भाजपा ने जारी की, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 29 उम्मीदवारों की पहली सूची

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 29 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। इस सूची में नई दिल्ली सीट से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ सांसद प्रवेश वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया गया है। भाजपा की यह रणनीति नई दिल्ली सीट को लेकर विशेष रूप से अहम मानी जा रही है। अन्य प्रमुख नामों में मालवीय नगर से सतीश उपाध्याय, गांधी नगर से अरविंद सिंह लवली, और कालकाजी से रमेश बिधूड़ी शामिल हैं। पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों से अनुभवी और नए चेहरों को मौका देकर अपनी चुनावी योजना को मजबूत करने का प्रयास किया है। इस घोषणा के साथ ही दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (आप) पहले ही अपने 70 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है। सभी प्रमुख दल अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। दिल्ली की जनता अब सभी दलों के उम्मीदवारों और उनके एजेंडे का आकलन करेगी, जिससे आगामी विधानसभा का स्वरूप तय होगा। भाजपा द्वारा जारी 29 उम्मीदवारों की सूची में शामिल कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं: 1. नई दिल्ली – प्रवेश वर्मा2. मालवीय नगर – सतीश उपाध्याय3. गांधी नगर – अरविंद सिंह लवली4. कालकाजी – रमेश बिधूड़ी5. पटेल नगर – कृष्णा तीरथ6. त्रिनगर – नंद किशोर गर्ग7. मादीपुर – राज कुमार खुराना8. राजौरी गार्डन – मनजिंदर सिंह सिरसा9. जनकपुरी – अशोक गोयल10. द्वारका – प्रद्युम्न राजपूत11. उत्तम नगर – पवन शर्मा12. मटियाला – राजेश गहलोत13. नजफगढ़ – अजीत खट्रान14. बिजवासन – सत्य प्रकाश राणा15. पालम – विजय पंडित भाजपा की यह सूची आगामी चुनावी मुकाबले को और रोचक बनाती है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में ‘ग्रामीण भारत महोत्सव-2025’ का उद्घाटन किया, पीएम ने ग्रामीण विकास पर भी दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जनवरी 2025 को दिल्ली के भारत मंडपम में ‘ग्रामीण भारत महोत्सव-2025’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंनेकहा कि 2014 के बाद से वे निरंतर ग्रामीण भारत की सेवा में जुटे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गांवों का विकास पहले भी संभव था, लेकिनउनकी सरकार ने इसे विशेष प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि भारत के गांवों के लोग सशक्त हों, उन्हें गांव में ही आगे बढ़ने के अवसर मिलें, और उन्हें पलायन न करनापड़े। इसके लिए हमने गांव-गांव में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का अभियान शुरू किया।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने किसानों के लिए निर्णय लिया है कि दुनिया में डीएपी (DAP) की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन भारत में यहबोझ नहीं बढ़ने देंगे और सब्सिडी बढ़ाकर इसे स्थिर रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि गांवों के विभिन्न वर्गों के लिए विशेष नीतियों को लागू किया गया है। हाल ही में, कैबिनेट ने ‘पीएम फसलबीमा योजना’ को एक वर्ष और जारी रखने की मंजूरी दी है। ‘ग्रामीण भारत महोत्सव-2025’ का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047 के लिए एक मजबूत और लचीला ग्रामीण भारत बनाना’ है। महोत्सव केदौरान विभिन्न चर्चाएं, कार्यशालाएं और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास, आत्मनिर्भरअर्थव्यवस्थाओं का निर्माण और ग्रामीण समुदायों में नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में नए मोड़ की ओर बढ़ते शिवसेना (UBT) और BJP नेता

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी समीकरण एक बार फिर बदलते दिख रहे हैं। हाल ही में, शिवसेना(यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जमकर तारीफ की है। राउत ने गढ़चिरौली जिले में सक्रिय नक्सलियों केआत्मसमर्पण को राज्य सरकार की सराहनीय उपलब्धि करार दिया। संजय राउत ने की फडणवीस की प्रशंसाशिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र *सामना* में प्रकाशित संपादकीय में संजय राउत ने गढ़चिरौली जिले के पूर्व संरक्षक मंत्री पर निशाना साधते हुए आरोपलगाया कि उन्होंने अपने एजेंटों को नियुक्त किया और नक्सलवाद को बढ़ावा दिया। राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गढ़चिरौली काप्रभार संभालकर अच्छा काम किया है, जिससे नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और संवैधानिक रास्ता अपनाया। राउत ने एएनआई से बातचीत में कहा, “हमने देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की है, क्योंकि सरकार ने गढ़चिरौली में अच्छा काम किया है। यदिनक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और संविधान को अपनाया, तो यह हम सभी के लिए शुभ है। महाराष्ट्र के लिए यह एक सकारात्मक कदम है।” गढ़चिरौली का विकास होगा महाराष्ट्र के लिए लाभकारीसंजय राउत ने गढ़चिरौली जिले के विकास की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “गढ़चिरौली का विकास केवल इस जिले के लिए नहीं, बल्कि पूरेमहाराष्ट्र के लिए अच्छा होगा। यदि यह जिले महाराष्ट्र का स्टील सिटी बन जाता है, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।” राउत ने आगे कहा, “हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की है जब उन्होंने अच्छा काम किया है। अगर गढ़चिरौली जैसे नक्सल प्रभावित जिले मेंसकारात्मक बदलाव आ रहे हैं, तो इसे सराहा जाना चाहिए।” नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर राउत की प्रतिक्रियासंजय राउत ने यह भी बताया कि गढ़चिरौली जिले में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का समेत 11 नक्सलियों नेआत्मसमर्पण कर दिया है। राउत ने कहा कि यह सकारात्मक बदलाव की ओर एक बड़ा कदम है, जो अब तक नक्सल प्रभावित जिलों में उद्योगस्थापित करने की कोशिश करने वाले उद्योगपतियों से जबरन वसूली की स्थिति को बदलने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, “अब चीजें बदल रही हैं। जो लोग पहले केवल उद्योगपतियों से पैसे ऐंठने के बारे में सोचते थे, वे अब सकारात्मक बदलाव की ओर कदमबढ़ा रहे हैं, और यह सराहनीय है।” गढ़चिरौली में हुआ आत्मसमर्पणगढ़चिरौली में बुधवार को एक बड़ा घटनाक्रम हुआ, जब एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का समेत कुल 11 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें आठ महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे, जिन्होंने गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय मेंआत्मसमर्पण किया। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ राज्य सरकार की कड़ी कार्रवाई और फडणवीस सरकार के प्रयासों को एक बड़ी सफलता केरूप में देखा जा रहा है। महाराष्ट्र की सियासत में नया समीकरण?शिवसेना (यूबीटी) और BJP के बीच बढ़ती प्रशंसा और समर्थन की यह स्थिति राज्य की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत देती है। संजय राउतद्वारा फडणवीस की सराहना और गढ़चिरौली में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटना, यह साबित करती है कि महाराष्ट्र की राजनीति में अभी और भीदिलचस्प मोड़ आने वाले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का दिल्ली सरकार पर तीखा हमला, 4,500 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दिल्ली में एक रैली को संबोधित करते हुए दिल्ली सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार को “आपदा सरकार” और “कट्टर बेईमान” कहा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि वह भी अपने लिए भव्य आवास (शीश महल) बनवा सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे प्राथमिकता न देकर गरीबों के लिए घर बनवाए। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने दिल्लीवासियों को 4,500 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी, जिसमें झुग्गीवासियों के लिए बनाए गए 1,675 फ्लैट्स का उद्घाटन भी शामिल था। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि उन्होंने अपने लिए कोई आवास नहीं बनवाया है। पिछले दस वर्षों में उनकी प्राथमिकता गरीबों के लिए घर बनाना रही है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और दिल्ली की जनता से सतर्क रहने की अपील की। प्रधानमंत्री के इस बयान से दिल्ली की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस बयान को काफी अहम माना जा रहा है।
दिल्ली विधानसभा में विशेष सत्र बुलाने की मांग: विपक्ष ने उठाए कई अहम मुद्दे

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता और अन्य भाजपा विधायकों ने दिल्ली सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि भाजपा विधायकों ने पहले ही राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें जिन मुद्दों को उठाया गया है, उन पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। विशेष रूप से, उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीने से न तो कैबिनेट की बैठक हुई है और न ही विधानसभा का कोई सत्र बुलाया गया है, जो एक गंभीर मामला है। मुख्यमंत्री केजरीवाल पर सवाल उठाते हुए विशेष सत्र की मांगविजेंद्र गुप्ता ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा, “मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले पांच महीने से जेल में हैं, और उन्होंने त्यागपत्र देने के बजाय जेल से ही सरकार चलाने की घोषणा की है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मुख्यमंत्री ने जेल से कितने निर्णय लिए हैं। इस दौरान हुई कैबिनेट बैठकों और उनमें लिए गए फैसलों की जानकारी जनता को दी जानी चाहिए।” गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है क्योंकि छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन नहीं किया गया है, जो कि एक संवैधानिक आवश्यकता है। दिल्ली नगर निगम की वित्तीय स्थिति पर चिंताविजेंद्र गुप्ता ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम की वित्तीय स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है और सरकार को इस पर जल्द कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों से कैग (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की 11 रिपोर्ट लंबित हैं, जो दर्शाती हैं कि सरकार ने इस मामले में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया है। जल बोर्ड और वित्तीय अनियमितता का मामलाविजेंद्र गुप्ता ने जल बोर्ड से संबंधित एक गंभीर मुद्दा उठाया, जिसमें 15 मार्च 2024 को मुख्य सचिव ने जल मंत्री को जल बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन वह रिपोर्ट अब तक विधानसभा में पेश नहीं की गई है। गुप्ता ने कहा, “जल बोर्ड ने दिल्ली सरकार से 73 हजार करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने से इनकार कर दिया है। सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।” आयुष्मान भारत योजना और अन्य अहम मुद्देनेता प्रतिपक्ष ने आयुष्मान भारत योजना के बारे में भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया कि केंद्र सरकार की यह योजना दिल्ली में लागू नहीं की गई है। इसके साथ ही, राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित 12 कॉलेजों को फंड नहीं दिया जा रहा है, जो कि छात्रों के भविष्य के लिए चिंताजनक है। श्वेत पत्र की मांग और परियोजनाओं में देरीविजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विकास विश्वविद्यालय, शिक्षक विश्वविद्यालय, और खेल विश्वविद्यालय पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं पर अधिक जानकारी साझा की जाए, ताकि सरकार की योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ सके। इसके अलावा, गुप्ता ने यह भी सवाल उठाया कि सात आइसीयू अस्पताल और पाली क्लीनिक बनाने में देरी हो रही है और इन परियोजनाओं की लागत भी बढ़ गई है। उन्होंने झुग्गियों में नल से जल उपलब्ध कराने और जहां झुग्गी वहीं मकान योजना की स्थिति के बारे में भी सरकार से जवाब मांगा।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2024: मायावती की बीएसपी ने बनाई बड़ी रणनीति, सभी 70 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। पार्टी ने आगामी चुनाव में सभी 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, जिससे दिल्ली के चुनावी मुकाबले में एक और नया मोड़ आ सकता है। बीएसपी उम्मीदवारों की लिस्ट 15 जनवरी तक जारी होने की संभावनाबीएसपी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पार्टी की योजना उम्मीदवारों की पहली सूची जनवरी के मध्य तक जारी करने की है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि दिल्ली शहर को पांच जोन में बांटा गया है और इन जोनों में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया जारी है। हर जोन में समन्वयक नियुक्त किए गए हैं, जो अपने क्षेत्रों के उम्मीदवारों के नाम तय करेंगे। इन सिफारिशों के आधार पर मायावती अंतिम निर्णय लेंगी। पदाधिकारी ने यह भी कहा कि उम्मीदवारों की सूची 15 जनवरी तक फाइनल हो सकती है। पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में भी सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उसे कोई सीट नहीं मिल पाई थी। हालांकि, बीएसपी को 0.71 प्रतिशत वोट मिले थे। दिल्ली चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय: आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा की स्थितिइस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले का बनता हुआ नजर आ रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) पहले ही सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है, जबकि कांग्रेस ने 47 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी उम्मीदवारों के चयन में जुटी है और उम्मीद जताई जा रही है कि पार्टी जल्द ही अपनी लिस्ट जारी करेगी। बीएसपी की एंट्री से दिल्ली चुनाव और भी दिलचस्प हो सकता है। पार्टी ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है और अब चुनाव प्रचार अभियान को भी गति देने की योजना बनाई है। चुनावी प्रचार अभियान 5 जनवरी से शुरू होने की संभावनाबीएसपी पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी का चुनाव प्रचार अभियान 5 जनवरी 2024 से शुरू होने की संभावना है। इसके तहत दिल्ली के विभिन्न इलाकों में छोटी-छोटी बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें मुख्य मुद्दों और एजेंडों पर चर्चा की जा रही है। इन चर्चाओं के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। बीएसपी का दिल्ली में चुनावी इतिहासबीएसपी ने पहले भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ा है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई। 2015, 2013 और 2008 में भी पार्टी ने दिल्ली की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहे थे। हालांकि, बीएसपी ने अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए इन चुनावों से सबक लिया है और अब 2024 के चुनाव में एक मजबूत मुहिम के साथ उतरने की योजना बना रही है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव: संजय सिंह ने BJP नेताओं के खिलाफ भेजा लीगल नोटिस, आरोपों का किया खंडन

दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज़ हो चुकी हैं, और भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक घमासान भी बढ़ गया है। इस दौरान, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भाजपा के सोशल मीडिया हेड अमित मालवीय और भाजपा सांसद मनोज तिवारी को लीगल नोटिस भेजा है। आरोप है कि इन नेताओं ने संजय सिंह पर एक से अधिक वोटर कार्ड होने का आरोप लगाया था। संजय सिंह का कड़ा पलटवार: “पूर्वांचल के लोगों का वोट नहीं कटने देंगे”इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली में यूपी, बिहार और पूर्वांचल से आए लोगों का वोट कभी नहीं कटने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “दिल्ली में 30-40 साल से बिहार, यूपी और पूर्वांचल के लोग रह रहे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और श्रम से दिल्ली को विकास के रास्ते पर बढ़ाया है। आम आदमी पार्टी यह कभी नहीं होने देगी कि उनका वोट कटे।” संजय सिंह ने भाजपा पर आरोप लगाया कि जब उन्होंने भाजपा के इस प्रयास को उजागर किया, तो भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर वोट बढ़वाने और कटवाने का झूठा आरोप लगाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और कृषि मंत्री झूठ फैला रहे हैं, और यह काम अब नहीं होने देंगे। पूर्वांचल के लोगों को ‘बांग्लादेशी’ और ‘रोहिंग्या’ कहने का आरोपसंजय सिंह ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे पूर्वांचल के लोगों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहकर उनका वोट कटवाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा के नेता हमारे पूर्वांचल के भाइयों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहकर उनका वोट कटवाना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। अगर भाजपा यह सोचती है कि हम चुप रहेंगे, तो वे गलत समझ रहे हैं। हम सड़क पर और सदन में उनसे मुकाबला करेंगे।” सुल्तानपुर के वोटर लिस्ट पर संजय सिंह का खुलासासंजय सिंह ने आगे कहा कि भाजपा नेताओं को सही जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोपों का खंडन करते हुए बताया कि सुल्तानपुर के वोटर लिस्ट में उनका और उनकी पत्नी का नाम नहीं है। संजय सिंह ने कहा, “मेरी पत्नी ने 4 जनवरी 2024 को सुल्तानपुर के जिला निर्वाचन कार्यालय में आवेदन देकर अपना वोट कटवाने की प्रक्रिया शुरू की थी। मैंने खुद 2013 में अपना वोट कटवाने का आवेदन दिया था।” उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेता सुल्तानपुर के वोटर लिस्ट में मेरा और मेरी पत्नी का नाम ढूंढते हैं, तो उन्हें यह नाम नहीं मिलेगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और उन्होंने खुद अपनी जिम्मेदारी निभाई है। संजय सिंह की चुनौती: BJP को जवाब देने की चेतावनीसंजय सिंह ने भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए कहा, “आपको जानकारी नहीं है कि कैसे राजनीति की जाती है। आपको बस यह सिखाया जाता है कि झूठ कैसे बोला जाए। अब अगर किसी नगरपालिका के वोटर लिस्ट में मेरा नाम था, तो यह उनकी निगरानी की जिम्मेदारी है, जो योगी सरकार के कर्मचारी हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को यह समझना होगा कि आम आदमी पार्टी पूर्वांचल के लोगों के अधिकारों का बचाव करने के लिए हमेशा खड़ी रहेगी।
उत्तर भारत में ठंड का कहर: हिमाचल से दिल्ली तक जनजीवन प्रभावित, बर्फबारी और कोहरे का प्रकोप जारी

उत्तर भारत में ठंड का असर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की दिनचर्या पर गहरा प्रभाव पड़ा है। हिमाचल प्रदेश की स्थिति हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी बर्फबारी के बाद तापमान में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। लाहौल और स्पीति जिले के ताबो क्षेत्र में न्यूनतम तापमान शून्य से 10.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जिससे यह प्रदेश का सबसे ठंडा क्षेत्र बन गया। पंजाब में हालात अमृतसर में घने कोहरे के चलते दृश्यता शून्य पर पहुंच गई, जिससे हवाई यातायात बाधित हुआ। इसके अलावा, किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण सड़कों और रेलवे ट्रैकों पर आवागमन में दिक्कतें आईं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश की स्थिति दिल्ली में कोहरे के कारण दृश्यता 50 मीटर तक सिमट गई, जिससे उड़ानों पर असर पड़ा। उत्तर प्रदेश में आगरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें 7 घंटे की देरी से चल रही हैं, जबकि बुलंदशहर में दृश्यता महज 5 मीटर तक रह गई। मध्य प्रदेश की स्थिति कोहरे के कारण मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर दृश्यता 100 मीटर से कम रही, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रभाव नोएडा में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहीं, पटना में स्कूलों की समय सारिणी में बदलाव किया गया है। जम्मू-कश्मीर में हालात जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा, कुपवाड़ा, बारामूला और अनंतनाग में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। श्रीनगर और गांदरबल के मैदानी इलाकों में हल्की बर्फबारी हुई। मौसम विभाग ने 4 से 6 जनवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फबारी जारी रहने का अनुमान जताया है। आने वाले दिनों का अनुमान हरियाणा में अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद तापमान में स्थिरता रहने की उम्मीद है। उत्तर भारत, ठंड, बर्फबारी, कोहरा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, स्कूल बंद, जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी विक्षोभ, मौसम समाचार, ठंड का असर, जनजीवन प्रभावित, तापमान गिरावट, दृश्यता, यातायात प्रभावित
ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान: दिल्ली और बिहार में चुनाव लड़ने का ऐलान, गठबंधन पर भी बात की

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली औरबिहार में आगामी चुनावों में हिस्सा लेगी। उन्होंने साफ किया कि यदि गठबंधन बना, तो वह गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेंगे, अन्यथा अपने दम पर भीचुनाव लड़ा जाएगा। राजभर ने कहा, “हम दिल्ली और बिहार में चुनाव लड़ेंगे। यदि गठबंधन बन सका तो गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे, और अगर ऐसानहीं हुआ, तो अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे।” बिहार और दिल्ली में चुनावी तैयारी पर जोरराजभर ने आगे कहा कि दिल्ली और बिहार में पार्टी संगठन की तैयारी तेज़ी से चल रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि चुनाव लड़ने के लिए उनकीपार्टी पूरी तरह से तैयार है। बिहार में उनकी पार्टी 36 जिलों में चुनावी तैयारी कर रही है, और राजभर ने कहा कि सीटों की संख्या तय करने से पहलेप्रदेश अध्यक्ष और जिलों के अध्यक्षों से बातचीत की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी रणनीति और गठबंधन के बारे में अंतिम निर्णय तबलिया जाएगा जब चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहींओम प्रकाश राजभर ने गठबंधन को लेकर भी कुछ अहम बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनकी बात अन्य दलों से चल रही है, लेकिन अभी तककोई ठोस गठबंधन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “हमसे कहा गया है कि जब चुनाव की अधिसूचना जारी होगी, तब हम बैठकर बात करेंगे। अगरगठबंधन की बात नहीं बनी, तो हम अकेले चुनाव लड़ेंगे।” AAP पर हमला: घोषणाओं से बचने की सलाहओम प्रकाश राजभर ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “आपकी सरकार है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य मेंसरकार बनेगी या नहीं। उन्हें घोषणाएं नहीं करनी चाहिए, बल्कि जो भी करना है लोगों के लिए, वह कर देना चाहिए।” राजभर ने दिल्ली के मुख्यमंत्रीअरविंद केजरीवाल पर भी तंज करते हुए कहा, “केजरीवाल आप के बड़े नेता हैं और बुद्धि लगाकर दल को चलाने के लिए समय-समय पर बोलते रहतेहैं, लेकिन फिलहाल उनकी सरकार के भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।” राजभर की बढ़ती भूमिका: बिहार और यूपी में चुनौतीओम प्रकाश राजभर अपने विवादित बयानों और राजनीतिक गतिविधियों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। उनका यह बयान दिल्ली और बिहार मेंचुनावी रणनीति को लेकर विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि उनकी पार्टी का यूपी में भी एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है। बिहार औरदिल्ली में चुनावी चुनौती बढ़ने के साथ ही राजभर की भूमिका राजनीति में और भी अहम हो सकती है।
केजरीवाल का मोहन भागवत को पत्र: बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर बीजेपी की नीतियों पर गंभीरसवाल उठाए हैं। अपनी चिट्ठी में केजरीवाल ने पूछा, “भाजपा ने जो कुछ भी गलत किया है, क्या आरएसएस उसका समर्थन करती है?” उन्होंने यह भीसवाल किया कि “क्या आरएसएस खुलेआम वोट खरीदने और पैसे बांटने को सही मानता है?” केजरीवाल ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा किदलित और पूर्वांचलियों के वोटों को बड़े पैमाने पर काटा जा रहा है, और क्या आरएसएस को यह जनतंत्र के लिए सही लगता है? इसके अलावा, उन्होंने पूछा, “क्या आरएसएस को नहीं लगता कि बीजेपी लोकतंत्र को कमजोर कर रही है?” आतिशी का वीके सक्सेना को पत्र: धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने का मुद्दा उठायाअरविंद केजरीवाल के साथ-साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है। आतिशी ने पत्र मेंआरोप लगाया कि उपराज्यपाल के आदेश पर दिल्ली के मंदिरों और बौद्ध धार्मिक स्थलों को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “दिल्ली में किसी भी मंदिरया धार्मिक स्थल को तोड़ने का काम नहीं होना चाहिए, क्योंकि बौद्ध धार्मिक स्थल दलित समुदाय से जुड़ी आस्था का केंद्र हैं।” आतिशी ने यह भीआरोप लगाया कि धार्मिक कमिटी ने बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के मंदिर तोड़ने की फाइल उपराज्यपाल को भेज दी है, जो इस मुद्दे को और गरमासकता है। वीके सक्सेना की टिप्पणी पर आतिशी का पलटवारइससे पहले, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा आतिशी को “कामचलाऊ मुख्यमंत्री” कहे जाने पर चिंताव्यक्त की थी। सक्सेना ने इसे “संविधान में निहित लोकतांत्रिक भावना और मूल्यों की घोर अवहेलना” बताया था। उनके मुताबिक, यह टिप्पणीराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान है, जिन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री नियुक्त किया, और साथ ही यह उपराज्यपाल का भी अपमान है, क्योंकि वहराष्ट्रपति के प्रतिनिधि हैं। इस पर आतिशी ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर जवाब दिया था और इसे राजनीति का हिस्सा बताते हुए अपनी प्रतिक्रियादी थी। राजनीतिक विवादों का ताजा मोड़दिल्ली की राजनीति में इस समय विवादों का दौर जारी है, जहां एक तरफ केजरीवाल ने आरएसएस प्रमुख से बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ आतिशी ने उपराज्यपाल के फैसलों पर विरोध दर्ज कराया है। इन घटनाओं ने दिल्ली के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया हैऔर आने वाले दिनों में इन पर और भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।