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शशि थरूर का आपातकाल पर तीखा प्रहार,भारत ने 1975 में आजादी छीने जाने का दौर देखा, कांग्रेस नेता ने इमरजेंसी को बताया काला अध्याय, लोकतंत्र के संरक्षण की दी सलाह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपनी पार्टी लाइन से हटकर टिप्पणी की है, जिससे कांग्रेस में असहजता महसूस की जासकती है। मलयालम दैनिक दीपिका में प्रकाशित एक लेख में उन्होंने 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू आपातकाल को भारत केलोकतांत्रिक इतिहास का “काला अध्याय” करार दिया। उन्होंने लिखा कि यह दौर केवल याद करने के लिए नहीं, बल्कि इससे सबक लेने के लिए भीहै। अनुशासन की आड़ में क्रूरता,थरूर का इंदिरा गांधी शासन पर कटाक्षथरूर ने कहा कि उस दौर में अनुशासन और व्यवस्था के नाम पर जो भी प्रयास किए गए, वे कई बार निर्दयता और अत्याचार में बदल गए। उन्होंनेविशेष रूप से संजय गांधी द्वारा चलाए गए जबरन नसबंदी अभियान की आलोचना की। उनके अनुसार, इस अभियान के तहत गरीब ग्रामीण इलाकों मेंहिंसा और जबरदस्ती के माध्यम से लक्ष्य पूरे किए गए। साथ ही, नई दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्रों में झुग्गियों को बिना मानवीय संवेदना के उजाड़ा गया, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए। आज का भारत 1975 का भारत नहींथरूर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान भारत 1975 के भारत से काफी अलग है। उन्होंने कहा कि आज देश कहीं अधिक आत्मविश्वासी, विकसित औरमजबूत लोकतंत्र है। बावजूद इसके, उन्होंने आगाह किया कि आपातकाल की गलतियों से अब भी सबक लिया जाना जरूरी है, क्योंकि सत्ता केकेंद्रीकरण और असहमति को दबाने की प्रवृत्तियां अब भी विभिन्न रूपों में सामने आती हैं। लोकतंत्र के लिए चेतावनी,सत्ता के लोभ से बचे रहना जरूरीथरूर ने लोकतंत्र को “अनमोल विरासत” बताते हुए कहा कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि सत्ता को केंद्रीकृत करने, विरोध कीआवाजों को दबाने और संवैधानिक संरचनाओं को नजरअंदाज करने की प्रवृत्तियां अक्सर राष्ट्रीय हित या स्थिरता के नाम पर सामने आती हैं। ऐसे में, आपातकाल हमारे लिए एक स्थायी चेतावनी है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहना होगा। मोदी सरकार की तारीफ भी कर चुके हैं थरूरयह पहला मौका नहीं है जब शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी की परंपरागत सोच से इतर रुख अपनाया हो। हाल ही में वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बादविदेश दौरे पर गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जहां उन्होंने विदेशों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की खुलकर तारीफ की थी।

