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अमेरिका में बोली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कहा विकसित भारत है हमारा राष्ट्रीय मिशन

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी कैलिफोर्निया के हूवर इंस्टीट्यूशन में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भारत के पिछले दो केंद्रीय बजटों नेसभी क्षेत्रों में एक स्पष्ट नीति और एजेंडे के साथ बदलाव का आधार तैयार किया है. उन्होनें कहा कि 2047 तक भारत को विकसित बनाने की यात्राकेवल एक आकांक्षा या सपना नहीं है बल्कि एक साझा राष्ट्रीय मिशन है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में एक कार्यक्रमके दौरान यह बात कही इस दौरान उन्होंने कहा कि अगले दो दशक में सतत वृद्धि के लिए भारत की कोशिशें एक नए आदर्श पर टिकी है. यहसाहसिक सुधारों बढ़ी हुई घरेलू क्षमताओं और उभरते वैश्विक परिदृश्य के अनुकूल रणनीतिक संस्थागत सहयोग पर आधारित है.स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटीकैलिफोर्निया के हूवर इंस्टीट्यूशन में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले दो केंद्रीय बजटों ने सभी क्षेत्रों में एक स्पष्ट नीति और एजेंडे के साथबदलाव का आधार तैयार किया है. वित्त मंत्री के अनुसार पिछले दशक में सरकार ने संरचनात्मक सुधार किए हैं. 20,000 से अधिक नियमों कोयुक्तिसंगत बनाया गया है व्यापार से जुड़े कानूनों को अपराधमुक्त किया गया है और टकराव को कम करने के लिए सार्वजनिक सेवाओं काडिजिटलीकरण किया गया है. 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का रखा है लक्ष्यवित्त मंत्री ने आगे कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास पर महत्वपूर्ण जोर देने से पिछले 10 वर्षों में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है और विनिर्माणआधारित विकास के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ. सीतारमण ने कहा कि 2017-18 और 2025-26 के बजट के बीच केंद्र सरकार के पूंजीगतव्यय में चार गुना से अधिक की वृद्धि से यह संभव हुआ. उन्होंने कहा विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से व्यवसाय सुधार से जुड़ी कार्य योजना केक्रियान्वयन के हमारे अनुभव ने यह जाहिर किया है कि विनियमन में ढील औद्योगिक विकास के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक है. वित्त मंत्री ने कहाकि आगे बढ़ते हुए भारत की विकास गति को बनाए रखने के लिए साहसिक सुधारों और बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप अनुकूलनीय रणनीतियों केनए दृष्टिकोण की जरूरत है. उन्होंने कहा अगले दो दशकों में भारत की विकास गति को बनाए रखने के लिए साहसिक सुधारों मजबूत घरेलू क्षमताओंनई संस्थागत साझेदारियों और उभरते वैश्विक परिदृश्य के अनुकूल दृष्टिकोण की आवश्यकता है. भारत ने 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने कालक्ष्य रखा है. विकसित भारत की रख रहे है नींवइस साल देश ब्रिटिश शासन से अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष में प्रवेश करेगा. इसको लेकर उन्होंने कहा जब हम विकसित भारत की नींव रख रहे हैं. तो हमें वर्तमान वास्तविकताओं को नजरअंदाज किए बिना दीर्घकालिक लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए. वैश्विक व्यवस्था बदल रही है इससेचुनौतियां तो पैदा होती ही हैं अवसर भी मिलते हैं. हमें चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए और अवसरों का लाभ उठाना चाहिए. उन्होंनेकहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने की भारत की यात्रा महज एक आकांक्षा नहीं है. बल्कि समावेशी, टिकाऊ और नवाचार आधारित विकासके विजन से प्रेरित एक साझा राष्ट्रीय मिशन है. उन्होंने कहा कि महामारी से हुए नुकसान और बैंकिंग संकट के बावजूद पिछले दशक में हमारी प्रगतिमजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी बातों और स्थिर सुधारों पर आधारित है. जो हमें आगे की राह के लिए आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करती है उन्होंनेकहा कि इसके असर से भारत विश्व की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है.

