केंद्रीय कैबिनेट का फैसला सहकारी समितियों को मिलेगा सस्ता ऋण, डेयरी से मत्स्यपालन तक सबको फायदा

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2025-26 से 2028-29 तक 4 साल की अवधि के लिए 2000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ केंद्रीय क्षेत्र योजना ‘राष्ट्रीयसहकारी विकास निगम को अनुदान सहायता’ की मंजूरी दी है. केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी दीहै.सरकार की ओर से बताया गया है कि वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक 4 वर्षों की अवधि के लिए अनुदान सहायता पर 2000 करोड़ रुपये कापरिव्यय किया जाएगा. एनसीडीसी चार वर्षों की अवधि में खुले बाजार से 20,000 करोड़ रुपये जुटा सकेगी. एनसीडीसी की ओर से नईपरियोजनाओं की स्थापना/संयंत्रों के विस्तार, सहकारी समितियों को ऋण देने और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऋण देने हेतुनिधियों का उपयोग किया जाएगा. सरकार ने बताया है कि इस कदम से देश भर में डेयरी, पशुधन, मत्स्य पालन, चीनी, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और कोल्ड स्टोरेज जैसे विभिन्न क्षेत्रों की 13,288 सहकारी समितियों के 2.9 करोड़ सदस्यों; श्रम और महिलाओं के नेतृत्व वाली सहकारीसमितियों को लाभ मिलेगा. चारों दिशाओं का है मिलन बिंदूवैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को चार वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये कीअनुदान सहायता को मंजूरी दी है. इस कदम से संगठन को ऋण देने के लिए अधिक धन जुटाने में मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता मेंआर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया. सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं कोबताया, “एक अच्छे वित्तीय मॉडल को और अधिक समर्थन देने के लिए, मंत्रिमंडल ने एनसीडीसी के लिए चार वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये कीपूंजी अनुदान सहायता को मंजूरी दी. एनसीडीसी 8.25 लाख से अधिक सहकारी समितियों को ऋण देता है, जिनके 29 करोड़ सदस्य हैं. कुल सदस्योंमें से 94 प्रतिशत किसान हैं। मंत्री ने कहा कि इस वित्तीय सहायता से एनसीडीसी आगे ऋण देने के लिए 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाने मेंसक्षम हो सकेगी. उन्होंने कहा कि वर्तमान में एनसीडीसी की ऋण वसूली दर 99.8 प्रतिशत है और एनपीए शून्य है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव नेकैबिनेट ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए इटारसी-नागपुर के बीच चौथी रेलवे लाइन की भी जानकारी दी उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटारसीऔर नागपुर के बीच चौथी लाइन को मंजूरी दे दी है इसका निर्माण दिल्ली और चेन्नई के साथ-साथ मुंबई और हावड़ा को जोड़ने वाले उच्च-घनत्ववाले गलियारे पर किया जाएगा. यह चारों दिशाओं का मिलन बिंदु है.मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी दी मंजूरीसरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कैबिनेट ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड राज्यों के 13 जिलों कोकवर करने वाली चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इसमें भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 574 किलोमीटर बढ़ जाएगा इसपरियोजना की लागत करीब 11169 करोड़ रुपये आएगी. कैबिनेट ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अलुआबाड़ी से न्यूजलपाईगुड़ी तक रेलवे लाइन के विस्तार पर भी बात की. उन्होंने कहा, “अगला काम अलुआबाड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच 57 किलोमीटर लंबीतीसरी और चौथी रेलवे लाइन का विस्तार है. यह पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी के लिए बेहद ज़रूरी है. अलुआबाड़ी बिहार से बंगाल के सिलीगुड़ी तकफैला है. इन लाइनों को मज़बूत करना बेहद जरूरी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छत्रपति संभाजी नगर से परभणी तक रेलवे लाइन के दोहरीकरणकी भी जानकारी दी. उन्होंने कहा, “मराठवाड़ा कनेक्टिविटी के लिहाज से यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है. इसके तहत छत्रपति संभाजी नगर सेपरभणी तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण होगा, जो पहले 177 किलोमीटर लंबी सिंगल लाइन थी. इसका बजट 2,179 करोड़ रुपये है इन इलाकों मेंबहुत सारे उद्योग हैं और उनमें से कई को बंदरगाहों से जोड़ने की जरूरत है। इससे एक दोहरा गलियारा बनेगा. इसमें 28 बड़े पुल और 161 छोटे पुलशामिल होंगे. इससे देश को रसद लागत (लॉजिस्टिक्स कॉस्ट) में लगभग 1,714 करोड़ रुपये की बचत होगी.
