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ओडिशा: वरिष्ठ नौकरशाह की पिटाई पर बवाल, BJP ने की कार्रवाई, कांग्रेस और OAS संघ का विरोध तेज,भुवनेश्वर में जनसुनवाई के दौरान हुई मारपीट

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां भुवनेश्वर नगर निगम (BMC) के एडिशनल कमिश्नर रत्नाकर साहू केसाथ कुछ लोगों ने मारपीट की। यह घटना उस समय हुई जब साहू जनसुनवाई कर रहे थे। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसकेबाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई। हमलावरों में BJP नेता भी शामिल, पार्टी ने 5 नेताओं को किया निलंबितहमले के वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर सख्त कार्रवाईकी मांग की। दबाव बढ़ने पर बीजेपी ने त्वरित कदम उठाते हुए पांच नेताओं को पार्टी से निलंबित कर दिया। इनमें पार्षद जीवन राउत भी शामिल हैं, जिन पर साहू के साथ मारपीट में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने तीन हमलावरों को किया गिरफ्तारपुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए वीडियो की जांच के आधार पर तीन आरोपियों जीवन राउत, रश्मि महापात्रा और देबाशीष प्रधान को गिरफ्तारकर लिया है। जांच जारी है और बाकी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। रत्नाकर साहू का बयानहमले के बाद मीडिया से बातचीत में रत्नाकर साहू ने कहा कि हमलावर उन्हें नहीं जानते थे और उन्होंने किसी के साथ कोई बदसलूकी नहीं की थी।उनके अनुसार, पार्षद जीवन राउत ने कथित तौर पर यह पूछने के बाद कि क्या उन्होंने ‘जगा भाई’ से बदतमीजी की है, अचानक हमला कर दिया। BMC कर्मचारियों का धरना और कार्य बहिष्कारघटना के विरोध में BMC के कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में दिनभर का कार्य बहिष्कार किया और धरना दिया। उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर अधिकारियों को कार्यालय में सुरक्षा नहीं मिलती, तो वे कैसेकाम करेंगे। नवीन पटनायक का सरकार पर हमलापूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने घटना की तीखी आलोचना करते हुए इसे कानून व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) परलिखा, “अगर रत्नाकर साहू जैसे वरिष्ठ अधिकारी कार्यालय में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक क्या उम्मीद करें?” उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन मांझी सेतत्काल और उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई की मांग की। प्रशासनिक सेवा संघ ने दी सामूहिक अवकाश की चेतावनीओडिशा प्रशासनिक सेवा (OAS) संघ ने इस हमले के विरोध में मंगलवार से सामूहिक अवकाश पर जाने की घोषणा की है। संघ के अध्यक्ष ज्योतिरंजन मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

हिमाचल के मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर NHAI अधिकारी से मारपीट का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया मामला