नेशनल हेराल्ड की लूट लिखा बैग लेकर संसद पहुंची बांसुरी स्वराज, प्रियंका के संदेश पर दिया जवाब

एक देश एक चुनाव’ के मुद्दे पर आज जेपीसी की पहली बैठक होने जा रही है प्रस्ताव वाले विधेयकों पर समिति की बैठक के लिए भाजपा सांसदबांसुरी स्वराज एक बैग लेकर संसद भवन पहुंचीं. उनके काले बैग पर लाल रंग से ‘नेशनल हेराल्ड की लूट’ लिखा हुआ था. कांग्रेस की कार्यशैली कोअब जनता के सामने लाया जाना चाहिए. नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी आरोपी हैं और प्रवर्तन निदेशालय नेउन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है.कांग्रेस ने इस आरोप को सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा अपने शीर्ष नेताओं के खिलाफ बदले की कार्रवाई करारदिया है .सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हेमंत गुप्ता भारतीय विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष बीएस चौहान और जाने-माने वकील और कांग्रेस सांसदअभिषेक मनु सिंघवी उन हस्तियों में शामिल हैं. जो एक साथ चुनाव कराने पर संसद की संयुक्त समिति को अपने विचार देंगे समिति का नेतृत्व भाजपासांसद पीपी चौधरी कर रहे हैं. पिछले साल प्रियंका गांधी लेकर पहुंची थी बैगकांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी पिछले साल संसद में एक बैग लेकर गई थीं.जिस पर ‘फलिस्तीन’ लिखा हुआ था.’फलिस्तीन’ शब्द और तरबूज सहितफलिस्तीनी प्रतीकों से सजे इस हैंडबैग को फलिस्तीनी एकजुटता के प्रतीक के रूप में देखा गया था. गांधी संसद में एक हैंडबैग भी लेकर गई थीं जिसपर ‘बांग्लादेश के हिंदू और ईसाइयों के साथ खड़े हो का संदेश लिखा हुआ था.आपको बता दें कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस कीसांसद प्रियंका गांधी फिलिस्तीन के लोगों के प्रति समर्थन और एकजुटता दिखाने के लिए अपने साथ एक हैंडबैग लेकर संसद में पहुंचीं थी. उस बैगपर फिलिस्तीन लिखा हुआ था. जबकि इसके अगले दिन ही प्रियंका गांधी संसद में एक और नए बैग के साथ पहुंचीं थी. उस बैग पर बांग्लादेश मेंअल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा का विरोध करते हुए लिखा हुआ था कि बांग्लादेश के हिंदुओं और ईसाइयों के साथ खड़े हो.

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर लगा गंभीर आरोप, यमन हूतियों पर अमेरिका हवाई हमले से संबंधित जानकारी सिग्नल एप पर करते थे साझा

