बेंगलुरु में पति ने पत्नी की हत्या कर शव को सूटकेस में छिपाया, महाराष्ट्र जाकर किया गुनाह कबूल

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक पति ने मामूली बहस के बाद अपनी पत्नी की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपीने पत्नी के शव को सूटकेस में बंद कर बाथरूम में रख दिया और वहां से फरार हो गया।नौकरी को लेकर हुई थी बहसघटना 26 मार्च की बताई जा रही है। मृतका गौरी और उसका पति राकेश हाल ही में बेंगलुरु शिफ्ट हुए थे। गौरी पहले एक निजी कंपनी में काम कररही थी लेकिन उसने नौकरी छोड़ दी और नई नौकरी की तलाश में थी। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर बहस होती थी। घटना वालीरात डिनर के दौरान दोनों में कहासुनी हुई, जिसके बाद गौरी ने गुस्से में किचन में रखा चाकू उठाकर राकेश की तरफ फेंका। चाकू राकेश के हाथ परलग गया, जिससे उसे चोट आई। गुस्से में आकर राकेश ने उसी चाकू से गौरी पर तीन बार वार कर उसकी हत्या कर दी। शव को सूटकेस में बंद कर फरार हुआ आरोपीहत्या के बाद राकेश ने गौरी के शव को सूटकेस में भरकर बाथरूम में रख दिया और मौके से फरार हो गया। अगले दिन, यानी 27 मार्च को मकानमालिक ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब घर में दाखिल हुई, तो बाथरूम में रखा सूटकेस बरामद किया। जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को बुलायागया, जिसमें पाया गया कि शव साबुत था और उस पर चाकू के तीन घाव थे। पुलिस के सामने कबूला गुनाहहत्या के बाद राकेश कार लेकर बेंगलुरु से भाग निकला। वह मुंबई होते हुए महाराष्ट्र के शिरवल पुलिस स्टेशन पहुंचा, जहां उसने अपना गुनाह कबूलकिया और बेहोश होकर गिर पड़ा। जांच में पता चला कि उसने जहर खा लिया था। पुलिस ने उसे सतारा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहांसे उसे पुणे के ससून अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस कर रही मामले की जांचपुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि राकेश और गौरी की शादी दो साल पहले अरेंज मैरिज के तहत हुई थी और दोनों महाराष्ट्र के रहने वाले थे।फिलहाल, पुलिस आरोपी के ठीक होने का इंतजार कर रही है ताकि उससे पूछताछ कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
कठुआ के जंगलों में आतंकियों से मुठभेड़, दो आतंकी ढेर, तीन जवान शहीद

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के घने जंगलों में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई, जिसमें दो आतंकवादी मारे गए, जबकिजम्मू-कश्मीर पुलिस के तीन जवान शहीद हो गए और दो अन्य घायल हो गए। यह मुठभेड़ आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन का हिस्सा थी, जो पिछलेचार दिनों से कठुआ के जंगलों में जारी था। चार से पांच आतंकियों के छिपे होने की सूचनासूत्रों के मुताबिक, कठुआ के जुथाना इलाके में चार से पांच आतंकवादी छिपे होने की खबर मिली थी। सुरक्षाबलों ने उनकी सटीक लोकेशन का पतालगाते ही ऑपरेशन शुरू कर दिया। यह मुठभेड़ जखोले गांव के पास हुई, जो हीरानगर सेक्टर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है। इससे पहलेरविवार (23 मार्च) को भी इसी क्षेत्र में पहली मुठभेड़ हुई थी, लेकिन तब आतंकवादी भागने में सफल रहे थे। सेना की विशेष टुकड़ी और उच्चस्तरीय निगरानीआतंकियों को ढेर करने के लिए भारतीय सेना की विशेष टुकड़ी (स्पेशल फोर्सेस) मैदान में उतरी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक (DGP) नलिनप्रभात भी ऑपरेशन की निगरानी के लिए मौके पर पहुंचे। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि गुरुवार की मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादी वही थे, जोरविवार की मुठभेड़ के दौरान भाग निकले थे। बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी22 मार्च से सुरक्षाबलों ने व्यापक सर्च अभियान चला रखा है, जिसमें पुलिस, सेना, NSG, BSF और CRPF की टीमें शामिल हैं। इस ऑपरेशन मेंUAVs, ड्रोन, बुलेटप्रूफ वाहन और आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रविवार की मुठभेड़ के दौरान आतंकवादी हिरानगर केसान्याल गांव में छिपे थे, जहां SOG ने गुप्त सूचना के आधार पर अभियान चलाया था। करीब 30 मिनट चली इस मुठभेड़ के बाद आतंकी जंगलोंकी ओर भागने में सफल रहे थे। भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामदसुरक्षाबलों ने आतंकियों की धरपकड़ के लिए थर्मल इमेजिंग, ड्रोन, हेलीकॉप्टर, बुलेटप्रूफ वाहन और खोजी कुत्तों की मदद से बड़े पैमाने पर तलाशीअभियान चलाया। इससे पहले, सोमवार को हीरानगर इलाके में तलाशी के दौरान M4 कार्बाइन की चार लोडेड मैगजीन, दो ग्रेनेड, बुलेटप्रूफ जैकेट, स्लीपिंग बैग, ट्रैकसूट, खाद्य सामग्री और आईईडी (IED) बनाने का सामान बरामद किया गया था। ऑपरेशन जारी, हाई अलर्ट पर सुरक्षाबलघटना के बाद पूरे क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है, और सुरक्षाबलों द्वारा जंगल में सघन तलाशी अभियान जारी है। अधिकारियों का कहना है किआतंकवादियों की किसी भी घुसपैठ को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
बिहार सरकार का बड़ा फैसला, चारा घोटाले में हेराफेरी हुई 950 करोड़ की राशि होगी जब्त, दोषियों की संपत्ति होगी कुर्क

बिहार सरकार ने चारा घोटाले से जुड़ी 950 करोड़ रुपये की हेराफेरी की रकम दोषियों से वसूलने का फैसला किया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार यह राशि जब्त कर सरकारी खजाने में जमा करेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न्यायालय के आदेश केतहत लिया गया है और सरकार इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। चारा घोटाला, जो भारत के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जाता है, 1990 के दशक में सामने आया था। यह मामला बिहार और झारखंडके पशुपालन विभाग से जुड़ा था, जिसमें पशुओं के चारे और देखभाल के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की हेराफेरीकी गई थी। 1996 में चाईबासा के उपायुक्त अमित खरे द्वारा विभाग के दफ्तरों पर छापेमारी के बाद इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ। इसके बादपटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया और 27 मार्च 1996 को पहली प्राथमिकी दर्ज की गई। सीबीआई ने इस मामले में 66 अलग-अलग केस दर्ज किए और 170 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया। इनमें बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव भी शामिल थे, जिन्हें पांच अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, जगदीश शर्मा औरआर.के. राणा समेत कई अन्य नेताओं और अधिकारियों को भी सजा सुनाई गई। लालू प्रसाद यादव को पहली बार 3 अक्टूबर 2013 को इस घोटालेके तहत जेल की सजा मिली थी और अब तक वे सात बार जेल जा चुके हैं। सरकार अब इस घोटाले में शामिल दोषियों की संपत्तियां जब्त करने और जनता के धन को वापस सरकारी खजाने में लाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ारही है। सम्राट चौधरी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेशानुसार लिया गया निर्णय है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कियाकि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। यह कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश केरूप में देखी जा रही है, जिसका असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
वक्फ बिल के खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, नमाज में काली पट्टी बांधने की अपील

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रमजान के आखिरी जुमे की नमाज में काली पट्टी बांधकर विरोध जताने की अपील की है। बोर्डने देशभर के मुसलमानों से अनुरोध किया है कि वे वक्फ बिल के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपना असंतोष व्यक्त करें। इस संबंध में AIMPLB नेएक वीडियो और ट्वीट जारी कर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का आग्रह किया है। इससे पहले, दिल्ली में भी वक्फ बिल के खिलाफ एक बड़े प्रदर्शन काआयोजन किया गया था। काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने की अपीलAIMPLB से जुड़े कई मौलवियों ने मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया है कि वे अलविदा जुमे की नमाज के दौरान दाईं बांह पर काली पट्टी बांधें। इसकेसाथ ही, उन्होंने नमाज के दौरान काली पट्टी पहने हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने की भी अपील की है। इससे पहले, बिल के विरोध मेंआम मुसलमानों की राय दर्ज कराने का अभियान भी चलाया गया था। वक्फ बिल को लेकर AIMPLB का बयानAIMPLB के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने इस मुद्दे पर एक पत्र जारी किया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और पटना में हुए विरोधप्रदर्शनों के कारण भाजपा की सहयोगी पार्टियों में हलचल मच गई है। इसी कड़ी में, 29 मार्च को विजयवाड़ा में भी एक बड़े प्रदर्शन की योजना बनाईजा रही है। मौलाना रहमानी के अनुसार, प्रस्तावित वक्फ संशोधन बिल एक गहरी साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को उनकी धार्मिक औरसामाजिक संपत्तियों से बेदखल करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह बिल पारित हुआ तो सैकड़ों मस्जिदें, ईदगाहें, मदरसे, दरगाहें, कब्रिस्तानऔर चैरिटी संस्थाएं प्रभावित होंगी। उन्होंने देशभर के मुसलमानों से इस बिल का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया। सरकार का पक्ष और मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रियासरकार का दावा है कि प्रस्तावित वक्फ बिल से मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा होगी और वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे खत्म किए जाएंगे।हालांकि, मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग इसे धार्मिक मामलों में सरकारी दखल मान रहा है और इस संशोधन का विरोध कर रहा है। बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में विरोध प्रदर्शनबिहार के बेगूसराय में अलविदा जुम्मा की नमाज के दौरान मुस्लिम समुदाय ने अनोखे तरीके से विरोध प्रकट किया। नमाजियों ने काली पट्टी बांधकरनमाज अदा की और तख्तियों के जरिए वक्फ बिल को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे इस बिल को किसी भी कीमत परस्वीकार नहीं करेंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो जेल भरने को भी तैयार हैं। इसी तरह, मुजफ्फरपुर में भी AIMPLB की अपील पर अमल किया गया। वहां के मुस्लिम समुदाय ने हाथों में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा कीऔर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय मुस्लिम नेताओं ने इसे संविधान विरोधी कदम बताया और केंद्र सरकार से बिल को तत्काल वापस लेनेकी मांग की।
ममता बनर्जी के लंदन दौरे में विरोध प्रदर्शन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हंगामा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने लंदन दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। उनके ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के केलॉगकॉलेज में दिए गए भाषण के दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के छात्र नेताओं ने विरोध किया और ‘गो बैक’ के नारे लगाए।प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए, जिससे कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न हुई। छात्रों के विरोध पर ममता बनर्जी का जवाबजब छात्रों ने उनसे आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज के मुद्दे पर जवाब मांगा, तो ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह मामला अदालत में लंबित है औरकेंद्र सरकार के अधीन है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मंच को राजनीति का अड्डा न बनाने की अपील की और कहा, “आप बंगाल जाइए और अपनी पार्टीको मजबूत कीजिए।” इसके साथ ही, उन्होंने एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि उन्हें मारने की कोशिश की गई थी और यह कोई नई बात नहीं है। दर्शकों के तीखे सवाल और ममता की प्रतिक्रियाममता बनर्जी ने अपने भाषण में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। इस पर एक दर्शक ने विशेष निवेशपरियोजनाओं के नाम बताने को कहा। जवाब में ममता ने कहा, “बहुत सारे हैं…” लेकिन इससे पहले कि वह विस्तार से बता पातीं, अन्य दर्शकों ने उसव्यक्ति को चुप रहने को कह दिया, यह तर्क देते हुए कि यह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है। ‘मुझे बोलने दें, संस्थान का अपमान न करें’ममता बनर्जी ने विरोध कर रहे लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप मुझे बोलनेदें। आप मेरा नहीं, बल्कि अपने संस्थान का अपमान कर रहे हैं। ये लोग जहां भी मैं जाती हूं, वहां ऐसा ही करते हैं। मैं हर धर्म का सम्मान करती हूं – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी का। केवल एक जाति का नाम मत लीजिए, सभी का नाम लीजिए।” ‘सिर्फ जनता के सामने सिर झुकाऊंगी’जब कुछ लोगों ने ‘गो अवे’ के नारे लगाए, तो ममता बनर्जी ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, “दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ता। दीदी साल में दोबार आएगी और रॉयल बंगाल टाइगर की तरह लड़ेगी।” उन्होंने आगे कहा, “अगर आप कहें तो मैं आपके कपड़े धो दूंगी, आपके लिए खाना बना दूंगी।लेकिन अगर कोई मुझे झुकाने की कोशिश करेगा या मजबूर करेगा, तो मैं नहीं झुकूंगी। मैं केवल जनता के सामने सिर झुकाऊंगी।” SFI-UK ने विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी लीइस विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया – यूके (SFI-UK) ने ली है। संगठन ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट कर लिखा, “हमपश्चिम बंगाल के छात्रों और श्रमिक वर्ग के समर्थन में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक शासन के खिलाफआवाज उठा रहे हैं।” राजनीतिक बहस फिर तेजइस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। ममता बनर्जी की विदेश यात्राओं के दौरान लगातार हो रहे विरोधप्रदर्शनों ने एक नई बहस छेड़ दी है कि उनके शासन और नीतियों को लेकर पश्चिम बंगाल में कितना असंतोष है। अब यह देखना दिलचस्प होगा किइस मुद्दे पर उनकी सरकार और विपक्षी दलों की क्या प्रतिक्रिया आती है।
मद्रास हाई कोर्ट पहुंचे कॉमेडियन कामरा, जानिए क्या कहा?

मद्रास हाई कोर्ट पहुंचे कुणाल कामरामहाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर एक शो के दौरान की गई टिप्पणी के बाद विवादों में घिरे स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने गिरफ्तारीसे बचने के लिए मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट में आशंका जताई कि मुंबई पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकतीहै। अपनी याचिका में उन्होंने खुद को तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले का निवासी बताया है और कहा कि वह फिलहाल पुदुचेरी में रह रहे हैं।विवाद की शुरुआत: कॉमेडी शो में की गई पैरोडीयह विवाद मुंबई के खार स्थित हैबिटेट कॉमेडी क्लब में हुए कुणाल कामरा के एक हालिया शो से शुरू हुआ। शो के दौरान कामरा ने बॉलीवुड फिल्मदिल तो पागल है के एक लोकप्रिय गाने की पैरोडी करते हुए एकनाथ शिंदे पर व्यंग्य किया था। इस पैरोडी में उन्होंने ‘गद्दार’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे 2022 में शिवसेना से शिंदे की बगावत और महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) सरकार को गिराने से जोड़कर देखा गया। इस वीडियो के वायरलहोते ही शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई और उन्होंने खार के हबीटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ कर दी, जहां यह शो रिकॉर्ड कियागया था। कानूनी कार्रवाई: मुंबई पुलिस की पूछताछ और समनशिवसेना विधायक मुरजी पटेल की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने कुणाल कामरा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इस मामले में पुलिस ने उन्हें दोबार पूछताछ के लिए समन भेजा और 31 मार्च तक पेश होने के लिए कहा गया। हालांकि, कामरा ने अब तक पुलिस के सामने पेश होने से परहेजकिया है। विशेषाधिकार हनन का नोटिसइस विवाद के चलते महाराष्ट्र विधान परिषद में भी मामला उठा। बीजेपी के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने कामरा के खिलाफ विशेषाधिकारहनन का नोटिस पेश किया, जिसे विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने स्वीकार कर लिया है। यह मामला अब विधान परिषद की विशेषाधिकारसमिति को भेजा गया है, जो आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस नोटिस में उद्धव ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे का भी नाम शामिल किया गया है। धमकियां और सुरक्षा चिंताएंकुणाल कामरा ने दावा किया है कि इस विवाद के बाद उन्हें 500 से अधिक धमकी भरे कॉल आ चुके हैं, जिनमें कुछ लोगों ने उन्हें जान से मारने और”टुकड़े-टुकड़े” करने की धमकी दी है। इन सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की है। जीरो एफआईआर और ट्रांजिट अग्रिम जमानत क्या होती है?जीरो एफआईआरयह ऐसी प्राथमिकी होती है जिसे किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही अपराध उस क्षेत्र में हुआ हो या नहीं। इसे बिना किसीक्रम संख्या के दर्ज किया जाता है और बाद में संबंधित थाने को ट्रांसफर कर दिया जाता है। ट्रांजिट अग्रिम जमानत: यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य में है और उसे गिरफ्तारी का डर है, तो वह उस राज्य की हाई कोर्ट या सेशन कोर्ट में ट्रांजिटअग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर सकता है। इससे उसे अपने गृहराज्य जाकर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने का समय मिल जाता है। न्यायिक प्रक्रिया और आगे की राहअब यह देखना होगा कि मद्रास हाई कोर्ट कामरा की याचिका पर क्या फैसला सुनाता है। अगर उन्हें ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिलती है, तो वे मुंबईजाकर वहां की अदालत में अपनी जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी के नेताओं की नाराजगी को देखते हुएइस मामले के राजनीतिक रंग लेने की भी संभावना है।
जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर,केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश को स्वीकार करते हुए जस्टिस यशवंत वर्मा के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। अब वे दिल्लीहाईकोर्ट से स्थानांतरित होकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यभार संभालेंगे, जो उनका मूल कार्यक्षेत्र भी है। यह निर्णय एक विवाद के बीच आया, जिसमेंउनके आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की खबर सामने आई थी। इस घटना के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश(CJI) संजीव खन्ना ने 22 मार्च को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक समिति का गठन किया। आरोप था कि 14 मार्च कोजस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने स्टोर रूम में भारी मात्रा में करेंसी नोट बरामद किए थे, जिनमें से कईनोट आग की चपेट में आकर जल चुके थे। इस प्रकरण ने न्यायपालिका और प्रशासन के बीच गंभीर चर्चा को जन्म दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, हिमाचल प्रदेशहाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. एस. संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अनु शिवरामन शामिल हैं। यह जांच संविधान केतहत महाभियोग की प्रक्रिया से अलग है और इसका उद्देश्य इस मामले की गहन पड़ताल करना है। जस्टिस वर्मा के अलावा, दिल्ली हाईकोर्ट के एकअन्य न्यायाधीश, जस्टिस चंद्रधारी सिंह का भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरण कर दिया गया है। 56 वर्षीय जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) और मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबीकी डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 1992 में अधिवक्ता के रूप में अपनी कानूनी यात्रा शुरू की और विभिन्न संवैधानिक, श्रम, औद्योगिक, कॉर्पोरेट औरकराधान कानूनों में विशेषज्ञता हासिल की। अपने करियर के दौरान, उन्होंने 2006 से हाईकोर्ट के विशेष वकील के रूप में कार्य किया और 2012-13 में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख स्थायी अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं। 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया, और 13 अक्टूबर 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया। इसके बाद 1 फरवरी 2016 को उन्हें स्थायी जज के रूप मेंशपथ दिलाई गई। उनका ट्रांसफर ऐसे समय में हुआ है जब न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई चर्चाएं हो रही हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा किआंतरिक जांच समिति इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या कोई कानूनी कार्रवाई की जाती है। इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका कीनिष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गहन चर्चा हो रही है।
प्रियंका गांधी ने एमएएमओ कॉलेज के नव निर्मित ग्राउंड का किया उद्घाटन, छात्रों के समग्र विकास पर दिया जोर

तिरुवंबाड़ी, केरल: कांग्रेस महासचिव एवं वायनाड सांसद श्रीमती प्रियंका गांधी ने तिरुवंबाड़ी विधानसभा क्षेत्र के मनासेरी, मुक्कम स्थित एमएएमओकॉलेज के नव निर्मित ग्राउंड का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय नेता, छात्र और कॉलेज प्रशासन के सदस्यउपस्थित रहे। छात्रों के लिए खेल सुविधाओं का विस्तारएमएएमओ कॉलेज में नव निर्मित यह ग्राउंड छात्रों के खेल और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया है। उद्घाटन समारोह केदौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि खेल और शिक्षा का संतुलित विकास छात्रों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कॉलेज प्रशासन को इसआधुनिक खेल मैदान के निर्माण के लिए बधाई दी और आशा जताई कि यह सुविधा छात्रों को उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायकहोगी। प्रियंका गांधी का संबोधनइस मौके पर प्रियंका गांधी ने स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से शिक्षा और युवाओं के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध रही है।उन्होंने कहा कि छात्रों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंनेकेंद्र और राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे शिक्षा और खेल सुविधाओं में निवेश बढ़ाएं ताकि युवाओं को उनके सपनों को साकार करने के लिएउचित मंच मिल सके। स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रियाकार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और स्थानीय विधायक भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रियंका गांधी का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह की पहलसे युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे। छात्रों में उत्साहकॉलेज के छात्रों ने प्रियंका गांधी के आगमन पर खुशी जाहिर की और कहा कि नई खेल सुविधाओं से उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अभ्यास का अवसरमिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस ग्राउंड का उपयोग विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा।यह उद्घाटन समारोह कॉलेज और स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे शिक्षा और खेल को लेकर नईसंभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
उत्तर भारत में ‘हर घर नंदिनी’ अभियान की शुरुआत, अब यूपी समेत कई राज्यों में मिलेगा शुद्ध दूध

नई दिल्ली, 27 मार्च 2025 – कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने अपने लोकप्रिय डेयरी ब्रांड ‘नंदिनी’ को उत्तर भारत में विस्तार देने की दिशा में बड़ाकदम उठाया है। ‘हर घर नंदिनी’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हरियाणा में नंदिनी ब्रांड के शुद्ध गाय के दूध और अन्य दुग्धउत्पादों की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। इस पहल की शुरुआत ताजमहल नगरी आगरा से हुई, जहां ‘दूध महल’ नाम से नंदिनी का पहलाएक्सक्लूसिव मिल्क पार्लर खोला गया है। किफायती दाम पर दक्षिण भारतीय दूध की आपूर्तिनंदिनी ब्रांड के उत्तर भारत में विस्तार को लेकर दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में डिस्ट्रिब्यूटर मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मौकेपर नंदिनी नॉर्थ इंडिया के स्ट्रैटेजिक हेड अमित सिंह ने बताया कि कर्नाटक के मंड्या जिले से शुद्ध गाय का दूध उत्तर भारत लाकर उपभोक्ताओं कोसुलभ दामों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह दूध उच्च गुणवत्ता वाला है और इसकी शुद्धता को बनाए रखने के लिए कठोरमानकों का पालन किया जाता है। हाथरस और रोहतक में स्थापित हुए प्लांटउत्तर भारत में नंदिनी दूध की पैकेजिंग और वितरण के लिए उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी और हरियाणा के रोहतक में प्लांट स्थापित किए गएहैं। हाथरस प्लांट की प्रतिदिन की क्षमता 1.50 लाख लीटर है, जबकि रोहतक प्लांट में प्रतिदिन 1.0 लाख लीटर दूध की पैकेजिंग की जा रही है।इन संयंत्रों के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। दूध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यानअमित सिंह ने बताया कि नंदिनी दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘मेथिलीन ब्लू रिडक्शन टेस्ट’ (MBRT) का उपयोग किया जाता है। यहपरीक्षण दूध की ताजगी और उसमें मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा का मूल्यांकन करता है। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य तापमान पर यह दूध पांच सेछह घंटे तक बिना फटे रह सकता है, जिससे इसकी उच्च गुणवत्ता का प्रमाण मिलता है। वैश्विक स्तर पर नंदिनी का विस्तारनंदिनी ब्रांड केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि 25 से अधिक देशों में अपने डेयरी उत्पादों का निर्यात कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनीउपस्थिति को मजबूत करने के लिए, नंदिनी ने हाल ही में स्कॉटलैंड और आयरलैंड की क्रिकेट टीमों को प्रायोजित किया था। इसके अलावा, इंडियनसुपर लीग (ISL) फुटबॉल टूर्नामेंट में भी यह प्रमुख ब्रांड भागीदार के रूप में शामिल है। उत्तर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बड़ी सौगात उत्तर भारत में नंदिनी दूध की उपलब्धता से उपभोक्ताओं को शुद्ध और किफायती दुग्ध उत्पाद मिल सकेंगे। ‘हर घर नंदिनी’ अभियान के तहत, KMF का लक्ष्य है कि दक्षिण भारत के पारंपरिक और शुद्ध दूध उत्पादों को उत्तर भारत के उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।
दिल्ली भाजपा का केजरीवाल सरकार पर आरोप – दलितों और गरीबों को योजनाओं के नाम पर किया गुमराह

नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर दलितों और गरीबों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करनेका आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई आकर्षक योजनाओं की घोषणा तो की, लेकिन इनके लिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहींकिया गया।योजनाओं में बजट आवंटन और खर्च में बड़ा अंतरवीरेन्द्र सचदेवा ने दावा किया कि 2022-23 में ‘दलित प्रतिभा योजना’ के तहत 70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन इसयोजना पर एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। इसी तरह, 2020-21 से 2023-24 के बीच अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और गरीबों के लिए 250 करोड़ रुपयेका बजट निर्धारित किया गया, लेकिन व्यय मात्र 4.2 करोड़ रुपये ही हुआ।मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना में भी बड़ी गड़बड़ीभाजपा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के दावों के बावजूद, ‘मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना’ के तहत 2020-21 से 2023-24 के बीच461 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, लेकिन इसमें से सिर्फ 32.2 करोड़ रुपये यानी महज 7% राशि ही खर्च की गई।दलित बस्तियों के विकास का दावा भी झूठा?सचदेवा ने बताया कि केजरीवाल सरकार ने 2020-21 से 2023-24 तक दलित बस्तियों के सुधार के लिए 260 करोड़ रुपये की योजनाओं कीघोषणा की थी, लेकिन इस दौरान खर्च सिर्फ 120.60 करोड़ रुपये हुआ। उन्होंने इसे दलित समाज के साथ एक बड़ा छलावा बताया। विधानसभा में रखी जाएगी योजनाओं की हकीकतदिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा जल्द ही विधानसभा में इन योजनाओं से जुड़े तथ्यों को पेश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंदकेजरीवाल सरकार ने प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की भलाई के लिए बनाई गई योजनाओं पर अमलनहीं किया। भाजपा के इस खुलासे के बाद अब देखना होगा कि दिल्ली सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।