तमिलनाडु में ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ का विस्तार, स्टालिन और भगवंत मान ने बच्चों संग बांटा भोजन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को राज्य के शहरी क्षेत्रों में डीएमके सरकार की प्रमुख पहल ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ के विस्तारका उद्घाटन किया. स्टालिन ने अपने पंजाब समकक्ष भगवंत मान के साथ चेन्नई में सेंट जोसेफ प्राइमरी स्कूल में बच्चों को भोजन परोसा और इसयोजना का शुभारंभ किया. सीएम मान इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यह विस्तार योजना के कार्यान्वयन के पांचवें चरण काहिस्सा है, जिससे 2,429 स्कूलों के 3.06 लाख और बच्चों को लाभ मिलेगा. आज नए शुभारंभ के साथ राज्य में कुल 20.59 लाख बच्चे मुख्यमंत्रीनाश्ता योजना से लाभान्वित होंगे. पहले चरण का किया शुभारंभसरकारी प्रवक्ता पी. अमुधा ने सोमवार को बताया था कि केंद्रीकृत रसोई में स्वच्छ तरीके से नाश्ता तैयार करने के लिए उचित कदम उठाए गए हैं. अतिरिक्त मुख्य सचिव अमुधा ने कहा, ‘तैयार किए गए व्यंजन जैसे पोंगल, खिचड़ी या उपमा, साथ ही दाल और सांभर जैसे साइड डिश वैन की ओरसे संबंधित स्कूलों तक पहुंचाए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने 6 मई, 2022 को विधानसभा में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए मुफ्त नाश्ता योजना लागूकरने की घोषणा की थी. इसके बाद 2022 में ही उन्होंने 15 सितंबर को मदुरै में इसके पहले चरण का शुभारंभ किया था. बच्चों के साथ किया भोजनइससे पहले रविवार को स्टालिन ने कहा था कि जस्टिस पार्टी के दिनों से लेकर द्रविड़ मॉडल सरकार तक, हम बच्चों की भूख मिटाने और उन्हें शिक्षादेने के लिए भोजन उपलब्ध कराते हैं. यह केवल भोजन नहीं है, बल्कि विकास का आधार है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पंजाब केमुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मिलकर शहरी क्षेत्रों में सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए मुख्यमंत्री नाश्ता योजना के विस्तार का शुभारंभ किया. मुख्यमंत्री स्टालिन ने चेन्नई में शहरी क्षेत्रों के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नाश्ता योजना के विस्तार का उद्घाटन किया. इस दौरान स्टालिन औरमान ने चेन्नई में बच्चों को भोजन परोसा उन्होंने बच्चों के साथ भोजन किया.
राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में संकट? आईएएस अफसरों का पलायन तेज, एडिशनल चार्ज का बढ़ा बोझ

राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में क्या सब ठीक नहीं चल रहा है? यह सवाल अब सचिवालय के गलियारों में पूछा जाने लगा है. राजस्थान से जिस रफ्तार सेआईएएस अफसरों का पलायन हो रहा है उसके चलते यहां रहने वाले अफसरों पर अतिरिक्त चार्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है. सामान्य प्रशासनविभाग के सचिव जोगाराम के पास 14 विभागों का चार्ज है। इसमें जीएडी, कैबिनेट, सिविल एविएशन, स्टेट मोटर गैराज, प्रशासनिक सुधार, स्टेशनरीप्रिंटिंग, रेजिडेंट कमिश्नर, पंचायती राज विभाग के सचिव व कमिश्नर के चार्ज हैं. जनवरी से लेकर अब तक राजस्थान में 39 बार एडिशनल चार्ज केआदेश कार्मिक विभाग की ओर से जारी किए जा चुके हैं. अब उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव आलोक गुप्ता भी स्टेडी लीव पर चले गए हैं और इनकाचार्ज भी जोगाराम को दिया गया है. दिल्ली की राह जा रहे है पकड़नेजानकारी के अनुसार आईएएस अफसरों के तबादले, एडिश्नल चार्ज का आदेश जारी करने वाले कार्मिक विभाग के सचिव आईएएस केके पाठक भीअब दिल्ली की राह पकड़ने जा रहे हैं. उन्होंने भी केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया है इनके अलावा आईएएस नेहा गिरी भी दिल्ली जानेकी तैयारी कर रही हैं. आईएएस आरुषि मलिक भी छुट्टियों पर गई तो उनका एडिशनल चार्ज आईएएस संदीप वर्मा को दिया