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ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर तीखा हमला, “ऑपरेशन सिंदूर को राजनीतिक रंग देना गलत”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा है कि उन्होंने‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है। उन्होंने पीएम मोदी पर राज्य में चुनावी प्रचार के दौरानआतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया। हमने राष्ट्रहित में सहयोग किया, न कि राजनीति के लिएममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पश्चिम बंगाल ने राष्ट्रहित में पूरी तरह सहयोग किया है। “हमारे सांसद संसदीयप्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। हमने इस मुद्दे पर सरकार के साथ मिलकर काम किया, लेकिन पीएम मोदी अब इसे बंगाल में वोट बटोरने के लिएइस्तेमाल कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है,” ममता ने कहा। क्या अब ‘ऑपरेशन बंगाल’ भी होगा?टीएमसी प्रमुख ने तीखे शब्दों में पूछा, “क्या प्रधानमंत्री अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तर्ज पर ‘ऑपरेशन बंगाल’ भी चलाएंगे?” उन्होंने मोदी को चुनौती देतेहुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है, तो वे बंगाल में सीधी चुनावी टक्कर लें। ममता ने यह भी कहा कि पीएम मोदी ने जो कहा, वह न केवल चौंकानेवाला था बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी। प्रधानमंत्री मोदी का पलटवार: तृणमूल सरकार पर लगाए गंभीर आरोपइससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अलीपुरद्वार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगालआज हिंसा, भ्रष्टाचार और अराजकता से त्रस्त है। “मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में हो रही सांप्रदायिक घटनाएं यह दिखाती हैं कि टीएमसीसरकार आम जनता के दर्द और भय को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील है,” पीएम मोदी ने कहा। बंगाल बदलाव चाहता हैप्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की जनता अब इस ‘निर्मम शासन’ से मुक्ति चाहती है। उन्होंने राज्य में महिलाओं की असुरक्षा, अपराध की बढ़तीघटनाएं और सामाजिक ताने-बाने के टूटने जैसे मुद्दों को उठाया। “बंगाल बदलाव चाहता है। जनता सुशासन और शांति चाहती है, न कि हिंसा औरभ्रष्टाचार,” मोदी ने अपने संबोधन में कहा। राजनीति में सैन्य कार्रवाई को घसीटना अनुचितटीएमसी समेत कई विपक्षी दलों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई जैसे विषयों को चुनावी मंचों पर लाना बेहद निंदनीयहै। उनका कहना है कि इस तरह के राष्ट्रहित से जुड़े फैसलों का उपयोग राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

भारतीय वायुसेना प्रमुख ने रक्षा खरीद में देरी पर जताई चिंता, जवाबदेही और तत्परता की उठाई मांग

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन कोसंबोधित करते हुए भारत की रक्षा खरीद प्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप सेस्वदेशी रक्षा परियोजनाओं की बार-बार देरी पर नाराज़गी ज़ाहिर की। समय पर डिलीवरी नहीं, फिर भी बार-बार वादे क्यों?एयर चीफ मार्शल सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि अधिकांश रक्षा परियोजनाएं समयसीमा के भीतर पूरी नहीं होतीं। उन्होंने सवाल उठाया किजब समय पर कोई भी परियोजना पूरी नहीं होती, तो बार-बार वादे क्यों किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार तो ऐसी परियोजनाएं शुरू कर दीजाती हैं, जिनके पूरे होने की उम्मीद ही नहीं होती। तेजस एमके-1ए डिलीवरी में देरी, एक भी विमान नहीं मिलाउदाहरण देते हुए वायुसेना प्रमुख ने बताया कि लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस Mk-1A के लिए फरवरी 2021 में HAL के साथ₹48,000 करोड़ का अनुबंध किया गया था, लेकिन अब तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है। जबकि डिलीवरी की शुरुआत मार्च 2024 से होनी थी। यह देरी वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को सीधे प्रभावित कर रही है। तेजस MK-2 और एएमसीए अभी भी अधर मेंउन्होंने यह भी जानकारी दी कि तेजस एमके-2 का प्रोटोटाइप अभी तक रोल आउट नहीं किया गया है और बहुप्रतीक्षित स्टील्थ एएमसीए फाइटर केलिए भी कोई प्रोटोटाइप अस्तित्व में नहीं है। ये सभी परियोजनाएं लगातार स्थगित होती जा रही हैं, जिससे सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया बाधितहो रही है। ‘सिर्फ उत्पादन नहीं, डिज़ाइन भी भारत में हो’एयरफोर्स चीफ ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि केवल भारत में उत्पादन की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिज़ाइनऔर अनुसंधान को भी स्वदेशी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तभी संभव है जब सेना और उद्योग के बीच भरोसेमंद सहयोगहो। भविष्य के लिए अभी से तैयारी ज़रूरीउन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उद्योग से बड़े स्तर पर उत्पादन की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन वर्तमान की जरूरतों को भी अनदेखा नहीं कियाजा सकता। “जो हमें आज चाहिए, वह आज ही चाहिए,” उन्होंने दो टूक कहा। एयर चीफ मार्शल ने स्पष्ट किया कि युद्ध केवल रणनीति से नहीं, बल्कि सशक्त सेनाओं से जीते जाते हैं। रक्षा मंत्री भी रहे मौजूदइस सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे, जिन्होंने वायुसेना प्रमुख के वक्तव्य को गंभीरता से सुना। एयर चीफ मार्शल की स्पष्ट और तथ्यआधारित टिप्पणी ने एक बार फिर भारत की रक्षा खरीद नीति में सुधार और तात्कालिकता की आवश्यकता को केंद्र में ला दिया है।

कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: सुरजेवाला बोले , MSP के नाम पर किसानों को किया गया गुमराह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में सरकार ने किसानों को लगातार धोखे में रखा है। “लागत+50% मुनाफा” का वादा सिर्फ एक चुनावी नारा बनकर रह गया है, जबकि जमीनीस्तर पर किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिला। स्वामीनाथन रिपोर्ट का नाम, पर अमल नहींसुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की जो दरेंघोषित की जा रही हैं, वे C2 लागत (जिसमें जमीन किराया, श्रम और लागत शामिल है) से 50% अधिक नहीं हैं। उन्होंने कई फसलों के उदाहरणदेते हुए बताया कि किसानों को औसतन ₹500 से ₹2,500 प्रति क्विंटल तक की कम कीमत मिल रही है। घोषणा होती है, खरीद नहींउन्होंने बताया कि 2023-24 की खरीद रिपोर्ट दर्शाती है कि वास्तविक फसल खरीद बहुत कम है। केवल धान की खरीद आधे से ज्यादा उत्पादन परहुई है, जबकि जौ, मक्का, और चना जैसी फसलों की MSP पर खरीद लगभग न के बराबर है। इससे किसानों को मंडियों में औने-पौने दाम पर फसलबेचनी पड़ रही है। महंगाई की मार, MSP में नहीं हुआ समुचित इजाफासुरजेवाला ने यह भी कहा कि सरकार जिस वृद्धि का प्रचार कर रही है, वह मुद्रास्फीति के स्तर को भी नहीं छूती। जैसे धान की कीमत को मात्र ₹69 प्रति क्विंटल बढ़ाया गया जबकि महंगाई दर के अनुसार यह वृद्धि ₹138 होनी चाहिए थी। साथ ही, डीजल के दाम बढ़ा दिए गए और खाद सब्सिडीमें ₹24,000 करोड़ की कटौती कर दी गई, जिससे किसान की लागत और बढ़ गई। न MSP की कानूनी गारंटी, न खेती पर टैक्स से राहतउन्होंने आरोप लगाया कि कृषि यंत्रों और मशीनों पर अब भी भारी GST लागू है। संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के बावजूद मोदी सरकार नेइन पर टैक्स में कोई छूट नहीं दी है। साथ ही, MSP को कानूनी अधिकार देने की अनुशंसा भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। कृषि योजनाओं में भारी राशि नहीं हुई खर्चसुरजेवाला ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने कृषि कल्याण की प्रमुख योजनाओं पर करीब ₹8 लाख करोड़ का बजट घोषित किया, लेकिन उसका 38% हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया। इसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम किसान और सिंचाई योजनाएं शामिल हैं। उन्होंनेकहा कि यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता में किसान नहीं हैं। वादे बड़े, नतीजे खोखलेकांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र सरकार का पूरा रवैया सिर्फ घोषणाओं और प्रचार पर आधारित है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि किसान आज भीआर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार MSP की कानूनी गारंटी दे, कृषि से जुड़े टैक्स खत्म करे और योजनाओं का प्रभावीक्रियान्वयन सुनिश्चित करे।

