बिहार में आशा-ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने को लेकर सियासत गरमाई, तेजस्वी यादव ने दावा किया क्रेडिट

बिहार में आशा और ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने पर सियासत शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पर भी अपना क्रेडिटले लिया और कहा कि मैंने 17 महीने स्वास्थ्य मंत्री रहते आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू दी थी जो अंतिमस्टेज में थी लेकिन तब तक सरकार और मुख्यमंत्री आदतन पलटी मार गए. ये निकम्मी एनडीए सरकार उस पर भी दो साल से कुंडली मार कर बैठी रही. अब आखिरकार इन्हें आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की हमारी इस मांग के सामने भी झुकना ही पड़ा. तेजस्वी यादव ने कहाकि यहां सरकार ने चालाकी करते हुए हमारी इस मांग को पूर्णरूपेण लागू नहीं किया. प्रोत्साहन राशि की जाएगी प्रदानइनको प्रोत्साहन राशि नहीं बल्कि मानदेय मिलना चाहिए. हम इन्हें मानदेय देंगे अब इस सरकार को आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका तेजस्वी यादव नेकहा कि हमारी मांगों, घोषणाओं, वादों, इरादों और दावों को देखकर इस नकलची, थकी-हारी, दृष्टिहीन और विजन रहित सरकार का डर देखकरअच्छा लगता है. ये डर अच्छा है लेकिन 20 साल तक क्या यह मूंगफली छील रहे थे? यही सरकार, इनके नेता-मंत्री और अधिकारी जो हमारी घोषणाका मखौल उड़ाते थे वो अब सत्ता जाते देख दौड़ रहे है. सब कुछ तेजस्वी का ही नक़ल करोगे या अपनी भी अक्ल लगाओगे? बता दें कि बुधवार सुबहही सीएम नीतीश कुमार ने आशा और ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ने का एलान किया है. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि आशाकार्यकर्ताओं को अब एक हजार रुपये की जगह तीन हजार रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी. स्वास्थ्य सेवाएं और होगीं मजबूतसाथ ही ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 300 रुपये की जगह 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी. इससे उनका मनोबल और बढ़ेगातथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी.और रसोइयां के मानदेय में भी बढ़ोतरी करने की हमारी मांग को भी मजबूरन मानना ही पड़ेगा. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारे 17 महीनों के अल्पकार्यकाल में ही हमने विकास मित्र, शिक्षा मित्र/टोला सेवक, तालीमी मरकज़ और पंचायती राज जनप्रतिनिधियों का मानदेय बढ़ाया था. मुफ्तबिजली, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के बाद अब आशा और ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने पर क्रेडिट पॉलिटिक्स शुरू हो चुकी है. तेजस्वीयादव ने कहा कि नीतीश सरकार को हमारी इस मांग के सामने भी झुकना ही पड़ा.
दिल्ली में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था होगी अनिवार्य

राष्ट्रीय राजधानी में महिलाएं अब दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में नाइट शिफ्ट में भी काम कर सकेंगी. इसके लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा इंतजामबढ़ाने होंगे. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को कारोबारी हब बनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखतेहुए यह फैसला किया गया है. मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बताया कि इस मुद्दे पर उनकी उपराज्यपाल वीके सक्सेना से लगातार बातचीत चल रही थी. श्रम विभाग को दिल्ली दुकान एवं स्थापना अधिनियम-1954 में बदलाव के निर्देश दिए गए थे. अब नियमों में बदलाव के साथ प्रस्ताव जल्द हीमंजूरी के लिए उपराज्यपाल को भेजा जाएगा. मौजूदा नियम के अनुसार महिलाओं को रात 8 या 9 बजे से सुबह तक की रात्रि पाली में काम करने कीअनुमति नहीं है. कल्याण है हमारी प्राथमिकतासीएम रेखा ने बताया कि महिला कल्याण हमारी प्राथमिकता है नियमों में बदलाव से महिलाओं को आर्थिक आजादी मिलेगी. उन्होंने बताया किहरियाणा, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महिलाओं को रात्रि पाली में काम करने की पहले से ही छूट है. महिलाओं को बिना डर या तनाव केकाम करने का मौका मिलेगा. यह कदम दिल्ली को व्यापार और महिला सशक्तीकरण के मामले में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है. नए नियमोंके मुताबिक, नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए महिलाओं की लिखित सहमति जरूरी होगी. कार्यस्थल पर सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड, सुरक्षित परिवहन, रेस्ट रूम, टॉयलेट और लॉकर की व्यवस्था अनिवार्य होगी. बनानी होगी शिकायत समितियौन उत्पीड़न रोकथाम (पीओएसएच) अधिनियम के तहत शिकायत समिति बनानी होगी. वेतन का भुगतान बैंक या ईसीएस से, ईएसआई, बोनस, भविष्य निधि, साप्ताहिक अवकाश और ओवरटाइम का भुगतान भी सुनिश्चित करना होगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को कारोबारी हबबनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है. यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम(POSH) के अंतर्गत शिकायत समिति बनाना जरूरी होगा. इसके अलावा वेतन बैंक या ईसीएस के माध्यम से दिया जाएगा, साथ ही ईएसआई, बोनस, भविष्य निधि, साप्ताहिक अवकाश और ओवरटाइम का भुगतान भी सुनिश्चित होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम महिलाओं को आर्थिकस्वतंत्रता देगा और दिल्ली को व्यापार और महिला सशक्तिकरण में अग्रणी बनाएगा.
लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर गरमागरम बहस राफेल से POK तक उठे सवाल, सरकार ने दी दो-टूक जवाब

लोकसभा में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर लगभग 10 घंटे लंबी चर्चा हुई. इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीचतीखी नोकझोंक देखने को मिली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, गृहमंत्री अमित शाह और विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं नेअपने विचार रखे. इस चर्चा में राफेल विमान, ट्रंप की मध्यस्थता, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और यहां तक कि मैकडॉनल्ड्स जैसे उदाहरणों ने चर्चाको दिलचस्प बना दिया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य कार्रवाई का जवाब था, जो पहलगाम आतंकी हमले केबाद शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि भारत ने यह ऑपरेशन इसलिए रोका क्योंकि अपने सभी सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए थे. ऑपरेशन सिंदूर पूरीतरह सफल रहा. कोई भी महत्वपूर्ण सैन्य संपत्ति नष्ट नहीं हुई. उन्होंने आगे कहा कि अगर पाकिस्तान फिर कोई हरकत करता है तो यह ऑपरेशन फिरशुरू होगा. कितने गिरे राफेलकांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बहस के दौरान पूछा कि हम जानना चाहते हैं कि कितने राफेल विमान गिरे? अगर कुछ गिरे हैं. तो यह देश के लिए बहुतबड़ा नुकसान है उन्होंने यह भी कहा कि अगर हमला किया गया था तो उसे अंजाम तक पहुंचाना चाहिए था और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर वापसलेना चाहिए था उन्होंने सरकार से पारदर्शिता की मांग की. विपक्ष ने दावा किया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीचयुद्धविराम कराया था. इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच किसी भी बातचीत में व्यापार यायुद्धविराम का कोई संबंध नहीं था. जयशंकर के बयान के बीच विपक्ष ने शोरगुल शुरू किया, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह भड़क गए और कहा, किइनको भारत के विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं, लेकिन अमेरिका पर है. बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें पाकिस्तान केप्रति सहानुभूति रखने वाला बताया। वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री की 56 इंच की छाती 36 इंच की होजाती है. चर्चा के दौरान राजनीतिक कटाक्षों का दौर लगातार चलता रहा. राष्ट्रहित है सर्वोपरिराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सभी दलों के नेताओं कोआतंकवाद के खिलाफ विदेशों में भारत का पक्ष रखने का मौका दिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है, उसके बाद राज्य, फिर पार्टी औरआखिर में परिवार आता है. लोकसभा में चर्चा के बाद अब मंगलवार को राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस होगी. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर गृहमंत्री अमित शाह के बोलने की संभावना है. यह बहस देश की सुरक्षा नीति, सैन्य रणनीति और राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर अहम मानी जारही है. लोकसभा में सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर 10 घंटे लंबी बहस हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन कीसफलता गिनाई, तो कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने राफेल गिरने का सवाल उठाया. जयशंकर ने ट्रंप की मध्यस्थता को नकारा, तो अमित शाह ने विपक्षकी सोच पर तंज कसा। चर्चा में POK, आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे छाए रहे.
