मुर्शिदाबाद हिंसा पर सियासी घमासान,योगी-ममता के बीच जुबानी जंग तेज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंनेकहा कि बंगाल में हिंसा लगातार बढ़ रही है, लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। योगी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी दंगाइयों को‘शांति दूत’ कहती हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा, “दंगाइयों का इलाज सिर्फ डंडा है। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर दंगाइयों को खुली छूट दी जा रही है, जो किअराजकता को बढ़ावा दे रही है।” ममता बनर्जी का पलटवार: ‘योगी सबसे बड़े भोगी’योगी के बयानों पर पलटवार करते हुए ममता बनर्जी ने कोलकाता में इमामों की एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथबड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन वह सबसे बड़े भोगी हैं। यूपी में महाकुंभ के दौरान कई लोगों की जान गई और मुठभेड़ों में कई लोगों की मौत हुई।”ममता ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में नागरिकों को खुलकर बोलने और रैली करने की आजादी नहीं है, जबकि पश्चिम बंगाल में सभी कोलोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त हैं। हिंसा के पीछे बाहरी तत्वों का हाथ: ममता का आरोपमुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर ममता बनर्जी ने दावा किया कि इसमें सीमा पार के तत्वों की भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा, “क्या अंतरराष्ट्रीय सीमाकी रक्षा बीएसएफ की जिम्मेदारी नहीं है? अगर सीमा से अराजक तत्व आ रहे हैं, तो इसके लिए केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है।”उन्होंने हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और राज्य के मुख्य सचिव को बीएसएफ कीभूमिका की जांच के निर्देश भी दिए। बीजेपी का पलटवार: “ममता दंगाइयों को संरक्षण देती हैं”ममता बनर्जी के ‘भोगी’ बयान पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। यूपी बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “योगीजी ने दंगाइयों के खिलाफबयान दिया, जो ममता बनर्जी को नागवार गुज़रा क्योंकि वह खुद दंगाइयों को संरक्षण देती हैं।” उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश कोदंगामुक्त बनाया है, और ममता को यूपी मॉडल से प्रेरणा लेनी चाहिए। शुभेंदु अधिकारी का समर्थन, योगी को बंगाल बुलाने की मांगपश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “योगी जी ने बंगाल कीअराजकता के खिलाफ जो आवाज़ उठाई, उसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। NHRC और NCW के प्रतिनिधियों के आने से स्थिति कीगंभीरता स्पष्ट होती है। योगी जी को खुद बंगाल आकर लोगों से संवाद करना चाहिए।” सियासी टकराव तेज, केंद्र-बंगाल रिश्तों में नई तल्खीमुर्शिदाबाद हिंसा एक तरफ जहां राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुकी है, वहीं दूसरी ओर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सुरक्षा जिम्मेदारियोंको लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है।
जस्टिस बी.आर. गवई होंगे भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को संभालेंगे पदभा

भारत के सर्वोच्च न्यायालय को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में 14 मई 2025 को कार्यभार संभालेंगे। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने न्यायपालिका की परंपरा के अनुरूपअपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस गवई के नाम की सिफारिश की है। सीजेआई पद के लिए औपचारिक प्रक्रिया पूरीमुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कानून मंत्रालय से मिले अनुरोध के बाद जस्टिस बी.आर. गवई के नाम की सिफारिश औपचारिक रूप से की, जिसेअब मंजूरी के लिए सरकार को भेजा गया है। सीजेआई खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 को समाप्त हो रहा है, जिसके तुरंत बाद वरिष्ठता क्रम केअनुसार जस्टिस गवई सर्वोच्च पद पर नियुक्त होंगे। जस्टिस बी.आर. गवई का न्यायिक सफरजस्टिस गवई ने अपने न्यायिक करियर की शुरुआत बॉम्बे हाईकोर्ट से की थी, जहां उन्हें 2003 में न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्होंने कईसंवेदनशील मामलों की सुनवाई करते हुए न्यायिक प्रणाली में अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त कियागया था। वे न्यायपालिका के वरिष्ठतम जजों में से एक हैं और अब उनकी वरिष्ठता के आधार पर उन्हें सीजेआई की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।दलित समुदाय से दूसरे मुख्य न्यायाधीशजस्टिस गवई देश के पहले दलित मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस के.जी. बालकृष्णन के बाद दूसरे होंगे। यह ऐतिहासिक उपलब्धि सामाजिकसमरसता और न्याय प्रणाली में विविधता के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है
वक्फ संशोधित कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, रोक से इनकार, अगली सुनवाई गुरुवार को

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पी.वी. संजयकुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में दाखिल करीब 70 याचिकाओं पर विचार किया। इन याचिकाओं में वक्फ संशोधनकानून की कई धाराओं को संविधान के विरुद्ध बताते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की गई है। प्रसिद्ध वकीलों की बहस, अंतरिम आदेश की संभावनासुनवाई के दौरान असदुद्दीन ओवैसी, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जैसे नामचीन वकीलों ने पक्ष रखा।शुरुआत में चीफ जस्टिस ने संकेत दिया कि कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करेगा जो “इक्विटी” को संतुलित करेगा। उन्होंने कहा कि जो संपत्तियां कोर्टद्वारा वक्फ घोषित की गई हैं, उन्हें फिलहाल गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा और कलेक्टर की कार्रवाई जारी रह सकती है। हालांकि, अंत में कोर्ट ने इसपर कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया और मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की गई। राज्य सरकारें कानून के समर्थन में उतरींवहीं दूसरी ओर, कई राज्य सरकारें इस कानून के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। छत्तीसगढ़, असम, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा औरराजस्थान ने याचिकाकर्ताओं की मांगों का विरोध करते हुए मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी। इन राज्यों का कहना है कि वक्फ संशोधनकानून संविधान के अनुरूप है और इसे रद्द नहीं किया जाना चाहिए। CJI की सिब्बल को सलाह – मुख्य बिंदु रखेंसुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने लंबी दलीलें पेश करनी शुरू कीं, तो मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें संक्षिप्त रहने की सलाह दी।उन्होंने कहा कि दाखिले की शुरुआती सुनवाई के स्तर पर समय की कमी होती है, इसलिए 1, 2, 3 के बिंदुओं में अपना पक्ष रखें। साथ ही, कोर्ट नेयह स्पष्ट किया कि उन्हें केवल दो सवालों के जवाब चाहिए – क्या इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए या इसे हाईकोर्ट भेजा जानाचाहिए, और याचिकाकर्ता किन मुद्दों पर बहस करना चाहते हैं। केंद्र सरकार का रुख – कानून को खतरा नहींकेंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भरोसा जताया है कि यह कानून, जिसे संसद ने पारित किया है, उसे कोर्ट निरस्त नहीं करेगा। सरकार का मानना है किवक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पूरी तरह से संवैधानिक है और समाजिक व कानूनी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। फैसला सुप्रीम कोर्ट में ही होगा सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा और अगली सुनवाई गुरुवारको होगी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी व सोनिया गांधी की बढ़ी मुश्किलें, ईडी की तरफ से दायर किया गया आरोप पत्र “और भी नेताओं के नाम किए गए शामिल”

नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर शिकंजा कसते हुए मनी लॉन्ड्रिंगमामले में आरोपपत्र दायर किया है. जांच एजेंसी की ओर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया गया है. ईडी ने दोनों नेताओं कोमनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी बनाया गया है. आरोपपत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा, सुमन दुबे समेत कई नेताओं के नाम भी शामिल हैं.इसमामले में विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा अभियोजन पक्ष की वर्तमान शिकायत पर संज्ञान के पहलू पर अगली बार 25 अप्रैल 2025 कोइस अदालत के समक्ष विचार किया जाएगा. जब ईडी और आईओ के विशेष वकील अदालत के अवलोकन के लिए केस डायरी का उत्पादन भीसुनिश्चित करेंगे.ईडी की ओर से दाखिल किए गए आरोपपत्र पर राउज एवेन्यू कोर्ट में 25 अप्रैल को सुनवाई होगी. ईडी की ओर से धन शोधन निवारणअधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 44 और 45 के तहत धन शोधन के अपराध के लिए अभियोजन शिकायत दर्ज की गई है. इससे पहलेप्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़ी संपत्तियों पर कब्जा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी.यहपहली बार है जब कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ किसी मामले में चार्जशीटदाखिल की गई है . ईडी ने साल 2014 में शुरु की थी जांचदरअसल ईडी ने साल 2014 में दिल्ली के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश पर एजेएल और यंग इंडिया के खिलाफ पीएमएलए के तहत जांच शुरूकी थी. ईडी ने एजेएल यानी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड और यंग इंडिया की अभी तक करीब 751.9 करोड़ रुपये कीमत की प्रॉपर्टी जब्त कीहै.नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की स्थापना 1938 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। यह स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक था. इसे एसोसिएटेडजर्नल्स लिमिटेड यानी एजेएल की तरफ से प्रकाशित किया जाता था. साल 2008 में वित्तीय संकट के बाद समाचार पत्र बंद हो गया और यहीं से इसविवाद की शुरुआत हुई. इसके बाद 2010 में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएल) नाम की कंपनी बनीं. जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधीकी 38-38% हिस्सेदारी है. इस मामले में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में आरोप लगाया कि वाईआईएल ने एजेएल की 2000 करोड़रुपये से अधिक की संपत्तियों को मात्र 50 लाख रुपये में हासिल कर लिया और यह धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया बड़ा ऐलान, कहा दक्षिणी सीमा में लगा सकते है आपातकाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण को 20 अप्रैल को 90 दिन पूरे होने वाले हैं. इसके साथ ही ट्रंप के पहले कार्यकारी आदेश पर अमलकरने की तैयारी शुरू हो गई है. दक्षिणी सीमा पर आपातकाल लागू करने के कार्यकारी आदेश को भी 20 अप्रैल को लागू किया जा सकता है. बतायाजा रहा है कि ट्रंप आदेश के तहत सेना की तैनाती कर सकते हैं. राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद ट्रंप ने अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर आपातकाललगाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे. इस आदेश में प्रावधान था कि घोषणा की तिथि से 90 दिनों के भीतर रक्षा सचिव और गृह सुरक्षासचिव संयुक्त राज्य अमेरिका की दक्षिणी सीमा की स्थितियों के बारे में राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपेंगे. साथ ही अतिरिक्त कार्रवाई की सिफारिशें करेंगे. इसके तहत 1807 के विद्रोह अधिनियम को भी लागू किया जा सकता है.कार्यकारी आदेश के 90 दिन पूरे होने में एक सप्ताह से कम समय बचा है. विद्रोह अधिनियम करेंगे लागूइसलिए माना जाने लगा है कि ट्रंप वास्तव में विद्रोह अधिनियम लागू करेंगे और 20 अप्रैल को दक्षिणी सीमा पर सेना तैनात करेंगे. हालांकि अब तकरक्षा सचिव और होमलैंड सुरक्षा सचिव ने अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है. उन्हें मिशन की अब तक की उपलब्धियों के बारेमें जानकारी नहीं दी है इसके चलते लोगों को लग रहा है कि कई लोगों को यकीन है कि पुराने कानून को जल्द ही दक्षिणी सीमा पर पूर्ण नियंत्रणहासिल करने के लिए लागू किया जाएगा.अमेरिका के 1807 के विद्रोह अधिनियम के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति कुछ स्थितियों औरपरिस्थितियों में कानून को लागू करने के लिए सेना और यूएस नेशनल गार्ड की तैनाती की अनुमति दे सकते हैं. यह सेना को किसी भी विद्रोह बगावतया हिंसा या प्रतिरोध के किसी भी कृत्य को पूरी तरह से दबाने का अधिकार देता है. यह अमेरिकी राष्ट्रपति अमेरिकी सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ- को यह तय करने की पूरी शक्ति देता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर अमेरिकी सैनिकों को कब, कहां और कब तैनात किया जाए. आपातकाल का कर दिया गया था एलानव्हाइट हाउस में ट्रंप की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर आपातकाल का एलान कर दिया गया था. इसके तहत सभीअवैध तरह की एंट्री पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी. इस कार्यकारी आदेश के जरिए अब अमेरिका दक्षिणी सीमा पर अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सेनाभेज सकता है.ट्रंप के कार्यकारी आदेश के दो दिन बाद 22 जनवरी, 2025 को अमेरिकी रक्षा विभाग ने घोषणा की थी कि वह सीमा सुरक्षा लागू करनेके लिए कार्यरत अन्य संघीय एजेंसियों और सेवा शाखाओं की सहायता के लिए अतिरिक्त वायु और खुफिया संपत्तियों के साथ 1,500 सक्रिय-ड्यूटीसेवा सदस्यों को दक्षिणी सीमा पर भेजेगा. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि उनका विभाग क्यूबा के ग्वांतानामो बे में 30,000 आपराधिकप्रवासियों को रखने का इरादा रखता है. राष्ट्रपति की घोषणा के बाद कि वह रक्षा विभाग को ऐसा करने का निर्देश देने वाले एक कार्यकारी आदेश परहस्ताक्षर करेंगे.
राजस्थान की राजनीति में मचा हड़कंप, कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के आवास पर की गई छापेमारी

राजस्थान की राजनीति में हड़कंप मचाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार सुबह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावासके जयपुर स्थित आवास पर छापेमारी की. यह कार्रवाई बहुचर्चित 2850 करोड़ रुपये के पीएसीएल घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है. खाचरियावासपर आरोप है कि पीएसीएल घोटाले की रकम में से करीब 30 करोड़ रुपये की राशि उनके पास पहुंची थी. इसी सिलसिले में ईडी की टीमें उनकेठिकानों पर दस्तावेजों की जांच कर रही हैं.गौरतलब है कि पीएसीएल (PACL) कंपनी पर सेबी ने 22 अगस्त 2014 को अवैध निवेश योजनाएंचलाने के आरोप में कार्रवाई करते हुए उसके सारे कारोबार बंद करवा दिए थे. इसके बाद कंपनी के खिलाफ देशभर में केस दर्ज हुए. 49,100 करोड़ की जुटाई थी राशिसेबी की रिपोर्ट के अनुसार पीएसीएल ने देशभर में करीब 5.85 करोड़ लोगों से 49,100 करोड़ रुपये की राशि जुटाई थी. जिसमें से अकेले राजस्थानके 28 लाख निवेशकों से करीब 2850 करोड़ की पूंजी जमा की गई थी.पीएसीएल की संपत्तियों को जब्त कर निवेशकों को भुगतान करने के लिएसुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था. सेबी के अनुसारकंपनी के पास 1.86 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां मौजूद हैं जो निवेशकों की रकम से करीब चार गुना अधिक है. मालूम हो कि इस घोटाले कासबसे पहला केस साल 2011 में जयपुर के चौमू थाने में दर्ज किया गया था. इसके बाद बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, असम, कर्नाटक, पंजाब, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में मामले दर्ज किए गए. फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और प्रताप सिंह खाचरियावास से जुड़े दस्तावेजों कीगहन जांच की जा रही है. आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है.
