केरल के स्कूलों में ज़ुम्बा कार्यक्रम पर विवाद, मुस्लिम संगठनों ने जताई आपत्ति

शारीरिक स्वास्थ्य और नशा विरोधी अभियान के तहत ज़ुम्बा की शुरुआतकेरल सरकार ने स्कूलों में छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए ज़ुम्बा कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल राज्यसरकार के नशा विरोधी अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को सक्रिय जीवनशैली के लिए प्रेरित करना और नशे के प्रति जागरूक करनाहै। कासरगोड जिले के थन्बीहुल इस्लाम हायर सेकेंडरी स्कूल (Thanbeehul Islam HSS) में ज़ुम्बा सत्र के एक वीडियो को राज्य के शिक्षा मंत्रीवी. सिवनकुट्टी ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा किया था, जिसमें छात्र यूनिफॉर्म में ज़ुम्बा करते नजर आए। मुस्लिम संगठनों ने नैतिकता और धार्मिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगायाइस पहल पर केरल के कुछ मुस्लिम संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन के महासचिव टी.के. अशरफ ने फेसबुक परलिखा कि वह इस कार्यक्रम को स्वीकार नहीं करते और उनका बेटा इसमें हिस्सा नहीं लेगा। वहीं, समसथा नामक एक प्रमुख मुस्लिम संगठन के नेतानसर फैज़ी कूडाथाई ने इसे छात्रों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक नैतिकता का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों को कमकपड़ों में नाचने के लिए मजबूर कर रही है, जो न केवल अनुचित है, बल्कि छात्रों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ भी है। शिक्षा मंत्री ने कार्यक्रम का किया बचावशिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए ज़ुम्बा कार्यक्रम का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को नाचने यापरफॉर्म करने के लिए कम कपड़े पहनने के लिए नहीं कहा गया है, बल्कि वे स्कूल यूनिफॉर्म में ही शामिल हो रहे हैं। उन्होंने आपत्तियों को “नशे से भीअधिक खतरनाक ज़हर” बताते हुए कहा कि बच्चों को खेलने, हँसने, और स्वस्थ रूप से बढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए। RTE कानून के तहत भागीदारी अनिवार्यशिवनकुट्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के अनुसार, सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्य सहगामी गतिविधियों में बच्चोंकी भागीदारी अनिवार्य है और इसमें अभिभावकों को असहमति का विकल्प नहीं दिया गया है।
कांग्रेस का भाजपा पर हमला, ओबीसी आरक्षण में देरी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी, आंदोलन की चेतावनी

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27% आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य सरकारपर तीखा हमला बोला है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल, हरिश चौधरी, जीतू पटवारी और अनिल जयहिंद ने संयुक्त रूप से भाजपा सरकार परआरोप लगाया कि वह जानबूझकर ओबीसी समुदाय को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रही है। भूपेश बघेल ने कहा कि यह सिर्फ आरक्षणका मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की आत्मा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने 27 प्रतिशतआरक्षण को वैध ठहरा दिया है, तब भी राज्य सरकार की चुप्पी यह दिखाती है कि वह ओबीसी समुदाय को उनका हक नहीं देना चाहती। हरिश चौधरी ने जानकारी दी कि वर्ष 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया था, जिसे 2003 मेंबढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया। 