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आम आदमी पार्टी की अपील, सीलमपुर में इमारत गिरने की घटना पर जताया शोक, कार्यकर्ताओं को राहत कार्य में जुटने के निर्देश

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में शनिवार सुबह चार मंजिला इमारत के गिरने की घटना को आम आदमी पार्टी ने अत्यंत दुखद बताते हुए इसपर गहरी संवेदना व्यक्त की है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, नेता प्रतिपक्ष आतिशी और एमसीडी में विपक्ष के नेता अंकुश नारंगसहित कई नेताओं ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति शोक व्यक्त किया है। केजरीवाल की अपील, कार्यकर्ता प्रशासन की सहायता करेंइस घटना की सूचना मिलते ही अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह हादसा बेहद दुखद है और इसमें जान गंवाने वालों के परिजनोंके प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। उन्होंने कहा कि गली संकरी होने की वजह से राहत और बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करनापड़ रहा है। उन्होंने पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मौके पर जाकर प्रशासन को हरसंभव सहयोग प्रदान करें। आतिशी ने जताई संवेदना, राहत कार्य में सहयोग की अपीलदिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी इस हादसे को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने परिजन खोए हैं, उनके प्रति मैंसंवेदना प्रकट करती हूं। उन्होंने बताया कि इमारत एक तंग गली में स्थित थी, जिससे बचाव अभियान में परेशानी हो रही है। उन्होंने भी कार्यकर्ताओं सेप्रशासन की मदद करने की अपील की। अंकुश नारंग ने दी जानकारी, साझा किया वीडियोएमसीडी में ‘आप’ के नेता विपक्ष अंकुश नारंग ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर घटनास्थल का वीडियो साझा करते हुए जानकारी दी कि हादसा सुबह करीब 7 बजे हुआ। उन्होंने बताया कि चार मंजिला इमारत गिरने से करीब 12 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। अब तक दमकल विभाग औरस्थानीय लोगों की मदद से सात लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा जा चुका है। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। उन्होंने ‘आप’ कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मौके पर पहुंचें और हरसंभव सहायता करें। आप कार्यकर्ताओं की तत्परताघटना की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने लगे। पार्टी नेएकजुटता दिखाते हुए कहा कि इस कठिन समय में हम पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं।

बिहार की वोटर लिस्ट जांच पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाए गंभीर सवाल चुनाव आयोग की जांच प्रक्रिया पर सवाल

बिहार में इन दिनों मतदाता सूची की व्यापक जांच की जा रही है, जिसमें नागरिकता की पुष्टि के नाम पर वोटरों से प्रमाण मांगे जा रहे हैं। कांग्रेस नेताऔर वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने इस जांच को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यह तरीका न केवल असंवैधानिक है, बल्किलाखों नागरिकों के मताधिकार को छीन सकता है। 2003 के बाद जुड़े वोटर को ‘संदिग्ध’ मानना अनुचितसिंघवी ने बताया कि चुनाव आयोग 2003 से पहले मतदाता सूची में दर्ज नामों को सुरक्षित मान रहा है, लेकिन 2003 के बाद जुड़े वोटरों से उनकीनागरिकता साबित करने को कहा जा रहा है। भले ही वह व्यक्ति 15 वर्षों से लगातार मतदान करता आया हो, यदि वह दस्तावेज नहीं दिखा सका, तोउसका नाम हटा दिया जाएगा। प्रमाणों की जटिल मांग बना रही है मुश्किलइस प्रक्रिया में वोटरों से तीन तरह के कठिन दस्तावेज मांगे जा रहे हैं खुद का जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता का जन्म प्रमाणपत्र या दोनों के प्रमाणपत्र।सिंघवी ने कहा कि यह ग्रामीण, गरीब, प्रवासी, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए अत्यंत कठिन है, जिनके पास आमतौर पर ऐसे दस्तावेज नहीं होते। बिना कानून बदले शुरू हुई यह प्रक्रियासुप्रीम कोर्ट में सिंघवी ने तर्क दिया कि इस प्रकार की जांच किसी विधायी संशोधन के बिना नहीं की जा सकती। लेकिन चुनाव आयोग ने सिर्फ एकआंतरिक आदेश के आधार पर इतनी व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी, जो न्यायसंगत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले की अनदेखीसिंघवी ने कोर्ट को याद दिलाया कि पूर्व में शीर्ष अदालत कह चुकी है कि मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने से पहले कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिएयानी नोटिस, सुनवाई और उचित जांच। लेकिन बिहार में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा, जिससे लाखों वोटर बिना मौका दिए सूची से बाहर किए जा सकतेहैं। 5 करोड़ वोटर ‘संदिग्ध’, लोकतंत्र को खतराडॉ. सिंघवी के मुताबिक, बिहार में कुल 8 करोड़ वोटर हैं, जिनमें से 5 करोड़ को संदिग्ध घोषित कर दिया गया है। यदि इनमें से केवल 2 करोड़ भीवोट देने से वंचित रह जाते हैं, तो यह लोकतंत्र की गंभीर क्षति होगी। यह प्रक्रिया सबसे ज्यादा असर गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग परडालेगी। आधार और वोटर कार्ड भी नहीं मान्य? सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान में सभी जगह मान्य दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को नागरिकता के प्रमाण केतौर पर अस्वीकार किया जा रहा है। अब सिर्फ जन्म प्रमाणपत्र ही मान्य माना जा रहा है, जो हर किसी के पास नहीं होता। बाढ़ और पलायन के समय क्यों लागू हुई यह प्रक्रिया?सिंघवी ने यह भी प्रश्न उठाया कि जब बिहार के अनेक जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और लाखों लोग पलायन कर चुके हैं, ऐसे समय में इस प्रक्रिया कीशुरुआत क्यों की गई? क्या गरीब मजदूर अपनी जान बचाएं या दस्तावेज ढूंढें? सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांगसिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी नागरिक को उसकेसंवैधानिक मताधिकार से वंचित न किया जाए। यह मामला लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा है और अदालत को इसमें संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में बड़ी सफलता