फोरलेन निर्माण स्थल पर हुआ विवादहिमाचल प्रदेश के शिमला ग्रामीण क्षेत्र के भट्टाकुफर इलाके में फोरलेन निर्माण के दौरान एक गंभीर विवाद सामने आया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटीऑफ इंडिया (NHAI) के शिमला प्रोजेक्ट मैनेजर अचल जिंदल ने राज्य के कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर मारपीट का आरोप लगाते हुए ढली थाने मेंशिकायत दर्ज कराई है। घटना उस समय की है जब निर्माण कार्य के चलते एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी।बैठक में नहीं पहुंचे SDM, साइट पर बुलाए गए अधिकारीअचल जिंदल के अनुसार, उन्हें और साइट इंजीनियर योगेश को शिमला ग्रामीण के एसडीएम कार्यालय में 11:30 बजे बैठक के लिए बुलाया गयाथा, लेकिन एसडीएम के अनुपस्थित होने के चलते दोनों अधिकारियों को घटनास्थल पर जाने को कहा गया। वहां मंत्री अनिरुद्ध सिंह और स्थानीयलोग पहले से मौजूद थे। मंत्री पर लगाए गए गंभीर आरोपजिंदल ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने मंत्री को जानकारी दी कि जिस भवन का जिक्र हो रहा है, वह राष्ट्रीय राजमार्ग की अधिकार सीमा(ROW) से 30 मीटर दूर स्थित है और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। आरोप है कि यह सुनते ही मंत्री ने अपशब्द कहे और फिर उन्हें एककमरे में ले जाकर स्थानीय लोगों की उपस्थिति में उनके साथ मारपीट की गई।पानी के घड़े से हमला, अस्पताल में भर्तीशिकायत के अनुसार, मंत्री ने कथित तौर पर पानी के घड़े से अचल जिंदल के सिर पर वार किया जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा।जब साइट इंजीनियर योगेश ने उन्हें बचाने की कोशिश की, तो उसके साथ भी मारपीट की गई। दोनों अधिकारियों को आईजीएमसी अस्पताल में भर्तीकराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। मौके पर मौजूद थे सरकारी अधिकारी, किसी ने नहीं रोकाजिंदल का कहना है कि घटना के वक्त एसडीएम सहित अन्य अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद थे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया। अधिकारीजान बचाकर अपनी गाड़ी से सीधे अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज किया, मंत्री की चुप्पीपुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 121(1), 352, 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।हालांकि, अब तक कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है। इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने नितिन गडकरी को लिखा पत्रघटना के बाद सेंट्रल इंजीनियरिंग सर्विस ऑफिसर एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कीहै। शिकायत की प्रतिलिपि NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय, मुख्यालय और परियोजना निदेशक को भी भेजी गई है। बढ़ सकता है विवादमंत्री पर सीधे मारपीट के आरोप लगने के कारण यह मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ सकता है। प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में इसप्रकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस जांच जारी है और पीड़ित अधिकारियों की मेडिकल रिपोर्ट भी केस का अहम हिस्सा बनेगी।

कर्नाटक में सियासी घमासान, प्रियांक खरगे का आरएसएस पर प्रतिबंध का बयान बना विवाद का केंद्र

प्रियांक खरगे का विवादास्पद बयानकर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। इस बार कांग्रेस नेता और मंत्री प्रियांक खरगे नेराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक विवादित बयान देकर बहस को और हवा दे दी। उन्होंने कहा, “अगर केंद्र में हमारी सरकार बनती है, तोहम आरएसएस पर पाबंदी लगाएंगे।” आरएसएस पर गंभीर आरोपकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे ने आरएसएस को धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसकीविचारधारा समानता और आर्थिक समता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस पहले भी दो बार प्रतिबंधित किया गया था औरउस दौरान संगठन ने राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से पल्ला झाड़ते हुए माफी मांगी थी। खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा से आरएसएस की विचारधारा का विरोध करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उनके मुताबिक, कांग्रेस सत्तामें आने पर इस दिशा में कठोर कदम उठा सकती है क्योंकि उनके पास संबंधित घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। भाजपा का पलटवारभाजपा ने प्रियांक खरगे के इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि आरएसएस एक देशभक्तसंगठन है, जिसके लाखों स्वयंसेवक राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने खरगे के बयान को “खाली बर्तन की आवाज” बताया और कहा किआरएसएस एक वटवृक्ष की तरह है, जिसे कोई भी राजनीतिक ताकत उखाड़ नहीं सकती। कांग्रेस के भविष्य पर भाजपा का तंजविजयेंद्र ने कांग्रेस को अपने राजनीतिक भविष्य पर ध्यान देने की सलाह दी और कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस का अस्तित्व आने वाले वर्षों मेंबचा रह पाएगा। उन्होंने कहा कि बार-बार आरएसएस को निशाना बनाना कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है। प्रियांक खरगे के बयान ने न केवल राज्य की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस को जन्म दिया है। कांग्रेस और भाजपा केबीच यह जुबानी जंग आगे और तेज होने की संभावना है, खासकर तब, जब आरएसएस जैसे संगठन को प्रतिबंधित करने की बात खुले मंचों पर कहीजा रही हो।

UN में एस. जयशंकर का सख्त संदेश: आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो विश्व, परमाणु धमकियों से न डरे, आतंक के खिलाफ वैश्विक एकता की अपील

