आपातकाल की 50वीं बरसी पर मोदी सरकार का हमला, अमित शाह बोले- कांग्रेस ने की थी संविधान की हत्या”

आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश में “संविधान हत्या दिवस” मनाया गया। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम कोसंबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल में कांग्रेस ने जो अत्याचार किए, देश उन्हें कभी नहीं भुला पाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने इस दिन को “संविधान हत्या दिवस” का नाम दिया ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी उस काले अध्याय की जानकारी रहे। ‘दमन और यातना’ की यादें अब भी ताज़ाअमित शाह ने कहा कि वह स्वयं उस दौर के दमन और यातना को आज भी नहीं भूल पाए हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास के उसअंधकारमय काल को भूलना ठीक नहीं होगा क्योंकि समाज और लोकतंत्र के लिए ऐसी घटनाओं से सीख लेना जरूरी है ताकि वे दोबारा न दोहराईजाएं। कैसे तय हुआ ‘संविधान हत्या दिवस’ का नामशाह ने बताया कि जब गृह मंत्रालय में इस दिन के नाम को लेकर सुझाव लिए गए, तब कई लोगों ने इसे कठोर शब्द बताया। लेकिन अंततः‘संविधान हत्या दिवस’ नाम इसलिए चुना गया क्योंकि आपातकाल के दौरान जिस तरह लोकतंत्र का गला घोंटा गया, उसे केवल ऐसे ही स्पष्ट शब्दोंमें याद रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उस दौर में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला हुआ, प्रेस की आज़ादी छीनी गई और पूरे देश को जेलजैसा बना दिया गया। आपातकाल में नरेंद्र मोदी की भूमिका पर किताब का ज़िक्रशाह ने उस किताब का उल्लेख किया जिसमें नरेंद्र मोदी के युवावस्था में आपातकाल विरोधी संघर्ष की कहानी दर्ज है। किताब का नाम है “The Emergency Diary: Years that Forged a Leader”। इसमें बताया गया है कि 23-24 वर्ष की उम्र में मोदी ने किस तरह जेपी आंदोलनऔर नानाजी देशमुख के नेतृत्व में आपातकाल के विरोध में सक्रिय भागीदारी की। 2014 में परिवारवाद का अंत: शाहअमित शाह ने कहा कि समय का चक्र देखिए, जब एक युवा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर इंदिरा गांधी की नीतियों का विरोध कर रहा था, उसी ने वर्ष2014 में उस परिवारवादी राजनीति को खत्म कर दिया जिसके कारण आपातकाल लगाया गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी नेलोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया है। 12 जून और 24 जून की घटनाओं का हवालागृह मंत्री ने बताया कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध करार दिया था और छह साल तक चुनाव लड़ने पररोक लगा दी थी। इसी दिन गुजरात में कांग्रेस सरकार भी सत्ता से बाहर हो गई थी। इन घटनाओं के बाद 24 जून को इंदिरा गांधी ने ‘आपातकाल’ लागू करने की सिफारिश की। शाह ने कहा कि इंदिरा गांधी ने संविधान की आत्मा को कुचलते हुए अपने पद को बचाने के लिए देश को अंधकार मेंधकेल दिया।
संविधान हत्या दिवस: पीएम मोदी ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र की हत्या

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्यायबताया और इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तीखी आलोचना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई विशेषकैबिनेट बैठक की शुरुआत दो मिनट के मौन के साथ हुई, जिसमें आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलिदी गई। बैठक में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें आपातकाल को संविधान के मूल्यों के विरुद्ध बताया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर इस दिन को “संविधान हत्या दिवस” करार देते हुए लिखा कि 25 जून 1975 को देश के मौलिक अधिकारों कोनिलंबित कर दिया गया था, प्रेस की स्वतंत्रता छीनी गई और हजारों नागरिकों, छात्रों तथा नेताओं को जेल में डाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगायाकि उस समय की कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को पूरी तरह कुचलने का प्रयास किया। गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा नेताओं ने भी इसी स्वर मेंआपातकाल की निंदा की। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस पार्टी आज भी आपातकाल जैसे गंभीर विषय परआत्ममंथन करने को तैयार नहीं है, और यह दर्शाता है कि उसने उस दौर से कोई सबक नहीं लिया है। कैबिनेट बैठक में इस ऐतिहासिक संदर्भ के अलावा तीन प्रमुख फैसले भी लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पुणे मेट्रो विस्तार केलिए 3626 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, वहीं झारखंड के झरिया में वर्षों से जारी भूमिगत कोयला आग से निपटने के लिए 5940 करोड़ रुपये कासंशोधित मास्टर प्लान स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा आगरा में 111 करोड़ रुपये की लागत से एक अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र स्थापितकिया जाएगा। इस मौके पर भाजपा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आपातकाल की सच्चाई को जानें और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्क रहें। पार्टी का मानना हैकि इतिहास के इस काले दौर को भुलाना नहीं चाहिए, बल्कि इससे सीख लेकर संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकताफैलानी चाहिए।
राजस्थान में 3500 साल पुरानी नदी के अवशेष मिले, सरस्वती नदी से जुड़ाव की संभावना

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने राजस्थान के डीग जिले के बहाज गांव में खुदाई के दौरान एक प्राचीन नदी के पेलियोचैनल (नदी मार्ग के अवशेष) की खोज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वही पौराणिक नदी हो सकती है जिसका उल्लेख ऋग्वेद में सरस्वती के रूप में किया गया है। प्राचीन काल की ओर इशारा करती है खोजअप्रैल 2024 से मई 2025 के बीच चली खुदाई में ऐसे प्रमाण मिले हैं जो 3500 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व के समय से संबंधित हो सकते हैं। यहखोज इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत में पहली बार खोजा गया ‘पेलियोचैनल’पुरातत्व विभाग द्वारा खोजे गए अवशेष को ‘पेलियोचैनल’ कहा जाता है – यह उस सूखी नदी का प्राचीन मार्ग होता है जो अब अस्तित्व में नहीं है। यहभारतीय इतिहास में पहली बार है जब किसी सूखी नदी के मार्ग को वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित किया गया है। पहले अनुमान है कि यह नदी कुषाण, शुंग और मगध साम्राज्यों के दौरान सक्रिय रही होगी। मानव सभ्यता के पोषण में रहा होगा योगदानबनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में हुए एक प्रेजेंटेशन में ASI जयपुर के पुरातत्वविद् विनय गुप्ता ने बताया कि यह नदी प्रणाली संभवतः प्रारंभिकमानव बस्तियों के जल स्रोत के रूप में कार्य करती रही होगी और बहाज क्षेत्र को सरस्वती बेसिन से जोड़ती होगी। ‘अभूतपूर्व खोज’ मान रहे हैं विशेषज्ञविनय गुप्ता ने इसे ‘अभूतपूर्व खोज’ बताया है और कहा कि यह भारतीय इतिहास और भूगर्भ विज्ञान दोनों के लिए अहम है। बहाज गांव मथुरा से करीब50 किलोमीटर दूर स्थित है और इसकी खुदाई रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को सौंप दी गई है, जहां से इसे संरक्षित करने पर निर्णय लिया जाएगा। खुदाई में मिले और भी ऐतिहासिक अवशेषखुदाई के दौरान टीम को प्राचीन मिट्टी के बर्तन, दीवारों से जुड़े गड्ढे, खाइयां, भट्टियां, लोहे और तांबे की कलाकृतियां भी मिली हैं। ये सभी प्रमाण इसक्षेत्र में हजारों साल पहले मानव बस्ती के अस्तित्व का संकेत देते हैं।
उदयपुर में फ्रांसीसी युवती से दुष्कर्म का मामला, कास्टिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ ओझा गिरफ्तार