भारत-दक्षिण कोरिया और भारत-जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी पर जोर, Indo-Pacific में सहयोग को बताया अत्यंत महत्वपूर्ण

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के नवनियुक्त विदेश मंत्री चो ह्यून से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की. उन्होंने विदेश मंत्री चो ह्यून को उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं. इससे पहले, 21 जुलाई को डॉ. जयशंकर ने चो ह्यून को दक्षिणकोरिया के नए विदेश मंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति पर बधाई दी थी। उन्होंने एक पोस्ट में दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने और नईदिल्ली और सियोल के बीच एक विशेष रणनीतिक साझेदारी हासिल करने की दिशा में मिलकर काम करने का विश्वास जताया. उन्होंने सोशलमीडिया पोस्ट में लिखा, हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए साथ मिलकर काम करने के लिए हम तत्पर हैं। 17 जुलाईको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के विशेष दूतों के एक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था. फुनापोशी से की मुलाकातभारत और जापान ने सोमवार को रक्षा, आर्थिक सुरक्षा, व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचे समेत अन्य क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की. विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने द्विपक्षीय विदेश सचिव-उपमंत्री वार्ता के लिए जापान के उप विदेश मंत्री ताकेहिरोफुनाकोशी से मुलाकात की. जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने जापान के आर्थिक सुरक्षा मंत्री मिनोरू किउची से मिलकर द्विपक्षीय विशेषरणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की. दोनों पक्षों ने खासकर आर्थिक सुरक्षा, अंतरिक्ष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केक्षेत्रों में जोर दिया. जापान स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को कहा, दोनों देशों में आर्थिक सुरक्षा, अंतरिक्ष और विज्ञान-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आगेकाम को और आगे ले जाने पर रणनीतिक जोर दिया गया. यह बैठक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से हाल ही में हुईकई राजनयिक और रणनीतिक बैठकों के बीच हुई है. इस सप्ताह की शुरुआत में, टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में आईपीओआई : समुद्री संपर्क मेंभारत-जापान साझेदारी कार्यक्रम आयोजित किया गया था. राजदूत सिबी जॉर्ज ने उद्घाटन भाषण दिया, जिसके बाद जापान के पूर्व रक्षा मंत्री औरसांसद मिनोरू किहारा, भारत के सचिव (पूर्व) पी. कुमारन और जापान के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शिंगो मियामोतो ने विशेष भाषण दिए।चर्चाएं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री संबंधों को बढ़ाने पर केंद्रित रही. बताया अत्यंत महत्वपूर्ण28 जुलाई 2025 को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जापान के उप विदेश मंत्री ताकेहीरो फुनाकोशी से नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की. दोनों नेभारत‑जापान की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को Indo‑Pacific क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्णबताया. इस बातचीत में राजनीतिक, रक्षा, आर्थिक सुरक्षा, व्यापार‑निवेश, आधारभूत सुविधाएं, प्रौद्योगिकी सहयोग और लोक‑जन संपर्क जैसेव्यापक क्षेत्रों पर गहन समीक्षा हुई. विक्रम मिस्री ने भारत‑जापान साझेदारी को 21वीं सदी का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक गठजोड़बताया, जिसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, डिजिटल सेवाएँ, शहरी अधोसंरचना और रक्षा सहयोग जैसे नए क्षेत्रों को शामिल करने पर बल दियागया.
5 वर्ष पूरे हुए NEP को, ABSS‑2025 में नई शिक्षण पहलें पेश, पीएम मोदी ने शिक्षा को राष्ट्र के निर्माण का बताया आधार

एनईपी के पांच वर्ष पूरे होने पर एक संदेश में, पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय मंगलवार को अखिल भारतीय शिक्षा समागम (एबीएसएस) काआयोजन कर रहा है और इस कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल शुरू की जाएंगी. पीएम मोदी ने कहा, शिक्षा वह माध्यम है जो व्यक्ति कोआत्मनिर्भर और राष्ट्र को सशक्त बनाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं नईराष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करके छात्रों के समग्र और बहुआयामी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. एनईपी के पांच वर्ष पूरे होने पर एक संदेश में, पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय मंगलवार को अखिल भारतीय शिक्षा समागम (एबीएसएस) काआयोजन कर रहा है और इस कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल शुरू की जाएंगी. राष्ट्र को बनाती है सशक्तपीएम मोदी ने कहा, शिक्षा वह माध्यम है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर और राष्ट्र को सशक्त बनाती है. हमारा उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनाहै जिसमें विद्यार्थी अपनी रुचि, क्षमता और सपनों के अनुसार आगे बढ़ सकें. आज देश गौरवशाली भारतीय संस्कृति से जुड़ी शिक्षा को तकनीक औरवैश्विक मानकों से सुसज्जित करके प्रगति के पथ पर अग्रसर है. पीएम ने कहा, पिछले पांच वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में अनेक सकारात्मक बदलाव हुए हैं. राष्ट्रीय शिक्षा नीति अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करके विद्यार्थियों के समग्र और बहुआयामी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. केंद्रीयशिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मंगलवार को अखिल भारतीय शिक्षा समागम (एबीएसएस 2025) का उद्घाटन करेंगे। इस समागम में शिक्षा को अधिकसुलभ, व्यावहारिक, कौशल-उन्मुख बनाने पर विचार विमर्श होगा. इसमें रोजगार के अवसरों के साथ समेकित रूप से एकीकृत करने पर जोर दियाजाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्र गतिशील वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो. 2020 की भूमिका होगी मह्वपूर्णप्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत काल में भारत एक भव्य और विकसित राष्ट्र के निर्माण की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है. इस दौरान, हमारे युवाओं केआत्मविश्वास, जिज्ञासा और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. शिक्षा समागम हमारे साझासंकल्प और सहयोग की भावना का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा, मुझे विश्वास है कि यह आयोजन न सिर्फ शिक्षण संस्थानों को अपनी सर्वोत्तमप्रथाओं, रणनीतियों और उपलब्धियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए निरंतर प्रयासोंको भी और सशक्त करेगा. शिक्षा को अधिक सुलभ, व्यावहारिक, कौशल-उन्मुख, और रोज़गार से जुड़ा बनाने पर जोर। इसका उद्देश्य छात्रों कोवैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सक्षम बनाना है. धर्मेंद्र प्रधान ने ABSS‑2025 का उद्घाटन किया. समागम में नीति की प्रभावशीलता, चुनौतियाँ औरआगे की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ.
ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में बहस, लेकिन कांग्रेस में उठे असंतोष के सुर थरूर-तिवारी की चुप्पी ने खड़े किए सवाल

ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में जारी चर्चा के दौरान जहां एक ओर कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है. वहीं पार्टी के भीतर असंतोष केसुर भी उभरकर सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ नेता शशि थरूर के चर्चा में शामिल न होने पर पहले से सवाल उठ रहे थे और अब कांग्रेस सांसद मनीष तिवारीकी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस बहस को और रोमांचक बना दिया है मनीष तिवारी ने सोमवार को एक्स पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमेंबताया गया कि उन्हें और थरूर को संसद बहस से दूर रखा गया है. उन्होंने इस पोस्ट के साथ 1970 की फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ के देशभक्ति गीत कीपंक्तियां लिखीं कि भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं. इस इशारे को कांग्रेस नेतृत्व पर निशाने के रूप में देखा जा रहा है. शशि थरूरविदेश मामलों पर अपनी बेबाक राय और भाषण शैली के लिए मशहूर हैं. पहला दायित्व राष्ट्र के प्रतिहालांकि इसके बावजूद वो कांग्रेस के वक्ताओं की सूची में नहीं थे मीडिया ने जब उनसे इस पर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कराकर सिर्फ ‘मौन व्रत’ कहा थरूर पहले भी कह चुके हैं कि उनका पहला दायित्व राष्ट्र के प्रति है उन्होंने कहा था कि पार्टी देश को बेहतर बनाने का जरिया है. इसलिए जो भीपार्टी हो, उसका लक्ष्य होना चाहिए भारत को बेहतर बनाना. इस बयान को पार्टी नेतृत्व से उनके मतभेद का संकेत माना जा रहा है. खासकर पहलगामहमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनके सार्वजनिक बयानों के बाद से ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार की वैश्विक कूटनीतिक पहल के तहतमनीष तिवारी और शशि थरूर उन सांसदों में शामिल थे. जिन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों में भेजा गया था. इसी मिशन का हिस्सा रहे फतेहगढ़ साहिबसे कांग्रेस सांसद अमर सिंह भी बहस में नहीं बोल रहे हैं. हालांकि आनंद शर्मा और सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ नेता भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे. लेकिन वे वर्तमान में सांसद नहीं हैं. भाजपा ने इस मौके को भुनाने में देर नहीं की. वरिष्ठ भाजपा नेता बैजयंत जय पांडा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुएकहा कि आपके पास अच्छे वक्ता हैं. शशि थरुर है अच्छे वक्तालेकिन पार्टी उन्हें बोलने नहीं दे रही मेरे मित्र शशि थरूर जी बहुत अच्छे वक्ता हैं, लेकिन उन्हें आपकी पार्टी बोलने ही नहीं दे रही है। ऑपरेशन सिंदूरजैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर मुद्दे पर चर्चा के दौरान पार्टी के कुछ सबसे विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण रखने वाले नेताओं को मंच से दूर रखने परकांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं. यह भी दिखाता है कि पार्टी भीतर से एकमत नहीं है और नेतृत्व के फैसलों को लेकर असंतोष बढ़ रहाहै.मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे नेताओं की यह नाराजगी कांग्रेस नेतृत्व के लिए गंभीर चेतावनी हो सकती है। ऐसे समय में जब पार्टी सरकार कोघेरने की कोशिश कर रही है, उसके भीतर उठती आवाजें भाजपा को विपक्ष पर हमला करने का नया मौका दे रही हैं यह बहस संसद से निकलकर अबकांग्रेस के अंदरूनी हालात पर भी केंद्रित हो गई है. लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के भीतर असंतोष सामने आया है. वरिष्ठनेता शशि थरूर और मनीष तिवारी को बहस से बाहर रखने पर सवाल उठे हैं। तिवारी की सोशल मीडिया पोस्ट और थरूर की ‘मौन व्रत’ टिप्पणी नेपार्टी नेतृत्व की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
नीतीश फिर बनेंगे मुख्यमंत्री चिराग पासवान का बड़ा दावा, आलोचना के बाद भी जताया समर्थन

केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि बिहार के विधानसभा चुनावों के बाद नीतीश कुमार ही फिर सेमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. पासवान की यह टिप्पणी नीतीश कुमार सरकार का समर्थन करने पर अफसोस जताने के दो दिन बाद आई है. दो दिनपहले उन्होंने आरोप लगाया था कि नीतीश सरकार ने अपराधियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है.एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात करते हुए, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के मामले में प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी पर हमला करने के लिए सेना को निशाना बनाया जा रहा है. पासवान ने कहा, एनडीए चुनावों के लिए एक विजयी गठबंधन है उन्होंनेप्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. चिराग ने कहा, मैंने कई बार दोहराया है कि मेरी प्रतिबद्धता और प्रेम प्रधानमंत्री के प्रति है. मुख्यमंत्री पद की लेंगें शपथप्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, बिहार में चुनाव लड़े जाएंगे चुनाव परिणामों के बाद, नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. बिहार मेंमतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर पासवान ने कहा कि यह प्रक्रिया पहले चार बार हो चुकी है और इसमें कोई अंतर नहीं आयाहै, सिवाय इसके कि अब डिजिटल तकनीक को जोड़ दिया गया है. समारोह से बाहर पत्रकारों से बातचीत में, चिराग ने विपक्ष पर आरोप लगाया किऑपरेशन सिंदूर पर प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करने के लिए सेना को निशाना बनाया जा रहा है उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता औरप्रेम दोहराया, और कहा कि बिहार में चुनाव उनके नेतृत्व में लड़े जाएंगे. इसके अलावा उन्होंने मति मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर कहा कि यहप्रक्रिया पहले चार बार हो चुकी है. इसमें नया सिर्फ डिजिटल तकनीक जोड़ना है यह बयान सियासी उतार-चढ़ाव और गठबंधन की आंतरिकजटिलताओं को दर्शाता है. सरकार की आलोचनाचिराग पासवान ने तत्कालीन सरकार की आलोचना की, लेकिन फिर भी नीतीश के कार्यकाल की पुष्टि की है। NDA में एक ओर जहां ब्लॉक के नेतानीतीश कुमार संक्रमक चेहरे बने दिख रहे हैं, वहीं चिराग जैसे सहयोगी नेता ने हालिया विवादास्पद बयानबाज़ियों से संकेत दिया कि गठबंधन के भीतरमतभेद भी हैं कुछ JDU नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव में नीतीश ही मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होंगे, तो JDU गठबंधन छोड़ सकती है. इससेगठबंधन में तनाव के संकेत मिलते हैं चिराग पासवान का बयान बिहार की आगामी राजनीति में NDA के चुनाव अभियान की रणनीतिक दिशा, मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर गठबंधन के भीतर प्रतिक्रिया, और चुनौतीपूर्ण राजनीतिक समीकरणों का संकेत देता है. यह बयान बिहार विधानसभा चुनावोंमें गठबंधन की स्थिति और भ्रष्टाचार एवं कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित सियासी बहस की पड़ताल करता है.
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में सियासी संग्राम आज अमित शाह और PM मोदी देंगे जवाब, विपक्ष का ट्रंप कार्ड हमला

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत हो चुकी है. सोमवार से शुरू हुई चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहसदेखने को मिली यह चर्चा आज भी जारी रहेगी. इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच दो-दो हाथ होना तय है. अन्य सांसदों के प्रस्तावों के बाद आजकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच लोकसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान वे विपक्ष को करारा जवाब देंगे. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम को समापन भाषण देंगे. वहीं, राज्यसभा में भी आज से पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत होगी. राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए आवंटित कुल 16 घंटों में से कांग्रेस को लगभग दो घंटे का समय आवंटित किया गया है. जिसके दौरानराज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सदन में बहस की शुरुआत करेंगे.भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने के अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार दावे को लेकर विपक्ष राज्यसभा में भी सरकार को घेर सकताहै. ट्रंप सार्वजनिक मंचों से कई बार दावा कर चुके हैं उन्होंने व्यापार रोकने की धमकी देकर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाई थी. पहले ही किया जा चुका है खारिजहालांकि, भारत सरकार की ओर से उनके इस दावे को पहले ही खारिज किया जा चुका है. लेकिन, लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने इसे पहले हीमुद्दा बना लिया है. राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष विदेश नीति को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है. राहुल और विपक्षी नेता दावा करते रहे हैंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत को किसी दूसरे देश का सहयोग नहीं मिला. इसके अलावा विपक्ष पहलगामआतंकी हमले में सुरक्षा चूक का मुद्दा उठाते हुए भी सरकार को घेरे हुए है. लोकसभा में चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की उन्होंने कहाकि अब भारत पाकिस्तान को आतंकी हमले पर डौजियर नहीं भेजता, बल्कि कार्रवाई करता है. जड़ तक जाता है भारत के 22 मिनट के सैन्य ऑपरेशनमें 100 आतंकियों के सफाए का दावा किया. विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरुआत गौरव गगोई ने की। गगोई ने रक्षा मंत्री पर गोलमोल जवाब देनेऔर तथ्यों से दूरी बनाने का आरोप लगाया तीखे सवाल पूछे और सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया. गगोई ने राष्ट्रपति ट्रंप के संघर्ष विराम के दावे, आतंकियों के पहलगाम की बैसरन घाटी तक पहुंचने, सुरक्षा इंतजाम न होने, सूरक्षा में चूक समेत तमाम सवाल उठाए। टीएमसी के कल्यण बनर्जी नेप्रधानमंत्री के आकार प्रकार के घटने पर तंज कसा सपा के राजभर ने सरकार को घेरा. आईना दिखाने की कोशिशहालांकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ी सावधानी से विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की. जद(यू) के राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह काअंदाज निराला था. भाजपा के अनुराग ठाकुर ने सीधे विपक्ष के नेता राहुल गांधी को ही निशाने पर ले लिया. उन्हें एलओपी बनने में अक्षम बताते हुएएलओबी (भारत के विरोध में बोलने वाला) तक बता दिया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार ऑपरेशन सिंदूर के संघर्ष विराम को स्पष्ट संदेशदिया. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच में 22 अप्रैल से 17 जून तक किसी सीधी वार्ता से साफ इनकार किया। एस. जयशंकर नेपरोक्ष रूप से कहने की कोशिश की कि पाकिस्तान हार रहा था. संघर्ष विराम की पेशकस उसने की और भारत ने इसे मान लिया। रक्षा मंत्री राजनाथसिंह ने साफ कहा कि पाकिस्तान के डीजीएमओ के कार्रवाई रोकने के अनुरोध पर भारत ने संघर्ष विराम को स्वीकार किया.
