राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से मुक्त होते ही हिमाचल राजनीति में सक्रिय होंगे जेपी नड्डा, शिमला दौरे से मिले संकेत

करीब सात साल तक भाजपा की कमान संभालने वाले जेपी नड्डा के शिमला से लौटते ही पार्टी के नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष का एलान हो गया।इस जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद नड्डा हिमाचल की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं। ठीक एक दिन पहले शनिवार को शिमला में उनके सम्मान मेंआयोजित अभिनंदन समारोह में नड्डा ने इसके संकेत दे दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के समर्थकों ने राज्य अतिथिगृह पीटरहॉफ के प्रांगण में हुएइस समारोह में भीड़ जुटाकर भी इसका संदेश दिया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी बड़े नेता मौजूद रहे। हिमाचल भाजपा के नए मुख्यालय का नींवपत्थर रखने के अलावा जगत प्रकाश नड्डा शिमला में राज्यपाल और डिप्टी सीएम के आवास पर जाने के अलावा कई नेताओं से भी मिले। मालरोड परचहलकदमी करने के बाद राजधानी शिमला से दिल्ली लौट गए।सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना गयाराष्ट्रीय अध्यक्ष पद से मुक्त होने पर नड्डा के हिमाचल में और सक्रिय होने की चर्चा रविवार से ही तेज हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा केराष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार होने पर अभी वह ज्यादा समय हिमाचल को नहीं दे पा रहे थे। बिलासपुर से संबंध रखने वाले नड्डा अब हिमाचल कीराजनीति में ज्यादा फोकस कर सकते हैं। नड्डा के अध्यक्ष रहते लोकसभा के साथ कई विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की। हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों में भाजपा ने जीत हासिल की है। बिलासपुर से तीन बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले नड्डा 2010 मेंमंत्री पद छोड़कर संगठन के लिए दिल्ली चले गए थे। जून 2019 में वह भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 20 जनवरी 2020 को उन्हेंसर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना गया। तब से वह इस पद पर रहे। हिमाचल प्रदेश का जनमानसभाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि 13 दिसंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के शिमला आगमन पर जिस प्रकार लोगोंका सैलाब उमड़ा, वह ऐतिहासिक है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिमाचल के बदलते राजनीतिक भविष्य का स्पष्ट संकेत है। डॉ. बिंदल नेकहा कि बिहार में भारतीय जनता पार्टी व एनडीए की प्रचंड जीत के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का यह पहला हिमाचल प्रवास था। इसअवसर पर उन्हें बधाई देने के लिए जिस तरह का अप्रत्याशित, उत्साहपूर्ण और जनसमर्थन से भरा कार्यक्रम आयोजित हुआ, उसने यह सिद्ध कर दियाकि हिमाचल प्रदेश का जनमानस अब वर्तमान कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का मन बना चुका है।
गोवा नाइटक्लब अग्निकांड 25 मौतों के मामले में लूथरा बंधुओं पर थाईलैंड में चलेगा केस, बैंकॉक कोर्ट में सुनवाई संभव

उत्तर गोवा के अर्पोरा में स्थित नाइटक्लब ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ में छह दिसंबर को हुए अग्निकांड मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इसहादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे में अब मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई थाईलैंड में होने जा रही है। इस नाइटक्लब के सह-मालिक गौरवलूथरा और सौरभ लूथरा के खिलाफ मामला अब बैंकॉक की एक अदालत में सुना जा सकता है, जहां आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा। बता दें किआग की घटना के तुरंत बाद लूथरा बंधु थाईलैंड के फुकेत चले गए थे। इसके बाद उनके खिलाफ इंटरपोल का ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया।भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद 11 दिसंबर को थाई अधिकारियों ने दोनों को हिरासत में लिया। इंटरपोल नोटिस जारी हुआमामले में अब बताया जा रहा है कि लूथरा बंधु वैध दस्तावेजों पर थाईलैंड पहुंचे थे, लेकिन बाद में भारत द्वारा पासपोर्ट रद्द किए जाने से वे वहां बिनावैध दस्तावेजों के रह गए। इस वजह से थाई अधिकारी इस मामले को मानवाधिकार और कानून दोनों नजरिए से देख रहे हैं। भारतीय दूतावास के सूत्रोंके मुताबिक, दोनों भाइयों से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज कानूनी प्रक्रिया के तहत थाईलैंड को सौंप दिए गए हैं। अब मामला बैंकॉक कोर्ट में जाएगा, हालांकि सुनवाई कब शुरू होगी, इसका समय अभी तय नहीं है। उत्तर गोवा के अर्पोरा स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब अग्निकांड में 25 मौतों के मामले में अब कार्रवाई थाईलैंड में आगे बढ़ेगी। सह-मालिक गौरव और सौरभ लूथरा के खिलाफ मामला बैंकॉक कोर्ट में सुना जा सकता है।आग के बाद दोनों फुकेत भाग गए थे, जिन पर इंटरपोल नोटिस जारी हुआ था। लूथरा बंधुओं की तुरंत भारत वापसी संभव नहींवहीं दूसरी ओर बीते दिनों भारत सरकार ने दोनों भाइयों के पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं और थाईलैंड को एक डोजियर सौंपा है, जिसमें 25 लोगों की मौतमें उनकी भूमिका का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार, ये आरोप साधारण लापरवाही से आगे के हैं। भारत ने थाई सरकार से लूथरा बंधुओं कोभारत भेजने (डिपोर्ट करने) की औपचारिक मांग भी की है। हालांकि थाई अधिकारी इस मामले के कानूनी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहे हैं।हालांकि दूसरी ओर भारतीय दूतावास के सूत्रों का कहना है कि कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के चलते लूथरा बंधुओं की तुरंत भारत वापसी संभवनहीं है। ऐसे में बैंकॉक की अदालत में सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी, इसके बाद ही कोई अंतिम फैसला होगा।
रामलीला मैदान से राहुल गांधी का बड़ा हमला, ‘वोट चोरी कर रही BJP, चुनाव आयोग भी साथ’

दिल्ली के रामलीला मैदान में एसआईआर और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ कांग्रेस की विशाल रैली को राहुल गांधी ने संबोधित किया। इस दौरान राहुलगांधी ने आरएसएस और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के लिए काम कर रहाहै। मैंने सवाल पूछे तो चुनाव आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “जब मैं यहां आ रहाथा तो मुझे बताया गया कि अंडमान निकोबार में मोहन भागवत ने एक बयान दिया है। गांधीजी कहते थे कि सत्य सबसे जरूरी चीज है, हमारे धर्म मेंसत्य को सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन मोहन भागवत का बयान सुनिए- ‘विश्व सत्य को नहीं, शक्ति को देखता है, जिसके पास शक्ति है उसेमाना जाता है।’ यह मोहन भागवत की सोच है, यह RSS की विचारधारा है। हमारी, हिंदुस्तान, हिंदू धर्म और दुनिया के हर धर्म की विचारधारा यहकहती है कि सत्य सबसे जरूरी है, लेकिन मोहन भागवत कहते हैं सत्य का कोई मतलब नहीं है, सत्ता जरूरी है। मैं आपको गारंटी देता हूं कि हम सत्यको लेकर, सत्य के पीछे खड़े होकर, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, आरएसएस की सरकार को सत्ता से हटाएंगे।” 5 मिनट में सत्ता से बेदखल कर देतेराहुल गांधी ने अपने संबोधन में आगे कहा, “उनके (भाजपा) पास सत्ता है, वे वोट चोरी करते हैं, चुनाव के समय वे 10 हजार रुपये देते हैं, उनके चुनावआयुक्त हैं- ज्ञानेश कुमार, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी… चुनाव आयोग-भाजपा सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। प्रधानमंत्रीमोदी ने इनके लिए कानून बदला, नया कानून लेकर आए और कहा कि चुनाव आयुक्त कुछ भी करे उनपर एक्शन नहीं लिया जा सकता, उनपरकार्रवाई नहीं हो सकती। हम इस कानून को बदलेंगे और आपके खिलाफ एक्शन लेंगे क्योंकि हम सच्चाई की लड़ाई लड़ रहे हैं और आप असत्य केसाथ खड़े हो।” राहुल गांधी ने आगे कहा, “इसमें समय लग सकता है, लेकिन भारत में सत्य की जीत होगी। हम सत्य के मार्ग पर चलते हैं और हमउन्हें सत्ता से बेदखल कर देंगे। प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास हिल गया है क्योंकि उन्हें पता चल गया है कि उनकी वोट चोरी पकड़ी गई है। वोटचोरी भारत के संविधान पर सबसे बड़ा हमला है। अगर उन्होंने वोट चोरी नहीं की होती तो आप उन्हें 5 मिनट में सत्ता से बेदखल कर देते।” राष्ट्र गीत किसका हैरैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “आज संसद में मुश्किल से एक सत्र में 1-2 बहस होती है…जब राहुल गांधी, खरगे जी ने मुद्दा उठाया कि हमें चुनाव पर, SIR पर, वोट चोरी पर बहस करनी है, तो वो घबरा गए। उन्होंने हमारी बात नहीं मानी। अंत में कैसे मानेकि हम वंदे मातरम पर भी चर्चा करेंगे। हम संसद में यह बहस करते रहे कि राष्ट्र गीत किसका है, राष्ट्र गीत कैसे बना, राष्ट्र गीत क्यों बना और जो बड़ी-बड़ी समस्याएं हैं, जिससे आप जूझ रहे हो-बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक, इनके बारे में चर्चा करने की हिम्मत नहीं है। मैं उन्हें (भाजपा) चुनौती देती हूंकि ये एक सही चुनाव लड़ लें, बैलेट पर लड़ लें, तो वो खुद जानते हैं कि वो कभी नहीं जीत पाएंगे।”
मेसी के G.O.A.T इंडिया टूर में बड़ा एक्शन, आयोजक शतद्रु दत्ता 14 दिन की पुलिस हिरासत में

फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी के G.O.A.T इंडिया टूर 2025 के प्रमोटर और मुख्य आयोजक शतद्रु दत्ता को कोलकाता कीबिधाननगर कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी दत्ता को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, आयोजक पर टूर के आयोजन से जुड़े मामलों में जांच चल रही है। इसी सिलसिले में उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था। फिलहाल पुलिसआरोपी से पूछताछ करेगी और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। इसके साथ ही पुलिस इस यह भी जांच कर रही है कि आयोजकों नेस्टेडियम के अंदर पानी की बोतलें और पेय पदार्थ कैसे बिकने दिए, जबकि ऐसे कार्यक्रमों में ये चीजें प्रतिबंधित होती हैं। जमकर वायरल हो रहाहालांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान दत्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई किअगले 14 दिनों की जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। इससे पहले जब दत्ता को कोर्ट लाया गया, तो कोर्ट के बाहर भाजपा समर्थकों ने प्रदर्शन भीकिया। बता दें कि कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब फुटबॉल सुपरस्टार लियोनल मेसी के अचानक स्टेडियमछोड़ने के बाद नाराज फैंस भड़क उठे। अपने G.O.A.T दौरे पर भारत पहुंचे मेसी को देखने हजारों दर्शक भारी कीमत पर टिकट लेकर पहुंचे थे। लैपऑफ ऑनर के बाद मेसी के जल्दी निकलते ही फैंस ने कुर्सियां और बोतलें फेंककर विरोध जताया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकरवायरल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्टहालांकि स्टेडियम में मचे इस हंगामे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मेसी और खेल प्रेमियों से माफी मांगी थी। साथ ही इस पूरे मामले की जांचके लिए एक जांच समिति बनाने के भा एलान किया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा था कि वह खुद भीइस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्टेडियम जा रही थीं। वहां हजारों की संख्या में खेल प्रेमी और फुटबॉल स्टार लियोनल मेसी के फैंस अपनेपसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक पाने के लिए जुटे हुए थे।
पंकज चौधरी यूपी बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष बने, केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने किया ऐलान

यूपी भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने उनके नाम की घोषणा की। हालांकि शनिवार को एकमात्र नामांकन होने कीवजह से पहले ही उनके नाम पर औपचारिक मुहर लग गई थी। लखनऊ के राम मनोहर लोहिया विवि कैंपस के सभागार में इसकी घोषणा की गई।इस मौके पर केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक, राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचन के केंद्रीय प्रभारी, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, प्रदेश चुनावअधिकारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने पंकज चौधरी की जीत की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, प्रदेशभाजपा अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह सहित अन्य वरिष्ठ नेताउपस्थित रहे। चुनाव के बाद यह पहला मौकाकेंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह संगठन की ताकत है कि पार्टी आज इस मुकाम पर है। पीयूष गोयल की घोषणा करते ही पूरा सभागारतालियों से गूंज गया। भूपेंद्र चौधरी ने पार्टी का झंडा नव निर्वाचित अध्यक्ष को सौंपा। इस मोके पर राष्ट्रीय परिषद के 120 नव निर्वाचित सदस्यों कीभी घोषणा की गई। प्रदेश भाजपा के 17वें अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाले चौधरी कुर्मी बिरादरी से चौथे अध्यक्ष होंगे। इनसे पहले विनयकटियार, ओम प्रकाश सिंह और स्वतंत्रदेव सिंह भी इसी बिरादरी से अध्यक्ष रह चुके हैं। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में चौधरी का नाम पहली बारचर्चा में आया था, लेकिन इसे लोग इस आधार पर खारिज कर रहे थे सीएम और अध्यक्ष एक ही क्षेत्र से नहीं हो सकता है। हालांकि शुक्रवार कोचौधरी के नाम और तेजी से सामने आया, लेकिन नामांकन दाखिल होने तक भी सियासी गलियारों में कई नाम चर्चा में रहे। भाजपा के संगठनात्मकचुनाव के इतिहास के लिहाज से देखा जाए तो लक्ष्मीकांत बाजपेयी के चुनाव के बाद यह पहला मौका है,जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए चुनावकी औपचारिकता की जा रही है।
अजित पवार नहीं पहुंचे हेडगेवार स्मारक, महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन पर उठे सवाल

महाराष्ट्र की राजनीति में गर्माहट आम बात है। खासकर तब जब राज्य में किसी भी प्रकार का चुनाव या फिर को राजनीतिक कार्यक्रम हो। तब यहीसियासी गर्माहट अपने वास्तविक तपिश को छोड़कर सातवें आसमान पर पहुंच जाती है। इसी क्रम में एक बार फिर बयानबाजी तब तेज हो गई जबमहाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार रविवार को नागपुर में आरएसएस संस्थापक केबी हेडगेवार के स्मारक नहीं पहुंचे। इस बात को आधार परबनाकर चर्चा इस बात की भी तेज हो गई कि क्या हेडगेवार को लेकर महायुति गठबंधन के दलों में रार चल रहा है? हालांकि राजनीतिक गलियारों मेंबढ़ती चर्चा को देखते हुए एनसीपी ने अजित पवार के नागपुर नहीं जाने के पीछे का कारण साफ किया। पार्टी ने बयान जारी अपना रुख साफ करतेहुए कहा कि वह महायुति गठबंधन में राज्य के विकास के लिए शामिल हुई है, न कि किसी विचारधारा को अपनाने के लिए। केवल दो विधायक ही वहां पहुंचेमामले में एनसीपी के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा कि पार्टी की विचारधारा सामाजिक सुधारकों शाहू महाराज, ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमरावआंबेडकर के प्रगतिशील विचारों पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अजित पवार हेडगेवार स्मारक नहीं गए हैं। बता देंकि रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा व शिवसेना के कई विधायक आरएसएस के स्मृति मंदिर पहुंचे औरउन्हें श्रद्धांजलि दी। हालांकि दूसरी ओर अजित पवार और एनसीपी के अन्य नेता इस कार्यक्रम से दूर रहे। दरअसल महाराष्ट्र विधानसभा काशीतकालीन सत्र इस समय नागपुर में चल रहा है। हर साल इस दौरान भाजपा के मंत्री और विधायक हेडगेवार और संघ के दूसरे सरसंघचालक एमएसगोलवलकर के स्मारक पर जाते हैं। पिछले साल एनसीपी की ओर से केवल दो विधायक ही वहां पहुंचे थे। बल्कि राज्य के विकास के एजेंडे के साथ शामिलगौरतलब है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी एनसीपी पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि अगर एनसीपी आरएसएस कीविचारधारा से सहमत नहीं है, तो सत्ता में बने रहना मुश्किल है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने वालीसोच को बढ़ावा देता है। सचिन सावंत ने यह भी कहा कि आरएसएस को अब तक यह साफ करना चाहिए कि हिंदुत्व का असली मतलब क्या है।उन्होंने दावा किया कि संघ की बैठकों में बौद्धिक चर्चा से ज्यादा समाज को बांटने वाली बातें होती हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार केनागपुर में आरएसएस संस्थापक केबी हेडगेवार के स्मारक नहीं पहुंचने से सियासी हलचल तेज हो गई। महायुति में मतभेद की अटकलों के बीचएनसीपी ने सफाई दी कि पार्टी गठबंधन में किसी विचारधारा के लिए नहीं, बल्कि राज्य के विकास के एजेंडे के साथ शामिल है।
प्रियंक खरगे का अमित शाह पर तीखा हमला, लोकतंत्र का तमाशा बना दिया

कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद में कथितअपशब्दों के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की। खरगे ने कहा कि इससे सिर्फ उनके नजरिए का पता चलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वर्तमानसरकार में जवाबदेही की कमी है। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कहा जाता है कि आपकी भाषा आपके नजरिए को दिखातीहै। प्रियांक खरगे ने आगे कहा कि इन सबके बीच सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण था चेयर की प्रतिक्रिया, मुस्कान और चुप्पी। न कोई फटकार, न कोईजवाबदेही। न संसद का सम्मान, न संविधान का। खरगे ने भाजपा-आरएसएस पर आरोप लगाया कि उन्होंने लोकतंत्र को सिर्फ एक तमाशा बना दियाहै। उन्होंने कहा कि भाजपा-आरएसएस ने हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर से लेकर मजाक में बदल दिया है। लेकिन उनका हार निश्चितबता दें कि संसद में यह विवाद 10 दिसंबर को तब शुरू हुआ, जब गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच ‘वोट चोरी’ को लेकरबहस गरम हो गई। राहुल गांधी ने लगातार शाह को प्रेस वार्ता में उठाए गए मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी। वहीं अमित शाह ने कहा कि संसदउनकी मर्जी के अनुसार नहीं चलेगी। साथ ही शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि वे सभी सवालों का जवाब अपनी क्रम में देंगे। इस दौरान अमितशाह ने विपक्ष पर जमकर निशाना भी साधा। शाह ने कहा कि वे वोटर लिस्ट सुधार (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। ये वही प्रक्रिया हैजिससे वोटर लिस्ट सही की जाती है। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है, लेकिन उनका हार निश्चित है। चुनाव आयोग के प्रति दोहरा मानदंड नहींचलेगा। लोकतांत्रिक संस्थाओं का तमाशा बना दियाहालांकि राहुल गांधी ने गृह मंत्री के जवाब को रोकते हुए तीन प्रेस वार्ता में उठाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा किमैंने पूछा कि चुनाव आयोग को पूरी सुरक्षा क्यों दी गई। अमित शाह केवल हरियाणा का उदाहरण दे रहे हैं, जबकि 19 लाख फर्जी वोटर्स के मामलेहैं। आइए, मेरी तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस करें। कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद में कथित अपशब्दों की कड़ीआलोचना की। उन्होंने कहा कि चेयर की मुस्कान और चुप्पी ने जवाबदेही की कमी और लोकतंत्र का मजाक उजागर किया। खरगे ने भाजपा-आरएसएस पर आरोप लगाया कि उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं का तमाशा बना दिया।
कांग्रेस की वोट चोरी रैली पर विपक्षी नेताओं ने साधा निशाना, माहौल हुआ गर्म “सामने आई मनोज झा की प्रतिक्रिया”

राष्ट्रीय राजधानी में कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ कांग्रेस की विशाल रैली पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज कुमार झा ने प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा, हम निष्पक्ष चुनाव जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं, जिसमें चुनाव आयोग की सक्रिय भूमिका होनी चाहिए। बिहार चुनाव के दौरानहुए वित्तीय लेन-देन यह दिखाते हैं कि किसी भी तरह से वोट चुराने की कोशिश की गई। वहीं, कांग्रेस की रैली को लेकर भाजपा नेता शाहनवाज हुसैनने कहा, कांग्रेस पार्टी की रैली पूरी तरह विफल होगी। कांग्रेस अपने ही कर्मों का फल भुगत रही है और यह बात वह जानती है। वह ईवीएम, एसआईआर और चुनाव आयोग पर दोष मढ़ना चाहते हैं। कांग्रेस नेता खुद इन पर सवाल उठा रहे हैं और उनके नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। इनसवालों को उठने से रोकने के लिए वे यह रैली कर रहे हैं। रैली में भीड़ जुटाने से कुछ नहीं होगा। मैं समझता हूंदिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली पर ओडिशा कांग्रेस के प्रभारी अजय कुमार लल्लू ने कहा, ‘जिस तरह देश में लोकतंत्र को बंधक रखागया है। निश्चित तौर पर देश की यह भाजपा सरकार वोट चोरी की सरकार है। राहुल गांधी ने तमाम राज्यों में प्रेस वार्ता करके देश, मीडिया, लोगों केसामने प्रत्यक्ष रूप से एक-एक वोटर और बूथ के बारे में जानकारी लाने का काम किया। मैं समझता हूं कि जो आज भाजपा है वो लोकतांत्रिक प्रणालीकी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करके निश्चित तौर पर तानाशाही के रास्ते पर जाना चाहती है।’ अपनी पार्टी के लिए है ये देश के लिए नहींआम आदमी पार्टी दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कांग्रेस की रैली पर कहा, ‘हमारी तरफ से उन्हें शुभकामनाएं कि वे कोई भी जन जागृति का कार्यदेश के अंदर करना चाहते हैं। लेकिन जिस दिल्ली के अंदर कांग्रेस वोट चोरी की शुरूआत कर रही है, इतनी बड़ी रैली कर रही है उसी दिल्ली में आजसे एक साल पहले जब वोट चोरी हो रही थी, हमारे बड़े-बड़े नेता वोट चोरी के सबूत दिखा रहे थे तब कांग्रेस पार्टी चुप थी। आज एक साल बाद तकभी कांग्रेस उस पर चुप है। क्या राहुल गांधी दिल्ली की वोट चोरी के विषय में बात करेंगे या उससे बचेंगे? यदि बचते हैं तो उनका पूरा का पूरा नैरेटिवउनकी अपनी पार्टी के लिए है ये देश के लिए नहीं।’
देहरादून में IMA पासिंग आउट परेड: 491 नए अफसरों को मिली कमिशन, सेना प्रमुख ने लगाई 20 पुश-अप्स

भारत की सशस्त्र और गौरवशाली सेना को शनिवार को 491 नए युवा अफसर मिल गए। इन अफसरों में देश की आन, बान और शान की रक्षा करनेका जोश साफ देखा गया। पासिंग आउट परेड (पीओपी) की सलामी भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ली। हालांकि इस दौरान भीसबकी निगाहें जनरल द्विवेदी की ओर हीं थी। कारण है कि देहरादून आईएमए परेड में हुई इस पासिंग आउट परेड में सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने कुछऐसा किया, जिसने हर अधिकारी और कैडेट को जोश से भर दिया। बता दें कि 61 वर्षीय जनरल द्विवेदी ने सेना के जवानों के साथ मिलकर 20 पुश-अप्स लगाकर नए अफसरों में जोश और उत्साह की लहर भर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने बेहद अनौपचारिक अंदाज में नए अफसरों और उनके परिवारवालों से मुलाकात भी की। इस तरह का व्यवहार नए अफसरों के लिए बड़ी प्रेरणा बन गया। साथ ही सेना प्रमुख का ये कृत्य खूब चर्चा में भी रहा। अनौपचारिक मुलाकात कीदूसरी ओर देहरादून आईएमए परेड के दौरान शनिवार को अनुशासन और गर्व का ऐतिहासिक पल देखने को मिला। थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्रद्विवेदी ने परेड की समीक्षा की और सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले कैडेट्स को बधाई दी। उन्होंने नव-नियुक्त अधिकारियों से भारतीय सेनाकी परंपराओं का पालन करते हुए निष्ठा और समर्पण के साथ राष्ट्र सेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेना में कमीशन मिलना जिम्मेदारी भरेजीवन की शुरुआत है। कैडेट्स को संबोधित करते हुए थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि सैन्य सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि ऐसादायित्व है जो सर्वोच्च त्याग की मांग करता है। उन्होंने कहा कि अकादमी से पास आउट होने के बाद भले ही हर कदम पर कोई मार्गदर्शक साथ न हो, लेकिन तब आपके कंधों पर कहीं बड़ी जिम्मेदारी होगी। कहा कि एक अधिकारी के रूप में आपके आचरण, अनुशासन और निर्णय लाखों लोगों केलिए प्रेरणा बनेंगे। देहरादून में आईएमए पासिंग आउट परेड में 491 नए अफसरों ने कमिशन लिया। 61 वर्षीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी नेजवानों में जोश और उत्साह भरने के लिए 20 पुश-अप्स लगाए और अफसरों व उनके परिवार से अनौपचारिक मुलाकात की, जिसे देखकर हर कोईप्रेरित हुआ।
मोहन भागवत का संदेश, हिंदू समाज को एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करना चाहिए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करना चाहिए, क्योंकि एकता से ही समाज और राष्ट्र मजबूत बनते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि हर राष्ट्र का एक लक्ष्य औरएक नियति होती है, जिसे पूरा करना उसका दायित्व है। श्री विजय पुरम में शनिवार को नेताजी स्टेडियम में विराट हिंदू सम्मेलन समिति की ओर सेआयोजित सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज के दौर में केवल सत्य नहीं, बल्कि शक्ति भी वैश्विक स्तर परमान्यता दिलाती है। उन्होंने कहा, दुनिया सिर्फ सत्य को नहीं, शक्ति को भी मानती है। जिसके पास शक्ति है, उसे दुनिया स्वीकार करती है। देशभक्ति एक नागरिक कर्तव्य हैइस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि यदि हिंदू समाज जागृत होगा तो पूरा विश्व जागृत होगा। उनका कहना था कि भारत से ही दुनिया को मार्गदर्शनमिलने की उम्मीद है। समस्याओं में उलझने के बजाय समाधान खोजने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए शक्ति जरूरीहै और शक्ति एकता से आती है। महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान टकराव नहीं होता। भगवान कृष्ण नेबुद्धिमत्ता और समझदारी से बिना संघर्ष के समस्या का समाधान किया, यही सीख हमें भी लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्ति एकनागरिक कर्तव्य है और यह तय करने का समय है कि हम अपने घरों में किन मूल्यों को स्थान देना चाहते हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहाकि मजबूत समाज की शुरुआत घर से होती है। परिवार के साथ समय बिताने, पड़ोसियों से मित्रता बढ़ाने, पारंपरिक परिधान पहनने और अपनीसंस्कृति से प्रेम करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया।