आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित कोर्ट ने कहा नियमों की अनदेखी से बिगड़ी है स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़ने के 11 अगस्त के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखलिया. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले हर व्यक्ति को जिम्मेदारी लेनी होगी. शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पूरीसमस्या स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता के कारण है. नियमों का पालन न करने की वजह से समस्या इतनी बढ़ गई है. सुनवाई केदौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अधिकारियों से पशु जन्म नियंत्रण नियमों के कार्यान्वयन पर उनका रुख पूछा. कोर्ट ने कहा कि पूरी समस्या नियमों केकार्यान्वयन में अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण है। नियम और कानून संसद की ओर से बनाए जाते हैं. लेकिन उनका पालन नहीं किया जाता।स्थानीय अधिकारी वह नहीं कर रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए. बहुसंख्यक चुपचाप है पीड़ितएक ओर इंसान पीड़ित हैं, तो दूसरी ओर जानवर भी पीड़ित हैं और पशु प्रेमी यहां मौजूद हैं. दिल्ली सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया किरेबीज फैलाने वाले कुत्तों के काटने से बच्चों की मौत हो रही है आवारा कुत्तों के मुद्दे का समाधान किया जाना चाहिए. न कि इस पर विवाद किया जानाचाहिए. दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ को बतायाकि नसबंदी से रेबीज नहीं रुकता, भले ही आप उन्हें टीका लगा दें. इससे बच्चों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं नहीं रुकतीं. सॉलिसिटर जनरल नेसुप्रीम कोर्ट के सामने एक आंकड़ा पेश किया, जिसमें कहा गया है कि 2024 में देश में कुत्तों के काटने के 37 लाख मामले सामने आएं. इस दौरानरेबीज से 305 मौतें हुईं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मॉडल के अनुसार यह संख्या कहीं अधिक है. उन्होंने कहा कि बच्चे खुले में खेलने नहीं जा पा रहे हैं. कोर्ट को इसका समाधान ढूंढ़ना होगा. यह अल्पसंख्यकों का मुखर दृष्टिकोण है जबकि बहुसंख्यक चुपचाप पीड़ित हैं. बहस करने की है जरुरतकुत्तों की देखभाल करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर है. इस मामले परगहराई से बहस करने की जरूरत है. सिब्बल ने 11 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पारित कुछ निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की. जिनमेंदिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द उठाना शुरू करने और उन्हें आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने केनिर्देश शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या नगर निगम ने कुत्तों के लिए आश्रय गृह बनाए हैं? क्या कुत्तों की नसबंदी की गई है? अबकुत्तों को उठाया जा रहा है. हालांकि, आदेश में कहा गया है कि एक बार नसबंदी हो जाने के बाद आवारा कुत्तों को समुदाय में नहीं छोड़ा जानाचाहिए.वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 11 अगस्त के उस आदेश का भी विरोध किया, जिसमें अधिकारियों को आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में रखनेका निर्देश दिया गया था. उन्होंने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाएं तो होती हैं लेकिन इस साल दिल्ली में रेबीज से एक भी मौत नहीं हुई है. बेशक, कुत्तों के काटने की घटनाएं बुरी हैं लेकिन आप इस तरह की भयावह स्थिति पैदा नहीं कर सकते.