गया. जबकि संदीप वर्माखुद 10 दिनों की छुट्टी पर चले गए. हाल में राजस्थान से आईएएस इंद्रजीत सिंह ने भी केंद्र सरकार में अपनी प्रतिनियुक्ति करवा ली. राज्य सरकार सेएनओसी मिलने के बाद अब केंद्र सरकार के स्तर पर भी इंद्रजीत को विभाग आवंटित कर दिया गया है. दिल्ली स्थित संस्कृति मंत्रालय में निदेशक पदइनकी नियुक्ति हुई है इंद्रजीत से पहले गौरव गोयल, पीसी किशन, भानू प्रकाश एटरू, अंश दीप, आशीष गुप्ता, आशुतोष ए टी पेंढनेकर, और भगवतीप्रसाद कलाल भी दिल्ली का रुख कर चुके हैं. नरेश कुमार गोयल बने है आईएएसकेंद्र सरकार में अब राजस्थान कैडर के प्रतिनियुक्ति पर गए आईएएस अफसरों की संख्या बढ़कर 22 हो चुकी है। राजस्थान में 54 आईएएस अफसरोंके बाद फिलहाल एडिशनल चार्ज है। इनमें अपेक्स लेवल के आईएएस भी शामिल हैं. इनमें ज्यादातर महकमें वह हैं जो पब्लिक डीलिंग से जुड़े हुएहैं। इनमें कई आईएएस अफसर ऐसे हैं जिनके पास 4-4 एडिशन चार्ज हैं. हालांकि सोमवार को प्रदेश को अन्य सेवाओं से चार नए आईएएस मिलचुके हैं. इनमें नितीश कुमार शर्मा, नरेश कुमार गोयल, अमिता शर्मा और नरेंद्र कुमार मंघानी के नाम शामिल हैं। 13 सेवाओं के 35 अफसरों ने आवेदनकिया था. कृषि, कृषि विपणन, हेल्थ, कॉलेज शिक्षा से लेकर सहकारिता जैसी सेवा के अफसर रह गए और 3 दूसरी सेवाओं के 4 अफसर आईएएसबन गए. सांख्यिकी सेवा से नरेंद्र मंगानी और नीतीश शर्मा हैं. लेखा सेवा से अमिता शर्मा और बीमा सेवा से नरेश कुमार गोयल आईएएस बने हैं.
भारतीय नौसेना को दो नए स्वदेशी ताकतवर मिले युद्धपोत , INS उदयगिरि और INS हिमगिरि हुए शामिल

भारतीय नौसेना की ताकत लगातार बढ़ रही है विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को नौसेनामें शामिल किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से स्पष्ट है कि आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हुआहै भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी है. भारतीय नौसेना न केवल तटीय क्षेत्रों की रक्षा करती है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और समृद्धि भी बनाएरखती है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि का जलावतरण हमारी दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता का भीप्रमाण है. निर्माण किया गया स्वदेशी तौर परमैं इस अवसर पर भारतीय नौसेना को बधाई देता हूं गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा निर्मित आईएनएस हिमगिरि औरमझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित आईएनएस उदयगिरि दोनों आधुनिक युद्धपोत हैं जिनका निर्माण स्वदेशी तौर पर किया गया है. उन्होंनेकहा कि इन युद्धपोतों में कई उन्नत क्षमताएं हैं इनमें लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलें, स्वदेशीरॉकेट लॉन्चर, टारपीडो लॉन्चर, युद्ध प्रबंधन प्रणाली और अग्नि नियंत्रण प्रणाली लगाई जा सकती हैं ये दोनों युद्धपोत समुद्र में खतरनाक अभियानों मेंगेम-चेंजर साबित होंगे. नहीं बनाया जाएगा विदेशी में जहाजउन्होंने कहा कि आईएनएस तमाल भारतीय नौसेना के लिए अंतिम विदेशी ऑर्डर था. हमने निर्णय लिया है कि भारतीय नौसेना के लिए भविष्य में कोईभी जहाज विदेश में नहीं बनाया जाएगा. हम अपने जहाज भारत में ही बनाएंगे. यह रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत ही निर्णायककदम है. इन युद्धपोतों के जलावतरण के साथ भारतीय नौसेना ने एक शताब्दी पूरी कर ली है. आज स्वदेशी F35 युद्धपोत भी लॉन्च किया गया है एकदेश के पास उड़ने वाला F-35 है और आपने तैरता हुआ F35 बनाया है, वह भी भारत में निर्मित. विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नेआईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को नौसेना में शामिल किया. उन्होंने कहा कि हमने निर्णय लिया है कि भारतीय नौसेना के लिए भविष्यमें कोई भी जहाज विदेश में नहीं बनाया जाएगा हम अपने जहाज भारत में ही बनाएंगे.
