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उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल, 8 IAS और 15 PCS अधिकारियों का हुआ तबादला

उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार द्वारा 8 आईएएस और 15 पीसीएस अधिकारियोंके तबादले किए गए हैं। स्थानांतरण सूची में शामिल पीसीएस अधिकारियों में कई उपजिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और अन्यप्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं। दीप्ति देव यादव को प्रधान प्रबंधक, सहकारी चीनी मिल संघ लखनऊ से स्थानांतरित कर अपर आयुक्त, लखनऊमंडल बनाया गया है। वहीं, राज बहादुर को ललितपुर से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), लखनऊ नियुक्त किया गया है। जय प्रकाशको भी प्रधान प्रबंधक पद से हटाकर गोरखपुर मंडल का अपर आयुक्त बनाया गया है, जबकि अजय कुमार को भी इसी पद पर गोरखपुर भेजा गया है।सहदेव कुमार मिश्र, जो पहले सोनभद्र में ADM थे, अब गोरखपुर के ADM (प्रशासन) होंगे। दशरथ कुमार को प्रयागराज से स्थानांतरित कर उपसंचालक चकबंदी, गोरखपुर बनाया गया है। अन्य महत्वपूर्ण तबादलों में गजेंद्र कुमार को नगर मजिस्ट्रेट, सहारनपुर से स्थानांतरित कर मुख्य राजस्व अधिकारी, अयोध्या नियुक्त किया गया है।कल्पना जायसवाल को बदायूं में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि वागीश कुमार शुक्ला अब सोनभद्र के अपरजिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) होंगे। भारत, जो गोंडा में उपजिलाधिकारी थे, अब अयोध्या नगर निगम में अपर नगर आयुक्त बनेंगे। इसके अलावाअंकित कुमार, रमेश कुमार, कुलदीप सिंह और मनी अरोरा को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से सहकारी चीनी मिल संघ, लखनऊऔर नगर मजिस्ट्रेट, सहारनपुर के पद शामिल हैं। आईएएस अधिकारियों के तबादलों में आलोक कुमार-3 को नियोजन एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के प्रमुख सचिव पद पर बनाए रखते हुएपुनर्गठन समन्वय, भाषा, राष्ट्रीय एकीकरण और सामान्य प्रशासन विभाग तथा हिंदी संस्थान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राकेशकुमार सिंह-2 को मुख्यमंत्री कार्यालय से स्थानांतरित कर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कासीईओ बनाया गया है। योगेश कुमार को गृह विभाग से हटाकर प्रभारी आयुक्त एवं निबंधक, सहकारी समितियां बनाया गया है। हीरा लाल को सहकारी समितियों के आयुक्त पद से हटाकर राष्ट्रीय एकीकरण विभाग का सचिव बनाया गया है। अनामिका सिंह को अब महिलाकल्याण एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अथॉरिटी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वन, पर्यावरण एवंजलवायु परिवर्तन विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। भवानी सिंह खंगारौत को प्रतीक्षारत सूची से निकालकर विशेष सचिव, राजस्व विभागबनाया गया है। वहीं, सान्या छाबड़ा को पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक पद से हटाकर हरदोई की मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है, और ईशाप्रिया को पर्यटन निगम का प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया

चिराग पासवान का RJD पर हमला, बिहार जंगलराज की वापसी नहीं चाहेगा, 1990 के दशक की यादें आज भी ताजा

