भारत में कोविड-19 की वापसी, शहरी इलाकों में केस बढ़े, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं

भारत में एक बार फिर कोरोना वायरस के मामले धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं, खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में इसकी वापसी देखी जा रही है। दिल्ली, कर्नाटकऔर आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में इस महीनेनए केस सामने आए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीन वर्षों में पहली बार कोविड के 23 नए मरीज सामने आए हैं। कोविड के लक्षण हल्के, कोई मृत्यु नहींअधिकांश संक्रमित व्यक्तियों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं और अब तक किसी भी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछालओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट JN.1 के फैलाव के कारण हो सकता है। हालांकि यह वैरिएंट तेज़ी से फैलता है, फिर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) नेइसे “विचलित करने वाला वैरिएंट” नहीं माना है। कम समय में हो रहा है ठीक होने का सिलसिलाJN.1 वैरिएंट से संक्रमित अधिकतर मरीज 3 से 4 दिनों के भीतर स्वस्थ हो रहे हैं। इनमें बुखार, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द और थकावट जैसेसामान्य लक्षण पाए जा रहे हैं। दिल्ली में बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं जैसे बेड, ऑक्सीजनसिलेंडर, टेस्टिंग किट और वैक्सीन उपलब्ध रखने के निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि यह नया वैरिएंट सामान्य फ्लू जैसा हैऔर घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में निगरानी हुई तेजराजधानी दिल्ली ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि ILI (इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी) और SARI (गंभीर श्वसन संक्रमण) के मामलों का डाटारोजाना हेल्थ पोर्टल पर साझा किया जाए। नोएडा और गाजियाबाद जैसे एनसीआर क्षेत्रों में भी नए मरीज सामने आए हैं। नोएडा में पहला केस 55 वर्षीय व्यक्ति में पाया गया जबकि गाजियाबाद में अब तक 4 संक्रमितों की पुष्टि हो चुकी है। केरल में सर्वाधिक केस, सतर्कता बढ़केरल में मई महीने में अब तक 273 मामले दर्ज किए गए हैं, जो देशभर में सबसे अधिक हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों में निगरानी बढ़ा दी है औरसार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। वहीं कर्नाटक में 35 नए केस मिले हैं, जिसमें एक नवजात भी शामिल है। गंभीर लक्षणोंवाले मरीजों को कोविड जांच की सलाह दी गई है। महाराष्ट्र में भी मामलों की पुष्टिमई में मुंबई में 95 और ठाणे में 10 नए केस दर्ज हुए हैं। मुंबई में 16 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने निर्देश दिया है कि जिन मरीजों में SARI के लक्षण हों, उनकी कोविड जांच जरूर करवाई जाए। राज्य सरकार ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं कापर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया है। आंध्र प्रदेश ने स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ कींहालांकि आंध्र प्रदेश में फिलहाल कोई बड़ा उछाल नहीं देखा गया है, फिर भी राज्य सरकार ने अस्पतालों को टीके, पीपीई किट और मास्क का पर्याप्तस्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से लौटने वाले लोगों को जांच कराने की सलाह दी गई है। अहमदाबाद में एक दिन में 20 केस मिलेगुजरात के अहमदाबाद में एक ही दिन में 20 नए कोरोना मामले सामने आए हैं। मई माह में अब तक कुल 39 केस रिपोर्ट हुए हैं, जिनमें से 8 लोगपूरी तरह ठीक हो चुके हैं। शहर के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में सबसे अधिक 10 मामले पाए गए हैं। चिकित्सकों की रायवरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रवीण गर्ग के अनुसार, फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं है औरबूस्टर डोज की अभी जरूरत नहीं है। केवल वे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उन्हें मास्क पहनने की सलाह दी जाती है। सतर्कता बनी रहे जरूरीडॉ. गर्ग का मानना है कि JN.1 वैरिएंट को लेकर भारत में फिलहाल कोई गंभीर स्थिति नहीं है, हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं कोअतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
भ्रष्टाचार का मॉडल है भाजपा का ‘गुजरात मॉडल’, मनीष सिसोदिया बोले, गुजरात में मंत्री के बेटों ने 71 करोड़ का घोटाला किया, भाजपा सरकार मौन क्यों?

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने शनिवार को भाजपा के तथाकथित ‘गुजरात मॉडल’ पर तीखा हमला बोला।उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का मॉडल करार देते हुए आरोप लगाया कि गुजरात के दाहोद ज़िले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) के तहत 71 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, जिसमें प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के बेटे और भतीजा शामिल हैं।मंत्री के बेटों ने पैसे खाए, लेकिन भाजपा चुप हैप्रेस वार्ता में मनीष सिसोदिया ने कहा कि मंत्री के बेटों ने फर्जी कंपनियां बनाकर अपने ही पिता के विभाग से ठेके लिए और काम किए बिना 71 करोड़ रुपये हड़प लिए। “अब जबकि मंत्री के दोनों बेटे और भतीजा पुलिस की गिरफ्त में हैं, भाजपा सरकार ने न तो मंत्री से इस्तीफा मांगा और न हीकोई कार्रवाई की,” उन्होंने कहा। पंजाब में AAP सरकार ने अपने विधायक को जेल भेजा, भाजपा भ्रष्टाचारियों को बचा रहीसिसोदिया ने आम आदमी पार्टी के पंजाब मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि जब वहां एक विधायक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा, तो भगवंतमान सरकार ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया। “यही है अरविंद केजरीवाल की राजनीति भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस। दूसरी तरफ, भाजपा अपने भ्रष्टनेताओं को बचाने में लगी है,” उन्होंने कहा। सिर्फ दो तहसीलों में 71 करोड़AAP नेता ने सवाल उठाया कि जब मात्र दो तहसीलों में इतना बड़ा घोटाला हो सकता है, तो पूरे गुजरात में स्थिति कितनी भयावह होगी? उन्होंनेआरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस मामले को न ईडी को सौंप रही है और न ही सीबीआई को, क्योंकि मंत्री अब भी पद पर बने हुएहैं। “कहीं ऐसा तो नहीं कि मंत्री को पद पर बनाए रखने का मकसद बाकी तालुकाओं की जांच रोकना है?” सिसोदिया ने कहा। क्या यह घोटाला मोदी-शाह की जानकारी में हुआ?सिसोदिया ने कहा कि गुजरात में बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अनुमति के कोई फैसला नहीं होता। “तो क्या यहघोटाला भी उनकी जानकारी में हुआ? क्या इसकी इजाज़त ऊपर से मिली थी? देश को जवाब चाहिए,” उन्होंने जोर देते हुए कहा। गांवों के गरीबों को न काम मिला, न मजदूरीमनरेगा का मकसद गांवों के गरीबों को रोजगार देना था, लेकिन मंत्री के बेटों ने फर्जी कंपनियों से काम उठाया और उसे किया ही नहीं। “गांव में न कोईकाम हुआ, न लोगों को मजदूरी मिली। सिर्फ कागज़ों पर काम दिखाकर पैसे हड़प लिए गए,” सिसोदिया ने बताया। एक तरफ ईमानदारी, दूसरी तरफ संरक्षणमनीष सिसोदिया ने कहा, “एक तरफ पंजाब की AAP सरकार है, जो अपने विधायक तक को नहीं बख्शती। दूसरी तरफ गुजरात की भाजपा सरकारहै, जो अपने मंत्री के बेटों की गिरफ्तारी के बावजूद मंत्री को बचा रही है। देश को तय करना है कि उसे कौन-सा मॉडल चाहिए भ्रष्टाचार का याईमानदारी का।”
Water Crisis Deepens in Delhi, LoP Atishi Writes to CM Rekha Gupta, Seeks Urgent Meeting

Amid an escalating water crisis in the national capital, Delhi Assembly’s Leader of Opposition Atishi has written a strongly worded letter to Chief Minister Rekha Gupta, slamming the BJP-led government for its “inaction and gross negligence.” Atishi has sought an urgent meeting between AAP MLAs and the Chief Minister to discuss the worsening water situation that is affecting lakhs of residents across Delhi. Capital Faces Disruption in Water Supply up to 24 HoursAtishi accused the BJP government of failing to provide basic amenities, stating that water supply in several areas has been cut off for as long as 24 hours. Despite widespread public distress, she said, the government and its ministers have maintained complete silence. “Citizens are receiving messages about water cuts, women are lining up at tankers, children are waiting with buckets, and families are buying bottled water just to survive. This is fast becoming Delhi’s new identity,” she wrote. Four-Engine BJP Government, Yet No WaterHighlighting the presence of BJP governments at multiple levels Centre, Lieutenant Governor’s office, MCD, and now the Chief Minister’s post Atishi questioned the party’s commitment to governance. “Despite a four-engine BJP government, people are still struggling for something as basic as drinking water,” she stated. She further warned that if the crisis is this dire in May, the situation could become catastrophic as temperatures continue to rise in the coming months. “Is the BJP government planning to leave Delhi’s water needs to divine forces now?” she asked sarcastically.Call for Immediate Dialogue and ActionCalling the crisis not just a logistical failure but a humanitarian issue, Atishi urged CM Rekha Gupta to meet AAP MLAs at the earliest. “This is not just an administrative shortcomingit reflects the government’s indifference to its people’s suffering,” she said. The AAP leader concluded her letter with an appeal to uphold democratic norms and engage with elected representatives to find an urgent resolution to the crisis.
प्रधानमंत्री को ‘सिंदूर का सौदागर’ कहने पर बीजेपी का विपक्ष पर तीखा हमला, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टीऔर सहयोगी दलों को घेरा

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘सिंदूर का सौदागर’ कहनेऔर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तुलना एक फिल्म से करने पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे न केवल अपमानजनक बताया बल्कि कहा कि ऐसे बयानपूरे देश को शर्मसार करते हैं। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक की याद दिला दीसचदेवा ने कहा कि संजय सिंह का बयान उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है जितना 2016 में अरविंद केजरीवाल द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगना था।उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल आतंकवाद के खिलाफ देश की निर्णायक कार्रवाई को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। पाकिस्तान की स्क्रिप्ट पर बोल रहे विपक्षी नेतादिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि संजय सिंह, संजय राउत और पवन खेड़ा जैसे नेता वे ही बयान दे रहे हैं जो पाकिस्तान के जनरल मुनीर की टीम कीस्क्रिप्ट से मिलते-जुलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टियां जानबूझकर झूठ और भ्रम फैलाकर देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कररही हैं। ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्षी राजनीति निंदनीयवीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, जो हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया, आतंकवाद के खिलाफ एकनिर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि जब देश आतंकियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं पर वार कर रहा है, तब विपक्ष का रवैया पाकिस्तान कामनोबल बढ़ाने जैसा है। राष्ट्रीय एकता पर सवाल उठाता विपक्षसचदेवा ने यह भी कहा कि भले ही भारत में राजनीतिक मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्मिता के मुद्दे पर सभी दलों को एकजुट रहना चाहिए।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शरद पवार, शशि थरूर, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता भारत सरकार के साथ खड़े हैं, लेकिनकांग्रेस, AAP और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना अपवाद हैं जो देशवासियों को शर्मिंदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री पर हमला, देश का अपमानअंत में, सचदेवा ने दोहराया कि प्रधानमंत्री पर ‘सिंदूर का सौदागर’ जैसा टिप्पणी करना न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक है बल्कि यह पूरे राष्ट्रका भी अपमान है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे जिम्मेदारी से व्यवहार करें और देश की सुरक्षा पर राजनीति न करें।
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी, बड़ी सफलता