विजन 2047 नहीं, इंसाफ 2025 चाहिए, लोकदल ने यूपी सरकार के दस्तावेज़ को बताया जनता से सबसे बड़ा राजनीतिक धोखा

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का “विजन डॉक्यूमेंट 2047” असल में जनता के साथ एक सुनियोजित धोखाहै. यह दस्तावेज़ सिर्फ़ कागज़ी जुमलों और झूठे वादों का पुलिंदा है जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान आज की असल समस्याओं से भटकाना है. यहसरकार जनता को 2047 का सपना दिखा रही है. जबकि हालात में लोग महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों की आत्महत्याओं और कानून-व्यवस्था कीबदहाली से जूझ रहे हैं. यह वैसा ही है जैसे किसी डूबते आदमी से कहा जाए इंतज़ार करो, 22 साल बाद तुम्हें किनारे लगा देंगे यह सरकार न आज कीसमस्याएँ सुलझा रही है. न कल की, बल्कि केवल चुनावी नौटंकी और प्रचार तंत्र से जनता को बेवक़ूफ़ बना रही है. राजनीतिक धोखा दिया करारलोकदल अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि जनता अब इन खोखले नारों और कागज़ी सपनों के जाल में फँसने वाली नहीं है. हम 2047 नहीं, 2025 में हक़और न्याय चाहते हैं जनता अब हिसाब लेगी और इस सत्ता से धोखे का बदला ज़रूर लेगी. विधान परिषद में लाल बिहारी यादव ने इस विजन डॉक्यूमेंटको “चुनावी घोषणापत्र” जैसा बताते हुए कहा कि जिन वादों को सरकार ने दशकों में पूरा नहीं किया. उनपर भरोसा कैसे किया जाए? उन्होंने काले धनवापसी, ₹15‑लाख, 2 करोड़ नौकरियाँ, किसानों की आमदनी दोगुनी करने जैसे वादों का हवाला दिया, जो पूरी नहीं हुईं. लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्षसुनील सिंह ने “विजन डॉक्यूमेंट 2047” को जनता के साथ “सबसे बड़ा राजनीतिक धोखा” करार दिया. झूठे वादों का है पुलिंदाउन्होंने कहा कि यह दस्तावेज़ केवल कागज़ी जुमलों और झूठे वादों का पुलिंदा है. जिसका उद्देश्य जनता को असल समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोज़गारीऔर किसानों की समस्याओं से भटकाना है. उन्होंने इसे उस स्थिति से जोड़ा जैसे “डूबते आदमी से कहा जाए. इंतज़ार करो, 22 साल बाद किनारेलगाएंगे और निष्कर्ष में कहा कि जनता अब 2047 नहीं, 2025 में हक और न्याय चाहती है और धोखे का हिसाब लेगी. यह प्रेस नोट उनके जुड़ेबयान की रूपरेखा है जिसे आपने साझा किया. जिसमें यह अति‑प्रसंग और तीखी आलोचना शामिल है.
लाल किले से ऐतिहासिक संबोधन, पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर आरएसएस के शताब्दी वर्ष को बताया राष्ट्रनिर्माण का प्रेरक क्षण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आज लाल किले से अपने 103 मिनट लंबे भाषण में संघ केयोगदानों को रेखांकित किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 100 साल की अवधि में संघ ने राष्ट्रनिर्माण के काम में योगदान दिया है. इस बात काउल्लेख इसलिए अहम है क्योंकि लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री ने पहली बार आरएसएस का जिक्र किया है. पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह 2025 में लगातार 12वें साल ध्वजारोहण किया. उन्होंने संघ को दुनिया का सबसे बड़ा NGO बताया औरकहा कि यह संगठन देश के अलग-अलग हिस्सों में योगदान दे रहा है. पीएम मोदी ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा, समर्पण संगठन औरअप्रतिम अनुशासन आरएसएस की पहचान रही है. उन्होंने कहा, आज लाल किले की प्राचीर से वे उन स्वयंसेवकों को पूरे आदर के साथ याद करना चाहते हैं. जिन्होंने 100 साल की यात्रा में योगदानदिया है. पीएम मोदी ने कहा, देश गर्व करता है कि आरएसएस की यह भव्य और समर्पित यात्रा हमें प्रेरित करती रहेगी. आम तौर पर स्वतंत्रता दिवसभाषणों में प्रधानमंत्री मोदी विकास योजनाओं को गिनाने के अलावा नीतिगत घोषणाएं भी करते हैं. 2024 के भाषण में उन्होंने समान नागरिक संहिताका जोरदार समर्थन किया था. उन्होंने कानून के वर्तमान ढांचे को ‘सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण’ बताकर देश में एक साथ चुनाव (One Nation One Election) कराने की वकालत भी की थी. आज मैं गर्व के साथ एक बात का जिक्र करना चाहता हूं आज से 100 साल पहले एक संगठन का जन्महुआ- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संघ के लोग 100 साल से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं. व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर 100 साल तकमां भारती के कल्याण का लक्ष्य लेकर संघ के लोगों ने मातृभूमि के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है. ऐसा आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है. बीते 100 साल के दौरान देश की यात्रा में संघ का अहम योगदान है. प्रधानमंत्री मोदी ने जब79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपना भाषण शुरू किया तब उन्होंने उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल जैसे राज्यों में प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहेलोगों के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं. इसके अलावा उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति, आत्मनिर्भर भारत, तकनीक के मोर्चे पर देश की समृद्धि, ऊर्जा के विषय में देश के संकल्प और विकसित भारत बनाने के मिशन का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि 2030 तक जो लक्ष्य पूरा कियाजाना था, उसे हमने पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है. लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करने से पहले पीएम मोदी नेबलिदानी सपूतों को राष्ट्रीय समर स्मारक जाकर नमन किया. पीएम मोदी ने अपने शुरुआती संबोधन में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेखकिया. उन्होंने भाषण के सातवें मिनट में ही पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने वाले भारत के वीर सपूतों के पराक्रम का जिक्र कर पूरीदुनिया को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ देश की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को भी रेखांकित किया.
