आईईडी हमले की धमकी: भारी उद्योग मंत्रालय को मिला ई-मेल, उद्योग भवन खाली कराकर बम निरोधक दस्ते ने शुरू की जांच

भारतीय भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों को एक गंभीर धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें मंत्रालय के उद्योग भवन को आईईडी (इम्प्रोवाइज्डएक्सप्लोसिव डिवाइस) से निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी। इस सूचना के बाद सुरक्षा प्रबंधन ने तुरंत मंत्रालय परिसर को खाली कराने कानिर्देश दिया। धमकी मिलने के बाद सुरक्षा कड़ी की गईसूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को मंत्रालय के सचिव को यह धमकी भरा ई-मेल मिला, जिसमें स्पष्ट रूप से इमारत को विस्फोट के माध्यम से नुकसानपहुंचाने की योजना का उल्लेख था। सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय सचिवालय स्थित उद्योग भवन को खाली करा लिया। बम निरोधक दस्तों ने तलाशी अभियान शुरू कियादिल्ली अग्निशमन विभाग को दोपहर 1:01 बजे धमकी भरे ई-मेल की सूचना मिली, जिसके तुरंत बाद दमकल और पुलिस की टीम घटनास्थल परपहुंची। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे गए इस ई-मेल की गंभीरता को देखते हुए बम निरोधक दस्तों ने व्यापक तलाशी शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच जारीमंत्रालय परिसर फिलहाल पूरी तरह खाली है और सुरक्षा बल द्वारा जांच जारी है। इसके साथ ही जांच एजेंसियां धमकी भेजने वाले का पता लगाने केलिए तकनीकी और साइबर जांच कर रही हैं, ताकि संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। सुरक्षा प्रबंधन और सतर्कताकेंद्रीय सचिवालय में स्थित इस संवेदनशील स्थल पर इस तरह की धमकी मिलने पर सुरक्षा व्यवस्था चौकस हो गई है। बम निरोधक टीम ने परिसरकी गहन जांच शुरू कर दी है ताकि कोई भी संदिग्ध वस्तु या खतरा जल्दी से खत्म किया जा सके। प्रशासन का संदेश और जनता से अपीलमंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से संयम बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि स्थिति पर पूरी नजर है औरहर आवश्यक कदम उठाया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। पिछले धमकियों का संदर्भपिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण संस्थानों को इस प्रकार की धमकियां मिली हैं, जिन्हें सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते रोक लिया। इस घटना से यहस्पष्ट होता है कि सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ही सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG 2025 परीक्षा एक शिफ्ट में कराने का दिया आदेश, दो शिफ्ट में परीक्षा पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG 2025 परीक्षा के संबंध में बड़ा फैसला सुनाया है। शुक्रवार, 30 मई को जारी किए गए आदेश में शीर्ष न्यायालय ने कहाकि NEET PG 2025 की परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाए, दो शिफ्ट में नहीं। कोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) कोनिर्देश दिया है कि परीक्षा एक शिफ्ट में पारदर्शिता के साथ कराई जाए और दो शिफ्ट में परीक्षा कराने से मना किया। एक शिफ्ट में परीक्षा कराने का आदेशसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 15 जून 2025 को होने वाली NEET PG परीक्षा के लिए अभी भी व्यवस्था करने का समय है। NBE को चाहिए कि वहपर्याप्त परीक्षा केंद्र ढूंढे और परीक्षा सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित करे। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि दो शिफ्ट में परीक्षा कराने से सभीउम्मीदवारों को समान अवसर नहीं मिल पाएगा क्योंकि प्रश्न पत्रों की कठिनाई स्तर में भिन्नता हो सकती है, जो निष्पक्षता के लिए नुकसानदेह होगा। NBE की दलीलों को खारिज किया गयाNBE ने कोर्ट को बताया कि उनके पास एक शिफ्ट में परीक्षा कराने के लिए पर्याप्त केंद्र उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह दलीलस्वीकार नहीं की और कहा कि आज के तकनीकी युग में पूरे देश में पर्याप्त केंद्र उपलब्ध कराना संभव है। कोर्ट ने इस बात को खारिज किया कि केंद्रोंकी कमी परीक्षा को एक शिफ्ट में कराने से रोक सकती है। न्यायाधीशों की बेंच और उनका आदेशजस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस एनवी अंजरिया की बेंच ने NEET PG परीक्षा को एक शिफ्ट में कराने का आदेश दिया। बेंचने यह भी कहा कि नॉर्मलाइजेशन को रूटीन रूप में लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि दो अलग-अलग शिफ्ट के प्रश्न पत्रों की तुलना करना मुश्किलहोता है और इसका स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एक ही शिफ्ट में परीक्षा कराने से कैंडिडेट्स के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। दो शिफ्ट परीक्षा में समानता संभव नहींसुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दो शिफ्ट में परीक्षा कराने से बराबरी का मौका नहीं मिलता क्योंकि दोनों शिफ्ट के पेपर समान कठिनाई स्तर के नहीं होसकते। कोर्ट ने माना कि पिछली बार विशेष परिस्थितियों के कारण दो शिफ्ट में परीक्षा हुई थी, लेकिन सामान्यतः यह सही नहीं है। किस्मत के बजाय योग्यता पर जोर कोर्ट की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि दो शिफ्ट में परीक्षा होने से उम्मीदवारों की किस्मत ज्यादा भूमिका निभाती है बजायउनकी काबिलियत के। NBE के वकील मनिंदर आचार्य ने बताया कि ऑनलाइन परीक्षा के दौरान 2024 में NEET UG परीक्षा में तकनीकीसमस्याएं आईं, जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन परीक्षा के लिए आवश्यक वाई-फाई, कंप्यूटर और सुरक्षा व्यवस्था केकेंद्र सीमित हैं, इसलिए दो शिफ्ट में परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कानपुर में पीएम मोदी का बड़ा एलान, 47करोड़ की परियोजनाएं लॉन्च, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दिया कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर के चंद्रशेखर कृषि विश्वविद्यालय से ₹47,574 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया।इसके साथ ही उन्होंने नयागंज स्टेशन से मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसकी पहली यात्रा में वंचित वर्ग के बच्चों को शामिल कियागया। कार्यक्रम में उन्होंने कई योजनाओं के लाभार्थियों को लाभ भी वितरित किया। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने “भारत माता की जय” के उद्घोषके साथ की। इस दौरान उनकी नजर एक बच्ची पर पड़ी, जिसके हाथ में बनाई गई एक पेंटिंग देख उन्होंने उसे मंच पर मंगवाया और कहा कि वह उसेपत्र लिखेंगे। प्रधानमंत्री ने बताया कि 24 अप्रैल को उनका कानपुर दौरा प्रस्तावित था, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण उसे स्थगित करना पड़ा।उन्होंने कानपुर के शुभम द्विवेदी की शहादत को याद करते हुए गहरी संवेदना प्रकट की और कहा कि उनकी बेटी एशान्या का दर्द और आक्रोश देश कीहर बेटी की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत की बेटियों का यही आक्रोश ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रूप में दुनिया ने देखा, जब भारतीय सेना नेपाकिस्तान के भीतर घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और भारत की आतंक के खिलाफ लड़ाई जारी है। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा किदुश्मन चाहे कहीं भी छिपा हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब भारत न तो एटम बम की गीदड़ भभकियों से डरता है और नही डर के आधार पर फैसले लेता है। भारत की नीति स्पष्ट है—हर आतंकी हमले का जवाब सेना तय करेगी, भारत आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालेराष्ट्रों को एक ही दृष्टि से देखेगा। जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री भावनात्मक रूप से भी जुड़े दिखाई दिए। उन्होंने एक बालक की ओर इशारा करते हुए उसकी मदद के लिए सुरक्षाकर्मियोंको निर्देश दिया और कानपुर के जोश को सलाम किया। कानपुर आगमन पर प्रधानमंत्री ने सबसे पहले पहलगाम हमले में शहीद शुभम द्विवेदी केपरिवार से मुलाकात की। जैसे ही पीएम उनके पास पहुंचे, शुभम की पत्नी ऐशान्या फूट-फूटकर रोने लगीं और उनके पिता की आंखें भी नम थीं।प्रधानमंत्री ने शुभम के पिता के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि वह खुदइस घटना से बेहद आहत हैं और आतंक के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। करीब 10 मिनट तक प्रधानमंत्री ने परिवार के साथ समय बिताया और उनकी बातों को ध्यान से सुना। शुभम की पत्नी ऐशान्या ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी की आंखों में दुख साफ नजर आ रहा था और उन्होंने संवेदनाओं के साथ भरोसा दिलाया कि देश इस संघर्ष में उनके साथ खड़ा है। यह मुलाकातन सिर्फ एक संवेदनशील नेता की भावना को दर्शाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आतंक के विरुद्ध भारत की लड़ाई केवल सैन्य नहीं, बल्किमानवीय भी है।
सोमनाथ शिवलिंग की पुनर्स्थापना पर विवाद, श्री रविशंकर के दावे पर ट्रस्ट ने उठाए सवाल

सोमनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग पर तलवार के घाव तो हैं, परंतु वह खंडित नहीं हुआ है। यदि प्रतिष्ठित शिवलिंग का मूल स्वरूप खंडित हो जाए, तोउसकी पूजा तो की जा सकती है, लेकिन उसे उसी रूप में पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता। यह शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है, यानी यह स्वयं प्रकटहुआ है, जिसे मानव हस्तक्षेप से पुनः निर्मित नहीं किया जा सकता। ट्रस्ट का रुख: कोई प्रमाण नहीं, कोई आधिकारिक पत्राचार नहींसोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी पी. के. लाहिड़ी ने स्पष्ट किया कि उन्हें कहीं भी यह उल्लेख नहीं मिला कि शिवलिंग का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि श्री श्री रविशंकर द्वारा प्राप्त कथित शिवलिंग के टुकड़े वास्तव में मूल शिवलिंग के हैं या नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है।उन्होंने यह भी जोड़ा कि श्री श्री रविशंकर ने न तो ट्रस्ट से कोई संपर्क किया है, न ही कोई औपचारिक जानकारी साझा की है। लाहिड़ी ने चेताया कियदि ऐसे दावे बिना किसी साक्ष्य के किए जाते हैं, तो यह जनता को भ्रमित करने जैसा है। श्री श्री रविशंकर का दावा: इतिहास की धरोहर अब प्रकाश मेंआध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का कहना है कि महमूद गजनवी ने 1026 ईस्वी में अपने अंतिम आक्रमण के दौरान सोमनाथ शिवलिंग को खंडितकर दिया था। उनका दावा है कि शिवलिंग उस समय हवा में स्थित था, न कि भूमि पर। इस घटना के पश्चात कुछ अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने खंडितशिवलिंग के पवित्र अंशों को छिपा लिया और उन्हें दक्षिण भारत ले गए। वर्ष 1924 में, ये अंश संत प्रणवेन्द्र सरस्वती द्वारा कांचीपुरम के तत्कालीन शंकराचार्य चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती को सौंपे गए। उन्होंने निर्देश दिया कि यहतब तक गुप्त रखें जाएं जब तक कि राम मंदिर का निर्माण न हो जाए। आगे चलकर ये अंश पंडित सीताराम शास्त्री के संरक्षण में रहे और बाद मेंकांचीपुरम के वर्तमान शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती के सुझाव पर श्री श्री रविशंकर को सौंप दिए गए। अंशों की पुनर्स्थापना की योजनाश्री श्री रविशंकर का कहना है कि इन अंशों को देशभर के धार्मिक स्थलों से होती हुई एक शोभायात्रा के माध्यम से सोमनाथ लाया जाएगा। इसकेउपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में पुनर्स्थापना की तिथि निर्धारित की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल ऐतिहासिक वस्तुकी पुनर्स्थापना नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। चुंबकीय रहस्य: शिवलिंग पृथ्वी से परे?