दिल्ली में BJP सरकार के 100 दिन, जनता की उम्मीदें अधूरी, बढ़ीं समस्याएं

दिल्ली में भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद जनता की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। लंबे संघर्ष और साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति केबाद सत्ता में आई भाजपा ने जहां खुद को मजबूत किया, वहीं आम जनता को राहत देने में विफल साबित हुई है। विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार कीकार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि जनता के भरोसे को भाजपा ने अधूरा छोड़ दिया है। बढ़ी बिजली और पानी की समस्याएंविपक्ष के अनुसार, भाजपा के शासन में बिजली की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। साथ ही, पावर कट कीसमस्या भी गंभीर रूप ले चुकी है, जिससे दिन-रात बिजली की अनियमित आपूर्ति से जनता परेशान है। इसके अलावा, जल आपूर्ति भी प्रभावित हुई हैऔर पानी की कटौती आम हो गई है, जिससे राजधानी के कई इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में गिरावटमोहल्ला क्लीनिकों को बंद किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सीमित हो रही है। शिक्षा क्षेत्र में भी स्थितिचिंताजनक है, जहां सरकारी स्कूलों में ताले लगे दिखाई दे रहे हैं और प्राइवेट स्कूलों की फीस में भारी वृद्धि हुई है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिकबोझ बढ़ा है। वादे सिर्फ वादे ही साबित हुएविपक्ष का कहना है कि भाजपा सरकार के सारे चुनावी वादे झूठे साबित हुए हैं और 100 दिन के इस कार्यकाल में जनता के साथ विश्वासघात हुआहै। लोगों को उम्मीद थी कि नई सरकार जनहित में काम करेगी, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि यह कार्यकाल जनता के लिए राहत नहीं, बल्किनिराशा लेकर आया है।

भाजपा सरकार के 100 दिन, दिल्ली में सक्रिय और जनहितकारी प्रशासन की छवि स्थापित

दिल्ली में सत्ता संभालने के 100 दिन पूरे होने पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने प्रेस वार्ता में कहा कि फरवरी 2025 में जनता ने अरविंदकेजरीवाल सरकार के दस वर्षों के कुशासन से ऊबकर भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ राजधानी के विकास और प्रशासन की जिम्मेदारीसौंपी। उन्होंने कहा कि 100 दिन किसी सरकार के काम का मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता, लेकिन यह गर्व की बात है कि भाजपासरकार इस अल्प अवधि में ही एक सक्रिय, समाधानमुखी और सकारात्मक प्रशासन की छवि स्थापित करने में सफल रही है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने उन सभी समस्याओं पर प्राथमिकता के आधार पर काम शुरूकिया है, जिन्हें पिछली सरकार ने नजरअंदाज किया था। जहां केजरीवाल सरकार अक्सर अपनी विफलताओं के लिए केंद्र, अधिकारियों और विपक्षको दोष देती थी, वहीं भाजपा सरकार ने जिम्मेदारी से काम करते हुए ठोस परिणाम दिए हैं। श्री सचदेवा ने बताया कि अब तक की प्रमुख उपलब्धियोंमें बुजुर्गों को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देने के लिए आयुष्मान भारत कार्ड जारी करना, दिल्ली के लिए 1 लाख करोड़ रुपये कामेगा विकास बजट घोषित करना, यमुना सफाई के लिए एसटीपी लगाने का बजट सुनिश्चित करना और उपेक्षित डीटीसी सेवा को सुधारते हुए 400 ‘देवी योजना’ बसें चलाना शामिल हैं। इसके अलावा, दिल्ली जल बोर्ड के टैंकरों में जीपीएस लगाकर झुग्गियों में जल आपूर्ति प्रणाली को दुरुस्त किया गया है और समर एक्शन प्लान केतहत राजधानी में पानी की आपूर्ति बेहतर हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ की शुरुआत की गई है, जहां दवा के साथ-साथ सभी जांचसुविधाएं भी उपलब्ध हैं। लगभग एक दशक बाद दिल्ली में नालों और सीवरों की बड़े स्तर पर सफाई हो रही है, और नगर निगम की सड़क सफाईव्यवस्था में भी सुधार देखा जा रहा है। महिला सम्मान राशि योजना पर नीतिगत निर्णय लेकर बजट आवंटित कर दिया गया है और एक कमेटी इस परकाम कर रही है। वहीं, दिल्ली शिक्षा अधिनियम में बदलाव से अभिभावकों को नई उम्मीद मिली है। भाजपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भाजपासरकार के मंत्री सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं बल्कि मंत्रालयों और सड़कों पर समस्याओं से जूझते दिखते हैं। श्री सचदेवा ने बताया कि सरकार गुरुवार को अपनी 100 दिन की उपलब्धियों को जनता के सामने रखेगी और भविष्य की योजनाओं का विस्तृतरोडमैप भी प्रस्तुत करेगी, जिससे स्पष्ट होगा कि भाजपा सरकार सिर्फ वादे नहीं, बल्कि परिणाम देने वाली सरकार है।