संयुक्त राष्ट्र महासभा सितंबर में न्यूयॉर्क यात्रा पर जा सकते हैं पीएम मोदी, ट्रंप से द्विपक्षीय बैठक की संभावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यानी सितंबर में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं. वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के वार्षिक उच्च-स्तरीय सत्र को संबोधित कर सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी वक्ताओं की मसौदा सूची के हवाले से यह खबर आ रही है. यूएनजीए का 80वांसत्र 9 सितंबर को शुरू होगा. उच्च-स्तरीय आम बहस 23 से 29 सितंबर तक चलेगी. इसमें ब्राजील पारंपरिक रूप से सत्र का पहला वक्ता होगा, उसके बाद अमेरिका का नंबर आएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 23 सितंबर को यूएनजीए मंच से विश्व नेताओं को संबोधित करेंगे. यह व्हाइटहाउस में अपने दूसरे कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्र सत्र को उनका पहला संबोधन होगा. महासभा के 80वें सत्र की उच्च-स्तरीय बहस के लिए वक्ताओं कीप्रारंभिक सूची के हिसाब से भारत के शासनाध्यक्ष (HG) 26 सितंबर की सुबह सत्र को संबोधित करेंगे. ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठकइस्राइल, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शासनाध्यक्ष भी उसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस को संबोधित करेंगें. पीएम मोदी ने इससाल फरवरी में वॉशिंगटन डीसी की यात्रा की थी इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी. बैठक के बाद जारी एकसंयुक्त बयान में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर बातचीत करने की योजना कीघोषणा की थी. भारत और अमेरिका में व्यापार वार्ता चल ही रही थी कि ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया. इससमें नई दिल्ली की ओर सेरूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरक्त टैरिफ भी शामिल है. जो 27 अगस्त से लागू होगा. टैरिफ को भारत के विदेश मंत्रालय ने अनुचित औरअविवेकपूर्ण बताया था. उच्च सत्तरीय बैंठकेंभारत ने कहा’किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा. हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस के लिए वक्ताओं की सूची अभी प्रारंभिक है अगले कुछ हफ्तों में कार्यक्रमों और वक्ताओं में बदलाव कीसंभावना है संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वर्ष का सबसे व्यस्त राजनयिक सत्र माना जाने वाला यह सम्मेलन हर साल सितंबर में शुरू होता है. इस साल यहसत्र इस्राइल-हमास युद्ध और यूक्रेन संघर्ष के बीच आयोजित हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यूएनजीए सत्र के लिए न्यूयॉर्क जा सकते हैं. ऐसे में अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में आई गिरावट के बीच पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात होसकती है. ट्रंप के अलावा पीएम मोदी यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ भी उच्च स्तरीय बैठकें कर सकते हैं.
स्वतंत्रता दिवस पर मांस बिक्री पर रोक से मचा राजनीतिक घमासान, ओवैसी और अजित पवार ने बताया आज़ादी का उल्लंघन

देश के कई नगर निकायों की ओर से इस स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के आदेश के बाद एक बड़ा राजनीतिकविवाद छिड़ गया है. कई राजनेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर इस प्रतिबंध को लोगों की खान-पान की आजादी पर नकेल कसने वाला बताया है. उनका कहना है कि देश अपनी आजादी का जश्न मना रहा है और इस दौरान ही आजादी का हनन हो रहा है. हैदराबाद के सांसद औरएआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम की ओर से 15 और 16 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी) कोबूचड़खानों और मांस की दुकानों को बंद रखने के आदेश की आलोचना की. उन्होंने लिखा, ‘ऐसा लगता है कि देश में कई नगर निगमों ने 15 अगस्तको बूचड़खानों और मांस की दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया है.निर्देश किया जारीदुर्भाग्य से ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम ने भी ऐसा ही आदेश दिया है. यह कठोर और असंवैधानिक है. ओवैसी ने कहा, ‘मांस खाने और स्वतंत्रता दिवसमनाने के बीच क्या संबंध है? तेलंगाना के 99% लोग मांस खाते हैं. ऐसे फैसले मांस प्रतिबंध लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकार का उल्लंघन करते हैं. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में इसी तरह के मांस प्रतिबंध के आदेश पर उपमुख्यमंत्री अजितपवार ने आपत्ति जताई. अजित ने कहा, ‘ऐसा प्रतिबंध लगाना गलत है बड़े शहरों में विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग रहते हैं. अगर यह भावनात्मकमुद्दा है तो लोग इसे एक दिन के लिए स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन अगर आप महाराष्ट्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ऐसे आदेश लगातेहैं तो यह मुश्किल है. मुंबई के पास ठाणे स्थित कल्याण डोंबिवली नगर निगम ने भी ऐसा ही निर्देश जारी किया है. बदनाम करने की कर रहा है कोशिशशिवसेना (उद्धव गुट) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि नगर आयुक्त को निलंबित कर दिया जाना चाहिए. यह तय करना उनका काम नहीं है कि कौनक्या खाए. उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्रता दिवस पर हम क्या खाते हैं, यह हमारा अधिकार है, हमारी आजादी है. वे हमें यह नहीं बता सकते कि हमें क्या खानाचाहिए. आप हमारे घरों में क्यों घुस रहे हैं? नगर निगम को सड़कों पर गड्ढों जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना केप्रवक्ता अरुण सावंत ने कहा कि महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना-राकांपा सरकार ने मांस पर प्रतिबंध को मंजूरी नहीं दी है. उन्होंने कहा, ‘विपक्ष राज्यसरकार पर झूठे आरोप लगा रहा है और उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है.
सट्टेबाजी ऐप मामले में ईडी की पूछताछ में पहुंचे सुरेश रैना, धन शोधन के आरोपों की जांच तेज

भारत के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर पहुंच चुके हैं. उन्हें ईडी ने ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले ऐप (बेटिंग ऐप) से जुड़ेमामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था. ईडी अब उनसे कथित अवैध सट्टेबाजी ऐप से जुड़े धन शोधन मामले में पूछताछ कर रही है. साथ हीसंघीय जांच एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनके बयान को भी दर्ज करेगी. माना जा रहा है कि पूर्व भारतीय क्रिकेटरकुछ विज्ञापनों के जरिए इस ऐप से जुड़े हैं. ईडी अधिकारियों द्वारा पूछताछ के दौरान इस ऐप से उनके संबंधों को समझने की उम्मीद है. बता दें कि एजेंसी अवैध सट्टेबाजी एप्स से जुड़े कई ऐसे मामलों की जांच कर रही है. जिन पर कई लोगों और निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी करनेया भारी मात्रा में कर चोरी करने का आरोप है. इस मामले में ईडी ने कार्रवाई तेज की है. खासकर उन विज्ञापनों पर जिनमें फिल्मी सितारे और क्रिकेटरशामिल हैं. ईडी इस मामले में कई अभिनेता और अभिनेत्रियों और खिलाड़ियों से भी पूछताछ कर चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये बेटिंगप्लेटफॉर्म बड़े-बड़े नामों का इस्तेमाल कर लोगों के पैसे लूटने का काम कर रहे हैं. विज्ञापनों में दिए गए क्यूआर कोड सीधे सट्टेबाजी साइटों पर ले जातेहैं. जो भारतीय कानून का उल्लंघन है. जांच में यह भी सामने आया है कि ये प्लेटफॉर्म अक्सर खुद को स्किल-बेस्ड गेमिंग के रूप में पेश करते है. लेकिन फर्जी एल्गोरिद्म के जरिए अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा देते हैं. सुरेश रैना भारत के सबसे सफल मिडल ऑर्डर बल्लेबाजों में गिने जाते हैं. उन्होंनेअंतरराष्ट्रीय स्तर पर 322 मैचों में करीब 8000 रन बनाए हैं. इसके अलावा वो तीनों प्रारूपों में शतक लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं. रैना काआईपीएल करियर भी बेहद शानदार रहा है. 205 मुकाबलों में उन्होंने 5528 रन बनाए हैं और उन्हें ‘मिस्टर आईपीएल’ का टाइटल भी मिला है. चारबार सीएसके को चैंपियन बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है. उनके 100* रन की पारी आज भी आईपीएल की यादगार पारियों में से एक मानीजाती है. माना जा रहा है कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर कुछ विज्ञापनों के जरिए इस ऐप से जुड़े हैं. ईडी अधिकारियों द्वारा पूछताछ के दौरान इस ऐप सेउनके संबंधों को समझने की उम्मीद है.