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर आरोप लगा है कि उन्होंने यमन में हूतियों पर अमेरिकी हवाई हमले से संबंधित अहम जानकारी सिग्नल एप पर साझा कीउनके बचाव में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि असंतुष्ट कर्मचारियों का काम है. सभी जानते हैं कि हेगसेथ को रक्षा विभाग में बुरे लोगों सेछुटकारा दिलाने के लिए रखा गया था वे वही कर रहे हैं.हूतियों को लेकर दूसरी बार चैट लीक करने के आरोपों का सामना कर रहे रक्षा मंत्री पीटहेगसेथ का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बचाव किया है. उन्होंने कहा कि यह असंतुष्ट कर्मचारियों का काम है हेगसेथ अच्छा काम कर रहे हैं. इसलिएअंसतुष्ट कर्मचारी उनको निशाना बना रहे हैं व्हाइट हाउस ने भी हेगसेथ का समर्थन किया है.पिछले दिनों रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर आरोप लगा है किउन्होंने यमन में हूतियों पर अमेरिकी हवाई हमले से संबंधित अहम जानकारी सिग्नल एप पर साझा की. जिस चैट ग्रुप में ये अहम खुफिया जानकारीसाझा की गई उस ग्रुप में हेगसेथ की पत्नी और भाई भी शामिल हैं. इसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हेगसेथ का बचाव किया ईस्टर एग रोल कार्यक्रममें डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि असंतुष्ट कर्मचारियों का काम है सभी जानते हैं कि हेगसेथ को रक्षा विभाग में बुरे लोगों से छुटकारा दिलानेके लिए रखा गया था. वे वही कर रहे हैं इसलिए जब ऐसा होता है तो आपके हमेशा दोस्त नहीं बनते हूतियों से पूछना चाहिए कि यमन में कितनीअव्यवस्था फैली है.व्हाइट हाउस ने भी विवाद को हेगसेथ और असंतुष्ट पेंटागन कर्मचारियों के बीच नौकरशाही लड़ाई बताया. मीडिया की प्रतिष्ठा को बर्बाद करने का लगाया आरोपव्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ऐसा तब होता है जब पूरा पेंटागन आपके खिलाफ काम कर रहा हो और उस बड़े बदलाव केखिलाफ काम कर रहा हो जिसे आप लागू करने की कोशिश कर रहे हैं.रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चैट लीक करने के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंनेअसंतुष्ट पूर्व कर्मचारियों और मीडिया पर प्रतिष्ठा को बर्बाद करने का प्रयास करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि यह बहुत आश्चर्य की बात है किकुछ लीकर्स को नौकरी से निकाल दिया जाता है और अचानक उसी मीडिया से कई हिट पीस सामने आते हैं. जिसने रूस के बारे में झूठी खबरें फैलाईथीं. मीडिया यही करता है वे असंतुष्ट पूर्व कर्मचारियों से गुमनाम स्रोत लेते हैं और फिर लोगों को मारने-पीटने और उनकी प्रतिष्ठा को बर्बाद करने कीकोशिश करते हैं.अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने वाले जॉन उद्योग ने कहा कि रक्षा विभाग में स्थिति संकटग्रस्त है. पेंटागन में एक महीने से पूरी तरह अराजकता का माहौल है संवेदनशील परिचालन योजनाओं के लीक होने से लेकर बड़े पैमाने पर छंटनी तक यहअव्यवस्था अब राष्ट्रपति के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. जो अपने वरिष्ठ नेतृत्व से बेहतर की उम्मीद करते हैं.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सु्प्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर उठाए सवाल,कहा संसद है सर्वोपरि

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंनेकहा कि संसद ही सर्वोपरि है. हर सांविधानिक पदाधिकारी द्वारा बोला गया प्रत्येक शब्द सर्वोच्च राष्ट्रीय हित से जुड़ा होता है.दिल्ली विवि में एककार्यक्रम में न्यायिक अधिकारों के अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट को घेरा. उन्होंने कहा कि संविधान कैसा होगा ये वही तय करेंगे जो चुनकर आए हैं. इसके ऊपर कोई नहीं होगा संसद सर्वोपरि है उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की दो टिप्प्णियों का हवाला दिया. इसमें गोरकनाथ मामले में सर्वोच्च न्यायालय नेकहा था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है. जबकि दूसरे केशवानंद भारती मामले में कोर्ट ने कहा था कि यह संविधान का हिस्सा है. उन्होंने कहाकि किसी भी सांविधानिक पदाधिकारी द्वारा बोला गया प्रत्येक शब्द राष्ट्र के सर्वोच्च हित से निर्देशित होता है. समयसीमा निर्धारित करने पर उठाए सवालमुझे यह बात काफी दिलचस्प लगती है कि कुछ लोगों ने हाल ही में यह विचार व्यक्त किया है कि सांविधानिक पद औपचारिक और सजावटी होसकते हैं. इस देश में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका चाहे वह सांविधानिक पदाधिकारी हो या नागरिक के बारे में गलत समझ से कोई भी चीज दूर नहीं होसकती है. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और टिप्पणियों को लेकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ लगातार सवाल उठा रहे हैं. हाल ही में उपराष्ट्रपति धनखड़ नेन्यायपालिका की तरफ से राष्ट्रपति के लिए निर्णय लेने और सुपर संसद के रूप में कार्य करने के लिए समयसीमा निर्धारित करने पर सवाल उठाते हुएकहा था कि सर्वोच्च न्यायालय लोकतांत्रिक ताकतों पर परमाणु मिसाइल नहीं दाग सकता.उन्होंने न्यायपालिका के लिए ये कड़े शब्द राज्यसभा केप्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहे कुछ दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की तरफ से विचार के लिए रखे गए विधेयकों कोमंजूरी देने के लिए समयसीमा तय करने की मांग की थी. सुपर संसद के रुप में करेंगें कामइस पर उपराष्ट्रपति ने कहा इसलिए हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएंगे जो कार्यकारी कार्य करेंगे जो सुपर संसद के रूप में कार्य करेंगे औरउनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता.उपराष्ट्रपति धनखंड और भाजपा नेताओं के बयान के बाद सुप्रीम कोर्टने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान तंज कसा था. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीहकी पीठ ने कहा था कि आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति को आदेश जारी करेंगे वैसे ही हम पर कार्यपालिका (क्षेत्र) मेंअतिक्रमण करने का आरोप लग रहा है.