तेज प्रताप बोले ‘मेरे अंदर बहता है लालू यादव का खून’, तेजस्वी को बताया नकली अर्जुन

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राजद नेता तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को खुला चैलेंज दिया है। हाजीपुर केमहुआ पहुंचे तेज प्रताप ने कहा कि अगर तेजस्वी खुद को अर्जुन मानते हैं, तो पहले बांसुरी बजाकर दिखाएं. तभी तय होगा कि असली ‘कृष्ण’ कौन हैऔर ‘अर्जुन’ कौन. तेज प्रताप यादव मंगलवार को अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र महुआ के दौरे पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने महुआ के विधायक मुकेश रोशनको भी जमकर निशाने पर लिया और उन्हें ‘बहरूपिया’ कह डाला. उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि अगर बहरूपिया आपके यहां आए, तो उसेझुनझुना दे दीजिए. जब-जब मैं महुआ आता हूं यहां का बहरूपिया विधायक रोने लगता है. तेज प्रताप ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा किअगर उन्हें जनता मौका देती है और वे फिर से महुआ के विधायक बनते हैं, तो परसौनीया की सब्जी मंडी के लिए एक अलग और बेहतर बिल्डिंग कानिर्माण कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि गरीब महिलाएं सड़क किनारे सब्जी बेचती हैं उनके लिए व्यवस्थित जगह मुहैया कराई जाएगी. जमीन की कीमतें है बढ़ीजनसभा के दौरान तेज प्रताप ने खुद को लालू प्रसाद यादव की विरासत का असली उत्तराधिकारी बताया. उन्होंने कहा, “मेरे शरीर में सामाजिक न्यायका खून बहता है. लालू यादव का खून बहता है. अगर आप मुझे जिताते हैं. तो असल में लालू जी को जीत दिलाते हैं. तेज प्रताप ने आगे कहा किमहुआ की माताओं और बहनों से मैं अपील करता हूं कि एक बार मुझे मौका दीजिए. यहां बिजली की समस्या है. अगर मैं विधायक बनता हूं तोबिजली फ्री कर दूंगा. तेज प्रताप यादव ने यह भी दावा किया कि महुआ में मेडिकल कॉलेज लाने का श्रेय उन्हें ही जाता है. उन्होंने कहा कि मेडिकलकॉलेज बनने से महुआ का विकास हुआ है, यहां की ज़मीन की कीमतें बढ़ी हैं. हर कान नहीं होता एकदम सेलेकिन हर काम एकदम से नहीं होता, सब कुछ स्टेप बाय स्टेप होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि महुआ के लोग हमेशा हार मानते रहें, वे’बहरूपिया’ हैं लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे. तेज प्रताप यादव पटना से लगभग 50 गाड़ियों के काफिले के साथ महुआ पहुंचे थे दौरे की शुरुआत उन्होंनेराधा-बिहारी मंदिर में पूजा-अर्चना से की. इसके बाद उन्होंने विभिन्न जगहों पर जनसंवाद किया और एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित किया. पार्टीऔर परिवार से निष्कासन झेल रहे तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को पहली बार सीधा चैलेंज किया है. अपनी पुरानी और पसंदीदाविधानसभा सीट महुआ पहुंचे तेज प्रताप यादव ने कहा कि अर्जुन और कृष्ण कौन, यह फैसला कर लें.