2019 में जब कांग्रेस की सरकार बनी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अध्यादेश लाकर इसे लागू कियाऔर विधानसभा में इसे पारित भी किया गया, लेकिन भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही इस फैसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जीतू पटवारी नेभाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने वर्षों से ओबीसी छात्रों को धोखे में रखा है, नियुक्तियां रुकी हुई हैं, परीक्षाएं अधर में लटकी हैं औरसरकार बार-बार यह कहती रही कि मामला अदालत में है, जबकि 28 जनवरी 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा था कि 27% आरक्षण पूरी तरह वैध है और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। अनिल जयहिंद ने भाजपा की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा न सामाजिक न्याय में विश्वास करती है और न ही बराबरी में। उन्होंनेकहा कि यह स्पष्ट है कि भाजपा की नीति हमेशा दलितों, पिछड़ों और वंचितों को पीछे रखने की रही है। उन्होंने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट की दोटिप्पणियों के बावजूद सरकार आरक्षण लागू क्यों नहीं कर रही। कांग्रेस ने चार प्रमुख माँगें रखी हैं ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण तुरंतलागू किया जाए, नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों को अविलंब नियुक्त किया जाए, सभी योग्य अभ्यर्थियों को पिछली सेवा अवधि का वेतनदिया जाए और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व मंत्री मोहन यादव को प्रदेश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार की लगातार टालमटोल की नीति यह साबित करती है कि वह ओबीसी समाज के प्रति न तो संवेदनशील हैऔर न ही न्यायप्रिय। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई अब रुकेगी नहीं और पार्टी हर मंच पर पिछड़े वर्ग के अधिकार की आवाज बुलंदकरती रहेगी। उन्होंने भाजपा को चेतावनी दी कि जब संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता है, तो फिर ओबीसी समाज को उनका हक देने में देरीक्यों की जा रही है। अगर सरकार ने जल्द आरक्षण लागू नहीं किया, तो कांग्रेस राज्यभर में जन आंदोलन करेगी।
आपातकाल की 50वीं बरसी पर दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा ने महाराष्ट्र सदन में मॉक पार्लियामेंट का किया आयोजन

देश में आपातकाल लगाए जाने की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा द्वारा महाराष्ट्र सदन में एक मॉक पार्लियामेंट सत्र काआयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने संबोधित किया। यह आयोजन दिल्लीभाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष ऋचा पांडेय मिश्रा के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। आपातकाल में विरोध की हर आवाज को दबा दिया गयामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान सरकार के खिलाफ बोलने वालों को बिना सुनवाई और बिनाकिसी कानूनी प्रक्रिया के जेल में डाल दिया जाता था। पूरे देश में भय का माहौल बना दिया गया था, जिससे भारत एक खुली जेल जैसा बन गयाथा। उन्होंने बताया कि उन दिनों में जो भी सरकार के खिलाफ बोल सकता था, उसके नाम पहले से तय कर लिए जाते थे और रातों-रात जेल में डाल दियाजाता था। मीडिया हाउस बंद कर दिए गए, अखबारों पर पाबंदी लगा दी गई और सब कुछ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर होता था। रेखा गुप्ता ने यह भी बताया कि आपातकाल के दौरान फिल्म अभिनेता मनोज कुमार जैसे कलाकारों पर भी बैन लगाया गया और नसबंदी अभियानचलाकर जनता के बीच डर फैलाया गया था। उन्होंने कहा कि यह काला अध्याय हमें बार-बार याद करना चाहिए ताकि यह फिर कभी दोहराया नजाए। मोदी सरकार ने महिलाओं को दिया वास्तविक सशक्तिकरणमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देना एकऐतिहासिक फैसला है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, “जहां एक ओर आपातकाल केवल सत्ता बचाने की कोशिशथी, वहीं आज नरेंद्र मोदी जी एक संरक्षक की तरह देश का नेतृत्व कर रहे हैं जो राजनीति के साथ-साथ जनता के स्वास्थ्य और भूख की भी चिंता करतेहैं।” कांग्रेस ने संविधान और लोकतंत्र का किया दुरुपयोगभाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने आपातकाल को लोकतंत्र के लिए घातक बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने जब चाहा, संविधान में मनमर्जी से बदलावकिए और जो लोग देशहित में आवाज उठाते थे उन्हें जेल में डाल दिया गया ताकि सरकार की नाकामी के खिलाफ कोई विरोध न हो सके। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की रात जब देश गरीबी, बेरोजगारी और असंतोष से जूझ रहा था, तब केवल सत्ता में बने रहने की लालसा में इंदिरागांधी ने रेडियो पर आपातकाल की घोषणा कर दी। यह निर्णय लोकतंत्र को कुचलने, संविधान को नजरअंदाज करने और नागरिक अधिकारों कोसमाप्त करने वाला था। बांसुरी स्वराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू किए गए 33 फीसदी आरक्षण की चर्चा करते हुए कहा, “यह आखिरी लोकसभा है जिसमें महिलाओंकी भागीदारी कम है। अगली लोकसभा में महिलाएं संख्या और प्रभाव दोनों में पुरुषों को टक्कर देंगी।” महिलाओं की सक्रिय भागीदारीकार्यक्रम में प्रियल भारद्वाज, सरिता तोमर और वैशाली पोद्दार सहित सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। महिला मोर्चा अध्यक्ष ऋचा पांडेय मिश्रा नेउद्घाटन भाषण में कहा कि आपातकाल लोकतंत्र और संविधान की हत्या का दिन था, जिसे “काला दिवस” के रूप में याद किया जाना चाहिए। उन्होंनेकहा, “जिस कांग्रेस ने कभी संविधान और लोकतंत्र का गला घोंटा, आज वही संविधान बचाने की बातें कर रही है, यह विडंबना है।”
सांसद संजय सिंह ने एसएमए से पीड़ित बच्चे के इलाज के लिए दी आर्थिक सहायता, देशवासियों से की मदद की अपील

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) टाइप-1 से जूझ रहे आठमहीने के बच्चे की मदद के लिए 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह राशि वह अपनी सैलरी से देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, सभी जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम जनता से भी इस मासूम की जिंदगी बचाने के लिए यथासंभव सहयोग की अपीलकी है। 14.50 करोड़ रुपये की जरूरत, परिवार असहायसंजय सिंह ने बताया कि हरियाणा पुलिस में कार्यरत जवान राजेश कुमार के बेटे युवांश को बचाने के लिए 14.50 करोड़ रुपये की लागत वाला एकजीवन रक्षक इंजेक्शन लगना जरूरी है। इतनी बड़ी रकम इकट्ठा कर पाना आम परिवार के लिए संभव नहीं है। युवांश के माता-पिता अपनी संपत्ति औरजेवर बेचने के बाद भी इस राशि तक नहीं पहुंच सकते। देशवासियों से भावुक अपीलसंजय सिंह ने कहा, “मैं देशवासियों से हाथ जोड़कर अनुरोध करता हूं कि इस बच्चे की जान बचाने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करें। यहइंजेक्शन उसकी जिंदगी है, और हम सब मिलकर उसे नया जीवन दे सकते हैं।” उन्होंने कहा कि 144 करोड़ की आबादी वाले देश में एक बच्चे की जान बचाने के लिए ज़रूरी धनराशि जुटाना असंभव नहीं है, बशर्ते हम सब मिलकरइसके लिए आगे आएं। हरियाणा पुलिस की सराहना, अन्य राज्यों से भी सहयोग की अपीलसांसद संजय सिंह ने हरियाणा के डीजीपी को धन्यवाद देते हुए बताया कि उन्होंने हर पुलिसकर्मी से एक दिन की सैलरी दान करने की अपील की है।उन्होंने अन्य राज्यों की पुलिस और सुरक्षाबलों से भी इस प्रयास में भागीदार बनने का अनुरोध किया। साथ ही, उन्होंने सभी सामाजिक व धार्मिक संगठनों, नेताओं और मीडिया से भी इस अभियान को समर्थन देने की अपील की, ताकि जरूरतमंद तकज्यादा से ज्यादा मदद पहुंच सके। इलाज में देरी जानलेवा हो सकती हैडॉक्टरों की मानें तो अगर जल्द ही इंजेक्शन नहीं लगाया गया, तो युवांश की जिंदगी ढाई साल से अधिक नहीं बच पाएगी। इसलिए समय की बहुतअहम भूमिका है। संजय सिंह ने कहा कि उनकी 30 जून को आने वाली सैलरी से वे 51 हजार रुपये का योगदान देंगे और साथ ही इंपैक्ट गुरुप्लेटफॉर्म के जरिए धन जुटाने की अपील दोहराई। पीड़ित परिवार की भावुक अपीलबच्चे के पिता राजेश कुमार ने कहा, “मैं सभी देशवासियों से अनुरोध करता हूं कि जितना भी संभव हो, मेरे बेटे की जिंदगी बचाने के लिए मदद करें।हम केवल आपके सहयोग से ही इसे नया जीवन दे सकते हैं।”बच्चे की मां ने भी भावुक होकर अपील की, “मेरे बेटे की जिंदगी दांव पर है, कृपया आगे बढ़कर मदद करें।” सहयोग कैसे करें?यह फंड इकट्ठा करने की प्रक्रिया “इंपैक्ट गुरु” के माध्यम से चल रही है। इच्छुक लोग क्यूआर कोड स्कैन कर या बैंक विवरण के ज़रिए सहायता राशिभेज सकते हैं।
महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर सियासी घमासान, हिंदी थोपे जाने के खिलाफ ठाकरे ब्रदर्स मैदान में, त्रिभाषा फार्मूले से शुरू हुआ विवाद

महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठी और अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य करने के फैसले ने राज्य कीराजनीति को गर्मा दिया है। इस आदेश के खिलाफ कई राजनीतिक दलों ने विरोध का मोर्चा खोल दिया है, जिससे भाषा को लेकर संवेदनशीलता एकबार फिर सतह पर आ गई है। राज ठाकरे का विरोध, जनांदोलन की चेतावनीमहाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे इस नीति के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। शिक्षा मंत्री दादा भुसे के साथ मुलाकात केबावजूद असंतुष्ट रहे राज ठाकरे ने इस आदेश के विरोध में 5 जुलाई को गिरगांव चौपाटी से बिना किसी राजनीतिक बैनर के मार्च निकालने का एलानकिया है। उन्होंने कहा कि वे देखना चाहते हैं कि कौन इस आंदोलन में शामिल होता है और जो नहीं होंगे, उन्हें भी याद रखा जाएगा। उद्धव ठाकरे ने दिया राज ठाकरे को समर्थनशिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी हिंदी अनिवार्यता के विरोध में राज ठाकरे का समर्थन कर दिया है। उन्होंने इसे “भाषाई आपातकाल” करारदेते हुए सभी मराठीभाषियों से एकजुट होने की अपील की है। उद्धव का मानना है कि कोई भी ताकत महाराष्ट्र में जबरन हिंदी नहीं थोप सकती। राज-उद्धव की सियासत को मिला मुद्दाविशेषज्ञों के मुताबिक, यह मुद्दा दोनों ठाकरे नेताओं के लिए राजनीतिक पुनर्स्थापना का जरिया बन सकता है। राज ठाकरे, जिनकी राजनीति की नींवमराठी अस्मिता पर टिकी रही है, हाल के चुनावों में अप्रभावी रहे हैं। अब उन्हें यह मुद्दा अपनी पार्टी को दोबारा उभारने का अवसर नजर आ रहा है।वहीं, उद्धव ठाकरे के लिए भी यह विषय मराठी मतों को फिर से संगठित करने का एक मौका है, खासकर तब जब विधानसभा चुनावों में उनका प्रदर्शनलोकसभा चुनावों जैसा नहीं रहा। शरद पवार ने दिया समाधान का सुझावराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने मामले में संतुलन साधने की कोशिश की है। उन्होंने सरकार से अपील की कि हिंदी कोअनिवार्य करने की जिद छोड़ देनी चाहिए और मातृभाषा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा नई भाषा सीखने के चक्कर मेंअपनी मातृभाषा से दूर हो जाए, तो यह सही नहीं होगा। सरकार ने किया आदेश में संशोधन, सियासत जारीविपक्ष के तीखे विरोध के बाद सरकार ने हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा की बजाय वैकल्पिक बनाने का फैसला लिया है। हालांकि, राजनीतिकसरगर्मी अभी थमी नहीं है और यह विवाद आगामी चुनावों में भी अहम मुद्दा बन सकता है।
आज़म ख़ान की पत्नी तंजीन फातिमा का समाजवादी पार्टी से मोहभंग, अखिलेश यादव पर साधा निशाना-जेल से बाहर निकलते ही तंजीन कातीखा बयान

सीतापुर जेल में बंद अपने पति आज़म ख़ान से मुलाक़ात के बाद पूर्व राज्यसभा सांसद तंजीन फातिमा ने समाजवादी पार्टी पर नाराज़गी ज़ाहिर की।उन्होंने कहा कि अब उन्हें पार्टी से कोई उम्मीद नहीं है और वे केवल अल्लाह से उम्मीद रखती हैं। तंजीन, आज़म ख़ान के लिए उनकी पसंद केआम लेकर जेल पहुंची थीं। अखिलेश यादव ने दी प्रतिक्रियातंजीन फातिमा के बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि उनके पास तीन ही रास्ते हैं सरकार बदलना, अदालत से इंसाफ पाना और ऊपर वाले पर भरोसा रखना। उन्होंने कहा कि यूपी की बीजेपी सरकार आज़म ख़ान पर अन्याय कर रही है और जब तकसरकार नहीं बदलेगी, राहत मिलना मुश्किल है। पार्टी से अलगाव का आरोप, कांग्रेस नेता को मिला मौकाआज़म ख़ान के समर्थकों का लंबे समय से आरोप रहा है कि समाजवादी पार्टी ने उन्हें अकेला छोड़ दिया है। वहीं, कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने इस मुद्देपर निशाना साधा और कहा कि समाजवादी पार्टी में मुस्लिमों को केवल “दरी बिछाने” तक ही सीमित कर दिया गया है। मसूद ने इस परिस्थिति को”आपदा में अवसर” की तरह देखा। एसटी हसन ने किया तंजीन के आरोपों का खंडनसमाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एस.टी. हसन ने तंजीन फातिमा के आरोपों को नकारते हुए कहा कि पार्टी ने आज़म ख़ान की हर मांगऔर जिद को पूरा किया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तंजीन के बयानों में तथ्य नहीं हैं और पार्टी ने कभी आज़म को नजरअंदाज नहीं किया। लंबे समय से जेल में हैं आज़म खानआजम खान पर कई आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई। उनकी पत्नी तंजीनऔर बेटों पर भी केस चल रहे हैं। यह मामला अब केवल कानूनी ही नहीं, राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है।
तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर ब्रिटिश स्टील्थ फाइटर जेट F-35B खड़ा, 14 दिनों से उड़ान भरने में असमर्थ, हाई-टेक फाइटर जेट की तकनीकी खराबी बनी चुनौती

ब्रिटिश नेवी का अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट F-35B लाइटनिंग II 14 जून से तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़ा है। करीब साढ़े 9 अरब रुपये की लागत वाले इस विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम की समस्या के चलते उड़ान संभव नहीं हो पाई है। ब्रिटेन से पहुंचे तकनीकी विशेषज्ञ अबतक खराबी को ठीक नहीं कर सके हैं। खराब मौसम में आपात लैंडिंग, विमानवाहक पोत पर वापसी संभव नहींजानकारी के मुताबिक, यह लड़ाकू विमान प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है और कम ईंधन की वजह से इसे आपातकालीन स्थिति मेंतिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर उतरना पड़ा था। खराब मौसम के कारण यह विमान अपने मूल एयरक्राफ्ट कैरियर, जो केरल के तट से करीब 100 समुद्रीमील की दूरी पर था, पर वापस नहीं लौट सका। वायुसेना ने दी थी तत्काल सहायताभारतीय वायुसेना ने विमान की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की, साथ ही ईंधन और लॉजिस्टिक सहायता भी प्रदान की। लेकिन तकनीकी खराबी केचलते विमान को ग्राउंडेड ही रखा गया। इस बीच एयरपोर्ट पर CISF की सुरक्षा टीम 24 घंटे निगरानी में लगी हुई है, ताकि विमान की सुरक्षासुनिश्चित हो सके। ब्रिटेन से मरम्मत टीम और टो वाहन भेजे गएविमान को उड़ाने के लिए किए गए प्रयास विफल रहने के बाद, ब्रिटेन ने विशेष टो वाहन और इंजीनियरों की 40 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भारत भेजीहै। यह टीम एयर इंडिया के MRO (Maintenance, Repair, Overhaul) हैंगर में विमान की मरम्मत करेगी। बताया गया है कि टीम पहले हीतिरुवनंतपुरम के लिए रवाना हो चुकी है। हैंगर में मरम्मत को लेकर थी झिझकविमान को हैंगर में ले जाने पर शुरुआत में पायलटों ने अनिच्छा जाहिर की थी। सूत्रों का मानना है कि ब्रिटिश अधिकारियों को यह आशंका थी किहैंगर में विमान की संवेदनशील तकनीकी जानकारी भारतीय तकनीशियनों की पहुंच में आ सकती है। हालांकि, अब मरम्मत प्रक्रिया के लिए विमान कोहैंगर में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी गई है। ब्रिटिश उच्चायोग का बयानभारत में ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने बताया कि F-35B को जल्द से जल्द पुनः उड़ान के लिए तैयार करने का प्रयास जारी है। उन्होंने भारतीयएजेंसियों के सहयोग के लिए आभार जताया, जिन्होंने आपात स्थिति में विमान को उतरने और सुरक्षित रखने में मदद की।
कोलकाता लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप: तीन आरोपी गिरफ्तार, सियासत गरमाई, कॉलेज परिसर में दरिंदगी, तीन आरोपियों की पहचान

दक्षिण कोलकाता के कसबा इलाके में स्थित साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में एक छात्रा से गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, यह शर्मनाक घटना 25 जून की शाम 7:30 बजे से रात 10:50 बजे के बीच कॉलेज परिसर में हुई। पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करली गई है और पुलिस जांच में जुटी है। इस मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक पूर्व छात्र और दो वर्तमान छात्र शामिल हैं। एक पूर्व यूनिट अध्यक्ष भी शामिलगिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 31 वर्षीय मोनोजित मिश्रा (पूर्व छात्र और पूर्व यूनिट अध्यक्ष), 19 वर्षीय जैब अहमद और 20 वर्षीय प्रमितमुखर्जी उर्फ प्रमित मुखोपाध्याय के रूप में हुई है। पुलिस ने मिश्रा और अहमद को 26 जून को तालबागान क्रॉसिंग के पास से पकड़ा, जबकि प्रमितको 27 जून की सुबह उसके आवास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीनों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं। अदालत ने उन्हें पांच दिन कीपुलिस हिरासत में भेजा है। कॉलेज की इमारत बनी अपराध स्थलपुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह वारदात कॉलेज की इमारत के भीतर ही अंजाम दी गई। पीड़िता का प्रारंभिक मेडिकल परीक्षण हो चुका है और कईगवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। घटनास्थल को सील कर दिया गया है और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गयागिरफ्तार आरोपियों को 27 जून को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने 14 दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने फिलहालउन्हें मंगलवार तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया है। विपक्ष का ममता सरकार पर हमलाइस वारदात के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुएकहा कि रथ यात्रा के चलते कोलकाता पुलिस का बड़ा हिस्सा दीघा भेज दिया गया था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। उन्होंने ममता बनर्जी सेइस्तीफे की मांग की और कहा कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। भाजपा का गंभीर आरोप: TMC कनेक्शन की आशंकाबीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने घटना को “दिल दहला देने वाला” बताया और आरोप लगाया कि इसमें तृणमूल कांग्रेस से जुड़ाव्यक्ति भी शामिल हो सकता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल को महिलाओं के लिए “डरावना राज्य” करार दिया और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालउठाए। मेयर फिरहाद हकीम की प्रतिक्रियाकोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने घटना को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी पूरी जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पुलिस रिपोर्ट आनेके बाद वे इस पर बयान देंगे।
अहमदाबाद रथ यात्रा में हाथियों का बेकाबू होना बना अफरातफरी का कारण, कई लोग घायल, भीड़ और तेज आवाज से हाथी बेकाबू

अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान खड़िया गोलावद इलाके में अफरातफरी मच गई जब भारी भीड़ और डीजे की तेज आवाज सेतीन हाथी बेकाबू हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक नर हाथी अचानक उग्र हो गया और दौड़ने लगा, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में भगदड़जैसी स्थिति बन गई। घायल हुए कई लोगघटना में दो से तीन लोगों को चोटें आईं, जिनमें एक युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अन्य घायलों को प्राथमिक उपचारदिया गया। बताया गया कि हाथियों के अचानक बेकाबू होने से वे रेलिंग तोड़ते हुए दौड़ पड़े और कुछ श्रद्धालु उनकी चपेट में आ गए। वीडियो वायरल, प्रशासन सतर्कइस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें हाथियों को दौड़ते और भीड़ को तितर-बितर होते देखा जासकता है। घटना के बाद चिड़ियाघर की टीम और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और हाथियों को इंजेक्शन देकर शांत किया गया। यात्रा कुछ देर रोकी गई, फिर शुरू हुईहाथियों को काबू में लाने के बाद रथ यात्रा को कुछ देर रोक दिया गया था। स्थिति सामान्य होने के बाद यात्रा को फिर से शुरू किया गया। कांकड़ियाचिड़ियाघर के निदेशक ने बताया कि तेज आवाज के कारण हाथी डर गए थे और उन्होंने पीछे की ओर दौड़ लगाई थी। अब तक की पहली बड़ी घटनाअधिकारियों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में रथ यात्रा के दौरान ऐसा कोई हादसा सामने नहीं आया था। इस अप्रत्याशित घटना के बाद पुलिस औरआयोजन समिति द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि यात्रा के दौरान तेज सीटी या साउंड का प्रयोग नकिया जाए, जिससे हाथी उत्तेजित न हों। सरकार की प्रतिक्रियाघटना पर गुजरात के मुख्यमंत्री और गृह राज्य मंत्री ने संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और पूरे कार्यक्रम पर निगरानी रखनेके निर्देश दिए हैं। इस घटना के बाद रथ यात्रा की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।
कृत्रिम वर्षा पर आम आदमी पार्टी का बीजेपी पर हमला, सौरभ भारद्वाज बोले, अब केजरीवाल के विजन की कर रहे नकल

आम आदमी पार्टी ने कृत्रिम वर्षा परियोजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज नेकहा कि बीजेपी अब अरविंद केजरीवाल के विजन की नकल कर रही है, जबकि पहले उसी योजना का मजाक उड़ाया करती थी। उन्होंने आरोपलगाया कि जब आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में वैज्ञानिक तरीके से सर्दियों के प्रदूषण को कम करने के लिए कृत्रिम वर्षा कराना चाहती थी, तब केंद्र सरकार ने कोई अनुमति नहीं दी और बीजेपी ने इसे “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” कहकर मजाक बना दिया। लेकिन अब जब दिल्ली और केंद्रदोनों जगह बीजेपी की सरकार है, तो तुरंत सभी मंजूरी दे दी गई है। भारद्वाज ने कहा कि 19 जून को जब दिल्ली में बादल छाए हुए थे और मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई थी, उसी समय मुख्यमंत्री रेखागुप्ता ने कृत्रिम वर्षा कराने की घोषणा कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बारिश वैसे ही होने वाली थी, तब कृत्रिम वर्षा की क्या आवश्यकताथी? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार सिर्फ झूठी वाहवाही लूटना चाहती थी। अब जब न बादल हैं और न बारिश के आसार, तो बीजेपीकृत्रिम वर्षा को भी टाल रही है। उन्होंने कहा कि यह सब दिल्ली की जनता के साथ मजाक है और बीजेपी ने दिल्ली सरकार को फुलेरा की पंचायतबना दिया है, जो जब चाहे कुछ भी कहती और करती है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कृत्रिम वर्षा का सही समय अक्टूबर से जनवरी के बीच होता है, जब दिल्ली में प्रदूषण चरम पर होता है। वैज्ञानिक भी मानतेहैं कि जून-जुलाई की आर्द्रता और वातावरण कृत्रिम वर्षा के लिए उपयुक्त नहीं होते। उन्होंने पूछा कि जब परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं तो इतनीजल्दी कृत्रिम वर्षा की घोषणा क्यों की गई? क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है? उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब आम आदमी पार्टी ने सात साल पहले कृत्रिम वर्षा की योजना बनाई थी, तब बीजेपी ने उसे भ्रष्टाचार और पैसे कीबर्बादी बताकर विरोध किया था। लेकिन अब वही पार्टी उसी योजना को लागू कर रही है। भारद्वाज ने पूछा कि अगर उस समय यह योजना गलत थी, तो अब बीजेपी खुद इसे क्यों अपना रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का यह रवैया दोहरापन दर्शाता है और जनता को गुमराह करने काप्रयास है। प्रेस वार्ता के अंत में सौरभ भारद्वाज ने दो सीधे सवाल रखे—पहला, जब वैज्ञानिक मानते हैं कि अक्टूबर-जनवरी के बीच ही कृत्रिम वर्षा का परीक्षणकारगर हो सकता है, तो जून-जुलाई में इसे करने की जल्दबाज़ी क्यों है? और दूसरा, जब आप सरकार ने पहले यह प्रयास किया था, तो बीजेपी नेउसका विरोध क्यों किया था? उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली की जनता के हित में पारदर्शिता चाहती है और बीजेपी से इन सवालों केजवाब मांगती है।