डबल निमोनिया से जूझ रहे थे पोप फ्रांसिस, 88 साल की उम्र में हुआ निधन “जानें कौन थे पोप फ्रांसिस”

पोप फ्रांसिस अब हमारे बीच नहीं रहे सोमवार 21 अप्रैल, 2025 को 88 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. उन्होंने वेटिकन के कासा सांता मार्टास्थित अपने निवास पर सुबह 7.30 बजे (स्थानीय समयानुसार) अंतिम सांस ली. वेटिकन समाचार के मुताबिक वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. बीतेदिन ईस्टर के अवसर पर लंबे समय के बाद वे लोगों के सामने आए थे. पोप फ्रांसिस जेसुइट ऑर्डर से पहले पोप थे 8वीं शताब्दी के बाद से यूरोप केबाहर से पहले पोप थे. अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो के रूप में जन्मे पोप फ्रांसिस 1969 में कैथोलिक पादरी नियुक्त कियागया था. 28 फरवरी, 2013 को पोप बेनेडिक्ट XVI के इस्तीफे के बाद 13 मार्च को एक पोप सम्मेलन ने कार्डिनल बर्गोग्लियो को उनकाउत्तराधिकारी चुना. उन्होंने सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी के सम्मान में फ्रांसिस को अपना पोप नाम चुना. अब आधिकारिक शोक की 14 दिन की अवधिहोगी जिसके बाद कार्डिनल मसीह के नए विकर का चुनाव करने के लिए सम्मेलन में जाएंगे.पोप फ्रांसिस लंबे समय से बीमार चल रहे थे। लगभग एकमहीने तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद पोप 24 मार्च को अपने निवास स्थान कासा सांता मार्टा लौटे थे. अस्पताल से लौटने पर लोगों ने दिया था आशीर्वादअस्पताल से लौटने पर उन्होंने बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर जमा हुए लोगों को आशीर्वाद दिया था. सार्वजनिक रूप से पोप को देखने के बादलोग काफी खुश दिखे थे और जयकारे भी लगाए थे.पोप फ्रांसिस को 14 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें डबल निमोनिया हो गयाथा अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में उनका चला था. एक महीने से ज्यादा समय अस्पताल में बिताने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई थी. पोप कीदेखभाल करने वाले सर्जरी प्रमुख सर्जियो अल्फिएरी ने बताया था कि उन्हें दवाइयां की जरूरत पड़ती रहेगी.पोप फ्रांसिस जब जवान थे, तब उनके एकफेफड़े में संक्रमण के कारण उसे हटाना पड़ा था. इस कारण उन्हें सांस से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा था. 2023 में भी उन्हें फेफड़ों मेंसंक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था.पोप फ्रांसिस भारत आने वाले थे। पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने बताया थाकि पोप फ्रांसिस के 2025 के बाद भारत दौरे पर आने की संभावना है. भारत कर चुका है पहले पोप फ्रांसिस को आधिकारिक तौर पर आमंत्रितदरअसल 2025 को कैथोलिक चर्च ने जुबली वर्ष के रूप में घोषित किया है भारत पहले ही पोप फ्रांसिस को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित कर चुकाहै. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें सीधे तौर पर निमंत्रण दे चुके हैं यात्रा पोप की सेहत और सुविधा के अनुसार निर्धारित की जाने वाली थी.पोप फ्रांसिसने अपने आखिर संदेश में जरूरतमंदों की मदद करने भूखों को खाना देने और विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों को प्रोत्साहित करने की अपील कीथी. ईस्टर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने लिखा’मैं हमारी दुनिया में राजनीतिक जिम्मेदारी के पदों पर बैठे सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे डर केआगे न झुकें. डर दूसरों से अलगाव की ओर ले जाता है सभी जरूरतमंदों की मदद करने भूख से लड़ने और विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों कोप्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करें. ये शांति के हथियार हैं हथियार जो मौत के बीज बोने के बजाय भविष्य का निर्माण करतेहैं. मानवता का सिद्धांत हमारे दैनिक कार्यों की पहचान बनने से कभी न चूके.