नेहरू का नाम लेकर सरकार बहस से रही है भाग, कांग्रेस का मोदी-शाह पर हमला “संसद में इतिहास बनाम वर्तमान की टकराहट

लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम लिए जाने पर कांग्रेस में आक्रोश है।कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला. पार्टी ने कहा कि उनके पास अपनी विफलताओं का कोई जवाबनहीं है. वे ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) से पीड़ित हैं. वे बात को भटकाना चाहते हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कललोकसभा में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री दोनों ने एक बार फिर दिखाया कि जवाहरलाल नेहरू के मामले में वे उस बीमारी से पीड़ित हैं जिसे मेडिकल भाषामें ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) कहा जाता है. संभव है कि आज राज्यसभा में भी यह बात दिखे। उन्होंने कहा कि उनके पास अपनीवर्तमान विफलताओं का कोई जवाब नहीं है. उनकी नीतियों और कार्यों पर उठाए जा रहे वैध सवालों का उनके पास कोई जवाब नहीं है. ध्यान है भटकातेउन्होंने कहा कि सार्थक बहस में शामिल होने के बजाय वे ध्यान भटकाते हैं, माहौल खराब करते हैं और बदनाम करते हैं। गृह मंत्री ने एक तरह केइतिहासकार होने का दावा किया है. वह खुद को भारत का दूसरे सबसे महान इतिहासकार मानते हैं. पीएम मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में कहा थाकि जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अक्साई चीन का 38,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र खो दिया. उन्होंने सिंधु जल संधिसमझौते पर पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षर किये थे यह भारत की बड़ी भूल थी. पीओके को अभी तक वापस क्यों नहीं लिया गया, कांग्रेस को जवाबदेना चाहिए कि इसे किसने जाने दिया. भारत अभी भी जवाहरलाल नेहरू से लेकर पिछली कांग्रेस सरकारों द्वारा की गई गलतियों का दर्द झेल रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि मुख्य विपक्षी दल की एक गलती के कारण पाकिस्तान का निर्माण हुआ और उन्होंने दावा किया किपाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू की विरासत है, 1948 में हमारी सशस्त्र सेनाएं कश्मीर में निर्णायक स्थिति में थीं। सरदारपटेल लगातार मना करते रहे, कांग्रेस आज तक नहीं पाई है सुधरलेकिन जवाहरलाल नेहरू ने एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी अगर आज पाक अधिकृत कश्मीर मौजूद है तो यह नेहरू द्वारा घोषित एकतरफायुद्धविराम की वजह से है. जवाहरलाल नेहरू इसके लिए जिम्मेदार हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कल लोकसभा में गृह मंत्री औरप्रधानमंत्री दोनों ने एक बार फिर दिखाया कि जवाहरलाल नेहरू के मामले में वे उस बीमारी से पीड़ित हैं जिसे मेडिकल भाषा में ऑब्सेसिव-कंपल्सिवडिसऑर्डर (ओसीडी) कहा जाता है। गृह मंत्री अमित शाह ने नेहरू और पॉलिसीज़ का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस की गलत नीतियों काखामियाजा अभी तक भोग रहे हैं. तो राहुल गांधी, प्रियंका गांधी से लेकर अन्य कांग्रेसी नेताओं ने इसका पलटवार करते हुए कहा कि यह सब इतिहासके नाम पर सरकार का फैमिली‑फोकस और वर्तमान मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पाकिस्तान की संभावितगतिविधियाँ और कश्मीर की स्थिति नेहरू की विरासत हैं, उन्होंने इसे इतिहास की विफलता बताया जिसे कांग्रेस आज तक नहीं सुधार पाई है.
ट्रंप की डेडलाइन के करीब भारत, क्या बड़ी खरीद और निवेश से बचेगा भारी टैरिफ?

अमेरिका की तरफ से व्यापारिक साझेदारों को व्यापार सौदों को अंतिम रूप देने के लिए दी गई एक अगस्त की समयसीमा पूरी होने में बस दो दिन बचेहैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत उच्च टैरिफ की काट निकाल पाएगा? ट्रंप कह चुके हैं कि जिन देशों के साथ समझौते नहीं हुए हैं. उन पर15-20 फीसद के दायरे में टैरिफ लगेगा. भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता जिस तरह आगे बढ़ी है. उसे देखते अंतरिम समझौता अभी दूर की कौड़ी ही है. हालांकि, दोनों ही देशों की तरफ से कई बिंदुओं पर सहमति बनने की बात कही जा रही है. वार्ता को लेकर तीन बिंदु एकदम साफ हैं. एक, अमेरिकाभारतीय बाजारों में शून्य शुल्क पहुंच की पुरजोर कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ, भारत यह तय करने में जुटा है कि अमेरिका को उसके माल निर्यातपर मुख्य टैरिफ 15 प्रतिशत से अधिक न हो. टैरिफ बचने का रास्ता रहा है बनातीसरा, टैरिफ निवेश प्रतिबद्धताओं और उच्च-मूल्य वाली खरीदारी जैसे बाहरी कारकों पर भी निर्भर करता है. इसे देखते हुए यह अनुमान लगाया जारहा है कि बड़े निवेश व अमेरिकी हथियारों की खरीद पर सहमति जताकर भारत उच्च टैरिफ से बचने का रास्ता बना सकता है. माना जा रहा है कि ट्रंपप्रशासन भारत पर विशिष्ट खरीदारी और निवेश की प्रतिबद्धता जताने का दबाव बना रहा है, जैसा उसने यूरोपीय संघ और जापान से कराया था. यहभारत के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं हो सकता है क्योंकि ट्रंप बिना किसी निश्चित समयसीमा के बड़ी निवेश प्रतिबद्धता के जरिये राजनीतिक लाभ उठानेके इच्छुक हो सकते हैं. द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अगले दौर की बातचीत के लिए अमेरिकी टीम 25 अगस्त को भारत का दौरा करेगी. फिलहाल टालने में रहा कामयाबभारत कृषि और डेयरी जैसे दो विवादास्पद मुद्दों को फिलहाल टालने में कामयाब रहा है. लेकिन सार्वजनिक खरीद जैसे क्षेत्रों में लचीलापन अपनाने कोतैयार हो सकता है जैसा उसने ब्रिटेन के व्यापार समझौते में किया था। हालांकि और भी कई पेचीदगियां बरकरार है. भारतीय वार्ताकारों के लिए स्टीलव एल्युमीनियम पर आधार रेखा से ऊपर अतिरिक्त टैरिफ अतिरिक्त जटिलता है. रूसी तेल खरीदने पर ब्रिक्स देशों पर भारी टैरिफ लगाने की ट्रंप कीधमकी भी गंभीर चिंता का विषय है. माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन भारत पर विशिष्ट खरीदारी और निवेश की प्रतिबद्धता जताने का दबाव बना रहाहै जैसा उसने यूरोपीय संघ और जापान से कराया था. यह भारत के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं हो सकता है. क्योंकि ट्रंप बिना किसी निश्चित समयसीमाके बड़ी निवेश प्रतिबद्धता के जरिये राजनीतिक लाभ उठाने के इच्छुक हो सकते हैं.
संविधान संशोधन की दिशा में बड़ा कदम: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर संयुक्त समिति की बैठक

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक 30 जुलाई यानी आज होगी. इस बैठक में जाने-माने अर्थशास्त्री एनकेसिंह पैनल के सामने अपने विचार साझा करेंगे. सिंह पूर्व राज्यसभा सदस्य, भारत के 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष, योजना आयोग के पूर्व सदस्य, पूर्वराजस्व सचिव और पूर्व प्रधानमंत्री के सचिव रह चुके हैं. इस बैठक में उनकी मदद अर्थशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. प्राची मिश्रा करेंगी, जो अशोकाविश्वविद्यालय के आइजैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी की प्रमुख हैं. इससे पहले 11 जुलाई को भी एक बैठक हुई थी. जिसमें भारत के दो पूर्व मुख्यन्यायाधीश- जेएस खेहर और डीवाई चंद्रचूड़ समेत कई कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा की गई थी. बैठक के बाद, समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने इसपहल को राष्ट्र निर्माण के लिए एक सुनहरा मौका बताया और कहा कि सभी सदस्य राजनीति से ऊपर उठकर मजबूत कानून बनाने में लगे हैं. चौधरी नेबताया, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव के लिए एक बैठक हुई। पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति खेहर और न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ हमारे समक्ष उपस्थित थे और हमनेबातचीत की. सुनहरा है अवसरराष्ट्र निर्माण के लिए इस समिति के लिए यह एक सुनहरा अवसर है. समिति के सभी सदस्य दलगत राजनीति से ऊपर हैं और एक अच्छा ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि समिति के सदस्य और विशेषज्ञ दोनों इस पहल के महत्व परसहमत थे. मुख्य न्यायाधीशों के अलावा, समिति ने पूर्व सांसद और विधि एवं न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष ईएमएस नचियप्पनके विचार भी सुने. पिछली बैठक में उपस्थित सदस्यों में प्रियंका गांधी वाड्रा, मनीष तिवारी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, भुवनेश्वर कलिता, साकेत गोखले, शांभवी चौधरी और भर्तृहरि महताब शामिल थे. मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, चौधरी ने कहा कि समिति न्यायाधीशों से परामर्श कर रही है, क्योंकि वे सांविधानिक विशेषज्ञ हैं, और निष्पक्ष रहते हैं. वह केवल कानूनी ढांचे से संबंधित होते हैं. संशोधनों पर कर रही है विचारभाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि समिति संभावित संशोधनों पर विचार कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विधेयक न्यायिक जांच में खराउतरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के दृष्टिकोण को लागू करने में सहायक हो. जेपीसी प्रमुख ने समिति के पांच राज्यों और एककेंद्र शासित प्रदश के दौरे पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुमूल्य जानकारी मिली. उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक नेताओं, नागरिक समाज केसदस्यों और अधिकारियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया. समिति इस समय जिन दो विधेयकों पर काम कर रही है उनमें संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 शामिल हैं. इन विधेयकों का मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभा केचुनावों को एक साथ कराना है.’एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक आज होगी. इस बैठक में जाने-मानेअर्थशास्त्री एनके सिंह पैनल के सामने अपने विचार साझा करेंगे। उनकी मदद अर्थशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. प्राची मिश्रा करेंगी, जो अशोकाविश्वविद्यालय के आइजैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी की प्रमुख हैं.
एक जिला, एक उत्पाद’ से चीन को टक्कर, युवा कॉन्क्लेव में योगी की जोरदार बात “कॉन्क्लेव में CM ने दिखाई CM-YUVA और ODOP की दिशा”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के पहले यूपी का बाजार त्योहारों पर चीन के सामान से पटा हुआ था. आज चीन के उत्पाद से ज्यादाओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) का उप्पाद बिक रहा है। 2017 के पहले भी प्रदेश में ओडीओपी बड़े पैमाने पर थे लेकिन तब उस समय कीसरकारें नहीं समझ पाईं क्योंकि उनके लिए परिवारवाद ही सर्वोपरि था. वो लोग लगातार प्रदेश के एमएसएमई उद्योगों को बंद करने की साजिश काहिस्सा बन गए थे पर अब सरकार युवाओं को उद्यमी बनने के लिए मदद कर रही है. ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के इंदिरा गांधीप्रतिष्ठान में आयोजित युवा कॉन्क्लेव में कही. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना अब युवाओं के लिए जॉब लेने नहीं बल्कि देने का माध्यमबन गई है. सक्सेस स्टोरी सुनकर बहुत अच्छा महसूस हुआ एक ऐसी स्कीम जिसका ब्याज और गारंटी सरकार दे रही है. एक्सपो का किया शुभारंभदस फीसदी मार्जिन मनी का लाभ भी सरकार दे रही है. इसी का परिणाम है कि 2751 करोड़ रुपए 68000 युवाओं को दिए गए. ये यूपी कापोटेंशियल है ऐसे लाखों युवा यूपी में हैं जो अलग अलग सेक्टर में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विश्विद्यालय टापू जैसा बन गए उन्हें स्टेट और सेंट्रलकी योजनाओ की जानकारी नहीं होती. वहां से निकला युवा चौराहे पर खड़ा होकर असमंजस में होता है फिर बिना जानकारी के लोन लेता है लेकिनज्ञान न होने के कारण कर्ज के बोझ तले दब जाता है जिनके पास ज्ञान होता है उनके पास पैसा नहीं होता ऐसी सभी समस्याओं का समाधान सीएमयुवा योजना है विश्विद्यालय के साथ एमओयू इसीलिए किए गए हैं कि वहां पढ़ रहे बच्चों को राज्य और केंद्र योजनाओं का लाभ मिल सके. इसकेपहले सीएम योगी ने युवा कॉन्क्लेव और एक्सपो 2025 का शुभारंभ किया है यह दो दिवसीय युवा कॉन्क्लेव प्रदेश के लाखों युवाओं के लिएउद्यमिता के द्वार खोलेगा. इसमें फ्रेंचाइजी, वित्तीय संस्थाएं, औद्योगिक ब्रांड्स, नीति निर्माता, प्रशिक्षक और निवेशक एक ही मंच पर मौजूद रहेंगे. युवाओं को जोड़ने की परिकल्पनाअपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सीएम युवा उद्यमी अभियान रोजगार को युवाओं से जोड़ने कीपरिकल्पना है. इसे एक साल पहले लॉन्च किया गया था जिसके इतने जबरदस्त रिस्पांस की उम्मीद नहीं थी. हम आज 150 नए आईडिया दे रहे हैं.ये सक्सेसफुल बिजनेस आइडिया हैं जो पांच लाख रुपए से शुरू किए जा सकते हैं. इस अभियान के तहत युवाओं को बिजनेस आइडिया से जोड़ाजाएगा. विश्वविद्यालय को पहली बार जोड़ा गया है जिनके 1100 छात्र आज आए हैं। जो उद्यमी बनेंगे. रूफटॉप सोलर मेंटेनेंस उद्यम की भी शुरुआतआज से की जाएगी. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य अगले एक साल में 10 लाख इंटरप्रेन्योर को पैदा करना है.आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि इस कॉन्क्लेव को वन स्टॉप बिजनेस प्लेटफॉर्म के रूप में डिजाइन किया गया है, जहांआइडिया से लेकर उद्यम शुरू करने तक की पूरी यात्रा को सरल बनाया गया है.
ननों की गिरफ्तारी पर प्रियंका गांधी का विरोध प्रदर्शन, बीजेपी पर लगाया अत्याचार का आरोप

भारत और पाकिस्तान के हालिया तनाव को खत्म करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार किए गए दावों से भारत मेंसियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में एक बार फिर इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी पर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ नहीं कहा कि ट्रंप झूठ बोल रहेहैं, क्योंकि वे खुद बोल नहीं पा रहे हैं. राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर पीएम मोदी बोलेंगे तो ट्रंप सच सामने ला देंगे, इसलिए मोदी चुप हैं. उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी व्यापार डील के लिए पीएम मोदी पर दबाव बना रहे हैं और देखना होगा यह डीलकैसी बनती है.ट्रंप के दावों को लेकर तीखा हमलाराहुल गांधी के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी पीएम मोदी पर ट्रंप के दावों को लेकर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदीऔर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान गोलमोल हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सुझाव दिया कि उन्हें साफ-साफ कहना चाहिए कि अमेरिकीराष्ट्रपति झूठ बोल रहे हैं. देखा जाए तो संसद में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर चल रहे बहस के दौरान कांग्रेस नेताओं की यहआलोचना मोदी सरकार की अमेरिका के प्रति नरम रुख पर सवाल उठाती है. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को छत्तीसगढ़में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार का आरोप लगाया. साथ ही संसद परिसर में विरोधप्रदर्शन भी किया. केरल से कांग्रेस और विपक्षी सांसदों के साथ मिलकर प्रियंका गांधी ने संसद भवन के मकर द्वार के पास प्रदर्शन किया और गिरफ्तारननों की रिहाई की मांग की. अत्याचारों का कर रहे है विरोधप्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन भी शामिल रहे. बता दें कि 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्गरेलवे स्टेशन से नन प्रीति मेरी, वंदना फ्रांसिस और सुकामन मंडावी को गिरफ्तार किया गया. बजरंग दल के एक स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत परयह कार्रवाई की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये नन नारायणपुर की तीन लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करवा रही थीं और उन्हें मानवतस्करी के तहत ले जा रही थीं. इस दौरान प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि केरल की कुछ ननों के साथ बहुत बुरा व्यवहार हुआ. उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और फिर पुलिस उन्हें जबरन ले गई. हम अल्पसंख्यकों पर हो रहे इस तरह केअत्याचारों का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ये महिलाएं हैं. इनके साथ ऐसे व्यवहार की इजाजत नहीं दी जा सकती. आप किसी को बिनासबूत ऐसे आरोप नहीं लगा सकते. साथ ही सरकार पर निशाना साधते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार सिर्फ प्रचार और चुनाव के समय की छविपर काम करती है. असली मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं होती. हमें उम्मीद नहीं है कि वे कुछ करेंगे, लेकिन हमारा काम है उन पर दबाव बनाना.
मालेगांव धमाका 2008 के दर्दनाक विस्फोट पर फैसला अब करीब, निगाहें एनआईए कोर्ट पर

महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 हुए बम धमाके के मामले में करीब 17 साल के बाद अब फैसला सामने आने की उम्मीद तेज हो गई है. संभावना इस बात की तेज है कि मामले में गुरुवार 31 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कोर्ट फैसला सुना सकती है. यह मामलामुंबई से लगभग 200 किमी दूर स्थित मालेगांव में हुआ था, जो एक संवेदनशील और मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है इस धमाके में छह लोगोंकी मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बता दें कि मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र की आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) नेकी थी. इसके बाद 2011 में केस राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया. 2018 से कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ और 19 अप्रैल 2025 को बहसपूरी हुई. ऐसे में अब फैसला कल यानी 31 जुलाई 2025 को आने की संभावना है. मामले में भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसादपुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी पर आतंकवाद और आपराधिक साजिश केगंभीर आरोप लगे हैं. 37 गवाह गए है मुकरइन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मुकदमा चला है जिनमें हत्या, साजिश, सांप्रदायिकता फैलाना, और आतंक फैलाने जैसे आरोप शामिल हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की जांच की और कोर्ट सेआरोपियों को उनके अपराध के अनुसार सजा देने की मांग की है. अब बात अगर मामले में एनआईए के पक्ष की करें तो धमाका रमजान के महीने मेंऔर नवरात्रि से ठीक पहले हुआ, जिससे यह साबित होता है कि हमले का मकसद मुस्लिम समुदाय के बीच डर पैदा करना, सांप्रदायिक तनाव फैलानाऔर राज्य की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना था. एनआई का कहना है कि उनके पास पक्के और विश्वसनीय सबूत हैं जिससे यह साबित होता हैकि सभी आरोपी साजिश का हिस्सा थे और धमाके को अंजाम देने में उनकी सीधी भूमिका थी. हालांकि जांच में 323 गवाहों के बयान दर्ज हुए, जिनमें से 37 गवाह मुकर गए. फसाया गया झूठे केस मेंअब बात इस मामले में आरपियों के पक्ष की करें तो प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है और उनके खिलाफ सबूत गढ़े गए हैं. वहींपुरोहित ने कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और जांच में कई खामियां रही हैं. इसके साथ ही बाकी आरोपियों ने भी यही कहा कि उन्हेंगलत तरीके से फंसाया गया है और केस में कई विरोधाभासी बातें हैं. वहीं मामले में पीड़ितों की ओर से कोर्ट में कहा गया कि सभी आरोपियों कीदलीलें आपस में मेल नहीं खातीं, कोई कहता है धमाका हुआ ही नहीं, तो कोई इसका दोष स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (एसआईएमआई) पर डालता है. इन विरोधाभासों से यह साफ होता है कि प्रॉसिक्यूशन का केस मजबूत है. महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बमधमाके के मामले में करीब 17 साल बाद फैसला सामने आने की संभावना तेज हो गई है. इस मामले में भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नलप्रसाद पुरोहित सहित सात आरोपियों पर आतंकवाद और साजिश के गंभीर आरोप हैं. एनआईए ने आरोपियों को सजा देने की मांग की है। ऐसे मेंसबकी निगाहें गुरुवार को एनआईए कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं.
CM ममता की पोस्ट पर बवाल, दिल्ली पुलिस ने लगाए ‘राजनीतिक मंशा वाले झूठ’ के आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर जिस वीडियो को पोस्ट कर दिल्ली में भाजपा और पुलिस पर बंगालियों पर अत्याचार कारने काआरोप लगाया था. उस वीडियो को दिल्ली पुलिस ने फर्जी बता दिया है. पुलिस के मुताबिक जांच में पता चला कि महिला ने पश्चिम बंगाल, मालदाके रहने वाले एक टीएमसी नेता बप्पी खान के कहने पर फर्जी वीडियो बनाकर वायरल किया था. ममता बनर्जी ने जो वीडियो एक्स पर पोस्ट किया थाउसमें एक महिला दिल्ली पुलिस पर पीटने का आरोप लगाते हुए नजर आ रही है पुलिस के मुताबिक जांच में पता चला कि महिला के पति के बैंकखाते में वीडियो बनाने के अगले ही दिन 25 हजार रुपये आए हैं. नियत से रची जा रही थी सारी साजिशआशंका व्यक्त की जा रही है कि छवि खराब करने की नियत से सारी साजिश रची गई है दिल्ली पुलिस ने फिलहाल इस संबंध में अभी कोईएफआईआर नहीं की है. पुलिस के मुताबिक मूलरूप से मालदा की रहने वाली सजनूर नामक महिला पूर्वी दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर में परिवार केसाथ रहती है वह एक सार्वजनिक शौचालय में काम करती है. इसके सास-ससुर गीता कालोनी में काम करते हैं. 26 जुलाई को सजनूर ने दावा कियाथा कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने उसके व बच्चे के साथ मारपीट की. अगले दिन 27 जुलाई को इस वीडियो को ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्टकरते हुए दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े किए। मधु विहार थाना पुलिस साजिश समेत तमाम एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है.ममता बनर्जी ने जो वीडियो एक्स पर पोस्ट किया था उसमें एक महिला दिल्ली पुलिस पर पीटने का आरोप लगाते हुए नजर आ रही है. X पर किया था पोस्टपुलिस के मुताबिक जांच में पता चला कि महिला के पति के बैंक खाते में वीडियो बनाने के अगले ही दिन 25 हजार रुपये आए हैं. दिल्ली पुलिस नेतुरंत जांच शुरू की और पाया कि इस वीडियो में दिख रही महिला, संजानु परवीन, अपने मालदा स्थित एक राजनीतिक कार्यकर्ता रिश्तेदार के कहने परफर्जी वीडियो बना कर viral कर रही थी. वीडियो वायरल करने के तुरंत बाद महिला के पति के बैंक खाते में ₹25,000 जमा हुए थे पश्चिम बंगाल कीमुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक बंगाली-मौली महिला और उसके बच्चे की कथित दिल्ली पुलिस द्वारा मारपीट की वीडियो शेयर कीथी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला सिर्फ बंगाली भाषा बोलने के कारण हुआ था हालांकि, ममता बनर्जी ने इन पुलिस दावों को खारिजकरते हुए कहा कि महिला और उसके बच्चे को धमकी दी गई थी, उन्हें विभिन्न थानों में ले जाया गया—और उन्होंने प्रवासियों की मदद के लिए कहाकि वे बंगाल लौट आए ताकि सच सामने आ सके.
