राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर आरोप, बिहार में ‘चुनाव चोरी’ की साजिश रचने का दावाएसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष हमलावर, सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया(Special Intensive Revision – SIR) को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “चुनाव चोरी की नई साज़िश” करार दिया। ओडिशा केभुवनेश्वर में आयोजित ‘संविधान बचाओ सम्मेलन’ में बोलते हुए राहुल ने कहा कि यह प्रक्रिया दलितों, पिछड़ों, गरीबों और अल्पसंख्यकों को उनकेवोटिंग अधिकार से वंचित करनेकी कोशिश है। चुनाव आयोग बीजेपी का काम कर रहा हैराहुल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब स्वतंत्र संस्था की तरह काम करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इशारे पर काम कर रहाहै। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में हमने देखा कि कैसे चुनाव में धांधली की गई, अब वैसा ही प्रयोग बिहार में दोहराया जा रहा है।” राहुल ने दावा किया किमहाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच एक करोड़ नए वोटर जोड़े गए, लेकिन इनकी पहचान, स्थान और विवरण को लेकर आज तकस्पष्टता नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची और वीडियोग्राफी की मांग के बावजूद चुनाव आयोग ने कोईजानकारी नहीं दी। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर क्यों खड़ा हुआ विवाद?24 जून 2025 को चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की घोषणा की, जिसके तहत राज्य की 7.89 करोड़मतदाताओं की सूची को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 2003 के बाद सूची में शामिल हुए मतदाताओं को अपनी नागरिकताप्रमाणित करने वाले दस्तावेज, जैसे पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र, जमा कराने होंगे। यही शर्त विवाद की जड़ बन गई है, क्योंकि ग्रामीण, गरीब औरवंचित समुदायों के पास ऐसे दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया सुनियोजित ढंग से उन समुदायों को निशाना बना रही है, जो परंपरागत रूप से बीजेपी के खिलाफ वोट करते हैंविशेषकर मुस्लिम, दलित, प्रवासी और गरीब वर्ग। कई नेताओं ने यह दावा किया कि इस कवायद के जरिये करीब दो करोड़ मतदाताओं को सूची सेबाहर किया जा सकता है। कुछ विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया को ‘बैकडोर एनआरसी’ की संज्ञा दी है। चुनाव आयोग का बचाव और स्पष्टीकरणआयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि एसआईआर का उद्देश्य केवल मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना और अवैध प्रवासियों कोहटाना है। आयोग का तर्क है कि 2003 से पहले सूची में आए 4.96 करोड़ मतदाताओं को केवल अपनी जानकारी की पुष्टि करनी होगी, जबकि नएमतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज देने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल, 21 जुलाई तक मांगा जवाबयह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। 10 जुलाई को जस्टिस सुधांशु धूलिया और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एसआईआर प्रक्रिया कीसंवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को भी मान्यदस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि इतनी बड़ी प्रक्रिया को इतनी कम समयसीमा में कैसे पूरा कियाजाएगा। चुनाव आयोग से 21 जुलाई तक जवाब मांगा गया है, और अगली सुनवाई 28 जुलाई को तय की गई है। इस मुद्दे पर आरजेडी सांसद मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने याचिकाएं दाखिल की हैं, जिससे यहविवाद और अधिक गंभीर हो गया है।
सावन 2025, कांवड़ यात्रा की शुरुआत, परशुराम से लेकर राम और रावण तक जुड़ा है पौराणिक इतिहास