उदयपुर में टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आई एक फ्रांसीसी युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने आरोपी सिद्धार्थ ओझा उर्फ पुष्पराज को गिरफ्तारकर लिया है। आरोपी एक कास्टिंग एजेंसी का संचालन करता है और कई बॉलीवुड प्रोजेक्ट्स में कार्य कर चुका है। मामले की पुष्टि उदयपुर के पुलिसअधीक्षक योगेश गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। शूट के बहाने भारत आई थी पीड़िता, आरोपी ने फ्लैट पर बुलाकर किया दुष्कर्मपुलिस के अनुसार, युवती को ‘कास्टिंग कॉल’ नामक कंपनी के जरिए एक मोबाइल एड शूट के लिए हायर किया गया था। 22 जून को वह उदयपुरपहुंची और सज्जनगढ़ किले, पिछोला झील और अन्य लोकेशनों पर शूटिंग की गई। शूट के बाद, टीम ने टाइगर हिल स्थित एक रेस्टोरेंट में पार्टी रखी, जहां से आरोपी ने ‘स्मोक ब्रेक’ का बहाना बनाकर युवती को अपने सुखेर स्थित फ्लैट ले जाकर दुष्कर्म किया। विदेशी महिला से जुड़ा मामला, पुलिस ने तेज़ी से की कार्रवाईपुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने बताया कि चित्तौड़गढ़ के गंगरार क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया किचूंकि मामला एक विदेशी नागरिक से जुड़ा है, इसलिए इसे प्राथमिकता दी गई और सात दिन में चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य रखा गया है। हनी ट्रैप का दावा, फिर कुबूल किया अपराधगिरफ्तारी के बाद आरोपी सिद्धार्थ ने शुरुआत में खुद को ‘हनी ट्रैप’ में फंसाने की बात कही। उसने बॉलीवुड से जुड़े कुछ लोगों पर साजिश रचने का भीआरोप लगाया। उसका कहना था कि उसे इस पेशे को छोड़कर गांव लौटने के लिए मजबूर किया जा रहा था। हालांकि पुलिस की सख्ती के बादउसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। आक्रोशित भीड़ और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोधइस घटना को लेकर शहर में गुस्सा देखा गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्री पर प्रदर्शन किया। इसी दौरान जब पुलिस आरोपी को एसपीकार्यालय लेकर पहुंची, तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने उसकी पिटाई की कोशिश की। इसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ सहित कार्यकर्ताएसपी ऑफिस पहुंचे, जहाँ पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
राकेश शर्मा के बाद अब शुभांशु शुक्ला, भारत का प्रतिनिधित्व अंतरिक्ष में

भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। शुभांशु शुक्ला सहित चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर SpaceX का फाल्कन 9 रॉकेट सफलतापूर्वक फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ। यह मिशन Axiom-4 का हिस्सा है, जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन(ISS) पर लगभग 14 दिनों तक चलेगा। भारत के लिए ऐतिहासिक पल: ISS पर पहुंचने वाले दूसरे भारतीय होंगे शुभांशुAxiom-4 मिशन के तहत शुभांशु शुक्ला भारत के पहले ऐसे व्यक्ति बनेंगे जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचेंगे। इससे पहले केवल राकेश शर्माअंतरिक्ष में गए थे। यह रॉकेट 26 जून को शाम करीब 4:30 बजे ISS पर डॉक करेगा, जिससे भारत का नाम एक बार फिर वैश्विक अंतरिक्ष मानचित्रपर प्रमुखता से उभरेगा। मिशन में शामिल चार देशों के अंतरिक्ष यात्रीइस मिशन में भारत के शुभांशु शुक्ला पायलट के रूप में शामिल हैं। उनके साथ अमेरिका से अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन कमांडर के रूप में हैं, जबकि पोलैंड के स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू मिशन स्पेशलिस्ट के रूप में शामिल हुए हैं। यह मिशन भारत, हंगरी औरपोलैंड के लिए मानव अंतरिक्ष उड़ान की नई शुरुआत है। ISS पर होंगे 60 वैज्ञानिक प्रयोग, 