कोलकाता से दिल्ली तक मेसी का जादू भारत दौरे की तैयारियाँ पूरी, आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार

अगर सब कुछ अनुकूल रहा तो कोलकाता के फुटबॉल प्रेमियों को एक दशक बाद महान फुटबॉलर लियोनल मेसी के दीदार का मौका मिलेगा जोकोलकाता के बाद अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली भी जाएंगे जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. जानकार सूत्रों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई कोबताया कि मुंबई में वानखेड़े स्टेडियम की बुकिंग समेत सारी औपचारिकतायें पूरी कर ली गई है लेकिन मेसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि मिलनाबाकी है. सूत्र ने कहा, ‘सब कुछ तय हो गया है और हमें मेसी से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. जल्दी ही उसके सोशल मीडिया हैंडिल पर इसकीजानकारी मिलेगी. अभी प्रस्तावित कार्यक्रम पर सहमति बन गई है। हमें सोशल मीडिया पर उनकी ओर से पुष्टि का इंतजार है जो जल्दी ही आएगी. कार्यक्रम के अनुसार मेसी 12 दिसंबर को रात दस बजे कोलकाता पहुंचेंगे जहां वह दो दिन और एक रात रुकेंगे. कोलकाता में 13 दिसंबर को सुबह नौबजे ‘मीट एंड ग्रीट’ कार्यक्रम होगा जिसके बाद वीआईपी रोड पर लेकटाउन श्रीभूमि में उनकी 70 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण होगा. स्टेडियम की हो चुकी है बुकिंगइसके बाद वह ईडन गार्डंस जाएंगे जहां दोपहर 12 से डेढ बजे तक जीओएटी कप और जीओएटी कॉन्सर्ट होगा. सूत्र ने कहा, ‘वह प्रति टीम सातखिलाड़ियों का सॉफ्ट टच और सॉफ्ट बॉल मैच खेलेंगे जिसमें सौरव गांगुली, लिएंडर पेस, जॉन अब्राहम और बाईचुंग भूटिया भी होंगे. ईडन गार्डंस परहोने वाले इस आयोजन के लिये टिकट की न्यूनतम दर 3500 रूपये होगी. हमें उम्मीद है कि 68000 की क्षमता वाला स्टेडियम खचाखच भरा होगा।मेसी वहां एक घंटा 20 मिनट तक होंगे. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उन्हें वहां सम्मानित कर सकती हैं मेसी 13 दिसंबर की शाम कोअहमदाबाद में अडाणी फाउंडेशन के निजी कार्यक्रम में भाग लेंगे. वह 14 दिसंबर को मुंबई पहुंचेंगे जहां सीसीआई पर शाम 3.45 पर ‘मीट एंट ग्रीट’ कार्यक्रम होगा. इसके बाद वानखेड़े स्टेडियम पर शाम 5.30 से जीओएटी कप और कॉन्सर्ट होगा. सूत्र ने बताया कि इसके लिए वानखेड़े स्टेडियम कीबुकिंग हो चुकी है. कोई नहीं हो क्रिकेट मैचमीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि मेसी सात सात खिलाड़ियों वाला क्रिकेट मैच एमएस धोनी और विराट कोहली के साथ खेल सकते हैं, लेकिनसूत्र ने इससे इनकार किया. उन्होंने कहा, ‘मुंबई में कोई क्रिकेट मैच नहीं होगा. भारतीय हस्तियों की मौजूदगी में सॉफ्ट बॉल और सॉफ्ट टच मैच हीहोगा जो उनके सफर का जश्न होगा. सूत्र ने कहा, ‘सब कुछ तय हो गया है और हमें मेसी से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. जल्दी ही उसके सोशलमीडिया हैंडिल पर इसकी जानकारी मिलेगी. अभी प्रस्तावित कार्यक्रम पर सहमति बन गई है.
जहाँ झुग्गी वहाँ मकान रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा फैसला, बिना वैकल्पिक आवास के नहीं हटेगा कोई झुग्गी क्लस्टर

रेखा गुप्ता सरकार गरीबों के सपने पूरे कर रही है जबकि केजरीवाल सरकार गरीबों को सपने बेच कर वोट ठगती थी. दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष श्रीवीरेन्द्र सचदेवा ने उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना एवं मुख्य मंत्री मती रेखा गुप्ता की बैठक के बाद आई घोषणा की कोई भी सरकारी विभाग बिना पहलेवैकल्पिक घर का कब्जा दिए दिल्ली में झुग्गी क्लस्टर नही हटवा सकेगा का स्वागत किया है. दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है की भाजपा की दिल्लीसरकार झुग्गी क्लस्टर निवासियों को जहां झुग्गी वहां मकान देने के प्रति कटिबद्ध है पर साथ ही जहां भी झुग्गी वाले खतरनाक परिस्थितियों में जैसे कीनालों के या रेल लाइन के किनारे रहते हैं उन्हे बेहतर सुरक्षित घर देना भी सरकार की जिम्मेदारी है. वोट ठगने का करती है काम AAPसचदेवा ने कहा है की हर झुग्गी वाले का सपना है बेहतर घर एवं जीवन पर गत 27 सालों में कांग्रेस एवं केजरीवाल की सरकारों ने झुग्गी वालों कोमानव नही वोट बैंक समझा और कोई सुविधा दिए बिना नारकीय जीवन जीने को मजबूर किया. इसके विपरीत भाजपा झुग्गी क्लस्टर वालों को बेहतरजीवन देने को प्रयासरत है. वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है की श्रीमती रेखा गुप्ता सरकार गरीबों के सपने पूरे कर रही है जबकि अरविंद केजरीवाल सरकारगरीबों को सपने बेच कर वोट ठगती थी.यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित नीति में बदलाव किया जाएगा और कानूनी मदद (कोर्ट में अपील) भी कीजाएगी, ताकि गरीबों के आवास अधिकारों की रक्षा हो सके.इसके विपरीत भाजपा अब गरीबों के सपनों को पूरा करने में लगी हुई है, जबकि AAP केवल उनके सपने बेचकर वोट ठगने का काम करती है. कोई नहीं है वास्तविक संचालनAAP के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि BJP पूर्व में दिल्ली में अनेक झुग्गी क्लस्टर की बुलडोज़िंग में शामिल रही है, विशेषतः रेलवे और DDA की कार्रवाई में जिससे लोग बेघरों में रहे. चुनाव के पूर्व संवाद और फ्लैट रेंटिंग की घोषणाएँ सिर्फ राजनीतिक प्रचार थीं. दूसरी ओर, AAP का कहनाहै कि इन घोषणाओं के पीछे वैसा कोई वास्तविक संचालन नहीं है और उन्हें राजनीतिक शो का हिस्सा माना जा रहा है. CM रेखा गुप्ता का यहफैसला—”पहले आवास, फिर हटाइए”—एक नई नीतिगत दिशा संकेत कर रहा है जो कि झुग्गी झोपड़ी निवासियों को सतत सुरक्षा और पुनर्वास देनेका प्रयास है.भाजपा अध्यक्ष सचदेवा की प्रतिक्रिया इस घोषणा को BJP के चुनावी वादों की पूर्ति की ओर एक कदम बता रही है, जबकि उन्होंनेपिछली सरकारों पर जनविरोधकारी रवैये का आरोप लगाया है.
संस्कृत को बोलचाल की होगा भाषा बनाना, आरएसएस प्रमुख का आह्वान संस्कृत केवल भाषा नहीं, भारत की है आत्मा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत की सभी भाषाओं की जड़ संस्कृत है और अब समय आ गया हैकि इसे संवाद की भाषा बनाया जाए. नागपुर के कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय में एक नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में बोलते हुएउन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल समझना नहीं, बोलना भी आना चाहिए. भागवत ने आगे कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय को सरकार का सहयोग तोमिलेगा ही, लेकिन असली जरूरत जनसहयोग की है. उन्होंने माना कि उन्होंने स्वयं भी संस्कृत सीखी है लेकिन धाराप्रवाह बोल नहीं पाते उन्होंने इसबात पर जोर दिया कि संस्कृत को हर घर तक पहुंचाना होगा और इसे संवाद का माध्यम बनाना पड़ेगा. आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि आज देशमें आत्मनिर्भर बनने की भावना पर आम सहमति है. लेकिन इसके लिए हमें अपनी बौद्धिक क्षमता और ज्ञान को विकसित करना होगा. उन्होंने कहा किभाषा केवल शब्दों का माध्यम नहीं, बल्कि ‘भाव’ होती है और हमारी असली पहचान भी भाषा से ही जुड़ी होती है. भाषा बनाने में अहम भूमिकामोहन भागवत ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और चेतना की वाहक है. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति संस्कृत जानता हैवह भारत को गहराई से समझ सकता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्वत्व यानी आत्मबोध कोई भौतिक चीज नहीं, बल्कि यह हमारी वैचारिक औरसांस्कृतिक पहचान है, और इसे व्यक्त करने के लिए भाषा का माध्यम जरूरी है. इस मौके पर मोहन भागवत ने कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृतविश्वविद्यालय में ‘अभिनव भारती अंतरराष्ट्रीय अकादमिक भवन’ का उद्घाटन किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संस्थान न केवल संस्कृत भाषा कोजीवंत बनाए रखेगा, बल्कि इसे रोजमर्रा की बोलचाल की भाषा बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा. समाज की साझी है जिम्मेदारीमोहन भागवत का यह संदेश सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि एक आह्वान है कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनः जागृत करने के लिए संस्कृत कोआम जीवन में अपनाना आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर के कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय में कहा कि संस्कृत भारत की सभी भाषाओं की जड़ है और इसे संवादकी भाषा बनाना जरूरी है. उन्होंने जनसहयोग की अपील करते हुए कहा कि संस्कृत को घर-घर तक पहुंचाना चाहिए.