सावन 2025 की शुरुआत 11 जुलाई से हो चुकी है और यह पवित्र महीना 9 अगस्त तक चलेगा। शिवभक्तों के लिए यह समय एक विशेष साधनाका प्रतीक है। जैसे ही सावन का आगमन होता है, देशभर की सड़कों पर ‘बम बम भोले’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगती है।लाखों श्रद्धालु कांवड़ उठाकर पैदल यात्रा पर निकलते हैं, जिनका उद्देश्य पवित्र गंगा से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना होता है। इसयात्रा को ‘कांवड़ यात्रा’ कहा जाता है, जो पूर्ण आस्था और तपस्या का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा की शुरुआत को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार भगवान परशुराम ने गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाकरशिवलिंग का अभिषेक किया था, जिसे कई लोग कांवड़ यात्रा की पहली घटना मानते हैं। वहीं, कुछ लोग भगवान राम को पहला कांवड़िया मानते हैंजिन्होंने देवघर में जलाभिषेक किया था। एक अन्य कथा के अनुसार श्रवण कुमार ने अपने वृद्ध माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार तक की यात्राकराई थी, जिसे भी कांवड़ यात्रा का प्रारंभिक रूप माना जाता है। इसके अलावा रावण द्वारा शिवभक्ति और समुद्र मंथन से जुड़ी घटनाएं भी इस यात्रासे जोड़ी जाती हैं। कांवड़ को सदियों से कंधे पर उठाने की परंपरा रही है। सनातन धर्म में इसे सेवा, समर्पण और तपस्या से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि जोभक्त पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ यह यात्रा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन का यह महीना शिवभक्तों के लिए केवल एकत्योहार नहीं, बल्कि आत्मिक साधना और भक्ति का उत्सव है, जो भारतीय संस्कृति और धर्म की गहराई को दर्शाता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एन एस ए अजित डोभाल का बयान, मिशन में शून्य चूक, विदेशों को दी चुनौतीIIT मद्रास के दीक्षांत समारोह में बोले डोभाल, 23 मिनट में पूरा किया गया मिशन, कोई लक्ष्य नहीं चूका

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने शुक्रवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पहली बार सार्वजनिक टिप्पणी की। उन्होंनेमिशन की सफलता पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए विदेशी मीडिया को चुनौती दी कि यदि उनके पास भारत को हुए किसी भी नुकसानका सबूत है, तो उसे दुनिया के सामने पेश करें। 23 मिनट में पूरा हुआ था सटीक सैन्य अभियानआईआईटी मद्रास के 62वें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए डोभाल ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों कोबेहद सटीक तरीके से निशाना बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये ठिकाने सीमा के पास नहीं थे, बल्कि वे इलाके थे जहाँ पुख्ता खुफिया इनपुट केआधार पर आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। डोभाल के अनुसार, पूरे अभियान को सिर्फ 23 मिनट में अंजाम दिया गया, और कोई भी टारगेटमिस नहीं हुआ। विदेशी मीडिया के पास नहीं कोई सबूतअजित डोभाल ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को चुनौती दी कि उन्होंने अब तक कोई ऐसा फोटो या सैटेलाइट इमेजरी प्रस्तुत नहीं की है जो भारत को हुएनुकसान को दिखा सके। उन्होंने कहा, “आप मुझे एक भी फोटो या इमेजरी दिखा दीजिए जिसमें भारत की कोई संपत्ति नष्ट हुई हो, यहां तक कि एकशीशा भी टूटा हो। हम न तो लक्ष्य चूके, न ही गैर-लक्षित जगह को निशाना बनाया।” स्वदेशी तकनीक और रणनीति बनी सफलता की कुंजीएनएसए ने इस सफल ऑपरेशन का श्रेय भारतीय सेना की रणनीतिक एकजुटता और अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक को दिया। उन्होंने बताया किब्रह्मोस मिसाइल, एकीकृत एयर कंट्रोल सिस्टम और बैटलफील्ड सर्विलांस जैसी तकनीकों ने इस मिशन में अहम भूमिका निभाई। सभी टारगेट्स कासटीक अनुमान लगाया गया और उसी के अनुसार कार्रवाई की गई।विदेशी मीडिया पर कटाक्ष,सबूत कहाँ हैं?डोभाल ने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ समेत तमाम विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि तमाम दावों के बावजूद कोई भी एक वैध और पुष्टतस्वीर सामने नहीं लाई गई है जो यह दिखा सके कि भारत को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचा हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बड़ी-बड़ी खबरेंछापने से पहले तथ्यों को सामने लाना ज़रूरी है। डोभाल का स्पष्ट संदेश, भारत तैयार है, और सटीक भीअपने संबोधन के अंत में एनएसए ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब सिर्फ प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व-सक्रिय रणनीति के साथ काम करता है।उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य साफ है आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, और इसमें हम कोई चूक नहीं करेंगे।”
महाराष्ट्र में कैश वीडियो पर सियासी तूफान,संजय राउत का आरोप, संजय शिरसाट सवालों के घेरे मेंइनकम टैक्स नोटिस के अगले दिन वायरल हुआ मंत्री का वीडियो, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें कथित रूप से राज्य सरकार के मंत्री और शिंदे गुट के विधायक संजय शिरसाट अपने आवास पर भारी नकदी के साथ दिखाई दे रहे हैं। वीडियोमें शिरसाट एक कमरे में सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं, और उनके पास नकदी से भरे दो सूटकेस रखे हुए हैं। इस दौरान एक पालतू कुत्ता भी वहीं मौजूदहै। संजय राउत ने वीडियो पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले कासंज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने मराठी में टिप्पणी करते हुए लिखा, “यह वीडियो माननीय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जरूर देखना चाहिए।महाराष्ट्र में क्या चल रहा है, यह वीडियो बहुत कुछ कहता है।” वीडियो से एक दिन पहले मिला था इनकम टैक्स नोटिसगौरतलब है कि संजय शिरसाट को यह वीडियो सामने आने से ठीक एक दिन पहले इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस भेजा गया था। शिरसाट, जो औरंगाबाद (पश्चिम) से विधायक हैं, ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कुछ लोगों की शिकायत पर विभाग ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहाकि वह विभाग के साथ पूरा सहयोग करेंगे और अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। उनका कहना था, “मैं किसी दबाव में नहीं हूं। जो भी आरोप हैं, उनका जवाब कानून के मुताबिक दिया जाएगा। कुछ लोगों को मुझसे दिक्कत है, लेकिन मैं सच्चाई के साथ खड़ा रहूंगा।” लगातार विवादों में शिंदे गुट, विपक्ष हमलावरयह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब शिंदे गुट के एक और विधायक संजय गायकवाड़ पर भी विवाद छाया हुआ है। गायकवाड़ पर एककैंटीन कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट का आरोप लगा है। इस घटना की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आलोचना की है, वहीं विपक्ष नेविधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लगातार सामने आ रहे इन विवादों ने शिंदे गुट और राज्य सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को भ्रष्टाचारऔर सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है।
राजेंद्र पाल गौतम का बयान, रोहित वेमुला की शहादत पर देश को अब भी इंसाफ चाहिए

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के बाद से देश में एक नया राजनीतिक माहौलबना है, जिसमें दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे उत्पीड़न के मामलों में सरकारें पीड़ितों की बजाय आरोपियों केसाथ खड़ी दिखाई देती हैं।उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में जहां पीड़ितों को न्याय मिलता था, वहीं अब उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण और इनाम दिए जा रहे हैं। रोहित वेमुला की मौत, संस्थागत अन्याय का प्रतीकराजेंद्र पाल गौतम ने 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या को ‘संस्थागत हत्या’ करार दिया। उन्होंनेबताया कि रोहित का सात महीने तक छात्रवृत्ति रोकी गई, जिससे उस पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा लगातार प्रताड़ित किएजाने और अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन की आवाज को दबाने के लिए राजनीतिक दखल दिया गया। एन सुशील कुमार द्वारा अपमानजनक टिप्पणियों के बावजूद माफी की बजाय झूठे मुकदमे किए गए और केंद्र सरकार के प्रभावशाली मंत्रियों नेयूनिवर्सिटी प्रशासन को रोहित और उनके साथियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूर किया। भाजपा नेताओं की कथित भूमिका और राजनीतिक संरक्षणगौतम ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं की प्रत्यक्ष भूमिका रही चाहे वे बंडारू दत्तात्रेय हों, स्मृति ईरानी हों या रामचंदर राव। उन्होंने बताया कि नकेवल रोहित वेमुला को हॉस्टल से निकाला गया, बल्कि ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं कि उसे आत्महत्या का कदम उठाना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद इन नेताओं को सज़ा देने की बजाय भाजपा ने उन्हें ऊंचे पदों पर बैठाया। दत्तात्रेय को हरियाणा का राज्यपालबना दिया गया, एन सुशील कुमार को दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया गया और रामचंदर राव को तेलंगाना प्रदेश भाजपाअध्यक्ष बनाया गया। राहुल गांधी की भूमिका और कांग्रेस का रुखगौतम ने कहा कि राहुल गांधी ने रोहित वेमुला की मौत के बाद लगातार न्याय की मांग की, उनकी मां से मुलाकात की और संसद से लेकर सड़क तकइस विषय को उठाया। कांग्रेस, अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन और अन्य प्रगतिशील संगठन हमेशा पीड़ितों के साथ खड़े रहे हैं। अन्य संस्थानों में भी दोहराया जा रहा अन्याय गौतम ने कहा कि देशभर की केंद्रीय विश्वविद्यालयों, IITs, IIMs, और मेडिकल कॉलेजों में समान उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।उन्होंने एम्स में एक मीणा समुदाय के छात्र की आत्महत्या और सफदरजंग मेडिकल कॉलेज में 25 छात्रों को जानबूझकर फेल करने की घटनाओं कोउदाहरण के तौर पर सामने रखा। उन्होंने कहा कि बाद में इन छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं न्यायालय के आदेश पर दोबारा जांची गईं, जिसमें वे सभी पास पाए गए। ‘रोहित वेमुला एक्ट’ की आवश्यकता और प्रगतिराजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ‘रोहित वेमुला एक्ट’ बनाया जाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया किकांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रायपुर अधिवेशन में इस कानून को लाने का प्रस्ताव रखा था और अब कांग्रेस-शासित राज्य जैसे कर्नाटक और तेलंगानामें इसे लागू करने की दिशा में सक्रिय पहल की जा रही है। इस कानून में विश्वविद्यालयों में उत्पीड़न के शिकार छात्रों के लिए काउंसलिंग, शिकायत केंद्र और विशेष तंत्र बनाने का प्रस्ताव है, जिससे दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक छात्रों को सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
दिल्ली की जनता को बीजेपी पर भरोसा करना पड़ा भारी, बोले सौरभ भरद्वाज

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को राजधानी में हुए जलभराव पर भारतीय जनता पार्टी को कठघरे में खड़ाकिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने 27 वर्षों बाद बीजेपी को अवसर दिया, लेकिन महज़ कुछ महीनों में ही स्पष्ट हो गया कि यह फैसलागलत था। भारी बारिश के थोड़ी देर में ही दिल्ली की सड़कें, गलियां और पॉश कॉलोनियों तक पानी में डूब गईं, जिससे नागरिकों को भारी परेशानियोंका सामना करना पड़ा। चारों ‘इंजन’ बीजेपी के पास, फिर भी राजधानी बेहालसौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में एमसीडी, एनडीएमसी, डीडीए और पीडब्ल्यूडी चारों महत्त्वपूर्ण