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने का आह्वानकिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाना चाहिए और न ही किसी देश को आतंकियों का इस्तेमाल अपने रणनीतिक उद्देश्यों केलिए करने देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति “जीरो टॉलरेंस” पर आधारित है। पहलगाम हमले का संदर्भ और भारत की प्रतिक्रियाजयशंकर ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए बताया कि इस हमले ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को और सख्तकिया है। उन्होंने कहा कि इस हमले के दो हफ्तों के भीतर भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकीठिकानों को निशाना बनाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से इस हमले की निंदा का भी उल्लेख किया। मानवता के लिए सबसे बड़ा खतराविदेश मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि आतंकवाद न केवल शांति और स्थिरता बल्कि मानवाधिकारों, कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के भीखिलाफ है। जब कोई राष्ट्र अपने पड़ोसी के खिलाफ आतंक को हथियार बनाता है या जब कट्टरपंथ इसे बढ़ावा देता है, तो उसे बेनकाब करना जरूरीहो जाता है. परमाणु धमकियों से न झुके वैश्विक समुदायजयशंकर ने यह भी चेताया कि दुनिया को किसी भी देश की परमाणु धमकी या ब्लैकमेल के आगे झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवादऔर परमाणु हथियारों की धमकी दोनों ही वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे हैं। संयुक्त राष्ट्र में प्रदर्शनी का उद्घाटनएस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘आतंकवाद का मानवीय नुकसान’ नामक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो 30 जून से 3 जुलाई और 7 से 11 जुलाई तक प्रदर्शित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में 1993 मुंबई बम धमाके, 2008 के मुंबई हमलों और 2025 के पहलगामहमले जैसे आतंकवादी कृत्यों को दर्शाया गया है। इसमें आतंकवाद से प्रभावित पीड़ितों की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की कोशिशकी गई है। पाकिस्तान की UNSC अध्यक्षता के बीच अहम वक्तव्यगौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। जयशंकर का यहबयान एक तरह से वैश्विक मंच पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को चुनौती देने की दिशा में भी देखा जा रहा है।

हिमाचल में मॉनसून की मार: मंडी में बादल फटने से भारी तबाही, 800 करोड़ का नुकसान, मंडी बना तबाही का केंद्र

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बादल फटने की घटनाओं ने जबरदस्त तबाही मचाई है। करसोग और धर्मपुर क्षेत्रों में बादल फटने से अब तक 4 लोगोंकी मौत हो चुकी है, जबकि 16 लोग अभी भी लापता हैं। राहत की बात यह है कि अब तक 117 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस आपदासे राज्य को अब तक करीब 800 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। सड़कों, पुलों और घरों को नुकसानभारी बारिश और बादल फटने की वजह से कई सड़कें, पुल और पुलियाएं बह गईं। मंडी जिले में कुल 18 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, 12 गौशालाएं पूरीतरह तबाह हो गईं और लगभग 30 मवेशी पानी में बह गए। इन घटनाओं का असर दोपहर एक बजे तक के आंकड़ों में देखा गया है। गोहर और धर्मपुर में सबसे ज्यादा नुकसानमंडी के गोहर क्षेत्र में चार अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसमें दो घर पूरी तरह नष्ट हो गए। धर्मपुर में भी हालात गंभीरहैं, जहां 6 घर बाढ़ की चपेट में आ गए और 8 गौशालाएं बह गईं। ब्यास नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे क्षेत्र में और खतरा बनाहुआ है। राज्यभर में बारिश का कहरइस बार हिमाचल प्रदेश में मॉनसून ने सामान्य से कहीं अधिक तबाही मचाई है। जून महीने में सामान्य से 37% अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसतेज बारिश से राज्यभर में व्यापक नुकसान हुआ है, खासकर मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, सोलन और शिमला जिलों में भारी बारिशरिकॉर्ड की गई है।पंडोह में 123 मिमी, मंडी में 120 मिमी, शिमला में 110 मिमी और पालमपुर में 80 मिमी वर्षा दर्ज की गई। रेड और ऑरेंज अलर्ट जारीराज्य में मौसम विभाग ने आगामी 6 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। 2 और 3 जुलाई को विशेष रूप से अधिकतर इलाकों में तेज बारिशकी संभावना है। जिला ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कुल्लू में येलो अलर्ट और कुछ स्थानों पर ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। वहीं, मंडी, कांगड़ा और चंबा जैसे जिलों में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पंडोह डैम से छोड़ा गया पानीबाढ़ की स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए मंडी के पंडोह डैम से करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे निचले क्षेत्रों में खतरा औरअधिक बढ़ गया है और रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, सुरजेवाला का ऐलान amid सत्ता संघर्ष