ट्रंप सरकार के टैरिफ के बाद भी अमेरिका के सुर नरम, भारत के साथ रिश्तों में कोई बदलाव नहीं अमेरिकी विदेश विभाग ने दिए निर्देश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगा गए टैरिफ को लेकर भारत के सख्त रुख को दुनिया देख रही है. भारत पर अपनी दबाव रणनीति नाकामहोता देख अब अमेरिका के सुर नरम पड़ गए हैं. उसकी ओर से कहा गया है कि भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते पहले जैसे ही हैं. इसमें कोई भीबदलाव नहीं हुआ है. हमारे राजनयिक भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर प्रतिबद्ध हैं. विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि भारत औरपाकिस्तान दोनों के साथ अमेरिका के संबंध बदले नहीं हैं. राजनयिक दोनों देशों के प्रति प्रतिबद्ध हैं. उनका यह बयान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरलअसीम मुनीर की फ्लोरिडा में की गई टिप्पणी के बाद आया है. वहां मुनीर ने कथित तौर पर कहा था कि पाकिस्तान अस्तित्व के लिए खतरा पैदा होनेकी स्थिति में भारत और आधी दुनिया को तबाह करने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. राजनयिक देशों के प्रति प्रतिबद्धविदेश विभाग की ब्रीफिंग में बोलते हुए ब्रूस ने कहा, ‘भारत-पाकिस्तान के साथ हमारा एक ऐसा अनुभव रहा है कि जब इनके बीच संघर्ष हुआ था तोवह बहुत भयानक रूप ले सकता था. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जो कुछ हो रहा था. उसकी प्रकृतिपर तत्काल चिंता जताई और तत्काल उस पर काम शुरू किया. ब्रूस ने संघर्ष को बढ़ने से रोकने में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता पर जोर देते हुएकहा, ‘हमने फोन कॉल्स की प्रकृति और हमलों को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के बारे में बताया है. जिससे दोनों पक्षों को एक साथ लाकर एकस्थायी समाधान तैयार हुआ. यह बहुत गर्व की बात है कि विदेश मंत्री रुबियो, उपराष्ट्रपति वेंस और इस देश के शीर्ष नेता उस संभावित तबाही कोरोकने में शामिल थे. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के साथ अमेरिका के संबंध अपरिवर्तित और अच्छे बने हुए हैं. राजनयिक दोनों देशों के प्रतिप्रतिबद्ध हैं. फ्लोरिडा में की गई टिप्पणीउन्होंने आगे कहा, ‘एशियाई क्षेत्र और दुनिया के लिए अमेरिका का दोनों देशों के साथ काम करना अच्छी खबर है। यह एक ऐसे भविष्य को बढ़ावादेगा जो लाभकारी होगा. गौरतलब है कि मुनीर दो महीने से भी कम समय में दूसरी बार अमेरिका की यात्रा पर हैं. यह यात्रा जून में ट्रंप के साथ एकनिजी लंच के बाद हो रही है. मुनीर रविवार को अमेरिका के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ कई उच्च-स्तरीय बैठकों के लिए वाशिंगटनपहुंचे थे. विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अमेरिका के संबंध बदले नहीं हैं राजनयिक दोनों देशों केप्रति प्रतिबद्ध हैं उनका यह बयान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की फ्लोरिडा में की गई टिप्पणी के बाद आया है.
विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश 2047 पर 24 घंटे अनवरत चलेगा विशेष सत्र, योगी करेंगे शुरुआत विपक्ष बोले– वादों की खुलेगी पोल

विधान परिषद और विधानसभा में 13 अगस्त को पूर्वाह्न 11 बजे से विजन डॉक्युमेंट-2047 पर चर्चा शुरू होगी. यह चर्चा 14 अगस्त को पूर्वाह्न 11 बजे तक लगातार चलेगी. इसका थीम है. विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश-2047 विधानसभा में चर्चा की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथकरेंगे जबकि विधान परिषद में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सबसे पहले अपनी बात रखेंगे. वर्ष 2047 में यूपी को लेकर सदस्यों का क्यादृष्टिकोण है। तब तक क्या-क्या काम होने चाहिए और यूपी की कैसी तस्वीर तब तक वे देखना चाहते हैं. सभी सदस्य इस मुद्दे पर अपना मत रखसकेंगे. चर्चा में भाग लेने के लिए मंत्रियों के लिए भी समय का स्लॉट तय कर दिया गया है. वादों की खोली पोलविजन डॉक्यूमेंट पर चर्चा को लेकर सपा ने भी अपनी रणनीति तैयार की है. सपा सदस्यों का कहना है कि वे सदन में मौजूद रहकर भाजपा के झूठे वादोंकी पोल खोलेंगे. सपा के विधायक आरके वर्मा ने कहा कि हम भाजपा का विजन डाक्यूमेंट बहुत पहले देख चुके हैं. उन्होंने सवाल दागे कि क्याकाला धन वापस आया। हर खाते में 15 लाख पहुंचे. दो करोड़ लोगों को रोजगार मिला. नोटबंदी के क्या फायदे हुए और किसानों की आय दोगुनाकरने के वादे का क्या हश्र हुआ. सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि यह चर्चा अनावश्यक है. अपनी रणनीति हम बुधवार को 10 बजेबैठक करके तय करेंगे. रोस्टर भी किया गया जारीबुधवार से चौबीस घंटे चलने वाले सदन में मंत्रियों की मौजूदगी अनिवार्य करने के लिए शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है. बुधवार शाम 6 बजे सेबृहस्पतिवार सुबह 11 बजे तक सदन में रहने के लिए 28 मंत्रियों का रोस्टर जारी किया गया है. सबसे ज्यादा 8 मंत्री तड़के तीन बजे से सुबह छह बजेके बीच रहेंगे. सदन में हर समय मंत्रियों की अनिवार्य मौजूदगी का रोस्टर बुधवार शाम 6 बजे से लागू होगा. इससे पहले सदन में 28 के अतिरिक्तअन्य मंत्री मौजूद रहेंगे. शाम 6 से बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे तक का समय छह शिफ्ट में बांटा गया है। सिर्फ एक शिफ्ट दो घंटे की होगी. शेष शिफ्ट3-3 घंटे की रहेंगी। यूपी विधानसभा में आज रिकॉर्ड बनने जा रहा है. सुबह 11 बजे से शुरू होने वाला सदन कल दोपहर 11 बजे तक अनवरत चलतारहेगा.