भारत पर टैरिफ और रूस से व्यापार को लेकर अतिरिक्त जुर्माना संभव, 7 अगस्त से लागू होंगे अमेरिका के नए टैरिफ

अमेरिका ने भारत समेत कई अन्य देशों पर लगने वाला टैरिफ एक हफ्ते के लिए टाल दिया है. पहले ये टैरिफ 1 अगस्त से लागू होना था. लेकिन अबयह 7 अगस्त से लागू होगा. गुरुवार को व्हाइट हाउस ने उन देशों की सूची जारी की. जिन पर अमेरिकी सरकार ने टैरिफ लगाया है या फिर संशोधितकिया है। ‘पारस्परिक टैरिफ दरों में और संशोधन’ शीर्षक वाले एक कार्यकारी आदेश में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के लगभग 70 देशों केलिए टैरिफ दरों की घोषणा की. भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार औरसुरक्षा समझौते करने के लिए कुछ व्यापारिक साझेदार देश सहमत हो गए हैं और कुछ सहमत होने के कगार पर हैं. अतिरिक्त जुर्माना लगाने का अनुमानयह व्यापार बाधाओं को स्थायी रूप से दूर करने और आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में अमेरिका के साथ तालमेल बिठाने के उनके ईमानदार इरादोंका संकेत देता है. ट्रंप ने कहा, ‘बातचीत में शामिल होने के बावजूद, कई व्यापारिक साझेदारों ने ऐसी शर्तें पेश की हैं जो, मेरे विचार से, हमारेव्यापारिक संबंधों में असंतुलन को दूर नहीं करती हैं या आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अमेरिका के साथ पर्याप्त रूप से तालमेल बिठाने मेंविफल रही है. ये टैरिफ 7 अगस्त से लागू होंगे. इस सूची में 10 से लेकर 40 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए गए हैं. इनमें जापान पर 15 प्रतिशत, लाओसऔर म्यांमार पर 40-40 प्रतिशत, श्रीलंका पर 20 प्रतिशत और ब्रिटेन पर 10 प्रतिशत टैरिफ शामिल है ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और रूससे सैन्य उपकरण और ऊर्जा की खरीद के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाने का एलान किया है. भारत के साथ भारी व्यापार घाटाट्रंप ने कहा कि अमेरिका का भारत के साथ भारी व्यापार घाटा है उन्होंने कहा ‘भारत हमारा मित्र है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हमने उनके साथअपेक्षाकृत कम व्यापार किया है क्योंकि उनके टैरिफ बहुत ज्यादा हैं दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं साथ ही किसी भी देश की तुलना में उनके सबसे कठोरगैर-मौद्रिक व्यापार प्रतिबंध हैं.’ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का भारत के साथ भारी व्यापार घाटा है. उन्होंने कहा ‘भारत हमारा मित्र है. लेकिन पिछले कुछवर्षों में हमने उनके साथ अपेक्षाकृत कम व्यापार किया है क्योंकि उनके टैरिफ बहुत ज्यादा हैं, दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं.’ इस टैरिफ के साथ-साथभारत की रूस से ऊर्जा और सैन्य उपकरण खरीद पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है, हालांकि कार्यकारी आदेश में इस जुर्माने का स्पष्ट उल्लेखनहीं है. एक संघीय अपीलीय न्यायालय ने यह भी कहा है कि ट्रंप का आपातकालीन अधिकार (IEEPA) व्यापक टैरिफ लगाने के लिए वैध नहीं है, और वर्तमान टैरिफ आदेशों को चुनौती दे रहा है जिन देशों ने संतुलित शर्तें पेश नहीं की, उन पर टैरिफ लगाए गए हैं ताकि व्यापार असंतुलन दूर कियाजा सके और सुरक्षा सहयोग बढ़े.
राहुल गांधी ने ट्रंप की भारत पर टिप्पणी से जताई सहमति, थरूर और शुक्ला ने जताया विरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ के अलावा भारत की अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी को लेकर भी चर्चा में हैं. उन्होंने ‘डेड इकॉनमी’ बताते हुए भारत औररूस पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई हालांकि, अब उन्होंने भारत पर प्रस्तावित 25 फीसदी टैरिफ के फैसले को एक हफ्ते के लिए टाल दिया है. इसी बीच डेड इकॉनमी वाले बयान के कारण ट्रंप भारत के कई राजनीतिक दलों के निशाने पर आ गए हैं. उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेससांसद राहुल गांधी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ सहमति जताई थी. हालांकि, कई अन्य सांसदों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को आइना दिखाते हुए कहा हैकि भारत को उनकी टिप्पणी और नसीहत की जरूरत नहीं है. भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बताने वाले बयान में ट्रंप ने ये भी कहा था कि रूस औरभारत किस तरह का द्विपक्षीय व्यापार करते हैं, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता. ट्रंप ने कहा है कि वे भारत पर 25 फीसदी टैरिफ के साथ रूस से व्यापारकरने पर जुर्माना भी लगाएंगे. विदेश नीति को बताया नाकामीकई विपक्षी राजनीतिक दलों ने ट्रंप के इस बयान को सरकार की विदेश नीति की नाकामी बताया. हालांकि, राहुल गांधी ने संसद परिसर में एकसवाल का जवाब देते हुए कहा, भारत की अर्थव्यवस्था मृत हो चुकी है अगर कोई ऐसा कहता है तो इससे किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए. उन्होंनेट्रंप की टिप्पणी को सरकार की आर्थिक और विदेश के साथ-साथ रक्षा नीति की नाकामी भी करार दिया. राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद जब उनकेही दल के वरिष्ठ सांसदों से ट्रंप की टिप्पणी को लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने कांग्रेस सांसद से बिल्कुल अलग राय दी. केरल से निर्वाचित कांग्रेससांसद शशि थरूर ने इस संबंध में कहा’अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता चुनौतीपूर्ण है हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं. अमेरिकाअकेला ऐसा देश नहीं है जिसके साथ बातचीत चल रही है. यूरोपीय संघ के साथ भी हमारी बातचीत चल रही है. हमने ब्रिटेन के साथ एक समझौताकर लिया है. हम अन्य देशों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं. अगर हम अमेरिका में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, तो हमें अमेरिका के बाहर अपने बाजारों मेंविविधता लानी पड़ सकती है. हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. दबाव बनाने की रणनीतिकांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत की विदेश और आर्थिक नीति को लेकर कहा, अगर अमेरिका अपनी अनुचित मांगों के आधार पर दबाव बनाने कीरणनीति अपनाता है तो हमें कहीं और जाना होगा. यही भारत की ताकत है हम चीन की तरह पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था नहीं हैं। हमारेपास एक अच्छा और मजबूत घरेलू बाजार है. थरूर ने कहा कि व्यापार वार्ता के पहलू पर कहा, ‘इसमें शामिल लोगों को हमें सर्वोत्तम डील के लिएमजबूती से समर्थन देना चाहिए। अगर कोई अच्छा सौदा संभव नहीं है, तो हमें पीछे हटना पड़ सकता है. ट्रंप की डेड इकॉनमी वाली टिप्पणी पर एकअन्य कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐसा कहना कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं खत्म (Dead) हो गई हैं, सरासरगलत है. भारतीय अर्थव्यवस्था खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में आर्थिक सुधार किए गए थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने उन सुधारों को आगे बढ़ाया.
भारत अमेरिका व्यापार वार्ता में रुकावट, कृषि और डेयरी सेक्टर बना टकराव का कारण

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि भारत, रूस से तेल खरीद रहा है जिससे रूस को आर्थिक मदद मिल रही है औरयूक्रेन में युद्ध जारी है. मार्को रुबियो ने कहा कि भारत के साथ परेशानी की ये सबसे बड़ी वजह है लेकिन इसके अलावा भी कई अन्य वजह हैं. एकअमेरिकी मीडिया संस्थान के साथ इंटरव्यू में मार्को रुबियो ने दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप, इस बात से बेहद नाराज हैं कि भारत, रूस से लगातार तेलकी खरीद कर रहा है. जबकि भारत के पास तेल खरीदने के लिए कई अन्य विकल्प मौजूद हैं. लेकिन रूस से तेल खरीदकर भारत, रूस की यूक्रेन केखिलाफ युद्ध में मदद कर रहा है. रुबियो ने कहा कि ‘भारत को अपनी अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा की बहुत ज्यादा जरूरत है. ऐसे में भारत, रूस से तेलखरीद रहा है क्योंकि रूस का तेल प्रतिबंधों के चलते सस्ता है. कई मामलों में रूस वैश्विक तेल की कीमतों से कम पर भी तेल बेच रहा है. अन्य मुद्दे भी है शामिललेकिन दुर्भाग्य से इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई जारी रखने में मदद मिल रही है. इसलिए ये सबसे अहम वजह है. जिससे हमें परेशानी है, लेकिन ये सिर्फ इकलौती वजह नहीं हैं. हमारे बीच कुछ अन्य मुद्दे भी हैं. जिन पर असहमति है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते परबातचीत जारी है लेकिन एक मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. दरअसल भारत, अमेरिका के लिए अपने कृषि और डेयरी उद्योगको खोलने के लिए तैयार नहीं है, जबकि अमेरिका इसके लिए दबाव बना रहा है। अमेरिका भारत में अपने कृषि उत्पाद, जीएम फसलें, डेयरी उत्पाद, मक्का, सोयाबीन, सेब, बादाम और इथेनॉल आदि को बेचना चाहता है. अमेरिका की मांग है कि इन सेक्टर में टैरिफ कम किए जाएं. भारत का माननाहै कि अगर उन्होंने कृषि और डेयरी सेक्टर अमेरिका के लिए खोला तो हमारे देश के छोटे किसान लाखों रुपये की सब्सिडी पाने वाले अमेरिकी किसानोंसे प्रतिद्वंदिता नहीं कर पाएंगे. युद्ध जारी रखने में मिल रही है मददइनके अलावा भी कई अन्य क्षेत्र हैं, जहां अमेरिका अपने उत्पादों पर टैरिफ घटाने की मांग कर रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है किभारत, रूस से सस्ती दरों पर तेल खरीद रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है. इस बात को लेकर अमेरिकाकाफी नाराज है। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में सबसे बड़ा अड़चन है भारत का कृषि और डेयरी सेक्टर अमेरिकी उत्पादोंऔर जीएम फसलों के लिए खोलने से इनकार करना—जिस पर भारत दृढ़ रहता है क्योंकि इससे छोटे किसानों की मजबूती और आय प्रभावित होसकती है रुबियो ने इंटरव्यू में बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस बात से खासे नाराज़ हैं कि भारत के पास तेल खरीदने के कई विकल्प होते हुए भी वह रूस सेसस्ता तेल खरीद रहा है. जिससे युद्ध को आर्थिक मदद मिल रही है.