उपराष्ट्रपति पद के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को मिला विपक्ष का समर्थन, लखनऊ में दिखा दम “अखिलेश यादव बोले भाजपा थोप रही है विचारधारा”

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि मुझे सभी दलों से समर्थन मिल रहा है. समाजवादी पार्टी के सभीसांसदों ने हमारा समर्थन किया है. हमारी कोशिश होगी कि उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों के ज्यादातर सांसद हमारे साथ हों. बी. सुदर्शन रेड्ड्रीमंगलवार को सपा कार्यालय में मीडिया को संबोधित कर रहे थे उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ प्रेसवार्ता को भी संबोधित किया. इसकेपहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि आज भाजपा के लोग एक विशेष विचारधारा से जुड़े लोगों को ही बड़े पद पर बैठा रहे हैं. इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर किया माल्यार्पणइसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसे समावेशी विचारधारा को अपनाएं और इसीलिए इंडिया गठबंधन की पार्टियों ने बी. सुदर्शन रेड्डी कोउम्मीदवार बनाया है। उन्होंने अन्य दलों से अपील की है कि सभी अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट करें और बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करें. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी मंगलवार सुबह लखनऊ पहुंचे. लखनऊ एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत हुआ. उन्हें रिसीव करने के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे. एयरपोर्ट से वह सीधे कांग्रेस कार्यालयपहुंचे जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.संविधान को दी जा रही है चुनौतीविपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने शनिवार को कहा कि देश में लोकतंत्र की स्थिति कमजोर हो गई है और संविधान को चुनौतीदी जा रही है. उन्होंने कहा कि वह संविधान की रक्षा और उसे मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। पीटीआई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रेड्डीने कई मुद्दों पर बात की. उन्होंने बताया कि उनका नाम कैसे सामने आया. उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे शब्दोंको लेकर चल रही बहस पर भी राय रखी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से नक्सलवाद समर्थक कहे जाने पर भी जवाब दिया. उपराष्ट्रपतिचुनाव के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी मंगलवार को लखनऊ पहुंचे. जहां उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व प्रदेश कांग्रेसअध्यक्ष अजय राय से साथ मीडिया को संबोधित किया और समर्थन के लिए आभार जताया.
निक्की हत्याकांड पर बोले पिता विपिन को सीने में लगनी चाहिए थी गोली, मांगी फांसी की सजा “गांव में पसरा मातम”

ग्रेटर नोएडा में निक्की हत्याकांड में पिता का बयान सामने आया है. निक्की के पिता भिकारी सिंह का कहना है कि मुठभेड़ में विपिन के सीने में गोलीलगनी चाहिए थी. उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले नहीं तो उसके घर पर बुलडोजर चलना चाहिए. यहां बाबा की सरकार है. जिस तरह विपिन से मुठभेड़हुई है उसी तरह से अन्य आरोपियों से भी होनी चाहिए. अगर आरोपियों को कड़ी सजा नहीं मिलेगी तो पुलिस अधिकारियों के ऑफिस के बाहर घेरावकर धरने पर बैठेंगे. वहीं, अन्य परिजनों ने आरोप लगाया कि भिकारी सिंह ने हाल ही में मर्सिडीज कार खरीदी थी जिस पर विपिन की नजर थी। विपिनमर्सिडीज की भी मांग कर रहा था.