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर उठते विवाद के बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा। पार्टी के एआईसीसीप्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा की। उन्होंने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बगल में बैठाकर कहाकि कांग्रेस मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नहीं हटाएगी। विधायकों से मुलाकात और एकता का प्रदर्शनरणदीप सुरजेवाला सोमवार को बेंगलुरु पहुंचे और उन्होंने पार्टी विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट कियाकि नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे पहले मैसूर में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार का हाथ उठाकर एकता का संदेशदिया था। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि सरकार अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी, जैसे उन्होंने पहले भी एक बार बतौर मुख्यमंत्री किया था। ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला: हकीकत या भ्रम?कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद को लेकर “ढाई-ढाई साल” के फॉर्मूले की चर्चा लंबे समय से चल रही है। कहा जा रहा है कि यह समझौताकांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला के बीच हुआ था। हालांकि, कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से इस पर कभी पुष्टि नहीं की। अबसवाल उठ रहा है कि क्या नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे होने पर डीके शिवकुमार को सत्ता सौंपी जाएगी? संगठन समीक्षा या सत्ता हस्तांतरण की तैयारी?रणदीप सुरजेवाला इस समय कर्नाटक में डेरा डाले हुए हैं और विधायकों एवं जिला अध्यक्षों से व्यक्तिगत फीडबैक ले रहे हैं। पार्टी कह रही है कि यहप्रक्रिया सरकार के कामकाज की समीक्षा और घोषणापत्र के क्रियान्वयन के मूल्यांकन के लिए है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे सत्ताहस्तांतरण की तैयारी भी छुपी हो सकती है। खरगे का बयान और अंदरूनी खींचतानकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जब मुख्यमंत्री परिवर्तन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह फैसला आलाकमान करेगा। उन्होंनेबदलाव की संभावना से इनकार भी नहीं किया, जिससे डीके शिवकुमार के सीएम बनने की उम्मीदें और प्रबल हो गई हैं। पर्दे के पीछे की रणनीतिबताया जा रहा है कि सिद्धारमैया अगले बजट तक पद पर बने रहना चाहते हैं, जबकि डीके शिवकुमार समयसीमा से एक दिन भी अधिक इंतजार नहींकरना चाहते। डीके शिवकुमार ने प्रदेश अध्यक्ष पद भी नहीं छोड़ा है, जो एक तरह का दबाव बनाने का संकेत माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है किडीके ने करीब 100 विधायकों से संपर्क साधा

रेल किराया बढ़ोतरी पर लोकदल की कड़ी आपत्ति, फैसला बताया जनविरोधी

भारतीय रेलवे द्वारा 1 जुलाई 2025 से यात्री ट्रेनों के किराये में की गई बढ़ोतरी को लेकर लोकदल ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। पार्टी के राष्ट्रीयअध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने इस निर्णय को आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय मेंलिया गया है जब देश के लोग पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ट्रेन आम आदमी की जीवन रेखा हैचौधरी सुनील सिंह ने कहा कि रेलवे देश के करोड़ों लोगों, खासकर मजदूरों, छात्रों, किसानों, छोटे व्यापारियों और बुजुर्गों के लिए बेहद जरूरीसार्वजनिक सुविधा है। किराया बढ़ाना इन वर्गों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डालेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार को यह फैसला तुरंतवापस लेना चाहिए। बढ़ती कीमतें, गिरती सेवाएंलोकदल अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में रेलवे सेवाओं में सुधार के नाम पर बार-बार किराये में बढ़ोतरी की गई है, लेकिन सुविधाओं में कोईठोस सुधार नहीं हुआ। स्टेशन, कोच और बुनियादी सेवाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है या और खराब हुई है। जन आंदोलन की चेतावनीलोकदल ने साफ किया है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी जनहित में जनता के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरूकरेगी। चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि लोकदल सड़क से संसद तक आम जनता की आवाज़ को बुलंद करेगा और सरकार की जनविरोधी नीतियों कापुरजोर विरोध करेगा।

