रामपुर कांड पर राहुल गांधी का BJP पर हमला, दलित बेटियों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक 11 वर्षीय दलित बच्ची के साथ हुई अमानवीय घटना पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक और हृदयविदारक करार देते हुए राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।“दलित बेटियां BJP राज में असुरक्षित” – राहुल गांधीराहुल गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि भाजपा सरकार में दलित और विशेष रूप से बेटियां पूरीतरह असुरक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना भाजपा की दलित और महिला विरोधी सोच का नतीजा है, जिससे अपराधियों को कानून काकोई भय नहीं रह गया है। प्रशासन से की कठोर कार्रवाई की मांगकांग्रेस नेता ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़िता व उसके परिवार को शीघ्र न्याय दिलायाजाए। उन्होंने पूछा, “आख़िर कब तक यूपी की बेटियां इस तरह की दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी?” राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचलराहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर योगीसरकार पर हमलावर है, वहीं राज्य सरकार इस मामले की जांच की प्रक्रिया में जुटी है।
भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट तेज, जल्द हो सकता है नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठकआयोजित की गई, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बैठक का मकसद संगठन में बदलाव और राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर चर्चाकरना था। बैठक में शाह, राजनाथ और बीएल संतोष की मौजूदगीप्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महासचिव बीएल संतोष ने भी हिस्सा लिया।सूत्रों के अनुसार, भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। संभावना जताई जा रही है कि अध्यक्ष पद के चुनाव कीघोषणा आगामी एक सप्ताह के भीतर हो सकती है। राज्य स्तर पर भी होंगे बदलावबैठक में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ राज्यों में संगठनात्मक बदलावों को लेकर भी विचार किया गया। कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों के नामों पर मंथन हुआ। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में लगभग छह राज्यों में नएअध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है। चुनाव से पहले रणनीति को मजबूती देने की कोशिशइन संगठनात्मक फेरबदल को भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरपर मजबूत नेतृत्व से चुनावों में सफलता सुनिश्चित की जा सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 20 अप्रैल के बाद शुरू की जाएगी। जनवरी में होना था अध्यक्ष पद का चुनावगौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष पद का चुनाव जनवरी में प्रस्तावित था, लेकिन यह अब तक लंबित है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, देरी काकारण एक ऐसे नेता का चयन करना है जो संगठनात्मक दृष्टिकोण से मजबूत और प्रभावशाली हो। वरिष्ठ नेताओं से चल रही लगातार बैठकेंभाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की है। मंगलवार रात को उनकेआवास पर अमित शाह, राजनाथ सिंह, पीयूष गोयल समेत कई केंद्रीय मंत्री उपस्थित थे। इन बैठकों का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिनमाना जा रहा है कि ये चर्चाएं पार्टी के भविष्य के नेतृत्व को लेकर हैं।नड्डा फिलहाल विस्तार पर, नए अध्यक्ष की प्रतीक्षाजेपी नड्डा, जो केंद्रीय मंत्री भी हैं, फिलहाल अपने कार्यकाल के विस्तार पर बने हुए हैं। जब तक नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता, वे अपने पद पर बनेरहेंगे। वहीं, भाजपा राज्य अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता दे रही है, जो अपेक्षा से अधिक लंबी हो चुकी है।
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 9वीं से 12वीं तक के शिक्षकों को अस्थायी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने दी सीमित राहतपश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में कुछ शिक्षकों को अस्थायी तौर पर कार्यरत रहने की अनुमति दीहै। कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए राहत दी गई है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है किग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ कर्मचारियों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। नया भर्ती विज्ञापन 31 मई तक अनिवार्यमुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार को 31 मई 2025 तक नई भर्ती केलिए विज्ञापन जारी करना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी की जानी चाहिए, अन्यथाकड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 3 अप्रैल के आदेश में 25 हजार नियुक्तियां रद्द3 अप्रैल 2025 को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हुई 25 हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को अमान्यघोषित कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि 2016 में आयोजित यह नियुक्ति प्रक्रिया धांधली और धोखाधड़ी से भरी हुई थी। राज्य सरकार की अपील पर छात्रों के लिए राहतराज्य सरकार ने छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो, इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि शिक्षकों को फिलहाल कार्य पर बने रहने दियाजाए। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि केवल 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की पढ़ाई को देखते हुए शिक्षकों को अस्थायी रूप से काम करनेकी छूट दी जा रही है। 2016 की परीक्षा में भारी भागीदारी और घोटाले के आरोप2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित इस भर्ती परीक्षा में 23 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 25 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को नौकरी मिली, लेकिन बाद में यह सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था। कोर्ट की सख्त चेतावनीसुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि अगर राज्य सरकार तय समयसीमा में नई भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं करती है तो वह सख्त कार्रवाई के लिएबाध्य होगी। साथ ही, केवल शिक्षा के नुकसान को देखते हुए यह अंतरिम राहत दी गई है, स्थायी नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं होगा।
तमिलनाडु के मंत्री पोनमुडी की मुश्किलें बढ़ीं, मद्रास हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया

तमिलनाडु सरकार में मंत्री के पोनमुडी की समस्याएं बढ़ती दिख रही हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में उनके द्वारा सनातन तिलक की तुलना सेक्सपोजिशन से करने के विवादित बयान पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य पुलिस को आदेश दिया कि पोनमुडी के खिलाफमामला दर्ज किया जाए और रिपोर्ट सरकार को पेश की जाए। जनहित याचिका और हाईकोर्ट का आदेशमद्रास हाईकोर्ट में पोनमुडी के बयान को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में पोनमुडी को मंत्रिमंडल से अयोग्य ठहराने की मांग कीगई थी। उच्च न्यायालय ने पोनमुडी की टिप्पणियों को “अत्यंत अपमानजनक” बताते हुए कार्रवाई की आवश्यकता जताई। न्यायाधीश ने कहा कि इसतरह के बयानों के खिलाफ भी वही कार्रवाई होनी चाहिए, जैसी भ्रष्टाचार के मामलों में की जाती है। इसके बाद डीएमके ने पोनमुडी को पार्टी के उपमहासचिव पद से हटा दिया था, और उन्होंने अपने बयान पर माफी भी मांगी थी। विवाद और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियायह विवाद तब शुरू हुआ जब पोनमुडी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सनातन तिलक को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की। उन्होंने तिलक की तुलनाशारीरिक संबंधों से जुड़ी चुटकुले सुनाते हुए की, जिससे कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं भी असहज हो गईं। बीजेपी नेताओं ने इसे लेकर मुख्यमंत्रीएम.के. स्टालिन से सवाल किए और पोनमुडी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पर डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी पोनमुडी की टिप्पणीकी आलोचना की और इसे अस्वीकार्य बताया। राज्यपाल ने भी की थी आलोचनाराज्यपाल आर एन रवि ने पोनमुडी की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “अत्यधिक अपमानजनक” और “अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कियह महिलाओं के प्रति असम्मानपूर्ण भाषा का प्रयोग था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पोनमुडी ने सिर्फ महिलाओं का अपमान नहीं किया, बल्कि हिंदू धर्म के शैव और वैष्णव प्रतीकों का भी अपमान किया। कोर्ट ने पोनमुडी पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दियामद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पोनमुडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है तो कोर्ट अवमानना का मामला शुरू कर सकती है। जस्टिसएन आनंद वेंकटेश ने राज्य के डीजीपी से इस मामले में जल्द रिपोर्ट पेश करने को कहा। इस प्रकार, पोनमुडी की टिप्पणी ने तमिलनाडु में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद पैदा कर दिया है, और अब मामले में कानून की प्रक्रियाआगे बढ़ने की संभावना है।
वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, केंद्र को 7 दिन में जवाब देने का निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही याचिकाकर्ताओं को उसके बादपांच दिनों में प्रत्युत्तर देने को कहा गया है। नई नियुक्तियों पर रोक और स्थिति को यथावत बनाए रखने का निर्देशसुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस अवधि में वक्फ काउंसिल और वक्फ बोर्ड में कोई नई नियुक्तिनहीं की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक पहले से पंजीकृत या अधिसूचित वक्फ को न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न हीकिसी कलेक्टर को बदला जाएगा। वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन की प्रतिक्रियावरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, जिन्होंने वक्फ बोर्ड को लेकर याचिका दायर की थी, ने न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंनेकहा कि जब उन्होंने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया, तब उनसे कहा गया कि पहले हाई कोर्ट में जाएं, और उन्हें कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई।लेकिन अब जब अन्य पक्ष अदालत पहुँचे हैं, तो तुरंत सुनवाई और अंतरिम आदेश पारित हो रहे हैं। “क्या सभी के लिए समान मापदंड नहीं होने चाहिए?”विष्णु शंकर जैन ने यह भी कहा कि पिछले 13 वर्षों से चार राज्यों के हिंदू बंदोबस्ती अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई लंबित है, लेकिन उस परकोई अंतरिम आदेश नहीं आया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या न्यायिक प्रणाली में समानता नहीं होनी चाहिए? संवैधानिक पीठ के गठन की मांगसीनियर वकील ने सुझाव दिया कि वक्फ कानून से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक ही उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि सुनवाई मेंएकरूपता बनी रहे। साथ ही, उन्होंने छह महीने के भीतर एक संवैधानिक पीठ के गठन की भी मांग की ताकि इन मामलों का निष्पक्ष और शीघ्रसमाधान किया जा सके।
राष्ट्रपति को निर्देश नहीं दे सकती अदालत, उपराष्ट्रपति धनखड़ का सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय में राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयकों पर समयबद्ध निर्णय लेने की समयसीमा निर्धारित की थी।इस फैसले पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालतों को राष्ट्रपति को निर्देश देने का कोई अधिकारनहीं है। अनुच्छेद 142 पर सवालधनखड़ ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 142, जो सुप्रीम कोर्ट को ‘पूर्ण न्याय’ के लिए विशेष अधिकार देता है, अब लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए24×7 उपलब्ध “न्यूक्लियर मिसाइल” बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है और सभी को अपनी संवैधानिकसीमाओं में रहकर कार्य करना चाहिए। न्यायपालिका की भूमिका पर उठाए सवालराज्यसभा के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने चिंता जताई कि न्यायपालिका अब कानून बनाने, कार्यपालिका का कार्य करने और ‘सुपरसंसद’ के रूप में कार्य करने की दिशा में बढ़ रही है, जबकि इसकी कोई संवैधानिक जवाबदेही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह का लोकतंत्र भारत कीकल्पना नहीं थी। राष्ट्रपति के अधिकार और गरिमा पर ज़ोरधनखड़ ने कहा कि राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और वे संविधान की रक्षा की शपथ लेते हैं। उन्होंने न्यायपालिका को चेताते हुए कहा कि राष्ट्रपतिको निर्देश देना संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन है। उन्होंने अनुच्छेद 145(3) का हवाला दिया, जिसके अनुसार संविधान की व्याख्या केवल पांच याअधिक न्यायाधीशों की पीठ द्वारा की जा सकती है। न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएंउपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यायिक आदेशों की सीमा होनी चाहिए और न्यायपालिका को कार्यपालिका या संसद की भूमिका में नहीं आना चाहिए। उन्होंनेन्यायपालिका की भूमिका को लेकर कहा कि यदि न्यायाधीशों को कोई विशेष कार्य करना है, तो उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार पर टिप्पणीधनखड़ ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश के आवास पर कथित रूप से जले हुए नकदी मिलने के मामले पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसघटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच कार्यपालिका का कार्य है, नकि न्यायपालिका का। सुप्रीम कोर्ट का तर्कसुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए बिलों पर राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर निर्णय लेना चाहिए। कोर्टने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को पॉकेट वीटो या पूर्ण वीटो का असीमित अधिकार नहीं है और उनके फैसलों की न्यायिक समीक्षा संभव है।
मुरैना में पशु क्रूरता और सड़क हादसे की दो बड़ी घटनाएं, पुलिस ने की कार्रवाई

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक महिला और उसके बेटे पर तीन पिल्लों की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या करने का आरोप लगा है। यह घटना मुरैना शहरके महावीरपुरा क्षेत्र की है। पुलिस ने इस मामले में सलमा नाम की महिला और उसके बेटे अरमान खान के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम केतहत केस दर्ज किया है। वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाईकोतवाली थाना क्षेत्र के उपनिरीक्षक शिवम चौहान ने बताया कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गौरक्षा समिति के सदस्योंने पुलिस से शिकायत की। इसी आधार पर केस दर्ज किया गया। बुधवार सुबह आरोपी के घर के पीछे एक और पिल्ला और एक कुतिया मृत पाएगए। इन जानवरों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बारात से लौटते समय दर्दनाक सड़कहादसा, एक की मौत, पांच घायलएक अन्य घटना में मुरैना जिले में बारात से लौट रहे छह युवकों की कार ट्रैक्टर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए, वहीं ट्रैक्टर के अगले दोनों पहिए टूट गए। हादसे के बाद सभी घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रास्ते में एक युवक की मौत हो गई, जबकि बाकी पांच का इलाज जारी है। कार में सवार युवक भिंड जिले के रहने वालेमृतक की पहचान मनोज पुत्र राकेश राठौर के रूप में हुई है, जो अपने पांच साथियों—राघवेंद्र, प्रशांत, अमित, विकास और आकाश राठौर के साथमुरैना की राठौर कॉलोनी में एक बारात में शामिल होने आए थे। सभी युवक भिंड जिले के फूफ कस्बे के निवासी हैं। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक कोभी चोटें आई हैं। पुलिस ने ट्रैक्टर जब्त कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है।
बेंगलुरु में रिहैब सेंटर में मरीज के साथ क्रूरता, आरोपी गिरफ्तार

बेंगलुरु के पास एक निजी रिहैब सेंटर में एक मरीज के साथ क्रूरता की घटना सामने आई है। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है किएक व्यक्ति को एक कमरे में बंद कर दिया गया, फिर उसे घसीटते हुए और डंडे से पीटा गया। इस घटना ने आसपास के लोगों में आक्रोश पैदा करदिया, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। सीसीटीवी फुटेज से खुलासासीसीटीवी फुटेज में दिखाया गया है कि एक मरीज को बेरहमी से डंडे से पीटा गया, जबकि कुछ लोग यह सब देख रहे थे। जैसे-जैसे वीडियो आगेबढ़ता है, मरीज को घसीटा जाता हुआ और फिर डंडे से पिटाई की जाती है। यह घटना बेंगलुरु से लगभग 30 किलोमीटर दूर नेलमंगला में एक निजीपुनर्वास सुविधा की है। आक्रमण में शामिल लोग गिरफ्तारपुलिस ने बताया कि यह वीडियो हाल ही में सामने आया है, लेकिन घटना पहले की है। इसमें शामिल सभी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया हैऔर पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। जन्मदिन के मौके पर खंजर से केक काटते हुए दिखे आरोपीहमले से जुड़ी अन्य फोटोज में कुछ आरोपी जन्मदिन मनाते हुए और खंजर से केक काटते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसघटना की जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, भाषा को धर्म से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण विचलन

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के अकोला जिले की पातुर नगर परिषद के साइनबोर्ड पर उर्दू भाषा के उपयोग को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि “भाषा धर्म नहीं है और न ही यह किसी एक धर्म का प्रतिनिधित्व करतीहै।” उन्होंने इसे “विविधता में एकता” की भावना से भटकाव बताया। पूर्व पार्षद की याचिका पर सुनवाईयह याचिका नगर परिषद की पूर्व पार्षद वर्षाताई संजय बागड़े ने दायर की थी। उनका कहना था कि नगर परिषद को केवल मराठी भाषा में कार्यकरना चाहिए और सार्वजनिक साइनबोर्ड पर उर्दू का प्रयोग अनुचित है। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट और स्थानीय काउंसिल ने भी इस याचिका कोखारिज कर दिया था। संपर्क का माध्यम है भाषा, न कि धर्म का प्रतीकन्यायालय ने स्पष्ट किया कि भाषा, संचार का माध्यम होती है और इसका उद्देश्य लोगों के बीच विचारों का आदान-प्रदान है। उर्दू को केवल एक धर्मविशेष से जोड़ना ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टिकोण से गलत है। अदालत ने कहा कि उर्दू भारत में पली-बढ़ी और विकसित हुई इंडो-आर्यन भाषाहै, जो अनेक संस्कृतियों और समुदायों के मेल से उभरी है। गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल है उर्दूपीठ ने उर्दू को हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बताया और कहा कि यह भाषा विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के लोगों कोजोड़ती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि हिंदी और उर्दू के बीच कृत्रिम विभाजन औपनिवेशिक दौर की नीतियों का परिणाम है, जिससे भाषाओं कोधर्म से जोड़ा गया। हिंदी-उर्दू का अटूट संबंधअदालत ने टिप्पणी की कि आज हम जिन शब्दों को हिंदी मानते हैं, उनमें से कई की जड़ें उर्दू में हैं। यहां तक कि ‘हिंदी’ शब्द भी फ़ारसी के ‘हिंदवी’ सेउत्पन्न हुआ है। बिना उर्दू शब्दों के हिंदी में दैनिक बातचीत की कल्पना नहीं की जा सकती। राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन नहींअदालत ने यह स्पष्ट किया कि उर्दू भाषा के उपयोग से महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण (राजभाषा) अधिनियम 2022 का कोई उल्लंघन नहीं होता, क्योंकि अधिनियम सिर्फ मराठी के उपयोग को अनिवार्य करता है, अन्य भाषाओं के प्रयोग पर रोक नहीं लगाता। पूर्वाग्रहों से उबरने की अपील न्यायालय ने अंत में कहा कि किसी भाषा के प्रति पूर्वाग्रह को दूर करना आवश्यक है और यह देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और अपनानेका समय है। “आइए हम उर्दू समेत हर भाषा से मित्रता करें, क्योंकि यही हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं।” याचिका खारिज, हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहरायासुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि याचिका कानून की गलतव्याख्या पर आधारित थी, इसलिए इसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता।
मुजफ्फरपुर में भीषण अग्निकांड: दलित बस्ती में आग से चार मासूमों की मौत, कई लापता

रामपुर मनी गांव की दलित बस्ती में लगी भीषण आगबिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बरियारपुर थाना क्षेत्र के रामपुर मनी गांव की एक दलित बस्ती में अचानक आग लगने से हाहाकार मच गया। इस हादसेमें लगभग दो दर्जन से अधिक घर जलकर राख हो गए। आग इतनी भयंकर थी कि चार बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे अबभी लापता हैं। मृतकों की पहचान अंशिका कुमारी (5 वर्ष), ब्यूटी कुमारी (8 वर्ष), सृष्टि कुमारी (6 वर्ष), और विपुल कुमार (10 वर्ष) के रूप में हुईहै। इनमें से तीन बच्चे एक ही परिवार से थे। लापता बच्चों की तलाश जारीअधिकारियों के अनुसार, लापता बच्चों की तलाश में रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की कई गाड़ियां मौकेपर पहुंची और घंटों की मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। भगवानपुर में मिठाई की दुकान में सिलेंडर ब्लास्टएक अन्य घटना में भगवानपुर यादव नगर चौराहे स्थित मिठाई की दुकान में गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। दुकान में कई सिलेंडर रखे हुएथे, जिससे एक के बाद एक कई धमाके हुए। इस घटना में पांच दुकानें जलकर खाक हो गईं। स्थानीय लोगों ने बहादुरी दिखाते हुए कई सिलेंडरों कोसमय रहते बाहर निकाल दिया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। चिराग पासवान का घटना पर दुख और त्वरित कार्रवाई का आग्रहलोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने इस हृदयविदारक हादसे को “जीती-जागती त्रासदी” करार दिया। उन्होंने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रमोंको रद्द कर मुजफ्फरपुर जाने का निर्णय लिया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने मृतकों के प्रति शोक व्यक्त किया और राज्य सरकार सेपीड़ितों के लिए मुआवजा, घायलों को बेहतर इलाज और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्यचिराग पासवान ने पार्टी कार्यकर्ताओं को तुरंत राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी स्थानीय स्तर पर राहत और पुनर्वास कार्योंकी निगरानी करेगी। प्रशासन की प्रतिक्रिया और मुआवजे की घोषणाजिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मौके का निरीक्षण कर घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि आग लगने का कारण घरेलू गैस सिलेंडर का विस्फोटहै। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है और प्रभावितों की सहायता के लिए राहत कार्य जारी है। जांच और सहायता प्रक्रिया जारीफिलहाल स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया है और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा क्षतिका मूल्यांकन किया जा रहा है और लापता बच्चों की तलाश अब भी जारी है।