महंगाई-बेरोजगारी नहीं, भाजपा को सिर्फ ध्यान भटकाना आता है बोले सुनील सिंह

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा जनहित के असल मुद्दों जैसेमहंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं से बचने के लिए जानबूझकर लोगों का ध्यान भटकाने की रणनीति अपनाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास जनता को देने के लिए कुछ नहीं है, और यही वजह है कि वह हर बार ध्यान भटकाने वाले मुद्दों को हवा देतीहै। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने से कतराती है। गरीब भूखे मर रहे हैं, लेकिन सरकारेंकेवल पूंजीपतियों और बड़े कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने में लगी हुई हैं।” ‘विकास’ की जगह बहस छेड़ती है भाजपा: लोकदलसुनील सिंह ने कहा कि भाजपा की रणनीति हमेशा लोगों का ध्यान असली मुद्दों से हटाकर ‘भारत बनाम पाकिस्तान’, ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’, जातिवादया फिर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जैसे विवादास्पद विषयों की तरफ मोड़ने की रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, दोनों ही दलबदलाव की बातें तो करते हैं, लेकिन गरीबों, किसानों, मजदूरों और शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए इनके पास कोई ठोस योजना नहीं होती। जनविरोधी नीतियों से भाजपा बेनकाबलोकदल प्रमुख ने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में भाजपा की जनविरोधी नीतियां जनता के सामने उजागर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा कीओर से की जाने वाली हर नई कोशिश अब बेअसर होती जा रही है क्योंकि लोग समझ चुके हैं कि यह सरकार उनके मूल मुद्दों को हल करने में नाकामरही है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान, राज्य के दर्जे पर बातचीत जारी, पहलगाम हमले से नहीं रुकी प्रक्रिया

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बावजूद जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने कोलेकर विचार-विमर्श रुका नहीं है। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा हाल ही में हुई नीति आयोग की बैठक में उन्होंने खुद प्रधानमंत्री और अन्य अधिकारियोंके सामने रखा था। नीति आयोग की बैठक में उठाया मुद्दागुलमर्ग में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उमर ने कहा कि उन्होंने नीति आयोग की शासी परिषद में राज्य के दर्जे की बहाली का ज़िक्र अपनेऔपचारिक संबोधन में किया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह विधानसभा के विशेष सत्र का उपयोग इस विषय पर चर्चा के लिए नहीं करनाचाहते थे, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि संवाद बंद हो गया है। पर्यटन के पुनरुत्थान पर जोरपर्यटन उद्योग को फिर से सक्रिय करने के लिए मुख्यमंत्री ने कश्मीर के नागरिकों से अपील की कि वे खुद स्थानीय पर्यटन स्थलों की यात्रा करें। उन्होंनेबताया कि शिक्षा मंत्री को स्कूल और कॉलेजों के लिए पिकनिक की अनुमति देने को कहा गया है ताकि घाटी में जन-जीवन सामान्य हो सके। सुरक्षा का भरोसा लौटाने की कोशिशमुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में पहलगाम में आयोजित कैबिनेट बैठक का उद्देश्य लोगों के बीच यह संदेश देना था कि राज्य में हालात सामान्य होरहे हैं और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि कश्मीर फिर से पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार है। कश्मीरियों को दोष न देंउमर अब्दुल्ला ने आतंकवादी हमले के लिए कश्मीरियों को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस हमले का कश्मीर के आमनागरिकों से कोई संबंध नहीं था और इस घटना के लिए उन्हें दंडित करना अनुचित है। हमले के पीड़ितों की स्मृति में बनेगा स्मारककैबिनेट ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें हमले में मारे गए 26 पर्यटकों की स्मृति में एक स्थायी स्मारक बनाने की योजना है। इस कार्य के लिएसड़क एवं भवन विभाग को डिज़ाइन आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में प्रशासनिक तालमेल की ज़रूरत मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी उपराज्यपाल के अधीन है क्योंकि यह एक केंद्रशासित प्रदेशहै। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र, राज्य सरकार और राजभवन को मिलकर काम करना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

अंतर-सेवा संगठन अधिनियम 2023, थियेटर कमांड को मिली कानूनी शक्ति, अनुशासनिक अधिकार मजबूत

भारत सरकार ने अंतर-सेवा संगठन (कमांड, नियंत्रण और अनुशासन) अधिनियम 2023 के नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इस अधिनियम केप्रभावी हो जाने से थियेटर कमांड के अंतर्गत काम करने वाले कमांडरों को अपने अधीनस्थ सेवा कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का विधिकअधिकार मिल गया है। यह कदम सशस्त्र बलों के भीतर बेहतर समन्वय और संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम सुधार माना जा रहा है।अधिनियम की पारदर्शी रूपरेखा और प्रभावी कार्यान्वयनयह अधिनियम सेवा शर्तों में किसी बदलाव के बिना अंतर-सेवा संगठनों (ISO) में आदेशों की स्पष्टता और अनुशासन लागू करता है। इसके तहतकमांडर-इन-चीफ और ऑफिसर-इन-कमांड को कानूनी रूप से यह अधिकार प्राप्त हो गया है कि वे सभी संबंधित सेवाओं के कर्मियों पर नियंत्रण औरअनुशासन कायम रखें। धारा 11 के तहत बनाए गए नए नियमों का उद्देश्य है कि इस अधिनियम को व्यावहारिक और सुसंगत तरीके से लागू किया जासके। सेनाओं के समन्वय की दिशा में बड़ा सुधारचीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति के बाद से ही तीनों सेनाओं के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। थियेटरकमांड की स्थापना इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिसके अंतर्गत एक अधिकारी थल, जल और वायु सेना की संयुक्त कमांड की जिम्मेदारीसंभालेगा। यह न सिर्फ निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाएगा बल्कि संचालन में तालमेल भी बेहतर करेगा। समय की मांग के अनुरूप बदलावयह अधिनियम लंबे समय से लंबित एक ढांचागत सुधार की पूर्ति करता है। मौजूदा समय में तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं हैं, जिससे संयुक्त अभियानों में बाधा आ सकती थी। नई व्यवस्था इन अड़चनों को दूर कर एक統ीकृत और केंद्रीकृत कमांड संरचना स्थापित करने कामार्ग प्रशस्त करेगी। अंडमान-निकोबार मॉडल से प्रेरित नई दिशायह सुधार उस दिशा में अगला बड़ा कदम है, जिसकी शुरुआत 24 वर्ष पहले अंडमान-निकोबार कमांड के निर्माण से हुई थी। थियेटर कमांड कीऔपचारिक घोषणा जल्द होने की संभावना है, जो भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई गति देगा।