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमा क्षेत्र गढ़चिरौली में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। ताजा जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक बड़ी कार्रवाई में चार हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया है। गढ़चिरौली में मुठभेड़, हथियार और सामान बरामदमुठभेड़ कवांडे और नेलगुंडा इलाके में हुई, जहां नक्सलियों ने जवानों पर अचानक गोलियां बरसाईं। जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए करीब दो घंटेतक चलने वाली गोलीबारी में चार नक्सलियों को ढेर कर दिया। इस दौरान जवानों ने चारों के शव के साथ एक सेल्फ लोडिंग राइफल, एक 303 राइफल, भरमार बंदूक, वॉकी-टॉकी और नक्सली साहित्य भी जब्त किया है। सर्च ऑपरेशन जारीयह ऑपरेशन डीआईजी अंकित गोयल द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद भी जारी है। इलाके में जवानों द्वारा व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा हैताकि अन्य नक्सलियों की मौजूदगी का पता लगाया जा सके और क्षेत्र को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने POCSO दोषी को दी राहत, अनुच्छेद 142 का किया प्रयोग

देश की शीर्ष अदालत ने POCSO एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए एक युवक को उसकी सजा से राहत दी है। यह फैसला तब आया जब यह पायागया कि पीड़िता, जो अब वयस्क है, दोषी से विवाह कर चुकी है और उनके एक संतान भी है। ‘यह मामला आंखें खोलने वाला है’ – सुप्रीम कोर्टजस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए फैसलासुनाया कि दोषी को अब किसी सजा का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि यह मामला हमारी विधिक प्रणाली की कमियों को उजागर करताहै और पीड़िता को समाज, कानून और अपने परिवार की विफलताओं का सामना करना पड़ा। कोर्ट की टिप्पणी: ‘समाज, कानून और परिवार – तीनों ने विफल किया’अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता को उस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ा, जिसे वह स्वयं अपराध नहीं मानती थी। कोर्ट के अनुसार, पीड़िता को सूचित विकल्प नहीं मिल पाया क्योंकि परिवार और समाज ने उसे छोड़ दिया। अब वह अपने पति और बच्चे के साथ भावनात्मक रूप सेजुड़ चुकी है और एक छोटे परिवार के रूप में जीवन व्यतीत कर रही है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट बनी फैसले का आधारसुप्रीम कोर्ट ने पहले पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया था कि वह मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री और बाल कल्याण अधिकारी की एक समितिगठित करे, जो पीड़िता के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे मेंन्यायालय को सौंपी गई, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया। कानूनी दृष्टिकोण: दोषसिद्धि कायम, लेकिन सजा से छूट20 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए आरोपी की दोषसिद्धि को POCSO की धारा 6 और IPC की धारा376(3) और 376(2)(n) के अंतर्गत बहाल कर दिया, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए सजा नहीं देने का फैसला लिया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोटिस, राज्यों को दिशानिर्देशकोर्ट ने अपने निर्णय में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भी निर्देशित किया है कि वह अमिकस क्यूरी द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर विचार करे। साथही, सभी राज्यों को POCSO एक्ट और JJ एक्ट की धाराओं के सख्त अनुपालन के लिए निर्देश भेजे गए हैं। पीड़िता के पुनर्वास हेतु निर्देश24 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता के बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए। 3 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने कहा किपीड़िता को व्यावसायिक प्रशिक्षण या अंशकालिक रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके।
डिफेंस एयरपोर्ट्स पर टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान फ्लाइट विंडो शेड्स बंद रखने के निर्देश, DGCA का नया आदेश

देश के प्रमुख डिफेंस एयरपोर्ट्स जैसे लेह, श्रीनगर, चंडीगढ़, पुणे, जामनगर और बागडोगरा से उड़ान भरने और लैंड करने वाले विमानों के लिए नागरिकउड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक नई गाइडलाइन जारी की है। इस निर्देश के तहत इन हवाई अड्डों पर टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान यात्रियोंको सीट विंडोज के शेड्स बंद रखने होंगे, सिवाय आपातकालीन खिड़कियों के। यह कदम रक्षा मंत्रालय की सिफारिश पर उठाया गया है और इसकाउद्देश्य सुरक्षा को मजबूत करना है। टेक ऑफ के दौरान 10,000 फीट तक और लैंडिंग के बाद पार्किंग तक शेड्स रहेंगे बंदनए नियमों के अनुसार, टेक ऑफ के समय जब तक विमान 10,000 फीट की ऊंचाई तक नहीं पहुंच जाता और लैंडिंग के बाद जब तक विमानसिविल टर्मिनल पर पार्क नहीं हो जाता, तब तक सभी खिड़की के पर्दे बंद रखने होंगे। DGCA ने स्पष्ट किया है कि इसका उल्लंघन करने पर यात्रियोंके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक, SOP तैयार करने के निर्देश20 मई को जारी इस आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि रक्षा ठिकानों पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है। एयरलाइंस कंपनियोंको यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्रू के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल पर आधारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करें ताकि सुरक्षा संबंधीजोखिमों को कम किया जा सके। पायलटों ने जताई चिंता, DGCA ने दी सफाईकुछ पायलटों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान विंडो शेड्स खुले रखना जरूरी होता है क्योंकि इससे बाहर कीस्थिति को देखा जा सकता है और किसी संभावित खतरे को तुरंत पहचाना जा सकता है, जैसे पक्षी के टकराने या इंजन में आग लगने जैसी घटनाएं।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आपातकालीन खिड़कियों को खुला रखने की अनुमति इन्हीं परिस्थितियों कोध्यान में रखकर दी गई है। जल्द की जाएगी आदेश की समीक्षाDGCA ने कहा है कि यह आदेश फिलहाल लागू रहेगा और एक सप्ताह के भीतर इसकी समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के बाद अगर आवश्यक हुआतो संशोधन भी किया जा सकता है।
NEET छात्र सुसाइड केस, सुप्रीम कोर्ट ने कोटा पुलिस और राजस्थान सरकार को लगाई फटकार

राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET) के एक छात्र की आत्महत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने इस गंभीर घटनाको लेकर राजस्थान सरकार और कोटा पुलिस पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने पूछा, “राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर क्या कदम उठा रही है? सिर्फ कोटा में ही छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं क्यों हो रही हैं?” FIR दर्ज न होने पर जताई नाराज़गीसुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस विशेष मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। अदालत ने कहा कि यह उसके पूर्व के आदेशों की अवमाननाहै। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर छात्र की आत्महत्या होती है, तो पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। इस मामले में लापरवाही पर कोटाके एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को 14 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है। राज्य सरकार से पूछा गया सवालपीठ ने राजस्थान सरकार से पूछा, “क्या आपने एक राज्य के रूप में इन घटनाओं पर गंभीर विचार किया है? इस मामले की जांच के लिए बनाई गईएसआईटी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?” अदालत ने चिंता जताई कि छात्रों की लगातार हो रही आत्महत्याएं एक गंभीर सामाजिक समस्या बनतीजा रही हैं। IIT छात्र की मौत का मामला भी आया सामनेसुप्रीम कोर्ट ने इसी दौरान आईआईटी खड़गपुर के एक छात्र की आत्महत्या के मामले में एफआईआर दर्ज करने में हुई चार दिन की देरी पर भी सवालखड़े किए। अदालत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पहले दिए फैसले का हवालाअदालत ने इस वर्ष की शुरुआत में दिए गए उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि छात्र की आत्महत्या के मामले में एफआईआर तुरंतदर्ज की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह इस विषय पर सख्त रुख अपना सकता है, लेकिन फिलहाल अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से बचरहा है।
भारत का कड़ा रुख, पाकिस्तान को दोबारा FATF ग्रे लिस्ट में डालने की कोशिश

भारत आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार फाइनेंशियल एक्शनटास्क फोर्स (FATF) से पाकिस्तान को पुनः ग्रे लिस्ट में शामिल करने की मांग कर रही है। यह प्रयास उस आरोप के तहत हो रहा है कि पाकिस्तानआतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में असफल रहा है। 2018 में ग्रे लिस्ट और 2022 में बाहरपाकिस्तान को 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था क्योंकि उस पर आतंकी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर काबू पाने में नाकामी काआरोप था। इसके चलते उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2022 में उसने FATF की 34-सूत्रीय कार्य योजना कोपूरा करने के बाद यह सूची छोड़ दी, जिससे IMF, विश्व बैंक और अन्य संस्थानों से आर्थिक सहायता प्राप्त करना आसान हो गया। भारत के आरोप और रणनीतिनई दिल्ली का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में हो रहा है। भारत ने FATF में पाकिस्तानको दोबारा ग्रे लिस्ट में डालने के लिए मजबूत अभियान शुरू कर दिया है। साथ ही, भारत विश्व बैंक से पाकिस्तान को दी जाने वाली संभावित सहायताका भी विरोध कर रहा है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस दिशा में कड़ा रुख अपनाया है और अन्य सदस्य देशों का समर्थन जुटानेके लिए सबूत एकत्र कर रहा है। ग्रे लिस्ट में वापसी के संभावित प्रभावअगर पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जाता है, तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। इससे विदेशी निवेश में गिरावट आसकती है और कर्ज प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक जर्जर हो सकती है। IMF की नई शर्तें और भारत का दबाववर्तमान में पाकिस्तान IMF से राहत पैकेज की अगली किस्त पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसके लिए उसे 11 नई कड़ी शर्तों का सामना करनापड़ रहा है। इनमें 17,600 अरब रुपये का नया बजट पास कराना, बिजली बिलों पर अधिभार बढ़ाना और तीन साल से पुरानी कारों के आयात परप्रतिबंध हटाना शामिल हैं। IMF ने यह भी चेताया है कि भारत के साथ तनाव से पाकिस्तान की आर्थिक योजनाओं पर खतरा बढ़ सकता है।
राहुल गांधी का ऑपरेशन सिंदूर पर हमला, भाजपा का पलटवार

राहुल गांधी के तीखे सवालकांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेश मंत्री एस. जयशंकर को निशाने पर लिया है। उन्होंने सोशल मीडियाप्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल उठाया, “विदेश मंत्री बताएं कि भारत को पाकिस्तान के साथ क्यों जोड़ा गया? कोई भी देश पाकिस्तान की आलोचना मेंहमारे साथ क्यों नहीं आया? डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाक के बीच मध्यस्थता का सुझाव किसने दिया?” राहुल ने कहा कि सरकार की विदेश नीति पूरीतरह विफल हो चुकी है। जयशंकर की सफाई15 मई को दिल्ली में होंडुरास के दूतावास के उद्घाटन के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया था कि भारत ने ‘ऑपरेशनसिंदूर’ के दौरान केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, “हमने अपने लक्ष्यों को हासिल कर लिया था और पाकिस्तान को स्पष्टसंदेश दिया कि हमला आतंकी ढांचे पर है, सेना पर नहीं। सेना चाहती तो हस्तक्षेप कर सकती थी, लेकिन हमने उन्हें विकल्प दिया कि वे तटस्थ रहें।” विदेश मंत्रालय का खंडनराहुल गांधी के आरोपों को विदेश मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि राहुल का बयान तथ्यों की गलत व्याख्या है। मंत्रालय केअनुसार, पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के बाद, आरंभिक चरण में चेतावनी दी गई थी, न कि पहले से। भाजपा का तीखा पलटवारभाजपा ने राहुल गांधी पर सशस्त्र बलों के मनोबल को गिराने का आरोप लगाया। पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी कीटिप्पणियां राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को तय करना होगा कि वे भारत के विपक्ष के नेता हैं या पाकिस्तान के एजेंडेके प्रवक्ता। उन्हें सेना की वीरता को कम आंकना बंद करना चाहिए और गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से बचना चाहिए।” ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ की उपमागौरव भाटिया ने राहुल गांधी को ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ कहकर तंज कसा और आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियों का इस्तेमाल पाकिस्तानअंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बदनाम करने में कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल बचकाना व्यवहार नहीं बल्कि देशविरोधी प्रवृत्ति है, जोशत्रुतापूर्ण देशों के हितों को बढ़ावा देती है।