रविशंकर ने यह दावा भी किया कि सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग असाधारण है क्योंकि इसकी चुंबकीय शक्ति सामान्य शिवलिंगों की तुलना में कहींअधिक, लगभग 140 गज तक है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इसमें मात्र 1 प्रतिशत लोहा है और संभवतः यह तत्व पृथ्वी से संबंधित नहीं है। ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति: एक दिव्य प्रकटप्रसिद्ध कथावाचक गिरिबापू के अनुसार, ‘ज्योति’ का अर्थ है प्रकाश और ‘ज्योतिर्लिंग’ वह है जो इस प्रकाश से भी परे हो। उन्होंने कहा कि जब ब्रह्माऔर विष्णु का अहंकार टकराया, तब भगवान शिव ने अनंत ज्योति के रूप में प्रकट होकर उन्हें उनका स्थान दिखाया। इस दिव्य प्रकाश से जो शिवलिंगप्रकट हुआ, वही ‘ज्योतिर्लिंग’ कहलाता है। शिवपुराण के अनुसार, कुल 100 करोड़ ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है, जिनमें से 12 को प्रमुख माना गया है।
हरियाणा में राज्य स्तरीय भगवान परशुराम जयंती समारोह की तैयारियां जोरों पर, पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने दिया आमंत्रण

हरियाणा के पर्यटन मंत्री अरविंद शर्माशर्मा ने भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह का न्योता देने के लिए रविवार को पानीपत का दौरा किया। उन्होंने संजय कॉलोनीस्थित भगवान परशुराम धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज सहित सभी वर्गों के लोगों से संवाद किया और 30 मई को होने वालेसमारोह में भाग लेने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री और कई प्रमुख नेता होंगे शामिलशर्मा ने बताया कि इस समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्षमोहनलाल बडौली करेंगे। साथ ही कई केंद्रीय और राज्य मंत्री, विधायक, सांसद, नगर पालिका और पंचायत प्रतिनिधि भी विशिष्ट अतिथि के रूप मेंसमारोह की शोभा बढ़ाएंगे। समारोह का उद्देश्य: सैनिकों और शहीदों को सम्मानभगवान परशुराम जयंती का यह विशेष आयोजन रोहतक जिले के पहरावर गांव स्थित गौड़ ब्राह्मण विद्या प्रचारिणी संस्था के तीसरे परिसर में कियाजाएगा। यह आयोजन 15 एकड़ भूमि में आयोजित होगा और इसे सैनिकों तथा शहीदों को समर्पित किया गया है। डॉ. शर्मा ने बताया कि यहकार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 36 बिरादरी के कल्याण और समरसता का प्रतीक भी होगा। ऐतिहासिक संस्था कर रही है आयोजनगौड़ ब्राह्मण विद्या प्रचारिणी संस्था, जिसकी स्थापना वर्ष 1904 में हुई थी, इस राज्य स्तरीय समारोह की आयोजनकर्ता संस्था है। यह संस्था लंबेसमय से ब्राह्मण समाज के हितों के साथ-साथ सर्वसमाज के लिए काम करती आ रही है। समाज के प्रमुख प्रतिनिधि रहे मौजूदपानीपत और सोनीपत में आयोजित तैयारियों के कार्यक्रमों में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें भगवान परशुराम धर्मशाला के प्रधान रामफलशर्मा, सतीश गौतम, रघुबीर सरपंच मांडी, राजू डिडवाड़ी, सुरेंद्र शर्मा सनौली, हवा सिंह, बलवान शर्मा, सतीश शर्मा और कृष्ण अत्री शामिल थे। आयोजन से जुड़ी है भावनात्मक आस्थासोनीपत के गोहाना रोड स्थित ब्राह्मण भवन और सेक्टर-7 के परशुराम आश्रम में भी समारोह की तैयारियों को लेकर आयोजन किए गए। डॉ. शर्मा नेकहा कि यह पर्व प्रदेश के हजारों परिवारों की आस्था से जुड़ा है और यह आयोजन भावनात्मक रूप से पूरे हरियाणा को जोड़ता है।
सिंदूर पर सियासत कर रही है मोदी सरकार, रागिनी नायक का तीखा हमला

रागिनी नायक ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से आज मैं एक अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दे पर संवादकरने आई हूं। आप सभी पत्रकारों का हार्दिक स्वागत है, अभिनंदन है।” सिंदूर भारतीय नारी शक्ति का प्रतीकउन्होंने कहा, “मेरे माथे की मांग में लगा सिंदूर भारत की विविधता में एकता का प्रतीक है। यह सिर्फ एक सौंदर्य प्रसाधन नहीं, बल्कि भारतीयविवाहित स्त्री के प्रेम, विश्वास, सम्मान और सौभाग्य का प्रतीक है। यह सिंदूर उस अग्नि के समान है, जो बुरी नज़रों को भस्म कर सकती है।” नरेंद्र मोदी पर सीधा हमलानायक ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पवित्र प्रतीक का राजनीतिक लाभ लेने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, “सेना की वर्दी पहन कर फोटोखिंचवाने से मोदी जी का मन नहीं भरता, अब वो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम पर देशभर में बड़े-बड़े पोस्टरों, होर्डिंग्स, ट्रेन टिकट्स और पेट्रोल पंपों तक परअपनी तस्वीर लगवा रहे हैं।”सेना के बलिदान का राजनीतिक दोहनउन्होंने सवाल उठाया, “अगर ये सचमुच सेना का अभियान था तो फिर विंग कमांडर व्योमिका सिंह, कर्नल सोफिया कुरैशी और तीनों सेनाओं के प्रमुखोंकी तस्वीरें कहां हैं? क्यों सिर्फ नरेंद्र मोदी की तस्वीरें दिख रही हैं?” सिंदूर वितरण’ पर सवालनायक ने इस बात पर हैरानी जताई कि मोदी सरकार घर-घर सिंदूर बांटने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, “एक विवाहित स्त्री को सिंदूर उसकापति देता है, या फिर शक्ति पीठों में आशीर्वाद स्वरूप मिलता है। क्या भाजपा के कार्यकर्ता अब पराए मर्दों के रूप में विवाहित स्त्रियों को सिंदूर देंगे? वो सिंदूर सुहाग का नहीं, मोदी जी के प्रचार का प्रतीक बन जाएगा।” शहीदों की विधवाओं को न्याय कब?नायक ने पहलगाम आतंकी हमले में शहीदों की विधवाओं का मुद्दा उठाते हुए पूछा, “वो सूनी मांगें चीख-चीख कर पूछ रही हैं – हमले के गुनहगारों कोकब पकड़ा जाएगा? कब मिलेगा हमें इंसाफ?” उन्होंने भाजपा सांसद रामचंद्र जांगड़ा के बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने शहीदों कीविधवाओं को ‘वीरांगना’ मानने से इनकार किया था। महिला अधिकारों पर दोहरा मापदंडउन्होंने यह भी कहा कि जब एक शहीद की पत्नी ने हिंदू-मुस्लिम एकता की बात की, तो उसे सोशल मीडिया पर ट्रोल और अपमानित किया गया। डॉ. नायक ने पूछा, “क्या अब देशभक्ति की परिभाषा केवल नफरत फैलाने तक सीमित रह गई है?” सेना नहीं, मोदी का गुणगाननायक का कहना था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का श्रेय सेना को मिलना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार इसे अपने प्रचार के हथियार की तरहइस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल किया, “अगर सेना का सम्मान ही उद्देश्य था, तो इस कार्यक्रम की शुरुआत एयरफोर्स डे या फील्ड मार्शलमानेकशॉ के जन्मदिवस से क्यों नहीं हुई? 9 जून को क्यों, जब मोदी जी ने तीसरी बार शपथ ली?” नोटबंदी, कोविड और किसान आंदोलन की विधवाएंउन्होंने सवाल उठाया कि क्या मोदी सरकार उन महिलाओं को भी सिंदूर बांटेगी जिनके पति नोटबंदी के दौरान मारे गए? या उन महिलाओं को, जिनकेपतियों की जान कोविड काल में गई? “700 किसानों की शहादत के बाद भी क्या उन विधवाओं को यह सिंदूर मिलेगा?” उन्होंने पूछा। बेरोजगारी, आत्महत्या और महंगाईनायक ने कहा, “हर दिन 154 किसान और मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं। बेरोजगारी के चलते हर साल 12,000 लोग जान गंवा रहे हैं। क्या मोदीसरकार उनके परिवारों के दरवाजे पर भी सिंदूर लेकर जाएगी?”
ठाणे से पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाला गिरफ्तार, महाराष्ट्र ATS की बड़ी कार्रवाई

आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने ठाणे से एक व्यक्ति को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। एक वरिष्ठ अधिकारीने गुरुवार को यह जानकारी दी। पकड़ा गया आरोपी मुंबई की एक महत्वपूर्ण संस्था से जुड़ा था और संवेदनशील जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंटको भेज रहा था। हनीट्रैप में फंसा आरोपी, फेसबुक से शुरू हुई बातचीतअधिकारियों के अनुसार, आरोपी को एक पाकिस्तानी एजेंट ने सोशल मीडिया के ज़रिए हनीट्रैप में फंसाया। एजेंट ने महिला बनकर फेसबुक पर उससेदोस्ती की और फिर उसे संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए उकसाया। नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच भेजी गई थी गोपनीय जानकारीATS के अनुसार, आरोपी ने नवंबर 2024 से मार्च 2025 तक व्हाट्सऐप के माध्यम से एक प्रमुख संगठन से संबंधित संवेदनशील जानकारीपाकिस्तान भेजी। यह जानकारी एक अहम संस्थान के ढांचे और संचालन से जुड़ी थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत गोपनीय मानी जाती है। गोपनीय सूचना के आधार पर की गई गिरफ्तारीठाणे एटीएस यूनिट ने गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी और दो अन्य व्यक्तियों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ के बाद, दो लोगों को छोड़दिया गया जबकि मुख्य आरोपी को सरकारी गोपनीयता अधिनियम की धारा 3 (जासूसी) और आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साजिश) केतहत गिरफ्तार किया गया है।जांच जारी, अन्य संदिग्धों पर भी नजरसूत्रों का कहना है कि छोड़े गए दो व्यक्तियों से आगे भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल एटीएस इस बात की जांच कर रही है कि क्या आरोपीकिसी व्यापक जासूसी नेटवर्क का हिस्सा था या किसी और को जानकारी लीक कर रहा था। PIO नेटवर्क का देशभर में विस्तारयह मामला उस समय सामने आया है जब भारत के विभिन्न राज्यों से पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इससेपहले राजस्थान के जैसलमेर से शाकुर खान, हरियाणा से यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा, और गुजरात के कच्छ से एक स्वास्थ्यकर्मी को इसी तरह कीगतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर पकड़ा गया था। ऑपरेशन सिंदूर’ से पहले हुई अहम गिरफ्तारीगौरतलब है कि भारत ने 7-8 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया था। ऐसेमें इस गिरफ्तारी को भारत की काउंटर-इंटेलिजेंस रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर तीखा हमला, “ऑपरेशन सिंदूर को राजनीतिक रंग देना गलत”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा है कि उन्होंने‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है। उन्होंने पीएम मोदी पर राज्य में चुनावी प्रचार के दौरानआतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया। हमने राष्ट्रहित में सहयोग किया, न कि राजनीति के लिएममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पश्चिम बंगाल ने राष्ट्रहित में पूरी तरह सहयोग किया है। “हमारे सांसद संसदीयप्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। हमने इस मुद्दे पर सरकार के साथ मिलकर काम किया, लेकिन पीएम मोदी अब इसे बंगाल में वोट बटोरने के लिएइस्तेमाल कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है,” ममता ने कहा। क्या अब ‘ऑपरेशन बंगाल’ भी होगा?टीएमसी प्रमुख ने तीखे शब्दों में पूछा, “क्या प्रधानमंत्री अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तर्ज पर ‘ऑपरेशन बंगाल’ भी चलाएंगे?” उन्होंने मोदी को चुनौती देतेहुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है, तो वे बंगाल में सीधी चुनावी टक्कर लें। ममता ने यह भी कहा कि पीएम मोदी ने जो कहा, वह न केवल चौंकानेवाला था बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी। प्रधानमंत्री मोदी का पलटवार: तृणमूल सरकार पर लगाए गंभीर आरोपइससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अलीपुरद्वार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगालआज हिंसा, भ्रष्टाचार और अराजकता से त्रस्त है। “मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में हो रही सांप्रदायिक घटनाएं यह दिखाती हैं कि टीएमसीसरकार आम जनता के दर्द और भय को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील है,” पीएम मोदी ने कहा। बंगाल बदलाव चाहता हैप्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की जनता अब इस ‘निर्मम शासन’ से मुक्ति चाहती है। उन्होंने राज्य में महिलाओं की असुरक्षा, अपराध की बढ़तीघटनाएं और सामाजिक ताने-बाने के टूटने जैसे मुद्दों को उठाया। “बंगाल बदलाव चाहता है। जनता सुशासन और शांति चाहती है, न कि हिंसा औरभ्रष्टाचार,” मोदी ने अपने संबोधन में कहा। राजनीति में सैन्य कार्रवाई को घसीटना अनुचितटीएमसी समेत कई विपक्षी दलों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई जैसे विषयों को चुनावी मंचों पर लाना बेहद निंदनीयहै। उनका कहना है कि इस तरह के राष्ट्रहित से जुड़े फैसलों का उपयोग राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भारतीय वायुसेना प्रमुख ने रक्षा खरीद में देरी पर जताई चिंता, जवाबदेही और तत्परता की उठाई मांग

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन कोसंबोधित करते हुए भारत की रक्षा खरीद प्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप सेस्वदेशी रक्षा परियोजनाओं की बार-बार देरी पर नाराज़गी ज़ाहिर की। समय पर डिलीवरी नहीं, फिर भी बार-बार वादे क्यों?एयर चीफ मार्शल सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि अधिकांश रक्षा परियोजनाएं समयसीमा के भीतर पूरी नहीं होतीं। उन्होंने सवाल उठाया किजब समय पर कोई भी परियोजना पूरी नहीं होती, तो बार-बार वादे क्यों किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार तो ऐसी परियोजनाएं शुरू कर दीजाती हैं, जिनके पूरे होने की उम्मीद ही नहीं होती। तेजस एमके-1ए डिलीवरी में देरी, एक भी विमान नहीं मिलाउदाहरण देते हुए वायुसेना प्रमुख ने बताया कि लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस Mk-1A के लिए फरवरी 2021 में HAL के साथ₹48,000 करोड़ का अनुबंध किया गया था, लेकिन अब तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है। जबकि डिलीवरी की शुरुआत मार्च 2024 से होनी थी। यह देरी वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को सीधे प्रभावित कर रही है। तेजस MK-2 और एएमसीए अभी भी अधर मेंउन्होंने यह भी जानकारी दी कि तेजस एमके-2 का प्रोटोटाइप अभी तक रोल आउट नहीं किया गया है और बहुप्रतीक्षित स्टील्थ एएमसीए फाइटर केलिए भी कोई प्रोटोटाइप अस्तित्व में नहीं है। ये सभी परियोजनाएं लगातार स्थगित होती जा रही हैं, जिससे सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया बाधितहो रही है। ‘सिर्फ उत्पादन नहीं, डिज़ाइन भी भारत में हो’एयरफोर्स चीफ ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि केवल भारत में उत्पादन की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिज़ाइनऔर अनुसंधान को भी स्वदेशी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तभी संभव है जब सेना और उद्योग के बीच भरोसेमंद सहयोगहो। भविष्य के लिए अभी से तैयारी ज़रूरीउन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उद्योग से बड़े स्तर पर उत्पादन की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन वर्तमान की जरूरतों को भी अनदेखा नहीं कियाजा सकता। “जो हमें आज चाहिए, वह आज ही चाहिए,” उन्होंने दो टूक कहा। एयर चीफ मार्शल ने स्पष्ट किया कि युद्ध केवल रणनीति से नहीं, बल्कि सशक्त सेनाओं से जीते जाते हैं। रक्षा मंत्री भी रहे मौजूदइस सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे, जिन्होंने वायुसेना प्रमुख के वक्तव्य को गंभीरता से सुना। एयर चीफ मार्शल की स्पष्ट और तथ्यआधारित टिप्पणी ने एक बार फिर भारत की रक्षा खरीद नीति में सुधार और तात्कालिकता की आवश्यकता को केंद्र में ला दिया है।
कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: सुरजेवाला बोले , MSP के नाम पर किसानों को किया गया गुमराह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में सरकार ने किसानों को लगातार धोखे में रखा है। “लागत+50% मुनाफा” का वादा सिर्फ एक चुनावी नारा बनकर रह गया है, जबकि जमीनीस्तर पर किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिला। स्वामीनाथन रिपोर्ट का नाम, पर अमल नहींसुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की जो दरेंघोषित की जा रही हैं, वे C2 लागत (जिसमें जमीन किराया, श्रम और लागत शामिल है) से 50% अधिक नहीं हैं। उन्होंने कई फसलों के उदाहरणदेते हुए बताया कि किसानों को औसतन ₹500 से ₹2,500 प्रति क्विंटल तक की कम कीमत मिल रही है। घोषणा होती है, खरीद नहींउन्होंने बताया कि 2023-24 की खरीद रिपोर्ट दर्शाती है कि वास्तविक फसल खरीद बहुत कम है। केवल धान की खरीद आधे से ज्यादा उत्पादन परहुई है, जबकि जौ, मक्का, और चना जैसी फसलों की MSP पर खरीद लगभग न के बराबर है। इससे किसानों को मंडियों में औने-पौने दाम पर फसलबेचनी पड़ रही है। महंगाई की मार, MSP में नहीं हुआ समुचित इजाफासुरजेवाला ने यह भी कहा कि सरकार जिस वृद्धि का प्रचार कर रही है, वह मुद्रास्फीति के स्तर को भी नहीं छूती। जैसे धान की कीमत को मात्र ₹69 प्रति क्विंटल बढ़ाया गया जबकि महंगाई दर के अनुसार यह वृद्धि ₹138 होनी चाहिए थी। साथ ही, डीजल के दाम बढ़ा दिए गए और खाद सब्सिडीमें ₹24,000 करोड़ की कटौती कर दी गई, जिससे किसान की लागत और बढ़ गई। न MSP की कानूनी गारंटी, न खेती पर टैक्स से राहतउन्होंने आरोप लगाया कि कृषि यंत्रों और मशीनों पर अब भी भारी GST लागू है। संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के बावजूद मोदी सरकार नेइन पर टैक्स में कोई छूट नहीं दी है। साथ ही, MSP को कानूनी अधिकार देने की अनुशंसा भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। कृषि योजनाओं में भारी राशि नहीं हुई खर्चसुरजेवाला ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने कृषि कल्याण की प्रमुख योजनाओं पर करीब ₹8 लाख करोड़ का बजट घोषित किया, लेकिन उसका 38% हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया। इसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम किसान और सिंचाई योजनाएं शामिल हैं। उन्होंनेकहा कि यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता में किसान नहीं हैं। वादे बड़े, नतीजे खोखलेकांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र सरकार का पूरा रवैया सिर्फ घोषणाओं और प्रचार पर आधारित है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि किसान आज भीआर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार MSP की कानूनी गारंटी दे, कृषि से जुड़े टैक्स खत्म करे और योजनाओं का प्रभावीक्रियान्वयन सुनिश्चित करे।