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले मे सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है।शनिवार को 23 नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल मिलाकर 1.18 करोड़ रुपये काइनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में कई वरिष्ठ माओवादी कमांडर शामिल हैं। भीमा सहित कई शीर्ष माओवादी नेताओं का सरेंडरआत्मसमर्पण करने वालों में पोडियम भीमा उर्फ लोकेश का नाम खास तौर पर शामिल है, जो डिवीजनल कमेटी का सदस्य था। उस पर 8 लाख रुपयेका इनाम था और वह 2012 में कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण सहित कई बड़ी वारदातों में शामिल रहा है। इसके अलावा रमेश उर्फ कमलू, माओवादी कमांडर हिडमा का गार्ड भी सरेंडर करने वालों में शामिल है। आत्मसमर्पण से माओवादियों को गहरा झटकापुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठनों के लिए बड़ा झटका है, खासकर बस्तर जैसे इलाकों में जहां ये संगठनों कीगहरी पकड़ मानी जाती थी। आत्मसमर्पण करने वालों में एक डीवीसीएम, छह पीपुल्स पार्टी कमेटी सदस्य, चार एरिया कमेटी सदस्य और अन्य 12 निचले स्तर के कार्यकर्ता शामिल हैं। हिंसा छोड़ने के पीछे मोहभंग और गुटबाजी कारणपुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों ने माओवादी विचारधारा से मोहभंग, संगठन में बढ़ती गुटबाजी और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों सेतंग आकर हथियार डाले हैं। इनमें से कई माओवादी पीएलजीए की बटालियन नंबर 1 के सक्रिय सदस्य रहे हैं, जिसे माओवादियों की सबसे ताकतवरसैन्य इकाई माना जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की प्रतिक्रियामुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटनाक्रम को ‘बस्तर में बदलाव की लहर’ बताया। उन्होंने कहा कि अब गोलियों की जगह लोकतंत्र की आवाज गूंजरही है। उन्होंने बताया कि पिछले 15 महीनों में 1,521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। नारायणपुर में हाल ही में हुए आत्मसमर्पण को मिलाकरपिछले 24 घंटे में 45 नक्सली हिंसा छोड़ चुके हैं। पुनर्वास योजना के तहत मिलेगा सहयोगराज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को ₹50,000 की तत्काल आर्थिक सहायता दी गईहै। इसके अलावा उन्हें आवास, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। यह योजना माओवाद प्रभावित इलाकों मेंशांति स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

हिंदी को लेकर बोले पवन कल्याण, “तेलुगु मां है, हिंदी मौसी”, हैदराबाद में राजभाषा विभाग के कार्यक्रम में रखी राय

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण ने एक बार फिर हिंदी को लेकर अपनी भावनाएं स्पष्ट की हैं। शुक्रवार कोहैदराबाद में आयोजित राजभाषा विभाग के “दक्षिण संवाद” स्वर्ण जयंती समारोह में बोलते हुए उन्होंने हिंदी भाषा की भूमिका को राष्ट्रीय एकता केलिए अहम बताया। तेलुगु को बताया मां, हिंदी को मौसीभाजपा के सहयोगी पवन कल्याण ने भावनात्मक अंदाज में कहा, “अगर तेलुगु हमारी मां है, तो हिंदी हमारी मौसी (पेद्दम्मा) के समान है।” उन्होंने अपनेभाषण में इस बात पर बल दिया कि हिंदी न केवल भारत की भाषाओं को जोड़ती है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति, विशेषकर फिल्म और सांस्कृतिकक्षेत्रों में, सहयोग और संवाद का पुल भी बनती है। क्षेत्रीय भाषाएं महत्वपूर्ण, हिंदी एक सूत्रधारपवन कल्याण ने क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि इन भाषाओं की प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। लेकिन उन्होंने साथ ही यहभी जोड़ा कि हिंदी का ज्ञान राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग को आसान बनाता है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों को एक साझा पहचान मिलती है। हिंदी सीखना कोई खतरा नहीं, बल्कि अवसरउपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंदी भाषा सीखना किसी की स्थानीय या क्षेत्रीय पहचान को खतरे में डालने जैसा नहीं है। बल्कि यह नए अवसरों केद्वार खोलने और भारत के भीतर व्यापक संपर्क स्थापित करने में मदद करता है। उन्होंने कहा, “हिंदी भारत को जोड़ने वाली भाषा है,” और इसे एकता वप्रगति के सशक्त माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।

रोज़गार मेला,.पीएम मोदी ने वितरित किए 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र, 16वें संस्करण का आयोजन 47 स्थानों पर, पीएम मोदी नेवीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 12 जुलाई को देशभर के युवाओं को 16वें रोज़गार मेला के तहत 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र सौंपे। यहआयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया, जिसमें पीएम ने सुबह 11 बजे नव नियुक्त उम्मीदवारों को संबोधित किया। देशभर में 47 स्थानों पर हुआ आयोजनइस रोजगार मेले का आयोजन देश के 47 अलग-अलग स्थानों पर किया गया, जहां विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में नियुक्ति प्रक्रिया कोअंजाम दिया गया। इसमें रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, डाक विभाग, वित्तीय सेवा विभाग और श्रम मंत्रालय जैसेप्रमुख विभाग शामिल रहे। सरकारी सेवाओं को मिलेगी नई ऊर्जानई भर्तियों को देशभर के विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे न सिर्फ सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि शासन व्यवस्था को भीमजबूती मिलेगी। ये नियुक्तियां सरकारी विभागों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में सहायक होंगी। सरकार की महत्वाकांक्षी पहलरोज़गार मेला प्रधानमंत्री मोदी की उस राष्ट्रव्यापी पहल का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 22 अक्टूबर 2022 को की गई थी। इसका उद्देश्य देश केयुवाओं को व्यापक सरकारी नौकरी के अवसर देना और सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यबल की स्थिति को मजबूत करना है। अब तक इस पहल के अंतर्गतदेशभर में करीब 10 लाख नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं। युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का अवसररोज़गार मेला, भारत के युवाओं की क्षमताओं का दोहन करने और उन्हें संरचित करियर विकास का मार्ग देने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।यह पहल न केवल पारदर्शिता और दक्षता के सिद्धांतों पर आधारित है, बल्कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनने के लिए भी प्रेरित करती है। फेक विज्ञापन पर सरकार का स्पष्टीकरणसरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री की ओर से कोई ऐसी निवेश योजना नहीं है, जिसमें रोजाना ₹1.25 लाख की गारंटी दी जा रही हो।PIB फैक्ट चेक ने इस तरह के AI-जनित फर्जी विज्ञापनों को निराधार करार दिया है।

भारत में फैल रहा कोरोना का नया वेरिएंट XFG, जानिए कितना खतरनाक है और किन्हें है ज्यादा खतरा

भारत में कोरोना वायरस का नया वेरिएंट XFG धीरे-धीरे फैल रहा है। अब तक देशभर में इसके 206 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों से संक्रमण के केस सामने आए हैं। केवल मई महीने में 159 नए मामलों का सामनेआना विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। मध्य प्रदेश में बढ़ रहा संक्रमण, AIIMS की रिपोर्ट में खुलासाAIIMS भोपाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में XFG वेरिएंट तेज़ी से फैल रहा है। राज्य में लिए गए 44 कोविड नमूनों में से 28 (लगभग63%) में इस नए वेरिएंट की पुष्टि हुई है, जो राज्य के स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर संकेत है।कैसे बना XFG वेरिएंट और क्या है इसकी उत्पत्ति?XFG एक रिकॉम्बिनेंट वेरिएंट है, जो दो अलग-अलग वेरिएंट्स – LF.7 और LP.8.1.2 – के आपस में मिलकर बनने से उत्पन्न हुआ है। जब कोईव्यक्ति एक साथ दोनों वेरिएंट्स से संक्रमित होता है, तो वायरस के जीन मिलकर एक नया रूप ले लेते हैं। यह वेरिएंट ओमिक्रॉन परिवार का ही हिस्साहै और इसकी पहचान सबसे पहले कनाडा में हुई थी। वर्तमान में यह 38 देशों में फैल चुका है। कितना गंभीर है XFG वेरिएंट?अब तक सामने आए अधिकांश मामलों में XFG से संक्रमित लोगों में केवल हल्के लक्षण ही देखे गए हैं – जैसे गले में खराश, सामान्य सर्दी-जुकाम, खांसी, हल्का बुखार और थकान। गंभीर लक्षण बहुत कम मामलों में सामने आए हैं, और वे भी अधिकतर उन लोगों में जिन्होंने पहले से कोई गंभीरबीमारी झेली हो या जिनकी इम्युनिटी कमजोर हो। अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार ने इस वेरिएंट को ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ की श्रेणी में नहीं रखा है। XFG के सामान्य लक्षणइस वेरिएंट से संक्रमित लोगों में जो लक्षण देखे जा रहे हैं, उनमें शामिल हैं: लगातार खांसी, नाक बहना या बंद होना, गले में खराश, छींक आना, हल्का बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और कुछ मामलों में सांस लेने में कठिनाई या निमोनिया जैसे लक्षण। इलाज और टीकाकरण की भूमिकाXFG के लिए विशेष इलाज नहीं है, लेकिन चूंकि यह कोविड-19 का ही एक रूप है, इसलिए मौजूदा एंटीवायरल दवाएं, ऑक्सीजन थेरेपी औरलक्षणों के हिसाब से दिए जाने वाले इलाज से राहत मिल रही है। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहींपड़ी है, खासकर उन्हें जिन्होंने वैक्सीन लगवा रखी है। क्या टीका XFG से बचा सकता है?स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में उपलब्ध कोवीशील्ड और कोवैक्सिन सहित उनके बूस्टर डोज, इस वेरिएंट से गंभीर लक्षणों की संभावनाको कम करने में सक्षम हैं। डॉ. उज्ज्वल पारख के अनुसार, वैक्सीन लेने वालों को हल्का संक्रमण तो हो सकता है, लेकिन उनके शरीर की T-Cell इम्यूनिटी गंभीर रूप से प्रभावित होने से बचाती है। कौन रहें सतर्क?इस वेरिएंट से ज्यादा खतरा 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर या अस्थमा जैसी बीमारियों सेजूझ रहे लोगों को है। ऐसे लोगों को सतर्क रहने और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तीन मंजिला इमारत ढही, दो की मौत, कई घायल-जनता मजदूर कॉलोनी में सुबह 7:30 बजे हुआ हादसा, राहत कार्य जारी

शनिवार सुबह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम थाना क्षेत्र स्थित जनता मजदूर कॉलोनी में एक तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे केसमय इमारत में कई लोग मौजूद थे, जिनमें से 11 लोग मलबे में दब गए। घटना सुबह करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है।8 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, 2 की मौतदमकल विभाग ने अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया है। वहीं, दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।अभी भी कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। संकरी गलियों में चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशनघटनास्थल की तंग गलियां और घनी आबादी राहत कार्य को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। फायर ब्रिगेड की 7 गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं और स्थानीयपुलिस के साथ राहत दल मलबा हटाने में जुटे हैं। हालांकि, हादसे के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इमारतकाफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। सीलमपुर की जनता कॉलोनी में हुआ हादसादिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, यह दुर्घटना सीलमपुर क्षेत्र की गली नंबर 5, जनता कॉलोनी में हुई। लगभग 35 गज के क्षेत्र में बनी यह तीन मंजिलाइमारत करीब 15 साल पुरानी थी। इमारत में दो परिवार रहते थे, जिनमें तीन महिलाएं और तीन बच्चे शामिल थे। NDRF टीम मौके पर मौजूदएनडीआरएफ की टीम भी राहत कार्य में शामिल हो गई है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक 8 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है, जबकि कुछ के अब भी फंसे होने की आशंका है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त संदीप लांबा ने बताया कि राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है और हरसंभावित प्रयास किया जा रहा है। पहले भी हो चुका है ऐसा हादसाइससे पहले इसी वर्ष अप्रैल में दिल्ली के दयालपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मुस्तफाबाद इलाके में भी एक चार मंजिला इमारत गिर गई थी, जिसमें चारलोगों की मौत हुई थी और दर्जनों घायल हुए थे। बार-बार हो रहे इन हादसों ने जर्जर इमारतों की निगरानी और समय पर कार्रवाई की आवश्यकता परफिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

आम आदमी पार्टी का आरोप, नंगली डेयरी की झुग्गियों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी में बीजेपीनेता प्रतिपक्ष आतिशी का बयान – ‘जहां झुग्गी-वहीं मकान’ का वादा भूल गई भाजपा, अब झुग्गियां उजाड़ रही है

आम आदमी पार्टी ने मटियाला विधानसभा क्षेत्र के नंगली डेयरी स्थित झुग्गी बस्ती को हटाने की तैयारी को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखाहमला बोला है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बीजेपी सरकार पहलेमद्रासी कैंप, जेलरवाला बाग, भूमिहीन कैंप और वजीरपुर जैसी बस्तियों को तोड़ चुकी है और अब नंगली डेयरी के जेजे क्लस्टर को निशाना बना रहीहै।एमसीडी ने झुग्गीवासियों को दिया नोटिसआतिशी ने बताया कि भाजपा शासित एमसीडी ने दो दिन पहले नंगली डेयरी के करीब 250–300 झुग्गी परिवारों को नोटिस दिया है, जिसमें पांचदिन के भीतर दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। ऐसा न करने पर झुग्गियों को अवैध अतिक्रमण बताते हुए गिराने की चेतावनी दी गई है। चुनाव से पहले दिए वादे, अब तोड़ रही घरआम आदमी पार्टी ने भाजपा पर चुनावों से पहले झूठे वादे करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नेताओं ने झुग्गियों में प्रवास कर लोगों के साथ खानाखाया, खेल खेले और ‘जहां झुग्गी-वहीं मकान’ के कार्ड बांटे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खुद कहा था कि दिल्ली में एक भी झुग्गी नहीं तोड़ीजाएगी। लेकिन सत्ता में आते ही उन्हीं बस्तियों को तोड़ा जा रहा है, जिन्हें बचाने का वादा किया गया था। 15-20 साल से रह रहे हैं लोग, सरकारी सुविधाएं भी मिलती रही हैंआतिशी ने बताया कि नंगली डेयरी की यह बस्ती पिछले डेढ़-दो दशक से अस्तित्व में है। दिल्ली सरकार की एजेंसी डूसिब (DUCCB) द्वारा यहांगली-नालियों और शौचालयों का निर्माण किया गया है, जो आज भी नियमित रूप से मेंटेन किए जाते हैं। ऐसे में झुग्गीवासियों को अतिक्रमणकारीकहना पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है। ‘जहां झुग्गी, वहीं मैदान’ बना रही है भाजपा – आतिशीनेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी ने ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ देने के बजाय ‘जहां झुग्गी, वहां मैदान’ बनाने का अभियान छेड़ दिया है।भाजपा को गरीबों से नफरत है, और उसी के तहत एक-एक कर सभी झुग्गी बस्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार कीजिम्मेदारी है कि विस्थापन से पहले वैकल्पिक आवास दे। झुग्गी बचाने के लिए हर मंच पर लड़ेगी ‘आप’आतिशी ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली के गरीबों के साथ मजबूती से खड़ी है। नंगली डेयरी के जेजे क्लस्टर को तोड़ने से रोकने के लिए पार्टीअदालत, विधानसभा या सड़कों पर संघर्ष करेगी। बीजेपी को इन झुग्गियों को उजाड़ने नहीं दिया जाएगा।

जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू, संसद में लाया जाएगा प्रस्ताव, हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पर नकदी बरामदगी और आंतरिकजांच में दोषी पाए जाने के बाद उठे सवाल

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया तेज कर दीहै। इसके लिए लोकसभा के कई सदस्यों से हस्ताक्षर एकत्र किए जा चुके हैं। यह संकेत है कि प्रस्ताव को संसद के निचले सदन में रखा जा सकता है।आग लगने की घटना के बाद नकदी से भरी बोरियों से हुआ खुलासामार्च 2025 में दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने की घटना हुई थी। इस दौरान उनके आवास के बाहरी कक्ष से भारी मात्रामें जले हुए नोट और नकदी से भरी बोरियां बरामद हुई थीं। उस समय वह दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत थे। घटना के बाद उन्हें स्थानांतरित करइलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया। जांच में पाया गया स्टोर रूम पर ‘गुप्त नियंत्रण’सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए थे। जांच समितिने निष्कर्ष निकाला कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्य उस स्टोर रूम पर ‘‘गुप्त या सक्रिय नियंत्रण’’ रखते थे, जहां से नकदी बरामद हुई थी।यह तथ्य उनके खिलाफ गंभीर कदाचार को प्रमाणित करता है। इस्तीफा न देने पर मामला राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास पहुंचाजस्टिस वर्मा ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए किसी भी प्रकार के अनियमितता से इनकार किया था। जब उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा देने सेइनकार कर दिया, तब सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंप दिया। 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र में प्रस्ताव लाने की तैयारीसंसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार संसद के आगामी सत्र, जो 21 जुलाई से शुरू हो रहा है, उसमें जस्टिस वर्मा को हटानेका प्रस्ताव पेश करेगी। लोकसभा में इस तरह के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं, जबकि राज्यसभा में प्रस्तावलाने के लिए 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

कर्नाटक के जंगल में गुफा में रह रही रूसी महिला और बेटियों को पुलिस ने किया रेस्क्यू, रामतीर्थ पहाड़ी पर मिला पूरा परिवार, बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क

खतरनाक गुफा में छिपा था रहस्यकर्नाटक के गोकर्ण में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक रूसी महिला और उसकी दो छोटी बेटियां रामतीर्थ पहाड़ी की एक दुर्गमऔर खतरनाक गुफा में रह रही थीं। 9 जुलाई की शाम करीब पांच बजे पुलिस की गश्त के दौरान यह रहस्य उजागर हुआ। गोकर्ण पुलिस को जंगल मेंएक अस्थायी झोंपड़ी में महिला और बच्चियां मिलीं, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। आध्यात्मिक एकांत की तलाश में गोवा से गोकर्ण पहुंची महिलापुलिस पूछताछ में महिला की पहचान 40 वर्षीय नीना कुटीना के रूप में हुई, जो अपनी 6 वर्षीय बेटी प्रेमा और 4 वर्षीय बेटी एमा के साथ गुफा मेंरह रही थीं। कुटीना ने बताया कि वह गोवा से गोकर्ण आध्यात्मिक शांति की तलाश में आई थीं और शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर ध्यान औरसाधना के लिए जंगल को अपना ठिकाना बना लिया था। बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर चिंताहालांकि, अधिकारियों ने इलाके की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस तरह के वातावरण को बच्चों के लिए बेहद असुरक्षित माना। रामतीर्थपहाड़ी पहले भी भूस्खलन की चपेट में आ चुकी है और वहां जहरीले सांपों और अन्य खतरनाक वन्य जीवों का खतरा बना रहता है। महिला का वीजा और पासपोर्ट विवादकाउंसलिंग के बाद पुलिस ने महिला और बच्चों को सुरक्षित पहाड़ी से नीचे उतारा। पहले उन्हें एक स्थानीय साध्वी के आश्रम में रखा गया, लेकिनजब उनसे पासपोर्ट और वीजा की जानकारी मांगी गई तो उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी। अंततः सर्च ऑपरेशन के दौरान महिला के दस्तावेज बरामदकिए गए। 2017 से भारत में रह रही है महिलादस्तावेजों के अनुसार, कुटीना अप्रैल 2017 में वैध कमर्शियल वीजा पर भारत आई थीं और बाद में नेपाल होकर भारत में पुनः प्रवेश किया। वह2018 से लगातार भारत में रह रही हैं, जबकि उनके पासपोर्ट पर दर्ज वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी।अब महिला और बेटियां सुरक्षात्मक हिरासत मेंवीजा उल्लंघन के कारण महिला और उसके बच्चों को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कारवार स्थित महिला स्वागत केंद्र में शिफ्टकिया गया है, जहां उन्हें सुरक्षा में रखा गया है। पुलिस अधीक्षक, उत्तर कन्नड़ ने बेंगलुरु स्थित एफआरआरओ (FRRO) के साथ संपर्क कर उन्हेंवापस रूस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही महिला और बच्चों को बेंगलुरु में संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेश किया जाएगा।