निकायों पर भाजपा का नियंत्रण है। इसकेबावजूद हर सड़क और कॉलोनी में जलभराव की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा, “अगर एमसीडी हमारे पास होती, तो आज भाजपा हम पर दोषारोपणकर रही होती। अब जनता देख रही है कि जिनके पास सारी शक्तियां हैं, वही पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।” गुरुग्राम से लेकर दिल्ली तकभाजपा की सरकार हरियाणा में एक दशक से अधिक समय से है, इसके बावजूद गुरुग्राम में हर साल भारी बारिश में करोड़ों रुपये की गाड़ियाँ पानी मेंडूब जाती हैं। भारद्वाज ने कहा कि दिल्लीवालों ने सोचा था कि बीजेपी नेतृत्व कुछ अलग करके दिखाएगा, लेकिन नतीजा भी हरियाणा जैसा हीनिकला। उन्होंने बताया कि आज मध्यमवर्गीय परिवारों के व्हाट्सएप ग्रुपों, ड्राइंग रूम्स और क्लबों में यही चर्चा है कि बीजेपी को लाना भारी भूल थी। भाजपा की ‘बारिश टेस्ट’ में फेल: सौरभ भारद्वाजसौरभ भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा कि पहला ही मॉनसून भाजपा सरकार की नाकामी को उजागर कर गया। जलभराव, जल संकट और बिजलीकटौती जैसी समस्याओं ने दिल्ली के नागरिकों की दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि जनता आज खुद अनुभव कर रही है किबीजेपी शासन में राजधानी का बुनियादी ढांचा कितनी बुरी स्थिति में है।
ट्रंप का टैरिफ हमला, ब्राजील समेत 20 से अधिक देशों पर भारी आयात शुल्क, BRICS को भी दी खुली चेतावनी

अमेरिका ने 7 नए देशों पर आयात शुल्क लगाया, ब्राजील पर सबसे कठोर कदमअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वैश्विक व्यापार पर सख्त रुख अपनाते हुए 7 देशों पर नए टैरिफ लागू करने की घोषणा की, जिसमेंश्रीलंका पर 30%, मोल्दोवा और ब्रुनेई पर 25%, और फिलीपींस पर 20% शुल्क लगाया गया। सबसे बड़ा झटका ब्राजील को मिला, जिस पर ट्रंपने सीधे 50% का आयात शुल्क लगाने की घोषणा कर दी। ये शुल्क 1 अगस्त से प्रभावी होंगे। ब्राजील की चेतावनी, हम भी देंगे जवाबब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने इस निर्णय के खिलाफ सख्त प्रतिक्रिया दी और कहा कि अगर अमेरिका एकतरफा शुल्कलगाता है, तो ब्राजील भी ‘आर्थिक पारस्परिकता कानून’ के तहत बराबर का जवाब देगा। उन्होंने कहा कि ब्राजील एक संप्रभु राष्ट्र है और वह बाहरीदबाव स्वीकार नहीं करेगा। बोलसोनारो विवाद का हवाला देकर टैरिफ को बताया उचितट्रंप ने ब्राजील पर लगाए गए भारी टैरिफ को पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के साथ हो रहे व्यवहार और “अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार” कापरिणाम बताया। बोलसोनारो पर फिलहाल तख्तापलट की साजिश रचने का मुकदमा चल रहा है, जिस पर ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिरकी है। राष्ट्रपति लूला की कड़ी प्रतिक्रिया, X पर किया पोस्टलूला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर ट्रंप की आलोचना करते हुए लिखा कि ब्राजील की न्यायपालिका स्वतंत्र है और उस पर किसीविदेशी नेता की टिप्पणी या दबाव का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोलसोनारो पर चल रही कार्रवाई न्याय की प्रक्रिया का हिस्सा हैऔर इस पर कोई बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप के आरोपों को बताया झूठा औ गुमराह करने वालालूला ने ट्रंप द्वारा लगाए गए आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि अमेरिका को ब्राजील के साथ व्यापार में पिछले 15 वर्षों में करीब 410 अरबडॉलर का लाभ हुआ है। उन्होंने अमेरिकी व्यापार घाटे के दावे को खारिज कर दिया। सिर्फ ब्राजील ही नहीं, दक्षिण कोरिया और जापान भी निशाने परट्रंप ने इससे पहले दक्षिण कोरिया और जापान से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 25% शुल्क लगा दिया था। उन्होंने इन फैसलों को अमेरिकीव्यापार घाटा संतुलित करने की दिशा में जरूरी बताया। 