पिता भिकारी सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने बताया कि दोनों बेटियों को डीपीएस एनटीपीसी में बड़े प्यार से पढ़ाया था. आरोपियों को फांसी देने की मांगवहां दाखिला मुश्किल से होता है दोनों को स्कूल छोड़ने व लेने जाता था नोटबंदी के बावजूद शादी भी धूमधाम से की थी पति शराब का आदि है कोईकाम नहीं करता है. इस कारण बेटियों का बुटीक व ब्यूटी पॉर्लर का काम शुरू कराया था इससे दोनों घर का खर्च चला रहीं थीं छह माह पहले भीविपिन ने निक्की से मारपीट की थी तब समाज के लोगों ने समझाकर मामला शांत कराया था. निक्की को फिर से ससुराल भेजा गया था समाज केलोगों ने था कहा कि विपिन सुधर जाएगा. थोड़ा इंतजार कर लो दो बार पंचायत होने के बाद समाज के कहने पर बेटियों को भेजा था नहीं पता था कियह दिन देखने को मिलेगा. निक्की के घर के साथ-साथ गांव में मातम है परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है मां संजू को दो बार अस्पताल में लेकर जानापड़ा वह बार-बार निक्की-निक्की पुकार रहीं थीं. गांव व आसपास के लोगों के साथ सामाजिक, राजनीतिक, किसान यूनियन के लोग घर पर सांत्वनादेने पहुंचे थे सभी ने एक सुर में आरोपियों को फांसी देने की मांग की. पुलिस ने पैर में मारी गोलीइससे पहले, रविवार को पत्नी निक्की को जिंदा जलाने का आरोपी पति विपिन भाटी पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से घायल हो गया. ग्रेटर नोएडा कीकासना कोतवाली पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसकी निशानदेही पर ज्वलनशील पदार्थ (थिनर) बरामद करने के लिए उसे लेकर सिरसागांव गई थी.वहीं, घायल विपिन को देखने पहुंची उसकी मां और आरोपी दया को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. अदालत ने विपिन को 14 दिन की न्यायिकहिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने बताया, मुखबिर की सूचना और इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिये आरोपी विपिन को गिरफ्तार किया गया. पुलिसरविवार दोपहर 12 बजे ज्वलनशील पदार्थ की बरामदगी कराने के लिए उसे एक खेत पर लेकर पहुंची थी. तभी सिरसा चौराहे के पास आरोपी नेजिम्स चौकी इंचार्ज दरोगा वरुण की पिस्तौल निकालकर दो गोलियां दाग दीं और भाग निकला पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। पैर में गोली लगनेके बाद आरोपी वहीं गिर गया. पुलिस ने घायल विपिन को राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में भर्ती कराया मौके से ज्वलनशील पदार्थ की छोटीबोतल, दरोगा से छीनी पिस्तौल बरामद की गई है.
दिल्ली विधानसभा में शुरू हुआ अखिल भारतीय स्पीकर सम्मेलन, अमित शाह ने विधायी इतिहास को किया नमन

दिल्ली विधानसभा में दो दिवसीय अखिल भारतीय स्पीकर सम्मेलन आज से शुरू हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अखिल भारतीय स्पीकरसम्मेलन का उद्घाटन करने दिल्ली विधानसभा पहुंचे. उन्होंने भारत के पहले निर्वाचित केंद्रीय विधान सभा अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल को भी श्रद्धांजलिअर्पित की. इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई अन्य नेतामौजूद रहे. केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने दिल्ली विधानसभा में अखिल भारतीय अध्यक्ष सम्मेलन 2025 में कहा, ‘आज वह दिन है जब देश के विधायीइतिहास की शुरुआत हुई थी, और हम उसी सदन में उपस्थित हैं जहां से इसकी शुरुआत हुई थी. विधायी इतिहास की हुई थी शुरुआतआज ही के दिन, महान स्वतंत्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल के केंद्रीय विधानसभा के अध्यक्ष बनने के साथ, भारत के विधायी इतिहास की शुरुआत हुईथी. आज, देश की विधायिकाओं को चलाने वाले सभी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति और उपसभापति यहां उपस्थित हैं. अतःएक प्रकार से, स्वर्णिम इतिहास रचने वाली और स्वर्णिम भविष्य की दिशा में अग्रसर पूरी विधायी व्यवस्था आज इस ऐतिहासिक सदन में उपस्थित है. देश को काम न करने देना है गलतकेंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली विधानसभा में अखिल भारतीय अध्यक्ष सम्मेलन 2025 में कहा, ‘संसद और विधानसभा संसदीयलोकतंत्र के केंद्र बिंदु हैं. अगर संसद और विधानसभा ठीक से काम नहीं करेंगी, तो लोकतंत्र पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा. संसद और विधानसभा कासुचारू रूप से चलना और सक्रिय रहना बहुत जरूरी है विपक्ष सरकार की आलोचना कर सकता है, लेकिन काम में बाधा डालना, यानी देश को काम नकरने देना, गलत है.’
सरदार पटेल, बिरसा मुंडा और अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर केंद्र ने बनाई उच्च स्तरीय समितियां, PM मोदी करेंगे अध्यक्षता

केंद्र सरकार ने देश के तीन महान नेताओं सरदार वल्लभभाई पटेल, बिरसा मुंडा और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मनाने के लिएउच्च स्तरीय समितियों का गठन किया है. इन समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं करेंगे. यह निर्णय संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारीतीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के बाद सार्वजनिक हुआ है.सरदार पटेल और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती तथा वाजपेयी की जन्म शताब्दी परराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन आयोजनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठियां, प्रदर्शनी और युवा-केन्द्रितगतिविधियां शामिल होंगी. सरकार का कहना है कि इन महापुरुषों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके आदर्शों को राष्ट्रीय जीवन मेंउतारना ही मुख्य उद्देश्य है. समितियों में वरिष्ठ मंत्रियों, राज्यों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा. राष्ट्रीय स्तर पर मिले मान्यतासंस्कृति मंत्रालय ने 25 अगस्त को प्रकाशित अधिसूचना में कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उच्च स्तरीय समितिका गठन किया गया है. पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था. वे स्वतंत्रता संग्राम में एक बड़े नेता के रूप में सामने आए और स्वतंत्र भारत केपहले गृहमंत्री बने. उन्हें ‘भारत का लौहपुरुष’ कहा जाता है. गुजरात में बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” उनके योगदान औरव्यक्तित्व की गवाही देती है. इसी तरह, मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर भी उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्णयलिया. बिरसा मुंडा एक आदिवासी नायक और स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्होंने आदिवासी समाज को ब्रिटिश हुकूमत और शोषण से लड़ने की प्रेरणा दी. आज भी देशभर में उन्हें ‘धरती आबा’ के रूप में याद किया जाता है. समिति का मकसद है कि बिरसा मुंडा की विचारधारा और संघर्ष को जन-जन तकपहुंचाया जाए और उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिले. मूल्यों की भावना होगी प्रबलपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में भी उच्च स्तरीय समिति गठित करने की अधिसूचना जारी की गई. वाजपेयीतीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने पहली बार 1996 में 13 दिन के लिए, फिर 1998 से 1999 तक और उसके बाद 1999 से 2004 तक पूरे पांचसाल तक सरकार चलाई. उनके नेतृत्व में 1998 में पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किया, जिसने देश को वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति दिलाई. वाजपेयी को उनकी दूरदृष्टि और काव्यात्मक भाषणों के लिए भी जाना जाता है. सरकार ने कहा है कि इन समितियों के जरिए भव्य कार्यक्रम, संगोष्ठियां, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक आयोजन किए जाएंगे. इसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ मंत्री और विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। उद्देश्य यह हैकि सरदार पटेल की एकता की सोच, बिरसा मुंडा के संघर्ष और वाजपेयी की राजनीतिक दूरदृष्टि को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए. सरकार मानती हैकि इन आयोजनों से देश के नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, आदिवासी गौरव और लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना और प्रबल होगी.