पुरानी गाड़ियों की जब्ती और कृत्रिम वर्षा पर आम आदमी पार्टी का बीजेपी सरकार पर हमला, सौरभ भारद्वाज बोले– फुलेरा की पंचायत चला रहे हैं

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में पुराने वाहनों को जब्त करने और मानसून के बीच कृत्रिम वर्षा कराने जैसे फैसलों पर दिल्ली की बीजेपी सरकार कोकठघरे में खड़ा किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इन फैसलों को “अव्यवहारिक और विवादास्पद” बताते हुए भाजपा सरकार कीतुलना “फुलेरा की पंचायत” से कर दी। पेट्रोल पंपों पर जब्ती से होगा टकराव: आपसौरभ भारद्वाज ने पुराने वाहनों को पेट्रोल पंपों पर जब्त करने के फैसले को अव्यवहारिक और संघर्ष पैदा करने वाला करार दिया। उन्होंने चेताया किइससे कर्मचारियों और वाहन मालिकों के बीच भिड़ंत की स्थिति पैदा हो सकती है। उनका कहना था कि पेट्रोल पंपों पर लड़ाई-झगड़ा कराना सरकारचलाने का तरीका नहीं है और पेट्रोल पंप एसोसिएशन भी इस फैसले को व्यवहारिक नहीं मान रही है।मानसून में कृत्रिम वर्षा? सरकार के फैसले पर सवालबारिश के मौसम के बावजूद सरकार द्वारा कृत्रिम वर्षा का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी आपत्ति जताते हुए भारद्वाज ने पूछा कि जब दिल्ली मेंपहले से ही वर्षा हो रही है, तब कृत्रिम बारिश की क्या जरूरत है। उन्होंने इस निर्णय को “बिना सोच-विचार के लिया गया निर्णय” बताया और कहाकि “फुलेरा की पंचायत” भी इससे बेहतर फैसले ले सकती है। केजरीवाल सरकार ने कभी बहाने नहीं बनाएसौरभ भारद्वाज ने कहा कि मौजूदा बीजेपी सरकार का काम बहाने बनाना और आम आदमी पार्टी को दोष देना भर है। उन्होंने कहा कि अरविंदकेजरीवाल ने कभी पिछली सरकारों पर ठीकरा नहीं फोड़ा बल्कि हर परिस्थिति में जनादेश का सम्मान करते हुए काम किया। उनके अनुसार, आने वालेपांच साल तक रेखा गुप्ता की सरकार सिर्फ “आप” को कोसती रहेगी। ओडिशा में IAS अधिकारी से मारपीट पर भाजपा और अफसरशाही पर सवालओडिशा के भुवनेश्वर में भाजपा पार्षदों द्वारा एक IAS अधिकारी के साथ की गई मारपीट पर भारद्वाज ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब दिल्लीमें एक अफसर के साथ कथित मारपीट हुई थी, तब देशभर में हंगामा मच गया था, लेकिन अब चुप्पी क्यों है? उन्होंने पूछा कि क्या IAS और IPS एसोसिएशन सिर्फ बीजेपी के इशारे पर ही प्रतिक्रिया देते हैं? आईएएस, आईपीएस संगठन क्या बीजेपी से संचालित होते है?सौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि जब भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने एक आईपीएस अधिकारी का गिरेबान पकड़ लिया था, तब भी कोई कार्रवाईया विरोध नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाही से जुड़े संगठन भाजपा के राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रहे हैं। मीडिया की चुप्पी पर तंजउड़ीसा की घटना पर सौरभ भारद्वाज ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि बीजेपी शासित भुवनेश्वर नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त के साथ जो हुआ, उस पर न तो मीडिया में कोई चर्चा हो रही है और न ही IAS एसोसिएशन कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है। उन्होंने कहा, “अब किसी का खून क्यों नहींखौल रहा?”