मुख्यमंत्री बनने की मेहनत बेकार गई” खरगे के पुराने जख्म से कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में 1999 में मुख्यमंत्री न बन पाने की पुरानी बात को याद किया. जिससे कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्वपरिवर्तन को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या राज्य में नेतृत्व बदला जाएगा और क्या कांग्रेस अब किसीदलित नेता को मुख्यमंत्री बना सकती है. दरअसल खरगे ने रविवार को विजयपुरा में एक कार्यक्रम को संबोधित किया था. इस दौरान उन्होंने कहा किमैंने 1999 में सीएलपी नेता के रूप में पार्टी को सत्ता में लाने के लिए खूब मेहनत की थी. पार्टी ने सरकार बनाई और एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री बने. वहकेपीसीसी अध्यक्ष के रूप में चुनावों से चार महीने पहले पार्टी में सक्रिय हुए थे. उन्होंने कहा कि मेरी सारी मेहनत बेकार चली गई. मुझे लगता है किमैंने पांच साल मेहनत की. लेकिन जो व्यक्ति चार महीने पहले आया उसे मुख्यमंत्री बना दिया गया. खरगे ने आगे कहा’मैं यह कहना चाह रहा हूं किहमें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन हमें बिना किसी लालच के काम करते रहना चाहिए अगर आप लालची हैं, तो आपको कुछ नहींमिलेगा.पदों के पीछे नहीं भागा कोईसाथ ही आप अपने मन की बात नहीं कर पाएंगे इन सब परिस्थितियों से गुजरते हुए, एक ब्लॉक अध्यक्ष से मैं आज एआईसीसी अध्यक्ष बन गया हूं मैंपदों के पीछे नहीं भागा. खरगे के इस बयान के बाद जगलुर के कांग्रेस विधायक बी. देवेंद्रप्पा ने कहा कि अब कर्नाटक में किसी दलित को मुख्यमंत्रीबनाया जाना चाहिए. देवेंद्रप्पा के इस कथित बयान ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को और बढ़ा दिया है वहीं, समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पाने कहा, ‘खरगे देश के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और उनमें किसी भी सांविधानिक पद पर आसीन होने के सभी आवश्यक गुण मौजूद हैं, और हमारीइच्छा है कि जब भी मौका मिले, उन्हें अवसर मिले. महादेवप्पा ने कांग्रेस के उन दलित नेताओं का नाम लिया, जिन्होंने अन्य राज्यों में मुख्यमंत्री पदसंभाला है. जैसे- दामोदरम संजीवय्या, सुशील कुमार शिंदे, जगन्नाथ पहाड़िया और राम सुंदर दास महादेवप्पा ने कहा कि समय आने पर पार्टी निर्णयलेगी और सभी उसका पालन करेंगे. हालांकि खरगे के बेटे और आईटी/बीटी मंत्री प्रियांक खरगे ने अटकलों को कम करने की कोशिश की. कोई नहीं है पछतावाउन्होंने कहा कि उनके पिता केवल अपने राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव के बारे में बता रहे थे. उनके भाषण को समग्रता में देखा जाना चाहिए. नकि चुनिंदा रूप से उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है. प्रियांक ने कहा, ‘कलबुर्गी और कर्नाटक की जनता, सभी के आशीर्वाद से, वह उस पद पर हैं जिस पर सुभाष चंद्र बोस और गांधीजी थे. अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में उन्होंने जो भी फैसला किया है, वह खुद तय करेंगे. उन्होंने यह सम्मान और प्रतिष्ठा अर्जित की है। आलाकमान के साथ उनके अच्छे संबंध हैं. वह जो भी फैसला करेंगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी औरप्रियंका गांधी उसे स्वतः स्वीकार करेंगे. ‘इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि खरगे नेराज्य की जनता के साथ अपनी पीड़ा और निराशा खुलकर साझा की है. उन्होंने यह बता दिया कि कांग्रेस पार्टी में 40-50 साल तक काम करने केबाद भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया. उन्होंने कहा कि खरगे की टिप्पणियों ने अप्रत्यक्ष रूप से यह उजागर कर दिया है कि गांधी परिवार, कांग्रेसपार्टी और सिद्धारमैया अनुसूचित जातियों और जनजातियों के साथ कैसे अन्याय करते रहे हैं. भाजपा अध्यक्ष ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस पार्टीखरगे की टिप्पणियों को गंभीरता से ले रही है? उन्होंने कहा कि समय ही इस सवाल का जवाब देगा.
ट्रम्प ने Xi Jinping से बैठक का किया खंडन , कहा ‘मैं किसी शिखर सम्मेलन की तलाश में नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ किसी संभावित बैठक से इनकार किया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा एकपोस्ट में लिखा कि वे, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक करने की कोई कोशिश नहीं कर रहे हैं और जो इस संबंध में खबरें चल रही हैं वे पूरीतरह से गलत हैं. ट्रंप फिलहाल स्कॉटलैंड में हैं, जहां वे यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते के लिए पहुंचे हैं.डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘एक फर्जी खबर चलाई जा रही है कि मैं चीन के राष्ट्रपति शीजिनपिंग के साथ बैठक करना चाहता हूं. ये सही नहीं है मैं ऐसा कुछ नहीं चाह रहा हूं. मैं चीन जा सकता हूं, लेकिन ये तभी होगा, जब चीन के राष्ट्रपतिमुझे निमंत्रण देंगे, जो दिया गया है. वरना मेरी इसमें कोई रुचि नहीं है इस मामले पर ध्यान देने के लिए आप सभी का धन्यवाद मैं अभी स्कॉटलैंड में हूंऔर हमने यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता किया है और कई अन्य मुद्दों पर बात हुई अमेरिका अभी बहुत अच्छा कर रहा है. समझौते को लेकर की बातचीतराष्ट्रपति ट्रंप का बयान ऐसे समय सामने आया है जब उनका प्रशासन कई देशों के साथ व्यापारिक समझौतों को लेकर बातचीत कर रहा है. कुछसमझौतों पर सहमति बन गई है और कई देशों के साथ बातचीत चल रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद ही ट्रंप ने कई देशों केखिलाफ टैरिफ युद्ध का एलान किया. ट्रंप ने चीन पर भी भारी भरकम टैरिफ लगाने का एलान किया उसके बाद चीन ने भी अमेरिका पर जवाबीकार्रवाई करते हुए टैरिफ का एलान कर दिया. अब अमेरिका और चीन के बीच भी व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है. इस बातचीत का उद्देश्यआपसी विवाद को निपटाना और बढ़े हुए टैरिफ को रोकना है. राष्ट्रपति ट्रंप का बयान ऐसे समय सामने आया है. जब उनका प्रशासन कई देशों के साथव्यापारिक समझौतों को लेकर बातचीत कर रहा है। कुछ समझौतों पर सहमति बन गई है और कई देशों के साथ बातचीत चल रही है. चीन की विदेशमंत्रालय ने कार्मिक रूप से ट्रम्प के कॉल दावा को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि हाल के समय में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच कोई फोन कॉल नहींहुआ और न ही टैरिफ वार्ता चल रही है. संभावना है नगण्यविश्लेषकों का मानना है कि यदि Xi Jinping ने कॉल किया होता, तो यह चीन के लिए राजनीतिक कमजोरी साबित हो सकती थी. इसलिए इसकीसंभावना नगण्य है. ट्रम्प की ओर से यह बयान स्पष्ट रूप से मीटिंग की अफवाहों और फेक न्यूज़ को खारिज करने के उद्देश्य से आता है। उन्होंने दोहरायाकि यदि Xi ने आमंत्रण दिया है तो वे विचार कर सकते हैं. लेकिन फिलहाल उनकी कोई रुचि नहीं। ट्रम्प और चीन दोनों के बीच व्यापार-संबंध खुलीबातचीत से गुजर रहे हैं. जहाँ सार्वजनिक संदेश मुख्य रूप से चल रही कूटनीतिक गतिरोध को कमज़ोर और असंगठित दिखाता है. ट्रम्प ने शी जिनपिंगके साथ शिखर बैठक की किसी भी अफवाह को स्पष्ट रूप से खारिज किया यह कहते हुए कि अगर चीन ने निमंत्रण भेजा हो—जो उन्होंने बताया कि होचुका है तो वे विचार करेंगे वरना उन्हें इसमें कोई रुचि नहीं है. दूसरा यह कि व्यापार और टैरिफ वार्ता के बीच यह बयान दोनों देशों के बीच रणनीतिकसंदेश का हिस्सा प्रतीत होता है: अमेरिका बातचीत चाहता है लेकिन किसी दबाव में नहीं है.