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हाजीपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा किबिहार की जनता 1990 के दशक के “जंगलराज” को कभी नहीं भूलेगी और दोबारा उसे स्वीकार नहीं करेगी। पासवान ने उस दौर को बिहार के लिएप्रताड़ना का समय बताते हुए युवाओं से आग्रह किया कि वे इतिहास से सीखें और सही निर्णय लें।युवाओं को इतिहास से परिचित कराने की जरूरतपासवान ने कहा कि 2005 के बाद जन्म लेने वाले युवाओं को उस समय की स्थिति से अवगत कराना आवश्यक है, जब राज्य में कानून-व्यवस्थाचरमरा गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि RJD की सरकार ने बिहार को पलायन और अराजकता के रास्ते पर ढकेला। चिराग ने युवाओं, खासकरपहली बार मतदान करने वाले नागरिकों से उस समय की सच्चाई जानने की अपील की। मुख्यमंत्री पद की घोषणा पर किया कटाक्षचिराग पासवान ने RJD द्वारा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा को गठबंधन की आंतरिक राजनीति करार दिया और कहा कि अंततः यह बिहारकी जनता तय करेगी कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता RJD को सत्ता में वापसी का मौका नहीं देगी, क्योंकि वह फिर सेजंगलराज नहीं देखना चाहती। आपातकाल से की जंगलराज की तुलनापासवान ने आपातकाल की ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि जैसे देश को इमरजेंसी की सच्चाई बताना जरूरी है, उसी तरह बिहार केउस अंधेरे दौर को भी युवाओं तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जंगलराज की सच्चाई को जानकर ही नई पीढ़ी सही निर्णय ले सकेगी। वोटर लिस्ट पर उठाए सवालों को बताया बेबुनियादवोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया पर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए पासवान ने कहा कि यह एक नियमित और पारदर्शीप्रक्रिया है। उन्होंने विपक्ष पर संस्थाओं में अविश्वास फैलाने और हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। महागठबंधन की संभावित हार की ओर इशारामहागठबंधन को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष पहले ही हार के बहाने तलाश रहा है। उन्होंने कहा, “अगर विपक्ष सामान्य प्रक्रियाओं पर भीसवाल उठाता है, तो यह साफ है कि वह हार मान चुका है।” पासवान ने विश्वास जताया कि बिहार की जनता फिर से RJD को सत्ता में आने का मौकानहीं देगी।

CJI बी.आर. गवई का बयान, अनुच्छेद 370 डॉ. अंबेडकर की सोच के विरुद्ध, नागपुर में संविधान प्रस्तावना पार्क के उद्घाटन पर बोले सीजेआई

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने शनिवार, 29 जून 2025 को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में अनुच्छेद 370 को लेकर बड़ाबयान दिया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370, डॉ. भीमराव अंबेडकर की एक संविधान और एक राष्ट्र की सोच के विपरीत था। उनका यह वक्तव्य उससमय आया जब वे संविधान प्रस्तावना पार्क के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। अंबेडकर का दृष्टिकोण, एक राष्ट्र, एक संविधानसीजेआई गवई ने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों को दोहराते हुए कहा कि बाबा साहेब कभी किसी एक राज्य के लिए अलग संविधान केपक्षधर नहीं थे। उनका मानना था कि भारत को एकजुट रखने के लिए सभी राज्यों पर समान कानून और संविधान लागू होना चाहिए। उन्होंने स्पष्टकिया कि विशेष दर्जा जैसे प्रावधान अंबेडकर की मूल सोच से मेल नहीं खाते। अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसलासीजेआई बी.आर. गवई उस पांच जजों की संविधान पीठ का हिस्सा थे, जिसने 11 दिसंबर 2023 को अनुच्छेद 370 को हटाने के केंद्र सरकार केफैसले को संवैधानिक रूप से सही करार दिया था। इस ऐतिहासिक निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनुच्छेद 370 केवल एक अस्थायी व्यवस्थाथी और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। फैसले में यह भी कहा गया था कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय पूरी तरह वैधहै, और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का कदम भी संवैधानिक रूप से उचित है। साथ ही कोर्ट ने 30 सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर मेंविधानसभा चुनाव कराने के निर्देश भी दिए थे। केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कदम5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके लगभगचार साल बाद, दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को वैध ठहराते हुए सरकार के रुख की पुष्टि की थी। अब, CJI गवई के ताजा बयान नेएक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है, और डॉ. अंबेडकर की सोच इसी एकता औरअखंडता की पुष्टि करती है।