मुख्यमंत्री भगवंत मान का अकाली दल पर निशाना “पंजाब की जवानी खा गए, अब लोगों की करवा रहे हैं” जमानतें जब्त

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर हमला बोला है. मान ने कहा कि यह लोग पंजाब की जवानी खागए. मान बुधवार को वन विभाग के 942 कर्मचारियों को नियमित करने के समारोह को संबोधित कर रहे थे. मान ने कहा कि मजीठिया पर कार्रवाई केबाद यह साफ हो गया कि यह सभी आपस में मिले हुए हैं. पहले विपक्षी नेता कहते थे कि बड़े तस्करों को नहीं पकड़ रहे हैं. अब जब हमने पकड़ लियातो इसका विरोध करना शुरू कर दिया है. इस दौरान हाउसिंग व शहरी विकास के 6 कर्मचारियों को भी पक्का किया गया है. मान ने कहा कि लोगअब इनकी जमानतें जब्त करवा रहे हैं और यह मुझे बिना मतलब के कोसते रहते हैं. कर्मचारियों का रखा प्रमुखता के साथ पक्षमुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इन कर्मचारियों की सुध नहीं ली गई सरकारों का काम लोगों के हितों की रक्षा करना है, जिसमें स्वास्थ और शिक्षा देना, रोजगार देना और विकास कार्यों का पूरा करना शामिल हैं. पिछली सरकारों ने इन हितों की तरफ ध्यान नहीं दिया. उन सरकारों की प्राथमिकताएं हीकुछ और थी अपने परिवारों के हित साधने में लगे रहे हैं जिसमें बड़ी कंपनियां स्थापित करना शामिल है। जिस देश का राजा ही व्यापार करने लगजाएगा. वहां कभी लोगों भला नहीं हो सकता है. मान ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि मैंने यह कुर्सी लेनी ही नहीं थी. अपनों ने इस कुर्सी केसाथ इंसाफ नहीं किया, इसलिए लोगों ने हमें चुन लिया. पिछली सरकारों की प्राथमिकता सिर्फ सत्ता और पैसा था. लोगों के हितों की तरफ उनकाकोई ध्यान नहीं था. मान ने कहा कि साढ़े तीन साल हो गए तो हमने सीएम आवास के पास नाके हटा दिया, क्योंकि उनकी कोई जरूरत नहीं है 10 से20 साल से कर्मचारी डेलीवेज काम कर रहे थे. इसमें अनुबंध पर भी तैनात थे इन कर्मचारियों के हमने सभी के केस चेक किए और अदालतों में भीकर्मचारियों का प्रमुखता से पक्ष रखा. हो रहा है जलवायु परिवर्तनइसी के तहत इन कर्मचारियों को पक्का करने की प्रकिया पूरी की है 942 कर्मचारियों को पक्का किया गया है. जिनको पहले यह नहीं पता था किकल उनकी नौकरी रहेगी या नहीं मान ने कहा कि पूरे देश में जलवायु परिवर्तन हो रहा है. क्योंकि प्राकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है ऐसे में पर्यावरणविभाग के इन कर्मचारियों का महत्व और भी बढ़ जाता है. मान ने कहा कि पेड़ तो लगा दिए हैं. लेकिन उनकी संभाल नहीं हो रही है। यही कारण है किइन पेड़ों का कुछ अता पता नहीं चलता है. वन विभाग के जो गेस्ट हाउस है, उनकी हालत सुधारने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं. जिससे पर्यटन कोबढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है. परमात्मा ने एक कमी रख दी पंजाब के लिए बस कि सबसे अधिक लुटेरे भी पंजाब को दे दिए हैं. सबसे पहलेजेल की यात्रा आपके नाभा के मंत्री ने ही की थी अभी भी एक नाभा में बैठा है. वित्त मंत्री नौ साल यह कहता रहा कि खजाना खाली है तो युवाओं नेप्रदेश से पलायन करना शुरू कर दिया है. कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया बहुत साल पहले हो जानी चाहिए थे. लेकिन पिछली सरकारों कीनाकामी के कारण यह देरी से हुआ है.