ने 158 विधेयकों पर वीटो लगाया है. और करीब 600 पर हस्ताक्षर कर दिए है. वहीं करीब 160 विधेयकों मेंसंशोधन किया गया है. गवर्नर ने बजट विधेयक में भी 205 संशोधन पेश किए गवर्नर यंगकिन ने जिन विधेयकों को खारिज कर दिया गया. उनसेवर्जीनिया में न्यूनतम प्रतिघंटा मजदूरी 12 डॉलर से बढ़कर 13.50 डॉलर हो जाएगी और एक साल बाद बढ़कर 15 डॉलर हो जाएगी. साथ ही अन्यविधेयक से वर्जीनिया में सेमी ऑटोमैटिक हथियारों की बिक्री पर भी रोक लग जाती हालांकि ये विधेयक गर्वनर की आपत्ति के बाद अटक गए हैं.अबडेमोक्रेट पार्टी के बहुमत वाली वर्जीनिया की जनरल असेंबली की बैठक 2 अप्रैल को रिचमंड में फिर से होगी. जिसमें गवर्नर के वीटो पर चर्चा होसकती है. इसको लेकर आगे की प्रक्रिया जारी है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डेनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, संघीय जज ने लिया फैसला”कोलंबियाई प्रदर्शनकारी छात्रा को नहीं लिया जाएगा हिरासतमें”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है जिसमें संघीय जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी की छात्रा युनसियोचुंग को फलस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण आव्रजन हिरासत में नहीं लिया जा सकता है. संघीय जज का यह आदेश चुंग कोसंभावित निर्वासन से बचाने में एक अस्थायी राहत प्रदान करता है हालांकि चुंग सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थीं. अब इस मामले में अगली सुनवाई20 मई को होगी.संघीय जज के फैसले से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उन प्रयासों को भी झटका लगा है जिनमें वह कैंपस विरोध प्रदर्शनों में भाग लेनेवाले गैर-नागरिकों को देश से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार इन प्रदर्शनों को यहूदी विरोधी और उग्रवादी समूह हमास के प्रतिसहानुभूतिपूर्ण मानती है वहीं छात्रों का कहना है कि सरकार उन्हें फलस्तीनी अधिकारों के लिए बोलने के कारण निशाना बना रही है.चुंग के वकीलरामजी कासेम ने आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) का हवाला दिया. उन्होंने कहा अब युनसियो चुंग को ICE के डर में रहने की जरूरत नहीं हैक्योंकि अब वह रात में उनके दरवाजे पर नहीं आएंगे.मैनहट्टन के संघीय न्यायाधीश नाओमी रीस बुचवाल्ड ने मंगलवार को चुंग के मामले की सुनवाईकी उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों ने चुंग को हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त तथ्य पेश नहीं किए हैं जबकि उसका मामला अभी चल रहा है इसकेअलावा, सिरैक्यूज के एक अन्य संघीय न्यायविद ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट छात्र मोमोदो ताल के मामले पर विचार किया. जो विरोध प्रदर्शनमें शामिल होने के बाद संभावित निर्वासन का सामना कर रहा है.बता दें कि चुंग 7 साल की उम्र में अमेरिका आई थीं अब वह 21 वर्ष की हो चुकी हैंऔर उन्हें कानूनी स्थायी निवास प्राप्त है जिसे आम बोलचाल की भाषा में ग्रीन कार्ड कहा जाता है. होमलैंड ने जारी किया बयानवहीं होमलैंड सुरक्षा विभाग ने सोमवार को एक बयान जारी किया.जिसमें कहा गया है कि चुंग ने ‘चिंताजनक आचरण’ किया है.जिसमें एक विरोधप्रदर्शन में गिरफ्तार होना शामिल है. वहीं संघीय न्यायाधीश बुचवाल्ड ने कहा कि सरकार ने ऐसा कुछ भी तथ्य पेश नहीं किया है कि वह खतरनाक हैंया आतंकवादियों से जुड़ी हैं. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं था कि चुंग के कारण कोई गंभीर विदेश नीति की समस्या हो सकती है. फैसले के बाद ट्रंपप्रशासन के खिलाफ कई मानवाधिकार संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने भी अपना समर्थन जताया. उनका कहना था कि इस फैसले से यह स्पष्ट हो गयाहै कि अमेरिका में नागरिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और न्यायपालिका के पास हमेशा ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने की शक्ति है. आगे की कानूनी प्रक्रिया अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ कोई अपील करता है या नहीं. इस मामले के फैसले ने सरकारऔर न्यायपालिका के बीच संतुलन को स्पष्ट किया है और यह उदाहरण पेश किया है कि कैसे संविधान का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों कोचुनौती दी जा सकती है. इस फैसले ने अमेरिकी समाज में नागरिक अधिकारों के संरक्षण को फिर से रेखांकित किया और यह दिखाया कि किसी भीसरकार को अपनी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्तियों को दबाने का अधिकार नहीं है.

अमेरिकी सीनेट ने जय भट्टाचार्य को बनाया एनआईएच का निदेशक, सीनेट ने नियुक्ति पर लगाई मुहर

अमेरिकी सीनेट ने जय भट्टाचार्य को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) का निदेशक बनाने को अपनी मंजूरी दे दी है. मंगलवार को इसे लेकरसीनेट में मतदान हुआ और जय भट्टाचार्य 53-47 वोटों से जीत गए. इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने जो उनकी एनआईएच पद पर नियुक्ति की थी उसपर भी अंतिम मुहर लग गई अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी ने भी जय भट्टाचार्य के नाम को मंजूरी मिलने पर खुशी जताई.जय भट्टाचार्यस्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं साथ ही वे नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूटऑफ इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च, स्टैनफोर्ड फ्रीमैन स्पोग्ली इंस्टीट्यूट और हूवर इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो के पद पर तैनात हैं. जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्डसेंटर फॉर डेमोग्राफी एंड इकोनॉमिक्स ऑफ हेल्थ एंड एजिंग का भी नेतृत्व करते हैं.जय भट्टाचार्य ग्रेट बेरिंगटन डिक्लेयरेशन के भी सह-लेखक हैं. इसमेंजय भट्टाचार्य ने अक्तूबर 2020 में कोरोना महामारी के समय लगाए गए लॉकडाउन का विकल्प बताया था. जय भट्टाचार्य के अर्थव्यवस्था, कानूनी, मेडिकल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीतियों को लेकर जर्नल भी छप चुके हैं.जय भट्टाचार्य का नाम उस समय चर्चा में आया था जब उन्होंनेकोरोना महामारी के दौरान सरकार के लॉकडाउन लगाने, मास्क पहनने और कोरोना वैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने का विरोध किया था. बहुत सी आलोचनाओं का किया था सामनाजय भट्टाचार्य कहना था कि लॉकडाउन का लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. इस वजह से भट्टाचार्य को आलोचनाओं कासामना भी करना पड़ा उनके आलोचकों में डॉक्टर फ्रांसिस कॉलिंस भी शामिल हैं डॉक्टर कॉलिंस उसी एनआईएच के पूर्व निदेशक हैं. जिसके लिएभट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है कोरोना से निपटने के तरीको को लेकर भट्टाचार्य जो बाइडन सरकार के मुखर आलोचक रहे. इसे लेकर उन्होंने कुछलोगों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. भट्टाचार्य की दलील थी कि बाइडन प्रसाशन सोशल मीडिया पर कोविड-19 कोलेकर रूढ़िवादी विचारों को गलत तरीके से दबा रहा है.जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं. साथ ही वे नेशनल ब्यूरोऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट और स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च, स्टैनफोर्ड फ्रीमैन स्पोग्ली इंस्टीट्यूट और हूवरइंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो के पद पर तैनात हैं. जय भट्टाचार्य स्टैनफोर्ड सेंटर फॉर डेमोग्राफी एंड इकोनॉमिक्स ऑफ हेल्थ एंड एजिंग का भी नेतृत्वकरते हैं. जय भट्टाचार्य ग्रेट बेरिंगटन डिक्लेयरेशन के भी सह-लेखक हैं.इसमें जय भट्टाचार्य ने अक्तूबर 2020 में कोरोना महामारी के समय लगाए गएलॉकडाउन का विकल्प बताया था. जय भट्टाचार्य के अर्थव्यवस्था, कानूनी, मेडिकल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीतियों को लेकर जर्नल भीछप चुके हैं. कोरोना के दौरान आया था चर्चा में नामजय भट्टाचार्य का नाम उस समय चर्चा में आया था जब उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान सरकार के लॉकडाउन लगाने मास्क पहनने और कोरोनावैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने का विरोध किया था. उनका कहना था कि लॉकडाउन का लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. इस वजह से भट्टाचार्य को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा उनके आलोचकों में डॉक्टर फ्रांसिस कॉलिंस भी शामिल हैं. डॉक्टर कॉलिंस उसीएनआईएच के पूर्व निदेशक हैं जिसके लिए भट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है कोरोना से निपटने के तरीको को लेकर भट्टाचार्य जो बाइडन सरकार केमुखर आलोचक रहे. इसे लेकर उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. भट्टाचार्य की दलील थी कि बाइडनप्रसाशन सोशल मीडिया पर कोविड-19 को लेकर रूढ़िवादी विचारों को गलत तरीके से दबा रहा है.

शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक शौचालय के बाहर लगाई कुणाल कामरा की तस्वीर, जमकर किया विरोध प्रदर्शन

Kunal kamara Case: कुणाल कामरा की कॉमेडी से पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है कुणाल द्वारा महाराष्ट्र के राजनेता पर निशानासाधते हुए बनाए गए पैरोडी गीत ने देश भर में कई लोगों के बीच गुस्से को जन्म दे दिया जिसके कारण शिवसेना की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं नेमंगलवार को इंदौर में एक सार्वजनिक शौचालय के बाहर कामरा की तस्वीर लगा दी.शिवसेना नेता ने कुणाल कामरा को धमकी देते हुए कहा कि अगरवह मध्य प्रदेश आए तो उनका चेहरा काला कर दिया जाएगा और उन्हें सड़कों पर घुमाया जाएगा.यह विरोध प्रदर्शन बंगाली स्क्वायर स्थित एकसार्वजनिक शौचालय के बाहर किया गया जहां शिवसेना कार्यकर्ताओं ने 36 वर्षीय कॉमेडियन के खिलाफ नारे लगाए.जिन्होंने विवाद के बाद भीअपनी बात पर अड़े रहे और माफी मांगने से इनकार कर दिया.शिवसेना की युवा शाखा युवा सेना की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अनुराग सोनार नेकहा, ‘कामरा कॉमेडी के नाम पर लोगों को गंदगी परोसते हैं.उनकी गंदी मानसिकता के खिलाफ विरोध जताने के लिए हमने उनकी तस्वीर लगाई है. अगर वह कभी मध्य प्रदेश आए तो शिवसेना कार्यकर्ता उनका मुंह काला कर देंगे और सड़कों पर परेड कराएंगे. राजनीतिक करियर पर किया कटाक्षकॉमेडियन ने अपने शो में एक लोकप्रिय हिंदी फिल्म के गाने के बोल में बदलाव करके राजनेता के राजनीतिक करियर पर कटाक्ष करके बड़ाराजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा किसी के सामने झुकेंगेनहीं.संजय राउत ने कहा कि मैं कामरा को जानता हूं हमारा डीएनए एक जैसा है. वह लड़ाकू है वह माफी नहीं मांगेंगे अगर आपको उनके खिलाफकार्रवाई करनी है तो आपको कानूनी कदम उठाने होंगे.कुणाल कामरा ने कहा है कि वह राजनेता के बारे में अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिएमाफी नहीं मांगेंगे और उन्होंने मुंबई में उस स्थान पर तोड़फोड़ की आलोचना की जहां कॉमेडी शो की रिकॉर्डिंग की गई थी.फिलहाल महाराष्ट्र पुलिसनेने बताया कि कॉमेडियन कुणाल कामरा के वकील ने उनसे 7 दिन का समय मांगा है. आज कुणाल को बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस ने बुलायाथा लेकिन वे नहीं आए पुलिस अब कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करेगी.खार इलाके में यूनिकॉन्टिनेंटल होटल में हैबिटेट कॉमेडी क्लब मेंअपने प्रदर्शन के दौरान कामरा ने शिवसेना के नेता को गद्दार कहा था और उनकी पैरोडी भी गाई थी. शिवसेना कार्यकर्ताओं का किया विरोधबता दें कि कामरा की इस टिप्पणी और पैरोडी गाने के कारण शिवसेना कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप रविवार को स्टूडियो में तोड़फोड़ की. मुंबई पुलिसने इस मामले में कामरा के खिलाफ शिवसेना विधायक की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने केलिए नोटिस जारी किया. साथ ही पुलिस ने खार इलाके में हैबिटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ करने के आरोप में 40 शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ भीमामला दर्ज किया. सोमवार को 12 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया जिन्हें बाद में स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी.दरअसल इससे पहले मई2020 में कुणाल कामरा ने एक एडिटेड वीडियो शेयर किया था. इसमें पीएम मोदी के जर्मनी दौरे के वक्त एक सात साल के बच्चे के गाने के वीडियोसे छेड़छाड़ की गई थी. इसके बाद राष्ट्रीय बालअधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कॉमेडियन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तुरंतवीडियो हटाने के लिए कहा गया था.हालांकि कुणाल कामरा ने अपने बचाव में कहा कि यह वीडियो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है. अपने पोस्ट मेंउन्होंने कहा कि एनसीपीसीआर ने उन पर एक मीम पोस्ट करने के लिए कार्रवाई की मांग की है.