7 भारत से प्रस्तावितAxiom-4 मिशन के दौरान चारों अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 60 वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जिनमें से 7 प्रयोग भारतीय वैज्ञानिकों द्वाराप्रस्तावित किए गए हैं। मिशन को नासा और Axiom Space द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है। शुभांशु का परिवार भावुक, पत्नी ने बताया ‘शांत लड़का’स्पेस मिशन से पहले शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट शेयर कर अपने परिवार और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने खासतौर पर अपनी पत्नी कामना शुक्ला का धन्यवाद किया और लिखा, “कोई भी व्यक्ति अकेले अंतरिक्ष की यात्रा नहीं करता, हम सब कई लोगों केसहयोग से वहां पहुंचते हैं।” शुभांशु की पत्नी कामना ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनकी मुलाकात स्कूल के दिनों में लखनऊ में हुई थी। “शुभांशु क्लास का सबसे शांतलड़का था, आज वही देश के लिए अंतरिक्ष में जा रहा है, मुझे उस पर गर्व है।” शुभांशु की मां आशा शुक्ला ने भी बहू की सराहना करते हुए कहा किउनके बिना यह मिशन संभव नहीं था।
ऑपरेशन सिंधु: ईरान से 282 भारतीयों को लेकर विशेष विमान नई दिल्ली पहुंचा

ईरान और इज़राइल के बीच हालिया सैन्य तनाव के चलते चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत भारत सरकार ने बुधवार को 282 और भारतीयनागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि मशहद से उड़ान भरने वाली यह विशेष फ्लाइट बुधवार को नई दिल्लीमें सुरक्षित उतरी। अब तक कुल 2,858 नागरिकों की सुरक्षित वापसीइस ताज़ा रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ ही अब तक इस अभियान के तहत 2,858 भारतीय नागरिकों को ईरान से निकाला जा चुका है। यह अभियान उससमय शुरू किया गया था जब पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच जारी तनाव ने गंभीर रूप ले लिया था, हालांकि अब दोनों देशों के बीचयुद्धविराम की सहमति बन चुकी है। लौटने वालों ने जताया आभार, बताया राहत का अनुभवनई दिल्ली पहुंचने पर निकाले गए लोगों ने भारत सरकार और ईरान में स्थित भारतीय दूतावास का आभार व्यक्त किया। एक रेस्क्यू किए गए व्यक्ति नेकहा, “अब हालात सुधर गए हैं। भारतीय दूतावास ने हमारे लिए सारी व्यवस्था बहुत अच्छे से की। किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई।” शरणार्थी सैयद आदिल मंसूर ने कहा, “मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं। वहां स्थिति सामान्य हो रही है। भारतीय दूतावास और ग्राउंड स्टाफ ने हमारी बहुतमदद की।” वहीं, मोहम्मद असीम ने भी इसी तरह की बात कही और कहा, “मैं भगवान का शुक्रगुज़ार हूं कि मैं अब भारत में हूं और भारतीय दूतावासका आभारी हूं।” 24 जून को 281 भारतीय और 5 विदेशी नागरिक भी लाए गए थेइससे एक दिन पहले, यानी 24 जून को एक और विशेष विमान 281 भारतीय नागरिकों के साथ 3 श्रीलंकाई और 2 नेपाली नागरिकों को लेकर नईदिल्ली पहुंचा था। इन सभी की सुरक्षित वापसी पर विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी
आरोपी तौफीक बुर्का पहनकर पहुंचा, छत से फेंककर की हत्या

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ज्योति नगर थाना क्षेत्र में 19 वर्षीय युवती नेहा की दर्दनाक हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। मामले केमुख्य आरोपी तौफीक को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के टांडा से गिरफ्तार कर लिया गया है। बुर्का पहनकर पहुंचा आरोपी, छत से फेंककर की हत्याघटना 23 जून की सुबह लगभग 8:30 बजे की है जब पुलिस को सूचना मिली कि अशोक नगर इलाके में एक लड़की छत से गिर गई है। मौके परपहुंची पुलिस को बताया गया कि युवती को गंभीर हालत में जीटीबी अस्पताल ले जाया गया है। जांच के दौरान सामने आया कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या थी। नेहा के परिवार वालों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कितौफीक नाम का युवक बुर्का पहनकर नेहा की बिल्डिंग में दाखिल हुआ था। छत पर किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बादतौफीक ने नेहा को धक्का देकर नीचे गिरा दिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। कानूनी कार्रवाई और तकनीकी जांचघटना के बाद ज्योति नगर पुलिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1)/351(2) के तहत मामला दर्ज किया।जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपी की पहचान की गई।दिल्ली पुलिस की कई टीमों ने किया पीछा, रामपुर से गिरफ्तारीआरोपी की लोकेशन ट्रेस कर दिल्ली पुलिस की कई टीमों को लगाया गया। सतत प्रयासों के बाद तौफीक को रामपुर जिले के टांडा कस्बे से गिरफ्तारकर लिया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
शशि थरूर की पीएम मोदी की प्रशंसा पर खड़गे का कटाक्ष, ‘कुछ लोगों के लिए मोदी पहले, देश बाद में’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले हैंऔर देश बाद में। खड़गे की यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चाएं ज़ोरों पर हैं। ऑपरेशन सिंदूर में थरूर की भूमिका को लेकर सवालखड़गे की यह टिप्पणी केंद्र सरकार द्वारा शशि थरूर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौंपे जाने के संदर्भ में आई है।खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “थरूर की अंग्रेज़ी अच्छी है, इसलिए उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति में रखा गया है। लेकिन जब हमने कहा कि ‘देश पहले’, कुछ लोग ‘मोदी पहले’ की भावना से काम करते हैं।”चुनाव आयोग पर भी साधा निशानाकांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग अब मोदी सरकार के अधीन कठपुतली जैसाव्यवहार कर रहा है। जब राहुल गांधी ने जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए, तो ईडी जवाब नहीं दे पाई।” मोदी की चुनावी जीत पर सवाल, मशीनों पर भरोसा नहींखड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को चुनाव का विजेता बताते हैं, लेकिन असल में जीत मशीन की है। उन्होंने कहा, “बिहार में प्रचार कर रहेमोदी यह भूल रहे हैं कि जनता नहीं, मशीनें जीत रही हैं।” आपातकाल पर सरकार के परिपत्र की आलोचनाप्रधानमंत्री द्वारा आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर जारी किए गए सरकारी परिपत्र पर भी खड़गे ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “सरकार कहती हैकि इमरजेंसी में संविधान नष्ट हो गया था, लेकिन सच्चाई यह है कि आज संविधान की सबसे ज़्यादा अनदेखी हो रही है।” ‘संविधान बचाओ यात्रा’ से डर रही है बीजेपी: खड़गेकांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी को ‘संविधान बचाओ यात्रा’ से घबराहट हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों का स्वतंत्रता संग्राम मेंकोई योगदान नहीं रहा, वही आज संविधान पर सवाल उठा रहे हैं। सर्वदलीय बैठक और रैलियों को लेकर भी जताई नाराजगीखड़गे ने केंद्र सरकार पर विपक्ष को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा, “आप पहलगाम आतंकी हमले पर सर्वदलीय बैठक बुलाते हैं लेकिनफिर खुद रैली करने निकल जाते हैं। विपक्ष को साथ लेकर चलने की बजाय उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।”
लोकदल ने सरकार की सहकारी नीति पर उठाए गंभीर सवाल,सुनील सिंह बोले, किसानों को ठगने की साजिश, सहकारी समितियों कानिजीकरण कर रही है सरकार

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने केंद्र सरकार की सहकारी नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वहसहकारी समितियों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश कर रही है, जिससे किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के हितों को सीधा नुकसान पहुंच रहाहै। सहकारिता आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश: लोकदलसुनील सिंह ने कहा कि सरकार एक तरफ देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर अपने फैसलों और नीतियोंसे इन संस्थाओं को कॉर्पोरेट के हवाले करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “सरकार की असल मंशा अब सामने आ चुकी है। सहकारीसंस्थाओं को धीरे-धीरे निजी नियंत्रण में देने की कोशिश की जा रही है, जो किसानों के हितों के खिलाफ है।” सार्वजनिक संसाधनों को कॉर्पोरेट को सौंपने की मंशालोकदल प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार केवल सहकारी समितियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह सार्वजनिक संसाधनों को भी निजीऔर कॉर्पोरेट हाथों में सौंपने की दिशा में काम कर रही है। यह नीति जनविरोधी है और देश के संसाधनों पर कुछ गिने-चुने पूंजीपतियों का कब्जाकरवाने का प्रयास है। सहकारिता का मूल उद्देश्य नष्ट न किया जाएसुनील सिंह ने कहा कि सहकारी संस्थाएं ग्रामीण भारत की रीढ़ हैं, जो सामूहिक भागीदारी, स्थानीय नेतृत्व और समुदायिक सशक्तिकरण की भावना सेजुड़ी हुई हैं। सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शी नीति अपनाए और निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोके। किसानों की नाराज़गी और चेतावनीसिंह ने कहा, “किसान देश की आत्मा हैं और सहकारी समितियाँ उनके सहयोग की धुरी हैं। इस धुरी को तोड़ने की किसी भी साजिश को देश काअन्नदाता कभी स्वीकार नहीं करेगा। लोकदल इस नीति का पूरी ताकत से विरोध करेगा और किसान हितों के साथ किसी भी समझौते को बर्दाश्त नहींकिया जाएगा।”
सीबीएसई 2026 से साल में दो बार कराएगा 10वीं की बोर्ड परीक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा को साल में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह नईव्यवस्था 2026 से लागू होगी। बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इसकी पुष्टि की है। परीक्षा की संभावित तिथियांसीबीएसई द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, पहली परीक्षा फरवरी में आयोजित हो सकती है, जिसकी संभावित तिथियां 17 फरवरी से 6 मार्चके बीच होंगी। वहीं, दूसरी परीक्षा मई में संभावित है और यह 5 से 20 मई के बीच आयोजित की जा सकती है। दोनों परीक्षाओं का सिलेबस एक समानदोनों चरणों की परीक्षाएं पूरे पाठ्यक्रम पर आधारित होंगी। इसमें कोई यूनिट सिस्टम या आंशिक सिलेबस नहीं होगा। इसके अलावा, जो छात्र दोनोंपरीक्षाओं में शामिल होंगे, उनके परीक्षा केंद्र एक ही रहेंगे। परीक्षा शुल्क और रजिस्ट्रेशनपरीक्षाओं की फीस रजिस्ट्रेशन के समय ही दोनों परीक्षाओं के लिए एक साथ जमा करनी होगी। यानी छात्र को एक बार में ही दोनों बार की परीक्षाफीस देनी होगी। परिणामों में सुधार का मौकाइस नई प्रणाली के अंतर्गत छात्रों को परिणाम सुधारने का एक और अवसर मिलेगा। जो छात्र पहली परीक्षा के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं होंगे, वे दूसरीपरीक्षा देकर अपने अंकों में सुधार कर सकते हैं। किन अंकों को माना जाएगा अंतिम?यदि कोई छात्र दोनों परीक्षाओं में शामिल होता है, तो उसके अंतिम अंक वही माने जाएंगे, जो बेहतर होंगे। उदाहरण के लिए, अगर पहले चरण मेंज्यादा अंक आते हैं और दूसरे में कम, तो पहले चरण के अंक ही मान्य होंगे। किन छात्रों को दूसरी परीक्षा का मौका नहीं मिलेगा?अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों की परीक्षा नहीं देता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। केवलउन्हीं छात्रों को दूसरी परीक्षा में बैठने की सुविधा दी जाएगी, जिन्होंने अधिकतम तीन विषयों में प्रदर्शन सुधारने की आवश्यकता जताई हो।