‘मन की बात’ का 123वां एपिसोड: योग, लोकतंत्र, तीर्थयात्रा और सामाजिक सुरक्षा पर पीएम मोदी का संदेश, योग दिवस की भव्यता परप्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 123वें एपिसोड में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की चर्चा से शुरुआत की। उन्होंनेकहा कि 21 जून को दुनियाभर में करोड़ों लोगों ने योग में भाग लिया, और यह सिलसिला बीते दस वर्षों में हर बार अधिक भव्यता से आयोजित होताआ रहा है। इस वर्ष की थीम ‘One Earth, One Health’ को उन्होंने केवल एक नारा नहीं बल्कि एक वैश्विक मार्गदर्शन बताया, जो “वसुधैवकुटुंबकम” की भावना को दर्शाता है। योग की झलक देश-विदेश मेंपीएम मोदी ने हिमालय की चोटियों पर आईटीबीपी के जवानों से लेकर वडनगर में एक साथ 2121 लोगों द्वारा भुजंगासन, विशाखापत्तनम में तीनलाख लोगों का सामूहिक योग, और जम्मू-कश्मीर के चिनाब ब्रिज जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने आदिवासी छात्रों के 108 सूर्यनमस्कार, विशेष रूप से दिव्यांगजनों के सामूहिक योग शिविर और यमुना किनारे दिल्ली में योग-संकल्प को प्रेरणादायक बताया। तीर्थयात्रा का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्वप्रधानमंत्री ने धार्मिक यात्राओं के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्राएं केवल आध्यात्मिक नहीं होतीं, बल्कि सेवा और अनुशासन का भी प्रतीक हैं। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं की भागीदारी को “एकभारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना का प्रतिबिंब बताया। सावन, अमरनाथ और कैलाश मानसरोवर यात्रा का ज़िक्रपीएम मोदी ने आगामी सावन के महीने, 3 जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा, और कैलाश मानसरोवर यात्रा की भी चर्चा की। उन्होंने इन यात्राओंको श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बताया, जो न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ी हैं, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति की समृद्ध विरासत का हिस्सा भीहैं। भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में ऐतिहासिक वृद्धिप्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत की 64% आबादी अब किसी-न-किसी सामाजिक सुरक्षायोजना से लाभान्वित हो रही है। 2015 में यह संख्या केवल 25 करोड़ थी, जो आज बढ़कर 95 करोड़ तक पहुंच गई है। उन्होंने इसे दुनिया की सबसेबड़ी सामाजिक सुरक्षा कवरेज में से एक बताया। भारत बना ट्रेकोमा मुक्त देशपीएम मोदी ने बताया कि भारत अब ट्रेकोमा (Trachoma) बीमारी से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य कर्मियों, स्वच्छ भारत अभियान, और जल जीवन मिशन की सफलता का परिणाम बताया। WHO ने भी भारत की इस उपलब्धि की सराहना की, क्योंकि न केवल बीमारी का इलाजकिया गया बल्कि उसकी जड़ तक जाकर समाधान किया गया। आपातकाल की बरसी पर लोकतंत्र का स्मरणकार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने आपातकाल की 50वीं बरसी का ज़िक्र करते हुए कहा कि 1975 में लोकतंत्र की हत्या हुई थी। उन्होंने देशवासियोंको उस समय के अत्याचारों की याद दिलाई और लोकतंत्र की रक्षा में जनता की भूमिका को नमन किया।

झुग्गी तोड़ने के विरोध में ‘घर रोजगार बचाओ आंदोलन’, अरविंद केजरीवाल का बीजेपी पर तीखा हमला