भारत-फिजी संबंधों में नया अध्याय पीएम मोदी और पीएम राबुका ने किए 7 समझौते, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण पर फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका, हैदराबाद हाउस में भारत और फिजी के बीच हुए समझौतों के आदान-प्रदान के साक्षी बने। प्रधानमंत्री मोदी और उनके फिजी समकक्ष राबुका के बीच वार्ता के बाद भारत और फिजी ने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए. फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका प्रधानमंत्री मोदी की बुधवार को एक संयुक्त प्रेस वार्ता हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने जलवायुपरिवर्तन को फिजी के लिए खतरा बताते हुए कहा कि हम आपदा प्रतिक्रिया से निपटने में उसकी मदद करेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फिजीभले ही महासागरों से बंटे हुए हों, लेकिन हमारी आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवार हैं इस दौरान फिजी के नेता भी उनके साथ थे. हमारी आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवारइस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “33 वर्षों के बाद, 2014 में, किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने फिजी का दौरा किया. मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि यहमेरा सौभाग्य था. उस समय, हमने फॉरेन फॉर इंडिया पैसिफिक आइलैंड कोऑपरेशन-FIPIC का गठन किया था. इस पहल ने न केवल भारत-फिजीसंबंधों को बल्कि पूरे प्रशांत क्षेत्र के साथ हमारे संबंधों को भी मजबूत किया. प्रधानमंत्री राबुका की इस यात्रा के साथ, हम अपने संबंधों में एक नयाअध्याय जोड़ रहे हैं. भारत और फिजी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिजी के समकक्ष सितवेनी लिगामामादा राबुका के साथ व्यापक वार्ताके बाद अपने रक्षा संबंधों को विस्तार देने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फिजी भले ही महासागरोंकी दूरी पर हों, लेकिन हमारी आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवार हैं. भारत-प्रशांत का करते है समर्थनप्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत और फिजी एक स्वतंत्र, समावेशी, खुले, सुरक्षित और समृद्ध भारत-प्रशांत का समर्थन करते हैं. राबुका रविवारको तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे. दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है. समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में फ़िजीभारत के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्र है. प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ बढ़ाने के चीन के अथक प्रयासों की पृष्ठभूमि में, भारत फ़िजी के साथअपने रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर विचार कर रहा है. मोदी और राबुका के बीच वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक बनाने केलिए सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए. मोदी ने कहा, “हमने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने का फैसला किया है. उन्होंनेमीडिया को दिए बयान में कहा कि इसके लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत फिजी की समुद्री सुरक्षा कोमजबूत करने के लिए प्रशिक्षण और उपकरण सहायता प्रदान करेगा. अपने संबोधन में मोदी ने वैश्विक दक्षिण के लिए भारत की प्राथमिकताओं का भीउल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण के विकास में सहयात्री है.
संविधान संशोधन विधेयक पर गरमाई सियासत, शिवसेना ने JPC से किनारा किया ‘अमित शाह ने बताया नैतिकता का प्रतीक”

शिवसेना (उसंजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस विधेयक केजरिए लोकतंत्र और चुनी हुई सरकारों को कुचलना चाहती है. उन्होंने लिखा, नरेंद्र मोदी सरकार संविधान का 130वां संशोधन लाकर लोकतंत्र औरजनता द्वारा चुनी गई सरकारों को खत्म करना चाहती है. इस विधेयक की समीक्षा के लिए बनाई गई जेपीसी केवल एक दिखावा है. शिवसेना प्रमुखउद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा है कि शिवसेना ऐसी किसी जेपीसी का हिस्सा नहीं बनेगी.द्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पर बनी संयुक्तसंसदीय समिति (जेपीसी) का हिस्सा नहीं होगी. संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 में यह प्रस्ताव है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री याकोई मंत्री किसी ऐसे अपराध के आरोप में गिरफ्तार होते हैं या 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं. जिसकी सजा पांच साल या उससे ज्यादा हो सकती है, तो वह पद से खुद-ब-खुद हट जाएंगे. समिति करेगी जांचइस विधेयक की विस्तार से जांच के लिए इसे जेपीसी के पास भेजा गया है. समिति में संसद के दोनों सदनों के कुल 31 सदस्य शामिल होंगे. यहसमिति जांच करेगी और सुझाव देगी, उसके बाद इसे संसद में मतदान के लिए पेश किया जाएगा. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू में भरोसाजताया कि संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पारित हो जाएगा, चाहे विपक्ष इसकी आलोचना कर रहा हो. शाह ने इस विधेयक काबचाव करते हुए कहा कि यह सांविधानिक नैतिकता और जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए लाया गया है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक सभीनेताओं पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष. शाह ने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि यह विधेयक पारित होगा. कांग्रेस पार्टीऔर विपक्ष में भी ऐसे कई लोग हैं जो नैतिकता का समर्थन करेंगे और उच्च नैतिक स्तर बनाए रखेंगे. उन्होंने आगे कहा, प्रधानमंत्री ने इस विधेयक मेंखुद को शामिल किया है. पहले (पूर्व प्रधानमंत्री) इंदिरा गांधी ने 39वां संशोधन लेकर आई थीं, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री औरलोकसभा अध्यक्ष को कोर्ट की समीक्षा से छूट दी गई थी. लेकिन नरेंद्र मोदी खुद अपने खिलाफ ऐसा संविधान संशोधन ला रहे हैं कि अगर प्रधानमंत्रीभी जेल जाता है, तो उसे इस्तीफा देना होगा. शहजाद पूनावाल पर साधा निशानाअमित शाह ने संसद में यह विधेशक पेश किया है जिसका मकसद है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री अगर लगातार 30 दिनों तक जेल में रहताहै और उस पर ऐसा अपराध है, जिसमें पांच साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है, तो वह अपने पद पर नहीं बना रहेगा. भाजपा नेता शहजादपूनावाला ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टियां संविधान संशोधन विधेयक का विरोध कर रही हैं वे नैतिकता का नहीं, बल्किनिर्लज्जता का साथ दे रही हैं. उन्होंने पत्रकारों से कहा, जब पूरा देश नैतिकता और अच्छी शासन व्यवस्था के इस कदम का स्वागत कर रहा है, तब कुछविपक्षी दल खुलकर कह रहे हैं कि वे नैतिकता के साथ नहीं, बल्कि निर्लज्जता के साथ हैं… ये वही लोग हैं जो कहते हैं- हम तो निर्लज्जता के साथ हैं, हम तो सत्ता के साथ हैं.
अनुराग ठाकुर का विवादित बयान “पहले अंतरिक्ष यात्री थे हनुमान जी, बच्चों को बताया नील आर्मस्ट्रांग गलत जवाब

हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का एक स्कूल कार्यक्रम से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चाओं में हैं. वीडियोमें अनुराग ठाकुर विद्यार्थियों से सवाल करते हैं कि अंतरिक्ष में यात्रा करने वाला सबसे पहला कौन व्यक्ति था. इसपर बच्चों ने जवाब दिया कि नीलआर्मस्ट्रांग इस पर अनुराग ठाकुर कहते हैं कि पवनसुत हनुमान जी पहले अंतरिक्ष यात्री थे. अनुराग ठाकुर ने आगे कहा कि जब तक हमें अपनी परंपरा, ज्ञान, संस्कृति का पता न होगा, तब तक हम अंग्रेजों की बताई बातों तक सीमित होकर रह जाएंगे. सांसद अनुराग ठाकुर बीते शनिवार को जवाहरनवोदय विद्यालय में नेशनल स्पेस डे पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे. चंद्रमा पर पैर रखने वाले थे पहले व्यक्तिबता दें कि जिला ऊना के स्कूल में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर नेतर्क दिया कि ज्ञान परंपराओं का विस्तार अंग्रेजों द्वारा हमें दी गई पाठ्यपुस्कों से आगे आना चाहिए. उन्होंने इस दौरान प्रधानाचार्य और शिक्षकों सेअनुरोध किया बच्चों को हमारे वेदों, हमारी पाठ्यपुस्तकों और हमारे ज्ञान की ओर भी ले जाने की कोशिश करें. इससे बच्चों को बहुत कुछ देखने कोमौका मिलेगा. बता दें कि नील आर्मस्ट्रांग एक अमेरिकी खगोलयात्री (अंतरिक्ष यात्री), नौसैनिक एविएटर, परीक्षण पायलट और इंजीनियर थे, जोचंद्रमा पर पैर रखने वाले पहले व्यक्ति थे. अनुराग ठाकुर ने दिया एक बयानइस बयान पर डीएमके सांसद कनिमोझी ने ट्वीट कर लिखा कि एक सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा स्कूली बच्चों से यह पूछना कि चांद पर सबसेपहले किसने कदम रखा था और जोर देकर कहना कि वह नील आर्मस्ट्रांग नहीं, बल्कि हनुमान थे, बेहद परेशान करने वाला है. विज्ञान कोई मिथक नहींहै कक्षाओं में युवाओं को गुमराह करना ज्ञान, तर्क और हमारे संविधान में निहित वैज्ञानिक सोच का अपमान है भारत का भविष्य जिज्ञासा को पोषितकरने में निहित है, न कि तथ्यों को मिथकों से भ्रमित करने में सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक बयान दिया है यह बयान वायरल होगया है. अनुराग ठाकुर विद्यार्थियों से सवाल करते हैं कि अंतरिक्ष में यात्रा करने वाला सबसे पहला कौन व्यक्ति था.