अमेरिका दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी बीजेपी पार्टी ने साधा निशाना, कहा ” राहुल की पुरानी आदत विदेशों में जाकर भारत की बुराई करना”

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी दो दिन के अमेरिका दौरे पर हैं जैसा सोचा जा रहा था कि राहुल एक बार फिर विदेशीजमीन से देश के आतंरिक मुद्दों पर बोलेंगे वैसा ही हुआ. उन्होंने बोस्टन में ब्राउन यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ एक सत्र में हिस्सा लिया. यहां उन्होंनेपिछले साल हुए महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा उठाया उन्होंने देश की चुनाव प्रणाली और निर्वाचन का आयोग की मंशा को कटघरे में खड़ा किया.अमेरिकाके बोस्टन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान और नेशनल हेराल्ड मामले में उनके शामिल होने को लेकर भाजपा हमलावर है. दरअसल राहुल ने अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान भारतीय चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए. इसे लेकर सांसद संबित पात्रा ने कहाविदेशी धरती पर देश का अपमान करना राहुल गांधी की पुरानी आदत है. वे लंबे समय से ऐसा करते आ रहे हैं.उन्होंने कहा कि ईडी ने अपनी चार्जशीटमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नाम का उल्लेख किया है. वे देश को लूटने के आरोप में जेल भी जा सकते हैं. कांग्रेस पार्टी बना रही पूरे देश में अशांति का माहौलइस बीच कांग्रेस पार्टी पूरे देश में अशांति का माहौल बना रही है जो लोग 50,000 रुपये की जमानत पर बाहर हैं. अगर उन्हें लगता है कि वे विदेशजाकर वहां बोलकर इस महान लोकतंत्र की छवि को नष्ट कर सकते हैं तो वे पूरी तरह गलत हैं. राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदारने कहा कि राहुल गांधी तय करें कि जब वे झारखंड में जीते थे. तब क्या देश में अलग चुनाव आयोग था. जहां भी वे जीतते हैं वहां कहते हैं कि ईवीएमठीक है और जहां भी वे हारते हैं वहां कहते हैं कि चुनाव आयोग और ईवीएम गलत है.भाजपा नेता सीआर केसवन ने कहा’राहुल गांधी, सैम पित्रोदा केसाथ नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर बाहर हैं. दोनों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है और अब वे भारत को बदनाम करने की यात्रा पर निकलपड़े हैं. भारत को गाली देने की यात्रा एक बार फिर विदेशी जमीन पर राहुल गांधी ने एक बार फिर भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर निंदनीय हमलाकिया है. उन्होंने भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने का असफल प्रयास किया है. राहुल गांधी ने अमेरिका में चुनाव आयोग के बारे में ये बयान दियाहै. महाराष्ट्र में वयस्कों की संख्या से ज्यादा लोगों ने किया मतदानदरअसल बोस्टन की ब्राउन यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी ने कहा हमारे लिए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि चुनाव आयोग ने समझौता कर लिया है और यहबिल्कुल स्पष्ट है कि व्यवस्था में कुछ गड़बड़ है मैंने यह कई बार कहा है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में वयस्कों की संख्या से ज्यादालोगों ने मतदान किया. चुनाव आयोग ने हमें शाम 5:30 बजे तक मतदान का आंकड़ा दिया और शाम 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच 65 लाखमतदाताओं ने मतदान किया. ऐसा होना असंभव है. एक मतदाता को मतदान करने में लगभग 3 मिनट लगते हैं और अगर आप गणित करें तो इसकामतलब है कि सुबह 2 बजे तक मतदाताओं की कतारें लगी हुई थीं. लेकिन ऐसा नहीं हुआ जब हमने उनसे वीडियोग्राफी के लिए कहा तो उन्होंने नकेवल मना कर दिया बल्कि उन्होंने कानून भी बदल दिया ताकि अब हम वीडियोग्राफी के लिए न कह सकें.राहुल गांधी के बयान पर कांग्रेस नेता प्रमोदतिवारी ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि भाजपा अपने आप को या निर्वाचन आयोग को सुधारती क्यों नहीं है? राहुल गांधी ने अपने अध्ययनभाषण के दौरान जो कहा है उसमें तथ्य दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका,बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर की गई मांग ” जानें क्या है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई है जिसमें पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की गई है. वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैनयाचिकाकर्ता की तरफ से दलीलें रखेंगे. गौरतलब है कि वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल में हिंसा हुई है जिसके चलते बड़ी संख्या मेंलोग विस्थापित हुए हैं. वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष याचिका पेश कीजिसके बाद याचिका को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया.याचिका में ये भी मांग की गई है कि बंगाल में पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती कीजाए और साथ ही रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति बनाकर हिंसा की जांच की जाए. याचिका पर पीठ ने तंज कसते हुए कहाकि ‘आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति को आदेश जारी करें. वैसे ही हम पर कार्यपालिका (क्षेत्र) में अतिक्रमण करनेका आरोप लग रहा है. गौरतलब है कि हाल ही भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर कार्यपालिका के काम में दखल देने का आरोप लगायाहै. राष्ट्र्पति जगदीप धनखड़ ने सु्प्रीम कोर्ट के फैसले पर उठाए सवालइसको लेकर खासा विवाद हो रहा है साथ ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट परसुपर संसद के रूप में काम करने का आरोप लगाया था.गौरतलब है कि वक्फ संशोधन कानून के विरोध में बीती 11-12 अप्रैल को बंगाल केमुर्शिदाबाद के कई इलाकों में हिंसा भड़की जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए. हिंसा के चलते बड़ी संख्या में लोगों का विस्थापनहुआ विपक्षी पार्टियां बंगाल में कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं.सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के सात जजों के तबादले कीसिफारिश की है. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता में कॉलेजियम की बैठक 15 और 19 अप्रैल को हुईं. इन बैठकों में ही यह फैसला कियागया कॉलेजियम ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के जज जस्टिस हेमंत चंदनगौदर को मद्रास उच्च न्यायालय, जस्टिस कृष्णन नटराजन को केरल हाईकोर्ट, जस्टिस नरनाहल्ली श्रीनिवासन संजय गौड़ा को गुजरात हाईकोर्ट और जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपदा को ओडिशा हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की गईहै. कॉलेजियम ने तेलंगाना हाईकोर्ट के जज पेरुगु श्री सुधा को कर्नाटक हाईकोर्ट और कासोजु सुरेंद्र को मद्रास हाईकोर्ट भेजने की भी सिफारिश की है. जस्टिस कुंभाजदला मनमधा राव को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से कर्नाटक उच्च न्यायालय भेजने की सिफारिश की गई है.