कांग्रेस बनाम शशि थरूर, सर्जिकल स्ट्राइक पर बयान से बढ़ा विवाद

कांग्रेस पार्टी और उसके वरिष्ठ नेता शशि थरूर के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। विवाद की जड़ थरूर का वह बयान है जो उन्होंने पनामा में एकबहुपक्षीय प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम के दौरान दिया। थरूर ने कहा कि पहली बार सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारके दौरान हुई थी। यह बयान कांग्रेस नेतृत्व को रास नहीं आया है क्योंकि पार्टी का आधिकारिक दावा है कि यूपीए शासनकाल में भी छह सर्जिकलस्ट्राइक की गई थीं, लेकिन उन्हें प्रचारित नहीं किया गया था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भाजपा को थरूर से मिला समर्थन?कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि शशि थरूर के बयान से ऐसा संदेश जा रहा है मानो वह प्रधानमंत्री मोदी सरकार को सर्जिकल स्ट्राइक और हालिया”ऑपरेशन सिंदूर” जैसे सैन्य अभियानों पर राजनीतिक संरक्षण दे रहे हों। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर करारा प्रहारकिया था। सीजफायर पर कांग्रेस का तीखा हमलाकांग्रेस पार्टी ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि उसने अचानक सीजफायर की घोषणा करके अपनी पिछली आक्रामक रणनीति से पीछे हटने कासंकेत दिया है। पार्टी का मानना है कि इस समय विपक्ष को सरकार पर सवाल खड़े करने चाहिए, न कि समर्थन देना चाहिए। उदित राज का तंज – ‘थरूर बने भाजपा के सुपर प्रवक्ता’कांग्रेस नेता उदित राज ने शशि थरूर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “भाजपा का सुपर प्रवक्ता” बताया। उनका कहना है कि थरूर प्रधानमंत्री मोदीकी तारीफ में भाजपा नेताओं से भी दो कदम आगे हैं। उदित राज ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार सेना की उपलब्धियों का श्रेय लेती है, जबकिपूर्व सरकारें ऐसी राजनीति से दूर रहती थीं।थरूर का बयान – 2016 और 2019 की स्ट्राइक का समर्थनशशि थरूर ने अपने बयान में 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों ने आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि उन्हें इसका गंभीर मूल्य चुकाना होगा। थरूर ने दी ऐतिहासिक तुलनाथरूर ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान भारत ने एलओसी पार नहीं की थी, लेकिन पुलवामा हमले के बाद भारत ने न केवल नियंत्रण रेखा बल्किअंतरराष्ट्रीय सीमा भी पार की थी। उन्होंने यह टिप्पणी पनामा में चल रहे तीन दिवसीय राज्य दौरे के दौरान की, जहां वे भारतीय बहुपक्षीयप्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दल में अन्य सांसदों के अलावा अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू भी शामिल हैं।

कोरोना के मामलों में फिर इजाफा, JN.1 वेरिएंट पर विशेषज्ञों की नजर

देश में कोविड-19 के मामलों में एक बार फिर वृद्धि देखी जा रही है। सक्रिय मामलों की संख्या अब 1200 के पार पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा केसकेरल में दर्ज किए गए हैं, जहां 430 संक्रमित पाए गए हैं। महाराष्ट्र में 208, जबकि दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में 100 से अधिक मामले सामनेआए हैं। बीते 24 घंटों के भीतर बिहार में 6 और अरुणाचल प्रदेश में 1 नया संक्रमित मरीज मिला है। इस तेजी से फैलते संक्रमण के पीछे JN.1 वेरिएंट को मुख्य कारण माना जा रहा है, जो ओमिक्रॉन का एक उप-स्वरूप है। चंडीगढ़ में कोरोना से पहली मौत का मामलापंजाब के चंडीगढ़ शहर में कोविड संक्रमण से इस साल की पहली मौत की पुष्टि हुई है। लुधियाना के रहने वाले 40 वर्षीय व्यक्ति की जानGMCH-32 अस्पताल में चली गई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था। जांच में वह कोरोना पॉजिटिव पाए गएऔर इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। AIIMS के पूर्व निदेशक की चेतावनीएम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि JN.1 वेरिएंट ओमिक्रॉन का एक ऐसा प्रकार है जिसमें लगभग 30 प्रकार के म्यूटेशन पाएगए हैं। यह वेरिएंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है और तेजी से फैलता है। उन्होंने बताया कि हालांकि पहले भी बड़ी संख्या मेंलोग ओमिक्रॉन से संक्रमित हो चुके हैं और कुछ हद तक प्रतिरक्षा विकसित हुई है, लेकिन वायरस के लगातार बदलते स्वरूप के कारण नए संक्रमणकी आशंका बनी रहती है। ICMR का क्या कहना है?भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने स्पष्ट किया कि देश में संक्रमण के नए मामलों में गंभीर लक्षणदेखने को नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि कोविड की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है और मौजूदा हालात घबराने योग्य नहीं हैं। क्या JN.1 वेरिएंट से घबराने की जरूरत है?विशेषज्ञों के अनुसार, JN.1 की सबसे बड़ी समस्या इसकी तेज़ी से फैलने की क्षमता है। इसमें कुछ ऐसे अतिरिक्त म्यूटेशन हैं, जो वायरस को अधिकसंक्रामक बनाते हैं। हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि यह वेरिएंट फिलहाल जानलेवा नहीं है और लोगों को घबराने की बजाय सतर्क रहने कीआवश्यकता है।