उत्तर भारत में मानसून का कहर, दिल्ली से हिमाचल तक जलभराव, IMD ने जारी किया अलर्ट

उत्तर भारत के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश ने जहां भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं आम जनजीवन को भी काफी प्रभावित किया है। राजधानीदिल्ली में पिछले 24 घंटों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहावना बना दिया।हालांकि, इसके साथ ही जलभराव और ट्रैफिक जाम ने लोगों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। ऑफिस जाने वाले लोगों को लंबे इंतजार और जाम का सामनाकरना पड़ा, जबकि स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति पर भी असर पड़ा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली के लिए अगले 24 घंटों के दौरान मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और बताया है कि तेजहवाएं चलने की संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है। हालांकि राजधानी में फिलहाल व्यापक बाढ़ की आशंका नहीं है, लेकिननिचले इलाकों में अचानक जलभराव (फ्लैश फ्लड) की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अंडरपास और सड़कों पर भरेपानी के वीडियो से यह साफ हो गया है कि दिल्ली की मानसून से निपटने की तैयारियां एक बार फिर नाकाफी साबित हुई हैं। राजस्थान में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 10 जुलाई से पूर्वी राजस्थान में बारिश का दौर तेज होगा और 12 जुलाई से पश्चिमी राजस्थान में भारी वर्षा की संभावना है। खासकर 11 जुलाई को कोटा और भरतपुर, जबकि 12-13 जुलाई को जयपुर, अजमेर, उदयपुर और अन्य संभागों में अति भारी बारिश हो सकती है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में मंडी, कुल्लू, चंबा, शिमला, सिरमौर और कांगड़ा जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां लगातार बारिशके चलते मिट्टी पूरी तरह संतृप्त हो गई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव, सतही बहाव और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कोलकाता जैसे इलाकों में भी बारिश का असर देखा जा रहा है। यूपी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाट डूब चुके हैं, और प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। वहीं कोलकाता में जलजमाव के कारण सड़कों पर यातायात ठप हो गया है, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावितहुई है। उत्तराखंड और राजस्थान में भी 13 जुलाई तक भारी बारिश का पूर्वानुमान है, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देशजारी किए गए हैं। मौसम विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना जरूरत के घर से बाहर न निकलें, रेनकोट और छतरी साथ रखें, जलभराव वाले इलाकों औरअंडरपास से बचें तथा सुरक्षा को प्राथमिकता दें। भारी बारिश ने जहां गर्मी से थोड़ी राहत दी है, वहीं यह भी उजागर कर दिया है कि महानगरों की बारिश से निपटने की व्यवस्था अब भी कमजोर है। ऐसेमें मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए आम लोगों को पूरी सतर्कता के साथ अगले कुछ दिनों का सामना करना होगा।

बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, समस्या प्रक्रिया नहीं, समय की है, बोले जस्टिस धूलिया

चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर नहीं, समय पर सवालसुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की मंशा और प्रक्रिया पर सीधे तौर पर कोईआपत्ति नहीं जताई, लेकिन इसकी टाइमिंग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया कराना उचित नहीं है, क्योंकि इससे प्रभावित मतदाताओं को अपील या सुधार के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा, “आपकी प्रक्रिया में कोई गलती नहीं है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले कोई व्यक्ति यदि मतदाता सूची से बाहर करदिया गया, तो उसके पास इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अवसर नहीं बचेगा।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक बार मतदाता सूचीअंतिम हो जाए, तो अदालतें उसमें हस्तक्षेप नहीं करतीं। वोटर लिस्ट रिवीजन की टाइमिंग पर अदालत की चिंतान्यायालय ने पूछा कि यदि यह पुनरीक्षण इतना आवश्यक था तो इसे पहले क्यों नहीं किया गया? चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले इस कवायद काक्या औचित्य है? अदालत ने दो टूक कहा कि यह कवायद चुनाव से पहले नहीं होनी चाहिए थी। आधार को पहचान पत्र न मानने पर भी सवालसुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में अस्वीकार करने के चुनाव आयोग के निर्णय पर भी सवाल उठाए। आयोग कीतरफ से कहा गया कि “आधार से नागरिकता प्रमाणित नहीं होती”, जिस पर अदालत ने कहा कि यदि नागरिकता ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने कीकसौटी है, तो फिर यह कार्य गृह मंत्रालय का क्षेत्राधिकार है, चुनाव आयोग का नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “यदि आप यह साबित करना चाहते हैं कि कोई नागरिक है तभी वह वोट डाल सकता है, तो यह एक बड़ा परीक्षण बन जाएगा।आपकी प्रक्रिया का फिर कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।” सामूहिक निलंबन और आधार से इनकार पर उठे सवालयाचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि लाखों लोगों को सामूहिक रूप सेमतदाता सूची से निलंबित कर दिया गया है और उन्हें केवल एक फॉर्म भरने का विकल्प दिया गया है। सिंघवी ने कहा कि यह प्रक्रिया मनमानी औरभेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से कहा जा रहा है कि 2003 के बाद पहली बार संशोधन किया जा रहा है, जब बिहार की जनसंख्या महज 4 करोड़ थी। अब 10 चुनावों के बाद, जनसंख्या कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन चुनाव से ऐन पहले यह कवायद की जा रही है। चुनाव आयोग की सफाई और सुप्रीम कोर्ट की चेतावनीचुनाव आयोग ने अदालत को आश्वस्त किया कि बिना नोटिस और सुनवाई के किसी का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्टकिया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है और उन्हें मताधिकार से वंचित करने का कोई इरादा नहीं है। साथ ही आयोग ने यह आपत्ति भीजताई कि याचिकाकर्ता बिहार के मतदाता नहीं हैं।