भारत-चीन तनाव में नरमी यूरिया निर्यात पर लगी पाबंदी में ढील, भारत आयात कर सकेगा 3 लाख टन

चीन ने भारत के साथ तनाव घटाने की कवायद के तहत यूरिया के निर्यात में ढील दे दी है. हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गईहै लेकिन मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत चीन से तीन लाख टन तक यूरिया का आयात कर सकता है. भारत दुनिया में यूरिया का सबसे बड़ाआयातक है। चीन ने भारत के साथ तनाव घटाने की पहल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ की घोषणा के बादकी है. भारत और चीन के बीच जून, 2020 में लद्दाख की गलवां घाटी में हिंसक झड़प के बाद से संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए थे. हालांकि पिछलेकुछ महीनों में हालात में सुधार दिखा है फिर भी दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर विवाद जारी है. पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी कमी2023 में चीन का आधा यूरिया निर्यात भारत को होता था लेकिन पिछले साल इसने दुनिया के सभी देशों को यूरिया की बिक्री रोक दी। इस जून मेंचीन ने इस प्रतिबंध में ढील दी लेकिन भारत पर लगा प्रतिबंध अभी तक जारी था अब इसमें ढील दी गई है. हालांकि 3 लाख टन की मात्र बहुतअधिक नहीं है लेकिन धीरे-धीरे इसमें बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इससे वैश्विक आपूर्ति में सुधार होने और कीमतों में कमी आने की उम्मीद है.भारत ने 31 मार्च, 2025 को समाप्त हुए वर्ष के दौरान 57 लाख टन यूरिया का आयात किया था. यह पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी कम था. कर दी थी ढीलवहीं, प्रतिबंध के कारण चीन से होने वाला आयात 2023-24 के 18.70 लाख टन से घटकर 2024-25 में एक लाख टन के करीब रह गया था. भारत की ज्यादातर अर्थव्यवस्था अब भी कृषि पर निर्भर है और इसलिए घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत को उर्वरकों को बड़ी मात्रा में आयातकरना पड़ता है. सरकार यूरिया पर बड़ी मात्रा में सब्सिडी भी देती है ताकि किसानों पर बोझ न पड़े. 2023 में चीन का आधा यूरिया निर्यात भारत कोहोता था लेकिन पिछले साल इसने दुनिया के सभी देशों को यूरिया की बिक्री रोक दी. इस जून में चीन ने इस प्रतिबंध में ढील दी लेकिन भारत परलगा प्रतिबंध अभी तक जारी था. अब इसमें ढील दी गई है.
सुरेश गोपी पर फर्जी घोषणापत्र और वोटर लिस्ट में हेरफेर के आरोप निराधार, केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर न किया खारिज “जानें क्या है पूरा मामला”

केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस और सीपीआई के उन आरोपों को खारिज किया है. जिनमें केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी पर 2024 लोकसभा चुनाव में फर्जी घोषणा पत्र देने और मतदाता सूची में हेरफेर करने के आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों को चुनावआयोग या अदालत में उठाएं, न कि जनता को भड़काने के लिए झूठ फैलाना चाहिए. चंद्रशेखर की यह टिप्पणी कांग्रेस और भाकपा के उन आरोपों केबाद आई है. जिनमें कहा गया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान गलत घोषणापत्र दाखिल किया था औरत्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से उनकी जीत मतदाता सूची में हेरफेर के कारण हुई थी. गोपी की हुई जीतकांग्रेस ने एक दिन पहले आरोप लगाया था कि केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री ने त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र की मतदाता सूची मेंशामिल होने के लिए गलत घोषणापत्र दाखिल किया था. देश की सबसे पुरानी पार्टी ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग करतेहुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. इससे पहले, भाकपा नेता वी.एस. सुनील कुमार ने सोमवार को आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में स्पष्टहेराफेरी हुई है, जिससे त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र में गोपी की जीत हुई. गोपी ने त्रिशूर सीट पर 74,000 से ज़्यादा मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी. उन्होंने कुमार और कांग्रेस उम्मीदवार के. मुरलीधरन को कांटे के त्रिकोणीय मुकाबले में हराया था. वहीं बुधवार को चंद्रशेखर ने आरोपों की सत्यता परसवाल उठाते हुए कहा कि ये दावे गोपी के लोकसभा चुनाव जीतने के डेढ़ साल बाद उठाए जा रहे हैं. सवालों का नहीं दिया जवाबभाजपा नेता ने यह भी कहा कि ऐसे मुद्दों को चुनाव आयोग या अदालतों में शिकायत या चुनाव याचिका दायर करके उठाया जाना चाहिए लेकिन वोऐसा नहीं करते हैं. इसके बजाय, वे झूठ बोलकर जनता को भड़काने या अपने दुष्प्रचार से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं यह सबदिखावा है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इस तरह के नाटककर रहे हैं. इस बीच, गोपी त्रिशूर पहुंचे और एक भाजपा कार्यकर्ता से मिले, जो मंगलवार को एक विरोध प्रदर्शन में घायल हो गया था. त्रिशूर रेलवेस्टेशन पहुंचने के बाद, मंत्री ने कांग्रेस और भाकपा के आरोपों के बारे में पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया.