BJP Stages Inspirational Play on Syama Prasad Mookerjee’s Life

The Delhi unit of the Bharatiya Janata Party today hosted the first performance of the play “Rashtravaad ke Aadipurush”, a theatrical production centered on the life and legacy of Bharatiya Jana Sangh founder and former Union Minister Syama Prasad Mookerjee. The event took place at the prestigious Kamani Auditorium in New Delhi. Senior BJP Leadership Graces the OccasionBJP National President Shri Jagat Prakash Nadda and Delhi Chief Minister Smt. Rekha Gupta attended the performance along with several senior leaders, MLAs, councillors, and enthusiastic party workers. Welcoming the National President, Delhi BJP President Shri Virendra Sachdeva presented him with a bouquet and memento. Shri Nadda commended the Delhi BJP team for effectively communicating Mookerjee’s nationalist vision through an artistic medium that resonates with the public. A New Cultural Beginning for the CapitalAddressing the audience from the stage, Chief Minister Rekha Gupta said, “By presenting ‘Rashtravaad ke Aadipurush’, we have taken a distinctive step forward. Our mission is to bring Dr. Mookerjee’s nationalist ideology to every citizen of Delhi She emphasized that Dr. Mookerjee’s ideals and his supreme sacrifice for the integration of Jammu and Kashmir into India will inspire future generations for years to come. Bringing History Alive Through TheatreDelhi BJP President Virendra Sachdeva, who conceptualized the production, said the play aimed to present Mookerjee’s journey from his academic brilliance to his political ideology and commitment to national unity in a clear and relatable format. He noted that the production involved a dedicated team of 75 members, including 58 artists from the National School of Drama and Shriram Kala Kendra, a lead director, and 16 technical staff. Dr. Sumit Bhasin played a crucial role in managing the arrangements, with active support from the Yuva Morcha, Purvanchal Morcha, and the party’s Media Cell. Notable Leaders in AttendanceAmong the key attendees were Union Minister of State Shri Harsh Malhotra, Delhi Assembly Speaker Shri Vijender Gupta, Delhi Minister Sardar Manjinder Singh Sirsa, MP Shri Ramvir Singh Bidhuri, Ms. Bansuri Swaraj, and senior BJP leaders Shri Ashish Sood, Shri Vinay Sahasrabuddhe, and Shri Shyam A Creative Tribute to a Nationalist IconThe play “Rashtravaad ke Aadipurush” stands as a powerful tribute to Dr. Syama Prasad Mookerjee’s contributions to India’s nation-building journey. Through the medium of theatre, the Delhi BJP has not only honored a historic figure but also ignited a renewed commitment to spreading his ideas among the public. #SyamaPrasadMookerjee #RashtravaadKeAadipurush #BJPDelhiEvent
हिंदी भाषा पर गुंडागर्दी बर्दास्त नहीं की जाएगी – रुपेश कुंवर

राष्ट्रीवादी जानलोक पार्टी सत्य के नेताओं ने महराष्ट्र मे हो रहे हिन्दी भाषा पर हिन्दुओ के साथ गुंडागर्दी पर आक्रोश दर्ज कराया, पार्टी प्रवक्ता कुंवररुपेश ने कहा की विरोध करना है तो अंग्रेजी का करे 65 करोल से जायदा हिन्दी बोलने वालो का अपमान करना देश द्रोह है। अगर राज ठाकरे मेहिम्मत है तो तमिल एवं बॉलीवुड फिल्म से लेकर अंग्रेजी भाषा का बहिष्कार करे। हिन्दी बोलने वालो का अपमान करना राज ठाकरे के गुंडों को बहुतभारी पर सकता है?रुपेश कुंवरबिहार प्रदेश प्रवक्ताराष्ट्रवादी जानलोक पार्टी सत्यशैर सिंह राणा
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन, जोधपुर AIIMS में ली अंतिम सांस

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता दाऊलाल वैष्णव का मंगलवार, 8 जुलाई 2025 को निधन हो गया। 81 वर्षीय दाऊलाल वैष्णव पिछलेकुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और उन्हें एम्स जोधपुर में भर्ती कराया गया था, जहां वे उपचाराधीन थे। एम्स जोधपुर ने जारी किया आधिकारिक बयानएम्स जोधपुर प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “हमें यह अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि रेल मंत्री अश्विनीवैष्णव के पिता श्री दाऊलाल वैष्णव (81) का आज दिनांक 08 जुलाई 2025 को पूर्वाह्न 11:52 बजे निधन हो गया।” बयान में आगे कहा गया कि वे कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और हर संभव चिकित्सीय प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल और परिवार की ओर से संवेदनाएंएम्स जोधपुर प्रशासन ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। अंतिम संस्कार की जानकारी का इंतजारपरिवार की ओर से अंतिम संस्कार से जुड़ी कोई औपचारिक सूचना अभी साझा नहीं की गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद अपने पिता को देखनेके लिए जोधपुर पहुंचे थे और एम्स में समय बिताया। पूरा देश शोक मेंदेशभर से राजनेताओं, अधिकारियों और आम लोगों ने इस दुखद घटना पर शोक जताया है और परिवार को इस कठिन समय में शक्ति मिलने कीकामना की है।
तमिलनाडु में बड़ा हादसा, रेलवे ट्रैक पार करते वक्त ट्रेन की टक्कर से स्कूल वैन के दो छात्रों की मौत, चार घायल, कडलूर जिले में हुआ हादसा, वैन को ट्रेन ने मारी टक्कर

तमिलनाडु के कडलूर जिले के सेम्मानकुप्पम गांव में मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। एक स्कूल वैन रेलवे ट्रैक पार करतेसमय तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आ गई। हादसे में दो बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। स्कूल वैन पर सवार थे पांच बच्चेघटना सुबह करीब 7:45 बजे की है जब स्कूल वैन कुड्डालोर और अलप्पक्कम के बीच स्थित लेवल क्रॉसिंग गेट नंबर 170 को पार करने की कोशिशकर रही थी। यह गेट “नॉन-इंटरलॉक” (गैर-स्वचालित) था। वैन में पांच छात्र सवार थे, जो स्थानीय स्कूल जा रहे थे। जैसे ही वैन रेलवे ट्रैक पर पहुंची, ट्रेन संख्या 56813 विल्लुपुरम-मयिलादुथुराई पैसेंजर ने उसे टक्कर मार दी। 50 मीटर तक घसीटती गई वैनप्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रेन की टक्कर के बाद वैन करीब 50 मीटर तक पटरी पर घसीटती चली गई। मौके पर ही दो छात्रों की मौत हो गई, जबकि घायल बच्चों को तुरंत कडलूर जिला सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। रेलवे की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला खुलासारेलवे की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के वक्त गेटमैन गेट बंद करने की प्रक्रिया में था, लेकिन स्कूल वैन चालक ने जल्दबाज़ी करते हुएजबरन गेट को पार करने की कोशिश की। इसी लापरवाही के कारण वैन ट्रेन की चपेट में आ गई। जांच के लिए रेलवे ने गठित की समितिरेलवे प्रशासन ने घटना की जांच के लिए सुरक्षा, संचालन और इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारियों की संयुक्त समिति का गठन कर दिया है। समितियह पता लगाएगी कि सुरक्षा मानकों में कोई चूक हुई या फिर चालक की लापरवाही इसके लिए जिम्मेदार थी। इलाके में फैला मातमघटना के बाद से सेम्मानकुप्पम गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजन और ग्रामीणों ने रेलवे अधिकारियों से गैर-स्वचालित गेट को जल्द इंटरलॉक करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
कांवड़ यात्रा पर यूपी सरकार की दो टूक, दुकानों को ढकने के निर्देश नहीं, शुचिता बनी रहे बोले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने किया स्पष्ट, कोई सरकारी आदेश नहींउत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के मार्ग पर शराब की दुकानों को ढकने के संबंध में चल रही अटकलों पर अब सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है।आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि राज्य सरकार ने इस विषय में कोई निर्देश जारी नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट कियाकि शराब की दुकानों को ढकने या न ढकने का निर्णय संबंधित जिलाधिकारी की विवेकाधीन शक्ति पर निर्भर करेगा। डीजीपी की बैठक, सुरक्षा से लेकर डीजे तक हर बिंदु पर मंथनइसी कड़ी में यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण मेरठ कमिश्नरी पहुंचे, जहां कांवड़ यात्रा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। इस बैठक में उत्तर प्रदेशके वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख सचिव संजय प्रसाद, और पड़ोसी राज्यों – दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड – के पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। राजस्थान केअधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। बैठक में यात्रा मार्ग की सुरक्षा, यातायात के रूट डायवर्जन, डीजे बजाने के नियम और कानून व्यवस्थापर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश: शुचिता से कोई समझौता नहींमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पवित्र यात्रा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने गाजियाबाद से बिजनौर तक हेलीकॉप्टर से यात्रा मार्ग काहवाई निरीक्षण किया। अधिकारियों को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा की पवित्रता भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफकठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से खानपान सामग्री को अपवित्र करने जैसे कृत्य पूरी तरह अस्वीकार्य होंगे। यात्रियों की सुविधा सर्वोपरि: सफाई और बिजली पर विशेष जोरमुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ मार्ग पर सफाई व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति और प्रकाश की उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह कीअसुविधा न हो। प्रशासन से यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाए रखने, श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने तथा धार्मिक आस्था का सम्मान बनाएरखने के निर्देश दिए गए हैं।
बिहार सरकार का बड़ा फैसला: अब केवल मूल निवासी महिलाओं को मिलेगा 35% आरक्षण, कैबिनेट बैठक में डोमिसाइल नीति को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा अहम फैसला लिया गया। अब राज्य कीसरकारी नौकरियों में केवल बिहार की मूल निवासी महिलाओं को ही 35% आरक्षण का लाभ मिलेगा। इससे पहले यह आरक्षण सभी राज्यों कीमहिला अभ्यर्थियों के लिए लागू था, लेकिन अब बाहरी राज्यों की महिलाएं इस दायरे से बाहर हो जाएंगी और उन्हें सामान्य श्रेणी में आवेदन करनाहोगा। महिलाओं के लिए लक्षित नीतिसरकार का तर्क है कि यह कदम बिहार की महिलाओं को सरकारी नौकरी के क्षेत्र में अधिक अवसर देने के लिए उठाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीशकुमार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम पहल करार देते हुए कहा कि इससे महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति कोमजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य में महिला रोजगार को बढ़ावा देगा। दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए प्रोत्साहन योजनाकैबिनेट ने एक और अहम निर्णय में दिव्यांग अभ्यर्थियों को यूपीएससी और बीपीएससी की मुख्य परीक्षा व इंटरव्यू की तैयारी के लिए आर्थिकसहायता प्रदान करने का फैसला लिया है। बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास करने वालों को ₹50,000 और यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करनेवालों को ₹1 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। किसानों को सिंचाई के लिए डीजल अनुदानबारिश की कमी को देखते हुए कैबिनेट ने किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है। डीजल अनुदान योजना के तहत किसानों को सिंचाई केलिए प्रति एकड़ ₹2250 तक की सहायता मिलेगी। यह अनुदान अधिकतम 8 एकड़ तक सीमित होगा। इसके लिए ₹100 करोड़ की राशि स्वीकृतकी गई है। राजनीतिक समीकरणों पर असरराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला चुनावी वर्ष में नीतीश कुमार की एक रणनीतिक चाल हो सकती है। महिलाओं को लेकर उनकेद्वारा लिए गए फैसले पहले भी उन्हें मजबूत समर्थन दिलाते रहे हैं। इस बार भी एनडीए को महिला मतदाताओं में लाभ मिलने की संभावना जताई जारही है। विपक्ष को जवाब और नई पहलइस निर्णय के जरिए सरकार ने राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा डोमिसाइल नीति के वादे को भी मात देने का प्रयास किया है। साथ ही सरकार ने बिहारयुवा आयोग के गठन को भी मंजूरी दी है, जो राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण से जुड़ी योजनाओं को गति देगा। स्थानीय महिलाओं को मिलेगा लाभडोमिसाइल आधारित आरक्षण नीति से बिहार की स्थानीय महिलाओं को नौकरियों में प्राथमिकता मिलने की संभावना है। हालांकि बाहरी राज्यों कीमहिला अभ्यर्थियों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण का लाभ केवल प्रमाणित बिहार मूलनिवासी महिलाओं को ही मिलेगा।
मनसे का मराठी भाषा विवाद पर प्रदर्शन, ‘थप्पड़ कांड’ की गूंज से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई, मुंबई में थप्पड़ कांड के बाद राजनीति गरमाई

मुंबई में हाल ही में सामने आए ‘थप्पड़ कांड’ ने महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल ला दिया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) इस मुद्दे पर सरकार कोलगातार घेर रही है और अब पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब मनसे कार्यकर्ताओं ने मराठी भाषा में संवाद न करनेको लेकर मीरा रोड इलाके में एक दुकानदार पर हमला कर दिया। ठाणे में विरोध मार्च, मनसे कार्यकर्ता हिरासत मेंराज ठाकरे की पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को ठाणे के मीरा रोड में विरोध मार्च निकाला। हालांकि पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहींदी थी, बावजूद इसके कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और पुलिस वैन में बैठाकर थाने ले गई। इस दौरान विरोधकरते कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब व्यापारियों को विरोध की अनुमति दी गई, तो उन्हें क्यों रोका गया? दुकानदार पर हमला, वजह – हिंदी में बात करनाइस विवाद की शुरुआत रविवार देर रात उस समय हुई जब मीरा रोड में ‘जोधपुर स्वीट शॉप’ के मालिक बाबूलाल चौधरी पर मनसे के सातकार्यकर्ताओं ने हमला किया। आरोप है कि चौधरी के कर्मचारी बाघराम ने कार्यकर्ताओं से हिंदी में बात की, जिससे वे नाराज़ हो गए। कार्यकर्ताओं नेदुकान मालिक से कहा कि वे मराठी में बात करें, अन्यथा “परिणाम भुगतने होंगे।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससेभाषा विवाद और तेज हो गया। मनसे का बयान , ‘हर किसी को मराठी सीखनी चाहिए’हिरासत में लिए गए मनसे कार्यकर्ताओं ने मीडिया से कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगरकोई मराठी में बात नहीं करेगा, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। सीएम फडणवीस का बयान ‘प्रदर्शन की अनुमति नहीं रोकी गई’इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सफाई देते हुए कहा कि पुलिस ने मनसे के विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं रोकी थी। वहीं, पुलिस काकहना है कि मनसे को जिस रूट पर मार्च निकालने की योजना थी, उस पर अनुमति नहीं दी गई थी। भाषा विवाद फिर चर्चा में, राजनीतिक माहौल तनावपूर्णइस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र में भाषा विवाद को एक बार फिर हवा दे दी है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जबकिजनता के बीच भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं विभाजित नजर आ रही हैं।
₹43,000 Crore Market Manipulation by Jane Street Exposes SEBI’s Regulatory Failure Under Modi Govt

Under the Modi government, yet another institution stands discreditedthis time, SEBI, the market regulator, whose role has come under serious scrutiny after the exposure of a massive market manipulation scam involving American high-frequency trading firm Jane Street. This firm, notorious globally for exploiting derivatives markets, allegedly made over ₹43,289 crore in gross profits in India’s Futures and Options (F&O) segment between January 2023 and March 2025. Of this, ₹36,502 crore is now considered illicit profit by SEBI, which acted only in July 2025, after over four years of regulatory silence. SEBI’s belated 105-page interim order banned Jane Street and four affiliates from trading and froze ₹4,844 crore just a fraction of the money siphoned. This action came after examining only 18 days of trading data, implying the actual scale of manipulation could be far greater. Despite repeated warnings from Opposition leader Rahul Gandhi to regulate the volatile F&O market and protect small investors, the Modi government and SEBI took no action. As a result, lakhs of retail investors lost money, while Jane Street exploited price manipulation techniques such as “marking the close” in equity markets to benefit in options trading. Stocks like HDFC Bank, ICICI Bank, and Axis Bank were targeted, and on one single day January 17, 2024 the firm allegedly made ₹735 crore in profit. According to SEBI’s own 2024 report, 93% of retail investors lost money in derivatives trading over FY2021–FY2024, with ₹52,400 crore lost in FY2024 alone. Yet this massive manipulation went unchecked for years. Jane Street began operations in India in 2020 by setting up two local entities and routing trades through foreign portfolio investors from Hong Kong and Singapore. Its trades manipulated the market in both the cash and F&O segments, exploiting legal and regulatory loopholes while SEBI looked away. Worse still, nearly 90% of the profits were quietly repatriated abroad. SEBI issued only a caution letter in February 2025, and NSE closed its internal probe in April 2025, allegedly relying on Jane Street’s Indian partner Nuvama Wealth’s explanations. It wasn’t until July that any real action was taken, long after the damage was done. This raises serious questions: Who authorized Jane Street’s massive capital inflows and high-frequency operations in India? Why were red flags ignored despite the firm admitting in a U.S. court in 2023 that it made $1 billion in India that year? Why did SEBI, NSE, the Finance Ministry, and agencies like ED, CBI, and SFIO remain silent? How much money did Jane Street move abroad, and why wasn’t it taxed despite India’s double taxation agreement with the U.S. allowing such income to escape Indian taxation? And what explains the inaction of SEBI under Chairperson Madhabi Puri Buch, who held a senior regulatory role throughout this period? Meanwhile, Prime Minister Modi and Home Minister Amit Shah, who frequently projected themselves as stock market experts during the 2024 elections, have gone silent. The broader picture shows a disturbing pattern where foreign speculators enrich themselves while retail investors lose their life savings—and institutions meant to protect them remain inactive or complicit. Whether it was the Adani-Hindenburg episode or this Jane Street scandal, the trend is clear: cronyism thrives while ordinary Indians bear the losses. And SEBI, the supposed watchdog of Indian markets, appears more like a gatekeeper for the powerful.
आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा हमला, आतिशी ने 10 साल पुरानी गाड़ियों के मुद्दे पर कानून लाने की मांग की

आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा सरकार पर जमकरनिशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 10 साल पुरानी गाड़ियों पर लगे प्रतिबंध ने मिडिल क्लास, महिलाओं और बुजुर्गों को बुरी तरह प्रभावितकिया है। भाजपा इस संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का बहाना बनाकर जनता को गुमराह कर रही है। सुप्रीम कोर्ट की आड़ लेकर बचना चाहती है भाजपाआतिशी ने कहा कि भाजपा बार-बार कह रही है कि वह सुप्रीम कोर्ट जाएगी, जबकि उसका असली मकसद है कि अदालत उनकी याचिका खारिजकर दे और फिर वे कोर्ट के फैसले की आड़ में जनता को जवाब देने से बच सकें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब भाजपा को अपने हित मेंफैसला चाहिए होता है तो वह अध्यादेश लाकर या कानून बनाकर तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन जब बात आम जनता की आती है, तो वह अदालतकी आड़ में छिप जाती है। अगर भाजपा विधानसभा सत्र बुलाती है तो ‘आप’ देगी समर्थनआतिशी ने साफ कहा कि आम आदमी पार्टी विधानसभा के विशेष सत्र का समर्थन करेगी यदि भाजपा 10 साल पुरानी गाड़ियों को बचाने के लिएकोई कानून लाना चाहती है। उन्होंने भाजपा से यह भी मांग की कि वह एक सप्ताह के भीतर इस मसले पर कोई ठोस कानूनी कदम उठाए। महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के सवाल पर भाजपा को घेराप्रेस वार्ता में आतिशी ने कहा कि दिल्ली में महिलाएं सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी वाहन का इस्तेमाल करना चाहती हैं, लेकिन भाजपा की नीतियों ने उनके लिए यह रास्ता भी बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने न केवल सार्वजनिक परिवहन में मार्शल हटाएबल्कि महिलाओं और बुजुर्गों की जरूरतों की अनदेखी भी की। मिडिल क्लास की आर्थिक हालत को झटकाआतिशी ने कहा कि आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से सेकंड हैंड गाड़ी खरीदता है ताकि परिवार की जरूरतें पूरी हो सकें। लेकिन भाजपा कीनीतियों के चलते उन्हें नई गाड़ी खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है, जिससे 62 लाख परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदमवाहन निर्माता कंपनियों, डीलरों और स्क्रैपिंग कारोबारियों को फायदा पहुंचाने की साजिश है। ‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’ जैसा नाटक कर रही है भाजपासीएक्यूएम को पत्र लिखने के मुद्दे पर तंज कसते हुए आतिशी ने कहा कि भाजपा की दिल्ली सरकार, भाजपा की केंद्र सरकार की ही संस्था को चिट्ठीलिख रही है। यह ‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’ जैसा ड्रामा है जिसमें खुद ही चिट्ठी लिखी जाती है और खुद ही जवाब दिया जाता है। कानून लाकर ही हट सकती है पुरानी गाड़ियों पर तलवारआतिशी ने कहा कि इस समय लाखों परिवारों के सिर पर यह डर मंडरा रहा है कि किसी भी दिन उनकी गाड़ी जब्त हो सकती है, पेट्रोल पंप पर फ्यूलन मिले, या भारी जुर्माना लगे। उन्होंने कहा कि केवल एक स्पष्ट और प्रभावी कानून ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। चार इंजन की सरकार के बावजूद कार्रवाई से बच रही भाजपाउन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के पास दिल्ली में चार इंजन वाली सरकार है एमसीडी, दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और अब सीएक्यूएम लेकिन इसकेबावजूद वह कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। आतिशी ने चुनौती दी कि अगर भाजपा मिडिल क्लास के साथ है, तो एक हफ्ते के भीतर कानून लाए, नहीं तो यह साफ हो जाएगा कि भाजपा की वाहन निर्माताओं और डीलर्स से मिलीभगत है। आम आदमी पार्टी का अल्टीमेटमअंत में आतिशी ने कहा कि यदि भाजपा चाहे तो कानून विधानसभा सत्र बुलाकर या अध्यादेश लाकर लाए, विपक्ष पूरा सहयोग करेगा। लेकिन अगरभाजपा ने कानून नहीं बनाया, तो जनता समझ जाएगी कि उनके हितों की रक्षा करने का दावा सिर्फ दिखावा है।
केरल हाईकोर्ट ने पर्यावरणीय नुकसान के मामले में मालवाहक जहाज को सशर्त जब्त किया9531 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश जारी करते हुए विझिनजाम बंदरगाह पर खड़े मालवाहक जहाज MSC AKITETA-II (IMO 9220847) को सशर्त जब्त करने का निर्देश दिया। यह आदेश 9531 करोड़ रुपये के मुआवजे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसे केरल सरकार ने समुद्री पर्यावरण को हुए गंभीर नुकसान और एक बड़ी जहाज दुर्घटना के मद्देनजर दायर किया है। 25 मई को जहाज डूबने से हुआ व्यापक समुद्री प्रदूषणयह कार्रवाई तब की गई जब इसी जहाज कंपनी से जुड़े एक अन्य जहाज MSC ELSA-III के खिलाफ आरोप लगाए गए। यह जहाज 25 मई कोकेरल के तट पर पलट गया और डूब गया था। डूबने के बाद जहाज से तेल और अन्य सामग्रियां समुद्र में रिसने लगीं, जिससे तटीय पर्यावरण को गहरानुकसान हुआ। इस हादसे से समुद्री जैव विविधता को भारी क्षति पहुंची और हजारों मछुआरों की आजीविका पर संकट मंडराने लगा। सरकार की ओर से 9531 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांगकेरल सरकार के पर्यावरण विभाग ने इस घटना को लेकर जहाज मालिकों और प्रबंधकों से 9531 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। सरकार का तर्क हैकि पर्यावरणीय विनाश, आजीविका की हानि, मछली उत्पादन में गिरावट और तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण के चलते यह राशि जायज है। कोर्ट का आदेशमामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम. ए. अब्दुल हकीम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक जहाज के मालिक या प्रबंधक पूरा मुआवजा नहीं भरतेया अदालत के समक्ष पर्याप्त गारंटी जमा नहीं करते, MSC AKITETA-II को बंदरगाह से नहीं छोड़ा जाएगा। हालांकि, अदालत ने इस दौरानजहाज को कार्गो गतिविधियों जैसे माल चढ़ाने और उतारने की अनुमति दी है, ताकि वाणिज्यिक गतिविधियों में अनावश्यक बाधा न उत्पन्न हो। एक ही कंपनी के दो जहाज, दो अलग हादसेयह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया क्योंकि जिस जहाज को अब जब्त किया गया है, वह उसी शिपिंग कंपनी का है, जिसके दूसरे जहाज MSC ELSA-III ने तट पर भारी नुकसान पहुंचाया। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि कंपनी की लापरवाही से यह स्थिति उत्पन्न हुई है और अब वहजवाबदेही से नहीं बच सकती। अदालत का सख्त रुख, पर्यावरण को नुकसान बर्दाश्त नहीं केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोपरि मानते हुए जहाज को रोकने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जब तक उचितकानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और मुआवजे को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक MSC AKITETA-II को रिहा नहीं किया जाएगा।