दिल्ली में बारिश बनी प्रशासन की पोल खुली, आप ने बीजेपी पर लगाया भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप

दिल्ली में हालिया बारिश ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चारों स्तरों पर सरकारों की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आम आदमीपार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में बीजेपी के चारों इंजन केंद्र, एलजी, एमसीडी और डीडीए सब के सब फेलहो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जलभराव को रोकने के बड़े-बड़े दावे सिर्फ दिखावा थे, और अब जनता उस नाकामी की कीमत चुका रही है। सिर्फ फोटोशूट, नतीजा शून्यसौरभ भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा कि डि-सिल्टिंग के नाम पर मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और मंत्री सिर्फ फोटोज खिंचवाते रहे। बड़े स्तर पर प्रचारकिया गया कि दिल्ली जलभराव से मुक्त होगी, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी दिल्ली के लोग जलजमाव और ट्रैफिक जाम से जूझते रहे। उन्होंनेसोशल मीडिया पर जलभराव की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि सरकारी मशीनरी पूरी तरह फेल रही। प्रवेश वर्मा के 400 सस्पेंशन लेटर कहां गए?भारद्वाज ने भाजपा नेता और मंत्री प्रवेश वर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने दावा किया था कि जलभराव होने पर 400 सस्पेंशन लेटर तैयारहैं। अब जब दिल्ली पानी-पानी हो चुकी है, तो पूछा जाना चाहिए कि आखिर कितने अधिकारियों को निलंबित किया गया? उन्होंने कहा कि सरकार नेयह भी कहा था कि हर क्षेत्र के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी तय किया गया है। ऐसे में कार्रवाई कहां है? नालों की सफाई में भ्रष्टाचार, कार्रवाई क्यों नहीं?आप नेता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए और यह काम सिर्फ कागजों पर ही हुआ।उन्होंने याद दिलाया कि मंत्री रहते हुए उन्होंने थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अबसरकार इन ठेकों की जांच कराएगी और दोषियों पर कार्रवाई करेगी? बीजेपी-प्रशासन की मिलीभगतसौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि अगर भ्रष्टाचार के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, तो इसका साफ मतलब है कि बीजेपी सरकार औरअधिकारियों के बीच मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि जब एलजी खुद भाजपा से हैं और सस्पेंशन की ताकत उन्हीं के पास है, फिर भी कोई कदम नहींउठाया गया, तो इसका मतलब स्पष्ट है भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। जनता खुद निकाल रही एंबुलेंसउन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पटेल नगर में जलभराव में फंसी एंबुलेंस का वीडियो साझा करते हुए कहा कि जब सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गईं, तोस्थानीय लोग खुद मरीजों की मदद में जुटे। उन्होंने कहा कि एलजी से लेकर मंत्री तक सबने सिर्फ बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीन पर कुछ नहींकिया गया।

लोकदल का संकल्प, लोकतंत्र की रक्षा के लिए INDIA गठबंधन के साथ

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी पूरी मजबूती औरप्रतिबद्धता के साथ INDIA गठबंधन का हिस्सा बनी रहेगी। उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा चुनावों में गठबंधन की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूपमें लोकदल ने निर्णायक और सशक्त भूमिका निभाई थी, और अब बिहार में भी वही ऊर्जा दोहराई जाएगी। बिहार की जनता निभाएगी निर्णायक भूमिकासिंह ने विश्वास जताया कि बिहार की जनता इस लोकतांत्रिक संघर्ष में सच का साथ देगी और लोकतंत्र की रक्षा में अहम भूमिका अदा करेगी। उन्होंनेकहा कि देश के नागरिक अब जागरूक हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई समझौता स्वीकार नहीं करेंगे। चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागतलोकदल अध्यक्ष ने बिहार राज्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की आलोचनात्मक टिप्पणी का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र कीदिशा में एक सकारात्मक और साहसी कदम बताया। उन्होंने मांग की कि बिहार में सामने आई चुनावी अनियमितताओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांचकी जानी चाहिए। निष्पक्षता नहीं, तो लोकतंत्र नहींसुनील सिंह ने यह आरोप भी लगाया कि यदि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के बजाय एक सरकारी एजेंसी की तरह काम करेगा औरराजनीतिक दबाव में निर्णय लेगा, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों और संविधान की भावना दोनों का उल्लंघन होगा। लोकसभा जैसी रणनीति अब बिहार मेंउन्होंने यह स्पष्ट किया कि लोकसभा चुनाव में जनता की भावना के अनुरूप जो रणनीति अपनाई गई थी, वही दृष्टिकोण अब बिहार चुनावों में भी रखाजाएगा।

कांग्रेस का आरोप, गुजरात में मनरेगा घोटाले में मंत्री बच्चूभाई खाबड़ की सीधी संलिप्तता, कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने प्रेस कांफ्रेंस की, उन्होंने कहा कि गुजरात के वडोदरा जिले में मुजपुर गंभीरा नदी पर बने पुल गिरने की दर्दनाक घटना से की, जिसमें अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि एक ट्रक, कारें, एक ऑटो और तीन बाइकें पुल के साथ नदी में समा गईं। स्थानीय लोगों और पूर्व जिला परिषद सदस्यों ने इस पुल की हालत को लेकर पहले ही प्रशासन को चेतावनी दी थी, लेकिन बावजूद इसके कोई मरम्मत नहीं हुई। गोहिल ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में ठेकेदारों से पार्टी कार्यालय ‘कमलम’ में घूस मांगी जाती है, जिससे वे काम की गुणवत्ता से समझौता करते हैं और इस भ्रष्ट व्यवस्था का नतीजा पुलों के गिरने जैसे हादसे हैं। मनरेगा में मंत्री की निजी ज़मीन पर फर्जीवाड़ा गोहिल ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि गुजरात सरकार में मंत्री बच्चूभाई खाबड़ ने अपनी निजी जमीन पर मनरेगा के तहत कई फर्जी वर्क ऑर्डर जारी करवाए। उन्होंने प्रेस को दिखाए गए दस्तावेजों के ज़रिए बताया कि सर्वे नंबर 115 के अंतर्गत दर्जनों विकास कार्य जैसे जल निकासी नाले, डैम, बंड, प्लांटेशन, और लेवलिंग कार्य दर्ज किए गए, जिन पर लाखों रुपए खर्च दिखाए गए, जबकि मौके पर कोई भी निर्माण नहीं हुआ। इसके बाद उन्हीं गैर-मौजूद कार्यों के ‘मरम्मत’ के नाम पर और फंड स्वीकृत किए गए। मंत्री के बेटे को बिना टेंडर दिए ठेके कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मनरेगा फंड से मटेरियल सप्लाई का ठेका सीधे मंत्री के बेटे बलवंत खाबड़ की कंपनी ‘श्री राज कंस्ट्रक्शन’ को दे दिया गया, जो पूरी तरह टेंडर प्रक्रिया के विरुद्ध है। मनरेगा नियमों के तहत मटेरियल सप्लाई के लिए खुले टेंडर, विज्ञापन और एल1 बिडर को चयनित करना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं कराई गई और बेटे को सीधे लाभ पहुंचाया गया। सिर्फ धानपुर ब्लॉक में ही 2,235 वर्क ऑर्डर एक सीमित समय में जारी हुए और अधिकांश में श्री राज कंस्ट्रक्शन को सप्लायर बनाया गया। लाखों का मटेरियल फर्जी, जीएसटी चोरी भी उजागर गोहिल ने आगे बताया कि श्री राज कंस्ट्रक्शन ने करोड़ों रुपए के मटेरियल सप्लाई के बिल बनाए, लेकिन फील्ड पर कोई भी सामग्री नहीं पहुंचाई गई। यही नहीं, जीएसटी नंबर होने के बावजूद कंपनी ने कोई टैक्स जमा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि एक ईमानदार अधिकारी ने खुद यह लिखित में दिया है कि एल1 बिडर को दरकिनार कर गैर-योग्य कंपनी को ठेका दिया गया, लेकिन भाजपा की सत्ता में होने से जांच आगे नहीं बढ़ पाई। बर्खास्तगी से लेकर सीबीआई जांच तक कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रेस के माध्यम से कई मांगें रखीं मंत्री बच्चूभाई खाबड़ को तत्काल पद से हटाया जाए, पूरे मामले की कोर्ट मॉनिटर्ड सीबीआई जांच हो और जीएसटी चोरी पर केंद्र सरकार कार्रवाई करे। साथ ही, उन्होंने मांग की कि गुजरात में मनरेगा और जल-से-नल जैसी योजनाओं की व्यापक जांच कराई जाए, क्योंकि ये योजनाएं अब भाजपा नेताओं के निजी हितों की पूर्ति का जरिया बन गई हैं। अडानी को दिए गए प्रोजेक्ट पर सवाल मीडिया द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में गोहिल ने महाराष्ट्र के गोरेगांव में अडानी समूह को मिले 3,600 करोड़ के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह देश की संसाधनों की खुली लूट है। उन्होंने बताया कि जिन एयरपोर्ट्स को पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया संचालित करती थी, वहाँ पर सेवाओं के लिए मामूली शुल्क लिया जाता था, लेकिन अडानी समूह के हाथ में आते ही चार्ज कई गुना बढ़ा दिए गए। ड्रॉप और पिकअप जैसी सुविधाओं पर भी अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह बिहार बंद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर कर आवाज़ उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब पूरी तरह भाजपा के नियंत्रण में है। पहले आयोग का चयन प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश की संयुक्त समिति द्वारा होता था, लेकिन अब न्यायपालिका को बाहर कर सिर्फ सत्ता पक्ष के हाथ में चयन प्रक्रिया दे दी गई है। इससे चुनाव की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बलवंत की गिरफ्तारी और बेल पर कांग्रेस की चिंता एक अन्य सवाल के जवाब में गोहिल ने कहा कि बलवंत खाबड़ को 72 करोड़ के घोटाले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे जल्द ही जमानत मिल गई। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कांग्रेस से जुड़े किसी व्यक्ति पर आरोप लगता है, तो ईडी, सीबीआई तुरंत हरकत में आ जाती है, लेकिन भाजपा नेताओं के मामलों में सरकार चुप्पी साध लेती है। उन्होंने चेताया कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह लीपापोती बनकर रह जाएगा।

दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर रोक का मुद्दा, भाजपा का दोहरा चेहरा उजागर, बोले सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आज एक प्रेस वार्ता में भाजपा की दिल्ली सरकार पर तीखा हमला बोला और पुरानीगाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक लगाने के निर्णय को लेकर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा ने खुद लिया था फैसला, अब कोर्ट जाने की बात दिखावासौरभ भारद्वाज ने बताया कि भाजपा ने 1 मार्च को ही घोषणा कर दी थी कि 30 मार्च से दिल्ली में पुरानी गाड़ियों को पेट्रोल नहीं मिलेगा। जबसरकार की तैयारी नहीं हुई, तो तारीख को आगे बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया। जब फैसले का विरोध हुआ तो भाजपा ने सीएक्यूएम और अदालतके नाम पर इसे थोपने की कोशिश की। लेकिन सच्चाई यह है कि सीएक्यूएम की चिट्ठी 23 अप्रैल की है, यानी भाजपा पहले ही इस फैसले कोघोषित कर चुकी थी।दिल्ली सरकार ने पड़ोसी शहरों में भी रोकी पुरानी गाड़ियांभारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली की भाजपा सरकार ने न केवल राजधानी में, बल्कि नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसेशहरों में भी पुराने वाहनों को पेट्रोल न देने और उन्हें जब्त करने की सिफारिश की। अब नवंबर से यह फैसला इन शहरों में भी लागू होगा, जिससेलगभग दो करोड़ वाहन मालिक प्रभावित होंगे। सीएक्यूएम को लिखित सहमति, सुप्रीम कोर्ट का बहाना क्यों?आप नेता ने सवाल उठाया कि जब भाजपा की दिल्ली सरकार ने खुद लिखित रूप में सीएक्यूएम के फैसले को समर्थन दिया, तो अब सुप्रीम कोर्ट मेंइसका विरोध कैसे कर सकती है? उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने की एक और चाल बताया। केवल केंद्र सरकार के अध्यादेश से मिल सकती है राहतभारद्वाज ने सुझाव दिया कि जैसे केंद्र सरकार ने सेवा से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए अध्यादेश लाया था, वैसे ही इसमामले में भी दो करोड़ वाहन मालिकों को राहत देने के लिए केंद्र को अध्यादेश लाना होगा। कार कंपनियों से सांठगांठ के आरोप, जनता पर बोझ डालने का आरोपउन्होंने दावा किया कि भाजपा ने गाड़ियों का उत्पादन करने वाली कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया। पुराने वाहन बंद कराना औरजनता को नई गाड़ी खरीदने पर मजबूर करना, पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की साजिश है। यह सीधा-सीधा भाजपा और कार निर्माताओं कीमिलीभगत को दर्शाता है। जनता को गुमराह करने की राजनीति कर रही है भाजपावार्ता के अंत में भारद्वाज ने कहा कि भाजपा जनता के हितों की बात करके उन्हें नुकसान पहुंचा रही है और जनता अब उनके इस दोहरे रवैये को अच्छीतरह समझ चुकी है। आम आदमी पार्टी जनता के साथ खड़ी है और इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी।

बिहार बंद को जनसमर्थन, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, ‘संपूर्ण बिहार बंद’ को मिला जबरदस्त समर्थन

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में INDIA गठबंधन द्वारा बुलाए गए ‘संपूर्ण बिहार बंद’ को प्रदेश भर में जबरदस्त जनसमर्थनमिला। पटना में इस बंद के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव, सीपीआई और सीपीएम समेत विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं नेसड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और इनकम टैक्स गोलंबर से शहीद स्मारक तक भारी जनसैलाब का नेतृत्व किया। राहुल गांधी का आरोप, बिहार में भी ‘महाराष्ट्र मॉडल’ दोहराने की साजिशराहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जैसे महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को प्रभावित किया गया, वैसीही साजिश अब बिहार में रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बीजेपी और आरएसएस के इशारों पर काम कर रहा है।75 लाख नए वोटर, भाजपा को फायदाराहुल गांधी ने दावा किया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच लगभग 75 लाख नए मतदाता जोड़े गए और जहां वोटर बढ़े, वहांभाजपा को जीत मिली। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ इमारतों में हजारों की संख्या में वोटर पंजीकृत किए गए, जबकि गरीबों के वोटजानबूझकर हटाए गए। चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवालकांग्रेस नेता ने कहा कि जब INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची और मतदान केंद्रों की वीडियोग्राफी की मांग की, तब चुनाव आयोग ने कोई जवाब नहींदिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियोग्राफी संबंधी कानून में भी बदलाव कर सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई। “बिहार मॉडल” से लोकतंत्र को खतराराहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष अब “महाराष्ट्र मॉडल” को समझ चुका है, इसलिए चुनाव आयोग अब “बिहार मॉडल” लेकर आया है, जिससे चुनावप्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को संविधान की रक्षा करने के बजाय राजनीतिक एजेंडा साधने वाला बताया। चुनाव आयुक्त चयन प्रक्रिया में बदलाव पर आपत्तिराहुल गांधी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में हुए संशोधन को लोकतंत्र के लिए घातक बताते हुए कहा कि पहले चयन प्रधानमंत्री, विपक्ष केनेता और CJI की समिति करती थी, लेकिन अब CJI की जगह कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है, जिससे निष्पक्षता खत्म हो गई है। बिहार के वोटर के अधिकार की हो रही चोरी राहुल गांधी ने कहा कि बिहार के नागरिकों से उनके मताधिकार को छीनना, उनके भविष्य और अधिकारों की सीधी चोरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया किINDIA गठबंधन बिहार की जनता के साथ मजबूती से खड़ा है और यह साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी।

गुजरात पुल हादसा दुखद, भाजपा शासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम

वडोदरा के पादरा तालुका में महिसागर नदी पर बना पुल गिरने की घटना को लेकर आम आदमी पार्टी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। इस दुर्घटना कोअति दुखद बताते हुए पार्टी ने सवाल उठाया है कि आखिर भाजपा की दीर्घकालीन सत्ता में एक के बाद एक निर्माणाधीन ढांचे बार-बार कैसे गिरते हैं? आप नेताओं ने इसे ‘‘गुजरात मॉडल’’ की सच्चाई बताते हुए तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। 30 वर्षों के शासन में भाजपा नहीं दे सकी सुरक्षित बुनियादी ढांचाआप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, “ईश्वर मृतकों की आत्मा कोशांति दें और परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें। लेकिन आज यह भी सवाल पूछना जरूरी है कि गुजरात में बार-बार ऐसे पुल कैसे ढहतेहैं? क्या यह विकास है या भ्रष्टाचार का पुल?” उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोग यदि दोषी हैं तो उनके खिलाफ भी निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक जिम्मेदारी तयनहीं की जाएगी और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक मासूम लोगों की जान ऐसे ही जाती रहेगी। गुजरात का तथाकथित विकास मॉडल फिर से धराशायीगुजरात प्रभारी और वरिष्ठ आप नेता गोपाल राय ने कहा, “यह कोई पहली घटना नहीं है। मोरबी पुल हादसा, राजकोट अग्निकांड, सूरत का तक्षशिलाअग्निकांड—हर बार भाजपा की नाकामी और भ्रष्टाचार सामने आया है। इस बार वडोदरा में पुल गिरा है। जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। बदलावतय है।” स्थानीय मदद में जुटे आप कार्यकर्ता, सरकार पर गढ़वी का निशानाआप के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष ईशुदान गढ़वी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सरकार की संवेदनहीनता देखिए, मुख्यमंत्री यह कहकर बचाव कररहे हैं कि 23 में से केवल एक पुल गिरा है। यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी शासन प्रणाली की असफलता है।” उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने पहले ही पुल की जर्जर स्थिति को लेकर प्रशासन को चेताया था, लेकिन उनकी बातों को अनदेखा किया गया। आमआदमी पार्टी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। सरकार को जिम्मेदारी लेनी ही होगीआम आदमी पार्टी ने मांग की है कि इस प्रकार की घटनाओं पर केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए। जब तकभ्रष्टाचारियों और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।

गुजरात के वडोदरा में पुल गिरा, महिसागर नदी में समाए वाहन, 9 की मौत, 9 को बचाया गया

गुजरात के वडोदरा जिले के पादरा तालुका में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा हुआ, जब आणंद और पादरा को जोड़ने वाले पुल का एक हिस्साअचानक महिसागर नदी में ढह गया। हादसे के वक्त पुल पर दो ट्रक, एक बोलेरो SUV और एक पिकअप वैन सहित चार वाहन गुजर रहे थे, जो ढहतेही सीधे नदी में गिर गए। इस दुखद दुर्घटना में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 9 अन्य लोगों को बचा लिया गया है। तेज धमाके के साथ टूटा पुल, स्थानीय लोगों ने चलाया बचाव अभियानप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल के टूटने से पहले एक तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वाहन नदी में समा गए। घटना की सूचना मिलते ही फायरब्रिगेड, स्थानीय पुलिस और वडोदरा जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। स्थानीय नागरिकों ने भी मलबे में फंसे लोगों कोबाहर निकालने में प्रशासन की मदद की। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने जताया शोक, मुआवजे की घोषणागुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने घटना पर दुख व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने एक उच्च स्तरीय समितिको मौके पर भेजकर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर संवेदना जताई है और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को₹50,000 की सहायता राशि देने की घोषणा की है। गृह मंत्री हर्ष संघवी ने दी जानकारी, जांच के आदेश जारीगुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हादसे में 9 लोगों की जान गई है और 9 को सुरक्षित बाहर निकाल लियागया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने तकनीकी विशेषज्ञों को घटनास्थल पर भेजने का निर्देश दिया है ताकि कारणों की गहन जांच की जा सके। केजरीवाल का सवाल, 30 साल से सत्ता में भाजपा, फिर क्यों ढहते हैं पुल?दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी घटना पर दुख प्रकट किया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया किपिछले 30 वर्षों से गुजरात की सत्ता में बैठी भाजपा सरकार बार-बार बनने वाले कमजोर और खतरनाक पुलों की जिम्मेदारी क्यों नहीं लेती। उन्होंनेकहा, “ये हादसा केवल दुखद नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है।” स्थानीय लोगों की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया थाएक स्थानीय निवासी ने बताया कि यह पुल ट्रैफिक दुर्घटनाओं और आत्महत्या जैसी घटनाओं के लिए पहले से ही बदनाम था। कई बार इसकी जर्जरस्थिति की शिकायत की गई, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। 1985 में बना था पुल, सरकार ने हाल ही में नए पुल को दी थी मंज़ूरीबताया जा रहा है कि यह पुल 1985 में बनाया गया था और काफी समय से खराब स्थिति में था। हाल ही में राज्य सरकार ने ₹212 करोड़ की लागतसे एक नए पुल के निर्माण की मंज़ूरी दी थी, लेकिन पुराना पुल लगातार उपयोग में बना हुआ था। अब मुख्यमंत्री ने तकनीकी जांच के आदेश दिए हैंताकि निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जा सके।