महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक पल, 20 साल बाद एक मंच पर राज और उद्धव ठाकरे,‘आवाज मराठीचा’ महारैली में मराठी अस्मिता, भाषा और एकता पर हुआ जोरदार प्रदर्शन

महाराष्ट्र में शनिवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला जब ठाकरे परिवार के दो चचेरे भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे करीब 20 वर्षों के लंबेअंतराल के बाद एक ही मंच पर साथ नजर आए। यह ऐतिहासिक मिलन मुंबई के वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में ‘आवाज मराठीचा’ नामकमहारैली के दौरान हुआ। इस अवसर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य सरकार द्वारा तीन-भाषा फॉर्मूले को वापस लेने केफैसले को ‘मराठी अस्मिता की जीत’ बताया। जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखायाराज ठाकरे ने मंच से कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीति और झगड़े से बड़ा है। आज 20 साल बाद मैं और उद्धव एकसाथ आए हैं। जो काम बालासाहेब ठाकरे नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया हमें दोनों भाइयों को एक साथ ला दिया।” उनके इस बयान पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि बिना किसी का नाम लिए, जो लोग मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने कीकोशिश कर रहे हैं, वे सफल नहीं होंगे। “अगर किसी ने मुंबई पर हाथ डालने की हिम्मत की, तो मराठी मानुष की ताकत देखेगा,” उन्होंने चेतावनी दी। अचानक हिंदी थोपने की ये ज़िद क्यों?राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “अचानक हिंदी भाषा को क्यों थोपने की कोशिश हो रही है? यह कोई भाषा प्रेम नहीं, बल्किएजेंडा है। हमारे ऊपर हिंदी थोपने की कोशिश हो रही है, जो हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने दोहराया कि जब मराठी बच्चे इंग्लिश मीडियम में पढ़ते हैं तो उनकी मराठी पहचान पर सवाल उठते हैं, जबकि बीजेपी के कई नेता खुद मिशनरीस्कूलों में पढ़े, फिर उनके हिंदुत्व पर कोई सवाल नहीं उठा। “यह दोगलापन अब नहीं चलेगा,” उन्होंने कहा। बालासाहेब का स्पष्ट रुख, ‘मुख्यमंत्री सिर्फ मराठी मानुष होगा’राज ठाकरे ने एक पुराना वाकया साझा करते हुए बताया कि 1999 में जब बीजेपी-शिवसेना गठबंधन सरकार बनने वाली थी और बीजेपी नेता सुरेशजैन को मुख्यमंत्री बनाने की बात सामने आई थी, तब बालासाहेब ठाकरे ने स्पष्ट कहा था कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री सिर्फ मराठी व्यक्ति ही होगा। दक्षिण भारत से सीखो भाषा के लिए एकजुटता क्या होती हैउन्होंने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि “स्टालिन, जयललिता, कनीमोझी, ए.आर. रहमान ये सभी इंग्लिश मीडियम से पढ़े हैं, लेकिन उनकी मातृभाषा के लिए उनका प्रेम कम नहीं हुआ। रहमान ने तो एक बार हिंदी भाषण सुनकर मंच ही छोड़ दिया था।” राज ने कहा, “अगर मैं हिब्रू भी सीख लूं, तो किसी को क्या आपत्ति होनी चाहिए? असल सीख तो दक्षिण भारत से मिलती है, जहां लोग अपनी भाषाके लिए एकजुट रहते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में जाति के नाम पर लोगों को बांटा जा रहा है ताकि मराठी भाषा के लिए बनी एकता टूट जाए।” सेना की रेजीमेंट की तरह मराठी समाज भी एकजुट होराज ठाकरे ने भारतीय सेना का उदाहरण देते हुए कहा, “सेना में मराठा, बिहार, नागा रेजीमेंट हैं सब अलग हैं, पर जब युद्ध होता है तो सब एक साथभारत के लिए लड़ते हैं। वैसे ही मराठी समाज को भी एकजुट होकर अपनी भाषा और संस्कृति के लिए लड़ना चाहिए।” मीरा रोड की घटना पर संतुलित प्रतिक्रियाहाल ही में हुई मीरा रोड की घटना पर बोलते हुए राज ने कहा, “अगर किसी झगड़े में किसी को थप्पड़ पड़ गया और वो गुजराती निकला तो क्या करें? क्या माथे पर लिखा होता है कौन है? लेकिन किसी पर बेवजह हाथ न उठाओ, और कोई ज़्यादा करे तो चुप भी मत रहो। और हां, लड़ाई के वीडियोबनाना बंद करो।” उन्होंने कहा कि उनके कई गुजराती मित्र हैं जो दिल से मराठी संस्कृति से जुड़े हैं। “मैं उन्हें ‘गुज-राठी’ कहता हूं, क्योंकि वे दिल से मराठी हैं।” “सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन मराठी अस्मिता से कोई समझौता नहीं”राज ठाकरे ने भाषण के अंत में स्पष्ट किया, “सरकारें बनती और टूटती रहेंगी, गठबंधन बदलते रहेंगे, लेकिन मराठी भाषा और संस्कृति के मुद्दे पर कोईसमझौता नहीं होगा। यही बालासाहेब ठाकरे का सपना था, और यही हमारी जिम्मेदारी है।”
गोलियों का बिहार, कांग्रेस ने नीतीश सरकार को घेरा, कहा – NDA राज में कानून व्यवस्था रसातल में, हर कोने से उठ रही है ‘गुंडाराज’ कीचीख

AICC ने आज एक प्रेस ब्रीफिंग में बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश कुमार और केंद्र की NDA सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेहाल की घटनाओं और सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आज बिहार में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि राजधानी पटना की सड़कों परभी लोग सुरक्षित नहीं हैं। बीती रात पटना में एक प्रतिष्ठित डॉक्टर और हॉस्पिटल संचालक गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वेरात 11 बजे अपने घर लौट रहे थे। ये वारदात मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के आवास के करीब हुई, जिससे साफ है कि अपराधी अब किसी का खौफनहीं मानते। वहीं, इसी सप्ताह बोरिंग रोड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दिनदहाड़े ADG लॉ एंड ऑर्डर की मौजूदगी में आठ राउंड फायरिंग होना पुलिस कीनाकामी को दर्शाता है। AICC ने NCRB और पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2005 में जहां बिहार में कुल अपराध 1.07 लाख थे, वहीं 2022 मेंयह आंकड़ा बढ़कर 3.47 लाख हो गया, यानी 323% की बढ़ोतरी। पिछले 17 वर्षों में बिहार में 53,150 हत्याएं हुईं, जो यूपी के बाद देश में दूसरास्थान है। हत्या के प्रयास के 98,169 मामले दर्ज हुए हैं 262% की वृद्धि के साथ। बलात्कार, अपहरण, डकैती जैसे जघन्य अपराधों में 206% औरमहिलाओं के खिलाफ अपराधों में 336% की बढ़ोतरी हुई है। महिलाओं के अपहरण के मामलों में 1,097% और बच्चों के खिलाफ अपराधों मेंचौंकाने वाली 7,062% की वृद्धि दर्ज की गई है। दलित उत्पीड़न में बिहार देश में यूपी के बाद दूसरे स्थान पर है। सिर्फ मई-जून 2025 की घटनाओं पर नजर डालें तो बिहार हत्या और यौन अपराधों से थर्रा उठा है। बक्सर में बालू व्यवसाय को लेकर तीन भाइयोंकी हत्या कर दी गई। सहरसा में जेडीयू नेता विनोद भगत की गोली मारकर हत्या हुई। पटना के दानापुर और फतुहा में युवकों की बीच सड़क पर हत्याहुई, जबकि नालंदा—जो मुख्यमंत्री का गृह जिला है—वहां दो लोगों को गोली मारी गई। आरा में 72 घंटों में आठ लोगों को गोली मारी गई, जिनमेंतीन की मौत हो गई। बेतिया में मछली व्यवसायी की हत्या के बाद भीड़ ने पुलिस वाहन फूंक दिया। वहीं मुंगेर और अररिया में मार्च 2025 में दोASI की हत्या की गई। बच्चियों के खिलाफ हालिया जघन्य अपराधों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। पटना में नाबालिग बच्ची से गैंगरेप, मुजफ्फरपुर में 5वीं कीछात्रा की रेप के बाद गला रेतकर हत्या, छपरा में स्कूल से लौटती छात्रा का अपहरण कर सामूहिक बलात्कार और हत्या, बेतिया में ढाई साल कीबच्ची से दुष्कर्म, और सीतामढ़ी, बगहा, अररिया व मुंगेर में 11-16 वर्ष की कई बच्चियों से गैंगरेप की घटनाएं सामने आई हैं। AICC के अनुसार, बिहार में हर दिन औसतन 28 महिलाओं का अपहरण होता है और प्रतिदिन 55 महिला अपराध दर्ज होते हैं, जिनमें 98% मामले अब भी अदालतों मेंलंबित हैं। अन्य वीभत्स घटनाओं में सीतामढ़ी में पांच बच्चों को नग्न कर सड़कों पर घुमाना, कटिहार में महिला की हत्या और बच्ची के घायल होने, मधेपुरा मेंपति की हत्या कर शव को फांसी में लटकाना और नालंदा में महिला की हत्या कर सूटकेस में शव फेंकना शामिल है। राज्य में संगठित गैंगवार औरमाफिया संघर्ष भी लगातार बढ़े हैं। फरवरी में बेगूसराय में दो गैंगों के बीच 25 राउंड फायरिंग हुई। मोकामा में पूर्व विधायक अनंत सिंह से जुड़े गैंगऔर प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के बीच तीन दिनों तक गोलीबारी हुई। पंडारक में एक युवक को घर के सामने गोली मार दी गई, जबकि बांका में बालू माफियाके बीच संघर्ष में तीन लोग घायल हुए। AICC ने इन घटनाओं को ‘गोलियां उगलता NDA राज’ करार देते हुए कहा कि आज बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। जबराजधानी की सड़कों पर गोलियां चल रही हों, बच्चियों से दुष्कर्म हो रहा हो और पुलिस पर हर दूसरे दिन हमले हो रहे हों, तो यह ‘सुशासन’ नहीं बल्किखुला ‘गुंडाराज’ है। कांग्रेस ने बिहार की जनता से अपील की कि अब वक्त आ गया है जब इस अराजकता के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर, ‘बम-बम भोले’ और ‘भारत माता की जय’ से गूंजे पहलगाम और बालटाल मार्ग