अमेरिका दौरे पर पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, भारतीय चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी दो दिन के अमेरिका दौरे पर हैं जैसा सोचा जा रहा था कि राहुल एक बार फिर विदेशीजमीन से देश की मोदी सरकार और देश के आतंरिक मुद्दों पर बोलेंगे वैसा ही हुआ. उन्होंने बोस्टन में ब्राउन यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ एक सत्र मेंहिस्सा लिया. यहां उन्होंने पिछले साल हुए महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा उठाया. उन्होंने देश की चुनाव प्रणाली और निर्वाचन का आयोग की मंशा कोकटघरे में खड़ा किया.कांग्रेस नेता ने छात्रों से कहा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं की संख्या से ज्यादा मतदान हुआ यह एक तथ्य है. चुनाव आयोग ने हमें शाम 5.30 बजे तक के मतदान के आंकड़े दिए. शाम 5:30 से 7:30 बजे के बीच जब वोटिंग बंद हो जानी चाहिए थी. 65 लाख मतदाताओं ने मतदान किया। अब ऐसा होना संभव नहीं है दरअसल एक मतदाता को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में लगभग 3 मिनटलगते हैं. अगर आप हिसाब लगाएंगे तो इसका मतलब यह होगा कि रात 2 बजे तक मतदाताओं की कतारें लगी रहीं. वे पूरी रात मतदान करते रहेलेकिन ऐसा हुआ नहीं.राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग से हमने वीडियो मांगे, क्योंकि आयोग वीडियोग्राफी कराता है .हमारे मांगने के बाद उन्होंने सिर्फहमारी अपील खारिज ही नहीं की बल्कि नियमों को ही बदल दिया. ऐसे में साफ पता चलता है कि चुनाव आयोग में सबकुछ ठीक है. महाराष्ट्र चुनाव को लेकर उठाए सवालकामकाज में समझौता किया जा रहा है हमने सार्वजनिक मंचों से कई बार महाराष्ट्र चुनाव को लेकर सवाल उठाए हैं. धांधली उजागर की है लेकिनकिसी को कोई परवाह नहीं है.हाल के महीनों में यह राहुल गांधी की अमेरिका की दूसरी यात्रा है. इससे पहले सितंबर 2024 में राहुल गांधी अमेरिकाकी तीन दिवसीय यात्रा की थी अपनी यात्रा के दौरान वे डलास गए थे. जहां उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत कीथी और भारतीय प्रवासियों के सदस्यों को संबोधित किया था. डलास से राहुल वाशिंगटन डीसी गए जहां उन्होंने जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में छात्रों औरशिक्षकों के साथ बातचीत की थी. लोकसभा में विपक्ष के नेता बनने के बाद राहुल गांधी की यह पहली अमेरिका यात्रा थी.राहुल गांधी की पिछलीयात्रा ने भारत में आरक्षण प्रणाली को खत्म करने के बारे में उनकी टिप्पणी के बाद राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था. उन्होंने कहा था कि जब देशएक निष्पक्ष स्थान बन जाएगा तो भारत में आरक्षण प्रणाली को समाप्त कर दिया जाएगा. उन्होंने जाति जनगणना की आवश्यकता पर भी जोर दियाथा. उन्होंने तर्क दिया था कि देश की 90 प्रतिशत आबादी ओबीसी, दलित और आदिवासी है. उसे पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है जब हमसंस्थानों व्यवसायों और मीडिया पर कब्जे की बात करते हैं. तो भारत के 90 प्रतिशत ओबीसी, दलित, आदिवासी खेल का हिस्सा ही नहीं हैं.