पानी में घुलनशील उर्वरकों के लिए भारत का चीन पर बढ़ता भरोसा, आपूर्ति में बाधा बनी चिंता

भारत पानी में घुलनशील उर्वरकों (वॉटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर्स) की बड़ी मात्रा चीन से आयात करता है. इसके साथ ही बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, मोरक्को और अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से भी इन उर्वरकों की आपूर्ति की जाती है संसद में शुक्रवार को रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रियापटेल ने यह जानकारी दी. वित्त वर्ष 2024 के दौरान देश में पानी में घुलने वाले उर्वरकों की वार्षिक खपत लगभग 3.35 लाख टन रही. पटेल ने कहाकि उर्वरक कंपनियां अपने कारोबार के अनुसार फॉस्फेटिक और पोटेशियम उर्वरकों का आयात करने के लिए स्वतंत्र हैं. संसद में यह प्रश्न पूछा गया थाकि क्या चीन ने भारत को कुछ विशेष उर्वरकों का निर्यात रोक दिया है, जिससे भारतीय किसानों पर प्रतिफूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. उर्वरकों को करता है आयातमंत्री ने कहा कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत 100 प्रतिशत जल घुलनशील जटिल उर्वरक और 100 प्रतिशत जल घुलनशील मिश्रण, श्रेणी को छोड़कर विशेष उर्वरक के रूप में कोई वर्गीकरण नहीं है. पानी में घुलनशील उर्वरकों का उपयोग मुख्य तौर पर नकदी और बागवानी फसलोंके लिए किया जाता है. इनमें से कोई भी उर्वरक सरकार की पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के दायरे में आने वाला सब्सिडी वालाउर्वरक नहीं है. रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि भारत चीन के साथ-साथ बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, मोरक्को औरअमेरिका जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से बड़ी मात्रा में पानी में घुलनशील उर्वरकों का आयात करता है. अलग वर्गीकरण नहीं है कोई नियमवित्त वर्ष 24 के दौरान देश में इनकी वार्षिक खपत लगभग 3.35 लाख टन रही. भारत अपनी विशेष उर्वरक जरूरतों के लिए लगभग 80% आयामचीन पर निर्भर रहता है. लेकिन हाल में चीन ने निर्यात नियंत्रण और CIQ लम्बा परीक्षण अवधि लागू कर दी, जिससे MAP, CN, PN जैसे मुख्यघटकों की आपूर्ति में तेजी से गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, MAP का आयात जून 2025 तक मात्र 2,842 टन था, जबकि 2024 में यह21,214टन था. जैसे-जैसे चीन से आयात घट रहा है वैसे ही भारत ने मोरक्को, रूस, जॉर्डन, सऊदी अरब जैसे देशों से आयात बढ़ाया है. हालाँकि, येस्रोत चीन को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सके, जिससे मूल्य वृद्धि और बाजार अस्थिरता बनी हुई है. अनुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया किफॉस्फेटिक और पोटेशियम आधारित उर्वरक कंपनियों द्वारा वाणिज्यिक आधार पर स्वतंत्र रूप से आयात किए जा सकते हैं. फिलहाल, जलघुलनशील जटिल और मिश्रित उर्वरक को विशेष उर्वरक वर्गीकरण के तहत छोड़कर कोई अलग वर्गीकरण नियम नहीं हैं.
21 वर्षीय प्रियंका नेगी बनीं गैरसैंण के सारकोट गांव की ग्राम प्रधान, सीएम धामी ने दी बधाई और विकास के लिए साथ काम करने का किया आश्वासन

चमोली के गैरसैंण की 21 वर्षीय नवर्निवाचित ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी को फोन करके सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी जीत की बधाई. सीएम ने कहाकि गांव के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे. उन्होनें सारकोट के सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि सारकोट के ग्रामीणों ने अच्छा चुनाव लड़ा. गैरसैंण को प्रदेश के मॉडल गांव के रूप में चुना गया है. कहा कि जिले के उच्च अधिकारी जल्द गांव का निरीक्षण करेंगे। उन्होनें नवर्निवाचित ग्रामप्रधान प्रियंका नेगी को गांव में चल रहे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही. साथ ही कहा कि गांव की महिलाओं को आगे बढ़ाए. उन्हेंस्वरोजगार से जोड़ा जाए उन्होनें प्रियंका नेगी को देहरादून आमंत्रित भी किया. गैरसैंण ब्लॉक के मुख्यमंत्री आदर्श गांव सारकोट की कमान अब सबसेकम उम्र की युवती प्रियंका नेगी संभालेंगी. 