रविवार को आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में झुग्गियों को गिराए जाने के विरोध में जंतर-मंतर पर ‘घर रोजगार बचाओ आंदोलन’ का आयोजन किया।इस मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जमकर निशाना साधा। बीजेपी आपकी जमीन पर नजर गड़ाए बैठी हैअरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने पहले ही लोगों को चेताया था कि बीजेपी को वोट न दें, क्योंकि वे झुग्गियों को निशाना बनाएंगे। उन्होंने दावाकिया कि बीजेपी का इरादा दिल्ली की सभी झुग्गियों को खत्म करने का है। उन्होंने कहा, “एक बड़े बीजेपी नेता ने मुझसे कहा कि हम दिल्ली कीसारी झुग्गियां हटाएंगे। इसका मतलब साफ है कि इनकी नजर गरीबों के घरों पर है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि 40 लाख झुग्गीवासियों कोएकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए। अगर झुग्गियां गिराना नहीं रुका, तो सरकार नहीं टिकेगीकेजरीवाल ने बीजेपी को चेताते हुए कहा कि यदि झुग्गियों को तोड़ना बंद नहीं किया गया तो यह आंदोलन यहीं से शुरू होगा और दिल्ली की सरकारतीन साल से अधिक नहीं चल पाएगी। उन्होंने जनता से आवास और रोज़गार की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने की अपील की। पांच महीने में दिल्ली का हाल बेहाल कर दियापूर्व मुख्यमंत्री ने दिल्ली की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार पर हमला करते हुए कहा, “पांच महीने में दिल्ली की हालत बदतर हो चुकी है। बिजलीसप्लाई चरमरा गई है, हर जगह कटौती हो रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में दिल्ली को 24 घंटे बिजली मिलती थी, लेकिन अबराजधानी में छह से सात घंटे के पावर कट आम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र, एमसीडी, एलजी और दिल्ली पुलिस सभी बीजेपी के अधीन हैं, फिर भी कोई सुधार नहीं हो रहा। “चार नहीं अब तो दस इंजनवाली सरकार हो गई है, लेकिन जनता के लिए कुछ नहीं किया जा रहा,” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा। फ्री बिजली भी छीन सकते हैंअरविंद केजरीवाल ने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में बीजेपी फ्री बिजली योजना को भी बंद कर सकती है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने को कहाऔर आरोप लगाया कि दिल्ली में आम लोगों की बुनियादी सुविधाएं छीनी जा रही हैं। कांग्रेस और बीजेपी की सोच एक जैसीकेजरीवाल ने कांग्रेस और बीजेपी को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया। उन्होंने कहा, “75 वर्षों में इन दोनों पार्टियों ने न तो स्कूलों की हालत सुधारीऔर न ही अस्पतालों की, बल्कि सिर्फ गरीबों का शोषण किया है।” उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस शासन में भी झुग्गियों को उजाड़ा गया था। मोदी जी की गारंटी महज एक जुमलाकेजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “मोदी जी ने वादा किया था ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’, लेकिन असल में उन्होंने‘जहां झुग्गी, वहां मैदान’ बना दिया।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की गारंटी झूठी और चुनावी छलावा है, जिस पर भरोसा नहीं किया जानाचाहिए।

झारखंड के लव कुश आवासीय विद्यालय में जलजमाव से मचा हड़कंप, 162 बच्चों का सफल रेस्क्यू

लगातार बारिश से विद्यालय परिसर जलमग्न, बच्चे फंसेझारखंड के जमशेदपुर जिले के कोवली थाना क्षेत्र स्थित लव कुश आवासीय विद्यालय में भारी बारिश के चलते अफरा-तफरी का माहौल बन गया।विद्यालय परिसर में पानी भर जाने से स्कूल के अंदर मौजूद 162 बच्चे फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस विभागसक्रिय हो गया। पुलिस और प्रशासन ने चलाया त्वरित बचाव अभियानस्थिति की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कोवली थाना प्रभारी धनंजय पासवान के नेतृत्व में एक विशेषबचाव दल गठित किया गया। टीम ने नाव, रस्सी और अन्य बचाव उपकरणों की मदद से जलमग्न क्षेत्र में फंसे बच्चों तक पहुंच बनाई और सभी कोसुरक्षित बाहर निकाला। डरे हुए बच्चों को दिया गया संबल और उपचाररेस्क्यू के दौरान बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। अधिकांश बच्चे भयभीत थे, लेकिन पुलिस और बचाव दल ने धैर्य और साहस के साथ उन्हेंसंभाला। कुछ बच्चों को प्राथमिक उपचार की आवश्यकता पड़ी, जिसके लिए मौके पर स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई थी। सभी बच्चों की जांचकर तुरंत उपचार किया गया। विद्यालय को अस्थायी रूप से बंद किया गयाकोवली थाना प्रभारी ने बताया कि लगातार बारिश के कारण एक मंजिला इमारत वाला यह स्कूल पूरी तरह जलमग्न हो गया है। इस स्थिति को देखतेहुए विद्यालय को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। स्थानीय छात्रों को उनके घर भेज दिया गया है और शेष छात्रों को सुरक्षित उनके जिलों मेंभेजने की व्यवस्था की जा रही है। स्कूल की स्थिति पर प्रशासन गंभीर, जांच के आदेशपोटका क्षेत्र के वरीय प्रभारी अधिकारी (LRDC) गौतम कुमार ने बताया कि लव कुश आवासीय विद्यालय एक निजी संस्थान के रूप में कार्य कर रहाहै और इसका हॉस्टल नदी के किनारे स्थित है, जो भौगोलिक दृष्टि से असुरक्षित माना जा रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से स्कूल में पानी घुस गया था, जिससे बच्चे फंस गए थे। फिलहाल स्कूल को बंद करने का आदेश दे दिया गया है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

पुरी रथयात्रा में मची भगदड़, तीन श्रद्धालुओं की मौत, 50 से अधिक घायल, आस्था का महापर्व हादसे में तब्दील

सदियों पुरानी परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा इस बार एक दर्दनाक हादसे की वजह से सुर्खियों में है।रविवार तड़के करीब 4 बजे, गुंडिचा मंदिर के सामने भगदड़ मचने से तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग घायल हो गए। छहघायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा उस समय हुआ जब भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ मंदिर परिसर में प्रवेश कर चुका था और भारीसंख्या में श्रद्धालु रथ के दर्शन के लिए एक साथ आगे बढ़ने लगे। कैसे हुआ हादसा, मिनट-दर-मिनट घटनाक्रमरविवार सुबह करीब 4 बजे जब भगवान जगन्नाथ का रथ गुंडिचा मंदिर के निकट पहुंचा, पहले से मौजूद भारी भीड़ अचानक तेजी से रथ की ओर भागनेलगी। इससे मौके पर अराजकता फैल गई और कई श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिरने लगे। भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग न होनेके कारण हालात बिगड़ते चले गए। मृतकों की पहचान बसंती साहू (36), प्रेमकांति महांति (78) और प्रभाती दास केरूप में हुई है। अस्पतालों में अफरा-तफरी, परिजनों का रो-रोकर बुरा हालघायलों को तात्कालिक रूप से पुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां छह लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। अस्पताल के बाहरपरिजन अपने प्रियजनों के लिए व्याकुल दिखे और कई ने लापरवाही के खिलाफ प्रशासन को कोसा। भीड़ प्रबंधन में पुरानी लापरवाहियां दोहराईं गईंपुरी रथयात्रा के दौरान भीड़ नियंत्रण की कमी कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं। पिछले वर्ष 2024 में 7 जुलाईको भी भगदड़ में दो लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों घायल हुए थे। वहीं 2008 में सिंहद्वार के सामने भगदड़ में छह श्रद्धालुओं की जान चली गईथी। पूर्व चेतावनी के बावजूद नहीं लिया सबकइस वर्ष भी पहले ही संकेत मिलने लगे थे कि भीड़ नियंत्रण की स्थिति नाजुक हो सकती है। शुक्रवार, 27 जून को देवी सुभद्रा के रथ के पासअत्यधिक भीड़ के चलते 625 से अधिक श्रद्धालु अस्वस्थ हो गए थे, जिनमें से 70 को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और 9 की हालत गंभीर थी।शनिवार को भी एक श्रद्धालु की हालत बिगड़ने पर रेस्क्यू टीम को उसे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। रथयात्रा का कार्यक्रम और भीड़ का दबाव पुरी की रथयात्रा में तीनों देवताओं—बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ—के रथों को गुंडिचा मंदिर तक लाया जाता है, जहां वे नौ दिनों तक ठहरते हैं। 27 जून को रथयात्रा की शुरुआत हुई थी और रविवार तड़के जब भगवान जगन्नाथ का अंतिम रथ मंदिर पहुंचा, तो दर्शन की होड़ में हादसा हो गया। प्रशासन पर उठे सवाल, श्रद्धालुओं में आक्रोशप्रत्यक्षदर्शियों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए थे। न ही भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस बलमौजूद था और न ही रथों के आसपास उचित बैरिकेडिंग की व्यवस्था थी। एक चश्मदीद ने बताया, “हम सुबह 3 बजे से लाइन में थे, लेकिन जबभगवान का रथ निकट आया, सभी बेकाबू हो गए और कोई नियंत्रण में नहीं था।” सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाईफिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक मुआवजे या जांच समिति की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नवीनपटनायक स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी भीड़प्रबंधन नीति लागू करने की मांग की है।

कोलकाता गैंगरेप केस पर सियासी घमासान: TMC नेताओं के बीच टकराव, महुआ मोइत्रा पर कल्याण बनर्जी का निजी हमला, कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप केस ने ली राजनीतिक मोड़

पश्चिम बंगाल के कोलकाता लॉ कॉलेज में एक छात्रा के साथ हुए गैंगरेप की घटना ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर अपराध पर जहांतृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने हैं, वहीं अब TMC के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। कल्याण बनर्जी के बयान ने पार्टी में मचाई हलचलTMC सांसद कल्याण बनर्जी ने अपनी ही पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा पर इशारों में निजी टिप्पणी करते हुए राजनीतिक गलियारों में खलबली मचादी है। हालांकि उन्होंने नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को सीधे महुआ मोइत्रा से जोड़ा जा रहा है। कल्याण बनर्जी ने कहा कि ‘‘हनीमून सेलौटकर आईं और मुझसे झगड़ने लगीं। वह मुझे महिला विरोधी मानती हैं, लेकिन खुद क्या हैं, पहले वह ये देखें।’’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया किमहुआ ने 40 साल की शादी तोड़ कर 65 वर्षीय व्यक्ति से विवाह किया और सवाल उठाया कि क्या यह किसी महिला को चोट पहुँचाना नहीं है।उनके इस बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है। महुआ मोइत्रा ने पिनाकी मिश्रा से की शादीबता दें कि महुआ मोइत्रा ने हाल ही में वरिष्ठ वकील और पूर्व बीजेडी सांसद पिनाकी मिश्रा से जर्मनी में विवाह किया है। वह वर्तमान में लोकसभा मेंकृष्णानगर सीट से सांसद हैं। कल्याण बनर्जी के इस बयान को उनकी निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल और महिला विरोधी सोच के रूप में देखा जारहा है। महुआ मोइत्रा का पलटवारइस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने गैंगरेप केस में राज्य सरकार की त्वरित कार्रवाई का ज़िक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट मेंलिखा कि कोलकाता पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया और चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गयाहै। महुआ ने कहा कि TMC और राज्य सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है और बलात्कार वPOCSO जैसे मामलों में सबसे तेज़ कार्रवाई करती है। बीजेपी पर गंभीर आरोपमहुआ मोइत्रा ने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भगवा पार्टी बलात्कारियों और हत्यारों को माला पहनाकर महिमामंडित करती है और उन्हेंपुरस्कार देती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर बोलने से पहले अपने आचरण की समीक्षा करनी चाहिए।

दिल्ली भाजपा ने 6500 बूथों पर सुना ‘मन की बात’, नेताओं ने किया पौधारोपण और आपातकाल पर जताई चिंता

दिल्ली भाजपा ने राजधानी के करीब 6500 बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का सामूहिक श्रवण आयोजितकिया। इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय और प्रदेश नेताओं ने विभिन्न स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के साथ भागीदारी की।भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मालवीय नगर विधानसभा में विधायक सतीश उपाध्यायके साथ ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुना। इसके उपरांत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत 1.5 लाख पौधे लगाने की पहल की शुरुआत एकपौधा लगाकर की गई, जिसमें राकेश सिन्हा और जिला अध्यक्ष रविन्द्र चौधरी भी मौजूद रहे। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कृष्णा नगर में संगठन महामंत्री पवन राणा और विधायक अनिल गोयल के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। राष्ट्रीयमहामंत्री दुष्यंत गौतम चिराग दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, जबकि राष्ट्रीय संगठन मंत्री वी. सतीश ने पटेल नगर में सत्संग कार्यक्रम मेंमौजूद श्रद्धालुओं के साथ ‘मन की बात’ सुनी। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश ने दिल्ली गेट स्थित जाटव शिव मंदिर में भाजपा नेता अमित गुप्ताव अन्य कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम देखा। सांसद मनोज तिवारी ने बुराड़ी में जिला अध्यक्ष यू.के. चौधरी के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और यमुनातट पर आयोजित योग कार्यक्रम के उल्लेख को उत्तर पूर्वी दिल्ली के लिए गौरवपूर्ण बताया। सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने विंडसर प्लेस पर और सांसदकमलजीत सहरावत ने मटियाला विधानसभा में कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम को सुना। ‘मन की बात’ सुनने के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए बैजयंत जय पांडा ने कहा कि हर महीने के अंतिम रविवार को यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री सेसंवाद और प्रेरणा का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने भारत के ट्रेकोमा मुक्त घोषित होने पर खुशी व्यक्त की और इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों कोबधाई दी। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को दिल्ली और देश की स्वच्छता एवं पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम बताया। वीरेंद्र सचदेवा नेकहा कि ‘मन की बात’ अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-जन का कार्यक्रम बन गया है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक घटनाओं को लोगों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के एपिसोड में मेघालय के ईरी सिल्क जैसे पारंपरिक धरोहर काउल्लेख करना उस संस्कृति को सम्मान देने जैसा है। इसके साथ ही कार्यक्रम में 1975 के आपातकाल की चर्चा भी हुई। नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ संविधान का हनन नहीं था, बल्कि उस दौर कीसरकार न्यायपालिका को भी अपने अधीन करने का प्रयास कर रही थी। आपातकाल के दौरान नागरिकों के अधिकारों का दमन हुआ और लाखों लोगोंको प्रताड़ित किया गया। यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

AI171 हादसे के बाद पार्टी वीडियो पर विवाद, AISATS ने चार वरिष्ठ अधिकारियों को नौकरी से निकाला,वायरल वीडियो पर मचा बवाल, हादसे के बाद जश्न पर उठे सवाल

एयर इंडिया सैट्स (AISATS) ने गुरुग्राम में हुई एक पार्टी के वीडियो के वायरल होने के बाद चार वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। यहवीडियो उस समय सामने आया जब देश एयर इंडिया फ्लाइट AI171 की दुखद दुर्घटना से उबरने की कोशिश कर रहा था। 12 जून 2025 को हुएइस हादसे में 259 लोगों की जान चली गई थी, जिससे देशभर में शोक का माहौल था। वीडियो में अधिकारी डांस करते हुए दिखे, लोगों में गुस्साइस वायरल वीडियो में AISATS के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर अब्राहम जकारिया सहित कई कर्मचारी तेज संगीत पर नाचते नजर आ रहे हैं। वीडियोसामने आने के बाद लोगों ने इसे बेहद असंवेदनशील करार दिया। जब देश एक बड़े हवाई हादसे के गम में डूबा था, तब इस तरह का उत्सव मनायाजाना जनता को बेहद आपत्तिजनक लगा। AI171 फ्लाइट, जो बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर थी, लंदन जा रही थी। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद वह अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेजके पास एक हॉस्टल से टकरा गई। विमान में कुल 260 लोग सवार थे, जिनमें से केवल एक ही व्यक्ति जीवित बच पाया। पीड़ित परिवार कर रहे थे इंतजार, उसी समय सामने आया वीडियोजब पीड़ित परिवार अपने प्रियजनों के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे थे, उसी समय यह वीडियो वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर भारी प्रतिक्रियादेखने को मिली। लोगों ने AISATS की निंदा करते हुए कहा कि कंपनी में न तो संवेदना है और न ही स्थिति की गंभीरता को समझने की समझ। AISATS ने जताया खेद, जारी किया बयानकंपनी ने इस मामले पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए दुख जताया और कहा, “AISATS, AI171 की दुखद दुर्घटना से प्रभावित परिवारोंके साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है। हमें खेद है कि हमारे कुछ कर्मचारियों ने ऐसा व्यवहार किया, जो हमारी संस्था के मूल्यों के खिलाफ है। हमनेसंबंधित लोगों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। पार्टी की तारीख नहीं बताई गई, लेकिन कार्रवाई की पुष्टिAISATS ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पार्टी कब आयोजित की गई थी, लेकिन सूत्रों के अनुसार, पार्टी की योजना बनाने और उसमें शामिल होने वालेचार वरिष्ठ कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। कंपनी ने कहा कि उसने आंतरिक नियमों का पालन करते हुए उचित कदम उठाए हैं। कंपनी की छवि को झटका, लोगों में नाराजगी इस पूरी घटना के चलते AISATS की साख को भारी नुकसान पहुंचा है। हादसे के ठीक बाद इस तरह का गैरजिम्मेदाराना रवैया न केवलअसंवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या कंपनी में संकट की घड़ी में व्यवहार करने की कोई आचार संहिता है।