फिल्मों के फ्लॅाप होने पर विक्रम भट्ट ने दिए लोगों को सुझाव, बोले हम जनता को गए है भूल

पिछले कुछ वक्त से बॉलीवुड में कई बड़ी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धराशायी हो रही हैं जिससे इंडस्ट्री में कहीं न कहीं परेशानी बनी हुई है. हर कोईइसका उपाय निकालने का प्रयास कर रहा है. अब निर्माता-निर्देशक विक्रम भट्ट ने इसको लेकर कुछ सुझाव दिए हैं और इसको कैसे सुधारा जा सकताहै. इस पर अपने विचार रखे हैं निर्देशक का कहना है कि हमें आम जनता की जरूरतों को पूरा करने की जरूरत है. हमें उस पर जोर देना चाहिए.हाल हीमें एएनआई के साथ बातचीत में विक्रम भट्ट में इंडस्ट्री की हालत में सुधार लाने के लिए कुछ सुझाव देते हुए कहा, “हर कोई आम जनता को भूल गयाऔर खास फिल्मों की ओर चला गया. वहीं कोविड के दौरान से सिनेमाघरों में फिल्में देखने की दर्शकों की आदत गायब हो गई है. हमने बड़े पैमाने परफिल्में बनाना बंद कर दिया अगर आप साउथ की इंडस्ट्री को देखें. तो यह फल-फूल रहा है क्योंकि यह हमेशा बड़े पैमाने पर दर्शकों को अहमियत देताहै. वे अभी भी सुपरहीरो देखना चाहते हैं पुष्पा देखना चाहते हैं. कंतारा देखना चाहते हैं. खलनायक को मानते है खलनायकवे अभी भी खलनायक को खलनायक मानते हैं अभी भी सीटी बजाते हैं और ताली बजाते हैं. हम तो वैसी फिल्में बनाना भूल गए जिसे देखकर दर्शकसीटी और ताली बजाएं.विक्रम भट्ट ने आगे फिल्म बनाते समय फिल्ममेकर्स को कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देने के लिए सुझाव दिए हैं. उन्होंने कहा“हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जिनकी बहुत जरूरत हो. मैंने इसे हाल ही में सीखा है जब मेरी फिल्म ‘तुमको मेरी कसम’ नहीं चली. इसे बहुत अच्छीसमीक्षाएं मिलीं लेकिन यह इसलिए नहीं चली क्योंकि यह जरूरत वाली फिल्म नहीं थी. भले ही मेरी फिल्म नहीं चली इसलिए हमें ऐसी फिल्में बनानीहोंगी जो जरूरी हों. फिल्म के नाम पर कुछ भी नहीं बनाना चाहिए फिल्में इस तरह से बनाई जानी चाहिए कि लोग पहले दिन के पहले शो का बेसब्रीसे इंतजार करें.निर्देशक ने आगे स्टारकास्ट की बजाय कंटेंट पर जोर देने का सुझाव देते हुए कहा “यह पूरी समस्या एक मिनट में हल हो सकती है अगरम्यूजिक कंपनियां डिजिटल और सैटेलाइट कंपनियां यह संदेश देना शुरू कर दें कि हमें अच्छे गाने चाहिए. हमें अच्छी तस्वीरें चाहिए अगर आपस्टारकास्ट को नहीं बल्कि अच्छी फिल्म को सपोर्ट करते हैं तो निर्माता पर बोझ नहीं पड़ेगा हमें कंटेंट पर जोर देना चाहिए.

CSK के खराब प्रदर्शन पर फूटा स्टीफन फ्लेमिंग का गुस्सा, कहा अब नहीं करेंगें बर्दाश्त

IPL 2025: पांच बार की विजेता चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन इस सत्र में निराशाजनक रहा है सात मैचों में दो जीत के साथ टीम अंक तालिका मेंआखिरी पायदान पर है. रविवार को सीएसके का सामना मुंबई इंडियंस से होगा इस मैच में चेन्नई जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी. इससे पहलेकोच स्टीफन फ्लेमिंग ने टीम के सीनियर खिलाड़ियों को अल्टीमेटम दे दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर अगले दो मैच योजना के अनुसार नहीं होते हैंतो टीम आईपीएल के दूसरे भाग में अनुभवी खिलाड़ियों की जगह नए चेहरों को लाने में संकोच नहीं करेगी.मुंबई के खिलाफ मुकाबले से पहले प्रेसकॉन्फ्रेंस में फ्लेमिंग ने कहा यह एक नाजुक दौर है. हम अभी भी टूर्नामेंट में बने हुए है हम खिलाड़ियों को लय हासिल करने के लिए अधिक समय देनेऔर परिणाम प्राप्त करने की चाहत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. दुर्भाग्य से हम जिस स्थिति में हैं उसमें हमारे पास धैर्य रखने के लिएसमय नहीं है. दूसरी ओर हम जादुई फॉर्मूला खोजने की कोशिश में लगातार बदलाव नहीं करना चाहते है. नए खिलाड़ी दिख सकते है मैदान परइस दौरान फ्लेमिंग ने साफ किया अगले दो मैचों में स्थिति ठीक नहीं होती है तो नए खिलाड़ी मैदान पर दिख सकते हैं उन्होंने आगे कहा हम इस सत्र केसाथ थोड़ा आगे की ओर भी देख रहे हैं. हम भविष्य के लिए खिलाड़ियों के विकास को सुनिश्चित करना चाहते है अगले कुछ मैचों में अगर चीजें ठीकनहीं रही तो नए खिलाड़ी मैदान में दिख सकते है. हमारे अब तक के परिणामों ने सभी खिलाड़ियों को खेल में शामिल किया है.अतीत में अधिकअनुभवी खिलाड़ियों के साथ बने रहना हमारी परंपरा रही है और उन्होंने हमें वह परिणाम दिया है जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे.चेन्नई के खिलाफ सत्रका पहला मैच गंवाने के बावजूद मौजूद फॉर्म के आधार पर मुंबई का पलड़ा भारी है. रोहित शर्मा ने अभी तक बड़ा स्कोर नहीं बनाया है लेकिनसनराइजर्स के खिलाफ उनकी तेज शुरुआत ने टीम को बिना किसी दबाव के लक्ष्य का पीछा करने की आजादी दी. तिलक वर्मा और सूर्यकुमार यादवके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी दिखी है लेकिन रियान रिक्लेटन ने शीर्ष क्रम में अच्छा योगदान दिया है. अनुभवी जसप्रीत बुमराह की वापसी से मुंबईकी गेंदबाजी मजबूत हुई है. ट्रेंट बोल्ट भी अपने पुराने अंदाज में दिख रहे है. हार्दिक ने गेंदबाज और बल्लेबाज के रूप में अपनी भूमिका अच्छी तरहनिभाई है लेकिन आखिरी ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए वह नमन धीर पर निर्भर रहेंगे.