जम्मू, डिजिटल डेस्क – हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत द्वारा चलाए गए सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बावजूद श्रीअमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है, बल्कि पहले से अधिक दिखाई दे रहा है। यात्रा के पहले तीन ही दिनों में जम्मू स्थित आधारशिविर से 17,549 श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम मार्ग से अमरनाथ के दर्शन के लिए रवाना हो चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने भरा जोश, श्रद्धालुओं में दिखा अभूतपूर्व उत्साहपहले यह आशंका जताई जा रही थी कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, का असर इस बारकी यात्रा पर देखने को मिलेगा। लेकिन इसके विपरीत, श्रद्धालु ‘बम-बम भोले’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ बड़ी संख्या में यात्रा मेंशामिल हो रहे हैं। रातभर भजन-कीर्तन कर श्रद्धालु पूरे जोश के साथ रवाना हो रहे हैं। हर दिन बढ़ रही संख्या, गैर-पंजीकृत श्रद्धालुओं का भी उमड़ रहा सैलाबदेशभर से भारी संख्या में श्रद्धालु जम्मू पहुंच रहे हैं। पंजीकरण की सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद सैकड़ों श्रद्धालु एडवांस टोकन से वंचित रह जा रहे हैं।शुक्रवार को करीब 6,400 श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था दो काफिलों में जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से बालटाल और पहलगाम के लिए रवानाहुआ। इनमें 4,723 पुरुष, 1,071 महिलाएं, 37 बच्चे और 580 साधु-साध्वियां शामिल हैं। दोनों मार्गों से भारी संख्या में तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शनअब तक करीब 14,000 श्रद्धालु पवित्र गुफा में हिमशिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं। इनमें से 3,622 श्रद्धालु 138 वाहनों के साथ पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से रवाना हुए, जबकि 2,789 श्रद्धालु 153 वाहनों में सवार होकर 14 किलोमीटर लंबे लेकिन कठिन बालटाल मार्ग सेयात्रा कर रहे हैं। शहीदों को दी श्रद्धांजलि, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटतापहलगाम मार्ग से यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने आतंकी हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि दी और संकल्प लिया कि वे आतंक के भय सेपीछे नहीं हटेंगे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। भगवती नगर बेस कैंप को बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। प्रशासन के इंतजाम, अब तक 3.5 लाख से अधिक ऑनलाइन पंजीकरणजम्मू में 34 आवासीय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि तीर्थयात्रियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग भी जारी किए जा रहे हैं।ऑन-स्पॉट पंजीकरण के लिए 12 काउंटर भी खोले गए हैं। इस सबके बीच, अमरनाथ यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी हुई है, बल्कि यह भारत की आतंकवाद के सामने अडिग एकता और संकल्पका भी परिचायक बन गई है।