21 वर्ष की प्रियंका नेगी प्रधान पद के लिए निर्वाचित हुई हैं. उन्होंने अपनी प्रतिद्वंदी प्रियंका देवी कोहराकर विजय हासिल की. प्रियंका नेगी को 421 और प्रियंका देवी को 235 मत प्राप्त हुए. विकास कार्य है किए जा रहेइससे पूर्व 2014-19 तक प्रियंका के पिता भी प्रधान रह चुके हैं. प्रियंका नेगी ने गैरसैंण महाविद्यालय से राजनीतिशास्त्र विषय में स्नातक किया हैजिसका परिणाम भी तीन दिन पहले की आया. चमोली जनपद के सबसे बड़े गांवों में से एक मुख्यमंत्री आदर्श गांव सारकोट में वर्तमान में 300 सेअधिक परिवार रहते हैं. गांव से पलायन न होने के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण में सारकोट गांव को आदर्श गांव घोषित किया था. तब से सीएम धामी सारकोट गांव को लेकर गंभीर हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गांव में कई विकास कार्य किए जा रहे हैं. अब इस गांवकी कमान नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी संभालेंगी. प्रियंका ने कहा कि वह मुख्यमंत्री की ओर से किए जा रहे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने काकाम करेंगी. गांव की महिलाओं को जागरूक बनाना प्राथमिकता रहेगी ताकि वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। प्रियंका नेगी के पिता पूर्व प्रधान राजे सिंहनेगी ने बताया कि गांव के विकास के लिए वे अपने बेटी का हरसंभव प्रयास करेंगे. युवा चेहरे आए निकलकर सामनेउत्तराखंड पंचायत चुनाव में इस बार कई युवा चेहरे निकलकर सामने आए. गैरसैंण की 21 साल की प्रियंका को प्रधान बनने पर सीएम धामी ने फोनकर बधाई दी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रियंका नेगी को फोन कर उनकी जीत पर बधाई दी और गांव के विकास के लिए मिलकर काम करने काभरोसा दिलाया. सीएम ने सारकोट के सभी ग्रामीणों को भी बधाई दी और कहा कि सारकोट के लोगों ने अच्छा चुनाव लड़ा है. प्रियंका के पिता, राजेसिंह नेगी, भी 2014-19 तक इसी गांव के ग्राम प्रधान रह चुके हैं, जो उनकी राजनीतिक विरासत का प्रमाण है। प्रियंका नेगी ने बताया कि वहमुख्यमंत्री के द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों को निरंतरता देंगी और गांव की महिलाओं को जागरूक व सशक्त बनाएंगी.
बाल श्रम उन्मूलन के लिए यूपी में तैयार व्यापक योजना, महिला एवं बाल विकास विभाग को जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य को बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए व्यापक और चरणबद्ध रणनीति तैयार की है. सीएमयोगी के नेतृत्व में श्रम विभाग ने इससे जुड़ी राज्य कार्ययोजना तैयार की है और इसके केंद्र में महिला एवं बाल विकास विभाग को रखा गया है. जो नकेवल संकटग्रस्त बच्चों की पहचान और सहायता करेगा, बल्कि उनके पुनर्वासन के हर स्तर पर प्रमुख भूमिका निभाएगा. प्रदेश सरकार का लक्ष्य है किदिसंबर 2026 तक प्रदेश के आठ आकांक्षी जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र को बालश्रम से मुक्त कर दिया जाएगा. इसके साथ ही कानपुर मंडल और देवीपाटन मंडल में भी विशेष बाल श्रम विरोधी अभियान चलाया जाएगा. महिलाएवं बाल विकास विभाग के तहत वन स्टॉप सेंटर, बाल सेवा योजना और स्पॉन्सरशिप योजना जैसी योजनाओं को बाल श्रमिकों के पुनर्वासन में प्रभावीरूप से उपयोग में लाया जाएगा. वन स्टॉप सेंटर के जरिए संकट में फंसे बच्चों को अस्थायी आश्रय देने की योजना तय की गई है. साथ ही इनमें बच्चोंकी पहचान, स्वास्थ्य जांच, परामर्श और समाज में पुनर्स्थापन की भी व्यवस्था करना तय किया गया है. शैक्षिक सहयोग की निभाएगा जिम्मेदारीगौरतलब है कि ‘बाल सेवा योजना’ के तहत अनाथ, परित्यक्त और संकटग्रस्त बच्चों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे उनकी शिक्षा औरपालन-पोषण बाधित न हो. इस योजना के तहत योगी सरकार ऐसे बच्चों को 2500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध कराती है. इसी प्रकार, स्पॉन्सरशिपयोजना के माध्यम से कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को प्रतिमाह सहयोग राशि दी जाती है, ताकि वे शिक्षा और जीवन की मूलभूतआवश्यकताओं से वंचित न रहें. यूपी सरकार ने बाल श्रमिक विद्या योजना का विस्तार अब सभी 75 जिलों में करने की योजना बनाई है. इस योजनाके तहत काम में लगे बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाएगा और उन्हें छात्रवृत्ति, पुस्तकें, यूनिफॉर्म और विशेष शिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी. शिक्षा विभाग इन बच्चों के पुनः नामांकन और शैक्षिक सहयोग की जिम्मेदारी निभाएगा. बाल श्रम से कर दिया जाएगा मुक्तपंचायत स्तर पर कामकाजी बच्चों और प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों का विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा निगरानी से बाहरन रहे. पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्कूल प्रबंधन समितियां इस कार्य में सहयोग करेंगी. इसके अलावा, बाल श्रम उन्मूलन अभियान कोजनांदोलन बनाने के लिए गैर सरकारी संगठनों (NGOs), शैक्षणिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी. उत्तरप्रदेश सरकार ने लक्ष्य रखा है कि दिसंबर 2026 तक प्रदेश के आठ आकांक्षी जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाएगा.
मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में सीआईएसएफ जवानों के वेल में प्रवेश को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, उपसभापति को लिखा पत्र

वरिष्ठ कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने उपसभापति हरिवंश को पत्र लिखा है. उन्होंने सदन के वेल मेंसीआईएसएफ जवानों के आने की घटना को ‘बेहद आपत्तिजनक’ बताया और कहा कि संसद में ऐसी घटना हैरान करने वाली है. खरगे ने उपसभापतिको लिखे पत्र में कहा, भविष्य में, जब राज्यसभा सदस्य जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे होंगे, तो सीआईएसएफ कर्मी सदन के वेल में नहीं आएंगे, उन्हें ऐसी उम्मीद है. बता दें कि संसदीय नियमावली के तहत सदन की कार्यवाही चलते समय सदन के वेल में सांसदों का आना प्रतिबंधित होता है. इसे सदन में अव्यवस्था के साथ-साथ सभापति के आसन पर दबाव बनाने के प्रयास की तरह देखा जाता है. सदन के वेल में घुसने को लेकर सभापतिसांसदों को आगाह करते हैं. पीठासीन सभापति के निर्देशों और अपील का उल्लंघन करने पर सांसदों को निलंबित भी किया जा सकता है. हैरान व स्तब्ध है मल्लिकार्जुन खरगेकांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने उपसभापति डॉ हरिवंश को लिखे पत्र में कहा, ‘हम इस बात से हैरान और स्तब्धहैं कि सीआईएसएफ कर्मियों को सदन के वेल में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है. उन्होंने कहा कि जिस समय राज्यसभा सदस्य जब अपने लोकतांत्रिकअधिकार का प्रयोग कर रहे हैं. उस समय सुरक्षाकर्मियों का सदन के वेल में आना बेहद आपत्तिजनक है और वे इसकी कड़ी निंदा करते हैं। खरगे नेलिखा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में, जब सदस्य जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे होंगे, तो सीआईएसएफ कर्मी सदन के वेल में नहीं आएंगे.संसद की कार्यवाही संचालन के समय सभापति के आसन के ठीक सामने राज्यसभा महासचिव बैठते हैं. उनके अलावा सदन की कार्यवाही चलाने मेंमदद करने वाले कई अन्य पदाधिकारी भी होते हैं. सांसदों के बैठने की जगह और सभापति के आसन के बीच अर्धचंद्राकार या यू शेप वाले हिस्से कोसदन का वेल कहा जाता है. इस जगह पर बिना अनुमति के आना नियमों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. आधिकारिक संसदीय होते है दस्तावेजसदन के वेल में आना इसलिए भी आपत्तिजनक है क्योंकि राज्यसभा महासचिव और उनके अन्य सहयोगी पदाधिकारियों के पास संवेदनशील औरआधिकारिक संसदीय दस्तावेज होते हैं. बीते कुछ समय में इस जगह पर आने के कारण कई सांसदों को निलंबन का दंड भी झेलना पड़ा है. हंगामाऔर शोरशराबा करने के बाद उग्र हुए कुछ सांसदों ने तो मर्यादा की तमाम सीमाओं को तोड़ते हुए महासचिव की टेबल पर चढ़ने से भी गुरेज नहींकिया. ऐसे अशोभनीय आचरण करने वाले सांसदों को पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के तत्कालीन सभापति वेंकैया नायडू ने सदन से पूरे सत्र निलंबितकर दिया था. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के वेल में सीआईएसएफ जवानों के घुसने की घटना पर सख्त आपत्ति दर्ज कराईहै. उन्होंने उपसभापति हरिवंश को लिखे गए पत्र में कहा कि सांसद अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं, इसी समय वेल मेंसीआईएसएफ कर्मियों का प्रवेश हैरान करने वाला है.