प्लेयर ऑफ द मैच के लिए अपना नाम सुनकर चौंके धोनी, नूर अहमद के लिए उठाई आवाज

लखनऊ सुपर जाएंट्स (एलएसजी) के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी ने 11 गेंदों में 27 रनों की नाबाद ताबड़तोड पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई. उन्होंने छठे विकेट के लिए शिवम दुबे के साथ 50 से ज्यादा रनों की साझेदारी की. मुकाबले के बाद कप्तान धोनी को उनके शानदार प्रदर्शन के लिएप्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. हालांकि इस अवॉर्ड के लिए अपना नाम सुनकर ‘थाला’ चौंक गए.लखनऊ के खिलाफ धोनी ने 236.36 के स्ट्राइक रेटसे बल्लेबाजी की. इस दौरान उनके बल्ले से चार चौके और एक गगनचुंबी छक्का निकला मैच के बाद जब उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड के लिएबुलाया गया तो वह अचंभित हो गए. उन्होंने पूछा मुझे क्यों इस अवॉर्ड के लिए चुना गया. इस दौरान थाला ने चेन्नई के घातक स्पिनर नूर अहमद कीतारीफ की. उन्होंने कहा कि इस अवॉर्ड के हकदार नूर हैं.धोनी ने कहा- मैं भी हैरान था कि आप लोग मुझे प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार क्यों दे रहे हैं. नूर ने की अच्छी गेंदबाजीमुझे लगता है कि नूर ने आज बहुत अच्छी गेंदबाजी की. मुझे लगता है कि नई गेंद के गेंदबाजों ने भी बहुत अच्छी गेंदबाजी की. दरअसल 20 वर्षीयअफगानी स्पिनर ने अपने चार ओवर के घातक स्पैल में सिर्फ 13 रन खर्च किए थे. हालांकि उन्हें कोई विकेट नहीं मिला लेकिन उन्होंने 3.25 कीइकोनॉमी से गेंदबाजी की थी.धोनी 2206 दिन बाद आईपीएल में सोमवार को 18वीं बार प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीता. उन्होंने आखिरी बार2019 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मुकाबले में ये अवॉर्ड जीता था. उस मैच में पूर्व कप्तान ने 75 रनों की धमाकेदार पारी खेली थी. सत्र की दूसरीजीत दर्ज करने के बाद कप्तान धोनी ने कहा- जीतकर अच्छा लग रहा है. बदकिस्मती से हम पिछले मैच नहीं जीत सके लेकिन इस जीत सेआत्मविश्वास बढा है. यह कठिन मैच था और जीतने की खुशी है. उम्मीद है कि इससे टीम की लय बनेगी. पिछले मैचों में हम गेंदबाजी करते समयपहले छह ओवर में जूझ रहे थे लेकिन बीच के ओवरों में वापसी की. हमें बल्लेबाजी ईकाई के तौर पर भी मनचाही शुरूआत नहीं मिल पा रही थी. शायद चेन्नई की विकेट के कारण। उम्मीद है कि बेहतर विकेटों पर हम आगे बेहतर प्रदर्शन करेंगे.
हरियाणा जमीन के मामले में रॉबर्ट वाड्रा से ईडी ने की पूछतांछ, बोले न सरकार से न ईडी से नहीं हूं डरने वाला

प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को हरियाणा भूमि सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में काराबारी और वायनाड से कांग्रेस प्रियंका गांधी के पति रॉबर्टवाड्रा से पूछताछ की. हालांकि वाड्रा ने एजेंसी के समन राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया.उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान पहले भी ईडी के साथ घंटोंबिताए हैं.हजारों पेज साझा किए हैं लेकिन फिर भी एजेंसी उनके खिलाफ मामले उठा रही है. मैं न ही किसी दबाव में आने वाला हूं और न ही किसी सेडरने वाला हूं.56 साल के रॉबर्ट वाड्रा मध्य दिल्ली के सुजान सिंह पार्क स्थित अपने आवास से एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित ईडी मुख्यालयतक दो किलोमीटर पैदल गए. ईडी कार्यालय के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया ‘यह कुछ और नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोधहै. जब भी मैं अल्पसंख्यकों के लिए बोलता हूं तो वे मुझे रोकने की कोशिश करते हैं हमें कुचलने की कोशिश करते हैं. उन्होंने संसद में राहुल को भीरोकने की कोशिश की. यह एजेंसियों का दुरुपयोग है और यह राजनीतिक प्रतिशोध है. मैं पहले की तरह उनके साथ सहयोग करूंगा.