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योगी सरकार में सख्ती के कड़े इंतजाम, संभल फैक्ट्ररी केस में भाजपा नेता के भाई के खिलाफ किया गया केस दर्ज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नियमों में सख्ती की नीति संभल के भाजपा नेता के भाई के मामले में भी दिखाई पड़ी है. मुख्यमंत्री से एक सप्ताहपहले की गई मुलाकात भी किसी काम नहीं आ सकी और पुलिस ने चोरी के वाहन काटने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की है. आगे की छानबीन जारी है. एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई का कहना है कि तथ्य जो भी प्रकाश में आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी. अपराध किसी को नहीं करने दियाजाएगा. भाजपा के पश्चिमी क्षेत्र के उपाध्यक्ष राजेश सिंघल और उनके भाई कपिल सिंघल ने लखनऊ पहुंचकर 12 मार्च को मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ से मुलाकात की थी.इस मुलाकात की तस्वीरें तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दिखाई दी थीं. अब कपिल सिंघल के खिलाफ स्क्रैपफैक्टरी में चोरी के वाहन कटान के आरोप में पुलिस ने कार्रवाई की है. यह कार्रवाई भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. सोशल मीडिया पर यूजर्स को दिखी मुख्यमंत्री की सख्तीसोशल मीडिया प्लेटफार्म के यूजर्स इसको मुख्यमंत्री की सख्ती के मामले में तटस्थता नीति का उदाहरण बता रहे हैं.कहा जा रहा है कि अपराध कोईभी करे, वह कानूनी कार्रवाई की जद में आएग वहीं दूसरी ओर इस कार्रवाई को लेकर भाजपा के पश्चिमी क्षेत्र के उपाध्यक्ष राजेश सिंघल का पक्षजानना चाहा लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका.कैलादेवी थाना क्षेत्र के गांव रझेड़ा सलेमपुर में संचालित कबाड़ फैक्टरी पर पुलिस ने छापा मारा. मौके पर कई गाड़ियों के पार्ट्स व अन्य सामान मिला है पुलिस ने भाजपा के पश्चिमी क्षेत्र के उपाध्यक्ष राजेश सिंघल के भाई कपिल सिंघल केखिलाफ चोरी के वाहन काटने के मामले में रिपोर्ट दर्ज की है. पुलिस ने शुरु की जांच पड़तालसाथ ही पुलिस आगे की छानबीन कर रही है. इसको लेकर पुलिस प्रशासन का कहना है कि मेरठ की तरह संभल में भी अवैध तरीके से वाहन काटने केमामले की जानकारी प्रकाश में आई थी. इसके बाद ही मुखबिर के माध्यम से पुलिस ने चौकसी शुरू की और कार्रवाई की है. मौके पर दस्तावेज नहींमिले सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे थे आगे की छानबीन जारी है. फिलहाल फैक्टरी को सील कर दिया गया है. यह रिपोर्ट कैलादेवी थाना प्रभारीसत्यप्रकाश सिंह ने दर्ज कराई है थाना प्रभारी ने अपनी तहरीर में कहा है कि स्क्रैप आरआर एंड आर मैंटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फैक्टरी संचालितहो रही है .शुक्रवार की रात को मुखबिर ने सूचना दी थी कि चोरी के वाहन फैक्टरी में काटे गए हैं मौके पर स्क्रैप पड़ा है.

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों से प्रभावित अंतराष्ट्रीय छात्र, ACLU ने ट्रंप के फैसले को दी चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के फैसलों से प्रभावित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की मदद के लिए शुक्रवार को एक बड़ा मुकदमा दायर किया गयाहै. इस मुकदमे में अदालत से अनुरोध किया गया है कि इन छात्रों की कानूनी स्थिति फिर से बहाल की जाए. इस फैसले से करीब 1100 से ज्यादाविदेशी छात्र प्रभावित हुए हैं. जिन्हें अमेरिका से निकाले जाने का डर सता रहा है बता दें कि यह मुकदमा अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन(एसीएलयू) और उससे जुड़े कई संगठनों ने मिलकर दायर किया है. ये न्यू इंग्लैंड और प्यूर्टो रिको के 100 से अधिक छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहेहैं.मामले में एसीएलयू न्यू हैम्पशायर के कानूनी निदेशक गिल्स बिस्नोनेट ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय छात्र हमारे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का एक अहमहिस्सा हैं. किसी भी सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वो छात्रों की स्थिति अचानक खत्म कर दे और उन्हें उनकी पढ़ाई पूरी किए बिना देश सेनिकालने की कोशिश करे.मार्च के अंत से अब तक 170 से ज़्यादा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढ़ रहे करीब 1,100 छात्रों के वीज़ा या कानूनी स्थितिको खत्म कर दिया गया. ट्रैफिक उल्लंघन को बनाया गया बहानादरअसल ये सब बिना किसी उचित सूचना के हुआ अभी और भी छात्रों के ट्रंप के इस फैसले से प्रभावित होने की संभावना है. वहीं छात्रों का कहना हैकि उन्हें न तो कोई चेतावनी दी गई न ही सफाई का मौका मिला. कुछ मामलों में तो बहुत पुराने और मामूली ट्रैफिक उल्लंघन को भी बहाना बनालिया गया.ट्रंप के इस फैसले से भारत और चीन के भी कई छात्र प्रभावित हुए है. इसमें भारत के मणिकांत पासुला, जो न्यू हैम्पशायर के रिवियरयूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स कर रहे थे. अब अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने और नौकरी की संभावना खो चुके हैं. वहीं चीन के हंगरुई झांग, जोमैसाचुसेट्स में वॉर्सेस्टर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट में पीएचडी कर रहे थे. अब अपना रिसर्च असिस्टेंट का काम नहीं कर पा रहे जो उनकी कमाई काएकमात्र जरिया था.गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन की कुछ हालिया कार्रवाइयों की वजह से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे 1,000 से ज्यादा विदेशी छात्रोंका वीजा या कानूनी दर्जा खत्म कर दिया गया है. इसके चलते अब ये छात्र न सिर्फ पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं बल्कि उन्हें देश से निकाले जाने काडर भी सता रहा है. वहीं एसीएलयू का कहना है कि सरकार ने छात्रों की कानूनी स्थिति को बिना किसी चेतावनी या उचित प्रक्रिया के खत्म कर दियाजो कि न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है.

गोरखपुर में बोले योगी आदित्यनाथ, कहा भीमराव अंबेडकर ने अभाव अपमान में अपना रास्ता बनाकर सामाजित बंधनों को तोड़ते हुए दिलायासम्मान

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भीमराव अंबेडकर ने अभाव अपमान में अपना रास्ता बनाकर सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुएसम्मान दिलाया. विपक्ष के लोग एक्पोज न हो इसके लिए जाति के नाम पर फिर से लड़ाना चाहते हैं इसके लिए महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल कररहे हैं. भारत ने संविधान निर्माण के साथ ही 1952 में अनुसूचित जाति जनजाति अति पिछड़ी जाति और महिलाओं को मत देने का अधिकार दिया. यह बाबा साहेब के कारण ही हो पाया। सीएम डॉ. भीमराव अंबेडकर सम्मान अभियान के तहत आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कररहे थे. उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता का संदेश देने वाला भारत का संविधान बाबा साहेब ने दिया. यह प्रत्येक नागरिक को सम्मान देता है. सीएमने कहा आखिर वो कौन से कारण थे जिनके कारण बाबा साहेब पीड़ित थे. बाबा साहेब ने संविधान तैयार किया,लेकिन कांग्रेस ने उसमें संशोधनकिए.इससे बाबा साहेब परेशान हुए कांग्रेस उनको संविधान सभा में नहीं भेजना चाहती थी. लेकिन उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें शामिल कियागया और ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष बने. लेकिन बाबा साहेब ने ऐसा संविधान दिया जो भारत को दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापितकरता है.समाजवादी पार्टी ने गठन के बाद किए षडयंत्रसमाजवादी पार्टी ने अपने गठन के बाद षडयंत्र किए जिसके कारण समाज में अराजकता पैदा हो. कांग्रेस ने तो 1952 के पहले आम चुनाव में बाबासाहेब को हरवाया था. उनके 78 हजार वोट को रद्द करवा दिया. 1954 के उपचुनाव में कांग्रेस ने बाबा साहेब के सचिव को तोड़कर चुनाव लड़वादिया इसमें भी वह हार गए. आज कांग्रेस के नेतृत्व करने वाले राहुल गांधी को संविधान की प्रति लेकर घूमता देखता हु तो लगता है यही कांग्रेस थीजो उनका विरोध करती थी. अपने 65 वर्षों में बाबा साहेब ने जो कर दिया वो और कोई नहीं कर पाया. कांग्रेस ने ज्यादातर समय यूपी और देश मेंशासन किया लेकिन एक भी स्मारक नहीं बनाया.इंग्लैंड के जिस भवन में रहकर बाबा साहेब ने डिग्री ली थी उसे वहां की सरकार बेच रही थी. मोदीसरकार ने उसे लेकर स्मारक बनाया. बाबा साहेब के पांच तीर्थ बनने में सपा, कांग्रेस या आरजेडी किसी का योगदान नहीं है. 26 नवंबर को संविधानदिवस के नाम से मनाया जाता है.बाबा साहेब के नाम पर भाषण देने वाले अनेक आएंगे लेकिन उनके आदर्शों पर चलने वाली केवल भाजपा है। उन्होंनेकहा था अपने अनुयायियों से की शिक्षित बनो, अन्याय के खिलाफ संगठित रहो. हैदराबाद में हिंदुओं को प्रताड़ित किया जा रहा था लेकिन बाबासाहेब ने पत्र लिख कहा था कि निजाम के सामने झुकना नहीं किसी भी हाल में इस्लाम को न स्वीकारना.

आर्थशास्र के प्रोफेसर से लेकर सीएम की कुर्सी तक, कैसे बदली झंझारपुर ने जगन्नाथ मिश्र की किस्मत “क्या है पूरी कहानी जानिए”

बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं. इस चुनावी साल में अमर उजाला बिहार और बिहार कीराजनीति, उससे जुड़ी घटनाओं और चेहरों के बारे में अलग-अलग सीरीज के जरिए बता रहा है. इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की पांचवींकड़ी में आज हम आपको झंझारपुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे. इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र हैं. उनके बेटे नीतीशमिश्र झंझारपुर के मौजूदा विधायक और नीतीश कुमार सरकार में मंत्री हैं.ये पहला चुनाव था बज कांग्रेस को झंझारपुर सीट पर हार का सामना करनापड़ा. इस बार जीत हासिल हुई संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के रामफल चौधरी को। राम फल चौधरी ने भारतीय जन संघ के राजेंद्र झा को 8665 वोट सेहरा दिया था.1972 में एक बार फिर से कांग्रेस ने इस सीट पर अपना परचम लहराया. इस बार जगन्नाथ मिश्र ने यहां से जीत दर्ज की मजेदार बात यहहै कि जगन्नाथ मिश्र एक समय मुजफ्फरपुर में स्थित बिहार यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे थे.बचपन से ही थी राजनीति में रुचि- जगन्नाथ मिश्रहालांकि नियति का चक्र ऐसा घूमा कि उनके बड़े भाई और तब कांग्रेस के कद्दावर नेता ललित नारायण मिश्र ने उन्हें राजनीति में उतार दिया. एलएनमिश्र कितने बड़े राजनीतिज्ञ थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने छोटे भाई जगन्नाथ को मुख्यमंत्री बनाने में उनकी सबसे बड़ीभूमिका थी. खुद जगन्नाथ मिश्र भी बचपन से ही राजनीति में रुचि रखते थे. सो उन्होंने प्रोफेसर की नौकरी छोड़ी और उतर गए राजनीति में जगन्नाथमिश्र के तीन बार बिहार के सीएम के तौर पर राज्य की कमान संभालने की शुरुआत यहीं से हुई. हालांकि मिश्र एक बार भी मुख्यमंत्री के तौर पर पांचसाल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके 1972 से 1995 तक जगन्नाथ मिश्र झंझारपुर के विधायक रहे.झंझारपुर से जगन्नाथ मिश्र ने कुल पांच बारचुनाव जीता था 1972 में जगन्नाथ मिश्रा ने मौजूदा विधायक सोशलिस्ट पार्टी के राम फल चौधरी को 36,542 वोट से हरा दिया था.1090 में जगन्नाथ मिश्र ने ही दर्ज की थी जीतदरअसल इसके बाद 1977, 1980, 1985, 1990 में भी इस सीट से जगन्नाथ मिश्र ने ही जीत दर्ज की. 1994 में कांग्रेस के टिकट पर जगन्नाथमिश्र को राज्यसभा भेज दिया गया. इसके बाद उन्होंने इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा. 1995 में जनता दल को सीट पर जीत मिली जनता दल केरामअवतार चौधरी ने कांग्रेस के देव चंद्र झा को 23,029 वोट से हरा दिया.2000 में हुए चुनाव में राजद के जगदीश नारायण चौधरी ने भारतीय जनकांग्रेस (राष्ट्रीय) और पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्र को 10,049 से हरा दिया था. जगन्नाथ मिश्रा के बाद इस सीट से कांग्रेस को कभीभी झंझारपुर सीट से जीत नहीं मिल पाई. हालांकि उनके बेटे नीतीश मिश्र दो बार जनता दल यूनाइटेड और फिर भारतीय जनता पार्टी के टिकट परयहां सेज जीत दर्ज कर रहे हैं. 2005 में पहली बार नीतीश मिश्र को इस सीट पर जीत मिली.

NPCI ने UPI को लेकर बताया सच, क्या 1 अप्रैल से महंगा हो जाएगा भुगतान “जानें पूरी प्रक्रिया

डिजिटल लेनदेन में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान क्‍या 1 अप्रैल से महंगा होने जा रहा है. कई मीडिया रिपोर्ट्स मेंदावा किया जा रहा है कि अगले महीने से 2000 रुपये से ज्‍यादा के यूपीआई भुगतान पर 1.1 फीसदी शुल्‍क देना होगा. हालांकि इस पर फैल रहे भ्रमको दूर करते हुए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने बाकायदा स्‍पष्‍टीकरण जारी किया है. NPCI की मानें तो यूपीआई के जरिये भुगतान आगेभी फ्री और आसान बना रहेगा. इसका ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यह पहले की तरह की पूरी तरह मुफ्त रहेगा. इससे पहले कुछ मीडियारिपोर्ट्स में कहा गया था कि 1 अप्रैल से 2000 रुपये से ज्‍यादा के लेनदेन पर 1.1 फीसदी शुल्‍क देना पड़ेगा. डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हीहिस्‍सेदारी सबसे ज्‍यादा होती है. इस कदम से यूपीआई भुगतान को बड़ा झटका लगता और इसी बात को लेकर ग्राहकों में सबसे ज्‍यादा चिंता बढ़ रहीथी. हालांकि, NPCI ने अब इस बारे में स्थिति साफ कर दी है. बैंक खाते से खाते में ट्रांजेक्‍शन की कुल हिस्‍सेदारी 99 फीसदी से ज्‍यादा है.NPCI नेट्वीट कर बताया कि यूपीआई के जरिये हर महीने करीब 8 अरब ट्रांजेक्‍शन होता है. इसका फायदा खुदरा ग्राहकों को मिल रहा है. किसी तरह का नहीं लिया जाएगा शुल्कयह सुविधा आगे भी मुफ्त बनी रहेगी और खाते से खाते में लेनदेन पर किसी तरह का शुल्‍क नहीं लिया जाएगा. इसका मतलब हुआ कि फोनपे, पेटीएम, गूगलपे (Phonepe, Paytm, Google pay) से यूपीआई भुगतान पहले की ही तरह मुफ्त बना रहेगा.NPCI ने इंटरचेंज चार्ज तय कियाहै, लेकिन यह मर्चेंट कैटेगरी पर लगाया गया है. इसकी रेंज 0.5 फीसदी से 1.1 फीसदी तक होगा. ईंधन, एजुकेशन, एग्रीकल्‍चर और यूटिलिटी पेमेंटपर 0.5 फीसदी से 0.7 फीसदी तक इंटरचार्ज देना पड़ेगा. इसके अलावा फूड शॉप, स्‍पेशल रिटेल आउटलेट पर सबसे ज्‍यादा 1.1 फीसदी काइंटरचेंज देना पड़ेगा.पीपीआई यानी प्रीपेड पेमेंट इंस्‍ट्रूमेंट एक ऐसी सुविधा है कि जिसमें 10 हजार रुपये तक का लेनदेन किया जा सकता है. इससुविधा में पहले सही रिचार्ज की तरह पैसे डाले जाते हैं और उसके जरिये सामान खरीदने या किसी को पैसे भेजने में इस्‍तेमाल किया जा सकता है. NPCI ने कहा है कि इसी तरह के भुगतान पर इंटरचार्ज शुल्‍क 1 अप्रैल से लिया जाएगा. अब पीपीआई के जरिये 2000 रुपये से ज्‍यादा का भुगतानकिया गया तो 1.1 फीसदी शुल्‍क देना पड़ेगा.

मुर्शिदाबाद हिंसा में दोनों समुदाय अब चाहते है शांति, अब है सबसे बड़ा सवाल किसने लगाई आग

पिछले करीब एक सप्ताह से हिंसा की आग में जल रहे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के धूलियान शहर में शुक्रवार को तनावपूर्ण शांति दिखी. भारीसंख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. हिंदू क्षेत्र हो या फिर मुस्लिम क्षेत्र दोनों ही जगह लोगों में भय और डर का माहौल है. दोनों समुदाय केलोग चाहते हैं शांति, भाईचारा और मिलजुल कर रहना रीना बीबी कहती हैं. पता नहीं हमारे धूलियान को किसकी नजर लग गई. घर में हम भी बंद हैं, नुकसान सभी का है. उपद्रवियों को ढूंढ़कर निकाला जाए और जो भी हो दंडित किया जाए.हिंसा के दूसरे दिन सरजू महलदार को पैर में गोली लगी।बताया कि शाम को 6 बजे की नमाज के बाद जैसे ही वह मस्जिद से निकल रहा था. इसी दौरान कहीं से गोली आई और उसके पैर में लगी. उसके पैरमें 60 टांके लगे हैं। उसका भाई हजरत देखने पहुंचो तो उसे पीठ पर किसी छर्रे जैसी किसी चीज से उसे चोट लगी. इसी तरह से इसी वार्ड के सातवर्षीय अख्तर महलदार के गर्दन में चोट लगी.धूलियान की वार्ड नंबर चार हाथीचित्रा की रीना बीबी कहती हैं पता नहीं हमारे धूलियान को किसकीनजर लग गई है. देश की ताकत है एकताहमारे देश की ताकत ही एकता में है भाईचारा हमारी सभ्यता है. धूलियान में कभी ऐसा नहीं हुआ जैसा कि पिछली शुक्रवार को हुआ. दिल दुखता हैमन भरा हुआ है. हम एक साथ मिलकर हर पर्व मनाते हैं. दीपावली में हम हिंदुओं के घर जाते हैं और ईद पर वे हमारे यहां आते हैं. उपद्रवियों कोखोजकर सजा दी जाए.आपको बाहर से शांति भले ही दिखाई दे रही हो लेकिन यह शांति सुरक्षाबलों के चलते है. पिछले शुक्रवार की घटना को यादकरते हुए वार्ड नंबर 5 की विभा अग्रवाल कहती है उस दिन की घटना याद करके जी सिहर उठता है. अगर उस वक्त घर का दरवाजा बंद नहीं होता तोहमारी लाश ही मिलती हम डर के साए में जी रहे हैं.मोहम्मद जमीरुद्दीन कहते हैं हम हिंदू और मुस्लिम हजारों सालों से एक साथ मिलकर रहते हैं. यहजो इतनी बड़ी घटना हो गई इसके लिए कौन जिम्मेदार है. अच्छे से जांच होनी चाहिए जो भी हो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. चाहे वहकिसी भी धर्म का हो हर किसी ने कुछ न कुछ खोया है. प्रशासन दें कड़ी से कड़ी सजाहम भी तो इसी धरती के हैं हम कहीं बाहर से तो नहीं आए हैं जब कोई कहता है कि मुसलमान दंगाई हैं तो दिल बहुत दुखता है. रुआंसे जमीरुद्दीनकहते हैं हमारी दुकान है. हिंदू भी हमारे कस्टमर हैं हम भी तो ईद में हिंदुओं की दुकान से सामन लाते हैं. पता नहीं क्या हो गया इसके मास्टर माइंड कोखोजे प्रशासन और कड़ी से कड़ी सजा दे. इस हिंसा ने हमारी पढ़ाई छीन ली हैजबसे हिंसा हुई है, कॉलेज बंद हैं इसलिए जा नहीं पा रही हूं. इंटरनेटबंद हैं मेरी जैसे हजारों बच्चों की पढ़ाई छीन गई है इसमें हमारा क्या दोष है अगर रास्ते में चली भी जाउं तो गोलीबारी हो रही है. सरकार से कहनाचाहती हूं कि ये सब बंद किया जाए शांति हो जाए हमको पढ़ने का मौका मिले यह सब कुछ कब तक चलेगा.

मनोज श्रीवास्तव ने की देव भूमि सम्भल की यात्रा, प्राचीन मंदिरों का किया दर्शन

संभल: भारतीय केसरिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत तिब्बत सहयोग मंच के क्षेत्र संयोजक, मनोज श्रीवास्तव ने 16 अप्रैल को देव भूमिसम्भल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के प्राचीन मंदिरों का दर्शन किया और धार्मिक स्थलों की पुनर्निर्माण गतिविधियों का अवलोकन किया। प्राचीन हनुमान मंदिर और हरियर मंदिर की परिक्रमामनोज श्रीवास्तव ने बताया कि सम्भल में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर की हाल ही में पुनः प्राण प्रतिष्ठा की गई है, जिसका उन्होंने दर्शन किया। इसकेअलावा, उन्होंने सम्भल के प्रसिद्ध हरियर मंदिर (जिसे वर्तमान में सम्भल जमा मस्जिद के नाम से जाना जाता है) की परिक्रमा भी की। श्रीवास्तव ने इसेएक ऐतिहासिक घटना बताया, यह दावा करते हुए कि वह और उनके सहयोगी संभवतः पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने 500 वर्षों के बाद इस मंदिर कीपरिक्रमा की। पुलिस चौकी का निरीक्षण और परिवारिक मित्र के साथ जलपानसम्भल यात्रा के दौरान श्रीवास्तव ने जमा मस्जिद के सामने स्थित नई पुलिस चौकी का भी निरीक्षण किया, जो अच्छे रूप से तैयार हुई है। इस यात्रा केदौरान उनके साथ वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह तोमर भी थे। बाद में, श्रीवास्तव और उनके सहयोगी सम्भल में अपने परिवारिक मित्र रूपसिंह राणा के यहां जलपान करने पहुंचे। नगीना में स्वागत और आगामी यात्रा की योजनाइसके अतिरिक्त, नगीना में कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत का आयोजन किया गया। श्रीवास्तव ने यह भी साझा किया कि यह यात्रा उनकी व्यक्तिगत यात्राथी और वह जल्द ही लखनऊ से वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सम्भल का दौरा करेंगे। देव भूमि सम्भल का महत्वमनोज श्रीवास्तव ने सभी मित्रों से निवेदन किया कि जब भी वे सम्भल का उल्लेख करें, तो उसे “देव नगरी सम्भल” के रूप में ही लिखें या बोलें। उन्होंनेइस क्षेत्र को तीर्थों का तीर्थ बताया, जहां भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी का प्रवास हुआ था और कई अन्य पवित्र स्थान स्थित हैं। श्रीवास्तव ने अपनी यात्रा का समापन “जय कल्कि भगवान की” और “जय पवित्र स्थल देव भूमि सम्भल की” के उद्घोष के साथ किया।सम्भल की यात्रा से जुड़ी आगामी योजनाएंमनोज श्रीवास्तव ने बताया कि भविष्य में, वह और उनके वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही सम्भल का दो दिवसीय दौरा करेंगे, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिकमहत्व के स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा।

पूनम ढिल्लों बनी थी 15 साल में मिस इंडिया, यश चोपड़ा के सामने रखी थी शर्तें “जानें कौन है पूनम ढिल्लों”

अगर 80 के दशक की चुनिंदा अभिनेत्रियों का जिक्र हो तो पूनम ढिल्लों की गिनती उसमें टॉप की अभिनेत्रियों में होती है. सिर्फ 16 साल की उम्र मेंअपना फिल्मी करियर शुरू करने वाली अभिनेत्री पूनम ढिल्लों फेमिना मिस इंडिया का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं. पूनम ढिल्लों ने बॉलीवुड सेलेकर टीवी सीरियल तक में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है. आज अभिनेत्री अपना 63वां जन्मदिन मना रही हैं इस मौके पर जानते हैं. उनसे जुड़ेकुछ रोचक किस्से और कैसे पूनम ढिल्लों को मिली उनकी पहली फिल्म.18 अप्रैल 1962 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मीं पूनम ढिल्लों एक ऐसेपरिवार से आती हैं जहां फिल्में ज्यादा नहीं देखी जाती हैं. पूनम ढिल्लों ने साल 1977 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब अपने नाम किया और सिर्फ16 साल की उम्र में ही बॉलीवुड में एंट्री मार दी. वो भी यश चोपड़ा जैसे निर्देशक की फिल्म से पूनम ढिल्लों ने अपने करियर में तकरीबन 90 फिल्मेंकी हैं. इस दौरान उनकी जोड़ी राजेश खन्ना के साथ कई फिल्मों में नजर आई. पूनम ढिल्लों को उनकी पहली फिल्म कैसे मिली इसके पीछे भी एकबड़ा ही रोचक किस्सा है. मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद पूनम ढिल्लों सुर्खियों में आ गईं. जब वह स्कूल में ही थीं तभी बॉलीवुड के दिग्गजनिर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा पूनम ढिल्लों के पास फिल्म ‘त्रिशूल’ का ऑफर लेकर पहुंच गए थे. हालांकि पूनम और उनका परिवार इसके लिए राजीनहीं था. यश चोपड़ा के साथ रखी थी शर्तइसलिए खुद यश चोपड़ा पूनम के परिवार से बात करने और उनके पिता को समझाने उनके घर गए थे. लेकिन पूनम ढिल्लों ने यश चोपड़ा के सामनेएक शर्त रख दी थी उन्होंने यश चोपड़ा जैसे निर्देशक के सामने शर्त रखी कि वो फिल्म की शूटिंग सिर्फ स्कूल की छुट्टियों में ही करेंगी. यश चोपड़ा नेपूनम की ये शर्त मानी और कुछ इस तरह हुई पूनम ढिल्लों की फिल्मों में एंट्री.पूनम ढिल्लों को अपनी पहली ही फिल्म ‘त्रिशूल’ में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, संजीव कुमार और हेमा मालिनी जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने का मौका मिला. इस फिल्म से जुड़ा भी एक किस्सा काफी चर्चित हैफिल्म के एक सीन में शशि कपूर को पूनम ढिल्लों को थप्पड़ मारना था. लेकिन निर्देशक यश चोपड़ा चाहते थे कि सीन ज्यादा रियल लगे इसलिएउन्होंने इस सीन के बारे में पूनम ढिल्लों को नहीं बताया. जब सीन शूट हुआ तो शशि कपूर ने पूनम ढिल्लों को सच में एकदम से तेज थप्पड़ मार दिया. पूनम ढिल्लों इससे पूरी तरह से अनजान थीं इसलिए वो अवाक रह गईं हालांकि बाद में शशि कपूर ने पूनम ढिल्लों से माफी भी मांगी थी.18 अप्रैल1962 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मीं पूनम ढिल्लों एक ऐसे परिवार से आती हैं जहां फिल्में ज्यादा नहीं देखी जाती हैं. पूनम ढिल्लों ने 1977 में खिताब किया था नामपूनम ढिल्लों ने साल 1977 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब अपने नाम किया और सिर्फ 16 साल की उम्र में ही बॉलीवुड में एंट्री मार दी. वो भीयश चोपड़ा जैसे निर्देशक की फिल्म से पूनम ढिल्लों ने अपने करियर में तकरीबन 90 फिल्में की हैं. इस दौरान उनकी जोड़ी राजेश खन्ना के साथ कईफिल्मों में नजर आई.पूनम ढिल्लों को उनकी पहली फिल्म कैसे मिली इसके पीछे भी एक बड़ा ही रोचक किस्सा है. मिस इंडिया का खिताब जीतने केबाद पूनम ढिल्लों सुर्खियों में आ गईं. जब वह स्कूल में ही थीं तभी बॉलीवुड के दिग्गज निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा पूनम ढिल्लों के पास फिल्म‘त्रिशूल’ का ऑफर लेकर पहुंच गए थे. हालांकि पूनम और उनका परिवार इसके लिए राजी नहीं था. इसलिए खुद यश चोपड़ा पूनम के परिवार से बातकरने और उनके पिता को समझाने उनके घर गए थे. लेकिन पूनम ढिल्लों ने यश चोपड़ा के सामने एक शर्त रख दी थी उन्होंने यश चोपड़ा जैसे निर्देशकके सामने शर्त रखी कि वो फिल्म की शूटिंग सिर्फ स्कूल की छुट्टियों में ही करेंगी. यश चोपड़ा ने पूनम की ये शर्त मानी और कुछ इस तरह हुई पूनमढिल्लों की फिल्मों में एंट्री.

हिमाचल के निगमों- बोर्डों के करीब 7 हजार कर्मिंयों को बड़ा झटका, सु्प्रीम कोर्ट ने कहा राज्य सरकार 1999 की पेंशन योजना को निरस्तकरने में है सक्षम

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एक फैसला किया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार कर्मचारी पेंशन, पारिवारिक पेंशन, पेंशन औरग्रेच्युटी योजना को निरस्त करने में सक्षम है. शीर्ष अदालत के इस फैसले से हिमाचल के निगमों-बोर्डों के करीब 7 हजार कर्मियों को बड़ा झटका लगाहै. शीर्ष अदालत की तीन जजों की बेंच ने बीते दिन एक याचिका खारिज कर दी जिसमें राज्य सरकार पर 11,500 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीयअसर पड़ने की बात कही गई थी.चिकाकर्ताओं ने हिमाचल स्टेट फॉरेस्ट, सिविल सप्लाई, एचपीटीडीसी, एचपीएमसी और अन्य उपक्रमों के कर्मियोंके लिए अप्रैल 1999 में शुरू की गई पेंशन योजना के तहत उन्हें लाभ देने से इन्कार किए जाने वाली अधिसूचना को चुनौती दी थी. सरकार ने वित्तीयहालत की वजह से इस योजना को वर्ष 2004 में बंद कर दिया था इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्तिउज्ज्वल भुयान ने की. सरकार इस योजना को वापस लेने के लिए है सक्षमदरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार इस योजना को वापस लेने के लिए सक्षम है और याचिका को गलत बताते हुए खारिज किया.हिमाचल प्रदेशराज्य वन विकास निगम लिमिटेड के सेवानिवृत्त कर्मियों ने यह याचिका दायर की थी. पीठ ने कहा कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों कीपीठ ने माना था कि सरकार ने पूर्ववर्ती पेंशन योजना के तहत पेंशन पाने के अधिकार में कटौती नहीं की है. लेकिन उन्हें इस योजना के तहत अतिरिक्तलाभ नहीं मिलेंगे. पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत लिए निर्णय को अनुच्छेद 32 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है. यह भीकहा कि शिकायत के लिए उचित रास्ता समीक्षा या उपचारात्मक याचिका है.पेंशनर्स संघ के सदस्य गोविंद चितरांटा ने कहा कि सरकार जब1,36,000 कर्मियों को ओल्ड पेंशन स्कीम का लाभ दे सकती है तो कॉर्पोरेशन से सेवानिवृत्त करीब 7 हजार कर्मचारी क्यों गले की हड्डी बने हैं. सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले पर अभी पेंशनर यूनियन कानूनी सलाह ले रही है उसके बाद ही आगे की रणनीति तय होगी.

60 साल की उम्र में शादी के बंधन में बंधेंगे भाजपा नेता दिलीप घोष, बोले मेरी मां चाहती थी कि मेरी भी शादी हो “मां का सपना कर रहा हूं पूरा”

पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष 60 साल की उम्र में शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं वे अपनी भाजपा की सहयोगी रिंकू मजूमदारसे शादी करने जा रहे हैं. शादी आज यानी 18 अप्रैल को कोलकाता में उनके आवास पर होने की खबर है. 60 वर्षीय भाजपा नेता अब तकअविवाहित हैं .सूत्रों के मुताबिक कुणाल घोष और देबांगशु भट्टाचार्य सहित कई तृणमूल नेताओं ने इस अवसर पर भाजपा नेता को बधाई दी.दिलीपघोष के करीबी लोगों के ने बताया कि दोनों की मुलाकात सुबह की सैर के दौरान हुई और समय के साथ उनका रिश्ता मजबूत होता गया. न्यू टाउन मेंएक निजी समारोह में दोनों की शादी होगी. जिसमें करीबी रिश्तेदार भी शामिल होंगे. कहा यह भी जा रहा है कि शादी का प्रस्ताव दुल्हन पक्ष की ओरसे दिया गया थ.पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार समेत वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने सुबह घोष के न्यू टाउन स्थित आवास पर जाकर उन्हेंशुभकामनाएं दीं. मेरी मां चाहती थी कि मैं कर लूं शादी- दिलीप घोषदरअसल उनके करीबी एक भाजपा नेता ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में आईपीएल मैच के दौरान दिलीप घोष और उनकी होने वाली पत्नीशामिल हुए थे. अब उन्होंने शादी करने का फैसला किया.इससे पहले दिलीप घोष ने कहा है कि मेरी मां चाहती थीं कि मैं शादी कर लूं इसलिए उनकीइच्छा का सम्मान करते हुए मैं विवाह बंधन में बंध रहा हूं. मैं पहले की तरह सक्रिय राजनीति में बना रहूंगा. मेरे निजी जीवन का मेरे राजनीतिक कार्योंपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. दरअसल दुल्हन का नाम रिंकू मजूमदार है रिंकू लंबे समय से भाजपा कार्यकर्ता हैं उन्होंने पार्टी की महिला शाखा ओबीसीमोर्चा, हथकरघा प्रकोष्ठ और कई अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं की जिम्मेदारी संभाली है. मजूमदार की यह दूसरी शादी है और उनका एक बेटा भी है.आएदिन अपने बयानों की वजह से जाने जाने वाले दिलीप घोष युवावस्था से ही आरएसएस के सदस्य रहे हैं. 2015 में भाजपा में सक्रिय होने से पहलेउन्होंने देश भर में विभिन्न भूमिकाओं में इसकी सेवा की. राज्य अध्यक्ष के रूप में उन्हें पश्चिम बंगाल में माकपा की जगह भाजपा को मुख्य विपक्षी दलके रूप में स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है. खड़गपुर से थे पूर्व सांसदखड़गपुर के पूर्व सांसद दिलीप घोष से अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है.बंगाल में पार्टी केपूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता दिलीप घोष का हाल ही में दिया गया बयान चर्चा में है. जब उन्होंने कथित तौर पर हिंदू समुदाय के सदस्यों से घर परहथियार रखने का आह्वान किया था. हाल ही में वक्फ कानून को लेकर हुई हिंसा के दौरान हिंदुओं के घरों को निशाना बनाए जाने की खबरें थीं. मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई थी. उत्तर 24 परगना मेंएक सार्वजनिक रैली में घोष ने कथित तौर पर कहा, ‘हिंदू टेलीविजन सेट, रेफ्रिजरेटर और नए फर्नीचर खरीद रहे हैं. उनके घर में एक भी हथियार नहींहै. जब कुछ होता है तो वे पुलिस को बुलाते रहते हैं। पुलिस आपको नहीं बचाएगी.