जाति जनगणना पर कांग्रेस का हमला, सवाल 12 ने सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा हो। पार्टी ने कहा कि जनगणना के पहले चरण यानी मकानों की सूची बनाने (हाउसलिस्टिंग) के लिए जो सवाल तैयार किए गए हैं, वे सरकार की असली मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि जाति जनगणना की प्रक्रिया तय करने से पहले सरकार को राजनीतिक दलों, राज्यों और सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत करनी चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना 2027 का काम काफी देरी से चल रहा है। इसका पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या की गिनती होगी, वह फरवरी 2027 में होगा। हालांकि, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे बर्फीले इलाकों में यह सितंबर 2026 में ही हो जाएगा। सवाल नंबर 12 चिंताजनकजयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले जाति जनगणना का विरोध किया था। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने इसे शहरी नक्सली सोच बताया था। लेकिन बाद में राहुल गांधी और कांग्रेस के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा और उन्होंने इसे जनगणना 2027 में शामिल करने की बात मानी। रमेश ने बताया कि सरकार ने मकानों की सूची बनाने के लिए जो फॉर्म जारी किया है, उसमें सवाल नंबर 12 चिंताजनक है। इसमें पूछा गया है कि क्या घर का मुखिया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या ‘अन्य’ श्रेणी से है। इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के बारे में साफ तौर पर नहीं पूछा गया है। रमेश ने कहा कि यह तरीका बताता है कि सरकार निष्पक्ष जाति जनगणना के लिए गंभीर नहीं है। सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले खुलेगाकांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि सरकार को तेलंगाना सरकार के 2025 के सर्वे (SEEEPC) से सीखना चाहिए। वहां शिक्षा, रोजगार और आय पर जाति-वार जानकारी जुटाई गई थी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए ऐसी जानकारी जरूरी है। सरकार ने जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवालों की अधिसूचना जारी की है। यह चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि अधिकारियों को लोगों से कई तरह की जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच होगा। हर राज्य अपने हिसाब से 30 दिनों का समय तय करेगा। लोगों के पास खुद जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी होगा, जो सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले खुलेगा। इस पूरी कवायद पर 11,718 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
टी20 विश्व कप हिट से पहले श्रीकांत का पाकिस्तान को मजेदार चेतावनी, “मत आना, बुरी तरह पिटाई होगी

भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप में 15 फरवरी को मुकाबला होना है। विश्व कप अभी शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच प्रतिद्वंद्विता बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन करते हुए अप्रत्याशित रूप से टूर्नामेंट का बहिष्कार करने की धमकी दी थी और अब इसे लेकर पूर्व भारतीय कप्तान कृष्णामचारी श्रीकांत ने पड़ोसी देश के मजे लिए हैं। श्रीकांत ने कहा कि दुनिया भर की टीमें टी20 विश्व कप में सूर्यकुमार यादव की टीम का सामना करने से डरेंगी। श्रीकांत ने मजाक में पाकिस्तान को टूर्नामेंट में भाग न लेने की सलाह भी दे डाली। उन्होंने पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी की हालिया धमकी का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश को इस प्रतिष्ठित आयोजन से बाहर करने के समर्थन में बहिष्कार की बात कही थी। लक्ष्य 15.2 ओवर में ही पूरा कर लियान्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। यह टी20 विश्व कप से पहले भारत की आखिरी सीरीज है। रविवार को गुवाहाटी में खेले गए तीसरे मैच में भारत ने 154 रनों के लक्ष्य को मात्र 10 ओवरों में हासिल कर लिया। अभिषेक शर्मा ने 14 गेंदों में अर्धशतक जड़ा और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 26 गेंदों में 57 रन बनाए। इससे पहले भारत ने दूसरे टी20 मैच में 209 रनों का लक्ष्य 15.2 ओवर में ही पूरा कर लिया था। क्रिकेट टीम को एक संकेत मिलेगाश्रीकांत ने अपने यू-ट्यूब चैनल पर कहा, पिछले मैच में भारत ने 15 ओवर में 209 रन बनाए थे। इस मैच में उन्होंने 10 ओवर में 150 रन बनाए। इसे देखकर कई टीमें कह सकती हैं कि नहीं, हम नहीं आ रहे। आप कप अपने पास रख सकते हैं। अरे पाकिस्तान, मत आना। तुम्हारा आदमी मोहसिन नकवी यही कह रहा है कि मत आना। तुम्हारी बुरी तरह पिटाई होगी। कोलंबो में लगा छक्का मद्रास में जाकर गिरेगा। सावधान रहो। सबसे अच्छा विकल्प है दूर रहना। कोई बहाना ढूंढो और मत आना। ये लड़के पाकिस्तान को बुरी तरह पीटेंगे। इससे दुनिया की हर क्रिकेट टीम को एक संकेत मिलेगा। टी20 क्रिकेट में इस तरह की बल्लेबाजी मैंने पहले कभी नहीं देखी।
पत्नी सुनीता ने धोखे का लगाया आरोप, गोविंदा बोले परिवार लोगों की साजिश का शिकार

गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं। पिछले साल दोनों के तलाक से जुड़ी अफवाहें भी उड़ी थीं। लेकिन सुनीता ने इन बातों से इंकार किया। लेकिन हाल ही में सुनीता ने एक पाॅडकास्ट में अपने और गोविंदा के रिश्ते को लेकर खुलकर बात की है। इस बातचीत में कहीं ना कहीं वह गोविंदा पर धोखा देने का आरोप लगा रही हैं। गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच का परिवारिक विवाद जगजाहिर है। गोविंदा से सुनीता को जो शिकायतें हैं, उन पर वह मीडिया के सामने खुलकर बात कर चुकी हैं। हाल ही में मिस मालिनी को दिए गए इंटरव्यू में सुनीता ने हिंट दिया कि गोविंदा ने उन्हें धोखा दिया है। वह कहती हैं, ‘हमारे बच्चे बड़े हो गए हैं। वो ये बातें सुनकर डिस्टर्ब हो जाते हैं। मैं गोविंदा को हमेशा कहती हूं कि यह तुम्हारी उमर नहीं है। लेकिन इसमें लड़कियों का भी दोष है। आज के दौर में जो भी लड़कियां एक्ट्रेस बनने के लिए आती हैं, उन्हें शुगर डैडी चाहिए होता है। कोई ऐसा आदमी जो सपोर्ट करे, उनका खर्चे उठाए। शक्ल अच्छी न होने के बावजूद उनको एक्ट्रेस बनना होता है। रिलेशनशिप होने के बाद वो ब्लैकमेल करती हैं।’ परिवार लोगों की साजिश का शिकार हो गयासुनीता ने मिस मालिनी के पॉडकास्ट में ही कहा, ‘मैं गोविंदा को माफ नहीं करूंगी। मैं नेपाल से हूं, खुकरी निकाल दूंगी।’ इसी पॉडकास्ट में सुनीता ने गोविंदा के लिए कहा था कि वह बेटे यशवर्धन के करियर को सपोर्ट नहीं करते हैं।’ गोविंदा ने भी अपनी पत्नी की बातों का जवाब हाल ही में दिया। एएनआई से की गई बातचीत में उन्होंने कहा था कि कुछ लोग उनसे जलते हैं। इस चीज का शिकार उनका परिवार भी हुआ है। उनका परिवार लोगों की साजिश का शिकार हो गया है। भूली-बिसरी यादें ताजा करेंगेसुनीता के आरोप के बीच गोविंदा को माघ मेले में शामिल होते हुए देखा गया। शुक्रवार को उन्होंने वसंत पंचमी पर गंगा जी में स्नान किया। साथ ही वह उत्तर प्रदेश, खमपुर के एक विद्यालय पहुंचे। इस स्कूल के वार्षिकोत्सव में उन्होंने भाषण दिया, साथ ही खूब ठुमके भी लगाए। गोविंदा ने यह भी बताया कि उनकी नानी का घर प्रतापगढ़ के ढकवा में है। वह नानी के घर जाएंगे, वहां के लोगों से मिलेंगे और उनके साथ भूली-बिसरी यादें ताजा करेंगे।’
यूएई ने पाकिस्तान को ठुकराया, इस्लामाबाद एयरपोर्ट समझौता रद्द, भारत के साथ रणनीतिक नजदीकी बढ़ी

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की अचानक भारत यात्रा के बाद अबू धाबी ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट संचालन योजना से हाथ खींच लिया। इसे भारत-यूएई की बढ़ती रणनीतिक नजदीकी और पाकिस्तान के घटते कूटनीतिक प्रभाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते को लेकर अगस्त 2025 से बातचीत चल रही थी। पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने इस खबर की पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई ने इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी खो दी है। साथ ही, एयरपोर्ट का काम संभालने के लिए उन्हें कोई स्थानीय पार्टनर भी नहीं मिल पाया। हालांकि पाकिस्तानी मीडिया इसे सीधे तौर पर राजनीति से नहीं जोड़ रहा, लेकिन इसके पीछे की वजहें काफी गहरी मानी जा रही हैं। पीछे हटना इसी अविश्वास को दिखातायह फैसला ऐसे समय में आया है जब खाड़ी के दो पुराने दोस्त, सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। दोनों देश यमन में अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं। पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया है और वह तुर्की व सऊदी के साथ मिलकर एक नया गठबंधन बनाने की कोशिश में है। वहीं, यूएई ने भारत के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को मजबूत किया है। चार दशक पहले यूएई और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत मजबूत थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। पाकिस्तान में सुरक्षा चिंताओं और खराब प्रबंधन के कारण यूएई का भरोसा कम हुआ है। पाकिस्तान अपनी सरकारी कंपनियों को घाटे के कारण बेच रहा है, जैसे पिछले साल पीआईए का निजीकरण किया गया था। एयरपोर्ट डील से पीछे हटना इसी अविश्वास को दिखाता है। रणनीति के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहीदूसरी तरफ, भारत और यूएई के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर हैं। दिल्ली यात्रा के बाद यूएई के राष्ट्रपति ने 900 भारतीय कैदियों की रिहाई को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने रक्षा सहयोग पर एक अहम समझौते की ओर कदम बढ़ाए हैं। दोनों नेताओं ने माना कि अब यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा और रणनीति के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही है। यूएई के राष्ट्रपति के भारत दौरे के बाद पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। यूएई ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट समझौता रद्द कर दिया है। कहा जा रहा कि यूएई अब भारत के साथ अपनी दोस्ती और रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है, जबकि पाकिस्तान से दूरी बना रहा है।
ट्रंप का सनसनीखेज दावा ‘डिसकंबोबुलेटर’ से मादुरो की सेना हुई ठप, रूस-चीन के हथियार भी बेकार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा था, तब उन्होंने एक गोपनीय हथियार का इस्तेमाल किया था जिसे उन्होंने ‘द डिसकंबोबुलेटर’ नाम दिया। ट्रंप के अनुसार इस हथियार ने मादुरो के सैनिकों के उपकरणों को निष्क्रिय (काम न करने वाला) बना दिया, जिससे वे अपने रूसी और चीनी रॉकेट भी नहीं चला पाए। ट्रंप ने कहा कि वह इस हथियार के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी शेयर करने की अनुमति नहीं है। लेकिन यह हथियार काराकस में ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल हुआ, जिससे विरोधी की प्रणालियां ‘काम नहीं कर रही थीं।’ मलों में अब तक 117 से अधिक लोगों की मौत हुईअमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम के अभियान में मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया। मादुरो को न्यूयॉर्क में नार्को-टेररिज्म और हथियार मामले में पेश किया गया। वेनेजुएला सरकार ने इसे ‘अपहरण’ करार दिया है और विरोध जताया है। इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ड्रग कार्टेल के खिलाफ जमीन पर सैन्य हमले जारी रखेगा, और यह हमले सिर्फ दक्षिण अमेरिका तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि मध्य अमेरिका और मेक्सिको तक भी हो सकते हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने पूर्वी प्रशांत महासागर में एक ड्रग-तस्करी जहाज पर हमला किया, यह अब तक के 36वें ज्ञात हमले में से एक है। इन हमलों में अब तक 117 से अधिक लोगों की मौत हुई है। बाउल में प्रदर्शन और अपनी उपस्थिति पर भी टिप्पणी कीवहीं ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े सात तेल टैंकों का तेल कब्जा कर लिया, और बताया कि ‘वे अब तेल कहीं नहीं रखते- हमने ले लिया।’ लेकिन उन्होंने इसका स्थान बताने से इनकार किया। एक न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू में ट्रंप ने ये भी बताया कि उन्हें वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो की तरफ से दिया गया नोबेल पुरस्कार मिला है, और वह उसे कहां लटकाएंगे, यह सोच रहे हैं। उन्होंने नए आर्कटिक सुरक्षा समझौते के बारे में कहा कि इससे अमेरिका को वहां की जमीनों पर कब्जा मिल जाएगा, हालांकि डेनमार्क व ग्रीनलैंड ने इसका खंडन किया है। उन्होंने 2026 के सुपर बाउल में प्रदर्शन और अपनी उपस्थिति पर भी टिप्पणी की।
अपनी सुरक्षा खुद करो! पेंटागन की नई रक्षा नीति से दुनिया में हड़कंप, अमेरिका ने सहयोगियों से खींचे हाथ

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने शुक्रवार देर रात प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाने वाली नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति जारी की। इसमें नाटो व अन्य सहयोगी देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभालने को कहा गया है। इसमें वो सभी राष्ट्र शामिल हैं, जिनसे अब तक अमेरिका के प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। इस प्रकार का 34 पन्नों का दस्तावेज 2022 के बाद पहली बार जारी किया गया है, जो एक सैन्य नीति दस्तावेज होने के बावजूद काफी हद तक राजनीतिक है। इसमें यूरोप से एशिया तक के साझेदार देशों की आलोचना की गई है। दस्तावेज में हुई आलोचना के तहत यूरोप और एशियाई साझेदार देश अपनी रक्षा के लिए पूर्व अमेरिकी सरकारों पर निर्भर रहे। इसमें दृष्टिकोण, फोकस और लहजे में तीव्र बदलाव की बात कही गई है, जिसका मतलब है कि रूस से लेकर उत्तर कोरिया तक के खतरों से निपटने का ज्यादा बोझ अब सहयोगी देशों को उठाना होगा। समर्थन की बात कही गईयह दस्तावेज ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन और यूरोप जैसे उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच तनाव है। इसमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मंत्रालय की तरफ से ग्रीनलैंड और पनामा नहर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक अमेरिकी सैन्य और व्यावसायिक पहुंच सुनिश्चित करने के विश्वसनीय विकल्प देने की बात कही गई है। 34 पेज का यह दस्तावेज चीन के संदर्भ में कहता है कि बदलाव दर्शाने वाली नई राष्ट्रीय रक्षा नीति का उद्देश्य चीन पर प्रभुत्व जमाना या उसे अपमानित करना नहीं है। इसका मुख्य मकसद उसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हावी होने से रोकना है। हालांकि, इस अहम रणनीतिक दस्तावेज में ताइवान का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है, जबकि 2022 की रणनीति में ताइवान की आत्मरक्षा के समर्थन की बात कही गई थी। कनाडा के लिए गंभीर खतरा साबित होगायूरोप के बारे में कहा गया है कि रूस उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के पूर्वी सदस्यों के लिए खतरा बना रहेगा, लेकिन नाटो सहयोगी यूरोप की पारंपरिक रक्षा की मुख्य जिम्मेदारी खुद संभालने में सक्षम हैं। मालूम हो कि अमेरिका पहले ही यूक्रेन सीमा के पास नाटो क्षेत्रों से अपने सैनिकों की संख्या घटाने की पुष्टि कर चुका है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर कनाडा को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर कनाडा ने चीन के साथ कोई व्यापारिक सौदा किया तो अमेरिका सभी कनाडाई वस्तुओं और उत्पादों पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी को आगाह करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी समझौता कनाडा के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।
“सिस्टम पर जमी धूल को हमने साफ किया” गणतंत्र दिवस पर सीएम रेखा गुप्ता ने गिनाए दिल्ली सरकार के बड़े फैसले

राजधानी दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने भव्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और दिल्लीवासियों को संबोधित किया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “मैं उन शहीदों को नमन करती हूं जिन्होंने तिरंगे की मर्यादा के लिए अपने प्राणों से भी बढ़कर देश को प्राथमिकता दी और हमें यह गणतंत्र, स्वाभिमान और आजादी सौंपी। संविधान भारत की चेतना है। पिछले 77 वर्षों में भारत का संविधान न्याय, समानता और गरिमा का प्रकाश स्तंभ बनकर हमारा मार्ग दर्शन कर रहा है। संविधान निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक सभी कामों को भारत आज भी याद करता है।’ पिछले ग्यारह महीनों में जनता की भलाई के लिए कई फैसले लिएसीएम रेखा गुप्ता ने कहा, ‘जब हमारी सरकार ने ग्यारह महीने पहले दिल्ली की कमान संभाली, तो हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती वह धूल और रुकावटें थीं जो वर्षों से सिस्टम पर जमा हो गई थीं। हमने इस स्थिति को बदलने और दिल्ली को एक नई दिशा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत के आधार पर, हमने पिछले ग्यारह महीनों में जनता की भलाई के लिए कई फैसले लिए हैं, जिनका मकसद नागरिकों के जीवन में असली और सकारात्मक बदलाव लाना है।’ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, ‘आज हम सभी अपने शहर और देश के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करें ताकि विकसित दिल्ली को गति मिले। आज से हमें संकल्प लेकर आगे बढ़ना है।’ वहीं, दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने कहा, ‘गणतंत्र दिवस का दिल्ली के बच्चों में उत्साह देखने को मिल रहा है… यह बदलती हुई दिल्ली और नए भारत की नई दिल्ली को दिखा रहा है। मैं दिल्ली के समस्त नागरिकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।’
ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ेगा महायुद्ध? USS अब्राहम लिंकन की तैनाती के बाद तेहरान के किलेबंद बंकर में शिफ्ट हुए खामेनेई

अमेरिकी हमले के खतरे को देखते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई राजधानी तेहरान के एक बंकर में शिफ्ट हो गए हैं। ईरान के मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बंकर को युद्धकालीन सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह किले की तरह तैयार किया गया है। खामेनेई के तीसरे बेटे मसूद खामेनेई अब उनके कार्यालय के दैनिक कामकाज को संभाल रहे हैं और ईरान के उच्च अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि अमेरिका का नौसैनिक ‘आर्मडा’ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इसे युद्धपोत क्षेत्र के पास इसलिए तैनात किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर ईरान पर कार्रवाई की जा सके। अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक फिलहाल हिंद महासागर में हैं और जल्द ही मध्य पूर्व पहुंचेंगे। इसके साथ ही अतिरिक्त हवाई रक्षा प्रणालियां भी तैनात की जा रही हैं, संभवतः अमेरिकी और इजरायली हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए। लगभग 26,541 लोग गिरफ्तार किए गएअमेरिका के इस कदम पर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर ने कहा कि ईरानी बल “पहले से कहीं अधिक तैयार हैं” और सर्वोच्च नेता के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि किसी भी हमले को “पूरी तरह की युद्ध” माना जाएगा और ईरान ‘सबसे कठोर तरीके से’ जवाब देगा।सैन्य तनाव के बीच, ईरान में आंतरिक अशांति बढ़ती जा रही है। आर्थिक संकट और रियाल के गिरते मूल्य के कारण दिसंबर के अंत में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो पूरे देश में फैल गए। सुरक्षा बलों ने व्यापक कार्रवाई की और इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया। यूएस-आधारित HRANA ने कहा कि अब तक कम से कम 5,002 लोग मारे गए हैं, जिनमें 43 बच्चे और 40 सामान्य नागरिक शामिल हैं। लगभग 26,541 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
“मदरसों में भी पढ़ाई जाए संविधान की किताब!” बरेली से मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की देशव्यापी अपील

बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात की ओर से मदरसा जामियातुस सुवालेहात में रविवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम हुआ। इसमें मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि गणतंत्र दिवस देश के लिए जश्न का दिन है। गणतंत्र दिवस अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक के लिए बड़ी नेमत है। संविधान देश की एकता और अखंडता की गारंटी है। जम्हूरियत (लोकतंत्र) देश की आजादी का नतीजा है। मौलाना ने मुस्लिम संस्थाओं के स्कूल-कॉलेज और मदरसों के जिम्मेदारों से अपील करते हुए कहा कि हर बच्चे को भारतीय संविधान पढ़ाएं ताकि नई पीढ़ी ये जान सकें कि संविधान ने अपने नागरिकों को कौन कौन से अधिकार दिए हैं। किस तरह से हमें आजादी हासिल है। मदरसों के छात्र इस तरह की किताब नहीं पढ़ पाते हैं। मदरसों में संविधान का पढ़ाया जाना बहुत जरूरी है। हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावाकार्यक्रम में मदरसा जामियातुस सुवालेहात के प्रबंधक मुफ्ती फारूक मिस्बाही ने कहा कि भारत विकास और विश्व नेतृत्व के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। इसलिए इसकी महत्वाकांक्षाओं और घरेलू असंगतियों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। अयोध्या विवाद जैसे नए विवाद धार्मिक समुदायों के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस्लामीक रिसर्च सेंटर के उप निदेशक आरिफ अंसारी ने कहा कि सामाजिक घर्षण और विभाजन को कम करने के लिए भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं, समावेशिता और विविध मान्यताओं के सम्मान पर फिर से जोर देना चाहिए। मौलाना मुजाहिद हुसैन कादरी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भय या पूर्वाग्रह के अपने चुने हुए धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। बढ़ती विभाजनकारी चुनौती से निपटने के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। मदरसे में छात्रों को देश का संविधान पढ़ाना चाहिएमौलाना गुलाम मुईनुद्दीन हशमती ने कहा कि आज के समय में संयम और सावधानी की जरूरत है। सोशल मीडिया विभाजनकारी विचारों को बढ़ाता है। भड़काऊ बयानबाजी को खारिज किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से हाजी शुखवक्त अली खां, नसीर अहमद नूरी, ताहिर हुसैन एडवोकेट, शमशुल हसन, मास्टर रशीद खां, कारी मुस्तकीम अहमद, रोमान अंसारी, हाफिज रजी अहमद, ज़ोहेब अंसारी, मौलाना अबसार हबीबी, अब्दुल हसीब खां, सलीम खां आड़ती, फैसल एडवोकेट, उवैस रज़ा क़ादरी, रिजवान खां आदि लोग उपस्थित रहे। गणतंत्र दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मदरसा संचालकों से बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि हर मदरसे में छात्रों को देश का संविधान पढ़ाना चाहिए, जिससे छात्र अपने अधिकारों को जान सकें।
“सरना अलग धर्म नहीं, पूजा का एक रूप मोहन भागवत ने आदिवासियों को बताया जल-जंगल-जमीन का असली ट्रस्टी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा और धर्म हमें विविधता में एकता सिखाते हैं। रास्ते अलग हो सकते हैं लेकिन मंजिल एक ही है। भारतीय धर्म हमें सिखाता है कि सभी अलग-अलग रास्ते सही हैं और उनमें से कोई भी गलत नहीं है। यही सनातन, हिंदू और भारतीय धर्म है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म किसी खास पूजा पद्धति का नाम नहीं है, बल्कि यह एक साथ रहने का तरीका है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को यहां आदिवासी समूहों के साथ बंद कमरे में बातचीत की और विविधता में एकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समूहों के प्रतिनिधियों के उठाए गए विभिन्न मुद्दों को सुना। इनमें धार्मिक धर्मांतरण, पीईएसए नियमों में कथित खामियां और डीलिस्टिंग शामिल हैं। संघ ने भागवत के हवाले से एक बयान में कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता में निहित है। पूजा के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मूल सभ्यतागत मूल्य समान रहते हैं। दशकों के अनुभव और चिंतन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि समाज को सामूहिक रूप से काम करना चाहिए, क्योंकि सभी विविधताओं के बावजूद हम मूल रूप से एक हैं। विविधताओं को स्वीकार करने का जीवन-दर्शनभागवत ने समझाया कि हिंदू शब्द बाद में आया लेकिन इसका सार जल (पानी), जंगल (वन) और खेती (कृषि) में निहित है। उन्होंने कहा कि वेद और उपनिषद का दर्शन प्रकृति के साथ इसी रिश्ते से पैदा हुआ है तथा अथर्ववेद में विविधता के प्रति सम्मान के विचार झलकते हैं, जहां धरती मां सभी जीवों का पालन-पोषण करती हैं और सभी भाषाओं का सम्मान किया जाता है। आदिवासी मुद्दों पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि आदिवासी समाज की समस्याएं पूरे देश की समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि सरना पूजा का एक रूप है, कोई अलग धर्म नहीं। उन्होंने कहा कि वनवासी समुदाय जंगलों और जमीन के ट्रस्टी के तौर पर काम करते हैं तथा उनकी सहमति, भागीदारी और जवाबदेही जरूरी है। रांची में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू धर्म की अवधारणा पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म किसी एक पूजा पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साथ-साथ रहने और विविधताओं को स्वीकार करने का जीवन-दर्शन है, जो भारतीय परंपरा की मूल पहचान को दर्शाता है।