इससे पहलेप्रवर्तन निदेशालय ने रॉबर्ट वाड्रा को जमीन सौदा मामले में दूसरी बार तलब किया था. मंगलवार की सुबह पहुंचे ईडी के दफ्तरसमन के तहत वे मंगलवार सुबह ईडी दफ्तर पहुंचे थे. पहले ईडी ने उन्हें समन कर 8 अप्रैल को पेश होने को कहा था हालांकि तब वे पेश नहीं हो पाएथे. जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत वाड्रा का बयान दर्ज किया. इससे पहले संघीय जांच एजेंसी ने एक अन्य धनशोधन मामले में वाड्रा से पूछताछ की थी.दरअसल ईडी ने मंगलवार को हरियाणा के शिकोहपुर भूमि सौदे से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले मेंरॉबर्ट वाड्रा को समन भेजा है. वाड्रा पहले समन पर उपस्थित नहीं हुए थे जो 8 अप्रैल को जारी किया गया था. उन्हें पूछताछ के लिए ईडी के सामनेउपस्थित होने के लिए कहा गया. क्योंकि केंद्रीय जांच एजेंसी उनकी फर्म स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं कीजांच कर रही है. ईडी के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने फरवरी 2008 में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुड़गांव के शिकोहपुर में 3.5 एकड़ का प्लॉट 7.5 करोड़ रुपये में खरीदा था. डीएलएफ को बेचा 59 करोड़ मेंउनकी कंपनी ने इसके बाद जमीन को रियल एस्टेट दिग्गज डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया.इससे ईडी दफ्तर जाते वक्त रॉबर्ट वाड्रा ने कहाकि सरकार बदले के तहत कारवाई कर रही है. मुझे नहीं पता कि आखिर गलती क्या है मुझे किसी से भी कुछ भी छिपाने की जरूरत नहीं है. मैं कुछ भीगलत नहीं किया है मेरे खिलाफ जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. यह सब कुछ मुझे परेशान करने और फंसाने के लिए किया जारहा है. इस मामले में कुछ भी नहीं है। पिछले 20 सालों में मुझे 15 बार बुलाया गया और हर बार 10 घंटे से ज्यादा पूछताछ की गई. मैंने 23000 दस्तावेज जमा किए हैं. मुझसे जो भी पूछा जाएगा उन्हें सब बताएंगे.
आम आदमी पार्टी ने बाबा साहब की 134वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि, केजरीवाल ने की शिक्षा और सामाजिक समानता की बात

नई दिल्ली: आज आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्यालय में भारत रत्न और संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंतीधूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत अन्य पार्टी नेताओं ने बाबा साहब को पुष्पांजलि अर्पित की। केजरीवाल का संबोधन: बाबा साहब के आदर्शों पर चलने का संकल्पअरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के आदर्शों पर चलती है। हम उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए हर व्यक्तितक शिक्षा, सम्मान और सुविधाएं पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। केजरीवाल ने यह भी कहा कि देश की दोनों प्रमुख पार्टियां केवल वोट बैंक कीराजनीति के लिए बाबा साहब का नाम लेती हैं, जबकि उनके विचारों का पालन नहीं करतीं। बाबा साहब के विचारों को नजरअंदाज करने का आरोपकेजरीवाल ने कहा, “आज की राजनीति में कई पार्टियां बाबा साहब की श्रद्धांजलि देने का दिखावा करती हैं, जबकि उनके विचारों का पालन नहींकरतीं।” उन्होंने यह उदाहरण दिया कि जैसे कोई पिता अपने बेटे से अच्छे आचरण की उम्मीद करता है, लेकिन यदि बेटा उल्टा काम करता है तो पिताउसे तसल्ली देने के बजाय सुधार की कोशिश करता है, ठीक वैसे ही राजनीतिक दल बाबा साहब के विचारों का पालन नहीं करते। शिक्षा का महत्व और उसकी उपेक्षाअरविंद केजरीवाल ने कहा कि बाबा साहब ने हमेशा शिक्षा को सबसे अहम बताया था। “अगर हम सभी बच्चों को एक समान और अच्छी शिक्षा नहींदेंगे, तो देश कभी तरक्की नहीं कर सकता।” उन्होंने दिल्ली में हाल ही में प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने की घटना को लेकर चिंता व्यक्त की औरइसे “शोषण” करार दिया। दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था का पतनकेजरीवाल ने बताया कि जब आम आदमी पार्टी की सरकार आई, तो दिल्ली में सरकारी स्कूलों की स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाए गए थे, लेकिन अब दिल्ली में नई सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बिगाड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा, “इन दो महीनों में प्राइवेट स्कूलों ने मनमानी फीसबढ़ाई है और सरकार के कुछ अच्छे फैसलों को उलट दिया है।” गुजरात में शिक्षा का हाल और भाजपा की नीतियांकेजरीवाल ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, और अब वही स्थिति दिल्ली में होसकती है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग बाबा साहब के नाम पर दिखावा करते हैं, जबकि शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदानशून्य है। आंदोलन के बावजूद बाबा साहब की शिक्षा नीति की उपेक्षाउन्होंने यह भी कहा कि बाबासाहब ने समाज के सभी वर्गों को शिक्षा का समान अधिकार दिया था। अगर उनके विचारों का पालन किया गया होता, तो शिक्षा का स्तर बेहतर होता। “भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां केवल बाबा साहब का नाम लेती हैं, जबकि उनकी नीतियों पर अमल नहीं करतीं।” आरक्षण और समान अवसर की मांगअरविंद केजरीवाल ने पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा सरकारी वकीलों के पैनल में आरक्षण देने का उल्लेख किया और अन्य राज्यों से भीयह कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि “अगर भाजपा और अन्य पार्टियां बाबा साहब से प्यार करती हैं, तो वे अपने राज्यों में सरकारी वकीलोंके पैनल में आरक्षण लागू करें।”सौरभ भारद्वाज का बयान: भाजपा द्वारा वादों का उल्लंघनआम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बाबा साहब के नाम पर कई वादे किए, लेकिन उनमें से कोई भी वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने बताया कि भाजपा ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए 1,000 रुपये की मासिक सहायता देनेका वादा किया था, लेकिन वह अब तक पूरा नहीं हुआ। समाज की मानसिकता में बदलाव की आवश्यकताअरविंद केजरीवाल ने समाज में मानसिकता परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “आजादी के 75 साल हो चुके हैं, लेकिन हमें अपनीमानसिकता को बदलने की जरूरत है। हमें उन विचारों को छोड़ना होगा जो समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भेदभाव करते हैं।”
डॉ. अंबेडकर जयंती पर जे.पी. नड्डा ने अर्पित की श्रद्धांजलि, कहा – उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत

अलीपुर रोड स्थित अंबेडकर मेमोरियल में हुआ कार्यक्रमभारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती पर अलीपुर रोड स्थित अंबेडकर मेमोरियल मेंउनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, राष्ट्रीय महामंत्रीतरुण चुघ, केंद्रीय मंत्री वीरेन्द्र कुमार और बी.एल. वर्मा तथा सांसद योगेन्द्र चंदोलिया सहित कई प्रमुख भाजपा नेता उपस्थित रहे।सैकड़ों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में हुआ कार्यक्रमकार्यक्रम में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष मोहन लाल गिहारा, महिला मोर्चा की अध्यक्ष ऋचा पांडेय मिश्रा, युवा मोर्चा के अध्यक्ष सागरत्यागी समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए। नड्डा ने देखी अंबेडकर की जीवन यात्रा से जुड़ी प्रदर्शनीश्री नड्डा ने मेमोरियल में लगी बाबा साहेब के जीवन से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर भी श्रद्धा सुमन अर्पितकिए। समाज के लिए समर्पित रहा अंबेडकर का जीवनअपने संदेश में श्री नड्डा ने कहा, “बाबा साहेब ने समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए सतत संघर्ष किया। सामाजिक समरसता, एकता और मानवाधिकारों के लिए उनका योगदान अतुलनीय है।” दिल्ली भर में हुए आयोजनइस विशेष अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने ज्वाला नगर में स्थित अंबेडकर पार्क में जाकर श्रद्धांजलि दी। वहीं, राजेन्द्र नगर के कार्यक्रम मेंसांसद बांसुरी स्वराज ने अंबेडकर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और दो नि:शुल्क मेडिकल वैन को हरी झंडी दिखाकर जनता को समर्पित किया। शाहदरा में हुआ कार्यक्रमप्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल ने शाहदरा जिले में आयोजित समारोह में भाग लेकर बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके आदर्शोंको याद किया।