हिमाचल में मानसून का कहर जारी-तीन दिनों में 14 बादल फटने और 3 फ्लैश फ्लड की घटनाएं, मंडी सबसे अधिक प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में मानसून ने विनाशकारी रूप ले लिया है। पिछले 72 घंटों के भीतर राज्य में बादल फटने की 14 और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की 3 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 13 घटनाएं अकेले मंडी जिले में हुई हैं। इस तबाही ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है और राहत व पुनर्वास कीचुनौतियां बढ़ा दी हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मंडी जिले में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 31 लोग लापता हैं। पांचलोग घायल हैं। गोहर, थुनाग, करसोग और जंजैहली इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटी हुईहैं। अब तक 348 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। जिले में आपदा के चलते 154 मकान पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, 31 वाहनक्षतिग्रस्त हुए हैं, दो दुकानें ढह गई हैं, 106 पशुशालाएं नष्ट हुई हैं और 14 पुल बह गए हैं। इसके अलावा, 165 मवेशियों की भी जान गई है। पूरे प्रदेश में 69 मौतें, 495 करोड़ का नुकसानपूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून जनित आपदाओं के चलते अब तक 69 लोगों की जान जा चुकी है, 110 लोग घायल हुए हैं और 37 लोग अभी भीलापता हैं। राज्य को अब तक लगभग 495 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। भूस्खलनों के कारण 246 सड़कें बंद हैं, 404 ट्रांसफार्मर ठप होचुके हैं और 784 पेयजल योजनाओं की आपूर्ति बाधित है। अब तक 250 पशु-पक्षी बह चुके हैं, 18 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 70 घरों कोआंशिक नुकसान हुआ है। 198 गौशालाएं भी प्रभावित हुई हैं। मंडी में सबसे अधिक 145 सड़कें बंद हैं, इसके बाद कुल्लू (36), सिरमौर (25) औरशिमला (22) का स्थान है। फोरलेन निर्माण से लिंडीधार गांव में खतरा बढ़ाशिमला जिले के ढली क्षेत्र स्थित लिंडीधार गांव में फोरलेन निर्माण के दौरान बन रही रिटेनिंग वॉल गुरुवार को अचानक ढह गई, जिससे सैकड़ों सेब केपौधे दब गए और पास के कई घरों पर खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय निवासी भय के कारण अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायनकरने को मजबूर हैं। लोगों ने इस हादसे के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को जिम्मेदार ठहराते हुए लापरवाही का आरोपलगाया है। मौसम विभाग की चेतावनी, भारी बारिश के आसारमौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के लिए कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, शिमला और सिरमौर जिलों में अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है। इसकेअलावा, अगले दो दिनों के लिए भारी वर्षा का येलो अलर्ट और 5 जुलाई से 9 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी कियागया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है और प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
कोलकाता गैंगरेप केस: पुलिस ने किया क्राइम सीन का रीक्रिएशन, चार आरोपी हिरासत में, मुख्य आरोपी समेत सभी से गहन पूछताछ जारी, घटनास्थल पर पांच घंटे तक चला सीन रीक्रीएशन

लॉ की छात्रा के साथ हुए कथित गैंगरेप मामले में कोलकाता पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। अब तक पुलिस ने इस मामले में मुख्यआरोपी सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने सोमवार सुबह घटनास्थल पर क्राइम सीन का रीक्रिएशन किया। इस प्रक्रिया के दौरान चारों आरोपी पुलिस के साथ घटनास्थल पर मौजूदरहे। अधिकारियों ने करीब पांच घंटे तक घटनास्थल पर सभी विवरणों की पुनरावृत्ति की, ताकि घटना की सही समयरेखा और परिस्थितियों को समझाजा सके। इसके बाद सभी आरोपियों को वापस हिरासत में ले जाया गया। घटना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, क्राइम के बाद मुख्य आरोपी मैंगो, प्रमित मुखर्जी और जैब अहमद के साथ कॉलेज से निकल गया था। अगली सुबह, एक और आरोपी मोनोजित ने कॉलेज के एक अधिकारी को फोन कर पुलिस की मौजूदगी के बारे में जानकारी ली। इसी दिन प्रमित ने एक वकील सेसंपर्क किया और कॉलेज के कुछ वरिष्ठ छात्रों से सहायता की अपील की, लेकिन उन्हें किसी से कोई मदद नहीं मिली। कोलकाता पुलिस की जांच टीम अब आरोपी छात्रों के फोन रिकॉर्ड, घटनास्थल की फॉरेंसिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले कोसुलझाने की दिशा में काम कर रही है। यह मामला शहर भर में आक्रोश का विषय बना हुआ है, और छात्र संगठनों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओंतक ने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है।
एयर इंडिया विमान हादसे पर मुआवजे को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवाद-Stewarts लॉ फर्म ने एयर इंडिया पर लगाया मुआवजा रोकने काआरोप, एयरलाइन ने आरोपों से किया इनकार

12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 भीषण हादसे का शिकार हो गई थी। इस दुर्घटना में कुल 270 लोगों कीजान चली गई थी, जिनमें 242 विमान यात्री और एक मेडिकल हॉस्टल के 29 लोग शामिल थे। प्लेन एक हॉस्टल की इमारत पर गिरा, जिससे वहांभी भारी जनहानि हुई। इस हादसे में सिर्फ एक यात्री की जान बच सकी। मुआवजे को लेकर एयर इंडिया पर गंभीर आरोपअब इस दुखद हादसे को लेकर मुआवजे पर विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन की जानी-मानी कानूनी फर्म Stewarts, जो 40 से अधिक पीड़ितपरिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही है, ने एयर इंडिया पर पीड़ितों के अधिकारों को दबाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। फर्म के वरिष्ठ वकील पीटर नीननका कहना है कि एयर इंडिया परिवारों से ऐसी वित्तीय जानकारी मांग रही है, जिसका इस्तेमाल मुआवजे की रकम कम करने के लिए किया जा सकताहै। उन्होंने इसे “अनैतिक और अपमानजनक” करार दिया और आरोप लगाया कि एयरलाइन इस तरीके से करीब 1,050 करोड़ रुपये की बचत करनाचाहती है। एयर इंडिया ने किया आरोपों से इनकारएयर इंडिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एयरलाइन का कहना है कि मुआवजे के लिए फॉर्म भरना अनिवार्य नहीं है और इसकाउद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मुआवजा सही व्यक्ति तक पहुंचे। वहीं, वकील नीनन ने अपने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि वे फॉर्म न भरेंऔर कानूनी प्रक्रिया अपनाएं। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी जांच की मांग तक पहुंच गया है। हादसे का विवरण और पीड़ितों की जानकारीफ्लाइट AI 171 में कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर शामिल थे। यात्रियों में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगालीऔर 1 कनाडाई नागरिक थे। इन यात्रियों में 103 पुरुष, 114 महिलाएं, 11 बच्चे और 2 नवजात शिशु शामिल थे। इस हादसे में गुजरात के पूर्वमुख्यमंत्री विजय रूपाणी की भी मृत्यु हो गई, जो लंदन जा रहे थे। यह हादसा न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक गहरा आघात साबित हुआ है। अब जब मुआवजे को लेकर विवाद ने कानूनीऔर नैतिक मुद्दों को जन्म दे दिया है, इस त्रासदी का न्यायसंगत समाधान तलाशना और भी आवश्यक हो गया है।
ऑपरेशन सिंदूर पर उप सेना प्रमुख का बड़ा बयान, लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह बोले – पाकिस्तान से लड़ते हुए भारत ने तीन मोर्चों पर किया सामना

ऑपरेशन सिंदूर को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसे लेकर नई जानकारियां लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में राजधानी दिल्लीमें एक कार्यक्रम के दौरान डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट एंड सस्टेनेंस) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने इस सैन्य अभियान सेजुड़ी अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि भले ही संघर्ष पाकिस्तान के खिलाफ था, लेकिन वास्तव में भारत ने तीन अलग-अलग विरोधियों कासामना किया। पाकिस्तान के साथ था चीन और तुर्की का समर्थनजनरल राहुल सिंह ने बताया कि पाकिस्तान सीधे तौर पर युद्ध के मैदान में था, लेकिन चीन ने उसे हर स्तर पर सहयोग दिया। पाकिस्तान की सेना कालगभग 81% सैन्य साजोसामान चीनी मूल का है, और इस युद्ध के दौरान चीन ने अपने हथियारों को भारत के खिलाफ एक तरह से “लाइव लैब” कीतरह परखा। इसके अलावा, तुर्की ने भी पाकिस्तान को तकनीकी और मानव संसाधन दोनों तरह से समर्थन दिया। तुर्की ने संघर्ष के समय ड्रोन औरप्रशिक्षित कर्मियों के माध्यम से पाकिस्तान की मदद की। चीन ने दी भारत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की जानकारीएक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर की बातचीत चल रही थी, तबपाकिस्तान को भारत के कुछ महत्वपूर्ण सैन्य वेक्टर्स की जानकारी थी, जो उसे चीन से मिली थी। उन्होंने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतको अपनी एयर डिफेंस प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत की रणनीतिक स्पष्टताऑपरेशन सिंदूर के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत की रणनीतिक सोच इस बार बेहद स्पष्ट थी। वर्षों पहले की तरह अब भारत केवलदर्द सहने की नीति पर नहीं चल रहा। उन्होंने कहा कि टारगेट्स के चयन में गहन तकनीकी और मानवीय खुफिया सूचनाओं का इस्तेमाल किया गया।कुल 21 संभावित लक्ष्यों की पहचान की गई, जिनमें से नौ पर हमला करने का निर्णय अंतिम चरण में लिया गया। यह निर्णय एक सोच-समझ करतय की गई रणनीति का हिस्सा था। युद्ध की समय पर रोक भी रणनीति का हिस्साउपसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक अहम बात यह थी कि भारत को हर समय रणनीतिक बढ़त बनाए रखनी थी। उन्होंने कहा, “हमें हमेशा ‘एस्केलेशन लैडर’ के शीर्ष पर रहना चाहिए। युद्ध शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे नियंत्रित करना कठिन होता है। इसलिए, युद्ध कोउचित समय पर रोकना एक बेहतरीन और सटीक रणनीतिक चाल थी।” लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के इन बयानों से स्पष्ट है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि एक गहराई से सोच-समझकर बनाई गई बहुआयामी रणनीति थी, जिसने भारत को न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी मजबूती प्रदान की।
उत्तर प्रदेश में 5000 से अधिक स्कूल बंद करने के फैसले पर लोकदल का हमला, कहा – शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला

लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्यभर में 5000 से अधिक सरकारी विद्यालयों को बंद करने की योजना को दुर्भाग्यपूर्णऔर शिक्षा विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ गरीब, ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा से दूर करेगा, बल्कि हजारोंशिक्षकों की नौकरियां भी संकट में डाल देगा। संविधान द्वारा शिक्षा को एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन भाजपा सरकार कायह कदम दर्शाता है कि उसकी प्राथमिकता में शिक्षा, बच्चों का भविष्य और शिक्षक नहीं हैं, बल्कि बजट कटौती और शिक्षा का निजीकरण है। सुनील सिंह ने मांग की है कि सरकार इस योजना को तुरंत वापस ले और सभी सरकारी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं जैसे कि योग्य शिक्षक, स्वच्छशौचालय, पुस्तकालय और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने केबजाय सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को सशक्त करना चाहिए। लोकदल ने स्पष्ट किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेगा। पार्टी अध्यक्ष ने कहा, “हम उत्तर प्रदेश केबच्चों का भविष्य अंधकार में नहीं जाने देंगे। हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, और यही हमारा वादा है।”
भाजपा ने सत्ता में आते ही पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने का लिया था फैसला, बोले- सौरभ भारद्वाज

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने राजधानी में सरकार बनाते ही पुरानीगाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय ले लिया था और अब कोर्ट के आदेश का बहाना बनाकर जनता को भ्रमित कर रही है। उन्होंने बताया कि एक मार्च को पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऐलान किया था कि 31 मार्च के बाद पुरानी गाड़ियों को पेट्रोल या डीज़ल नहींमिलेगा, जबकि जिस सीएक्यूएम आदेश का हवाला अब दिया जा रहा है, वह तो 23 अप्रैल को जारी हुआ। इससे साफ है कि निर्णय पहले ही लेलिया गया था और अब ऑटोमोबाइल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 2015 में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल से पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए थे, लेकिन तबआम आदमी पार्टी की सरकार ने जनहित को प्राथमिकता दी और ऐसे कोई कठोर प्रतिबंध नहीं लगाए। लेकिन भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के कुछही महीनों के भीतर पेट्रोल-डीज़ल आपूर्ति पर रोक लगाकर जनता को नई गाड़ी खरीदने के लिए मजबूर किया। सीएक्यूएम का आदेश भाजपा सरकार की रणनीति का हिस्सा थाउन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने केंद्र के अधीन काम करने वाले सीएक्यूएम से मिलकर पहले से ही पूरी योजना बना ली थी। इसके तहत23 अप्रैल को एक पत्र लेकर औपचारिकता पूरी की गई, जबकि मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके थे। यह दर्शाता है कि यह कदम सुनियोजित था औरइसका उद्देश्य था लाखों नई गाड़ियों की बिक्री कराना। भ्रष्टाचार की आशंका, जांच की मांगआप नेता ने मांग की कि इस पूरे निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए, क्योंकि यह एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। उन्होंने पूछा किआखिर यह योजना किसने बनाई, किन अधिकारियों या नेताओं की भूमिका थी, और किसे आर्थिक लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। थ्री व्हीलर नीति पर भी यू–टर्नसौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि सरकार बनने के बाद भाजपा ने थ्री व्हीलर वाहनों पर भी ऐसा ही तुगलकी आदेश जारी किया था, जिसके तहतकेवल इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर की अनुमति दी गई और पुराने वाहन हटाने की कोशिश की गई। लेकिन ऑटो चालकों के विरोध के बाद सरकार को वहनिर्णय भी वापस लेना पड़ा। जनता के विरोध के बाद यू–टर्नउन्होंने कहा कि भाजपा मंत्री ईंधन प्रतिबंध को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे थे और जनता पर धौंस जमाई जा रही थी। लेकिन जैसे हीदिल्लीवासियों ने विरोध किया, सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा और पुरानी गाड़ियों पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि 03 जुलाई को मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा सीएक्यूएम को लिखा गया पत्र केवल लीपापोती है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
AAP Spokesperson Priyanka Kakkar Named Co-President of BRICS CCI Women’s Wing for 2025–27, Priyanka Kakkar to Lead Global Women’s Empowerment Initiatives Through BRICS Platform

In a major achievement highlighting Aam Aadmi Party’s growing international footprint, Chief Spokesperson Priyanka Kakkar has been appointed Co-President of the Women’s Wing of the BRICS Chamber of Commerce and Industry (BRICS CCI) for the 2025–2027 term. The BRICS CCI, a not-for-profit institution promoting economic cooperation among BRICS+ nations including Brazil, Russia, India, China, South Africa, Iran, Egypt, UAE, Ethiopia, and Indonesiaselected Kakkar for her strong leadership credentials and dedication to empowering women. In its official communication, BRICS CCI acknowledged her outstanding contributions and stated“Your exceptional leadership, commitment to inclusivity, and dedication to the cause of women’s advancement make you the perfect choice for this position. As Co-President, you will play a vital role in shaping strategic initiatives, mentoring aspiring women leaders, and furthering our mission to create a more inclusive and opportunity-rich environment across BRICS nations.” The organization emphasized that the appointment will run from 2025 to 2027 and expressed confidence in her ability to enhance the Women’s Wing’s reach and impact. Over the years, BRICS CCI has seen significant growth, expanding its network, launching new country chapters, and building global partnerships across industries. Priyanka Kakkar’s appointment is not only a personal milestone but also a proud moment for the Aam Aadmi Party, marking its representation at one of the world’s foremost multilateral economic forums.