अमरनाथ यात्रा 2025: तैयारियां अंतिम चरण में, 30 जून से शुरू हुआ ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन, भक्तों में उत्साह, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

अमरनाथ यात्रा 2025 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बारयात्रा को अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष इंतजाम किए हैं। हर स्तर पर सुरक्षापुख्ता की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। 30 जून से शुरू हुआ ऑफलाइन पंजीकरणजिन श्रद्धालुओं ने अभी तक ऑनलाइन पंजीकरण नहीं किया है, उनके लिए राहत की खबर है। सोमवार, 30 जून से जम्मू में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कीसुविधा शुरू कर दी गई है। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किए जा रहे इस रजिस्ट्रेशन के लिए श्रद्धालु विशेष केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। बम-बम भोले के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है।ये केंद्र खासतौर पर उन लोगों के लिए खोले गए हैं जो तकनीकी कारणों से ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर सके थे। यात्रा मार्ग बना अभेद्य किलापहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के मद्देनजर इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक कड़ा किया गया है। यात्रा मार्ग को पूरी तरह सेसुरक्षित बनाया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। पूरे मार्ग की निगरानी के लिए हाईटेकउपकरणों और रणनीतिक तैनाती का सहारा लिया गया है। मॉकड्रिल के जरिए सुरक्षा का अभ्यासरविवार को समरोली और तोल्डी नाला क्षेत्रों में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक संयुक्त मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (JKSDRF) ने भाग लिया। इस मॉक अभ्यास का उद्देश्य भूस्खलन जैसीआपात परिस्थितियों में तत्परता सुनिश्चित करना था। यात्रा की शुरुआत और पहला जत्थापवित्र अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2025 से शुरू होगी। इसका पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू के आधार शिविर से रवाना होगा। यात्रा दोनों मार्गों—बालटाल और पहलगाम—से एक साथ आरंभ की जाएगी। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा के साथ-साथ चिकित्सा, परिवहन और ठहरने की सभी व्यवस्थाएंमजबूत की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव मिल सके।

मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘हाईकमान’ बयान से मचा सियासी घमासान, बीजेपी ने उठाए नेतृत्व पर सवाल-खड़गे के बयान से भड़की बहस

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिया गया एक बयान राजनीतिक हलकों में बहस का विषय बन गया है। कर्नाटक में संभावित नेतृत्व बदलावसे जुड़े सवाल पर खड़गे ने कहा, “यह सब हाईकमान के हाथ में है। हाईकमान में क्या चल रहा है, यह कोई भी नहीं कह सकता।” हालांकि उन्होंने यहस्पष्ट नहीं किया कि ‘हाईकमान’ से उनका आशय किससे है। बीजेपी का पलटवार: “हाईकमान कौन है?”खड़गे के इस बयान पर बीजेपी ने त्वरित और तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कांग्रेस का हाईकमानभूत की तरह है—अनदेखा, अनसुना लेकिन हमेशा मौजूद।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब पार्टी अध्यक्ष खुद नहीं जानते कि हाईकमान कौन है, तो इससे कांग्रेस की नेतृत्वहीनता और आंतरिक भ्रम उजागर होता है। कांग्रेस में ‘हाईकमान’ की परंपरा और विवाद‘हाईकमान’ शब्द कांग्रेस में नया नहीं है। दशकों से यह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए इस्तेमाल होता रहा है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से गांधी परिवारकी प्रमुख भूमिका रही है। विपक्षी दल लंबे समय से इस शब्द का उपयोग गांधी परिवार के प्रभाव को इंगित करने के लिए करते हैं। पंडित नेहरू सेलेकर इंदिरा, राजीव और अब सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी तक यह परंपरा बनी रही है। कर्नाटक में जारी नेतृत्व संघर्ष की पृष्ठभूमिखड़गे का बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद की चर्चाएं तेज़ हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्रीडी.के. शिवकुमार के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा की खबरें सामने आ चुकी हैं। माना जा रहा है कि खड़गे के इस बयान से वे खुद को इस विवाद से अलगकर, जिम्मेदारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर डालना चाह रहे हैं। विधायक का बयानइस सियासी बहस में और इंधन तब मिला जब कर्नाटक के कांग्रेस विधायक एच.ए. इक़बाल हुसैन ने कहा कि आने वाले दो-तीन महीनों में डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। उन्होंने शिवकुमार की मेहनत और रणनीति की सराहना करते हुए कहा कि हाईकमान को स्थिति की पूरीसमझ है और वह सही समय पर फैसला करेगा।