20 से अधिक देश ट्रंप की टैरिफ नीति के दायरे में अब तक ट्रंप प्रशासन ने म्यांमार, लाओस, दक्षिण अफ्रीका, कजाखस्तान, मलेशिया, ट्यूनिशिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, कंबोडिया, थाईलैंड, सर्बिया और बोस्निया सहित 20 से अधिक देशों को आयात शुल्क के दायरे में लाया है। ट्रंप का कहना है कि जो देश अमेरिका के साथ अनुचितव्यापार कर रहे हैं, उन्हें इसका जवाब मिलेगा। अमेरिकी कंपनियों को मिला इनसेंटिवट्रंप ने यह भी घोषणा की कि जो विदेशी कंपनियां अमेरिका में उत्पादन स्थापित करेंगी, उन्हें इन आयात शुल्कों से छूट दी जाएगी। हालांकि, उन्होंनेयह चेतावनी भी दी कि यदि कोई देश जवाबी शुल्क लगाएगा, तो अमेरिका और अधिक शुल्क बढ़ा सकता है। BRICS को दी सीधी चेतावनीट्रंप ने BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) को अमेरिका विरोधी नीति चलाने का आरोप लगाते हुए उन्हें 10% अतिरिक्तशुल्क लगाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि BRICS समूह अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया है और इसे अबचुनौती देना ज़रूरी है।
वडोदरा में गंभीरा पुल हादसे में मौतों की संख्या 15, चार लोग लापता, राष्ट्रीय और राज्य आपदा बल जारी खोज और बचाव अभियानों में जुटे, सार्वजनिक सहयोग की अपील

वडोदरा में वडोदरा और आणंद के बीच स्थित गंभीरा पुल के ढहने की दुर्घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। एक दिन पहले पुल का एकहिस्सा टूटकर महिसागर नदी में गिर गया था। कलेक्टर अनिल धमेलिया ने बताया कि तीन और शव बरामद हुए हैं, जिससे मृतकों की संख्या में वृद्धिहुई है। साथ ही, चार लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी खोज जारी है। बचाव और राहत कार्यराष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) एवं राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) द्वारा चार किलोमीटर तक जारी खोज और बचाव अभियान मेंकई बाधाएँ सामने आई हैं। घटनास्थल पर दो वाहन कीचड़ में फंसे हुए हैं जिन्हें राहत पहुँचाने की कोशिशें जारी हैं। पुल से लटके एक खाली टैंकर कीस्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि टैंकर को हिलाया गया तो वह गिरने की आशंका हो सकती है, इसलिए इसे स्थिर करने की प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रियाकलेक्टर अनिल धमेलिया और अन्य स्थानीय अधिकारी कल से ही राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक रोहन आनंद नेबताया कि पुल के मध्य में 10-15 मीटर का स्लैब ढह गया है। इस हादसे में दो ट्रक, दो पिकअप वैन, और एक रिक्शा नदी में गिर गए, जबकि दोवाहन पुल पर फंसे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नौ लोगों को बचाया गया है, जिनमें से पाँच को अस्पताल में रेफर कर दिया गया है और उनकीहालत गंभीर नहीं है। सरकारी मुआवजा घोषणाएँप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से 2-2 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है, वहीं घायल लोगों को 50,000 रुपये दिए जाने का निर्णय लिया गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपयेऔर घायलों को 50,000 रुपये का मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।
दिल्ली-एनसीआर में सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके, लोग घरों से बाहर निकले, हरियाणा के झज्जर में रहा भूकंप का केंद्र, रिक्टर स्केलपर तीव्रता 4.4 दर्ज

गुरुवार सुबह दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे दहशत में आए लोग अपने घरों से बाहरनिकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन झटकों की तीव्रता इतनी थी कि कईइमारतें हिल गईं और लोगों में घबराहट फैल गई। झज्जर में था भूकंप का केंद्रराष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर में था, जहां सुबह 9:04 बजे रिक्टर स्केल पर 4.4 तीव्रता वाला भूकंप दर्जकिया गया। इसके झटके जींद, बहादुरगढ़ और सोनीपत जैसे इलाकों में भी महसूस किए गए। खासकर बहादुरगढ़ और सोनीपत में लोग तेज झटकोंके कारण घरों से बाहर निकल आए। हाईराइज इमारतों में दहशत का माहौलदिल्ली और नोएडा की ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग भूकंप के झटकों से ज्यादा प्रभावित हुए। कई रिहायशी सोसायटी में लोग अचानक बाहरनिकल आए और काफी देर तक खुले में ही डटे रहे। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भी अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि मकानकुछ सेकंड के लिए झूलने जैसा महसूस हुआ। 17 फरवरी को भी आया था भूकंपइससे पहले 17 फरवरी 2024 को भी दिल्ली और उसके आसपास भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप सुबह 5:37 बजे आया थाऔर इसकी तीव्रता 4.0 मापी गई थी। इसका केंद्र नई दिल्ली में जमीन से 5 किलोमीटर की गहराई पर था। गहराई कम होने के कारण उस समय भीइसका असर दिल्ली-एनसीआर में अधिक महसूस किया गया था। भूकंप के पीछे का वैज्ञानिक कारणवैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की सतह सात प्रमुख और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी होती है, जो लगातार गति करती रहती हैं। जब ये प्लेट्सएक-दूसरे से टकराती हैं, तो उनके किनारे मुड़ने या टूटने लगते हैं। इस प्रक्रिया में संचित ऊर्जा जब बाहर निकलती है, तो धरती की सतह पर कंपनहोता है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं।
यमन में फांसी की सजा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 14 जुलाई को

केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में सुनाई गई फांसी की सजा के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है।अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की है, जबकि यमन में फांसी की संभावित तारीख 16 जुलाई बताई जा रही है।याचिका में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि वह कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करते हुए निमिषा की जान बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। 2017 में हत्या का आरोप, 2020 में सुनाई गई थी सजानिमिषा प्रिया, जो केरल के पलक्कड़ जिले की निवासी हैं, पर 2017 में अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप लगा था। उन्हें 2020 मेंमौत की सजा सुनाई गई थी और 2023 में उनकी अंतिम अपील भी खारिज कर दी गई। फिलहाल वे यमन की राजधानी सना की जेल में बंद हैं। शरिया कानून के तहत ‘ब्लड मनी’ का विकल्पयाचिका में अधिवक्ता सुभाष चंद्रन केआर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शरिया कानून के तहत ‘ब्लड मनी’ का प्रावधान मौजूद है, जिसके तहत यदिमृतक के परिवार को मुआवजा दिया जाए और वे इसे स्वीकार कर लें, तो सजा माफ हो सकती है। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि भारत सरकार इसदिशा में तेजी से कूटनीतिक पहल करे, ताकि फांसी को रोका जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से मांगी सहायतासुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अटॉर्नी जनरल की राय मांगी है और याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह याचिका की एक प्रति अटॉर्नीजनरल को उपलब्ध कराएं। यह याचिका ‘सेव निमिषा प्रिया – इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ नामक संगठन की ओर से दायर की गई है, जो निमिषाको कानूनी सहायता देने के लिए सक्रिय है। फैसले पर टिकी 38 वर्षीय नर्स की जिंदगीमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यमन प्रशासन ने निमिषा प्रिया की फांसी की तारीख 16 जुलाई तय कर दी है। ऐसे में यह मामला अब पूरी तरह भारतसरकार के कूटनीतिक प्रयासों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करता है। निमिषा का परिवार और समर्थन समूह भारत सरकार से उम्मीद कर रहे हैंकि अंतिम समय में कोई रास्ता निकले और उनकी जान बचाई जा सके।